Cyber fraud

Government cracks down on cyber fraud, saving over ₹11,158 crore and arresting thousands of accused
साइबर ठगी पर सरकार का बड़ा एक्शन, 11,158 करोड़ रुपये बचाए; 29 हजार से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार

Cyber Fraud: देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार ने साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए तकनीक, बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत किया है। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की मदद से 30 जून 2026 तक साइबर धोखाधड़ी के 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आम लोगों के खातों से ठगी जाने से बचा ली गई है। I4C और सिटीजन पोर्टल से मिली बड़ी सफलता गृह मंत्रालय के तहत संचालित सिटीजन फाइनेंशियल फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) साइबर ठगी रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक इस पोर्टल पर 32.80 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। समय रहते शिकायत मिलने पर पुलिस, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों के बीच त्वरित समन्वय स्थापित किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की रकम सुरक्षित बचाई जा सकी। लाखों संदिग्ध सिम और IMEI नंबर ब्लॉक साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने 15.75 लाख से अधिक संदिग्ध सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबर ब्लॉक किए हैं। इसके अलावा, सितंबर 2024 में शुरू किए गए संदिग्ध खाता रजिस्टर के माध्यम से 30.48 लाख से अधिक संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की गई, जिसके चलते 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन को रोका जा सका। 29 हजार से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में जानकारी दी कि साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए 'साइट्रेन' (CyTrain) नामक ऑनलाइन प्रशिक्षण पोर्टल शुरू किया गया है। अब तक 1.61 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों और न्यायिक अधिकारियों को साइबर अपराध की जांच और रोकथाम का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण अब तक 29,837 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लोगों को भी किया जा रहा जागरूक सरकार साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान भी चला रही है। एसएमएस, कॉलर ट्यून, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के तरीके बताए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि तकनीकी निगरानी, तेज शिकायत निवारण प्रणाली और जनता की सतर्कता के जरिए साइबर ठगी पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
WhatsApp Web security warning showing a fake APK file scam that can steal chats and compromise user accounts.
New APK Scam Alert: WhatsApp पर सीक्रेट फाइल के नाम पर फैल रहा नया साइबर फ्रॉड, एक क्लिक में चोरी हो सकती है आपकी पूरी चैट

नई दिल्ली: अगर आप WhatsApp Web या WhatsApp Desktop का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा एजेंसी CyberDost (I4C) ने व्हाट्सऐप यूजर्स को एक नए और खतरनाक साइबर स्कैम को लेकर चेतावनी जारी की है। इस नए फ्रॉड में हैकर्स फर्जी डॉक्यूमेंट, फोटो या जरूरी फाइल का झांसा देकर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही आपका सिस्टम और व्हाट्सऐप सेशन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला खासतौर पर उन लोगों को निशाना बना रहा है जो लैपटॉप या कंप्यूटर पर WhatsApp Web या Desktop App का उपयोग करते हैं। क्या है नया WhatsApp Scam? साइबर अपराधी अनजान नंबरों से यूजर्स को PDF, फोटो, इनवॉइस, रिज्यूमे, ऑफिस डॉक्यूमेंट या अन्य जरूरी फाइल का नाम देकर .exe और .dll जैसी एक्सिक्यूटेबल फाइलें भेज रहे हैं। पहली नजर में ये फाइलें सामान्य डॉक्यूमेंट जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन इन्हें डाउनलोड कर ओपन करते ही इनमें मौजूद खतरनाक कोड एक्टिव हो जाता है। इसके बाद हमलावर आपके सिस्टम और WhatsApp सेशन तक पहुंच बना सकते हैं। कैसे काम करता है यह साइबर फ्रॉड? स्कैमर्स बेहद चालाकी से यूजर्स को फंसाते हैं। अनजान नंबर से फर्जी डॉक्यूमेंट या फोटो भेजते हैं। फाइल का नाम इस तरह रखा जाता है कि वह असली लगे। फाइल डाउनलोड और ओपन करते ही सिस्टम में मैलवेयर एक्टिव हो सकता है। इसके बाद हमलावर WhatsApp Web या Desktop Session पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। चैट हिस्ट्री, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच बनाई जा सकती है। कई मामलों में अपराधी आपके अकाउंट से आपके दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज भेजकर पैसों की ठगी भी करते हैं। किन फाइलों से सबसे ज्यादा खतरा? Cyber सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इन फाइल एक्सटेंशन से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। .exe .dll .zip .bat यदि किसी फाइल का नाम document.pdf.exe या photo.jpg.exe जैसा दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी डाउनलोड या ओपन न करें। कई बार फाइल का असली एक्सटेंशन छिपा होता है, जिससे यूजर धोखा खा जाता है। खुद को ऐसे रखें सुरक्षित साइबर हमलों से बचने के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें। किसी भी अनजान नंबर से आई फाइल डाउनलोड न करें। फाइल का पूरा नाम और एक्सटेंशन जरूर जांचें। WhatsApp के Linked Devices सेक्शन को नियमित रूप से चेक करें। कोई अनजान डिवाइस दिखाई दे तो तुरंत Log Out करें। अपने WhatsApp पर Two-Step Verification (2FA) हमेशा चालू रखें। कंप्यूटर और एंटीवायरस को नियमित रूप से अपडेट रखें। संदिग्ध फाइल मिलने पर उसे तुरंत डिलीट करें और भेजने वाले नंबर को ब्लॉक करें। अगर ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करें? यदि आपको लगता है कि आपका WhatsApp या सिस्टम हैक हो गया है, तो तुरंत कार्रवाई करें। सभी Linked Devices से लॉग आउट करें। WhatsApp का Two-Step Verification सक्रिय करें। अपने महत्वपूर्ण पासवर्ड बदलें। तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें। cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

surbhi जुलाई 21, 2026 0
Facebook Friendship Scam
फेसबुक फ्रेंडशिप के जाल में फंसी महिला, विदेश से गिफ्ट भेजने का झांसा देकर 5 लाख से अधिक की साइबर ठगी

रांची। रांची में साइबर अपराध का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फेसबुक पर हुई दोस्ती एक महिला के लिए भारी पड़ गई। विदेश से महंगे गिफ्ट भेजने का झांसा देकर साइबर ठगों ने महिला से 5 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली। मामले का खुलासा तब हुआ जब लगातार भुगतान के बावजूद कथित पार्सल नहीं पहुंचा और ठगों ने फिर से पैसे की मांग शुरू कर दी। पीड़िता ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद साइबर अपराध थाना, रांची में एफआईआर दर्ज कराई है।   शिकायत के अनुसार शिकायत के अनुसार, नामकुम निवासी उमा कुमारी को 27 मार्च 2026 को फेसबुक पर Dr. Sam Cheris नाम के व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच व्हाट्सएप पर बातचीत शुरू हुई। आरोपी ने खुद को अविवाहित बताते हुए महिला का विश्वास जीता और भारत आने के साथ-साथ उनके लिए महंगे उपहार भेजने का दावा किया।   कुछ दिनों बाद महिला को बताया गया कि उनके नाम से भेजा गया पार्सल मुंबई एयरपोर्ट पहुंच चुका है, लेकिन उसे छुड़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के शुल्क जमा करने होंगे। इसके बाद आरोपी और उसके साथियों ने शिपिंग चार्ज, कस्टम ड्यूटी, एयरपोर्ट क्लीयरेंस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, एक्सचेंज फीस और डिलीवरी चार्ज जैसे अलग-अलग बहाने बनाकर कई किश्तों में पैसे जमा करवाए। हर भुगतान के बाद नए शुल्क की मांग की जाती रही।   आरोपियों ने महिला को यह कहकर भी डराया आरोपियों ने महिला को यह कहकर भी डराया कि यदि निर्धारित राशि जमा नहीं की गई तो पार्सल जब्त हो जाएगा और मामला अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई तक पहुंच सकता है। इस डर और पार्सल मिलने की उम्मीद में महिला ने 5 लाख रुपये से अधिक विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।   साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, विदेश से गिफ्ट या पार्सल भेजने के नाम पर पैसे जमा करने और बिना सत्यापन किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर करने से बचें, ताकि इस तरह की साइबर ठगी से सुरक्षित रहा जा सके।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
India's Ministry of External Affairs (MEA) issues a public warning against fake social media accounts posing as ministry advisers and offering paid policy training.
विदेश मंत्रालय के नाम पर सोशल मीडिया पर ठगी, MEA ने जारी की चेतावनी; फर्जी सलाहकारों के झांसे में न आने की अपील

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश मंत्रालय (MEA) के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। कुछ फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर व्यापार, प्रवासन (Migration) और अन्य नीतिगत मामलों में विशेषज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय ने आम जनता के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने फर्जी दावों से किया किनारा विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट-चेक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर जारी बयान में कहा गया कि मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट साझा कर रहे हैं, जिनसे यह आभास होता है कि वे व्यापार, माइग्रेशन और अन्य नीतिगत विषयों पर विदेश मंत्रालय को सलाह दे रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी व्यक्ति या संस्था का विदेश मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है और उनके दावे पूरी तरह भ्रामक हैं। पैसे लेकर ट्रेनिंग और सलाह देने का झांसा विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ये फर्जी अकाउंट केवल झूठे दावे ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका सिखाने और नीतिगत मामलों में मार्गदर्शन देने के नाम पर लोगों से पैसे भी वसूल रहे हैं। बताया गया कि कुछ लोग सशुल्क (Paid) ट्रेनिंग सेशन, वेबिनार और सलाहकारी कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। MEA ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसे किसी भी भ्रामक पोस्ट, विज्ञापन या दावे पर भरोसा न करें। मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर पैसे मांगता है या किसी ट्रेनिंग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शुल्क लेता है, तो उससे सावधान रहें। ऐसे करें खुद का बचाव विदेश मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि— केवल विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। किसी भी व्यक्ति के मंत्रालय से जुड़े होने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले सशुल्क सलाहकार या ट्रेनिंग कार्यक्रमों से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जी अकाउंट की जानकारी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर अपराध पोर्टल पर दें। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह की निजी सलाहकार सेवाएं या सशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित नहीं करता है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी फर्जी दावे के झांसे में आकर आर्थिक नुकसान न उठाएं।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
SIM Card Check
आपके नाम पर कितने SIM Card हैं? घर बैठे 2 मिनट में ऐसे करें चेक, फर्जी सिम को तुरंत करें बंद

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के समय में साइबर फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार लोगों के नाम पर उनकी जानकारी के बिना सिम कार्ड जारी कर दिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल गलत गतिविधियों में भी हो सकता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आपके आधार और पहचान पत्र पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। सरकार ने इसके लिए संचार साथी (Sanchar Saathi) नाम की एक पोर्टल की सुविधा शुरू की है, जहां पर आप घर बैठे कुछ ही मिनटों में अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल नंबरों की जानकारी देख सकते हैं।   क्यों जरूरी है अपने नाम पर जारी SIM की जांच करना?   यदि आपके नाम पर कोई ऐसा मोबाइल नंबर सक्रिय है जिसका आप उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो उसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। ऐसे मामलों में साइबर अपराध, फर्जी बैंक खाते खोलने या ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसलिए समय-समय पर अपने नाम पर जारी सिम कार्ड की जांच करना जरूरी है।   घर बैठे ऐसे करें अपने नाम पर जारी SIM की जांच Step 1 अपने मोबाइल या लैपटॉप में संचार साथी (Sanchar Saathi) की आधिकारिक वेबसाइट खोलें। Step 2 होम पेज पर "Know Your Mobile Connections (TAF-COP)" विकल्प पर क्लिक करें। Step 3 अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। Step 4 मोबाइल पर प्राप्त OTP दर्ज करके सत्यापन करें। Step 5 सत्यापन पूरा होते ही आपके नाम पर जारी सभी सक्रिय मोबाइल नंबरों की सूची स्क्रीन पर दिखाई देगी।   फर्जी या अनजान SIM को कैसे बंद कराएं?   यदि सूची में कोई ऐसा मोबाइल नंबर दिखाई देता है जिसे आप नहीं पहचानते या इस्तेमाल नहीं करते, तो— उस नंबर को चुनें। "Not My Number" या उपलब्ध शिकायत विकल्प पर क्लिक करें। शिकायत दर्ज करने के बाद संबंधित दूरसंचार कंपनी और विभाग जांच करेंगे। जांच सही पाए जाने पर उस नंबर को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आपके नाम पर कितने SIM जारी हो सकते हैं?   भारत में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं। हालांकि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह सीमा अलग हो सकती है। यदि आपके नाम पर इससे अधिक कनेक्शन पाए जाते हैं, तो संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है।   कब तुरंत जांच करनी चाहिए?   नया मोबाइल नंबर लेने के बाद। मोबाइल खो जाने पर। आधार या अन्य दस्तावेज़ खो जाने पर। साइबर फ्रॉड का संदेह होने पर। समय-समय पर सुरक्षा के लिए। साइबर फ्रॉड से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय   अपना आधार, पैन और पहचान पत्र किसी अनजान व्यक्ति को न दें। किसी भी खाली फॉर्म या फोटोकॉपी पर बिना कारण हस्ताक्षर न करें। OTP और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। केवल अधिकृत मोबाइल विक्रेता से ही नया सिम खरीदें। समय-समय पर अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जांच करते रहें। SIM से जुड़ी शिकायत कहां करें?   यदि आपको किसी मोबाइल नंबर, फर्जी सिम या साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायत करनी है, तो आप संचार साथी पोर्टल या संबंधित दूरसंचार कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

abhishek singh जून 25, 2026 0
Whatsapp Account Hacked
WhatsApp Account Hack हुआ है या नहीं, कैसे पता करें?

रांची। आजकल के डिजिटल ज़माने में WhatsApp सिर्फ chatting app नहीं, बल्कि personal chats, photos, documents और banking OTP तक का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp account hack हो जाए, तो privacy और security दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। सवाल यह है कि WhatsApp hack हुआ है या नहीं, इसका पता कैसे लगाएं? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं। WhatsApp Account Hack होने के क्या संकेत हैं? 1. Unknown Devices Logged In दिखना अगर WhatsApp Web या linked devices में कोई अनजान device दिखाई दे, तो यह एक warning sign हो सकता है। 2. OTP Message बिना वजह आना अगर बार-बार आपको verification code या OTP message आ रहे हैं, तो इससे यह पता चलता है कि कोई आपका account access करने की कोशिश कर रहा है। 3. Messages अपने आप Read या Send होना अगर आपने message नहीं भेजा लेकिन chat में activity दिख रही है, तो account compromise हो सकता है। 4. अचानक Logout हो जाना WhatsApp अगर बार-बार logout हो रहा है या re-login मांग रहा है, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। 5. Unknown Status या Profile Changes Profile photo, about section या status अपने आप बदलना suspicious activity का एक संकेत हो सकता है। WhatsApp Account Hack हुआ है तो क्या करें? तुरंत सभी linked devices logout करें Two-step verification ON करें WhatsApp PIN सेट करें Password और email security check करें Suspicious apps uninstall करें Account access वापस पाने के लिए re-verify करें Linked Devices कैसे Check करें? WhatsApp खोलें → Settings → Linked Devices → Unknown devices remove करें। Two-Step Verification क्यों जरूरी है? यह extra security layer जोड़ता है, जिससे सिर्फ OTP मिलने से account access करना मुश्किल हो जाता है। WhatsApp Account को Hack होने से कैसे बचायें ? OTP किसी  अंजान व्यक्ति से share न करें Unknown links पर click न करें Fake APK files install न करें Public Wi-Fi पर login करने से बचे   App को regularly update करें

Unknown जून 4, 2026 0
Smartphone displaying security warning after suspected cyber fraud drained money from a bank account.
फोन अपने आप फॉर्मेट, ऐप्स गायब और खाते से उड़ गए 95 हजार रुपये! CISF जवान के साथ हुआ चौंकाने वाला डिजिटल फ्रॉड

मुंबई में तैनात एक CISF कॉन्स्टेबल के साथ साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है जिसने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। आमतौर पर डिजिटल फ्रॉड के मामलों में फर्जी लिंक, ओटीपी शेयरिंग या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस मामले में घटनाक्रम बिल्कुल अलग और अधिक चिंताजनक दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 34 वर्षीय CISF जवान का स्मार्टफोन अचानक अपने आप रीसेट (फॉर्मेट) हो गया। फोन के रीस्टार्ट होने के बाद उसमें मौजूद सभी एप्लिकेशन गायब हो चुके थे। शुरुआत में इसे तकनीकी खराबी समझा गया, लेकिन जब जवान ने दोबारा फोन सेटअप कर जरूरी ऐप्स इंस्टॉल किए और बैंक बैलेंस चेक किया, तो उनके होश उड़ गए। उनके बैंक खाते से कुल 95,668 रुपये निकाले जा चुके थे। कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम? मामले की जानकारी के अनुसार, जवान एक चीनी ब्रांड के स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे थे। अचानक फोन फॉर्मेट हो गया और उसमें मौजूद सभी ऐप्स हट गए। इसके बाद उन्होंने फोन को दोबारा सेटअप किया और जरूरी एप्लिकेशन, जिनमें पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स भी शामिल थे, फिर से डाउनलोड किए। जब उन्होंने अपने खाते का बैलेंस चेक किया, तब पता चला कि बड़ी रकम पहले ही ट्रांसफर की जा चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्हें किसी संदिग्ध कॉल, लिंक, ओटीपी या बैंकिंग अलर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जवान ने तुरंत उठाया यह कदम धोखाधड़ी का पता चलते ही CISF कॉन्स्टेबल ने बिना देर किए अपने बैंक से संपर्क कर खाते को ब्लॉक कराया। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और मामले की सूचना पुलिस को दी। समय रहते कार्रवाई करने से आगे होने वाले संभावित नुकसान को रोका जा सका। जांच में क्या सामने आया? पुलिस जांच में पता चला कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई, वह एक ऐसे मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ था जिसके बारे में पीड़ित को कोई जानकारी नहीं थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फोन का अचानक फॉर्मेट होना तकनीकी खराबी थी या किसी साइबर हमले का हिस्सा। जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या किसी मैलवेयर, स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस तकनीक के जरिए फोन पर नियंत्रण हासिल किया गया था। क्यों बढ़ी चिंता? यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें पारंपरिक साइबर फ्रॉड के संकेत नहीं मिले। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल ऐसे एडवांस्ड मैलवेयर मौजूद हैं जो स्मार्टफोन को रिमोटली कंट्रोल कर सकते हैं, डेटा चुरा सकते हैं और बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। यदि फोन का फॉर्मेट होना किसी साइबर हमले का हिस्सा साबित होता है, तो यह डिजिटल ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका हो सकता है। खुद को कैसे सुरक्षित रखें? फोन में इंस्टॉल सभी ऐप्स की नियमित जांच करें। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें। अनजान स्रोतों से APK फाइल इंस्टॉल न करें। फोन की परमिशन सेटिंग्स समय-समय पर चेक करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 से संपर्क करें। मोबाइल और बैंकिंग ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें। फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सुरक्षा अपडेट नियमित रूप से इंस्टॉल करें। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके विकसित कर रहे हैं। ऐसे में केवल ओटीपी या लिंक से सावधान रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा पर भी लगातार नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।  

surbhi जून 3, 2026 0
Cyber police investigate a digital arrest scam after a Bengaluru woman lost ₹24 crore to fraudsters.
बेंगलुरु में बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ की साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट रैकेट का भंडाफोड़

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में “डिजिटल अरेस्ट” के जरिए 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। Karnataka State Cyber Command ने इस बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी खुद को Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) के वरिष्ठ अधिकारी बताकर महिला को लगातार डराते रहे और करीब दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा। दो महीने तक डराकर वसूले करोड़ों रुपये जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 10 फरवरी से 24 अप्रैल 2026 के बीच महिला को बार-बार पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस दौरान महिला ने 26 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 24 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस के अनुसार, यह रकम देशभर के 10 बैंकों में मौजूद 23 फर्जी बैंक खातों में भेजी गई थी। ये आरोपी हुए गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है: N. Shivagnanam - इरोड, तमिलनाडु Akkach Mallik - मुंबई Palak Bhai Patel - अहमदाबाद Amit Narendra Patel - अहमदाबाद Om Prakash Rajput - नई दिल्ली Gaurav Kumar - बिहार बैंक अलर्ट से खुला मामला धोखाधड़ी का खुलासा 24 अप्रैल को हुआ, जब एक बैंक ने संदिग्ध लेनदेन की जानकारी साइबर कमांड यूनिट को दी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर पीड़िता को समझाया और आगे रकम ट्रांसफर होने से रोका। कार्रवाई के दौरान करीब 3 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ठगी रोकी गई। पुलिस ने कई बैंक खातों को फ्रीज भी किया। 4 करोड़ रुपये बचाए, कई खाते फ्रीज बेंगलुरु स्थित साइबर कमांड के पुलिस महानिदेशक Pranab Mohanty ने बताया कि जांच के दौरान एनआरसीपी पोर्टल की मदद से कई खातों को फ्रीज किया गया। उन्होंने कहा कि अब तक 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षित की गई है और अदालत के आदेशों के जरिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की रिकवरी भी हुई है। क्या होता है डिजिटल अरेस्ट? पुलिस के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का तेजी से बढ़ता तरीका है। इसमें जालसाज खुद को पुलिस, CBI, ED या अदालत के अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो या ऑडियो कॉल पर डराते हैं। आरोपी पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर कानूनी मामले में फंस चुका है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने होंगे। कई मामलों में पीड़ितों को घंटों या दिनों तक लगातार निगरानी में रखा जाता है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Person making secure UPI payment on smartphone with warning icons about online fraud risks
Digital Payment Alert: बढ़ते डिजिटल ट्रांजेक्शन के बीच ठगी से बचने के लिए NPCI की 5 जरूरी सलाह

भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में जहां करीब 23,834 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या 28,000 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में National Payments Corporation of India (NPCI) ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए 5 अहम सुझाव दिए हैं। 1. पेमेंट से पहले नाम जरूर जांचें किसी भी भुगतान से पहले स्क्रीन पर दिख रहे नाम को ध्यान से देखें। सुनिश्चित करें कि पैसा सही व्यक्ति या व्यापारी को ही जा रहा है। कुछ सेकंड की सावधानी आपको बड़ी गलती से बचा सकती है। 2. भरोसेमंद ऐप और वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें हमेशा विश्वसनीय पेमेंट ऐप या आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि यही फ्रॉड का सबसे बड़ा जरिया बनते हैं। 3. PIN और OTP कभी साझा न करें आपका UPI PIN, OTP और बैंक डिटेल पूरी तरह गोपनीय होती हैं। कोई भी व्यक्ति–चाहे वह खुद को बैंक या सरकारी अधिकारी बताए–इन जानकारियों को मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और जानकारी साझा न करें। 4. जल्दबाजी में निर्णय न लें अगर कोई आपसे तुरंत पैसे भेजने या जानकारी देने का दबाव बनाता है, तो सावधान रहें। ऐसे मामलों में समय लें, जानकारी की जांच करें और जरूरत पड़े तो संबंधित व्यक्ति या संस्था से खुद संपर्क करें। 5. ट्रांजेक्शन अलर्ट पर रखें नजर अपने बैंक खाते में SMS और ऐप नोटिफिकेशन को एक्टिव रखें। हर लेनदेन की जानकारी तुरंत मिलने से आप किसी भी संदिग्ध गतिविधि को जल्दी पकड़ सकते हैं और तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। डिजिटल पेमेंट जितना सुविधाजनक है, उतना ही सतर्क रहने की भी जरूरत है। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से आप ऑनलाइन ठगी से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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