कराकास: वेनेजुएला के उत्तर-मध्य क्षेत्र में गुरुवार तड़के आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों में दहशत फैला दी। भूकंप के झटके राजधानी कराकास समेत देश के कई हिस्सों में महसूस किए गए, जबकि पड़ोसी देश Colombia में भी कंपन दर्ज किया गया। तेज झटकों के बाद लोग घरों, कार्यालयों और अन्य इमारतों से बाहर निकल आए, जिससे कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कम गहराई में था भूकंप का केंद्र अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण United States Geological Survey के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई। इसका केंद्र वेनेजुएला के मोंटालबान क्षेत्र में जमीन से करीब 13 किलोमीटर की कम गहराई पर स्थित था। कम गहराई के कारण सतह पर झटके अधिक तीव्रता से महसूस किए गए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं। राजधानी कराकास में दिखा असर भूकंप का सबसे ज्यादा असर राजधानी Caracas में देखने को मिला। कई इमारतों की दीवारों में दरारें पड़ गईं, जबकि कुछ भवनों के प्रवेश द्वारों पर लगे कांच टूट गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोग घबराकर इमारतों से बाहर निकलते दिखाई दे रहे हैं। कुछ फुटेज में निवासियों को भूकंप के बाद अपने घरों और कार्यालयों से जरूरी सामान निकालते हुए भी देखा गया। सुनामी का अलर्ट जारी, फिर हटाया गया भूकंप के बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने एहतियात के तौर पर Puerto Rico, अमेरिकी और ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया था। इसके अलावा वेनेजुएला के तट के निकट स्थित Aruba, Curaçao और Bonaire में भी ऊंची और खतरनाक लहरों की आशंका जताई गई थी। बाद में विशेषज्ञों द्वारा स्थिति का आकलन किए जाने के बाद चेतावनी वापस ले ली गई और सुनामी का खतरा टल गया। वैज्ञानिकों ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं अमेरिकी सुनामी अलर्ट सर्विस ने स्पष्ट किया कि भूकंप के बाद समुद्र में ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी, जिससे विनाशकारी सुनामी उत्पन्न हो सके। वैज्ञानिकों ने भूकंप के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद कहा कि फिलहाल लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है। नुकसान का आकलन जारी स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रही हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, कुछ इमारतों को संरचनात्मक क्षति पहुंची है, लेकिन बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने, क्षतिग्रस्त भवनों में प्रवेश न करने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
तेहरान: दुनिया के कई हिस्सों में लगातार आ रहे भूकंपों ने वैज्ञानिकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद अब क्यूबा और ईरान में भी धरती कांपने से लोगों में दहशत फैल गई। क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास आए 6.1 तीव्रता के भूकंप को विशेषज्ञों ने पिछले लगभग 150 वर्षों में क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली झटकों में से एक बताया है। वहीं कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी ईरान में भी 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। दोनों देशों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में आ रहे भूकंपों ने वैश्विक स्तर पर भूगर्भीय गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्यूबा के पास समुद्र के भीतर आया शक्तिशाली भूकंप अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.1 मापी गई। इसका केंद्र समुद्र के भीतर लगभग 26 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप का केंद्र पश्चिमी क्यूबा के मांतुआ क्षेत्र से करीब 104 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में बताया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मेक्सिको की खाड़ी क्षेत्र में हाल के दशकों के सबसे महत्वपूर्ण भूकंपीय घटनाक्रमों में से एक है। वैज्ञानिकों ने बताया असामान्य घटना विशेषज्ञों का कहना है कि यह भूकंप कई मायनों में असामान्य है। सामान्यतः बड़े भूकंप दो टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर आते हैं, लेकिन यह झटका प्लेट के भीतर उत्पन्न हुआ। भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्ष 1880 में सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र के पास लगभग 6.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। उसके बाद इतने बड़े स्तर का झटका इस क्षेत्र में महसूस नहीं किया गया था। फ्लोरिडा और मेक्सिको तक महसूस हुए झटके क्यूबा में आए भूकंप का असर केवल द्वीपीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। इसके झटके कैरेबियन क्षेत्र, मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप और अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य तक महसूस किए गए। क्यूबा की राजधानी हवाना सहित कई शहरों में लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमारतों में तेज कंपन महसूस हुआ और कई लोगों ने पहली बार इतनी तीव्रता के झटके अनुभव किए। फिलहाल नहीं जारी हुई सुनामी चेतावनी भूकंप के बाद राहत एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े संरचनात्मक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि आने वाले दिनों में कुछ हल्के आफ्टरशॉक्स महसूस हो सकते हैं, लेकिन उनके ज्यादा खतरनाक होने की आशंका नहीं है। राहत की बात यह रही कि इस भूकंप के बाद किसी प्रकार की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई। ईरान में भी देर रात कांपी धरती क्यूबा में आए भूकंप के कुछ घंटों बाद दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान प्रांत में भी भूकंप दर्ज किया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, सरगाज क्षेत्र के निकट आए इस भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई। रात के समय आए झटकों के कारण लोग नींद से जाग गए और एहतियातन खुले स्थानों की ओर निकल आए। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। गहराई और तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने ईरान के भूकंप की तीव्रता 4.9 बताई है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे 5.0 दर्ज किया है। भूकंप की गहराई को लेकर भी दोनों पक्षों के आंकड़ों में अंतर देखा गया। अमेरिकी एजेंसी ने इसकी गहराई 10 किलोमीटर बताई, जबकि ईरानी अधिकारियों के अनुसार भूकंप लगभग 22 किलोमीटर नीचे आया था। आखिर क्यों बार-बार भूकंप की चपेट में आता है ईरान? विशेषज्ञों के अनुसार ईरान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। इसकी प्रमुख वजह देश की जटिल भूगर्भीय संरचना और सक्रिय फॉल्ट लाइनें हैं। ईरान कई प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम क्षेत्र में स्थित है। इसके दक्षिण-पूर्व में भारतीय प्लेट, उत्तर में यूरेशियन प्लेट और दक्षिण-पश्चिम में अरबियन प्लेट मौजूद हैं। इन प्लेटों के बीच लगातार दबाव और टकराव से भूगर्भीय तनाव पैदा होता रहता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में सामने आता है। ज़ाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र बढ़ाता है खतरा भूवैज्ञानिकों का मानना है कि अरबियन और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से बने ज़ाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र में लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं। यही कारण है कि ईरान में छोटे और बड़े भूकंप नियमित रूप से दर्ज किए जाते हैं। मंगलवार को आया भूकंप भी इसी भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। क्या दुनिया में अचानक बढ़ गए हैं भूकंप? विशेषज्ञों का कहना है कि क्यूबा, ईरान और फिलीपींस में आए हालिया भूकंप आपस में सीधे तौर पर जुड़े हुए नहीं हैं। ये अलग-अलग भूगर्भीय क्षेत्रों में स्थित हैं और अलग-अलग टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न हुए हैं। जब कम समय के भीतर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बड़े भूकंप आते हैं तो लोगों को ऐसा लग सकता है कि भूकंप अचानक बढ़ गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पृथ्वी की स्वाभाविक भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि हालिया घटनाएं किसी एक वैश्विक कारण से जुड़ी हुई हैं। 100 वर्षों में लाखों जिंदगियां प्रभावित ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1900 के बाद से केवल ईरान में ही विभिन्न भूकंपों के कारण 1.26 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं दुनिया के अन्य भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भी समय-समय पर आए बड़े झटकों ने भारी तबाही मचाई है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर निर्माण मानकों, आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी प्रणालियों के जरिए इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इंफाल/कामजोंग: Kamjong जिले में मंगलवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। National Centre for Seismology (NCS) के अनुसार, सुबह 5:59 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.2 दर्ज की गई। जमीन के भीतर गहराई में आया झटका भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर लगभग 62 किलोमीटर की गहराई में था, जिसकी वजह से झटके तो महसूस हुए लेकिन इसका असर सीमित रहा। नुकसान की कोई खबर नहीं प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल: किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है जनहानि की भी कोई खबर सामने नहीं आई है हालांकि, एहतियात के तौर पर स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लोगों में दहशत, घरों से बाहर निकले सुबह-सुबह आए झटकों के कारण लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। कुछ इलाकों में हल्के कंपन की शिकायतें मिलीं, लेकिन स्थिति जल्द सामान्य हो गई। पूर्वोत्तर में क्यों आते हैं भूकंप? विशेषज्ञों के अनुसार, Northeast India भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि अधिक रहती है। इसी कारण यहां समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।