फैशन और ब्यूटी

मेकअप रिमूवर नहीं है? किचन की इन चीजों से मिनटों में करें स्किन क्लीन

Anjali Kumari अप्रैल 29, 2026 0
Natural skin cleanser
Natural skin cleanser

नई दिल्ली, एजेंसियां। मेकअप हटाने के लिए अगर रिमूवर खत्म हो गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपके घर की रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें न सिर्फ मेकअप हटाने में मदद करती हैं, बल्कि त्वचा को स्वस्थ और ग्लोइंग भी बनाती हैं। गलत तरीके से मेकअप हटाकर सोने से पिंपल्स, एक्ने और स्किन एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए सही विकल्प अपनाना जरूरी है।

 

नारियल तेल: प्राकृतिक मेकअप रिमूवर


नारियल तेल एक बेहतरीन प्राकृतिक मेकअप रिमूवर के रूप में काम करता है। यह आंखों के मेकअप, लिपस्टिक और फाउंडेशन को आसानी से साफ कर देता है। इसके लिए कॉटन में नारियल तेल लेकर हल्के हाथों से चेहरे पर लगाएं। यह स्किन को साफ करने के साथ-साथ मॉइस्चराइज भी करता है, जिससे ड्राई स्किन वालों को खास फायदा मिलता है।

 

कच्चा दूध: स्किन को बनाता है सॉफ्ट और क्लीन


कच्चे दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा से हल्के तरीके से मेकअप हटाने में मदद करता है। एक कॉटन बॉल को दूध में भिगोकर चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं। यह न सिर्फ मेकअप हटाता है, बल्कि स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग भी बनाता है।

 

एलोवेरा जेल: सेंसिटिव स्किन के लिए सुरक्षित विकल्प


एलोवेरा जेल सेंसिटिव स्किन वालों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है। यह त्वचा को ठंडक देता है और मेकअप हटाने में मदद करता है। इसे चेहरे पर लगाकर 2–3 मिनट हल्की मसाज करें और फिर गीले कॉटन से साफ कर लें। इससे त्वचा फ्रेश महसूस होती है।

 

दही: गंदगी और मेकअप दोनों को साफ करे


दही न केवल सेहत बल्कि स्किन के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद नेचुरल गुण मेकअप और गंदगी को हटाने में मदद करते हैं। एक चम्मच दही लेकर चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें। इसके बाद गुनगुने पानी से धो लें। इससे स्किन साफ और ताजगी भरी लगती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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किचन की इस एक चीज से पाएं मुलायम और चमकदार पैर

नई दिल्ली, एजेंसियां। पैरों की देखभाल के लिए अब महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं है। घर की रसोई में मौजूद टमाटर से आप आसानी से पैरों को साफ, मुलायम और चमकदार बना सकते हैं। इसमें मौजूद विटामिन C और प्राकृतिक एंजाइम त्वचा की गंदगी, टैनिंग और डेड स्किन हटाने में मदद करते हैं।   टमाटर स्क्रब क्यों है फायदेमंद? टमाटर में प्राकृतिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा को गहराई से साफ करते हैं। यह पैरों की रूखी त्वचा को नरम बनाता है और धूप से होने वाली टैनिंग को कम करने में मदद करता है। नियमित इस्तेमाल से पैर ज्यादा हेल्दी और फ्रेश दिखते हैं।   कैसे करें टमाटर स्क्रब का इस्तेमाल? सबसे पहले एक पका हुआ टमाटर लेकर उसे बीच से काट लें। इसके बाद पैरों को हल्के गुनगुने पानी में 5–10 मिनट भिगोकर साफ कर लें, ताकि त्वचा नरम हो जाए। अब टमाटर को सीधे पैरों पर हल्के हाथों से रगड़ें।   बेहतर असर के लिए जोड़ें ये चीजें स्क्रब को और असरदार बनाने के लिए टमाटर पर थोड़ा चीनी या कॉफी पाउडर लगाया जा सकता है। चीनी डेड स्किन हटाने में मदद करती है, जबकि कॉफी त्वचा को स्मूद और चमकदार बनाती है। इसे एड़ी, तलवे और उंगलियों के बीच अच्छे से रगड़ें।   कुछ मिनट बाद धोकर मॉइस्चराइज करें स्क्रब करने के बाद 2–3 मिनट तक इसे पैरों पर लगा रहने दें, फिर साफ पानी से धो लें। इसके बाद नारियल तेल या मॉइस्चराइज़र लगाना जरूरी है, ताकि त्वचा में नमी बनी रहे और पैर मुलायम रहें।

Anjali Kumari अप्रैल 29, 2026 0
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साउथ फिल्म इंडस्ट्री की उभरती स्टार Sreeleela एक बार फिर अपने एथनिक स्टाइल से सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने आइवरी रंग की खूबसूरत अनारकली पहनकर यह साबित कर दिया कि किसी आउटफिट की असली ताकत सिर्फ उसकी कढ़ाई या रंग में नहीं, बल्कि उसके डिजाइन और सिल्हूट में भी होती है। यह अनारकली मशहूर डिजाइनर Mrunalini Rao के कलेक्शन से ली गई है, जिसमें क्लासिक एलीगेंस और मॉडर्न टच का बेहतरीन मेल देखने को मिला। डिजाइन और सिल्हूट ने बनाया लुक खास इस तीन-पीस सेट में अनारकली कुर्ता, मैचिंग पैंट और दुपट्टा शामिल है, जिसे मटका सिल्क फैब्रिक में तैयार किया गया है। आउटफिट की सबसे खास बात इसका कॉर्सेट-स्टाइल बॉडीस है, जो फिट होकर नीचे की ओर फ्लोई और वॉल्यूमिनस स्कर्ट में बदल जाता है। फ्लोर-लेंथ अनारकली में चूड़ी स्लीव्स और स्कूप्ड नेकलाइन दी गई है, जो लुक को ग्रेसफुल बनाती है। स्कर्ट को जानबूझकर हल्का रखा गया है, ताकि ध्यान ऊपर की डिटेलिंग पर जाए। जरी-ज़र्दोज़ी और पर्ल वर्क ने जोड़ा रॉयल टच आउटफिट के बॉडीस और स्लीव्स पर फ्लोरल और पैस्ले मोटिफ्स के साथ बारीक ज़र्दोज़ी एम्ब्रॉयडरी की गई है, जिसे पर्ल डिटेलिंग से और भी रिच बनाया गया है। बैक में एक्सपोज्ड कट डिजाइन इस ट्रेडिशनल लुक में हल्का सा बोल्ड एलिमेंट जोड़ता है। दुपट्टे पर स्कैलप्ड बॉर्डर दिया गया है, जो पूरे लुक को कंप्लीट करता है। ज्वेलरी और मेकअप ने बढ़ाई खूबसूरती Bedazzles की ज्वेलरी के साथ उन्होंने लुक को ट्रेडिशनल रखा और चांदबाली ईयररिंग्स पहने। वहीं, न्यूड टोन मेकअप और ग्लॉसी रेड लिप्स ने उनके पूरे स्टाइल को बैलेंस किया। सेलेब्रिटीज में बढ़ रही इस डिजाइन की लोकप्रियता इस अनारकली डिजाइन को कई अन्य सितारों ने भी अपनाया है। Nushrratt Bharuccha ने इसका रेड वर्जन पहना, जबकि Bhumi Pednekar पर्पल वेरिएंट में नजर आईं। यह दिखाता है कि यह डिजाइन हर रंग और पर्सनैलिटी के साथ आसानी से फिट बैठता है। कुल मिलाकर, यह अनारकली इस बात का उदाहरण है कि अगर डिजाइन और कंस्ट्रक्शन मजबूत हो, तो आउटफिट को ज्यादा भारी-भरकम बनाने की जरूरत नहीं पड़ती—सादगी में भी रॉयल लुक हासिल किया जा सकता है।  

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नीता अंबानी की खास जामदानी साड़ी: 24 महीनों में तैयार कारीगरी, हर धागे में बसी कहानी

न्यूयॉर्क: TIME100 Summit में Nita Ambani का लुक एक बार फिर भारतीय हस्तशिल्प की बारीकी और खूबसूरती का शानदार उदाहरण बनकर सामने आया। उन्होंने Swadesh की जामदानी साड़ी पहनी, जिसे Biren Kumar Basak ने करीब 24 महीनों में बुना। साड़ी में बसी कहानियां यह जामदानी साड़ी पारंपरिक अंदाज से अलग थी। आमतौर पर जहां पल्लू को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है, वहीं इस साड़ी में डिजाइन पूरे ड्रेप में फैला हुआ था। घुड़सवार, जानवर, पेड़ और मानव आकृतियां बॉर्डर से लेकर साड़ी के मुख्य हिस्से तक बारीकी से बुनी गई थीं, जो इसे एक चलती-फिरती कहानी जैसा रूप देती हैं। साड़ी का बेस सॉफ्ट बेज रंग में रखा गया, जिससे गुलाबी, हरे और हल्के नीले रंग के मोटिफ्स उभरकर सामने आएं। किनारों पर छोटे-छोटे पैटर्न्स की रिपीटिंग बॉर्डर इसे संतुलन और फ्रेम देती है। पल्लू और डिटेलिंग की खासियत पल्लू में स्ट्राइप्स और घने पैटर्न का इस्तेमाल किया गया, जो बाकी साड़ी के फैले हुए डिजाइन के साथ सुंदर कंट्रास्ट बनाता है। करीब से देखने पर हर मोटिफ और बुनाई में वही बारीकी नजर आती है, जो इस पूरे डिजाइन को एकसाथ जोड़कर रखती है। ज्वेलरी और स्टाइलिंग का संतुलन नीता अंबानी ने इस साड़ी को लंबे पर्ल स्ट्रैंड्स, एमराल्ड स्टड्स, डायमंड रिंग और मैचिंग ब्रेसलेट्स के साथ स्टाइल किया। उनका मेकअप और हेयरस्टाइल भी साड़ी के अनुरूप सादगी भरा था– सेंटर-पार्टेड खुले बाल हल्का स्मोकी आई मेकअप न्यूड लिप और हरे रंग की बिंदी, जो साड़ी और ज्वेलरी से मेल खाती थी ब्लाउज पर पर्ल डिटेलिंग ने पूरे लुक में एक सूक्ष्म लेकिन रिच एलिमेंट जोड़ा, जो साड़ी से ध्यान हटाए बिना उसे और खास बनाता है। फैशन एक्सपर्ट की राय फैशन विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी आप इस तरह के एम्ब्रॉयडरी या हैंडक्राफ्टेड आउटफिट पहनें, तो उसे ही फोकस में रखें और बाकी स्टाइलिंग को मिनिमल रखें।  

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