CBSE Exam

Rahul Gandhi criticizes CBSE re-evaluation fees, raising concerns over student expenses after exam results
'गलती CBSE की, सजा छात्रों को': री-इवैल्यूएशन फीस को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर निशाना

लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की पोस्ट-रिजल्ट फीस व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में होने वाली संभावित त्रुटियों को सुधारने के लिए भी छात्रों से शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यदि सीबीएसई की ओर से मूल्यांकन में गलती होती है तो उसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने लिखा कि स्कैन कॉपी, री-टोटलिंग और री-इवैल्यूएशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए छात्रों से अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा है। फीस व्यवस्था पर उठाए सवाल राहुल गांधी के अनुसार, डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए प्रति विषय 100 रुपये, री-टोटलिंग के लिए प्रति पेपर 100 रुपये और री-इवैल्यूएशन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये शुल्क निर्धारित है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने के लिए करीब 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि लाखों छात्र पुनर्मूल्यांकन और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं तो इससे बोर्ड को कितनी आय प्राप्त हो रही है। 'शिक्षा को व्यवसाय बनाया जा रहा' राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय के रूप में संचालित किया जाता है तो व्यवस्थागत त्रुटियों का बोझ छात्रों पर डाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि उनके समय, आत्मविश्वास और भविष्य पर भी असर पड़ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली में होने वाली संभावित त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को अपने अंकों की दोबारा जांच कराने की आवश्यकता पड़ती है। CBSE ने दिया स्पष्टीकरण इस बीच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच सीबीएसई ने कहा है कि मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। बोर्ड ने एक बयान जारी कर कहा कि उसके सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में चिन्हित तकनीकी कमजोरियों की निगरानी की जा रही है और विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम सिस्टम को और मजबूत बनाने में जुटी है। सीबीएसई के अनुसार, पहचानी गई कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और पोर्टल की सुरक्षा को और बेहतर बनाने की प्रक्रिया जारी है। बोर्ड ने संभावित खामियों की जानकारी देने वाले जागरूक नागरिकों और एथिकल हैकर्स का भी आभार व्यक्त किया है। शिक्षा व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद परीक्षा मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन शुल्क और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्ष जहां छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का मुद्दा उठा रहा है, वहीं सीबीएसई का कहना है कि वह मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रहा है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Rahul Gandhi and Dharmendra Pradhan clash over CBSE and NEET exam controversy during political debate
CBSE और NEET विवाद पर आमने-सामने आए राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान

सीबीएसई और नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाये हैं। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को चुनावी हार से हताश बताया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- राहुल गांधी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि CBSE ने पहले ही इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और सभी प्रक्रियाएं भारत सरकार की खरीद नीति के अनुसार पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राहुल गांधी पर हमला करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “लगातार चुनावी हार के कारण राहुल गांधी हताश नजर आते हैं। उन्होंने SIR का विरोध किया, EVM का विरोध किया और डिजिटल इंडिया का भी विरोध किया। ऐसा लगता है कि वे भारत की वैज्ञानिक प्रगति के साथ खड़े नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की बयानबाजी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगती है। ‘यह राजनीति करने का समय नहीं’, शिक्षा मंत्री की अपील धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण छात्रों और अभिभावकों में पहले से ही तनाव है और इस समय राजनीति करने से स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से यदि किसी प्रकार की असुविधा हुई है, तो मैं स्वयं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। लेकिन अभी सबसे जरूरी बात यह है कि छात्रों का मानसिक तनाव और न बढ़े।” केंद्रीय मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान देने से बचें, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़े। राहुल गांधी ने उठाये CBSE कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी चयन पर सवाल राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिक्षा मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हमला करने से सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान जी, आप मुझ पर जितना चाहें हमला कर सकते हैं, लेकिन इससे आप अपने अपराधों से बरी नहीं होंगे और न ही यह मुझे 18.5 लाख बच्चों के लिए जवाब मांगने से रोक पाएगा।” राहुल गांधी ने CBSE के OSM कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी सवाल उठाये। उन्होंने पूछा कि यह कॉन्ट्रैक्ट COEMPT नाम की कंपनी को क्यों दिया गया, जबकि उसी कंपनी का पुराना नाम Globarena पहले से विवादों में रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इस कंपनी का चयन किसके आदेश पर किया गया, बैकग्राउंड जांच क्यों नहीं हुई और कंपनी के प्रबंधन तथा केंद्र सरकार के बीच क्या संबंध हैं। राहुल गांधी बोले- दोनों ही स्थिति में सरकार जिम्मेदार राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार ने बैकग्राउंड जांच की थी और फिर भी कंपनी को काम दिया गया, तो यह गंभीर लापरवाही है। वहीं अगर जांच नहीं की गई, तो यह और भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही परिस्थितियों में सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार को वास्तव में छात्रों की चिंता होती, तो इतने बड़े विवाद के बाद शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही पद से हटा दिया गया होता। परीक्षा विवाद पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी CBSE और NEET से जुड़े विवाद पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इस मुद्दे को और राजनीतिक बना दिया है। एक तरफ विपक्ष परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसी भी अनियमितता को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi मई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

Deepshikha जून 4, 2026 0