नैनीताल, एजेंसियां। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सड़क परियोजना के लिए करीब 7,000 पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मामला देहरादून के असारोड़ी-जाझरा क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क परियोजना से जुड़ा है, जहां बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने की योजना का विरोध किया जा रहा है। याचिका में पर्यावरण नुकसान का उठाया गया मुद्दा याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ सकता है। याचिका में सड़क निर्माण के दौरान पर्यावरण संरक्षण के नियमों और वन कानूनों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर सुनवाई अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी, पेड़ों की कटाई की अनुमति, पर्यावरणीय मंजूरी और उठाए गए संरक्षण उपायों पर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई में सरकारों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। उत्तराखंड में पहले भी सड़क परियोजनाओं पर उठे सवाल इससे पहले भी उत्तराखंड में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं को लेकर पेड़ों की कटाई का विरोध हुआ है। देहरादून-ऋषिकेश मार्ग चौड़ीकरण परियोजना में हजारों पेड़ों को हटाने के प्रस्ताव के खिलाफ पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने कुछ हिस्सों में पेड़ कटाई रोकने का फैसला लिया था।
देहरादून, एजेंसियां। पंजाबी सिंगर जैस्मीन सैंडलस के 17 जुलाई को देहरादून में आयोजित लाइव कॉन्सर्ट के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इन पोस्ट में कुछ यूजर्स ने दावा किया कि कार्यक्रम के दौरान सिंगर के साथ कथित छेड़छाड़ हुई। हालांकि, अब तक इस संबंध में जैस्मीन सैंडलस या उनकी टीम की ओर से कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, और न ही पुलिस ने ऐसी किसी घटना की पुष्टि की है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ यह कार्यक्रम भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम की ओर से आयोजित लोकपर्व के तहत देहरादून के परेड ग्राउंड में हुआ था। शो के दौरान जैस्मीन ने स्वयं कुछ महिला प्रशंसकों को स्टेज के पास बुलाया। कई फैंस ने उनके साथ फोटो खिंचवाई, वीडियो बनाए और उन्हें गुलाब भी भेंट किए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो इन्हीं पलों के बताए जा रहे हैं, जिन्हें अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम के दौरान जैस्मीन ने महिला सुरक्षा और कार्यक्रम में मौजूद लड़कियों की सुरक्षा का भी उल्लेख किया। शो लगभग डेढ़ घंटे तक बिना किसी व्यवधान के चला। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस बल और जैस्मीन की निजी सुरक्षा टीम मौके पर मौजूद थी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सिंगर बिना किसी शिकायत के अपने अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गईं। जैस्मीन सैंडलस कहां की रहने वाली है ? जैस्मीन सैंडलस पंजाब के जालंधर की रहने वाली हैं और बचपन से ही संगीत में रुचि रखती थीं। 13 वर्ष की उम्र में उनका परिवार अमेरिका के कैलिफोर्निया चला गया, जहां उन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। शुरुआती दिनों में वे क्लबों के बाहर अपनी म्यूजिक सीडी बेचती थीं। बाद में 'गुलाबी', 'यार ना मिले' और 'इलीगल वेपन' जैसे लोकप्रिय गीतों से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। फिलहाल, वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार किसी कथित छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में तथ्य सामने आने तक अपुष्ट दावों से बचना और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना आवश्यक है।
देहरादून, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। कांग्रेस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों की समस्याओं को सुनकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमला कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि "यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की चोरी है।" उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। छात्रों से सीधे संवाद करेंगे राहुल कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी कार्यक्रम के दौरान छात्रों के सवालों का जवाब देंगे और भर्ती परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनके सुझाव भी सुनेंगे। अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जा सके। राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा कार्यक्रम विश्लेषकों के अनुसार, उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम केवल छात्र संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस के युवा संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संसद के मानसून सत्र से पहले यह कार्यक्रम युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर निहंग सिखों और उत्तराखंड प्रशासन के बीच बना तनाव आखिरकार कई घंटे चली बातचीत के बाद समाप्त हो गया। कर्णप्रयाग झड़प और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर राज्य में प्रवेश की घोषणा के बाद सीमा पर बड़ी संख्या में निहंग सिख एकत्र हुए थे। प्रशासन के साथ सफल वार्ता के बाद अधिकांश लोग वापस लौट गए, जिससे क्षेत्र में हालात सामान्य होने लगे। कर्णप्रयाग और नगरासू विवाद के बाद बढ़ा था तनाव निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग झड़प और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड में प्रवेश करने की घोषणा की थी। इसके बाद देहरादून और सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कुल्हाल चेक पोस्ट पर जुटे सैकड़ों निहंग सिख गुरुवार को सैकड़ों निहंग सिख उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट के पास पहुंच गए। पहला जत्था दिनभर हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारा पांवटा साहिब में रुका रहा, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे कई दौर की बातचीत की और उत्तराखंड की ओर प्रस्तावित मार्च को टालने का आग्रह किया। हाई अलर्ट पर रहा प्रशासन, जगह-जगह की गई बैरिकेडिंग शुरुआती दौर में बातचीत से समाधान नहीं निकलने पर प्रशासन ने सीमा क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखी। वार्ता सफल होने के बाद लौटने लगे निहंग सिख लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद माहौल शांत होने लगा। निहंग सिख छोटे-छोटे समूहों में वहां से लौटने लगे। देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी की ओर जाने वाले मार्ग बंद होने के कारण कई लोग वापस हिमाचल प्रदेश लौट गए। कुछ प्रतिनिधि देहरादून में रुके प्रशासन ने कुछ निहंग सिखों को देहरादून स्थित गुरुद्वारा गोबिंद नगर, रेसकोर्स में ठहराया है। यहां प्रशासन और प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत जारी रहने की संभावना है, ताकि विवाद से जुड़े मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। प्रशासन ने ली राहत की सांस सीमा पर बिना किसी हिंसक घटना के तनाव समाप्त होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है।
Droupadi Murmu अगले महीने तीन दिवसीय दौरे पर Uttarakhand जाएंगी। इस दौरान वह देहरादून स्थित Indian Military Academy की पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी और Kedarnath Temple में पूजा-अर्चना भी करेंगी। 12 जून को देहरादून पहुंचेंगी राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 12 जून को देहरादून पहुंचेंगी। यहां वह राजपुर रोड स्थित राष्ट्रपति आशियाना में ठहरेंगी और विभिन्न गणमान्य लोगों से मुलाकात करेंगी। IMA परेड की लेंगी सलामी 13 जून को राष्ट्रपति भारतीय सैन्य अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस दौरान वह परेड की सलामी लेंगी। यह पहला मौका होगा जब राष्ट्रपति मुर्मू IMA की पासिंग आउट परेड की सलामी लेंगी। यह समारोह सैन्य अधिकारियों के लिए बेहद खास और गौरवपूर्ण माना जाता है। 14 जून को केदारनाथ धाम जाएंगी राष्ट्रपति 14 जून को केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन करेंगी और पूजा-अर्चना करेंगी। दर्शन के बाद वह दोपहर में हवाई मार्ग से नई दिल्ली रवाना हो जाएंगी। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव Anand Bardhan की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक कर सुरक्षा और प्रोटोकॉल की समीक्षा की गई है। देहरादून से लेकर केदारनाथ तक पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे। प्रशासन राष्ट्रपति के दौरे को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में जुटा हुआ है।
जमशेदपुर। गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में अदालत ने जमशेदपुर के छह आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वारंट जारी होने के बाद पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। बताया जा रहा है कि सभी आरोपियों पर पहले से ही 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित है। हत्या के 26 दिन बाद भी मुख्य शूटर और साजिशकर्ता पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इन आरोपियों के खिलाफ जारी हुआ वारंट अदालत द्वारा जिन आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है, उनमें बागबेड़ा थाना क्षेत्र के अंकित वर्मा, आशुतोष सिंह, विशाल सिंह, आकाश कुमार प्रसाद और यशराज सिंह शामिल हैं। इसके अलावा मानगो के ओलीडीह निवासी जितेंद्र कुमार साहू का नाम भी इस सूची में शामिल है। जमशेदपुर में लगातार दबिश सूत्रों के अनुसार, Uttarakhand Special Task Force और Dehradun Police की टीम लगातार Jamshedpur में छापेमारी कर रही है। टीम ने बागबेड़ा, जुगसलाई और मानगो इलाके में कई बार दबिश दी है, लेकिन अब तक मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके हैं। अब तक दो मददगार गिरफ्तार इस हत्याकांड में पुलिस अब तक दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें बागबेड़ा थाना क्षेत्र के गाराबासा निवासी राजकुमार सिंह और ग्रेटर नोएडा से मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन दोनों पर हत्या में आरोपियों की मदद करने का आरोप है। 13 फरवरी को हुई थी हत्या बताया जाता है कि 13 फरवरी को Dehradun के सिल्वर मॉल के पास गैंगस्टर विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी। जांच में जमशेदपुर कनेक्शन सामने आने के बाद से पुलिस की टीमें झारखंड में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।