झारखंड

JTET 2026 आवेदन में तकनीकी बाधा, अभ्यर्थियों की बढ़ी परेशानी

Anjali Kumari अप्रैल 29, 2026 0
JTET 2026
JTET 2026

रांची। रांची में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया इन दिनों विवादों में है। हजारों अभ्यर्थी पोर्टल में आ रही तकनीकी दिक्कतों से जूझ रहे हैं, जिससे उनमें चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस समस्या को लेकर झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने Jharkhand Academic Council (जैक) को ज्ञापन सौंपकर समाधान की मांग की है।

 

पोर्टल में बार-बार आ रही तकनीकी दिक्कतें


अभ्यर्थियों का कहना है कि आवेदन पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा है या ठीक से काम नहीं कर रहा। शैक्षणिक योग्यता भरने के दौरान त्रुटियां सामने आ रही हैं, वहीं आरक्षण श्रेणी और प्रमाण पत्र चयन में भी गड़बड़ी हो रही है। कई उम्मीदवारों को आधार कार्ड से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जहां सिस्टम उनके विवरण को डुप्लिकेट बता रहा है।

 

फॉर्म सबमिट के बाद भी परेशानी


सबसे बड़ी समस्या यह है कि आवेदन जमा करने के बाद भी प्रिंट या डाउनलोड का विकल्प उपलब्ध नहीं हो रहा। इसके अलावा बी.एड और डीएलएड अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर पोर्टल पर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

 

शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें


संघ ने मांग की है कि पहले से आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को त्रुटि सुधार का मौका दिया जाए। साथ ही नए सत्र के उम्मीदवारों के लिए ‘अपियरिंग सर्टिफिकेट’ का स्पष्ट फॉर्मेट जारी किया जाए। इसके अलावा नाम, जन्मतिथि, ईमेल या मोबाइल नंबर में हुई गलतियों को सुधारने के लिए पुनः आवेदन का विकल्प भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

 

जैक से जल्द समाधान की अपील


संघ ने जैक प्रशासन से आग्रह किया है कि आवेदन प्रक्रिया को जल्द दुरुस्त किया जाए ताकि किसी भी अभ्यर्थी का भविष्य तकनीकी कारणों से प्रभावित न हो।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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एक साथ दो बड़े आवेदन: JPSC ने Pharm-D अभ्यर्थियों के लिए खोला नया अवसर

रांची। रांची से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए दो अहम अपडेट सामने आए हैं। Jharkhand Public Service Commission (JPSC) ने ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती में Pharm-D डिग्रीधारियों को आवेदन का मौका दिया है, वहीं Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) ने उत्पाद सिपाही परीक्षा 2023 का मॉडल आंसर जारी कर दिया है।   Pharm-D अभ्यर्थियों के लिए खुला आवेदन का रास्ता JPSC ने स्वास्थ्य विभाग की सहमति के बाद बड़ा फैसला लेते हुए Pharm-D डिग्रीधारियों को ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इसके लिए आयोग ऑनलाइन आवेदन पोर्टल को फिर से खोल रहा है। अभ्यर्थी 30 अप्रैल से 15 मई शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, केवल वही उम्मीदवार पात्र होंगे जिन्होंने 18 फरवरी 2026 तक अपनी डिग्री पूरी कर ली थी।   भर्ती प्रक्रिया की प्रमुख तारीखें इस भर्ती के तहत 30 पदों को भरा जाएगा। परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 10 मई तय की गई है, जबकि आवेदन की हार्ड कॉपी 28 मई तक जमा करनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले अभ्यर्थियों के आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे।   उत्पाद सिपाही परीक्षा का मॉडल आंसर जारी दूसरी ओर, JSSC ने उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय पत्र का औपबंधिक मॉडल उत्तर जारी कर दिया है। इससे अभ्यर्थी अपने उत्तरों का मिलान कर सकते हैं।   आपत्ति दर्ज करने का अंतिम मौका आयोग ने उम्मीदवारों को 4 मई तक ऑनलाइन माध्यम से आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया है। निर्धारित समय के बाद या किसी अन्य माध्यम से भेजी गई आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।   अभ्यर्थियों को मिली राहत इन दोनों फैसलों से राज्य के हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है। जहां एक ओर नए उम्मीदवारों के लिए अवसर बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।

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जाम से जूझते रांची को बड़ी राहत, कैबिनेट ने दी दो फ्लाईओवर की मंजूरी

रांची। रांची में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए राज्य कैबिनेट ने दो बड़े फ्लाईओवर-एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इन योजनाओं को चालू वित्त वर्ष में शुरू कर अगले वित्त वर्ष तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।   हरमू-अरगोड़ा फ्लाईओवर: 469 करोड़ की योजना पहला प्रोजेक्ट हरमू से अरगोड़ा तक फोर लेन फ्लाईओवर का है, जिसकी लंबाई 3.804 किलोमीटर होगी। यह फ्लाईओवर हरमू कावे रेस्टोरेंट से डिबडीह तक बनेगा और अरगोड़ा चौक से कटहल मोड़, चापू टोली के साथ-साथ अशोक नगर रोड नंबर तीन तक कनेक्टिविटी देगा। इस पर लगभग 469.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस फ्लाईओवर के बनने से अरगोड़ा चौक पर लगने वाले भारी जाम से राहत मिलेगी। हरमू, बिरसा चौक, कडरू, पुंदाग और कटहल मोड़ जैसे इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा। साथ ही खूंटी, गुमला और सिमडेगा की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी आसान होगी।   करमटोली-साइंस सिटी फ्लाईओवर: 351 करोड़ का प्रोजेक्ट दूसरा प्रोजेक्ट करमटोली चौक से साइंस सिटी चिरौंदी तक फोर लेन फ्लाईओवर का है। इसकी कुल लंबाई 2.70 किलोमीटर होगी, जिसमें 0.516 किलोमीटर लिंक सर्विस रोड भी शामिल है। इस परियोजना की लागत 351.14 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह फ्लाईओवर करमटोली से रिंग रोड तक के भारी ट्रैफिक को कम करने में मदद करेगा। अंतु चौक, दिव्यान चौक, साइंस सिटी और चिरौंदी चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।   शहर के ट्रैफिक सिस्टम में बड़ा सुधार इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रांची के प्रमुख इलाकों—सर्कुलर रोड, बरियातू रोड, रिम्स और मोरहाबादी—में ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है। साथ ही रामगढ़ और हजारीबाग की ओर जाने वाले वाहनों के लिए सफर अधिक सुगम हो जाएगा।

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रांची। झारखंड  में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राजधानी रांची समेत कई जिलों में दिनभर बादल छाए रहे और हल्की बारिश हुई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। ठंडी हवाओं और बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है।   अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा असर मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 29 अप्रैल से 1 मई तक मौसम का यही रुख बना रहेगा। इस दौरान कई जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट की संभावना जताई गई है। हालांकि 2 और 3 मई को तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा।   9 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने रांची, रामगढ़, हजारीबाग, गुमला, बोकारो, खूंटी, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है।   अन्य जिलों में यलो अलर्ट राज्य के बाकी हिस्सों में यलो अलर्ट घोषित किया गया है। यहां 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। यह स्थिति 4 मई तक बनी रह सकती है।   सतर्क रहने की अपील मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने को कहा है। गरज-चमक के समय खुले स्थानों में जाने से बचने, पेड़ों के नीचे न खड़े होने और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं तेज आंधी और बिजली गिरने का खतरा अभी भी बना हुआ है। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

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