Assam Flood Relief: असम में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए रिलायंस फाउंडेशन ने बड़ा कदम उठाया है। फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरपर्सन नीता अंबानी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 21 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। यह राशि बाढ़ प्रभावित परिवारों के राहत, पुनर्वास और जरूरी सुविधाओं की बहाली पर खर्च की जाएगी। इसके साथ ही रिलायंस फाउंडेशन और वंतारा की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, स्वास्थ्य सेवाएं और पशुओं के उपचार का काम भी कर रही हैं। नीता अंबानी बोलीं- इस मुश्किल घड़ी में असम अकेला नहीं नीता अंबानी ने कहा कि असम के लोगों का साहस और धैर्य हमेशा प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में पूरा रिलायंस परिवार राज्य के लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, "हमारी प्रार्थनाएं और संवेदनाएं असम के लोगों के साथ हैं। इस संकट की घड़ी में आप अकेले नहीं हैं। रिलायंस फाउंडेशन, वंतारा और रिलायंस परिवार की टीमें राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हरसंभव सहायता पहुंचा रही हैं। हम आज भी आपके साथ हैं और आगे भी रहेंगे।" मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जताया आभार असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के माध्यम से नीता अंबानी और रिलायंस फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी रिलायंस फाउंडेशन ने राज्य की मदद की थी और अब बाढ़ जैसी आपदा में 21 करोड़ रुपये की सहायता देकर एक बार फिर मानवीय जिम्मेदारी निभाई है। मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों में जुटी फाउंडेशन और वंतारा की टीमों की भी सराहना की। 50 हजार लोगों तक राहत पहुंचाने का लक्ष्य रिलायंस फाउंडेशन फिलहाल बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर और चराइदेव जिलों में राहत अभियान चला रहा है। संस्था का लक्ष्य करीब 50 हजार जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना है। राहत अभियान के तहत— सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों की सफाई और आवश्यक सेवाओं को बहाल किया जा रहा है। अस्थायी आश्रय स्थलों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। वंतारा की टीमें पशुओं के उपचार में भी जुटीं रिलायंस समूह की पहल वंतारा की पशु चिकित्सा टीमें भी प्रभावित गांवों में सक्रिय हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर घर-घर जाकर बाढ़ से प्रभावित पशुओं का इलाज, टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को जल्द सामान्य स्थिति में लौटाने में मदद करना है। रिलायंस फाउंडेशन ने कहा कि उसका प्रयास केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि बाढ़ प्रभावित समुदायों के पुनर्वास, गांवों के पुनर्निर्माण और लोगों को फिर से सामान्य जीवन में लौटाने में भी हरसंभव सहयोग देना है।
Assam Floods: असम के शिवसागर जिले में आई भीषण बाढ़ के बीच कुछ स्थानीय लोगों ने साहस और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सभी का दिल जीत लिया। जब चारों ओर पानी ही पानी था और सरकारी मदद पहुंचने में समय लग रहा था, तब गांव के लोगों ने अपनी सिर्फ छह देसी नावों के सहारे पांच गांवों के 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने घंटों तक लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया। कुछ ही घंटों में बाढ़ ने बदले हालात 19 जुलाई को शिवसागर जिले में लगातार बारिश के बाद आई बाढ़ ने कुछ ही घंटों में कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। घर, सड़कें और खेत जलमग्न हो गए। कई परिवार अपने घरों की छतों, पेड़ों और ऊंचे स्थानों पर फंस गए। ऐसे समय में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने खुद ही राहत अभियान की जिम्मेदारी संभाल ली। रेस्क्यू अभियान में शामिल चौहान चौधरी ने बताया कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा, "हमने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। हमारे पास सिर्फ छह नावें थीं। जिनके घर टूट गए थे या जो पानी में फंस गए थे, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। पांच गांवों से 1,000 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला गया।" पहले परिवार को बचाया, फिर दूसरों की मदद में जुट गए रेस्क्यू टीम के सदस्य कनहैया चौधरी ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जब वह घर का सामान निकालने लौटे, तो लगातार मदद के फोन आने लगे। उन्होंने कहा, "उस वक्त लगा कि सामान बाद में भी मिल जाएगा, लेकिन अगर लोगों को नहीं बचाया तो बहुत देर हो जाएगी। इसके बाद हम लगातार नाव लेकर अलग-अलग गांवों में लोगों को निकालने निकल पड़े।" रात एक बजे तक बिना रुके चलता रहा अभियान रेस्क्यू में शामिल राजकुमार राजबीर ने बताया कि उनकी टीम रात करीब एक बजे तक बिना खाना और पानी के लगातार लोगों को बचाती रही। रास्ते में किसी ने पानी पिलाया, फिर अगली सुबह दोबारा नाव लेकर राहत अभियान शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उस समय किसी ने अपनी थकान या भूख की परवाह नहीं की, सभी का एक ही उद्देश्य था—ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाना। 'अपनी जान चली जाती तो भी मंजूर था' रेस्क्यू टीम के सदस्य मोहन चौधरी ने कहा कि हालात बेहद खतरनाक थे, लेकिन उस समय अपनी सुरक्षा से ज्यादा लोगों की जान बचाना जरूरी था। उन्होंने कहा, "हमें लगा कि हमारी जान भी जा सकती है, लेकिन उस समय लोगों को बचाना ज्यादा जरूरी था।" वहीं मिथु चौधरी ने बताया कि 19 जुलाई की सुबह चार बजे से पानी बढ़ना शुरू हुआ और दोपहर तक उनके घर में घुस गया। परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद उन्होंने भी दूसरे गांवों में फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू कर दिया। असम में अब तक 82 लोगों की मौत असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य में बाढ़ से अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है। 31 जुलाई तक की रिपोर्ट के मुताबिक पांच जिलों के 1.92 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है और कई गांव अब भी जलमग्न हैं। राहत कार्यों में आगे आए कई संगठन राज्य में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। सरकारी एजेंसियों के साथ कई सामाजिक और निजी संस्थाएं भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आई हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहत कार्यों में सहयोग के लिए रिलायंस फाउंडेशन की सराहना की, जिसने मुख्यमंत्री राहत कोष में 21 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। स्थानीय लोगों का यह साहसिक प्रयास दिखाता है कि आपदा की घड़ी में सामुदायिक एकजुटता और मानवता सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है। छह छोटी नावों से शुरू हुआ यह अभियान आज असम बाढ़ के सबसे प्रेरणादायक उदाहरणों में गिना जा रहा है।
काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में आए भीषण भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 58,870 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हजारों मौतों की आशंका अमेरिकी United States Geological Survey के आकलन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान और मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र के वेनेजुएला स्थित मानवीय समन्वयक Gianluca Rampolla ने बताया कि संभावित बढ़ती मृत्यु संख्या को देखते हुए सरकार और संयुक्त राष्ट्र लगभग 10,000 बॉडी बैग की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। राहत कार्यों में संसाधनों की कमी भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक La Guaira में राहत अभियान जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर ईंधन और भारी मशीनों की कमी के कारण मलबा हटाने का काम प्रभावित हो रहा है। भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद' भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ऑपरेशन अमिस्ताद (Operation Amistad) के तहत चिकित्सा सहायता अभियान शुरू किया है। भारतीय मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में घायलों का उपचार कर रही हैं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। S. Jaishankar ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर वेनेजुएला में तैनात भारतीय चिकित्सा दलों की सराहना करते हुए उनके मानवीय योगदान को प्रेरणादायक बताया। विदेश मंत्रालय ने साझा किए राहत कार्य Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें भारतीय फील्ड हॉस्पिटल की टीमें प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता देती दिखाई दे रही हैं। साझा किए गए वीडियो में स्थानीय नागरिकों ने भी भारतीय मेडिकल टीमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत की सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। नासा का आकलन NASA के शोधकर्ताओं के अनुसार, हालिया दोहरे भूकंपों से वेनेजुएला के मध्य और उत्तरी हिस्सों में करीब 58,870 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। राहत एजेंसियां अभी भी खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
India Operation Amistad Venezuela: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने बड़ा मानवीय राहत अभियान शुरू किया है। ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और सेना की विशेष मेडिकल टीम लेकर वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने त्वरित मानवीय सहायता मिशन शुरू किया है, जिसे ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ नाम दिया गया है। स्पेनिश भाषा में Amistad का अर्थ ‘दोस्ती’ होता है। यह नाम भारत और वेनेजुएला के बीच सहयोग और मानवीय संबंधों को दर्शाता है। C-17 विमानों से भेजी गई राहत सामग्री भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान हिंडन एयरबेस से वेनेजुएला के लिए रवाना हुए। इनमें शामिल हैं: 35 टन से अधिक राहत सामग्री दवाइयां और चिकित्सा उपकरण आपातकालीन राहत सामग्री दो BHISHM क्यूब्स (पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल) जयशंकर ने दी जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा: “ऑपरेशन अमिस्ताद जारी है। भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। इनमें भूकंप राहत के लिए जरूरी सहायता, भारतीय सेना की फील्ड हॉस्पिटल यूनिट और 35 टन से अधिक राहत सामग्री शामिल है।” क्या हैं BHISHM क्यूब्स? BHISHM (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित और मैत्री) क्यूब्स भारत की स्वदेशी तकनीक से विकसित पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल हैं। इन्हें युद्ध, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर तेजी से चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। मरून कैप में रवाना हुए भारतीय जवान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट से 41 सदस्यीय मेडिकल दल वेनेजुएला भेजा गया है। इसमें 9 मेडिकल अधिकारी शामिल हैं। यह टीम मरून बेरेट (Maroon Cap) में रवाना हुई, जो भारतीय सेना की एयरबोर्न और विशेष बलों की पहचान मानी जाती है। वेनेजुएला में तबाही का मंजर बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए। इन्हें देश में एक सदी के सबसे बड़े भूकंपों में गिना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान काराकस और ला ग्वायरा में हुआ, जहां कई इमारतें ढह गईं और हजारों लोग बेघर हो गए। मौत और घायल आंकड़ा संख्या मृतक 235+ घायल 1500+ लापता हजारों आपात स्थिति घोषित वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में पूर्ण आपात स्थिति घोषित कर दी है। सरकार ने पुनर्निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर 20 करोड़ डॉलर के फंड की घोषणा की है। दुनिया भर से मिल रही मदद भारत के अलावा अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली, मैक्सिको और बोलीविया समेत कई देशों ने भी वेनेजुएला को राहत सहायता देने की घोषणा की है।
वेनेजुएला, एजेंसियां। वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद पूरी दुनिया से संवेदनाएं और सहायता के प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। भारत ने भी इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वेनेजुएला की सरकार और वहां के लोगों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप से हुई तबाही से वह अत्यंत दुखी हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। साथ ही कहा कि इस कठिन समय में भारत वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है। दो शक्तिशाली भूकंपों से मची तबाही जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम वेनेजुएला में लगातार दो शक्तिशाली भूकंप आए। पहला झटका रिक्टर पैमाने पर 7.2 तीव्रता का था, जबकि लगभग 39 सेकंड बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली 7.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र कैरेबियाई तट के पास मोरोन क्षेत्र में था। झटकों का असर राजधानी कराकास समेत देश के कई हिस्सों में महसूस किया गया और कंपन लगभग 1,700 किलोमीटर दूर ब्राजील के अमेजन क्षेत्र तक पहुंचा। एयरपोर्ट बंद, आपातकाल लागू भूकंप के बाद कई इमारतों, मकानों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। देश के प्रमुख सिमोन बोलिवार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी क्षति पहुंची है, जिसके चलते उसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। हालात को देखते हुए सरकार ने देश में आपातकाल लागू कर दिया है और सभी आपात सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है। वैश्विक समर्थन की लहर वेनेजुएला की इस त्रासदी पर दुनिया के कई देशों और नेताओं ने समर्थन जताया है। विभिन्न देशों ने राहत और बचाव कार्यों में सहयोग की पेशकश की है। अधिकारियों के अनुसार, नुकसान का आकलन जारी है और मृतकों की संख्या हजारों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
मनीला, एजेंसियां। फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में स्थित मिंडानाओ द्वीप के पास आए शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक तबाही मचा दी। 8.1 तीव्रता के इस भूकंप के झटकों से कई इमारतें पलभर में धराशायी हो गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इमारतें ढहीं, लोग जान बचाकर भागे भूकंप के तेज झटकों के बाद लोग घरों, स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर भागने लगे। कई शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक भवनों को नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में इमारतों के गिरने और लोगों के बीच फैली दहशत साफ देखी जा सकती है। कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। सुनामी अलर्ट ने बढ़ाई चिंता भूकंप के बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने फिलीपींस के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों ने कुछ इलाकों में तीन मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई है। प्रशासन ने समुद्र तटों के पास रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। कई तटीय इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और राहत शिविर स्थापित किए गए। राहत और बचाव कार्य जारी सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। कई स्थानों पर मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका है। सड़कों में दरारें आने और भवनों को नुकसान पहुंचने से राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा अभी सामने आना बाकी है। आफ्टरशॉक से लोगों में डर कायम मुख्य भूकंप के कुछ घंटों बाद 6.1 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी दर्ज किया गया, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई। कई परिवार रातभर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। फिलीपींस 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं। इस बार का भूकंप हाल के वर्षों की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में माना जा रहा है।
प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे अफ़ग़ानिस्तान के लिए भारत ने एक बार फिर मानवता का परिचय दिया है। बाढ़ और भूकंप के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने वहां के लोगों की सहायता के लिए मानवीय मदद और आपदा राहत (HADR) सामग्री भेजी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि हाल ही में आई बाढ़ और भूकंप की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के लोग भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में भारत ने तुरंत सहायता पहुंचाने का फैसला लिया और राहत सामग्री भेजी। भारत द्वारा भेजी गई इस सहायता में रोज़मर्रा के इस्तेमाल की कई जरूरी चीजें शामिल हैं। इनमें किचन सेट, सफ़ाई का सामान, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। ये सभी सामान खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हैं, जिनके घर या बुनियादी सुविधाएं आपदा में प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी राहत सामग्री न केवल प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करती है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने और सामान्य जीवन की ओर लौटने में भी मदद करती है। तिरपाल और प्लास्टिक शीट जैसे सामान अस्थायी आश्रय बनाने में मददगार होते हैं, वहीं स्लीपिंग बैग और किचन सेट रोजमर्रा के जीवन को सुगम बनाते हैं। भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और भारत समय-समय पर वहां के लोगों की मदद करता रहा है। इससे पहले भी भारत ने खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य आवश्यक सहायता भेजी है। रणधीर जायसवाल ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है और इस चुनौतीपूर्ण समय में हर संभव मानवीय सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर भारत आगे भी मदद जारी रख सकता है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।