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Entrepreneur Srinivas Raju discussing engineering education, skills and career readiness during an interview.
'4 साल की इंजीनियरिंग समय की बर्बादी?' अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़े निवेशक श्रीनि राजू के बयान से छिड़ी नई बहस

भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई को लंबे समय से बेहतर करियर और स्थिर भविष्य का रास्ता माना जाता रहा है। हर साल लाखों छात्र IIT-JEE जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला पाने का सपना देखते हैं। लेकिन हाल ही में प्रसिद्ध उद्यमी और प्राइवेट इक्विटी निवेशक श्रीनि राजू के एक बयान ने डिग्री बनाम स्किल्स की बहस को फिर से तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में चार साल की इंजीनियरिंग डिग्री छात्रों को नौकरी के लिए उतना तैयार नहीं करती, जितना व्यावहारिक कौशल और लगातार सीखने की क्षमता करती है। कौन हैं श्रीनि राजू? चिंतलपति श्रीनिवास राजू भारतीय आईटी उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट इक्विटी निवेश के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने NIT कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका की Utah State University से सिविल और एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग डिग्री पर क्या बोले श्रीनि राजू? 'रॉ टॉक्स विद वीके' पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान श्रीनि राजू ने कहा कि आज के समय में कई छात्र वर्षों तक डिग्री हासिल करने में समय लगाते हैं, लेकिन उनके पास वास्तविक नौकरी के लिए जरूरी प्रैक्टिकल स्किल्स की कमी होती है। उनका मानना है कि सिर्फ B.Tech की डिग्री किसी व्यक्ति के जॉब-रेडी होने का पैमाना नहीं हो सकती। 12वीं पास और B.Tech ग्रेजुएट्स पर कंपनी का प्रयोग श्रीनि राजू ने अपनी कंपनी के एक पुराने प्रयोग का जिक्र करते हुए बताया कि एक समूह में 30 इंटरमीडिएट (12वीं पास) छात्रों को और दूसरे समूह में 30 B.Tech ग्रेजुएट्स को रखा गया। दोनों समूहों को एक जैसी ट्रेनिंग एक साल तक दी गई। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दोनों की उत्पादकता का मूल्यांकन किया गया। उनके अनुसार, परिणामों में कोई बड़ा अंतर नहीं दिखा। इसी अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या चार साल की डिग्री हमेशा व्यावहारिक दुनिया में अतिरिक्त लाभ देती है। शिक्षा व्यवस्था में क्या कमी है? श्रीनि राजू का मानना है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा अभी भी किताबी ज्ञान पर आधारित है। कई संस्थानों में छात्रों को वह सिखाया जाता है जो पाठ्यक्रम में लिखा है, जबकि उद्योग की बदलती जरूरतें और वास्तविक कार्य अनुभव उससे अलग हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिक्षा को बेकार नहीं मानते, बल्कि शिक्षा और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर देते हैं। आज के जॉब मार्केट में क्या सबसे ज्यादा जरूरी है? श्रीनि राजू के अनुसार, बदलते रोजगार बाजार में सिर्फ डिग्री या सर्टिफिकेट काफी नहीं हैं। छात्रों को इन क्षमताओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए: प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स लगातार सीखने की क्षमता स्वयं से नई चीजें सीखने की आदत प्रैक्टिकल नॉलेज और इंडस्ट्री एक्सपोजर बदलती तकनीकों के साथ खुद को अपडेट रखना IIT-JEE में असफल होने वालों को क्या सलाह दी? उन्होंने छात्रों से कहा कि अगर वे IIT-JEE जैसी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते हैं, तो इसे जीवन का अंत न समझें। मेहनत और सही कौशल के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। डिग्री बनाम स्किल्स: क्या है सच्चाई? विशेषज्ञों का मानना है कि डिग्री और स्किल्स दोनों का अपना महत्व है। डिग्री बुनियादी ज्ञान और अवसरों के दरवाजे खोलती है, जबकि व्यावहारिक कौशल किसी व्यक्ति को वास्तविक कार्यक्षेत्र में सफल बनाते हैं। ऐसे में दोनों के बीच संतुलन बनाना ही सबसे बेहतर रास्ता माना जाता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Gold jewellery and silver bars displayed as precious metal prices decline in Indian markets.
Gold Silver Price: 800 रुपये तक सस्ता हुआ सोना, चांदी में भी बड़ी गिरावट, जानिए आपके शहर का ताजा भाव

नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और शांति की उम्मीद बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। इससे महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना बढ़ी है, जिसका असर अब कीमती धातुओं के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। एमसीएक्स (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। सोने की कीमत में करीब 800 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी 1,300 रुपये से अधिक फिसल गई। MCX पर क्या रहे भाव? 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,53,091 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। बुधवार सुबह इसकी शुरुआत 1,52,800 रुपये से हुई और शुरुआती कारोबार में यह 1,52,301 रुपये तक लुढ़क गया। सुबह करीब 10:45 बजे सोना 541 रुपये की गिरावट के साथ 1,52,550 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी की कीमत शुरुआती कारोबार में 1,328 रुपये गिरकर 2,48,777 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। बाद में यह 202 रुपये की कमजोरी के साथ 2,49,903 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड करती दिखाई दी। प्रमुख शहरों में सोने का ताजा रेट शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,51,250 ₹1,38,650 ₹1,13,470 मुंबई ₹1,51,100 ₹1,38,500 ₹1,13,320 कोलकाता ₹1,51,100 ₹1,38,500 ₹1,13,320 चेन्नई ₹1,53,060 ₹1,40,300 ₹1,17,500 लखनऊ ₹1,51,250 ₹1,38,650 ₹1,13,470 कानपुर ₹1,51,250 ₹1,38,650 ₹1,13,470 पटना ₹1,51,150 ₹1,38,550 ₹1,13,370 जयपुर ₹1,51,250 ₹1,38,650 ₹1,13,470 इंदौर ₹1,51,150 ₹1,38,550 ₹1,13,370 भोपाल ₹1,51,150 ₹1,38,550 ₹1,13,370 सर्राफा बाजार में भी नरमी घरेलू सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना: ₹270 सस्ता होकर ₹1,51,100 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना: ₹250 गिरकर ₹1,38,500 प्रति 10 ग्राम 18 कैरेट सोना: ₹210 की गिरावट के साथ ₹1,13,320 प्रति 10 ग्राम चांदी: ₹2,65,000 प्रति किलो पर स्थिर विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कम होता है तथा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Investor reviewing mutual fund SIP returns chart showing long-term wealth creation despite market volatility.
Mutual Fund SIP का जादू: बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद 15 साल में मिला 18.5% तक का शानदार रिटर्न

मुंबई: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ महीनों से भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और लंबे समय तक किया गया निवेश बाजार की अस्थिरता के असर को काफी हद तक कम कर देता है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड की कई इक्विटी स्कीमों ने पिछले 15 वर्षों में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। कुछ योजनाओं में सालाना कंपाउंड ग्रोथ रेट (CAGR) 18.5 प्रतिशत तक पहुंचा है। 1. ICICI Prudential Midcap Fund यह फंड मिड-कैप कंपनियों में निवेश करता है, जिनमें भविष्य में बड़े बाजार लीडर बनने की क्षमता होती है। AUM: ₹7,789 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 18.50% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹48.41 लाख 2. ICICI Prudential Value Fund यह स्कीम वैल्यू इन्वेस्टिंग रणनीति अपनाती है और ऐसी कंपनियों में निवेश करती है जिनकी बाजार कीमत उनकी वास्तविक क्षमता से कम मानी जाती है। AUM: ₹58,954 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 16.44% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹39.14 लाख 3. ICICI Prudential Multicap Fund यह फंड लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में संतुलित निवेश करता है। AUM: ₹17,675.80 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 15.65% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹36.12 लाख 4. ICICI Prudential Large & Mid Cap Fund यह स्कीम बड़ी और उभरती कंपनियों के मिश्रण में निवेश करती है। AUM: ₹30,147 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 15.36% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹35.08 लाख 5. ICICI Prudential Focused Equity Fund यह फंड सीमित लेकिन मजबूत कंपनियों के पोर्टफोलियो पर आधारित है। AUM: ₹16,147 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: लगभग 15% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹32.81 लाख SIP क्या है? SIP यानी Systematic Investment Plan म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक अनुशासित तरीका है। इसके जरिए निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि निवेश कर सकते हैं। यह छोटी रकम से निवेश शुरू करने और लंबे समय में संपत्ति बनाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अस्थायी गिरावट के दौरान भी नियमित SIP जारी रखने से निवेशकों को लंबे समय में बेहतर औसत लागत और कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Oil storage tanks symbolizing India's plan to strengthen crude reserves and fuel security.
अब नहीं मचेगा पेट्रोल-डीजल और LPG पर हाहाकार? चीन की राह पर चल सकता है भारत, सरकार बना रही बड़ी रणनीति

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी थीं। महंगे तेल के कारण देश का आयात बिल बढ़ा, चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ा और रुपये की कमजोरी भी देखने को मिली। अब भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए भारत चीन की तर्ज पर बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार घरेलू रिफाइनरियों को अधिक मात्रा में कच्चे तेल का भंडार तैयार करने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने की नीति पर काम कर सकती है। चीन की रणनीति से मिला सबक ईरान संकट के दौरान चीन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीदने के बजाय अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) का इस्तेमाल किया। इससे उसे कीमतों में उछाल का असर कम झेलना पड़ा। अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में सप्लाई बाधित होने या कीमतों में अचानक वृद्धि की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित न हों। फिलहाल सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रखती हैं रिफाइनरियां वर्तमान में भारतीय रिफाइनरियां अपनी परिचालन जरूरतों के लिए लगभग 15 दिनों का कच्चा तेल स्टोर करती हैं। नई योजना के तहत इस क्षमता को बढ़ाकर लगभग 30 दिनों की मांग के बराबर किया जा सकता है। इसके लिए करीब 150 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत होगी, क्योंकि भारत की दैनिक खपत लगभग 5 मिलियन बैरल है। 60 हजार करोड़ रुपये तक का खर्च यदि रिफाइनरियों को अपने भंडार को दोगुना करना पड़ता है, तो मौजूदा कीमतों के आधार पर केवल अतिरिक्त कच्चे तेल की खरीद पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा: नए स्टोरेज टैंक बनाने होंगे। हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। इसी कारण कुछ रिफाइनरियां इस प्रस्ताव को लेकर चिंता भी जता सकती हैं। पोर्ट्स के पास बनाए जा सकते हैं स्टोरेज विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार रिफाइनरियों को बंदरगाहों के पास स्टोरेज सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इससे दो बड़े फायदे होंगे: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का व्यापार आसान होगा। भारत भविष्य में क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। सिंगापुर का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि विशाल तेल भंडारण क्षमता ने उसे एशिया के प्रमुख तेल व्यापारिक केंद्रों में शामिल कर दिया है। रणनीतिक भंडार में भारत अभी काफी पीछे यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक विभिन्न देशों के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार इस प्रकार थे: चीन: 1,397 मिलियन बैरल अमेरिका: 413 मिलियन बैरल जापान: 263 मिलियन बैरल भारत: केवल 21 मिलियन बैरल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत अभी कई बड़े देशों से काफी पीछे है। क्या इससे पेट्रोल और LPG की कीमतों पर असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार होगा, तो अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान देश को तुरंत महंगा तेल खरीदने की मजबूरी कम होगी। इससे: पेट्रोल और डीजल की सप्लाई स्थिर रह सकती है। LPG की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी। आयात बिल और रुपये पर दबाव कम किया जा सकेगा। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि, यह एक दीर्घकालिक योजना है और इसके परिणाम आने में समय लग सकता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Samrat Chaudhary
पटना नहीं, अब पाटलीपुत्र कहिए जनाब, बिहार के सीएम ने कर दिया ऐलान

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना का नाम अब पाटलीपुत्र होगा। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। हालांकि यह नया नाम नहीं है, बल्कि राजधानी पटना को पहले पाटलीपुत्र के नाम से ही जाना जाता था। 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान पाटलीपुत्र से बदलकर पटना किया गया। भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी मुख्यमंत्री ने फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित प्रखंड सहयोग सह जनकल्याण शिविर में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने बिहार के विकास, कानून-व्यवस्था, उद्योग, किसानों के हित और राजधानी पटना के भविष्य को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 'बड़ा पटना' की अवधारणा पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजधानी का विकास केवल वर्तमान शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके ऐतिहासिक गौरव को भी नई पहचान दी जाएगी। साथ ही नए और आधुनिक टाउनशिप विकसित कर आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों, उद्योग और कानून-व्यवस्था पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को अधिक मुआवजा देने के लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने बताया कि आपदा, संकट या शादी-विवाह जैसी परिस्थितियों में जरूरतमंद परिवारों को तत्काल सहायता देने के लिए जिलाधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं।  बिहार में अपराधियों के लिए जगह नही कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उद्योगों के विस्तार, नए टाउनशिप और बढ़ते बजट के कारण बिहार तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है और आने वाले वर्षों में राज्य की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Stock market investors tracking Sensex and Nifty gains amid rising crude oil prices and weak rupee
Stock Market Update: रुपये में गिरावट और महंगे कच्चे तेल के बीच भी शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला

घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। रुपये में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और एशियाई बाजारों में गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह के कारोबार में BSE Sensex 400 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि NIFTY 50 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। बाजार का हाल सुबह 10 बजे तक: सेंसेक्स 348.65 अंक यानी 0.46% बढ़कर 75,747.37 पर पहुंच गया निफ्टी 102.70 अंक यानी 0.43% चढ़कर 23,792.30 पर ट्रेड करता दिखा पिछले सत्र में भी बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई थी। किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी? सेंसेक्स में सबसे ज्यादा तेजी इन कंपनियों के शेयरों में देखी गई: Adani Ports and Special Economic Zone Infosys Tata Consultancy Services Power Grid Corporation of India HCL Technologies Tech Mahindra Maruti Suzuki India आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। किन शेयरों में आई गिरावट? दूसरी ओर कुछ दिग्गज कंपनियों के शेयर दबाव में रहे: State Bank of India Asian Paints UltraTech Cement Reliance Industries इनमें करीब 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। रुपया फिर कमजोर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 29 पैसे टूटकर 95.93 तक पहुंच गया। कमजोर रुपये का असर आमतौर पर आयात लागत और विदेशी निवेश धारणा पर पड़ता है। कच्चे तेल में फिर तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड: 107 डॉलर प्रति बैरल तेजी: 1.22% कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं। विदेशी निवेशकों का रुख बदला विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को: 187 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे यह लगातार सात दिनों की बिकवाली के बाद पहली खरीदारी रही, जिसने बाजार सेंटीमेंट को मजबूत किया। एशियाई बाजारों में दबाव एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल रहा: दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3% से ज्यादा टूटा जापान का निक्केई 1% से ज्यादा गिरा हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग भी लाल निशान में रहा चीन का शंघाई कंपोजिट हल्की बढ़त में दिखा इसके विपरीत अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे।  

surbhi मई 15, 2026 0
Gautam Adani during a business event amid reports of SEC settlement discussions in the US
गौतम अडानी को अमेरिका से बड़ी राहत? SEC केस सेटलमेंट के लिए 18 मिलियन डॉलर देने पर सहमति की रिपोर्ट

अडानी ग्रुप के खिलाफ अमेरिकी जांच मामले में बड़ा अपडेट Gautam Adani और उनके भतीजे Sagar Adani से जुड़े अमेरिकी कानूनी मामले में बड़ी राहत मिलने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (U.S. Securities and Exchange Commission) अडानी ग्रुप से जुड़े केस को सेटल करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, गौतम अडानी और सागर अडानी इस मामले को निपटाने के लिए कुल 18 मिलियन डॉलर यानी लगभग 172.7 करोड़ रुपये देने पर सहमत हुए हैं। क्या है पूरा मामला? SEC ने नवंबर 2024 में अडानी ग्रुप से जुड़े कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि भारत में सोलर प्रोजेक्ट्स से जुड़े ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी गई और बाद में अमेरिकी निवेशकों से यह जानकारी छिपाई गई। हालांकि, अडानी ग्रुप लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। समूह का कहना है कि उसके किसी भी अधिकारी पर अमेरिकी Foreign Corrupt Practices Act के तहत औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। कौन कितना देगा? फेडरल कोर्ट में दाखिल प्रस्तावित समझौते के मुताबिक: गौतम अडानी: 6 मिलियन डॉलर सागर अडानी: 12 मिलियन डॉलर यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह अडानी ग्रुप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी राहत मानी जाएगी। क्या अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट भी हटाएगा आरोप? रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि United States Department of Justice भी गौतम अडानी के खिलाफ कुछ धोखाधड़ी संबंधी आरोप वापस लेने पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो अडानी ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में वापसी आसान हो सकती है और कंपनी अपने वैश्विक विस्तार की रणनीति को फिर गति दे सकती है। अडानी ग्रुप का क्या कहना है? Adani Group ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि: समूह या उसकी कंपनियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है Adani Green Energy इस कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है कंपनी कानूनों और नियामकीय मानकों का पालन करती है कितना बड़ा है अडानी साम्राज्य? अडानी ग्रुप का कारोबार कई प्रमुख सेक्टर्स में फैला हुआ है: पोर्ट्स एयरपोर्ट्स एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक समूह माना जाता है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार: गौतम अडानी की कुल संपत्ति: 109 अरब डॉलर 2026 में नेटवर्थ में बढ़ोतरी: 24.5 अरब डॉलर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति दुनिया के अमीरों की सूची में 17वें स्थान पर

surbhi मई 15, 2026 0
Oil barrels with rising price chart symbolizing crude surge and India’s resilient economic growth outlook
$130 तक पहुंचे कच्चे तेल के बावजूद मजबूत रहेगी भारत की अर्थव्यवस्था: S&P का भरोसा

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि अगर इस वित्त वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती है, तब भी भारत की आर्थिक रफ्तार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में भी भारत करीब 6.3 प्रतिशत की दर से विकास करता रहेगा, जो वैश्विक स्तर पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत वृद्धि दर मानी जाएगी। भारत की साख पर नहीं पड़ेगा असर S&P Global Ratings ने साफ किया है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत की ‘सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग’ पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी मुख्य वजह भारत का मजबूत वित्तीय प्रबंधन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता बताई गई है। सामान्य हालात में 7.1% ग्रोथ का अनुमान एजेंसी के डायरेक्टर (सॉवरेन रेटिंग्स) YeeFarn Phua के अनुसार, यदि कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, तेल की कीमत 130 डॉलर तक पहुंचने की स्थिति में भी भारत की ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर है। क्या हैं संभावित जोखिम? S&P ने यह भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा एक बड़ा जोखिम बन सकती है। यदि ईंधन और उर्वरक जैसे उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ईरान संकट से बढ़ी तेल की कीमतें पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। एक समय पर कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसकी एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत और गैस का करीब एक-तिहाई हिस्सा संभालता है। हालांकि, फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है, जिसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक संकट में भी मजबूत भारत रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। मजबूत नीतिगत ढांचा और वित्तीय अनुशासन इसे अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में बनाए हुए हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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