Canada

Donald Trump announces 50% tariffs on Canadian imports, raising fears of a new US-Canada trade war
कनाडा पर ट्रंप का टैरिफ अटैक, 50% आयात शुल्क का ऐलान; भड़क सकता है नया ट्रेड वॉर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का ऐलान किया है। यह नया नियम अगले 30 दिनों में लागू होगा। इस फैसले के बाद कनाडा से अमेरिका आने वाली शराब, सीमेंट, हॉकी स्टिक समेत कई उपभोक्ता और औद्योगिक उत्पाद महंगे हो सकते हैं। हालांकि, ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, महत्वपूर्ण खनिज और मछली जैसे कुछ प्रमुख उत्पादों को इस नए शुल्क से बाहर रखा गया है। ट्रंप ने बताए टैरिफ लगाने के तीन कारण राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि कनाडा लंबे समय से अमेरिकी कंपनियों के साथ निष्पक्ष व्यापार नहीं कर रहा है। उन्होंने टैरिफ लगाने के पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए— कनाडा की डेयरी नीति विदेशी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाती है। अमेरिकी शराब ब्रांडों की बिक्री पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब ऐसे व्यापारिक नियमों को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके उद्योगों के लिए नुकसानदायक हों। कनाडा ने जताया विरोध कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी फैसले की आलोचना करते हुए इसे अमेरिका-कनाडा-मेक्सिको व्यापार समझौते (USMCA) का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि कनाडा बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। वहीं, ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कहा कि यदि अमेरिका पीछे नहीं हटता, तो कनाडा भी "टैरिफ के बदले टैरिफ" की नीति अपनाएगा। पहले से जारी है टैरिफ विवाद अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव नया नहीं है। जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर विवाद लगातार बढ़ा है। कनाडा पहले ही कई अमेरिकी उत्पादों पर 25% जवाबी शुल्क लगा चुका है। अमेरिका भी स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर पहले से 15% से 50% तक टैरिफ वसूल रहा है। विशेषज्ञों ने जताई चिंता व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि USMCA के तहत आने वाले उत्पादों पर भी टैरिफ लगाने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में गंभीर तनाव पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अगले 30 दिनों में अमेरिका और कनाडा के बीच कोई समझौता नहीं हुआ, तो जवाबी कार्रवाई और तेज हो सकती है। इसका असर उत्तर अमेरिकी अर्थव्यवस्था, उद्योग, सप्लाई चेन और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Canada Festival Firing
कनाडा के फेस्टिवल में अंधाधुंध फायरिंग, 2 की मौत; कई घायल, टोरंटो में दहशत

टोरंटो, एजेंसियां। कनाडा के सबसे बड़े लैटिन सांस्कृतिक आयोजनों में से एक 'साल्सा ऑन सेंट क्लेयर' स्ट्रीट फेस्टिवल के दौरान शनिवार रात अचानक हुई गोलीबारी से अफरा-तफरी मच गई। घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम पांच अन्य लोग गोली लगने से घायल हुए हैं। फायरिंग के बाद हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।   भीड़भाड़ वाले इलाके में चली गोलियां   पुलिस के मुताबिक, घटना स्थानीय समयानुसार रात करीब 8 बजे टोरंटो के मिडटाउन इलाके में हुई, जहां फेस्टिवल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। शुरुआती तौर पर इसे 'एक्टिव शूटर' की घटना माना गया, लेकिन बाद में जांच में सामने आया कि दो लोगों के बीच हुई गोलीबारी में आसपास मौजूद कई लोग भी इसकी चपेट में आ गए। घटनास्थल से दो हथियार बरामद किए गए हैं।   हमलावरों की तलाश जारी   फायरिंग के बाद पूरे इलाके को घेर लिया गया और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अब तक किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हुई है। टोरंटो पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और टोरंटो की मेयर ओलिविया चाउ ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
Morocco Canada
FIFA World Cup 2026: राउंड ऑफ 16 का रोमांच शुरू, आज मोरक्को-कनाडा से होगी नॉकआउट जंग

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। राउंड ऑफ 32 के मुकाबले समाप्त होने के बाद अब 16 टीमें नॉकआउट चरण के तीसरे दौर यानी राउंड ऑफ 16 में आमने-सामने होंगी। इस चरण की शुरुआत शनिवार (4 जुलाई) को मोरक्को और कनाडा के मुकाबले से होगी। दोनों टीमें जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी।   राउंड ऑफ 32 में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराया, जबकि ब्राजील ने जापान को 2-1 से मात दी। फ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से हराया, वहीं इंग्लैंड ने डीआर कांगो को 2-1 से शिकस्त दी। सबसे बड़े उलटफेर में जर्मनी और नीदरलैंड जैसी दिग्गज टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। पराग्वे ने जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में हराया, जबकि मोरक्को ने नीदरलैंड को पेनल्टी में मात देकर सभी को चौंका दिया।   भारतीय समयानुसार भारतीय समयानुसार राउंड ऑफ 16 के प्रमुख मुकाबलों में 4 जुलाई को कनाडा बनाम मोरक्को, 5 जुलाई को पराग्वे बनाम फ्रांस, 6 जुलाई को ब्राजील बनाम नॉर्वे और मेक्सिको बनाम इंग्लैंड के मैच खेले जाएंगे। इसके बाद 7 जुलाई को पुर्तगाल बनाम स्पेन, अमेरिका बनाम बेल्जियम और अर्जेंटीना बनाम मिस्र की टक्कर होगी, जबकि 8 जुलाई को स्विट्जरलैंड और कोलंबिया आमने-सामने होंगे।   इस विश्व कप में पहली बार 48 टीमों ने हिस्सा लिया है। ग्रुप चरण के बाद 32 टीमों ने नॉकआउट में प्रवेश किया और अब केवल 16 टीमें खिताब की दौड़ में बची हैं। राउंड ऑफ 16 के बाद क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे।   लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे  व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके पीछे काइलियन एम्बाप्पे 6 गोल के साथ दूसरे और अर्लिंग हालैंड तथा हैरी केन 5-5 गोल के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। ऐसे में अब हर मुकाबला न केवल टीमों के लिए बल्कि स्टार खिलाड़ियों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिहाज से भी बेहद अहम होगा।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Donald Trumph G7
जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे ट्रंप, वैश्विक मुद्दों पर होगी अहम चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि वह इस महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित किया जाएगा। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है जब ईरान को लेकर अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस परिसर में आयोजित यूएफसी विश्व चैंपियनशिप मुकाबलों में शामिल होने के बाद सीधे फ्रांस रवाना होंगे। उन्होंने इस आयोजन को अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक बताया। पश्चिम एशिया को लेकर बढ़े हैं मतभेद हाल के दिनों में ट्रंप ने Germany, France और United Kingdom जैसे प्रमुख सहयोगी देशों की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि ये देश पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य रणनीति का पर्याप्त समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसी कारण शुरुआत में उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और Israel द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद यह पहला अवसर होगा जब ट्रंप कई वैश्विक नेताओं से आमने-सामने मुलाकात करेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर होगी चर्चा जी-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें United States, Canada, France, Germany, Italy, Japan और United Kingdom शामिल हैं। इसके अलावा European Union भी इस समूह का हिस्सा है। सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसके फैसले आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Unknown जून 4, 2026 0
CSIS report highlights Khalistani extremism and foreign interference concerns in Canada
कनाडाई खुफिया रिपोर्ट 2025: खालिस्तानी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, भारत समेत कई देशों पर हस्तक्षेप के आरोप

कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट ने खालिस्तानी उग्रवाद, विदेशी हस्तक्षेप और कनाडा की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई गंभीर चेतावनियां दी हैं। यह रिपोर्ट कनाडाई संसद में पेश की गई, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्व अब भी हिंसक विचारधारा और गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। खालिस्तानी नेटवर्क पर CSIS की सख्त टिप्पणी रिपोर्ट में “कनाडा-बेस्ड खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट” (CBKE) का जिक्र करते हुए कहा गया है कि ये समूह कनाडा में सक्रिय हैं और अपने नेटवर्क के जरिए: फंड जुटाने प्रचार-प्रसार करने समर्थकों को संगठित करने जैसी गतिविधियों में लगे हुए हैं। CSIS का मानना है कि इन संगठनों के कुछ सदस्य कनाडाई नागरिक भी हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संस्थाओं का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भले ही हाल के वर्षों में कोई बड़ा आतंकी हमला सामने नहीं आया हो, लेकिन इन संगठनों की विचारधारा और नेटवर्किंग क्षमता भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। एयर इंडिया फ्लाइट 182 विस्फोट की 40वीं बरसी का जिक्र रिपोर्ट में एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम विस्फोट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। 1985 में हुए इस हमले में 329 लोगों की मौत हुई थी यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला माना जाता है इसके पीछे खालिस्तानी उग्रवादी तत्वों का हाथ माना गया था CSIS ने इस घटना को याद दिलाते हुए चेतावनी दी कि ऐसी विचारधाराएं अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। विदेशी हस्तक्षेप: भारत समेत कई देशों पर आरोप रिपोर्ट का एक अहम हिस्सा विदेशी हस्तक्षेप से जुड़ा है। इसमें भारत, चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान को प्रमुख रूप से चिन्हित किया गया है। भारत को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि: भारत ने कनाडा के राजनेताओं, पत्रकारों और इंडो-कनाडाई समुदाय के प्रभावशाली लोगों के साथ संपर्क बनाए इन संबंधों का उपयोग अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया गया “ट्रांसनेशनल रिप्रेशन” (TNR) के तहत निगरानी और दबाव बनाने जैसी गतिविधियों का आरोप लगाया गया रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य भारत सरकार के आलोचकों को चुप कराना और समुदाय में डर का माहौल बनाना हो सकता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि बदलती वैश्विक राजनीति में कई देश इस तरह के प्रभाव विस्तार के प्रयास करते हैं, और यह केवल एक देश तक सीमित नहीं है। बदले राजनीतिक हालात और नए संकेत यह रिपोर्ट 2025 के खुफिया आकलन पर आधारित है, लेकिन इसके बाद कनाडा की राजनीति में बदलाव आया है। नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद अधिकारियों के सुर कुछ बदले हुए नजर आए हैं। कनाडाई एजेंसियों ने हाल में कहा है कि: कनाडा में हुई हालिया हिंसक घटनाओं में भारत की सीधी संलिप्तता के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं ट्रांसनेशनल गतिविधियों की जांच जारी है, लेकिन हर मामले में विदेशी एजेंट की भूमिका साबित नहीं होती रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के अधिकारियों ने भी इस बात को दोहराया है कि जांच के निष्कर्ष समय के साथ बदल सकते हैं। निज्जर हत्याकांड के बाद बढ़ा तनाव भारत और कनाडा के संबंध पहले से ही संवेदनशील रहे हैं, खासकर हरदीप सिंह निज्जर की 2023 में हुई हत्या के बाद। कनाडा ने इस हत्या में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता का आरोप लगाया था भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें “राजनीतिक” बताया इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया खालिस्तान मुद्दा: अलग-अलग नजरिया रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आती है कि: भारत खालिस्तान अलगाववाद को अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानता है वहीं कनाडा में खालिस्तान के समर्थन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत एक वैध राजनीतिक गतिविधि माना जाता है यही अंतर दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद की बड़ी वजह है।  

surbhi मई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0