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Bandhan Bank Shares Rally 40% in a Month

Bandhan Bank Share: मुनाफे और डिविडेंड के दम पर शेयर में जोरदार उछाल, एक महीने में 40% से ज्यादा की तेजी

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Bandhan Bank stock chart rising sharply with green arrows showing strong gains after earnings
Bandhan Bank Share Surge 2026

शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां Bandhan Bank निवेशकों के लिए चर्चा का केंद्र बन गया। बैंक के मजबूत तिमाही नतीजों और डिविडेंड के ऐलान के बाद इसके शेयर में तेज उछाल आया और यह 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

एक दिन में 12% से ज्यादा की छलांग

मंगलवार को 178.30 रुपये पर बंद हुआ बंधन बैंक का शेयर बुधवार को तेजी के साथ खुला और कुछ ही घंटों में 200 रुपये के पार निकल गया। दोपहर तक यह करीब 13% की तेजी के साथ 201.60 रुपये पर कारोबार करता दिखा, जबकि इंट्रा-डे में 201.80 रुपये का नया 52-वीक हाई भी बनाया।

एक महीने में 40% से ज्यादा रिटर्न

इस शेयर ने हाल के दिनों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है।

  • एक महीने पहले कीमत: 141.35 रुपये
  • मौजूदा कीमत: लगभग 201.60 रुपये
  • कुल उछाल: करीब 43%

अगर किसी निवेशक ने एक महीने पहले 1 लाख रुपये लगाए होते, तो उसकी वैल्यू आज लगभग 1.43 लाख रुपये हो चुकी होती।

तिमाही नतीजों ने भरी रफ्तार

बंधन बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया:

  • शुद्ध मुनाफा: 68% बढ़कर 534 करोड़ रुपये
  • नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): 1.4% बढ़कर 2,795.4 करोड़ रुपये

इन मजबूत आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और शेयर में तेजी को गति दी।

डिविडेंड का ऐलान भी बना वजह

बैंक ने 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले शेयर पर 1.50 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने का ऐलान किया है, जिसने निवेशकों के लिए इस स्टॉक को और आकर्षक बना दिया।

लॉन्ग टर्म में प्रदर्शन मिला-जुला

हालांकि शॉर्ट टर्म में यह शेयर शानदार प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन लंबी अवधि में रिटर्न उतने मजबूत नहीं रहे:

  • 6 महीने: 17% की बढ़त
  • 1 साल: करीब 20% रिटर्न
  • 5 साल: लगभग 40% गिरावट

यह तेजी इस बात का संकेत है कि मजबूत फंडामेंटल्स और निवेशकों का भरोसा किसी भी स्टॉक को तेजी से ऊपर ले जा सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेश से पहले पूरी जांच जरूरी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ब्रोकरेज फर्म ICICI Direct ने Eternal के शेयर पर भरोसा जताते हुए ‘Buy’ रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹360 तय किया है। 29 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में फर्म ने कंपनी के ग्रोथ आउटलुक को मजबूत बताया है। Quick Commerce में शानदार ग्रोथ रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का क्विक कॉमर्स (QC) सेगमेंट उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। ग्रोथ और मार्जिन दोनों ने अनुमान को पीछे छोड़ा Q1 FY27 के लिए आउटलुक और बेहतर रहने की संभावना मिड-मई 2026 से बढ़ती महंगाई के बीच डिमांड और तेज हो सकती है कंपनी मैनेजमेंट ने मिड-टर्म में QC सेगमेंट के लिए करीब 60% CAGR ग्रोथ का अनुमान जताया है। EBITDA में बड़ी छलांग की उम्मीद ICICI Direct का मानना है कि कंपनी का कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA FY29 तक 1 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं: प्रोडक्ट असॉर्टमेंट में सुधार टॉप-8 शहरों से आगे विस्तार नए शहरों में बढ़ती डिमांड Food Delivery सेगमेंट भी मजबूत फूड डिलीवरी (FD) बिजनेस में भी तेजी बनी हुई है। कम न्यूनतम ऑर्डर वैल्यू और ऑफर्स से डिमांड बढ़ी EBITDA मार्जिन में QoQ 10 बेसिस पॉइंट का सुधार Q4 FY26 में पहली बार QC ने MTU (Monthly Transacting Users) के मामले में FD को पीछे छोड़ा ‘Going Out’ सेगमेंट में भी सुधार कंपनी का ‘Going Out’ बिजनेस भी लगातार बेहतर हो रहा है, जहां सीजनल चुनौतियों के बावजूद मार्जिन में बढ़ोतरी देखी गई है। DCF मॉडल के आधार पर टारगेट ब्रोकरेज ने तीन-स्टेज DCF (Discounted Cash Flow) मॉडल के आधार पर ₹360 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है और निवेशकों को इस स्टॉक में खरीदारी की सलाह दी है। यह रिपोर्ट बताती है कि Eternal का बिजनेस मॉडल तेजी से विस्तार कर रहा है और आने वाले समय में इसमें मजबूत ग्रोथ की संभावना बनी हुई है। हालांकि, निवेश से पहले जोखिम और बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।  

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Stock Market: हरे निशान पर खुला शेयर बाजार,सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल

मुंबई, एजेंसियां। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 358 अंकों की बढ़त के साथ 77,245 के पार पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी 100 अंकों से ज्यादा चढ़कर 24,096 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वैश्विक संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।   ईरान-अमेरिका तनाव में नरमी का असर पश्चिम एशिया में Iran और United States के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार को सहारा मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सैन्य गतिविधियों में कमी के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया है, जिससे बाजार में तेजी लौटी।   मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखी गई। आईटी, ऑटो और ऊर्जा सेक्टर के शेयरों में खासतौर पर खरीदारी रही। Reliance Industries, Infosys और Maruti Suzuki जैसे दिग्गज शेयरों में उछाल दर्ज किया गया।   कच्चे तेल और एफआईआई की चिंता बरकरार हालांकि बाजार में तेजी के बावजूद जोखिम बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी बाजार पर दबाव डाल रही है।   रुपया कमजोर, डॉलर मजबूत शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा Indian Rupee 11 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.79 पर पहुंच गई। आयातकों की बढ़ती डॉलर मांग और विदेशी पूंजी की निकासी इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।   आगे क्या रहेगा रुख? विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की आगे की दिशा वैश्विक घटनाक्रम, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिकी नीतियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।  

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Stock Market: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, निफ्टी में भी बिकवाली

मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। BSE Sensex 200 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 24,050 के नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 208 अंक गिरकर 77,094 के आसपास पहुंचा, वहीं निफ्टी भी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। हालांकि बाद में बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी दिखाई और दोनों सूचकांक हल्की बढ़त के साथ ट्रेड करने लगे।   बड़े शेयरों में कमजोरी, मिडकैप-स्मॉलकैप में मजबूती बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद व्यापक बाजार में थोड़ी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई। इस दौरान State Bank of India, Axis Bank, Sun Pharmaceutical और IndiGo के शेयरों में गिरावट रही। वहीं Adani Ports, TCS, Larsen & Toubro और Mahindra & Mahindra के शेयरों में बढ़त देखी गई।   कच्चे तेल और वैश्विक तनाव का असर बाजार की गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण प्रमुख रहे। Brent Crude की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कमजोर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों पर दबाव बना है।   एफआईआई बिकवाली और रुपये में कमजोरी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की है। इसके साथ ही भारतीय रुपया भी कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले गिरावट में रहा, जिससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई।   आगे का आउटलुक विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार “कंसोलिडेशन” के दौर में है। आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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