फैशन और ब्यूटी

Perfume Long Lasting Tips: गर्मियों में लंबे समय तक महकना है तो अपनाएं ये आसान उपाय

abhishek singh जून 16, 2026 0
Perfume Long Lasting Tips
Perfume Long Lasting Tips

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में तेज धूप, बढ़ता पसीना और शरीर का उच्च तापमान परफ्यूम की खुशबू को जल्दी खत्म कर देते हैं। ऐसे में कई लोग महंगे परफ्यूम का इस्तेमाल करने के बावजूद लंबे समय तक उसकी फ्रेगरेंस का आनंद नहीं ले पाते। हालांकि, कुछ आसान ब्यूटी टिप्स अपनाकर परफ्यूम की खुशबू को पूरे दिन तक बरकरार रखा जा सकता है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार


विशेषज्ञों के अनुसार, परफ्यूम लगाने से पहले त्वचा पर बिना खुशबू वाला मॉइस्चराइजर लगाना फायदेमंद होता है। मॉइस्चराइज्ड त्वचा फ्रेगरेंस को बेहतर तरीके से होल्ड करती है, जिससे खुशबू अधिक समय तक बनी रहती है। इसके अलावा परफ्यूम को शरीर के पल्स पॉइंट्स जैसे कलाई, गर्दन और कानों के पीछे लगाना सबसे प्रभावी माना जाता है। इन स्थानों की गर्माहट धीरे-धीरे खुशबू को रिलीज करती रहती है।

 

कहां  कहां लगा सकते  है परफ्यूम  ?


सिर्फ त्वचा ही नहीं, कपड़ों पर भी हल्का परफ्यूम स्प्रे किया जा सकता है, जिससे महक लंबे समय तक बनी रहती है। हालांकि, सिल्क या अन्य नाजुक कपड़ों पर सीधे स्प्रे करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दाग पड़ सकते हैं।


परफ्यूम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसका सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है। इसे हमेशा धूप, गर्मी और नमी से दूर किसी ठंडी एवं अंधेरी जगह पर रखें। गलत तरीके से रखने पर परफ्यूम की खुशबू और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।


गर्मियों के लिए हल्के और फ्रेश नोट्स वाले परफ्यूम सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। सिट्रस, एक्वा और फ्लोरल फ्रेगरेंस न केवल ताजगी का एहसास कराते हैं, बल्कि मौसम के अनुसार अधिक आरामदायक भी होते हैं। वहीं, बहुत तेज और भारी खुशबू गर्मियों में असहज महसूस करा सकती है।

 

इन आसान उपायों को अपनाकर आप पूरे दिन ताजगी भरी खुशबू का आनंद ले सकते हैं और बार-बार परफ्यूम लगाने की जरूरत भी कम हो जाएगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Perfume Long Lasting Tips: गर्मियों में लंबे समय तक महकना है तो अपनाएं ये आसान उपाय

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में तेज धूप, बढ़ता पसीना और शरीर का उच्च तापमान परफ्यूम की खुशबू को जल्दी खत्म कर देते हैं। ऐसे में कई लोग महंगे परफ्यूम का इस्तेमाल करने के बावजूद लंबे समय तक उसकी फ्रेगरेंस का आनंद नहीं ले पाते। हालांकि, कुछ आसान ब्यूटी टिप्स अपनाकर परफ्यूम की खुशबू को पूरे दिन तक बरकरार रखा जा सकता है।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, परफ्यूम लगाने से पहले त्वचा पर बिना खुशबू वाला मॉइस्चराइजर लगाना फायदेमंद होता है। मॉइस्चराइज्ड त्वचा फ्रेगरेंस को बेहतर तरीके से होल्ड करती है, जिससे खुशबू अधिक समय तक बनी रहती है। इसके अलावा परफ्यूम को शरीर के पल्स पॉइंट्स जैसे कलाई, गर्दन और कानों के पीछे लगाना सबसे प्रभावी माना जाता है। इन स्थानों की गर्माहट धीरे-धीरे खुशबू को रिलीज करती रहती है।   कहां  कहां लगा सकते  है परफ्यूम  ? सिर्फ त्वचा ही नहीं, कपड़ों पर भी हल्का परफ्यूम स्प्रे किया जा सकता है, जिससे महक लंबे समय तक बनी रहती है। हालांकि, सिल्क या अन्य नाजुक कपड़ों पर सीधे स्प्रे करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दाग पड़ सकते हैं। परफ्यूम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसका सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है। इसे हमेशा धूप, गर्मी और नमी से दूर किसी ठंडी एवं अंधेरी जगह पर रखें। गलत तरीके से रखने पर परफ्यूम की खुशबू और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। गर्मियों के लिए हल्के और फ्रेश नोट्स वाले परफ्यूम सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। सिट्रस, एक्वा और फ्लोरल फ्रेगरेंस न केवल ताजगी का एहसास कराते हैं, बल्कि मौसम के अनुसार अधिक आरामदायक भी होते हैं। वहीं, बहुत तेज और भारी खुशबू गर्मियों में असहज महसूस करा सकती है।   इन आसान उपायों को अपनाकर आप पूरे दिन ताजगी भरी खुशबू का आनंद ले सकते हैं और बार-बार परफ्यूम लगाने की जरूरत भी कम हो जाएगी।

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क्या रोज़ाना ब्रो जेल लगाने से आइब्रो को नुकसान हो सकता है? जानिए एक्सपर्ट की राय

आजकल आइब्रो मेकअप सिर्फ बालों को सेट करने तक सीमित नहीं रह गया है। फ्लफी, लैमिनेटेड या नेचुरल लुक पाने के लिए ब्रो जेल कई लोगों की डेली ब्यूटी रूटीन का हिस्सा बन चुका है। लेकिन रोज़ाना इसका इस्तेमाल करने वालों के मन में एक सवाल जरूर आता है—क्या इससे आइब्रो के बाल कमजोर हो सकते हैं? क्या हर दिन ब्रो जेल लगाना सुरक्षित है? ब्यूटी एक्सपर्ट मोनिका अरांगुएज़न के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में रोज़ ब्रो जेल लगाने से आइब्रो की ग्रोथ या उनकी गुणवत्ता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। असली समस्या तब होती है जब: प्रोडक्ट में बहुत ज्यादा कठोर या ड्राइंग इंग्रीडिएंट्स हों। मेकअप हटाते समय बालों को जोर से रगड़ा जाए। रात में बिना सफाई किए प्रोडक्ट लगा रहने दिया जाए। खराब गुणवत्ता या एक्सपायर्ड प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाए। इन आदतों से आइब्रो के बाल कमजोर होकर टूट सकते हैं। अच्छा ब्रो जेल कैसा होना चाहिए? एक अच्छा ब्रो जेल: बालों को बिना कठोर बनाए सेट करे। आसानी से हट जाए। मॉइस्चराइजिंग और कंडीशनिंग तत्वों से भरपूर हो। त्वचा में खुजली, जलन या रूखापन पैदा न करे। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे प्रोडक्ट्स से बचें जिनमें अत्यधिक ड्राइंग अल्कोहल, तेज़ खुशबू या त्वचा को परेशान करने वाले तत्व मौजूद हों। ब्रो जेल लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान? जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट न लगाएं। ब्रश को बहुत जोर से न चलाएं। दिनभर आइब्रो को बार-बार छूने या सेट करने से बचें। मेकअप हटाते समय रगड़ने के बजाय जेंटल क्लेंजर का इस्तेमाल करें। सोने से पहले आइब्रो की अच्छी तरह सफाई जरूर करें। क्लियर या कलर्ड ब्रो जेल, कौन बेहतर? क्लियर ब्रो जेल उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जिनकी आइब्रो पहले से घनी हैं और जो नेचुरल लुक चाहते हैं। कलर्ड ब्रो जेल पतली या गैप वाली आइब्रो को भरा हुआ और अधिक डिफाइंड दिखाने में मदद करता है। फाइबर वाले जेल वॉल्यूम भी बढ़ाते हैं, लेकिन इन्हें हटाने के लिए अच्छी सफाई जरूरी होती है। आइब्रो को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? रोज़ रात को मेकअप पूरी तरह हटाएं। आइब्रो के आसपास की त्वचा को मॉइस्चराइज रखें। जरूरत से ज्यादा थ्रेडिंग या प्लकिंग से बचें। अच्छी गुणवत्ता वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स चुनें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही प्रोडक्ट और सही तकनीक अपनाई जाए, तो रोज़ाना ब्रो जेल का इस्तेमाल करना नुकसानदायक नहीं है। खूबसूरत आइब्रो सिर्फ स्टाइलिंग से नहीं, बल्कि उनकी सही देखभाल से भी बनती हैं।  

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अभिनेत्री Rashmika Mandanna इन दिनों अपनी आगामी फिल्म Cocktail 2 के प्रमोशन को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान उन्होंने ऐसा फैशन लुक पेश किया, जिसने ग्लैमर और पारंपरिक रेड-कार्पेट स्टाइल से हटकर जेंडर-न्यूट्रल फैशन को नई पहचान दी। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया और फैशन जगत में चर्चा का विषय बन गया है। रिलैक्स्ड टेलरिंग के जरिए पेश किया नया फैशन ट्रेंड प्रमोशनल इवेंट के लिए रश्मिका ने डिजाइनर लेबल Rishta by Arjun Saluja की पाउडर ब्लू स्लीवलेस शर्ट को चुना। इसके साथ उन्होंने The Frankie Shop की ग्रे पिनस्ट्राइप, प्लिटेड और रिलैक्स्ड-फिट ट्राउजर पहनी। यह लुक बेहद सहज, आरामदायक और आधुनिक नजर आया, जो जेंडर-अग्नॉस्टिक ड्रेसिंग की खूबसूरती को दर्शाता है। विंटेज Givenchy टाई बनी पूरे लुक का आकर्षण रश्मिका की स्टाइलिस्ट Priyanka Kapadia ने इस आउटफिट को खास बनाने के लिए प्रपोर्शन और लेयरिंग पर विशेष ध्यान दिया। सॉफ्ट फैब्रिक वाली शर्ट को हाई-वेस्ट वाइड-लेग ट्राउजर के साथ पेयर किया गया। हालांकि इस लुक का सबसे आकर्षक हिस्सा था लक्जरी फैशन हाउस Givenchy की विंटेज ग्रे लोगो टाई। इसे जानबूझकर ढीले अंदाज में पहना गया, जिससे पूरे लुक में ‘बॉरोड-फ्रॉम-द-बॉयज’ एस्थेटिक और आत्मविश्वास का स्पर्श जुड़ गया। एंड्रोजिनस फैशन को पहले भी अपना चुकी हैं रश्मिका यह पहली बार नहीं है जब रश्मिका ने जेंडर-न्यूट्रल या एंड्रोजिनस फैशन को अपनाया हो। Cocktail 2 के प्रमोशनल टूर के दौरान वह पहले भी H&M और Stella McCartney के सहयोग से तैयार किए गए कलेक्शन में नजर आ चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने ओवरसाइज्ड डबल-ब्रेस्टेड वूल ब्लेजर, क्रिस्टल-एम्बेलिश्ड मेश बॉडीसूट और टू-टोन स्ट्रेट-लेग जींस को स्टाइल किया था। उनके इस प्रयोगात्मक फैशन सेंस को फैशन एक्सपर्ट्स ने भी सराहा था। मिनिमल एक्सेसरीज़ ने बढ़ाई आउटफिट की खूबसूरती रश्मिका ने अपने लुक को ओवरस्टाइल करने के बजाय मिनिमल रखा। उन्होंने जूलरी ब्रांड Marvi के कुछ सटल पीसेज़ पहने और फुटवियर के लिए Jimmy Choo के Brigitte 100 पंप्स को चुना। कम एक्सेसरीज़ के बावजूद उनका पूरा लुक बेहद संतुलित और स्टाइलिश दिखाई दिया। नैचुरल मेकअप और सॉफ्ट कर्ल्स ने किया लुक को कम्प्लीट ब्यूटी लुक की बात करें तो अभिनेत्री ने सॉफ्ट और एलिगेंट मेकअप को प्राथमिकता दी। ग्लोइंग बेस, स्मोकी आई मेकअप और न्यूड लिप्स ने उनके चेहरे की नैचुरल खूबसूरती को उभारा। वहीं, बालों को खुले रखते हुए सॉफ्ट और लूज़ कर्ल्स में स्टाइल किया गया, जिसने पूरे लुक में सहजता और परिष्कृत आकर्षण जोड़ दिया। फैशन के जरिए आत्मविश्वास और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का संदेश रश्मिका मंदाना का यह लुक केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि बदलते फैशन ट्रेंड्स का भी संकेत है। आज की युवा पीढ़ी ऐसे आउटफिट्स को पसंद कर रही है जो जेंडर की सीमाओं से परे जाकर आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को महत्व देते हैं। रश्मिका का यह अंदाज उसी सोच को मजबूती से सामने लाता है।  

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Kriti Sanon ने Cocktail 2 के प्रमोशन में पहनी Nensi Dojaka की स्टाइलिश मोनोक्रोम मैक्सी ड्रेस, ग्लैमरस लुक ने खींचा ध्यान

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