धनबाद। कल्पना कीजिए कि रात के समय तेज बारिश हो रही है और खेत में पानी भरने लगा है। किसान घर में है, लेकिन खेत खुद खतरे को पहचान रहा है। सेंसर मिट्टी की नमी और जलस्तर की लगातार निगरानी करते हैं। खतरा बढ़ते ही किसान के मोबाइल पर अलर्ट पहुंचता है और खेत में लगे पंप अपने आप पानी निकालना शुरू कर देते हैं।
डीएवी कोयला नगर के 10वीं कक्षा की छात्रा अंकिता श्रीवास्तव और 9वीं कक्षा के छात्र रौनक व अनन्या ने मिलकर Smart Crop Survival System तैयार किया है। यह AI और IoT आधारित तकनीक बाढ़ व जलभराव से फसलों को बचाने के लिए विकसित की गई है। प्रोजेक्ट को अटल टिंकरिंग लैब के इंचार्ज शिक्षक बीके सिंह का मार्गदर्शन मिला।
भारत में कृषि पर बड़ी आबादी निर्भर है, लेकिन बाढ़ और अनियमित बारिश किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। खेतों में पानी भरने से धान, मक्का, सब्जियों समेत कई फसलें खराब हो जाती हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि किसान को समय पर खतरे की जानकारी नहीं मिल पाती।
फसलों को नुकसान से बचाने के लिए छात्रों ने ऐसी प्रणाली विकसित की है, जो खेत की लगातार निगरानी करती है और खतरे की स्थिति में खुद कार्रवाई शुरू कर देती है। यह सिस्टम AI, IoT, Digital Twin, Cloud Computing और Smart Automation जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित है।
इस सिस्टम में खेत का डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है, जो वास्तविक समय में खेत से मिलने वाले डेटा के अनुसार अपडेट होता रहता है। किसान मोबाइल के जरिए मिट्टी की नमी, पानी का स्तर, बारिश और पंप की स्थिति की जानकारी कहीं से भी देख सकते हैं।
Smart Crop Survival System में खेत को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है। प्रत्येक हिस्से में सेंसर लगाए जाते हैं। किसी एक हिस्से में पानी भरने पर केवल उसी जोन का पंप चालू होता है, जिससे बिजली की बचत होती है। गंभीर स्थिति में सभी पंप एक साथ काम करने लगते हैं।
सिस्टम का मुख्य नियंत्रक Arduino Uno Master Controller है, जो सेंसर से मिले डेटा का विश्लेषण करता है। इसके आधार पर यह तय किया जाता है कि किस समय कौन सा पंप चालू करना है। NodeMCU Gateway के जरिए डेटा क्लाउड और मोबाइल ऐप तक पहुंचता है।
सिस्टम में ESP32 आधारित कैमरा लगाया गया है, जिससे किसान मोबाइल पर खेत की लाइव तस्वीर देख सकते हैं। इससे रात में खेत तक जाने की जरूरत कम होगी और किसी भी खराबी की जानकारी तुरंत मिल सकेगी।
Blynk IoT Dashboard के जरिए किसान मिट्टी की नमी, बारिश, पंप की स्थिति, बाढ़ का स्तर और इमरजेंसी अलर्ट देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल से ही पंप को नियंत्रित किया जा सकता है।
सिस्टम में मल्टी-लेयर इंटेलिजेंट लॉजिक का इस्तेमाल किया गया है। सामान्य जलभराव पर चेतावनी दी जाती है, जबकि बाढ़ का स्तर 80 प्रतिशत से अधिक होने पर सिस्टम इमरजेंसी मोड में चला जाता है। इसके बाद पंप सक्रिय होते हैं और मोबाइल पर हाई-प्रायोरिटी अलर्ट भेजा जाता है।
इस प्रोजेक्ट में Arduino Uno, NodeMCU, ESP32 Camera, Soil Moisture Sensor, Rain Sensor, Relay Module, Water Pump, Dot Matrix Display और Cloud Server जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। सभी उपकरण रियल टाइम में आपस में जुड़े रहते हैं।
इस तकनीक में AI आधारित मौसम पूर्वानुमान, सौर ऊर्जा संचालन और ड्रोन व सैटेलाइट डेटा जैसी सुविधाएं जोड़ी जा सकती हैं। इससे बड़े कृषि क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल संभव हो सकता है।
यह तकनीक केवल एक छात्र प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत बचाने वाला डिजिटल प्रहरी है। इससे फसल नुकसान कम होगा, पानी और बिजली की बचत होगी और किसान दूर रहकर भी अपनी खेती पर नजर रख सकेंगे।
Smart Crop Survival System बताता है कि AI, IoT और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से खेती को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है। बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक चुनौतियों के बीच यह स्मार्ट खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित मगनपुर पंचायत के जांगी गांव में रविवार रात करीब 20 से 22 जंगली हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों के गांव में घुसने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई और लोग पूरी रात ढोल-नगाड़े, मशाल और पटाखों की मदद से उन्हें गांव से बाहर खदेड़ने की कोशिश करते रहे। हाथियों ने कई किसानों के खेतों में घुसकर मकई, बैंगन, पत्तागोभी, भिंडी समेत अन्य तैयार फसलों को रौंद दिया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। प्रभावित किसानों ने सरकार और वन विभाग से शीघ्र मुआवजा देने तथा हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के सहयोग से हाथियों को जंगल की ओर सुरक्षित भेजने का प्रयास किया। विभाग ने लोगों से हाथियों के पास न जाने, उन्हें उकसाने से बचने और किसी भी गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील की है। मगनपुर पंचायत के उपमुखिया अकबर अली ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसलों के नुकसान का जायजा लिया और वन विभाग से जल्द सर्वे कर किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की। रामगढ़ के डीएफओ नीतीश कुमार ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने लोगों से फोटो खींचने या हाथियों के करीब जाने से बचने की अपील करते हुए कहा कि फसलों के नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में रविवार देर रात एक सिक्योरिटी गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र स्थित जेएमपी कॉम्प्लेक्स की है, जहां ड्यूटी पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड विनोद पांडेय को अपराधियों ने सिर में गोली मार दी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई, जबकि पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। कार और स्कूटी से पहुंचे थे हमलावर मृतक विनोद पांडेय पलामू जिले के नावाबाजार थाना क्षेत्र के राजहरा गांव के निवासी थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे के बाद हमलावर एक कार और स्कूटी से कॉम्प्लेक्स पहुंचे और विनोद पांडेय को निशाना बनाकर गोली मार दी। 15 जुलाई की बर्थडे पार्टी के विवाद से जुड़ रहे तार पुलिस जांच में सामने आया है कि 15 जुलाई को जेएमपी कॉम्प्लेक्स में आयोजित एक जन्मदिन की पार्टी के दौरान डांस और तेज आवाज में संगीत बजाने को लेकर कर्मचारियों और पार्टी में शामिल लोगों के बीच मारपीट हुई थी। इस घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आज होनी थी कोर्ट में सुनवाई बताया जा रहा है कि इसी विवाद से जुड़े मामले में सोमवार को कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस इस हत्याकांड के तार उसी विवाद से जोड़कर देख रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हत्या के पीछे की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हाई-प्रोफाइल लोगों के शामिल होने की चर्चा स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जन्मदिन की पार्टी में शामिल कुछ लोगों का संबंध कथित तौर पर प्रभावशाली परिवारों और एक राजनीतिक दल से बताया जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और सभी पहलुओं से मामले की जांच की जा रही है। एसपी बोले- जल्द होगी गिरफ्तारी पलामू एसपी कपिल चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
जमशेदपुर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड में चिकन पॉक्स (छोटी चेचक) के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। क्षेत्र के बड़ाघाट धीवर टोला गांव में 20 से अधिक लोगों के संक्रमित होने की जानकारी मिली है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और मेडिकल टीम को प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है। गांव में स्वास्थ्य टीम ने शुरू की जांच मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों की जांच शुरू की। संक्रमित लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है और ग्रामीणों को संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। संक्रमण रोकने के लिए लोगों को किया जा रहा जागरूक स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि चिकन पॉक्स के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। संक्रमित मरीजों को अलग रखने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। क्या हैं चिकन पॉक्स के लक्षण? चिकन पॉक्स में आमतौर पर शरीर पर लाल दाने, खुजली, बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकती है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर नजर रखने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर पहचान और सावधानी से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।