David Miller

Punjab Kings captain Shreyas Iyer and spinner Yuzvendra Chahal during IPL 2026 match against Delhi Capitals
PBKS की हार पर उठे सवाल, क्या युजवेंद्र चहल को गेंदबाजी न देना पड़ा भारी?

Indian Premier League में Punjab Kings की लगातार चौथी हार के बाद टीम की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। Delhi Capitals के खिलाफ 211 रन का बड़ा स्कोर बनाने के बावजूद पंजाब मुकाबला हार गया, और सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कप्तान Shreyas Iyer ने अनुभवी स्पिनर Yuzvendra Chahal से एक भी ओवर क्यों नहीं करवाया। यह आईपीएल इतिहास में सिर्फ चौथा मौका था जब Yuzvendra Chahal ने पूरे मैच में एक भी गेंद नहीं डाली। खास बात यह रही कि धर्मशाला में खेले गए इस मुकाबले के सभी 39 ओवर तेज गेंदबाजों ने फेंके। अभिषेक मुकुंद ने बताया कहां हुई गलती पूर्व भारतीय ओपनर Abhinav Mukund ने मैच के बाद कहा कि पंजाब को मध्य ओवरों में चहल को कम से कम एक-दो ओवर जरूर देने चाहिए थे। उनके मुताबिक, जब स्कोरबोर्ड का दबाव था तब विकेट निकालने के लिए जोखिम लिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सातवें से दसवें ओवर के बीच चहल को गेंदबाजी दी जा सकती थी, खासकर उस समय जब Axar Patel और Tristan Stubbs बल्लेबाजी कर रहे थे। अगर प्रयोग सफल नहीं होता, तो टीम के पास Marcus Stoinis जैसे विकल्प मौजूद थे। Miller और Axar ने बदल दिया मैच दिल्ली की जीत में David Miller और Axar Patel की अहम भूमिका रही। दोनों बल्लेबाजों ने मध्य ओवरों में रन गति बनाए रखी और पंजाब के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। पूर्व न्यूजीलैंड तेज गेंदबाज Mitchell McClenaghan का मानना है कि चहल को खास तौर पर डेविड मिलर के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि मिलर अपने शुरुआती ओवरों में लेग स्पिन के खिलाफ थोड़ा सतर्क रहते हैं और चहल उनके लिए खतरा बन सकते थे। पंजाब ने डेथ ओवरों में गंवाया नियंत्रण पंजाब ने डेथ ओवरों में Marcus Stoinis और युवा तेज गेंदबाज Yash Thakur पर भरोसा जताया। उस समय दिल्ली को जीत के लिए 38 रन चाहिए थे, लेकिन दिल्ली के बल्लेबाजों ने दोनों ओवरों में तेजी से रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। श्रेयस अय्यर ने क्या कहा? मैच के बाद कप्तान Shreyas Iyer ने माना कि चहल को गेंदबाजी देने पर विचार किया गया था। हालांकि उनका कहना था कि पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद मिल रही थी और टीम को लगा कि सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी कर विकेट निकाले जा सकते हैं। लेकिन पंजाब के गेंदबाज उस योजना को पूरी तरह लागू नहीं कर सके और दिल्ली ने 19 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। अब भी प्लेऑफ की उम्मीद बरकरार लगातार चार हार के बावजूद Punjab Kings की प्लेऑफ उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। टीम के तीन मुकाबले बाकी हैं, जिनमें दो मैच निचले पायदान पर मौजूद Mumbai Indians और Lucknow Super Giants के खिलाफ हैं। ऐसे में पंजाब के पास वापसी का मौका अभी भी मौजूद है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Delhi Capitals players celebrating victory over Punjab Kings in IPL 2026 match at Dharamshala stadium
IPL 2026 Points Table: दिल्ली की जीत से बदला समीकरण, पंजाब को लगातार चौथी हार

Indian Premier League के 55वें मुकाबले में Delhi Capitals ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Punjab Kings को 3 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ दिल्ली कैपिटल्स को अंक तालिका में बड़ा फायदा मिला है, जबकि पंजाब किंग्स की लगातार चौथी हार ने टीम की चिंता बढ़ा दी है। धर्मशाला के Himachal Pradesh Cricket Association Stadium में खेले गए मुकाबले में दिल्ली ने 211 रनों का बड़ा लक्ष्य हासिल कर सीजन की पांचवीं जीत दर्ज की। इस जीत के बाद दिल्ली की टीम सातवें स्थान पर पहुंच गई है। दिल्ली को जीत से मिला बड़ा फायदा Delhi Capitals अब 12 मैचों में 5 जीत और 10 अंकों के साथ अंक तालिका में सातवें स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि टीम का नेट रन रेट अभी भी -0.993 है। वहीं Punjab Kings हार के बावजूद चौथे स्थान पर बनी हुई है। पंजाब के खाते में 11 मैचों में 6 जीत और 13 अंक हैं। अंक तालिका में फिलहाल शीर्ष स्थान पर Royal Challengers Bengaluru मौजूद है। टीम ने 11 मुकाबलों में 14 अंक हासिल किए हैं और उसका नेट रन रेट +1.103 है। IPL 2026 अपडेटेड पॉइंट्स टेबल स्थान टीम मैच जीत हार अंक नेट रन रेट 1 रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 11 7 4 14 +1.103 2 सनराइजर्स हैदराबाद 11 7 4 14 +0.737 3 गुजरात टाइटंस 11 7 4 14 +0.228 4 पंजाब किंग्स 11 6 4 13 +0.428 5 चेन्नई सुपर किंग्स 11 6 5 12 +0.185 6 राजस्थान रॉयल्स 11 6 5 12 +0.082 7 दिल्ली कैपिटल्स 12 5 7 10 -0.993 8 कोलकाता नाइट राइडर्स 10 4 5 9 -0.169 9 मुंबई इंडियंस 11 3 8 6 -0.585 10 लखनऊ सुपर जायंट्स 11 3 8 6 -0.907 ऐसा रहा मुकाबला Delhi Capitals ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए Punjab Kings ने 4 विकेट के नुकसान पर 210 रन बनाए। पंजाब की ओर से Shreyas Iyer और Priyansh Arya ने शानदार अर्धशतकीय पारियां खेलीं। दोनों बल्लेबाजों की मदद से टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया। 211 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की शुरुआत उतनी मजबूत नहीं रही, लेकिन कप्तान Axar Patel और David Miller ने शानदार अर्धशतक लगाकर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। आखिर में Ashutosh Sharma ने तेज 24 रन बनाकर दिल्ली को 19 ओवर में जीत दिला दी। प्लेऑफ की रेस हुई और रोमांचक Indian Premier League में अब प्लेऑफ की जंग और दिलचस्प हो गई है। दिल्ली की जीत ने निचले क्रम की टीमों की उम्मीदें जिंदा रखी हैं, जबकि पंजाब की लगातार हार ने टीम पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले मुकाबले अब सभी टीमों के लिए बेहद अहम साबित होंगे।  

surbhi मई 12, 2026 0
David Miller reacts after missing a shot during DC vs GT IPL 2026 last-over thriller.
DC vs GT: डेविड मिलर की ‘ब्रेन फेड’ गलती से हारी दिल्ली, आखिरी गेंद तक गया रोमांचक मुकाबला

आईपीएल 2026 के बेहद रोमांचक मुकाबले में Delhi Capitals को Gujarat Titans के खिलाफ सिर्फ 1 रन से हार का सामना करना पड़ा। यह मैच आखिरी गेंद तक गया, लेकिन अंत में एक छोटी सी गलती ने दिल्ली से जीत छीन ली। इस हार के केंद्र में रहे David Miller, जिनके ‘ब्रेन फेड’ फैसले ने मैच का रुख बदल दिया। आखिरी पलों में क्या हुई चूक? दिल्ली को जीत के लिए अंतिम दो गेंदों पर सिर्फ 2 रन चाहिए थे। ऐसे में प्रसिद्ध कृष्णा की दूसरी आखिरी गेंद पर मिलर के पास सिंगल लेने का मौका था, जिससे स्कोर बराबर हो सकता था और मैच सुपर ओवर में जा सकता था। लेकिन मिलर ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में सिंगल लेने से इनकार कर दिया। आखिरी गेंद पर भी वह बड़ा शॉट नहीं लगा पाए और दबाव में चूक गए। इसके बाद रन लेने की कोशिश में Kuldeep Yadav रन आउट हो गए, जहां Jos Buttler ने विकेट के पीछे शानदार भूमिका निभाई। इस तरह दिल्ली की टीम जीत के बेहद करीब पहुंचकर भी हार गई। राहुल की पारी गई बेकार इस मैच में KL Rahul ने 52 गेंदों में 92 रनों की शानदार पारी खेली थी, जबकि Pathum Nissanka ने 41 रन बनाकर अच्छी शुरुआत दिलाई। वहीं मिलर ने भी 40+ की उपयोगी पारी खेली, लेकिन अंत का एक फैसला भारी पड़ गया। गुजरात की दमदार बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात के कप्तान Shubman Gill ने 70 रन की शानदार पारी खेली। उनके अलावा Jos Buttler (52 रन) और Washington Sundar (55 रन) ने टीम को 210 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। क्रिकेट में एक छोटी सी गलती भी मैच का नतीजा बदल सकती है और इस मुकाबले में वही देखने को मिला। डेविड मिलर का यह फैसला लंबे समय तक चर्चा में रहेगा और दिल्ली के लिए यह हार एक बड़ा सबक बन सकती है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Mamata Banerjee Exit
ओपिनीयन

दीदी, स्टालिन व वाम की विदाई

Anjali Kumari मई 5, 2026 0