Celebrity Family

Divyanka Tripathi and Vivek Dahiya celebrate parenthood after welcoming twin baby boys
शादी के 10 साल बाद माता-पिता बने दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया, जुड़वा बेटों के जन्म से घर में गूंजी किलकारी

टीवी इंडस्ट्री के सबसे पसंदीदा कपल्स में से एक Divyanka Tripathi और Vivek Dahiya के घर खुशियों ने दस्तक दी है। शादी के करीब एक दशक बाद यह स्टार कपल माता-पिता बन गया है। दिव्यांका और विवेक को जुड़वा बेटों का आशीर्वाद मिला है, जिसकी जानकारी खुद विवेक दहिया ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस के साथ साझा की। ‘मेरे करण अर्जुन आ गए’, विवेक ने खास अंदाज में दी खुशखबरी विवेक दहिया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक प्यारा पोस्टर साझा करते हुए जुड़वा बेटों के जन्म की घोषणा की। पोस्टर में दो बच्चों की तस्वीर के साथ लिखा था कि भगवान ने उनकी खुशियों को दोगुना कर दिया है। पोस्ट शेयर करते हुए विवेक ने लिखा कि उनका लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है और अब उनकी जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो गई है। उन्होंने बॉलीवुड अंदाज में खुशी जाहिर करते हुए लिखा, "मेरे करण अर्जुन आ गए"। पहली बार माता-पिता बने दिव्यांका और विवेक दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया ने हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा कर फैंस को सरप्राइज दिया था। इसके बाद दोनों ने कई मैटरनिटी फोटोशूट, बेबी शॉवर और गोद भराई समारोह की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की थीं। कपल ने अपनी प्रेग्नेंसी की खबर साझा करते हुए बताया था कि शादी के 10 साल बाद उनकी जिंदगी में यह नई खुशियां आई हैं। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत अध्याय बताया था। प्रेग्नेंसी की खबर पर ऐसा था कपल का रिएक्शन एक इंटरव्यू में दिव्यांका ने बताया था कि जब उन्हें पहली बार प्रेग्नेंसी की जानकारी मिली, तो इस खबर पर विश्वास करने में थोड़ा समय लगा। वहीं विवेक दहिया ने कहा था कि यह एहसास ऐसा था जैसे किसी ने उनकी जिंदगी की कहानी अचानक बदल दी हो। शुरुआत में उन्हें हैरानी हुई, फिर जिम्मेदारियों को लेकर चिंता भी हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह एहसास खुशी में बदल गया। फैंस और सितारे दे रहे बधाई जैसे ही विवेक दहिया ने यह खुशखबरी साझा की, सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लग गया। टीवी इंडस्ट्री के कई सितारों और लाखों फैंस ने कपल को माता-पिता बनने की शुभकामनाएं दीं। दिव्यांका और विवेक की जोड़ी लंबे समय से टीवी दर्शकों की पसंदीदा रही है और अब उनके परिवार में दो नए सदस्यों के आने से फैंस भी बेहद खुश नजर आ रहे हैं। नई जिम्मेदारियों के साथ शुरू हुआ जीवन का नया अध्याय जुड़वा बेटों के जन्म के साथ दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया की जिंदगी का एक नया सफर शुरू हो गया है। शादी के 10 साल बाद मिली इस खुशी ने उनके परिवार और चाहने वालों के बीच उत्साह का माहौल बना दिया है।  

surbhi मई 26, 2026 0
Rebel Wilson and Ramona Agruma with newborn baby Rose Estelle and daughter Royce Lillian
Rebel Wilson बनीं दूसरी बार मां: पत्नी Ramona Agruma के साथ बेटी ‘रोज एस्टेल’ का स्वागत, पहली झलक की शेयर

हॉलीवुड अभिनेत्री Rebel Wilson ने अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर बड़ी खुशखबरी साझा की है। उन्होंने अपनी पत्नी Ramona Agruma के साथ दूसरी बेटी का स्वागत किया है। कपल ने अपनी नवजात बच्ची का नाम Rose Estelle रखा है और सोशल मीडिया पर उसकी पहली तस्वीर भी शेयर की है। परिवार में आई नई खुशी 4 मई 2026 को इस खुशखबरी की घोषणा करते हुए कपल ने बताया कि अब उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह उनके लिए बेहद खास और भावुक पल है। पोस्ट के साथ शेयर की गई तस्वीर में उनकी बड़ी बेटी Royce Lillian अपनी नवजात बहन को गोद में लिए नजर आ रही हैं, जो फैंस को बेहद पसंद आ रही है। “Our little angels” – मां का इमोशनल पोस्ट रिबेल विल्सन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी दोनों बेटियों की तस्वीर साझा करते हुए उन्हें “Our little angels” बताया। इस तस्वीर में दोनों बहनों की बॉन्डिंग साफ झलकती है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया। पहले भी सरोगेसी से बनी थीं मां कपल की पहली बेटी Royce Lillian का जन्म नवंबर 2022 में सरोगेसी के जरिए हुआ था। अब दूसरी बेटी के आगमन के साथ उनका परिवार और भी पूरा हो गया है। प्यार से शादी तक का सफर रिबेल और रमौना का रिश्ता जून 2022 में सार्वजनिक हुआ था। फरवरी 2023 में सगाई मार्च 2023 में ऑस्कर पार्टी में पहली रेड कार्पेट अपीयरेंस नवंबर 2024 में इटली में शादी उनकी लव स्टोरी काफी तेजी से आगे बढ़ी और अब वे दो बच्चों के साथ खुशहाल पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। फैंस दे रहे बधाइयां जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर फैंस और सेलेब्रिटीज ने कपल को बधाइयों से भर दिया। रिबेल विल्सन की यह नई पारी उनके जीवन के सबसे खूबसूरत अध्यायों में से एक मानी जा रही है।  

surbhi मई 6, 2026 0
बंगाल जीत के बाद झारखंड पर सियासी नजर, क्या बनेगा ‘अंतिम किला’?

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत के बाद पूर्वी भारत की राजनीति का समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है। इस बदलाव के बीच झारखंड अब एकमात्र ऐसा प्रमुख राज्य बचा है, जहां हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन की सरकार कायम है। ऐसे में झारखंड को “पूर्वी भारत का अंतिम किला” माना जा रहा है।   झारखंड में बढ़ी राजनीतिक हलचल बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य चारों ओर से भाजपा या एनडीए शासित राज्यों से घिरा हुआ है बिहार, ओडिशा और अब बंगाल में भी भाजपा का प्रभाव बढ़ चुका है। इससे राज्य की मौजूदा सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की चर्चा है।   क्या शुरू होगी ‘राजनीतिक घेराबंदी’? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब झारखंड में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकती है। वहीं JMM और उसके सहयोगी दल इसे चुनौती के रूप में देख रहे हैं। झामुमो नेताओं का दावा है कि वे राज्य में विपक्ष को मजबूती देने का काम करेंगे।   गठबंधन के सामने चुनौतियां झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन झामुमो, कांग्रेस और राजद के सामने सबसे बड़ी चुनौती एकजुटता बनाए रखना है। राजनीतिक हलकों में दल-बदल, अंदरूनी मतभेद और केंद्र के साथ टकराव जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में सरकार की स्थिरता भी अहम सवाल बनी हुई है।   आदिवासी वोट बैंक और विकास मुद्दे विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है, जो Hemant Soren की ताकत भी है। वहीं बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार के प्रदर्शन से ही जनता का समर्थन तय होगा।   2029 की राजनीति में अहम भूमिका झारखंड की 14 लोकसभा सीटें 2029 के आम चुनावों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यदि मौजूदा सरकार मजबूत रहती है, तो विपक्ष को पूर्वी भारत में आधार मिलेगा। वहीं अगर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो भाजपा का पूर्वी विस्तार और मजबूत हो सकता है।

Unknown मई 6, 2026 0
Bobby Deol
धर्मेंद्र के निधन के बाद बदले रिश्तों के मायने, बॉबी देओल ने परिवार पर की भावुक बात

मुंबई, एजेंसियां। दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद देओल परिवार एक बड़े भावनात्मक दौर से गुजर रहा है। हाल ही में उनके बेटे बॉबी देओल ने एक इंटरव्यू में पिता के जाने के बाद परिवार में आए बदलावों और रिश्तों की नई परिभाषा पर खुलकर बात की।    पिता की कमी और समय का एहसास बॉबी देओल ने बताया कि पिता के जाने के बाद उन्हें सबसे ज्यादा इस बात का एहसास हुआ कि समय सबसे कीमती होता है। उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें पछतावा होता है कि काश उन्होंने अपने पिता के साथ और ज्यादा वक्त बिताया होता। अब उनके लिए परिवार, खासकर पत्नी और बच्चों के साथ समय बिताना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। उनके मुताबिक, सफलता का असली मतलब अपनों के साथ बिताया गया समय है, न कि सिर्फ करियर या शोहरत।   बहनों से बढ़ी नजदीकियां बॉबी ने अपनी सौतेली बहनों ईशा देओल और अहाना देओल के साथ रिश्तों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना ने पूरे परिवार को और करीब ला दिया है। पहले जहां दूरी महसूस होती थी, अब सभी एक-दूसरे का सहारा बन रहे हैं। बॉबी के मुताबिक, दुख के समय में कभी-कभी गलतफहमियां भी होती हैं, लेकिन समय के साथ रिश्ते और मजबूत हो जाते हैं।   परिवार में आई भावनात्मक परिपक्वता उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना का असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ा है। उनके बच्चों में अब जीवन को लेकर अधिक समझ और परिपक्वता आई है। परिवार के सभी सदस्य इस नुकसान से अपने-अपने तरीके से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।   यादों में जिंदा हैं धर्मेंद्र बॉबी देओल अक्सर सोशल मीडिया पर अपने पिता के पुराने वीडियो और यादों को देखते हैं। उनके अनुसार, धर्मेंद्र की सादगी और गर्मजोशी आज भी उन्हें महसूस होती है। धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को हुआ था। उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत ‘पद्म विभूषण’ से भी सम्मानित किया गया। उनके जाने के बाद भी उनका परिवार और फैंस उन्हें हमेशा याद करते रहेंगे।

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 4, 2026 0