Champat Rai

Anil Mishra
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में

लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज हो गई है और अब इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से पूछताछ पूरी कर ली है। उनके बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की घटनाओं में प्रशासनिक लापरवाही या अन्य स्तर पर किसी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं। सूत्रों के अनुसार, विवेचना पूरी होने के बाद डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।   जांच के दौरान जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. अनिल मिश्रा के पास मंदिर के गणना कक्ष की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि शिकायतें मिलने के बावजूद समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे चोरी की घटनाओं को रोकने में विफलता रही। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में कहीं कोई गंभीर चूक तो नहीं हुई।   इस मामले में पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एक पत्र भी चर्चा में आया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चढ़ावे की गणना के लिए तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में बिना अनुमति बदलाव किया गया और आवश्यक हस्ताक्षर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।   पुलिस पूछताछ में क्या निकला ? पुलिस पूछताछ में छह आरोपियों ने कथित तौर पर चढ़ावा चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है, जबकि दो आरोपी स्वयं को निर्दोष बता रहे हैं। जांच के दौरान कुछ सोना-चांदी और नकदी भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही, मुख्य आरोपी बताए जा रहे राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू की संपत्तियों और उसके प्रभाव क्षेत्र की भी जांच की जा रही है।   जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली अधिक प्रभावी होती, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। मामले में एसआईटी अपनी रिपोर्ट संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत कर चुकी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Stock Market
Stock Market: गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी 24,239 पर बंद

मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 443 अंक फिसलकर 77,709 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 96 अंक टूटकर 24,239 पर आ गया। पूरे दिन के कारोबार में निवेशकों ने खासकर प्राइवेट बैंक, ऑटोमोबाइल और आईटी शेयरों में बिकवाली की, जबकि सरकारी बैंक और फार्मा सेक्टर के शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली।   बाजार पर सबसे अधिक दबाव निजी बैंकिंग शेयरों से आया। पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही। इसके साथ ही ऑटो और आईटी सेक्टर में भी मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।   वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों का भी घरेलू बाजार पर असर पड़ा। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भारी गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग में तेजी दर्ज की गई। वहीं, पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट रही, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचना, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इन परिस्थितियों में निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी।   गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 964 अंक चढ़कर 78,151 पर और निफ्टी 261 अंक की बढ़त के साथ 24,334 पर बंद हुआ था। हालांकि, सोमवार को वैश्विक और घरेलू कारकों के दबाव ने बाजार की दिशा बदल दी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Former Ram Temple Trust General Secretary Champat Rai speaks on the alleged donation irregularities and questions SBI's cash room security procedures.
राम मंदिर चंदा विवाद: चंपत राय का पहला बयान, बोले- SBI ने अपने ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया

अयोध्या: राम मंदिर में कथित चंदा गड़बड़ी मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। विशेष जांच दल (SIT) को दिए गए लिखित बयान में उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बैंक ने कैश रूम से जुड़े अपने ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया, जिससे लापरवाही की स्थिति बनी। SBI की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंपत राय ने अपने बयान में कहा कि बैंक के कैश रूम (चेस्ट रूम) में प्रवेश और निकास के दौरान कर्मचारियों की तलाशी लेना अनिवार्य होता है। इसके अलावा बैंक कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में जेब नहीं होनी चाहिए, ताकि नकदी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया। शुरुआत में कर्मचारियों को जेब वाली यूनिफॉर्म दी गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। राय का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन होता, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। 'बैंक ने अपने ही नियमों की अनदेखी की' चंपत राय ने सवाल उठाया कि जब सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश पहले से तय थे, तो उन्हें लागू क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों की सतर्कता से संभावित गड़बड़ियों को समय रहते रोका जा सकता था। ट्रस्ट में हुए बड़े बदलाव चंदा विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया गया है, जबकि प्रशासक गोपाल राव को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही ट्रस्ट ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति जल्द ही नए सीईओ के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगी। आठ गिरफ्तारियां, लाखों रुपये बरामद जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 79.85 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है। मामले की जांच अभी भी एसआईटी की निगरानी में जारी है। '45 साल का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी' चंपत राय ने कहा कि उन्होंने ट्रस्ट की इच्छा का सम्मान करते हुए अब तक इस मामले पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ चुकी है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा, "मैं 1991 से अयोध्या में सेवा कर रहा हूं। मेरा 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। मुझे विश्वास है कि जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।" जांच जारी राम मंदिर चंदा विवाद की जांच फिलहाल एसआईटी कर रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी किस पर तय होती है। तब तक मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Congress leader Digvijaya Singh addressing the media over the Ayodhya Ram Mandir Trust meeting and alleged donation irregularities.
राम मंदिर ट्रस्ट बैठक के बाद कांग्रेस का हमला, दिग्विजय सिंह ने VHP-RSS और SIT जांच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे और चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठाए और विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया। ट्रस्ट की बैठक पर उठाए सवाल पीटीआई के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने कहा कि ट्रस्ट की बैठक का परिणाम पहले से तय था। उनके मुताबिक, बैठक में केवल कुछ इस्तीफे स्वीकार किए गए, जबकि पूरे मामले की गंभीरता के अनुरूप कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे। चंपत राय की भूमिका पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के करीबी रहे हैं और उन्हें VHP से RSS की भूमिका में लाया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान चंपत राय की क्या भूमिका थी। दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान गोली लगने वाले कार्यकर्ता संतोष दुबे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके योगदान को भुला दिया गया, जबकि कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने वालों की बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। VHP और RSS पर साधा निशाना दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह वैचारिक रूप से VHP और RSS से असहमत हैं। उनका आरोप है कि ये संगठन लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना में विश्वास नहीं करते। उन्होंने कहा कि भारत सभी नागरिकों का देश है और किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है। SIT जांच की निष्पक्षता पर सवाल कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन का मामला कई वर्षों से सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए SIT का गठन किया गया है, लेकिन इसमें शामिल अधिकारियों को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो, ताकि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जांच जारी राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन मामले की जांच फिलहाल SIT कर रही है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ चल रही है और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार जारी है।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Govind Dev Giri
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सवालों पर भड़के ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष, इंटरव्यू रोकने की हुई कोशिश

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में जांच तेज होने के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का एक वीडियो चर्चा में है। एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पूछे जाने पर वह नाराज हो गए। इस दौरान उनके समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकार का माइक हटाने और इंटरव्यू रोकने की भी कोशिश की। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य होने पर कोषाध्यक्ष ने सवालों का जवाब दिया।   जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन गिनती से किया किनारा संवाददाता ने जब गोविंद देव गिरी से पूछा कि बतौर कोषाध्यक्ष क्या इस पूरे मामले में उनकी भी जिम्मेदारी बनती है, तो उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के हर सदस्य की जिम्मेदारी होती है और उनकी भी जिम्मेदारी है। हालांकि इस्तीफे के सवाल पर उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा कि उनका दानपात्र (हुंडी) में होने वाली नकदी की गिनती से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट के खातों में आने वाले धन का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है।   चोरी मामले में अब तक दो इस्तीफे और आठ गिरफ्तारियां राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद अब तक दो लोगों ने इस्तीफा दिया है, जबकि पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप चुका है और जांच आगे बढ़ रही है।   अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद सामने आया था मामला यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया था। शुरुआत में ट्रस्ट ने आरोपों से इनकार किया था, लेकिन बाद में चोरी की पुष्टि होने पर एसआईटी जांच गठित की गई। जांच के दौरान ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की गई। फिलहाल पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Krishna Mohan
राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल, चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन को मिली महासचिव की जिम्मेदारी

अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। दोनों ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद छोड़े थे।   कृष्ण मोहन को सौंपी गई नई जिम्मेदारी   ट्रस्ट ने चंपत राय के स्थान पर कृष्ण मोहन को नई जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।   चढ़ावा मामले की जांच जारी   बैठक के बाद ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है। इस संबंध में गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच कर रहा है और ट्रस्ट ने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है।   पारदर्शिता पर ट्रस्ट का जोर   ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि राम भक्तों की आस्था सर्वोपरि है और मंदिर के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखी जाएगी। साथ ही दान और चढ़ावे से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust members during a meeting in Ayodhya announcing Krishna Mohan as interim General Secretary.
राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: अंतरिम महासचिव बने कृष्ण मोहन, बोले- दोषियों को मिलेगी सख्त सजा

अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। सोमवार को हुई ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिए गए। यह फैसला मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच लिया गया है। अंतरिम महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन का पहला बयान कार्यभार संभालने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि उन्हें नए महासचिव की नियुक्ति तक अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "जो कुछ भी हुआ है, उससे हम सभी बेहद दुखी हैं। इससे केवल ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं भी आहत हुई हैं।" कृष्ण मोहन ने स्वीकार किया कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कुछ कमियां थीं, जिनका कुछ लोगों ने कथित तौर पर फायदा उठाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन खामियों को दूर कर व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ट्रस्ट की छवि बहाल करना पहली प्राथमिकता अंतरिम महासचिव ने कहा कि हालिया घटनाक्रम से ट्रस्ट की साख प्रभावित हुई है और लोगों के मन में सवाल पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। महंत कमल नयन दास ने दी जानकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक में कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व महासचिव चंपत राय बैठक में उपस्थित नहीं थे, जबकि गोपाल राव को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। चंपत राय ने जांच पूरी होने तक पद छोड़ना उचित समझा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य पूरे घटनाक्रम से दुखी हैं। उनके अनुसार, मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है, जिसने ऐसी स्थिति पैदा होने दी। उन्होंने बताया कि चंपत राय का मानना था कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक उनके लिए महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने इस्तीफा दिया। स्वामी गोविंद देव गिरि ने यह भी बताया कि वरिष्ठ विधिवेत्ता के. पारासरन ने ट्रस्ट के संविधान का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी पदाधिकारी का इस्तीफा सौंपते ही प्रभावी माना जाता है। समय से पहले बुलाई गई थी बैठक ट्रस्ट की यह बैठक निर्धारित कार्यक्रम से पहले बुलाई गई थी। बैठक में वरिष्ठ संतों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और आध्यात्मिक नेताओं ने भाग लिया। इस दौरान ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे, पारदर्शिता और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ऐसे समय स्वीकार किए गए हैं, जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के मामले की जांच जारी है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगी तथा तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
SIT officials investigating the alleged donation theft case at Ayodhya Ram Temple, with CCTV footage under review during the probe.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, कपड़ों-जूतों में छिपाए जाते थे नोट; चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के दान की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी कथित रूप से नकदी अपने कपड़ों, जेबों और यहां तक कि जूतों में छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश करते थे। हालांकि, जांच में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की चांदी की ईंटें और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं। CCTV फुटेज में सामने आईं 70 संदिग्ध घटनाएं एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं चिन्हित की गईं, जिनमें गिनती कक्ष के अंदर कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मौकों पर कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए देखा गया। सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी खामियां एसआईटी की रिपोर्ट में मंदिर के दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आई प्रमुख कमियां इस प्रकार हैं— गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी। कर्मचारियों को निजी सामान अंदर ले जाने से रोकने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। कई दानपात्रों की नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जाता था, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई। मूल्यवान चढ़ावे के दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। छह मुख्य आरोपी चिन्हित, आठ गिरफ्तार प्रारंभिक जांच में एसआईटी ने छह लोगों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके नाम उजागर किए हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा शामिल हैं। अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों ने लगभग 78.94 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा 4 जून को गिनती कक्ष से करीब 2.25 लाख रुपये और बरामद हुए थे। एसआईटी के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिसकी वित्तीय जांच जारी है। ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित एसआईटी ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को खारिज किया है, जिनमें चांदी की ईंटें और मंदिर के आभूषण गायब होने की बात कही जा रही थी। जांच में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर के सभी आभूषण और मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने मीडिया के सामने आभूषणों का प्रदर्शन भी किया और स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। विस्तृत जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच अवधि बढ़ाई गई उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को गठित एसआईटी के कार्यकाल को 1 जुलाई को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया था। अब विस्तृत जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Ram Janmabhoomi Trust
चढ़ावा चोरी मामले के बीच राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर मंथन

अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में आठ लोगों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों पर लगे आरोपों के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। अस्वस्थ होने के बावजूद उन्होंने बैठक में हिस्सा लिया और घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर भरोसा भी जताया।   बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के त्यागपत्रों पर विचार करना है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक की शुरुआत करते हुए दोनों के इस्तीफों पर चर्चा का प्रस्ताव रखा। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद रिक्त है।   बैठक में ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्य मौजूद हैं  जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष स्वामी परमानंद, कृष्णमोहन और स्वामी गोविंद देव गिरी बैठक में शामिल हुए, जबकि नृपेंद्र मिश्र और वरिष्ठ अधिवक्ता के. पारासरन वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उत्तर प्रदेश सरकार के अपर प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए। संजय प्रसाद को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है, जिस पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है।   क्या है मामला? गौरतलब है कि 5 जून को पहली बार चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया था। इसके बाद 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया और अब तक जांच के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Meeting of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust in Ayodhya amid discussions over alleged donation fund irregularities and key administrative decisions.
चंदा चोरी मामला: राम मंदिर ट्रस्ट की आज अहम बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर हो सकता है फैसला

अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार (6 जुलाई) को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले की जांच के बीच आयोजित इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, दोनों के इस्तीफों के साथ-साथ विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के मठ मणिराम छावनी में आयोजित होगी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने सभी नियमित और पदेन सदस्यों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। वर्चुअली शामिल हो सकते हैं अध्यक्ष सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होने की संभावना है। वहीं वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन भी स्वास्थ्य कारणों से वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग ले सकते हैं। बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा? बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर विचार किया जा सकता है— महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के सौंपे गए इस्तीफे। दान राशि के कथित गबन मामले में SIT की अंतरिम जांच रिपोर्ट। ट्रस्ट के प्रशासनिक और भविष्य के निर्णयों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे। ट्रस्ट के नियम क्या कहते हैं? श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार— कोई भी ट्रस्टी कम से कम एक महीने का लिखित नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है। ट्रस्ट अगली बैठक में उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय लेता है। यदि किसी ट्रस्टी पर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप हो, तो उसे हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। किसी भी ट्रस्टी को हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस देना और अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है। वर्तमान में ट्रस्ट के 12 सदस्य निर्णय प्रक्रिया में शामिल हैं। किसी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए कम से कम 8 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होगा। VHP ने क्या कहा? इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि कथित दान गबन विवाद से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसके प्रशासनिक फैसलों के लिए वीएचपी जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अपने नियमों और प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। सभी की नजर बैठक के फैसले पर राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दान राशि के कथित गबन मामले को लेकर जांच जारी है। ऐसे में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट क्या फैसला लेता है और SIT की अंतरिम रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। बैठक के बाद ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Monsoon weakens in Jharkhand
झारखंड में कमजोर पड़ा मानसून, 50% कम बारिश से खेती प्रभावित

रांची। अलनीनो के प्रभाव से झारखंड में इस वर्ष मानसून कमजोर पड़ गया है, जिसका सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर दिखाई देने लगा है। राज्य में अब तक केवल 129 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों, खासकर धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालात को देखते हुए राज्य सरकार लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है और कृषि विभाग हर 15 दिन में खरीफ खेती की तैयारियों का आकलन कर रहा है।   बारिश के आकड़े क्या कहते है? बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक राज्य में 417 मिमी वर्षा हो चुकी थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा महज 129 मिमी तक सिमट गया है। राजधानी रांची में अब तक 205 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां 600 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। पश्चिम सिंहभूम में इस बार केवल 136 मिमी और गढ़वा जिले में महज 18 मिमी बारिश हुई है। राज्य का कोई भी जिला सामान्य वर्षा के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।   कम बारिश का सबसे अधिक असर धान की खेती पर पड़ा है। पिछले वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक लगभग 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हो चुकी थी, जबकि इस बार अब तक केवल तीन हजार हेक्टेयर में ही रोपाई हो सकी है। यह रोपाई भी मुख्य रूप से संताल परगना के कुछ जिलों तक सीमित है। दक्षिणी छोटानागपुर और कोल्हान जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में भी रोपाई की रफ्तार बेहद धीमी है।   कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अलनीनो के कारण सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम वर्षा चिंता का विषय है। हालांकि सरकार ने संभावित सुखाड़ की आशंका को देखते हुए पहले ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अपना कंटिन्जेंसी प्लान समय रहते केंद्र सरकार को भेज दिया है। सरकार का दावा है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
VHP International President Alok Kumar addresses the media, saying action against Champat Rai will be considered only after the SIT completes its investigation into the Ayodhya Ram Temple donation embezzlement allegations.
राम मंदिर दान विवाद: चंपत राय पर जांच पूरी होने के बाद होगा फैसला, बोले VHP प्रमुख आलोक कुमार

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर के कथित दान गबन मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar ने स्पष्ट किया कि संगठन अपने अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष Champat Rai के खिलाफ किसी कार्रवाई पर तभी विचार करेगा, जब जांच रिपोर्ट सामने आएगी। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है और फिलहाल संगठन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। 'घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं' आलोक कुमार ने कहा कि दान से जुड़े कथित घोटाले की खबरें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले में किसी तरह का बचाव या बहाना बनाने का सवाल नहीं है। पुलिस और SIT को निष्पक्ष तरीके से हर पहलू की जांच करनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 'राम मंदिर ट्रस्ट के लिए VHP जिम्मेदार नहीं' VHP प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि राम मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी VHP की नहीं है। उन्होंने कहा कि चंपत राय भले ही VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति VHP ने नहीं की थी। इसलिए ट्रस्ट में उनकी भूमिका को संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता। 'चुनावी वजहों से मुद्दे को बढ़ाया जा रहा' आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि VHP, Rashtriya Swayamsevak Sangh और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस मामले से जोड़ने की कोशिशें राजनीतिक कारणों से की जा रही हैं। उनके अनुसार, अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है। VHP ने रखीं चार प्रमुख मांगें आलोक कुमार ने बताया कि VHP ने इस मामले में चार प्रमुख मांगें रखी हैं— तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो। मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन की जाए। दोषी पाए जाने वालों को चार से पांच महीने के भीतर सजा दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और किसी व्यक्ति पर औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं होते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। फिलहाल SIT को अपनी जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करनी है, जिसके बाद ट्रस्ट और संबंधित संगठनों द्वारा आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust members during a meeting in Ayodhya amid discussions on organisational changes and future planning.
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक 6 जुलाई को होने की संभावना, इस्तीफों और भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई को आयोजित होने की संभावना है। बैठक ऐसे समय प्रस्तावित है, जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों और ट्रस्ट के दो वरिष्ठ सदस्यों के इस्तीफों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बैठक में ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार किया जा सकता है। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया था कि बैठक 7 जुलाई को होगी, लेकिन अब इसके एक दिन पहले 6 जुलाई को आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर हो सकती है चर्चा सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है। यह घटनाक्रम राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद सामने आया है। बैठक में दोनों नेताओं के इस्तीफों पर चर्चा होने की संभावना है। यदि ट्रस्ट इन्हें स्वीकार करता है तो ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हो जाएंगे। इनमें एक पद पहले से ही खाली है, क्योंकि ट्रस्ट सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद से उस स्थान पर नियुक्ति नहीं की गई है। ट्रस्ट के पुनर्गठन पर भी हो सकता है विचार सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास, वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन सहित कुछ अन्य वरिष्ठ न्यासी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पहले जैसी सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। ऐसे में बैठक में ट्रस्ट के पुनर्गठन और रिक्त पदों पर नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हो सकती है। सीईओ नियुक्ति के लिए नियमों में बदलाव जरूरी बैठक में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी विचार-विमर्श संभव है। यदि केंद्र सरकार ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सृजित करना चाहती है, तो इसके लिए पहले ट्रस्ट की नियमावली में संशोधन करना होगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत सीईओ की नियुक्ति संभव नहीं है और इसके लिए औपचारिक संशोधन आवश्यक होगा। इन नामों की चर्चा सूत्रों के अनुसार, संभावित सीईओ के लिए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का नाम पहले से चर्चा में है। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। ट्रस्ट या सरकार की ओर से इन नामों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बैठक पर रहेगी सभी की नजर राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक संगठनात्मक बदलाव, रिक्त पदों पर नियुक्ति और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक के एजेंडे और संभावित फैसलों को लेकर अभी तक ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Bageshwar Dham chief Dhirendra Krishna Shastri reacts to the Ayodhya Ram Temple donation embezzlement case during an event in Jakarta.
'रावण ने सिर्फ माता सीता का हरण किया था, यहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था लूटी गई'... राम मंदिर दान मामले पर बोले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

  अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल धन की चोरी नहीं हुई, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। इस बीच मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा? राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रावण ने केवल माता सीता का हरण किया था, लेकिन यहां राम मंदिर के दानपात्र से श्रद्धालुओं की आस्था ही लूट ली गई। उन्होंने कहा, "रावण ने माता जानकी का हरण किया था, जिसका परिणाम उसके पूरे परिवार के विनाश के रूप में सामने आया। करोड़ों लोगों द्वारा भगवान राम के मंदिर में श्रद्धा से दिए गए दान में चोरी करने वालों को कानून का दंड भी मिलेगा और ईश्वर का न्याय भी मिलेगा।" 'जांच आगे बढ़ेगी तो और लोग भी पकड़े जाएंगे' धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। उनके अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर और भी बहुत कुछ कह सकते हैं, लेकिन फिलहाल इतना ही कहना चाहते हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को अपने कृत्यों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में राम मंदिर दान गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर दान गबन प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। विपक्ष मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है। चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि उसे इस संबंध में किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नहीं है। योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच जारी, अदालत में तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त रकम और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Ram Mandir donation theft
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय का इस्तीफा, आठ आरोपी कोर्ट में पेश

अयोध्या, एजेंसियां। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चढ़ावा चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस विवाद के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।   आरोपियों की कोर्ट में पेशी गुरुवार को गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला एवं सत्र न्यायालय फैजाबाद में पेश किया गया। पेशी से पहले सभी का पुलिस लाइन अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह के समक्ष सुनवाई हुई। एसपी सिटी और सीओ सिटी पूरे समय न्यायालय परिसर में मौजूद रहे।   SIT जांच में बड़े खुलासे एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट लीक होने के बाद कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि सोशल मीडिया पर वायरल कई दावे बेबुनियाद हैं। अनुराग रस्तोगी द्वारा दान की गई चांदी की ईंटों का विवरण ट्रस्ट के अभिलेखों में दर्ज है। जुलाई 2020 में दो बार में कुल 38 किलो चांदी दान में मिली थी, जिसे गलाकर बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा गया।   सियासी बयानबाजी तेज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि निष्पक्ष जांच होगी और सरकार ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सुभासपा नेता अरुण राजभर ने कहा कि योगी सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है और आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद के आलोक कुमार ने सुझाव दिया कि ट्रस्ट को अब एक सीईओ नियुक्त करना चाहिए।

anjali kumari जून 26, 2026 0
Champat Rai Anil Mishra
राम मंदिर दान विवाद में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार दोनों ने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया। इस घटनाक्रम के बाद देशभर में इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।   SIT की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR राम मंदिर दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद 25 जून की रात भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित आठ लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।   7 करोड़ रुपये से अधिक के दुरुपयोग का आरोप यह मामला तब सामने आया जब अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये की दान राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप सामने आने के बाद स्वयं ट्रस्ट ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था, जिसके बाद एसआईटी का गठन किया गया।   सरकार और विपक्ष आमने-सामने मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ नहीं उठाने की अपील करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हैं तथा वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है।

abhishek singh जून 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0