Coalition Politics

परिमल नाथवानी की इंट्री, एनडीए का मिला समर्थन

रांची। झारखंड में होनेवाले दो सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव को परिमल नाथवाणी की इंट्री ने रोचक बना दिया है। नाथवाणी की इंट्री से सभी राजनीतिक दलों में हड़कंप मचा है। उधर, राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने यू टर्न लेते हुए अपना प्रत्याशी नहीं देने का फैसला किया है। भाजपा ने अब निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का समर्थन करने का फैसला किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो आदित्य साहु ने जदयू, लोजपा, आजसू के अलावा भाजपा के लगभग एक दर्जन विधायकों को परिमल नाथवाणी का प्रस्तावक बनने का निर्देश दिया है।    नाथवाणी भाजपा के समर्थन से आज 8 जून को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। जानकारी के अनुसार रविवार रात 8.30 बजे नाथवाणी दिल्ली से रांची पहुंच गये हैं।  सीएम से मिलने के बाद गये दिल्ली बता दें कि बीते शनिवार को भी नाथवाणी विशेष विमान से रांची आये थे। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीदा था। इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी, फिर दिल्ली लौट गये थे।  चर्चा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ बात नहीं बनने के बाद वह रात में ही दिल्ली लौट गये। वह दिल्ली तब रवाना हुए जब उन्हें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी उनका प्रस्तावक नहीं बनेगी। इसके अगले दिन यानी रविवार की शाम को बीजेपी ने नाथवाणी को समर्थन देने का निर्देश जारी कर दिया।  दिल्ली में दिन भर रह कर नाथवानी ने गोटी सेट किया और भाजपा का समर्थन हासिल करने में सफल रहे। झामुमो नहीं चाहता था कि परिमल नाथवानी का प्रस्तावक बन कर वह कांग्रेस से प्रत्यक्ष रूप से अपना विरोधी छवि प्रदर्शित करे। नाथवाणी को जीत की उम्मीद भाजपा का समर्थन मिलने के बाद अब नाथवानी को जीत सुनिश्चित दिखने लगी है। वहीं नाथवाणी की इंट्री ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस को अपने प्रत्याशी को विजय दिलाने की चुनौती और बढ़ गयी है। बता दें कि इंडी गठबंधन के नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस से बार बार यही कह रहे थे। वह बता रहे थे कि कांग्रेस अपना प्रत्याशी नहीं दे और झामुमो को दोनों प्रत्याशी खड़ा करने दे। लेकिन, झामुमो और कांग्रेस के बीच इस बात पर सहमति नहीं बनी।   रविवार रात मुख्यमंत्री आवास में इंडी गठबंधन के सभी विधायकों की बैठक हुई। इसमें कांग्रेस के पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा भी शामिल हुए। इसमें गठबंधन के सारे विधायकों को एकजुट रखने का निर्णय लिया गया।  विधायकों के चेहरे पर मुस्कान इधर, नाथवानी के निर्दलीय प्रत्याशी बनने से कांग्रेस छोड़ अन्य सभी दलों के विधायकों के चेहरे पर मुस्कान देखी जाने लगी है। राजनीति के रणनीतिकारों का भी मानना है कि भाजपा का समर्थन मिलने के बाद नाथवानी को मात्र चार वोटों का ही जुगाड़ करना है, जो उनके लिए बहुत मुश्किल नहीं है।

Unknown जून 8, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Election
Jharkhand Rajya Sabha Election: JMM व कांग्रेस में सुलह की इनसाइड स्टोरी

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही सियासी पारा हाई हो चुका है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या झामुमो-कांग्रेस के बीच सब ठीक है या नहीं। क्योंकि, चुनाव के ऐलान के बाद से ही दोनों दलों के बीच खींचतान चल रही थी। हालांकि, अब दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है। दोनों दलों में हुई डील के तहत झामुमो और कांग्रेस ने आपस में एक-एक सीट बांट ली है। झामुमो ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कम्युनिकेशन इंचार्ज प्रणव झा को मैदान में उतारा है। हालांकि यह समझौता इतना आसान नहीं था। इस समझौते को कराने में बड़ी भूमिका छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने निभाई है। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा इन्हें विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। दोनों कद्दावर नेताओं ने शनिवार और रविवार को भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। सीएम आवास में इन तीनों नेताओं के बीच लगभग एक घंटे तक बेहद गोपनीय बातचीत हुई। इसके बाद इंडी गठबंधन की हुई एक और बैठक में मामला पूरी तरह सुलझ गया। हालांकि बंद कमरे में क्या गोपनीय बात हुई यह बाहर नहीं आ सकी। कांग्रेस के नेताओं ने नहीं किया कोई खुलासा शनिवार की शाम को भी भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और ठीक अगले ही दिन रविवार को दोबारा एक घंटे की लंबी बैठक होना, इस बात का साफ संकेत है कि गठबंधन के भीतर पर्दे के पीछे जरूर कोई बड़ी रणनीति बनी है। हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद बाहर आए नेताओं ने इस बातचीत का कोई भी खुलासा नहीं किया। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तैरता रहा कि आखिर इस एक घंटे की सीक्रेट मीटिंग क्या बातचीत हुई? JMM का बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’... एक तरफ जहां इस सीक्रेट मीटिंग पर सस्पेंस बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पूर्व विधायक और राज्य के बड़े दलित चेहरे बैजनाथ राम को अपना उम्मीदवार घोषित कर एक बड़ा दांव चल दिया है। राजनीतिक जानकार इसे पलामू प्रमंडल में पार्टी की पैठ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। क्योंकि, आजतक किसी भी राजनीतिक दल ने पलामू जोन से किसी भी दलित चेहरे को राज्यसभा में जगह नहीं दी है। जहां तक जीतने के चांसेस की बात है, तो इंडिया गठबंधन के विधायक अगर एकजुट रहे तो दोनों सीटों पर जीत लगभग तय है, क्योंकि गठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी खुद सोशल मीडिया पर इस फैसले को ‘सामाजिक न्याय’ की आवाज को मजबूत करने वाला कदम बताया है। JMM के इस अचानक लिए गए फैसले और बैजनाथ राम की उम्मीदवारी के बाद राजनीति के जानकार इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। आज खत्म होगा सस्पेंस झारखंड की दो रिक्त राज्यसभा सीटों के लिए सोमवार, 8 जून को नामांकन का अंतिम दिन है। दिलचस्प पहलू यह है कि चुनाव के लिए कुल 6 प्रत्याशियों ने परचा खरीदा है, लेकिन रविवार शाम तक किसी ने भी अपना नामांकन दाखिल नहीं किया था। सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन सभी उम्मीदवार अपने परचे दाखिल करेंगे, जिससे यह साफ हो जाएगा कि इस सियासी बिसात पर कौन-कौन से चेहरे आमने-सामने हैं। इसके बाद 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी और उसी दिन परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।

Unknown जून 8, 2026 0
Actor Vijay meeting political leaders in Chennai amid Tamil Nadu government formation talks
तमिलनाडु में सत्ता का रास्ता साफ? विजय की TVK को कांग्रेस का समर्थन, सरकार गठन की प्रक्रिया तेज

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन मिलने के संकेत हैं, जिससे राज्य में सरकार गठन का रास्ता लगभग साफ होता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस बुधवार को TVK के समर्थन में औपचारिक चिट्ठी जारी कर सकती है। इसके बाद कांग्रेस के विधायक पनैयूर में विजय से मुलाकात करेंगे, जहां फिलहाल TVK की राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं। इस मुलाकात को सरकार गठन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सभी को चौंका दिया है। इस चुनाव में TVK ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को हराया और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। करीब 60 वर्षों में पहली बार राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति का दबदबा इस तरह कमजोर होता नजर आया है। कांग्रेस और TVK के बीच संभावित डील सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने 2026 विधानसभा चुनाव में 5 सीटें जीती हैं और अब वह समर्थन के बदले सरकार में हिस्सेदारी चाहती है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस दो कैबिनेट मंत्री पद और कुछ सरकारी बोर्डों के चेयरमैन पद की मांग कर सकती है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है। 7 मई को शपथ ले सकते हैं विजय खबरों के मुताबिक, विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ करीब 9 मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। हालांकि TVK साधारण बहुमत से करीब 10 सीट पीछे है, ऐसे में सहयोगी दलों का समर्थन जरूरी है। अन्य दलों से भी बातचीत जारी कांग्रेस के अलावा TVK अब वाम दलों और छोटे क्षेत्रीय दलों से भी संपर्क में है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों से बातचीत की तैयारी कर रही है। जल्द ही इन दलों को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जा सकता है। राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर सरकार बना पाते हैं।  

surbhi मई 6, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

झारखंड

वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0