E20 Petrol

E20 Petrol
क्या है E20 पेट्रोल? जानिए क्यों चर्चा में है यह ईंधन

नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा तेज है। कुछ वाहन मालिकों की शिकायतों और सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बाद सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर विस्तृत सफाई जारी की है। सरकार का कहना है कि E20 कोई प्रयोग नहीं, बल्कि वर्षों की वैज्ञानिक जांच और परीक्षण के बाद लागू की गई नीति है।   क्या होता है E20 पेट्रोल?   E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है। इथेनॉल गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होने वाला जैव ईंधन है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है। देशभर में 1 अप्रैल 2026 से E20 पेट्रोल की आपूर्ति शुरू की गई है।   सरकार ने क्या कहा?   पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार E20 पेट्रोल पर उठ रही कई आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह ईंधन व्यापक लैब और रोड टेस्ट के बाद लागू किया गया है। सरकार के मुताबिक E20 से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा और घरेलू इथेनॉल उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।   क्या माइलेज कम होता है?   सरकार ने स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि इसके बदले मिलने वाले पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। साथ ही E20 के कारण इंजन खराब होने या फ्यूल टैंक में जंग लगने जैसी वायरल खबरों को भी सरकार ने भ्रामक बताया है।   विवाद क्यों बढ़ा?   हाल ही में कुछ वाहन मालिकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने E20 पेट्रोल से वाहन खराब होने के दावे किए, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया। सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि कई मामलों में समस्या का कारण दूषित ईंधन या वाहन की तकनीकी खराबी थी, न कि E20 पेट्रोल। फिलहाल E20 को लेकर बहस जारी है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल इस नीति में बदलाव की कोई योजना नहीं है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Spain players celebrate after defeating Belgium 2-1 to reach the FIFA World Cup 2026 semi-finals.
FIFA World Cup 2026: बेल्जियम को 2-1 से हराकर स्पेन सेमीफाइनल में, अब फ्रांस से होगी टक्कर

FIFA World Cup 2026 में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेल्जियम को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले में स्पेन ने आखिरी मिनटों में गोल दागकर जीत दर्ज की। अब सेमीफाइनल में उसका मुकाबला मौजूदा उपविजेता फ्रांस से डलास में होगा, जिसे टूर्नामेंट के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। कोच का बड़ा फैसला स्पेन के लिए साबित हुआ गेम चेंजर स्पेन के मुख्य कोच लुइस डे ला फुएंते ने इस मुकाबले में शुरुआती एकादश में बड़ा बदलाव करते हुए स्टार मिडफील्डर पेड्री की जगह फाबियन रूइज को मौका दिया। यह फैसला टीम के लिए बेहद सफल साबित हुआ। फाबियन रूइज ने पूरे मैच में मिडफील्ड पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और स्पेन के लिए पहला गोल भी दागा। उन्होंने आक्रमण और रक्षा दोनों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। फाबियन रूइज ने दिलाई शुरुआती बढ़त मैच के शुरुआती मिनटों से ही स्पेन ने गेंद पर कब्जा बनाए रखा और लगातार बेल्जियम के डिफेंस पर दबाव बनाया। 30वें मिनट में दानी ओल्मो के शॉट को बेल्जियम के गोलकीपर थिबाउट कूर्तुआ ने रोक दिया, लेकिन रीबाउंड पर फाबियन रूइज ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को नेट में पहुंचा दिया और स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद युवा स्टार लामिन यामाल ने भी अपनी तेज ड्रिब्लिंग से बेल्जियम की रक्षा पंक्ति को कई बार चुनौती दी, हालांकि वह गोल करने से चूक गए। डी केटेलारे ने बेल्जियम की कराई वापसी पहले हाफ के अंतिम चरण में बेल्जियम ने शानदार वापसी की। कप्तान केविन डी ब्रुने ने बेहतरीन थ्रू पास देकर टिमोथी कास्टान्ये को मौका बनाया। कास्टान्ये के सटीक क्रॉस पर चार्ल्स डी केटेलारे ने 41वें मिनट में शानदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें बराबरी पर थीं। दूसरे हाफ में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने लगातार आक्रामक खेल दिखाया। स्पेन ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा, जबकि बेल्जियम ने तेज काउंटर अटैक के जरिए बढ़त बनाने की कोशिश की। दोनों गोलकीपरों और डिफेंडरों ने कई शानदार बचाव किए, जिससे लंबे समय तक स्कोर नहीं बदल सका। कूर्तुआ की चोट ने बदला मैच का रुख 71वें मिनट में बेल्जियम को बड़ा झटका लगा जब अनुभवी गोलकीपर थिबाउट कूर्तुआ चोटिल होकर मैदान से बाहर हो गए। उनकी जगह युवा गोलकीपर सेने लामेन्स को उतारा गया। इस बदलाव के बाद स्पेन ने लगातार दबाव बढ़ाया और बेल्जियम के डिफेंस पर पकड़ मजबूत कर ली। मेरिनो ने 88वें मिनट में दिलाई यादगार जीत मुकाबले का निर्णायक पल 88वें मिनट में आया। स्पेन के डिफेंडर पाउ क्यूबार्सी के दूर से लगाए गए शॉट को गोलकीपर सेने लामेन्स पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके। रीबाउंड पर मौजूद मिकेल मेरिनो ने बिना कोई गलती किए गेंद को गोल में पहुंचाकर स्पेन को 2-1 की बढ़त दिला दी। अंतिम मिनटों में बेल्जियम ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन स्पेन के डिफेंस ने कोई मौका नहीं दिया और टीम ने सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। अब फ्रांस से होगा हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल इस जीत के साथ स्पेन फीफा विश्व कप 2026 के अंतिम चार में पहुंच गया है। अब उसका मुकाबला डलास में मौजूदा उपविजेता फ्रांस से होगा। दोनों यूरोपीय दिग्गज शानदार फॉर्म में हैं, इसलिए इस मुकाबले को टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक और बहुप्रतीक्षित मैचों में शामिल किया जा रहा है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Business professionals discussing AI-driven workplace changes as companies reduce management layers and redefine leadership roles.
AI के दौर में बदल रही मैनेजर की भूमिका: Microsoft समेत बड़ी कंपनियां क्यों घटा रही हैं मैनेजमेंट लेयर?

कभी कॉर्पोरेट दुनिया में करियर ग्रोथ का सबसे बड़ा लक्ष्य मैनेजर बनना माना जाता था। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। Microsoft की हालिया छंटनी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मैनेजरों की जगह लेने जा रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। कंपनियां मैनेजरों को खत्म नहीं कर रहीं, बल्कि अनावश्यक मैनेजमेंट लेयर कम करके नेतृत्व की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। Microsoft की छंटनी ने बढ़ाई चर्चा Microsoft ने हालिया जॉब कट्स के दौरान अपनी मैनेजमेंट लेयर को भी कम किया है। कंपनी AI पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है और संगठन को अधिक तेज, चुस्त (Agile) और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। यही रणनीति Amazon, Meta और Shopify जैसी कई बड़ी टेक कंपनियां भी अपना रही हैं। इस ट्रेंड को अब कॉर्पोरेट जगत में "Management Diet" कहा जा रहा है, जिसमें संगठन के भीतर गैर-जरूरी मैनेजमेंट स्तरों को हटाकर निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। AI नहीं, संगठनात्मक बदलाव है बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल AI की वजह से नहीं हो रहा है। True Balance के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) गौरव शर्मा का कहना है कि कंपनियां अब यह मूल्यांकन कर रही हैं कि कौन-सी मैनेजमेंट लेयर वास्तव में व्यवसाय को मूल्य दे रही है। यदि किसी स्तर की भूमिका केवल रिपोर्टिंग, समन्वय और प्रशासनिक कार्यों तक सीमित है, तो उसे अधिक प्रभावी तरीके से AI के जरिए संभाला जा सकता है। वहीं HireYou के CHRO अभिजीत घोष के मुताबिक कंपनियां अपने संगठन को अधिक तेज और लचीला बनाने के लिए संरचनात्मक बदलाव कर रही हैं। AI इस बदलाव को आसान बना रहा है क्योंकि अब कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां तकनीक संभाल सकती है। AI किन मैनेजमेंट कार्यों को संभाल रहा है? आज AI कई ऐसे कार्य तेजी से कर रहा है जो पहले मिडिल मैनेजर की जिम्मेदारी माने जाते थे। इनमें शामिल हैं: प्रदर्शन (Performance) की निगरानी प्रोजेक्ट की प्रगति पर नजर रखना मीटिंग का सारांश तैयार करना कर्मचारियों की शेड्यूलिंग संसाधनों का आवंटन ऑनबोर्डिंग और रिपोर्टिंग अनुपालन (Compliance) की निगरानी इन कार्यों के ऑटोमेट होने से मैनेजरों का समय बच रहा है और संगठन कम मैनेजमेंट लेयर के साथ भी प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं। AI नहीं कर सकता नेतृत्व की जगह विशेषज्ञ मानते हैं कि AI डेटा और प्रशासनिक कार्यों में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी नेतृत्व की जगह नहीं ले सकता। कर्मचारियों को प्रेरित करना, विवाद सुलझाना, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना, टीम का विश्वास जीतना और सकारात्मक कार्य संस्कृति बनाना ऐसे काम हैं जिनमें मानवीय समझ और अनुभव की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि भविष्य में प्रभावी नेतृत्व की अहमियत और बढ़ने वाली है। मैनेजर की भूमिका कैसे बदल रही है? अब भविष्य का मैनेजर केवल टीम की निगरानी करने वाला व्यक्ति नहीं होगा। नई भूमिका में मैनेजर को इन जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान देना होगा: कर्मचारियों का विकास और कोचिंग रणनीतिक निर्णय लेना नवाचार को बढ़ावा देना अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना व्यवसायिक समस्याओं का समाधान करना जो मैनेजर केवल अनुमोदन, रिपोर्टिंग और रोजमर्रा की निगरानी तक सीमित रहेंगे, उनके लिए भविष्य अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। करियर ग्रोथ का नया मतलब विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में करियर की सफलता केवल मैनेजर बनने से तय नहीं होगी। युवा पेशेवरों को अब इन कौशलों पर ध्यान देना होगा: AI टूल्स की समझ किसी क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता समस्या समाधान क्षमता विभिन्न टीमों के साथ सहयोग लगातार नई तकनीकों को सीखने की आदत व्यवसायिक परिणामों की जिम्मेदारी लेना यानी भविष्य में पदनाम (Designation) से अधिक महत्व कौशल और प्रभाव (Impact) का होगा। क्या भारत में भी दिखेगा यही ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कंपनियां भी धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी। डिजिटल-फर्स्ट कंपनियां अपेक्षाकृत तेजी से फ्लैट संगठनात्मक ढांचे को अपनाएंगी, जबकि बड़े पारंपरिक संगठनों में यह बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। हालांकि अंतिम लक्ष्य सभी का लगभग एक जैसा होगा—कम मैनेजमेंट लेयर, तेज निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी नेतृत्व। बदलते दौर में नेतृत्व ही बनेगा सबसे बड़ी ताकत AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद कंपनियों को अच्छे नेताओं की आवश्यकता बनी रहेगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि भविष्य में वही मैनेजर सबसे अधिक सफल होंगे जो लोगों को प्रेरित कर सकें, भरोसा कायम रखें, कठिन फैसले लें और लगातार बदलते कारोबारी माहौल में अपनी टीम का सही मार्गदर्शन कर सकें।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Manish Kashyap
E20 पेट्रोल विवाद में घिरे मनीष कश्यप, टोयोटा ने दर्ज कराई FIR; सरकार और कंपनी ने दावों को बताया भ्रामक

पटना, एजेंसियां। बिहार के चर्चित यूट्यूबर और जन सुराज नेता मनीष कश्यप एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी नई टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस में E20 पेट्रोल भरवाने के बाद इंजन में गंभीर खराबी आ गई। इस दावे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद E20 ईंधन को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई।   टोयोटा ने दावों को किया खारिज   टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने वाहन की तकनीकी जांच के बाद कहा कि कार में आई खराबी E20 पेट्रोल की वजह से नहीं, बल्कि ईंधन में पानी/दूषित ईंधन होने के कारण हुई। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इनोवा हाइक्रॉस E20 ईंधन के अनुरूप है।   मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज   मामले के बाद टोयोटा ने मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। कंपनी का आरोप है कि बिना तकनीकी पुष्टि के किए गए दावों से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।   सरकार ने भी दी सफाई   विवाद बढ़ने पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि E20 पेट्रोल पूरी तरह परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे संबंधित वायरल दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है। सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।   सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस   इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल, वाहन सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, मनीष कश्यप अपने दावों पर कायम हैं, जबकि टोयोटा और सरकार दोनों ने उनके आरोपों को तकनीकी जांच के आधार पर खारिज किया है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Petrol pump dispensing E20 fuel as debate continues over mileage, engine performance, and India's ethanol blending policy.
E20 पेट्रोल पर क्यों मचा है विवाद? माइलेज, इंजन और सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सरकार ने दी पूरी सफाई

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर माइलेज घटने, इंजन खराब होने और पुराने वाहनों पर असर पड़ने जैसी बातें कही जा रही हैं। वहीं, कुछ लोगों ने इसे आम लोगों पर किया जा रहा "प्रयोग" भी बताया। अब इन सभी सवालों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। E20 पर अचानक विवाद क्यों शुरू हुआ? हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, E20 कोई नया ईंधन नहीं है। यह करीब दो वर्षों से देश में उपलब्ध है, जबकि इससे पहले E15 पेट्रोल का भी लंबे समय तक उपयोग किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि E20 से इतनी बड़ी समस्या होती, तो यह विवाद पहले ही सामने आ जाता। मंत्री का मानना है कि E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की लॉन्चिंग के बाद ही E20 को लेकर भ्रम फैलना शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सरकार ने क्या कहा? हाल ही में यह दावा किया गया था कि E20 के जरिए करोड़ों भारतीयों पर प्रयोग किया जा रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि अदालत में मामला भारत पेट्रोलियम (BPCL) और एक एथेनॉल आवंटन से जुड़े विवाद का था, न कि E20 कार्यक्रम की वैधता का। केंद्र सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है। बाद में अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि अदालत में E20 कार्यक्रम को किसी प्रकार का "प्रयोग" नहीं बताया गया था। क्या E20 से माइलेज कम हो जाता है? मंत्री ने माना कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है। ऐसे में कुछ वाहनों में माइलेज में हल्की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि माइलेज कई अन्य बातों पर भी निर्भर करता है, जैसे— वाहन का मॉडल ड्राइविंग का तरीका सड़क और ट्रैफिक की स्थिति वाहन की गति इसलिए हर वाहन में माइलेज पर एक जैसा असर नहीं पड़ता। क्या पुराने वाहनों के इंजन पर पड़ता है असर? पुराने वाहनों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मंत्री ने जवाब दिया। उनके अनुसार कुछ मामलों में रबर गैस्केट जैसे कुछ पुर्जों को तय समय से पहले बदलना पड़ सकता है, लेकिन इसे इंजन की गंभीर तकनीकी समस्या नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वाहन निर्माता कंपनियों ने E20 की वजह से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की कोई पुष्टि नहीं की है। साथ ही, Hero MotoCorp द्वारा E20 इस्तेमाल करने वाले बड़ी संख्या में वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई। क्या पेट्रोल पंपों पर E15 और E20 दोनों मिलेंगे? कई वाहन मालिक चाहते हैं कि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने का विकल्प मिले। हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल E15 और E20 दोनों को एक साथ उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है। मंत्री के अनुसार इसके लिए अलग-अलग स्टोरेज, सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, जिससे संचालन जटिल हो जाएगा। सरकार E20 को क्यों दे रही है बढ़ावा? सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन परिवर्तन की योजना नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है। सरकार के मुताबिक इस कार्यक्रम से अब तक करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। भारत अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में एथेनॉल आधारित ईंधन पर जोर देने से आयात पर निर्भरता कम होगी और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित किया जा सकेगा। क्या कहते हैं मौजूदा हालात? सरकार का कहना है कि E20 को लेकर फैली कई आशंकाओं का अब तक कोई ठोस तकनीकी प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, माइलेज और कुछ पुराने वाहनों के रखरखाव को लेकर मामूली बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विस्तार के साथ यह स्पष्ट होगा कि देश की नई ईंधन नीति आम उपभोक्ताओं और ऑटोमोबाइल उद्योग पर कितना प्रभाव डालती है।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Fuel dispenser at a petrol station promoting E85 ethanol fuel as a cheaper alternative to E20 petrol in India.
E85 Fuel Update: सरकार की नई तैयारी, जल्द मिल सकता है E20 से 20 रुपये सस्ता ईंधन

देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार अब E85 फ्यूल को बाजार में लाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, इस ईंधन की कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम रखने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन खर्च कम होगा, एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता भी घटेगी। हालांकि, यह सस्ता ईंधन फिलहाल सभी वाहन चालकों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। क्या है E85 फ्यूल? E85 एक विशेष प्रकार का ईंधन है, जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। यह सामान्य पेट्रोल से अलग होता है और इसे केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (Flex-Fuel Vehicle - FFV) में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आपकी कार या बाइक सामान्य पेट्रोल या E20 पर चलती है, तो उसमें E85 का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। किन लोगों को मिलेगा फायदा? सरकार का प्रस्ताव लागू होने पर E85 का सबसे बड़ा फायदा उन वाहन मालिकों को मिलेगा जिनके पास फ्लेक्स-फ्यूल वाहन होंगे। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात में एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। आने वाले समय में यदि देश में FFV वाहनों की संख्या बढ़ती है, तो अधिक लोगों को कम कीमत वाले इस ईंधन का लाभ मिल सकेगा। क्या E20 से इंजन खराब होता है? एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर लंबे समय से कई तरह की आशंकाएं सामने आती रही हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि E20 पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचाता है। इस पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। उनके अनुसार, वाहन निर्माता कंपनियों ने E20 के कारण इंजन में किसी बड़े नुकसान की शिकायत नहीं की है। लाखों वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी बताया कि E20 से जुड़े वारंटी और इंश्योरेंस संबंधी मुद्दों का भी समाधान किया जा चुका है। E85 में माइलेज कम हो सकता है सरकार ने माना है कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है। ऐसे में E85 फ्यूल पर चलने वाले वाहनों का माइलेज कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि कम कीमत और अन्य आर्थिक लाभ इस कमी की भरपाई कर सकते हैं। सरकार को क्या होंगे फायदे? सरकार के अनुसार E85 और एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने से कई फायदे होंगे। ईंधन की लागत कम रखने में मदद मिलेगी। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी। विदेशी मुद्रा की बचत होगी। एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों की आय को बढ़ावा मिलेगा। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। E25 फ्यूल पर भी चल रहा काम पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि E25 पेट्रोल अभी परीक्षण के चरण में है और इसे फिलहाल बाजार में लॉन्च नहीं किया गया है। सरकार केवल एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है। आने वाले वर्षों में भारत की ईंधन नीति में बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी दोनों को समान प्राथमिकता दिए जाने की योजना है। क्या बदल सकती है आपकी जेब का गणित? यदि E85 फ्यूल तय कीमत पर बाजार में आता है और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो वाहन चालकों के ईंधन खर्च में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। साथ ही, इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाने और स्वदेशी ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
E20 Petrol Controversy
E20 पेट्रोल पर फैली अफवाहों पर गडकरी का जवाब, बोले- इंजन डैमेज का एक भी सबूत नहीं

नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंजन खराब होने और माइलेज में भारी गिरावट के दावों को खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और दुष्प्रचार का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि ई20 पेट्रोल लागू करने से पहले पुणे स्थित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और वाहन निर्माता कंपनियों ने व्यापक परीक्षण किए थे। सभी तकनीकी मंजूरियों के बाद ही इसे देशभर में लागू किया गया।   गडकरी ने स्वीकार किया  गडकरी ने स्वीकार किया कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है, इसलिए ई20 ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका असर बहुत सीमित होता है और यह वाहन की ड्राइविंग परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। ट्रैफिक, सड़क की स्थिति और वाहन की गति जैसे कारक माइलेज को अधिक प्रभावित करते हैं।   उन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में माइलेज की कोई विशेष समस्या नहीं पाई गई है। इसी वजह से सरकार इस तकनीक को बढ़ावा दे रही है। गडकरी के अनुसार, कुछ पुराने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले छोटे पुर्जों पर प्रभाव पड़ सकता है। इसे देखते हुए वाहन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि सर्विस के दौरान ऐसे पुर्जे बिना अतिरिक्त शुल्क के बदले जाएं।   इंजन खराब होने के दावों पर उन्होंने  क्या कहा? इंजन खराब होने के दावों पर उन्होंने कहा कि जिन मामलों की जांच कराई गई, उनमें ई20 नहीं बल्कि मिलावटी ईंधन जिम्मेदार पाया गया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिसमें केवल ई20 पेट्रोल के कारण वाहन खराब हुआ हो।   गडकरी ने कहा कि भारत का लक्ष्य आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। इसी दिशा में इथेनॉल, मेथेनॉल और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां जल्द ही नए फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को स्वदेशी और किफायती ईंधन विकल्प मिल सकेंगे।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
Fuel station dispensing ethanol-blended petrol as India plans higher ethanol blend fuels like E21 and E25.
E20 के बाद अब E21 और E25 पेट्रोल की तैयारी, 2029 तक चरणबद्ध लागू करने पर विचार कर रही सरकार

E20 पेट्रोल पर जारी बहस के बीच सरकार बना रही अगला रोडमैप देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद केंद्र सरकार अब ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 2027 तक E21 पेट्रोल और 2029 तक E25 पेट्रोल लागू करने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है। हालांकि, यह बदलाव एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ताओं को पर्याप्त समय मिल सके। चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा एथेनॉल मिश्रण सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सरकार सीधे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर जाने के बजाय धीरे-धीरे बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, 2027 में E21 पेट्रोल और उसके दो साल बाद 2029 में E25 पेट्रोल पेश किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार E25 को मौजूदा नीति के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की अधिकतम सीमा बनाने पर भी विचार कर रही है। ऑटो उद्योग को मिलेगा तैयारी का समय सरकार का मानना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो पार्ट्स उद्योग, ईंधन आपूर्ति नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार होने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। एक अधिकारी के अनुसार, यह बदलाव इस तरह किया जाएगा कि इंजन तकनीक, सप्लाई चेन और फ्यूल वितरण व्यवस्था बिना किसी बड़े व्यवधान के नए मानकों के अनुरूप ढल सके। E20 को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताओं पर भी नजर देशभर में E20 पेट्रोल उपलब्ध होने के बावजूद कई वाहन मालिकों ने माइलेज, इंजन प्रदर्शन और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर सवाल उठाए हैं। सरकार इन चिंताओं से भी अवगत है और इसी वजह से अगले चरण की योजना को धीरे-धीरे लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेष रूप से पुराने वाहनों के मालिकों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण उनके वाहन के प्रदर्शन और रखरखाव लागत को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की बड़ी रणनीति भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की मांग बढ़ाना है। सरकार ने E20 पेट्रोल की देशव्यापी उपलब्धता अपने मूल 2030 के लक्ष्य से लगभग पांच वर्ष पहले हासिल कर ली है, जिसे इस कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत का दावा सरकारी अनुमान के अनुसार, 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से भारत हर वर्ष लगभग 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत कर रहा है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का बोझ भी कम हुआ है। हालांकि, भविष्य में E21 और E25 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले सरकार उद्योग की तैयारी, तकनीकी क्षमता और उपभोक्ताओं की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
E20 Petrol Excise Duty
E22 से E30 पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म लेकिन E20 उपभोक्ताओं को नहीं मिली राहत

नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 22% से 30% तक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है। इस निर्णय का उद्देश्य देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, वर्तमान में देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रण) पर इस छूट का कोई लाभ नहीं मिलेगा।   E22 से E30 तक के नए ईंधन होंगे टैक्स फ्री सरकार की नई अधिसूचना के तहत E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल वेरिएंट्स को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त किया गया है। यह पहली बार है जब E20 से ऊपर के एथेनॉल ब्लेंड्स को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय राहत दी गई है। इससे तेल कंपनियों को अधिक एथेनॉल मिश्रण अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।   क्या है एथेनॉल और क्यों है अहम? एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ना, मक्का, सड़े आलू और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण कम होता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटती है। भारत सरकार लंबे समय से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है।   आयात बिल घटाने और किसानों को लाभ देने की योजना भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। सरकार का मानना है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण से विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और गन्ना किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।   कीमतों में राहत की उम्मीद नहीं हालांकि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को फिलहाल पेट्रोल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल की खरीद लागत अभी भी कई मामलों में रिफाइंड पेट्रोल से अधिक है। इसलिए उच्च एथेनॉल मिश्रण के बावजूद खुदरा कीमतों में कमी लाना आसान नहीं होगा।   माइलेज और इंजन पर क्या असर? ऑटोमोबाइल उद्योग के अनुसार E20 ईंधन से कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे वाहन की सुरक्षा या इंजन पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। सरकार का मानना है कि भविष्य में अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन भारत की हरित ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे।

abhishek singh जून 11, 2026 0
E85 fuel dispenser launched at an Indian Oil outlet in Delhi for flex-fuel vehicles.
दिल्ली में लॉन्च हुआ E85 फ्यूल, E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये सस्ता; जानिए किन गाड़ियों में कर सकेंगे इस्तेमाल

भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल आउटलेट पर राजधानी के पहले E85 फ्यूल पंप का उद्घाटन किया। इसके साथ ही दिल्ली में हाई-इथेनॉल ईंधन की व्यावसायिक शुरुआत हो गई है। E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये सस्ता दिल्ली में E85 फ्यूल की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। यह मौजूदा E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता है। उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रम की स्थिति से बचाने के लिए पेट्रोल पंप पर E85 के लिए अलग डिस्पेंसर और स्पष्ट लेबलिंग की व्यवस्था की गई है। यह पहल सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है। क्या है E85 फ्यूल? जहां E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, वहीं E85 में लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल और केवल 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। E85 के फायदे पेट्रोल पर निर्भरता कम होती है। क्रूड ऑयल की खपत घटती है। घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा मिलता है। ईंधन की लागत कम हो सकती है। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। क्या हर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है? नहीं। E85 फ्यूल को सामान्य पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियों में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस इंजन की आवश्यकता होती है, जो हाई-इथेनॉल मिश्रण को संभालने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए जाते हैं। कौन-सी गाड़ियां E85 सपोर्ट करती हैं? भारत में फिलहाल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या सीमित है। इनमें शामिल हैं— Hero Splendor+ Flex Fuel Hero HF Deluxe Flex Fuel Maruti Suzuki WagonR Flex Fuel (लॉन्च की तैयारी में) आने वाले समय में कई अन्य कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतार सकती हैं। देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि E85 जैसे वैकल्पिक ईंधन भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही इससे किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से कृषि आधारित फसलों से किया जाता है।  

surbhi जून 6, 2026 0
India's potential shift from E20 to E85 ethanol fuel
E85 Fuel India: E20 के बाद क्या भारत तैयार है E85 के बड़े ईंधन बदलाव के लिए?

भारत में ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पहले E20 पेट्रोल के विस्तार ने चर्चा को गर्माया था, और अब E85 फ्यूल को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यह सिर्फ एक नया ईंधन नहीं, बल्कि देश की फ्यूल नीति, ऑटो इंडस्ट्री और आम उपभोक्ताओं के लिए एक संभावित बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या भारत इस हाई-एथेनॉल फ्यूल सिस्टम के लिए तैयार है या यह बदलाव अभी समय से पहले है। E20 से E85 तक की छलांग क्यों बड़ी मानी जा रही है? भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। E20 तक का सफर अपेक्षाकृत आसान माना गया क्योंकि मौजूदा पेट्रोल इंजन मामूली बदलावों के साथ इसे स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन E85 फ्यूल पूरी तरह अलग तकनीक पर आधारित है। इसमें एथेनॉल की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे: इंजन की कार्यप्रणाली बदल जाती है फ्यूल सिस्टम पर अलग तरह का दबाव पड़ता है तकनीकी संरचना पूरी तरह एडवांस हो जाती है इसी कारण इसे सिर्फ पेट्रोल का विकल्प नहीं, बल्कि एक नई फ्यूल कैटेगरी के रूप में देखा जा रहा है। इंजन टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव की जरूरत E85 को अपनाने के लिए मौजूदा वाहनों में बड़े तकनीकी बदलाव आवश्यक होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार: फ्यूल पाइप और इंजेक्टर को अलग सामग्री से बनाना होगा एथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता को संभालने के लिए खास सिस्टम चाहिए एडवांस ECU (Electronic Control Unit) की जरूरत होगी जो फ्यूल मिक्स के अनुसार इंजन को एडजस्ट कर सके यानी सामान्य पेट्रोल इंजन E85 को सुरक्षित तरीके से हैंडल नहीं कर सकते। फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स बनेंगे भविष्य की कुंजी भारत में E85 का भविष्य फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFV) पर निर्भर करेगा। ये वाहन: अलग-अलग एथेनॉल ब्लेंड पर चल सकते हैं प्रदर्शन में स्थिरता बनाए रखते हैं फ्यूल बदलने पर भी इंजन को नुकसान नहीं पहुंचाते कुछ दोपहिया कंपनियों ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं, लेकिन कार सेगमेंट में यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। सबसे बड़ी चुनौती: इंफ्रास्ट्रक्चर E85 को लागू करना सिर्फ गाड़ियों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे ईंधन ढांचे को बदलने की जरूरत है। मुख्य चुनौतियां: पेट्रोल पंप पर अलग स्टोरेज टैंक की आवश्यकता E85 के लिए अलग डिस्पेंसिंग सिस्टम उपभोक्ताओं को जागरूक करना विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सही जानकारी के गलत फ्यूल भरने से इंजन को गंभीर नुकसान हो सकता है। मौजूदा गाड़ियों पर क्या असर होगा? भारत में चल रही अधिकांश गाड़ियां अभी: E10 या E20 मानकों के अनुसार डिजाइन की गई हैं अगर E85 को तेजी से लागू किया गया तो: पुराने वाहनों के लिए तकनीकी समस्याएं बढ़ सकती हैं माइलेज और इंजन पर असर पड़ सकता है इसलिए माना जा रहा है कि E85 को धीरे-धीरे और सीमित स्तर पर ही लागू किया जाएगा।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0