पलामू। झारखंड के पलामू जिले में रविवार देर रात एक सिक्योरिटी गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र स्थित जेएमपी कॉम्प्लेक्स की है, जहां ड्यूटी पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड विनोद पांडेय को अपराधियों ने सिर में गोली मार दी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई, जबकि पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। कार और स्कूटी से पहुंचे थे हमलावर मृतक विनोद पांडेय पलामू जिले के नावाबाजार थाना क्षेत्र के राजहरा गांव के निवासी थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे के बाद हमलावर एक कार और स्कूटी से कॉम्प्लेक्स पहुंचे और विनोद पांडेय को निशाना बनाकर गोली मार दी। 15 जुलाई की बर्थडे पार्टी के विवाद से जुड़ रहे तार पुलिस जांच में सामने आया है कि 15 जुलाई को जेएमपी कॉम्प्लेक्स में आयोजित एक जन्मदिन की पार्टी के दौरान डांस और तेज आवाज में संगीत बजाने को लेकर कर्मचारियों और पार्टी में शामिल लोगों के बीच मारपीट हुई थी। इस घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आज होनी थी कोर्ट में सुनवाई बताया जा रहा है कि इसी विवाद से जुड़े मामले में सोमवार को कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस इस हत्याकांड के तार उसी विवाद से जोड़कर देख रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हत्या के पीछे की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हाई-प्रोफाइल लोगों के शामिल होने की चर्चा स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जन्मदिन की पार्टी में शामिल कुछ लोगों का संबंध कथित तौर पर प्रभावशाली परिवारों और एक राजनीतिक दल से बताया जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और सभी पहलुओं से मामले की जांच की जा रही है। एसपी बोले- जल्द होगी गिरफ्तारी पलामू एसपी कपिल चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
सिमडेगा। जिले में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिमडेगा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने अंतरराज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी निशानदेही पर करीब 30 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात, नकदी, चोरी में प्रयुक्त बाइक और अन्य सामान बरामद किया गया है। साथ ही झारखंड और छत्तीसगढ़ में हुई पांच चोरी की वारदातों का भी खुलासा हुआ है। राहुल सिंह के घर हुई चोरी से खुला पूरा मामला सिमडेगा के पुलिस अधीक्षक श्रीकांत एस. खोटरे ने बताया कि हरिजन टोली निवासी राहुल कुमार सिंह के घर हुई चोरी के मामले में 5 जुलाई 2026 को सदर थाना में कांड संख्या 92/2026 दर्ज किया गया था। जांच के दौरान तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को गिरोह के संबंध में अहम सुराग मिले। छत्तीसगढ़ में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को दबोचा पुलिस उपाधीक्षक रणवीर सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में छापेमारी कर अनिकेत टोप्पो (19) और सैफ अली (22) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने सिमडेगा सहित कई क्षेत्रों में चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की। राशन दुकान चोरी का भी हुआ खुलासा जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सिमडेगा थाना क्षेत्र के सलडेगा बरपानी स्थित राशन दुकान में हुई चोरी की वारदात को भी अंजाम दिया था। इस मामले में दर्ज कांड संख्या 87/2026 का भी पुलिस ने सफलतापूर्वक उद्भेदन कर चोरी किया गया राशन बरामद कर लिया है। झारखंड और छत्तीसगढ़ की कई वारदातों में संलिप्तता स्वीकार पूछताछ के दौरान आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के कुनकुरी और फरसाबहार, तथा झारखंड के गुमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हुई चोरी की घटनाओं में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के कई थानों में पहले से चोरी के मामले दर्ज हैं। अन्य आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने अब तक गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर कुल पांच चोरी की घटनाओं का खुलासा किया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इस कार्रवाई में सदर थाना प्रभारी संजीत कुमार, केसरई थाना प्रभारी विनायक पांडेय सहित विशेष टीम के अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
गिरिडीह। गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र में एक 60 वर्षीय वृद्ध की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान वासुदेव मंडल के रूप में हुई है, जो ससारखो पंचायत के बसगोहरा गांव के निवासी थे। उनका शव मंगलवार सुबह बड़कीबेरगी पंचायत के जन्मबेडा गांव में सड़क किनारे मिला, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। ट्रैक्टर संचालन का काम करते थे वासुदेव परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, वासुदेव मंडल ट्रैक्टर चलवाने का काम करते थे। उनकी रोजाना की दिनचर्या के अनुसार वे सुबह करीब तीन बजे घर से निकलकर ट्रैक्टर चालक को लेने जाते थे। मंगलवार को भी वे बाइक से घर से निकले थे, लेकिन कुछ घंटों बाद उनके शव मिलने की सूचना पर परिवार और ग्रामीण स्तब्ध रह गए। बेरहमी से की गई हत्या मृतक के परिजनों का आरोप है कि उनकी हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई है। शव पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि डंडे या किसी भारी वस्तु से उनकी पिटाई की गई। परिजनों ने यह भी दावा किया कि मृतक के निजी अंगों पर भी चोट के निशान मिले हैं, जिससे हत्या की बर्बरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जमीन विवाद को लेकर उठे सवाल परिवार के लोगों का कहना है कि हत्या के पीछे जमीन विवाद कारण हो सकता है। हालांकि पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। परिजनों ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलने के बाद गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डुमरी के एसडीपीओ आबिद खान और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि परिजनों से रंजिश और अन्य संभावित कारणों के बारे में जानकारी ली जा रही है तथा जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
रांची। रांची के पॉश इलाके हरमू हाउसिंग कॉलोनी में चल रहे सेक्स रैकेट का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। गुप्त सूचना के आधार पर अरगोड़ा थाना पुलिस ने छापेमारी कर किराए के एक मकान से दो युवतियों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई रांची एसएसपी को मिली सूचना के बाद हटिया डीएसपी नीरज कुमार के नेतृत्व में अरगोड़ा थाना पुलिस, डोरंडा थाना पुलिस और महिला मजिस्ट्रेट की टीम ने संयुक्त रूप से हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित मकान पर छापेमारी की। रेड के दौरान पुलिस ने दो युवतियों और तीन युवकों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा। बंगाल से लाई जाती थीं युवतियां प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस रैकेट का संचालन किराए के मकान में किया जा रहा था। मकान पांकी निवासी व्यक्ति का बताया जा रहा है, जिसे किराए पर लेकर आरोपी कथित रूप से बंगाल से युवतियों को बुलाकर इस अवैध धंधे को चला रहे थे। पुलिस ने मुख्य आरोपी को भी हिरासत में ले लिया है। मकान सील, कई पहलुओं की जांच जारी छापेमारी के बाद पुलिस ने पूरे मकान को सील कर दिया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या मानव तस्करी से जुड़े पहलू भी सामने आ सकते हैं। पॉश इलाके में खुलासे से मचा हड़कंप शहर के पॉश इलाके में इस तरह के अवैध कारोबार के खुलासे से स्थानीय लोगों में भी चिंता और आक्रोश है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
रांची। रांची में झारखंड पुलिस के एक डीएसपी के खिलाफ यौन शोषण का मामला दर्ज होने से पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। रांची के चुटिया थाना में दर्ज प्राथमिकी में डीएसपी अमित कुमार सिंह पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता, जो रांची की रहने वाली 25 वर्षीय युवती बताई जा रही है, ने आरोप लगाया है कि उसकी मुलाकात वर्ष 2024 में सोशल मीडिया के जरिए लोहरदगा में पदस्थापित डीएसपी अमित कुमार सिंह से हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और डीएसपी ने युवती को शादी का भरोसा दिया। शादी का वादा कर बनाए संबंध एफआईआर के अनुसार, पहली मुलाकात रांची के एक रेस्टोरेंट में हुई थी, जहां डीएसपी ने युवती से प्रेम और शादी की बात कही। इसके बाद दोनों लगातार फोन और मैसेज के जरिए संपर्क में रहे। युवती का आरोप है कि दिसंबर 2024 में डीएसपी उसे एक गेस्ट हाउस ले गए, जहां शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए गए। पीड़िता ने दावा किया कि इसके बाद भी कई बार शादी का भरोसा देकर संबंध बनाए गए। हालांकि कुछ समय बाद डीएसपी ने अचानक बातचीत बंद कर दी और बाद में शादी से इनकार कर दिया। प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले को लेकर वह पुलिस मुख्यालय तक पहुंची थी, लेकिन डीएसपी के परिवारवालों ने समझौते का दबाव बनाया। एफआईआर में आत्महत्या के लिए उकसाने और मानसिक प्रताड़ना देने के आरोप भी लगाए गए हैं। इस मामले में चुटिया थाना में प्राथमिकी संख्या 70/26 दर्ज की गई है। पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के चिनिया थाना क्षेत्र में जंगल से नर कंकाल मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। यह मामला मसरा गांव के लामी घुटरा जंगल का है, जहां ग्रामीणों ने क्षत-विक्षत हालत में मानव कंकाल देखा। घटनास्थल से मोबाइल के टूटे टुकड़े, कपड़े और बेल्ट भी बरामद किए गए हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अवशेषों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि मसरा गांव निवासी जय मंगल सिंह पिछले 15 दिनों से लापता था। परिजनों के अनुसार, 13 मई की रात गांव के ही सुदामा सिंह के साथ उसका विवाद हुआ था, जिसके बाद से वह अचानक गायब हो गया। मृतक के पिता सुकन सिंह ने बताया कि उन्हें लगा था कि बेटा काम के सिलसिले में कहीं बाहर चला गया होगा, इसलिए थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। केंदू पत्ता तोड़ने गए ग्रामीणों ने दी सूचना बुधवार सुबह कुछ ग्रामीण केंदू पत्ता तोड़ने जंगल पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर जंगल में पड़े नर कंकाल पर पड़ी। यह खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर चिनिया थाना प्रभारी Biku Kumar Rajak पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से मिले सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। परिजनों ने कपड़ों और अन्य सामान के आधार पर शव की पहचान जय मंगल सिंह के रूप में की है। मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए सुदामा सिंह को हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
रांची। रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग बेटी ने अपने प्रेमी और उसके साथियों के साथ मिलकर अपनी ही मां की हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मृतका नाहिद परवीन मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली थीं। उन्होंने करीब 16 साल पहले एक छह महीने की बच्ची को गोद लिया था और उसे बेहद प्यार से पाला। पति की मौत के बाद वही बेटी उनकी जिंदगी का सहारा थी, लेकिन वही बेटी इस जघन्य अपराध में शामिल पाई गई। पैसों के विवाद ने लिया खौफनाक रूप पुलिस के अनुसार, नाहिद के बैंक खाते में करीब 25 लाख रुपये जमा थे, जिनका संचालन बेटी ही करती थी। आरोप है कि बेटी ने बिना जानकारी के 15 लाख रुपये निकालकर अपने प्रेमी अरबाज को दे दिए। जब मां को इस बात का पता चला, तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और मामला हत्या तक पहुंच गया। प्रेमी और साथियों के साथ मिलकर की हत्या 25 अप्रैल की रात को बेटी ने अपने प्रेमी अरबाज को घर बुलाया। वह अपने साथ शाहिद, समीर और हासिम को भी लेकर आया। इन सभी ने मिलकर नाहिद परवीन की हत्या कर दी। इसके बाद घटना को छिपाने के लिए इसे बाथरूम में गिरने से हुई मौत बताया गया और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। संदेह के बाद खुला राज परिजनों को घटना पर शक हुआ, जिसके बाद सख्ती से पूछताछ में सच्चाई सामने आई। पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। कब्र से निकाला गया शव, जांच जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डोरंडा कब्रिस्तान से शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
रांची। रांची में बढ़ते अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गुर्गों द्वारा फैलाए जा रहे आतंक पर सरकार और पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। सरकार और पुलिस पर लगाया ढुलमुल रवैये का आरोप मीडिया से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में अपराधियों का मनोबल सरकार और पुलिस की “लुंज-पुंज व्यवस्था” के कारण बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रिंस खान और उसके गुर्गे खुलेआम दहशत फैला रहे हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि उन्हें कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ठोस कार्रवाई करे, तो अपराधियों को एक रात में भागने पर मजबूर किया जा सकता है। गुर्गों पर कार्रवाई की मांग मरांडी ने कहा कि भले ही प्रिंस खान देश से बाहर रहकर गैंग चला रहा हो, लेकिन उसके गुर्गे झारखंड में सक्रिय हैं। उन्होंने पुलिस को सख्त कार्रवाई करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि 8-10 अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, तो बाकी अपराधियों में भी डर पैदा होगा और अपराध पर लगाम लगेगी। विधानसभा में भी गूंजा मामला प्रिंस खान गैंग का मुद्दा झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में भी उठ चुका है। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में सरकार से इस पर जवाब मांगा और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर विदेश में बैठकर अपने नेटवर्क के जरिए रंगदारी और अपराध का संचालन कर रहा है। हत्या और रंगदारी के मामलों का जिक्र मरांडी ने हाल के आपराधिक घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि रांची के टीटॉस होटल में गोलीबारी कर एक कर्मचारी की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा बोकारो में एक शोरूम संचालक से रंगदारी मांगे जाने का मामला भी सामने आया है। इन घटनाओं से व्यापारियों और आम लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। कानून-व्यवस्था पर बढ़ी चिंता लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है।
झारखंड के East Singhbhum जिले के Potka प्रखंड में होली के दिन दो अलग-अलग स्थानों पर हत्या की घटनाओं से इलाके में दहशत फैल गई। एक मामले में बुजुर्ग महिला की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई, जबकि दूसरे मामले में एक अज्ञात युवती का जला हुआ शव जंगल से बरामद हुआ। जंगल में मिला जला हुआ शव पहली घटना Kowali Police Station क्षेत्र के बानाकाटा जंगल की है। यहां पुलिस को करीब 22–35 वर्ष की एक युवती का आंशिक रूप से जला हुआ शव मिला। शव की हालत इतनी खराब थी कि उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। पुलिस को शक है कि युवती की हत्या करने के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को आग के हवाले किया गया। घटनास्थल के पास से शराब की बोतल भी बरामद की गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और युवती की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। बुजुर्ग महिला की गला रेतकर हत्या दूसरी घटना पोटका के कलिकापुर इलाके के हाड़पाघुटू गांव के पास की है, जहां एक बुजुर्ग महिला का शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान 60 से 75 वर्ष के बीच की सुभाषिनी नायक के रूप में हुई है। उनकी गला रेतकर हत्या की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार सुभाषिनी नायक जंगल से लकड़ी और पत्ते इकट्ठा कर बेचकर अपना जीवन यापन करती थीं। उनका शव गांव के पास एक पगडंडी के किनारे मिला, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस, जांच शुरू घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मामलों में शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल दोनों घटनाओं के पीछे के कारण स्पष्ट नहीं हैं और हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है या नहीं। इलाके में दहशत का माहौल एक ही दिन में दो अलग-अलग जगहों पर हत्या की वारदात सामने आने से पूरे पोटका इलाके में डर और तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस आसपास के इलाकों में पूछताछ कर रही है और संदिग्ध लोगों की तलाश की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।