मेक्सिको सिटी, एजेंसियां। मेक्सिको के दक्षिणी प्रशांत तट के पास शुक्रवार को 7.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके झटके ग्वाटेमाला, अल सल्वाडोर समेत मध्य अमेरिका के कई हिस्सों में महसूस किए गए। भूकंप के बाद प्रशांत तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। समुद्र में था भूकंप का केंद्र अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप का केंद्र मेक्सिको के चियापास राज्य के तट के पास समुद्र में था और इसकी गहराई करीब 15 किलोमीटर दर्ज की गई। उथली गहराई होने के कारण झटके काफी तेज महसूस किए गए। सुनामी अलर्ट के बाद तटीय इलाकों में सतर्कता भूकंप के तुरंत बाद मेक्सिको और प्रशांत क्षेत्र के लिए सुनामी चेतावनी जारी की गई। अधिकारियों ने तटीय इलाकों के लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी। बाद में स्थिति का आकलन करने के बाद चेतावनी को धीरे-धीरे कम किया गया। ग्वाटेमाला और अल सल्वाडोर में भी महसूस हुए झटके भूकंप के झटकों के बाद ग्वाटेमाला की राजधानी समेत कई शहरों में लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। कुछ स्थानों पर मामूली भूस्खलन और इमारतों को हल्का नुकसान होने की खबर है, लेकिन अब तक किसी बड़े हादसे या व्यापक तबाही की पुष्टि नहीं हुई है। आफ्टरशॉक्स की आशंका बरकरार भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
Pakistan Double Earthquake: पाकिस्तान में शनिवार सुबह कुछ ही घंटों के अंतराल पर दो बार भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। पहला भूकंप सुबह करीब 6:15 बजे आया, जबकि दूसरा झटका करीब 8:30 बजे दर्ज किया गया। दोनों भूकंपों की तीव्रता 5 मैग्नीट्यूड से अधिक रही। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार आए झटकों से लोगों में दहशत का माहौल है। बलूचिस्तान के पास था दूसरे भूकंप का केंद्र नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, दूसरे भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। वहीं, यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इसका केंद्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बरखान शहर से करीब 63 किलोमीटर दूर था। EMSC और USGS के अनुसार भूकंप की गहराई करीब 35 किलोमीटर थी, जबकि NCS ने इसकी गहराई 40 किलोमीटर दर्ज की है। भारतीय समयानुसार यह भूकंप सुबह करीब 8:36 बजे महसूस किया गया। कुछ घंटे पहले आया था पहला झटका इससे पहले शनिवार सुबह करीब 6:15 बजे पाकिस्तान में 5.3 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, पहले भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 75 किलोमीटर की गहराई में था। एक ही दिन में दो बार आए भूकंप के झटकों के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं की है। दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ी भूकंपीय गतिविधियां जून महीने में दुनिया के कई देशों में लगातार भूकंप दर्ज किए गए हैं। हाल ही में फिलीपींस और वेनेजुएला में भी तेज भूकंप आए थे। अब पाकिस्तान में लगातार दो झटकों ने एक बार फिर भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आखिर क्यों आते हैं भूकंप? पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें पृथ्वी के भीतर मौजूद गर्म मैग्मा पर लगातार गति करती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं या उनके बीच दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो अचानक बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है और धरती हिलने लगती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं। इसके अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, बड़े बांधों का निर्माण और खनन जैसी मानवीय गतिविधियां भी छोटे स्तर के भूकंप पैदा कर सकती हैं। P-वेव और S-वेव क्या होती हैं? भूकंप के दौरान दो प्रमुख प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं। P-वेव (Primary Wave) सबसे तेज गति से चलने वाली तरंग होती है। यह ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती है और सबसे पहले महसूस होती है। S-वेव (Secondary Wave) अपेक्षाकृत धीमी होती है, लेकिन सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। यह केवल ठोस पदार्थों में ही यात्रा कर सकती है और धरती को ऊपर-नीचे तथा दाएं-बाएं हिलाती है, जिससे इमारतों को अधिक क्षति होती है। भारत में भूकंप के कितने जोन हैं? भारत में भूकंप के जोखिम के आधार पर अब छह भूकंपीय जोन निर्धारित किए गए हैं। जोन VI (उच्चतम जोखिम): पूरे हिमालयी क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक। जोन V (बहुत अधिक जोखिम): कच्छ का रण (गुजरात) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह। जोन IV (उच्च जोखिम): दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्से। जोन III (मध्यम जोखिम): केरल, गोवा, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण भारत के कई हिस्से। जोन II (कम जोखिम): राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के शेष क्षेत्र। जोन I (नगण्य जोखिम): नए वर्गीकरण के बाद इस श्रेणी के अधिकांश क्षेत्रों को अब जोन II में शामिल कर दिया गया है।
टोक्यो: वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप के कुछ ही घंटों बाद जापान में भी धरती जोरदार झटकों से कांप उठी। गुरुवार सुबह उत्तरी जापान के इवाते प्रांत के तट के पास आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने कई इलाकों में दहशत फैला दी। भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत के हाशिकामी शहर समेत आसपास के क्षेत्रों में सबसे अधिक महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि जापानी अधिकारियों ने भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की भी कोई सूचना नहीं मिली है। टोक्यो तक महसूस हुए भूकंप के झटके स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी टोक्यो में भी हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप के बाद लोग कुछ समय के लिए घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सरकारी प्रसारक एनएचके द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य यातायात चलता हुआ दिखाई दिया और सार्वजनिक सेवाएं भी सुचारू रूप से संचालित होती नजर आईं। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। भूकंप की तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.0 दर्ज की गई। वहीं जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने इसकी तीव्रता 6.9 बताई है। एजेंसी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत के निकट समुद्र में था और इसकी गहराई लगभग 50 किलोमीटर थी। अपेक्षाकृत
जकार्ता: इंडोनेशिया में मंगलवार सुबह 6.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप के तेज झटके महसूस होते ही पालू और सेंट्रल सुलावेसी समेत कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। संभावित आफ्टरशॉक और सुनामी के खतरे को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। 45 किलोमीटर की गहराई में आया भूकंप नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप मंगलवार सुबह 08:57:49 बजे (भारतीय समयानुसार) आया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.8 दर्ज की गई। इसका केंद्र 1.073 डिग्री दक्षिण अक्षांश और 120.263 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था, जबकि इसकी गहराई जमीन से 45 किलोमीटर नीचे मापी गई। कई इलाकों में महसूस हुए जोरदार झटके स्थानीय मीडिया संस्थान 'जकार्ता ग्लोब' के मुताबिक, पालू, सिगी, डोंगगाला और टोजो उना-उना क्षेत्रों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। झटकों के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवार घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में एकत्र हो गए। सुनामी और आफ्टरशॉक के डर से खाली किए तटीय इलाके रिपोर्ट के अनुसार, संभावित सुनामी और आफ्टरशॉक के खतरे को देखते हुए लोगों ने एहतियातन तटीय इलाकों को खाली कर दिया। स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। नुकसान का आकलन करने में जुटे अधिकारी अभी तक किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित इलाकों में स्थिति का जायजा लेने और संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटी हुई हैं। जून में दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा बड़ा भूकंप गौरतलब है कि जून महीने में दक्षिण-पूर्व एशिया में यह दूसरा बड़ा भूकंप है। इससे पहले 8 जून को फिलीपींस में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसकी जानकारी भी नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने दी थी। लगातार बढ़ रही भूकंपीय गतिविधियों ने क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ा दी है।
उत्तरी Chile में सोमवार शाम 6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंप का केंद्र कलामा शहर के पास अटाकामा रेगिस्तान क्षेत्र में जमीन के करीब 100 किलोमीटर नीचे बताया गया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, भूकंप के झटके काफी तेज थे, लेकिन फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने भी कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है। सुनामी का खतरा टला चिली की राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने साफ किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। इसलिए तटीय इलाकों में अलर्ट जारी नहीं किया गया। क्यों बार-बार आता है चिली में भूकंप? चिली दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। यहां नाजका प्लेट, दक्षिण अमेरिकी प्लेट और अंटार्कटिक प्लेट आपस में टकराती हैं, जिसकी वजह से अक्सर तेज भूकंप आते रहते हैं। पहले भी आ चुके हैं विनाशकारी भूकंप 1960 में वाल्दिविया में 9.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसे अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। 2010 में 8.8 तीव्रता के भूकंप में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
Japan Powerful Earthquake: उत्तरी जापान में शनिवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके बाद तटीय क्षेत्रों में सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई है। भूकंप के तेज झटकों के बाद लोगों में दहशत फैल गई और प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी किया। भूकंप का केंद्र कहां था? जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तरी जापान के सनरिकु तट के पास समुद्र में था। गहराई: लगभग 10 किलोमीटर तीव्रता: 7.4 रिक्टर स्केल क्षेत्र: समुद्री तटीय इलाका कम गहराई पर आए भूकंप की वजह से सुनामी का खतरा और बढ़ गया है। सुनामी की चेतावनी जारी जापान के सार्वजनिक प्रसारक NHK के मुताबिक, भूकंप के बाद तटीय इलाकों में लगभग 3 मीटर (करीब 10 फीट) ऊंची सुनामी लहरें उठने की आशंका जताई गई है। सरकारी एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि: तटीय क्षेत्रों से दूर रहें ऊंचे स्थानों पर जाएं सरकारी निर्देशों का पालन करें 2011 की तबाही की यादें फिर ताजा जापान पहले भी बड़े भूकंप और सुनामी का सामना कर चुका है। साल 2011 में आए तोहोकू भूकंप ने देश को हिला दिया था। तीव्रता: 9.0 (इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक) इसके बाद भीषण सुनामी आई फुकुशिमा परमाणु संयंत्र प्रभावित हुआ लगभग 20,000 लोगों की मौत हुई थी इस नए भूकंप ने एक बार फिर उसी भयावह आपदा की यादें ताजा कर दी हैं। प्रशासन अलर्ट पर जापान सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तटीय इलाकों में आपातकालीन अलर्ट सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।