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NPCI Issues Digital Payment Fraud Alert

Digital Payment Alert: बढ़ते डिजिटल ट्रांजेक्शन के बीच ठगी से बचने के लिए NPCI की 5 जरूरी सलाह

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Person making secure UPI payment on smartphone with warning icons about online fraud risks
Digital Payment Safety Tips NPCI

भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में जहां करीब 23,834 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या 28,000 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं।

ऐसे में National Payments Corporation of India (NPCI) ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए 5 अहम सुझाव दिए हैं।

1. पेमेंट से पहले नाम जरूर जांचें

किसी भी भुगतान से पहले स्क्रीन पर दिख रहे नाम को ध्यान से देखें। सुनिश्चित करें कि पैसा सही व्यक्ति या व्यापारी को ही जा रहा है। कुछ सेकंड की सावधानी आपको बड़ी गलती से बचा सकती है।

2. भरोसेमंद ऐप और वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें

हमेशा विश्वसनीय पेमेंट ऐप या आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि यही फ्रॉड का सबसे बड़ा जरिया बनते हैं।

3. PIN और OTP कभी साझा न करें

आपका UPI PIN, OTP और बैंक डिटेल पूरी तरह गोपनीय होती हैं। कोई भी व्यक्ति–चाहे वह खुद को बैंक या सरकारी अधिकारी बताए–इन जानकारियों को मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और जानकारी साझा न करें।

4. जल्दबाजी में निर्णय न लें

अगर कोई आपसे तुरंत पैसे भेजने या जानकारी देने का दबाव बनाता है, तो सावधान रहें। ऐसे मामलों में समय लें, जानकारी की जांच करें और जरूरत पड़े तो संबंधित व्यक्ति या संस्था से खुद संपर्क करें।

5. ट्रांजेक्शन अलर्ट पर रखें नजर

अपने बैंक खाते में SMS और ऐप नोटिफिकेशन को एक्टिव रखें। हर लेनदेन की जानकारी तुरंत मिलने से आप किसी भी संदिग्ध गतिविधि को जल्दी पकड़ सकते हैं और तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।

डिजिटल पेमेंट जितना सुविधाजनक है, उतना ही सतर्क रहने की भी जरूरत है। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से आप ऑनलाइन ठगी से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबारी दिन के अंत में BSE Sensex 609.45 अंकों की मजबूती के साथ 77,496.36 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 181.95 अंक चढ़कर 24,177.65 के स्तर के पार पहुंच गया।   हरियाली के साथ बंद हुआ बाजार दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार मजबूत बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने बाजार को सहारा दिया। खासकर बड़े और दिग्गज शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।   किन वजहों से आई तेजी विश्लेषकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में नरमी की उम्मीद और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों और मजबूत आर्थिक संकेतों ने भी बाजार को सपोर्ट किया।   सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मजबूत बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इससे बाजार की तेजी को और बल मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला, जिससे व्यापक बाजार में उत्साह बना रहा।   निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर हालांकि बाजार में तेजी रही, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी।

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Gold Price: सोने में गिरावट, चांदी में चमक बरकरार

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक बाजार में जारी उतार-चढ़ाव का असर भारतीय सराफा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बुधवार को MCX पर सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी ने मजबूती दिखाई। सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया, वहीं चांदी 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार कारोबार कर रही है।   ग्लोबल संकेतों से प्रभावित बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। स्पॉट गोल्ड $4,600 प्रति औंस के नीचे ट्रेड कर रहा है, जबकि चांदी में करीब 1% की तेजी देखने को मिली है। इससे घरेलू बाजार में चांदी को सपोर्ट मिला है और इसकी कीमतें मजबूत बनी हुई हैं।   कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर Iran और United States के बीच स्थिति, बाजार को प्रभावित कर रही है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड अभी भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। Strait of Hormuz को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर चिंता बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों का रुख सुरक्षित निवेश की ओर बना हुआ है।   24 कैरेट सोने का ताजा भाव भारत के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,49,950 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट मुनाफावसूली के कारण है और आगे भी कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।   निवेशकों के लिए क्या संकेत? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सोना और चांदी दोनों ही सुरक्षित निवेश विकल्प बने हुए हैं, लेकिन कीमतों में अस्थिरता जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।

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विदेश पैसे भेजने के नियम बदले: 15CA-15CB की जगह अब भरने होंगे फॉर्म 145 और 146

विदेश में पैसे भेजने की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब तक इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म 15CA और 15CB को हटाकर नए फॉर्म 145 और 146 लागू कर दिए गए हैं। Income Tax Department के इस कदम का मकसद विदेशी लेनदेन को ज्यादा पारदर्शी बनाना और टैक्स चोरी पर लगाम कसना है। क्या है फॉर्म 145 और क्यों है जरूरी? फॉर्म 145 एक डिक्लेरेशन फॉर्म है, जिसे पैसा भेजने वाले व्यक्ति को भरना होगा। इसमें आपको ट्रांजैक्शन से जुड़ी अहम जानकारी देनी होती है–जैसे कितनी राशि भेजी जा रही है, उसका उद्देश्य क्या है और उस पर टैक्स (TDS) लागू होता है या नहीं। अब बैंक या अधिकृत डीलर आपकी विदेशी ट्रांजैक्शन तभी प्रोसेस करेंगे, जब यह फॉर्म सही तरीके से भरकर ऑनलाइन सबमिट किया गया हो। यह हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो किसी NRI या विदेशी संस्था को भुगतान कर रहा है। फॉर्म 146 कब जरूरी होगा? फॉर्म 146 एक प्रमाण पत्र के रूप में काम करता है, जिसे आपको खुद नहीं भरना होता, बल्कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से सत्यापित कराना होता है। यह हर ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन जिन मामलों में भुगतान टैक्सेबल होता है या नियम जटिल होते हैं, वहां इसकी जरूरत पड़ती है। CA इस फॉर्म के जरिए यह सुनिश्चित करता है कि भुगतान पर सही टैक्स काटा गया है और वह नियमों के अनुरूप है। क्या बिना इन फॉर्म्स के पैसा भेज सकते हैं? अब ऐसा संभव नहीं है। बैंकों के लिए इन फॉर्म्स की जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर ट्रांजैक्शन टैक्स-फ्री कैटेगरी में आता है, तो केवल फॉर्म 145 पर्याप्त हो सकता है लेकिन फीस, प्रोफेशनल सर्विस या बड़ी रकम भेजने पर फॉर्म 146 भी जरूरी होगा आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर? इस बदलाव का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो विदेश में पैसे भेजते हैं। अब उन्हें नए फॉर्मेट को समझकर सही डॉक्युमेंट्स तैयार रखने होंगे। अगर फॉर्म अधूरे या गलत हैं, तो बैंक ट्रांजैक्शन रोक सकता है, जिससे भुगतान में देरी हो सकती है। सरकार की ओर से विदेशी लेनदेन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, इसलिए किसी भी परेशानी से बचने के लिए ट्रांजैक्शन से पहले सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी है।  

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