वॉशिंगटन/लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने कहा कि ऊर्जा नीति, आव्रजन (इमिग्रेशन) और अमेरिका के साथ संबंधों को संभालने के तरीके ने स्टार्मर को राजनीतिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाया। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि वह एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने खुद उन्हें नुकसान पहुंचाया।" 'पवनचक्कियों के चक्कर में खुद को नुकसान पहुंचाया' ट्रंप ने ब्रिटेन की ऊर्जा नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि स्टार्मर सरकार ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के बजाय पर्यावरणीय कारणों से उत्तरी सागर (North Sea) में तेल और गैस संसाधनों के दोहन को सीमित कर दिया। उन्होंने कहा, "ब्रिटेन अपनी अधिकांश ऊर्जा खरीदता है। जानते हैं कहां से? नॉर्वे से। और नॉर्वे को तेल कहां से मिलता है? उत्तरी सागर से। ब्रिटेन के पास इसका बेहतर हिस्सा है, लेकिन वे पवनचक्कियों और पर्यावरणीय नीतियों के कारण उसे छोड़ना चाहते हैं।" ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसी नीतियों ने ब्रिटेन को ऊर्जा के मामले में कमजोर बनाया है। नाटो और ईरान मुद्दे पर भी जताई नाराजगी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि स्टार्मर एक तरह से उनके मित्र थे, लेकिन उन्होंने नाटो और ईरान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका का पर्याप्त समर्थन नहीं किया। ट्रंप ने दावा किया कि साइप्रस स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे के उपयोग को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद पैदा हो गए थे। उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा कि हम द्वीप पर उतरने की अनुमति नहीं दे सकते। ऐसा पहली बार हुआ था। आखिरकार वे मान गए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।" ट्रंप के मुताबिक, इस मामले ने भी स्टार्मर की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया। पहले ही कर चुके थे इस्तीफे की भविष्यवाणी डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कीर स्टार्मर के इस्तीफे की भविष्यवाणी कर दी थी। उनका कहना था कि ब्रिटेन में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और सरकार की नीतियों से जनता की नाराजगी स्टार्मर के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही थी। दबाव के बीच दिया इस्तीफा कीर स्टार्मर ने सोमवार को लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा है कि नए नेता और प्रधानमंत्री के चयन तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। पिछले कुछ महीनों में लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष, स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में खराब प्रदर्शन तथा लगातार गिरती लोकप्रियता ने स्टार्मर पर दबाव बढ़ा दिया था। एंडी बर्नहैम बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री ब्रिटेन की राजनीति में अब सबसे ज्यादा चर्चा अनुभवी लेबर नेता और ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम के नाम को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि संसद में उनकी वापसी के बाद वे प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार बन सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो पिछले एक दशक में ब्रिटेन को सातवां प्रधानमंत्री मिल सकता है, जो देश की राजनीति में बढ़ती अस्थिरता को भी दर्शाता है।
US-Iran Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी तब तक नहीं हटेगी, जब तक दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब युद्ध खत्म करने के लिए प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप का सख्त संदेश डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा: “नाकाबंदी ईरान को पूरी तरह तबाह कर रही है। वे हर दिन 500 मिलियन डॉलर गंवा रहे हैं। यह लंबे समय तक नहीं चल सकता।” ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका नाकाबंदी को एक दबाव की रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, ताकि ईरान को बातचीत और समझौते के लिए मजबूर किया जा सके। ईरान ने भी रखी शर्त दूसरी ओर Iran ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिकी नाकाबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक वह किसी भी वार्ता में शामिल नहीं होगा। ईरान के इस रुख से दोनों देशों के बीच गतिरोध (Deadlock) की स्थिति बन गई है। पाकिस्तान में बैठक पर संशय Islamabad में संभावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर तैयारियां तो जारी हैं, लेकिन हालात अभी भी अनिश्चित हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा अब तक तय नहीं उपराष्ट्रपति JD Vance अभी वॉशिंगटन से रवाना नहीं हुए हैं ईरान ने भी बैठक में शामिल होने पर अंतिम फैसला नहीं लिया है वार्ता पर संकट के बादल अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं: अमेरिका: पहले समझौता, फिर नाकाबंदी खत्म ईरान: पहले नाकाबंदी हटाओ, फिर बातचीत इस टकराव के चलते शांति वार्ता की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे में दो अमेरिकी फाइटर जेट मार गिराए हैं और बचाव अभियान में लगे हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया। दो अमेरिकी विमानों को मार गिराने का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान ने F-15E स्ट्राइक ईगल को निशाना बनाया इसके अलावा A-10 वारथॉग पर भी हमला किया गया हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि सीमित है। एक पायलट सुरक्षित, दूसरा लापता F-15E में दो क्रू मेंबर सवार थे इनमें से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है दूसरा अब भी लापता बताया जा रहा है अमेरिकी विशेष बल उसकी तलाश में जुटे हैं। रेस्क्यू मिशन पर भी हमला लापता पायलट की तलाश में गए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमला हुआ हालांकि, दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे पायलट पर इनाम ईरान ने अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर इनाम का ऐलान किया है स्थानीय मीडिया के जरिए लोगों से जिंदा पकड़ने या सूचना देने की अपील की गई ट्रंप का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा: “यह युद्ध है… इससे बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” यानी सैन्य टकराव के बावजूद कूटनीतिक बातचीत जारी रह सकती है बढ़ता तनाव लगातार एयर स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाई पायलट की तलाश और इनाम रेस्क्यू ऑपरेशन पर हमला ये सभी घटनाएं संकेत देती हैं कि संघर्ष अब और गंभीर और अनिश्चित होता जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों के बयान एक-दूसरे के खिलाफ सख्त होते जा रहे हैं। ईरान ने साफ कहा है कि अब उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि यह युद्ध अगले 2 से 3 हफ्तों में खत्म हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव खराब रहे हैं, इसलिए अब किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी इस डील से पीछे हट चुका है। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, सहयोगी देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। ट्रम्प का दावा- जल्द खत्म होगी जंग वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और ऑपरेशन अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना हमारा मकसद था, जो अब पूरा हो चुका है। समझौता होने पर युद्ध और जल्दी खत्म हो सकता है।” जमीनी हमले पर ईरान की चेतावनी अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जमीनी हमला किया गया तो ईरान पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम उनका इंतजार कर रहे हैं।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान जमीनी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी स्थिति का जवाब देने में सक्षम है। मिडिल ईस्ट की अर्थव्यवस्था पर असर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध का असर पूरे मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अनुमान है कि: क्षेत्र की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट आ सकती है करीब 18 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई है कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है 16 लाख से 36 लाख नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और कड़े बयानों से साफ है कि हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका युद्ध के जल्द खत्म होने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान का सख्त रुख संकेत देता है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य होने से दूर है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei मारे जा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर ईरानी मीडिया में उनके नाम से लगातार नए संदेश सामने आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस और अनिश्चितता पैदा कर दी है। ट्रंप का बड़ा दावा, लेकिन सवाल बरकरार रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने 27 मार्च को कहा था कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व खत्म हो चुका है और देश में कोई सक्रिय सुप्रीम लीडर नहीं है। उन्होंने यहां तक संकेत दिया कि मोजतबा खामेनेई या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हैं। हालांकि, इस दावे की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ जारी हो रहे संदेश ट्रंप के दावे के विपरीत, ईरान की तरफ से मोजतबा खामेनेई के नाम से लिखित संदेश जारी किए जा रहे हैं। एक हालिया संदेश में उन्होंने: अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संघर्ष में समर्थन के लिए इराक की जनता का धन्यवाद किया खास तौर पर Ali al-Sistani का उल्लेख किया यह संदेश बगदाद में हुई एक बैठक के बाद सामने आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरानी नेतृत्व सक्रिय है। सार्वजनिक रूप से नहीं आए सामने मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। केवल लिखित बयान जारी किए जा रहे हैं उनके बयान टीवी पर दूसरे लोग पढ़कर सुनाते हैं उनकी ताजा तस्वीरों को लेकर भी संशय बना हुआ है इससे उनकी स्थिति और लोकेशन को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। पृष्ठभूमि: युद्ध और सत्ता का संकट ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी यह संघर्ष अब एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है। पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की युद्ध की शुरुआत में ही मौत हो चुकी है इसके बाद मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी और विरोधाभासी खबरें सत्ता को लेकर असमंजस पैदा कर रही हैं क्या है इसका वैश्विक असर? यह घटनाक्रम कई बड़े सवाल खड़े करता है: क्या ट्रंप का दावा सही है या यह रणनीतिक बयान है? क्या ईरान में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है? क्या इससे युद्ध और भड़क सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की विरोधाभासी सूचनाएं वैश्विक बाजार, कूटनीति और सुरक्षा स्थिति पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।