Election 2026

BJP supporters celebrating Assam election victory as Congress leaders react to major defeats
असम में कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे हारे, भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत

Assam Election Results: असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारा झटका लगा है। इस बार पार्टी के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनाव हार गए, जिससे राज्य में कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। गौरव गोगोई की हार ने चौंकाया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से हार का सामना करना पड़ा। उनके पिता तरुण गोगोई 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। गौरव गोगोई को भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने 23,182 वोटों के अंतर से हराया। देबब्रत सैकिया भी नहीं बचा पाए गढ़ विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया भी अपनी पारंपरिक नाजिरा सीट नहीं बचा सके। उनके पिता हितेश्वर सैकिया दो बार मुख्यमंत्री रहे थे। देबब्रत सैकिया को भाजपा के मयूर बोरगोहेन ने 46,000 से अधिक वोटों से हराया। दिगंता बर्मन की बड़ी हार एक और पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र दिगंता बर्मन को भी हार का सामना करना पड़ा। उनके पिता भूमिधर बर्मन कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके थे। बरखेत्री सीट पर भाजपा के नारायण डेका ने उन्हें 84,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराया। NDA की प्रचंड जीत, भाजपा का दमदार प्रदर्शन असम में सत्तारूढ़ NDA गठबंधन ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। 126 सदस्यीय विधानसभा में NDA ने 102 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 82 सीटें जीतकर पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया। वहीं सहयोगी दलों बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और असम गण परिषद (AGP) को 10-10 सीटें मिलीं। कांग्रेस के लिए बड़ा संदेश इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि असम की राजनीति में वंशवाद का असर कम होता जा रहा है और मतदाता प्रदर्शन के आधार पर फैसले ले रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह परिणाम भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ा संकेत माना जा रहा है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Tamil Nadu Election
लेडी लक के बल पर चुनाव जीते विजय

चेन्नई, एजेंसियां। एक्टर थलापति विजय ने तमिल राजनीति में हीरो की तरह एंट्री की है। उनकी पार्टी TVK ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 110 से ज्यादा सीटें जीत ली हैं। अब उनका सीएम बनना तय है। TVK की जीत में विजय के 'लेडी लक' को अहम माना जा रहा है। आज उसी 'लेडी लक' एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का जन्मदिन है, जिनका नाम विजय से जुड़ता रहा है। तृषा तमिलनाडु चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं। 51 साल के विजय आज तमिल फिल्मों के सबसे बड़े स्टार हैं तो तृषा कृष्णन क्वीन ऑफ साउथ इंडिया कही जाती हैं। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था, जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, संगीता सोर्नालिंगम ने अपनी तलाक याचिका में पति विजय पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप लगाया था। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। विजय और संगीता ने 1999 में शादी की थी। दोनों के 2 बच्चे हैं। विजय ने हाल ही में तलाक अनाउंस करने के बाद तृषा के साथ पब्लिक अपीयरेंस दी। कई लोगों का मानना था कि तलाक के बाद दोनों ने रिश्ता ऑफिशियल कर दिया है। इसी बीच विजय के बॉडीगार्ड ने एक पोस्ट शेयर की जिसमें लिखा था, अब अफवाह क्लियर करने का समय आ चुका है। आज जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आ रहा है, आज ही तृषा अपना जन्मदिन मना रही हैं। तृषा सुबह सबसे पहले तिरुमला मंदिर गईं और दोपहर होते-होते विजय के घर पहुंच गईं। साउथ मीडिया पोर्टल की रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद दोनों शादी की घोषणा कर सकते हैं।

Unknown मई 4, 2026 0
Massive voter turnout in West Bengal election sparks battle between Mamata Banerjee and Narendra Modi
बंगाल में बंपर वोटिंग: क्या ममता की वापसी या मोदी का मिशन पूरा?

West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान ने सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया है। करीब 92 फीसदी मतदान ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता इस बार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या यह वोटिंग सत्ता परिवर्तन का संकेत है या फिर Mamata Banerjee एक बार फिर वापसी करेंगी? या Narendra Modi का बंगाल फतह का सपना पूरा होगा? रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाई धड़कनें पहले चरण में 152 सीटों पर लगभग 91.78 फीसदी मतदान हुआ। पिछले चुनाव की तुलना में यह करीब 9 फीसदी अधिक है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। टीएमसी और बीजेपी दोनों इसे अपने पक्ष में बता रही हैं। लेकिन चुनावी राजनीति में एक पुरानी कहावत है–"ज्यादा वोटिंग का मतलब हमेशा सत्ता परिवर्तन नहीं होता।" क्या SIR बना गेमचेंजर? इस बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। मृतक, पलायन कर चुके और डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटने से कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई। ऐसे में मतदान प्रतिशत स्वाभाविक रूप से ऊपर गया। यानी सिर्फ प्रतिशत देखकर नतीजों का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इतिहास क्या कहता है? 2011 में भारी मतदान के बीच ममता बनर्जी ने लेफ्ट के 34 साल के शासन का अंत किया था। लेकिन 2016 और 2021 में मतदान कम होने के बावजूद टीएमसी सत्ता में लौटी। दूसरी ओर, 1984 में रिकॉर्ड मतदान के बावजूद कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रही थी। वहीं 1989 में अपेक्षाकृत कम मतदान के बावजूद सत्ता बदल गई। मतलब साफ है–वोटिंग प्रतिशत अकेला पैमाना नहीं है। ममता के लिए क्या है चुनौती? ममता बनर्जी की सरकार को 15 साल पूरे हो चुके हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। हालांकि, लक्ष्मी भंडार, मुफ्त राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाएं अभी भी टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। खासकर महिला वोटरों में ममता की पकड़ मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी की उम्मीदें क्यों बढ़ीं? बीजेपी पहली बार बंगाल में पूर्ण बहुमत का सपना देख रही है। पार्टी हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोध, NRC, घुसपैठ और केंद्र की योजनाओं को लेकर आक्रामक अभियान चला रही है। अगर बीजेपी को जीतना है, तो उसे हिंदू वोटों का भारी ध्रुवीकरण करना होगा। साथ ही, उसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन करना होगा। मुस्लिम वोट निर्णायक बंगाल में करीब 27 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यदि यह वोट एकजुट होकर टीएमसी के पक्ष में जाता है, तो बीजेपी की राह कठिन हो सकती है। लेकिन अगर Asaduddin Owaisi या अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा। ज्यादा वोटिंग का असली मतलब इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि मतदाता उत्साहित है। वह बदलाव भी चाहता हो सकता है, और मौजूदा सरकार को बचाने के लिए भी निकल सकता है। वोटिंग का उछाल लोकतंत्र के लिए शानदार संकेत है, लेकिन नतीजों की गारंटी नहीं। आखिर बाजी किसके हाथ? फिलहाल कहना जल्दबाजी होगी। ममता बनर्जी के पास मजबूत संगठन, महिला वोट बैंक और कल्याणकारी योजनाओं का सहारा है। वहीं बीजेपी के पास मोदी फैक्टर, आक्रामक प्रचार और सत्ता विरोधी माहौल का भरोसा। 4 मई को ही तय होगा कि बंगाल में फिर "दीदी" का जादू चलेगा या "मोदी मैजिक" इतिहास रचेगा। अभी के लिए इतना तय है–बंगाल की लड़ाई बेहद रोमांचक और कांटे की है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Pm modi west bengal visit
बंगाल दौरे पर पीएम मोदी ने हुगली में फोटोग्राफी कर खींचा सबका ध्यान

कोलकाता/हुगली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह हुगली नदी के तट पर समय बिताया। अपने बंगाल दौरे के दौरान पीएम मोदी ने न सिर्फ लोगों और नाविकों से मुलाकात की, बल्कि उन्होंने फोटोग्राफी में भी हाथ आजमाया। उन्होंने इस अनुभव की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं।   हुगली तट पर पीएम मोदी का दौरा और जनता से संवाद पीएम मोदी सुबह हुगली नदी पहुंचे, जहां उन्होंने मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों और स्थानीय नाविकों से बातचीत की। उन्होंने नाविकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम बेहद प्रेरणादायक है। इस दौरान उन्होंने नदी के किनारे खड़े होकर कई तस्वीरें भी लीं, जिसमें उनकी फोटोग्राफी में रुचि देखने को मिली।   सोशल मीडिया पर साझा की भावनाएं प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि गंगा का बंगाल की संस्कृति और आत्मा में विशेष स्थान है। उन्होंने इसे सभ्यता की शाश्वत चेतना से जोड़ते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा मां गंगा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर था।   विकास और समृद्धि का संदेश पीएम मोदी ने अपने संदेश में पश्चिम बंगाल के विकास और बंगाली समाज की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।   चुनावी माहौल में बढ़ी गतिविधि गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। पीएम मोदी राज्य में भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।   4 मई को आएंगे नतीजे पूरे चुनावी प्रक्रिया के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है, जहां वे लगातार जनता से संवाद कर रहे हैं और पार्टी के प्रचार को मजबूत कर रहे हैं।

Unknown अप्रैल 24, 2026 0
Voters standing in long queues at polling booths in West Bengal and Tamil Nadu during high turnout elections
बंगाल में रिकॉर्ड 92.7% मतदान, तमिलनाडु में भी टूटा उत्साह का रिकॉर्ड; PM मोदी बोले- बदलाव तय

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं ने लोकतंत्र के प्रति अभूतपूर्व उत्साह दिखाया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो स्वतंत्रता के बाद राज्य का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत बताया जा रहा है। वहीं, तमिलनाडु में भी 85.14 प्रतिशत मतदान के साथ नया रिकॉर्ड बना। बंगाल में इतिहास का सबसे बड़ा मतदान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे अधिक रहा। राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान कराया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों ने बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। तमिलनाडु में एक चरण में संपन्न हुआ मतदान तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया गया। राज्य में 85.14 प्रतिशत मतदान ने राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनाव आयोग को भी उत्साहित किया है। महिला, युवा और बुजुर्ग मतदाताओं की बड़ी भागीदारी इस चुनाव की खासियत रही। PM मोदी का TMC पर तीखा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भारी मतदान को "परिवर्तन का जनादेश" करार दिया। उन्होंने कहा कि 4 मई को मतगणना के साथ ही पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 15 साल पुराने "सिंडिकेट सिस्टम" और "महा जंगलराज" की समाप्ति हो जाएगी। पीएम ने विश्वास जताया कि जनता बदलाव का मन बना चुकी है। दूसरे चरण की तैयारी तेज पश्चिम बंगाल में बाकी 142 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। वहीं, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी समेत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मतदान प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए रखी। दोनों राज्यों के सभी मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई थी, जिससे निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित किया जा सके। अमित शाह ने संभाला मोर्चा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल में मौजूद रहे। उन्होंने साल्ट लेक स्थित बीजेपी के चुनाव नियंत्रण कक्ष का दौरा किया और पार्टी नेताओं के साथ चुनावी स्थिति की समीक्षा की।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Subhas Chandra Bose grandson Chandra Kumar Bose joins TMC ahead of West Bengal elections political shift
बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी दांव: नेताजी के पोते TMC में शामिल

Subhas Chandra Bose के पोते Chandra Kumar Bose ने Trinamool Congress (TMC) का दामन थाम लिया है। यह कदम West Bengal में आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। TMC में शामिल होने पर क्या बोले? TMC जॉइन करने के बाद चंद्र कुमार बोस ने Bharatiya Janata Party (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी “बांटने वाली राजनीति” करती है और समाज में सांप्रदायिक नफरत फैलाती है। उन्होंने कहा कि देश को बचाने के लिए ऐसी राजनीति का विरोध जरूरी है। किन नेताओं की मौजूदगी में जॉइन की पार्टी? उन्होंने राज्य मंत्री Bratya Basu और TMC सांसद Kirti Azad की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। BJP से TMC तक का सफर 2016 में BJP में शामिल हुए Bhabanipur से Mamata Banerjee के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए 2019 में Kolkata South से लोकसभा चुनाव लड़ा, फिर हार का सामना 2023 में BJP से इस्तीफा दे दिया चंद्र कुमार बोस का TMC में शामिल होना बंगाल की राजनीति में नया मोड़ माना जा रहा है, खासकर तब जब चुनावी माहौल तेजी से गरम हो रहा है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Dacoit Ek Prem Katha
फैंस के उम्मीद पर खरी नहीं उत्तरी मृणाल - अदिवि शेष की Dacoit Ek Prem Katha

चेन्नई, एजेंसियां। Dacoit Ek Prem Katha एक एक्शन-रोमांटिक फिल्म के तौर पर बड़े दावों के साथ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, लेकिन यह दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती। निर्देशक Shenil Dev की यह फिल्म एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट के बावजूद कमजोर कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले की वजह से प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है।   कहानी: प्यार, बदले और रहस्यों का मिश्रण फिल्म की कहानी हरि (Adivi Sesh) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हत्या और रेप के आरोप में 10 साल से जेल में है। वह अपनी प्रेमिका जूलिएट (Mrunal Thakur) की गवाही के कारण सजा काट रहा है। जेल से भागने के बाद उसका मकसद जूलिएट से बदला लेना होता है, लेकिन मुलाकात के बाद उसकी नफरत फिर से प्यार में बदलने लगती है। कहानी में कुछ ट्विस्ट आते हैं, जो इसे एक इमोशनल मोड़ देने की कोशिश करते हैं।    स्क्रीनप्ले और लॉजिक की बड़ी कमी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका स्क्रीनप्ले है। कोविड काल की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी अस्पतालों में भ्रष्टाचार दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ नहीं पाती। लव स्टोरी में भी गहराई की कमी है और मुख्य किरदारों के बीच मजबूत बॉन्डिंग नहीं बन पाती। डकैती के सीन अवास्तविक लगते हैं, जहां बिना ठोस योजना के किरदार आसानी से सुरक्षा और पुलिस को चकमा देते दिखते हैं।   अभिनय और तकनीकी पक्ष अदिवि शेष ने प्रयास तो अच्छा किया है, लेकिन कई जगह उनका अभिनय ओवर लगता है। मृणाल ठाकुर खासकर सेकेंड हाफ में प्रभाव छोड़ती हैं। Anurag Kashyap और Prakash Raj जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन के कारण सीमित रह जाते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और तकनीकी पहलू ठीक-ठाक हैं, जबकि अंतिम 20 मिनट थोड़े दिलचस्प बन पड़ते हैं।

Unknown अप्रैल 13, 2026 0
Voters standing in long queues at polling booths during assembly elections in Assam, Kerala, and Puducherry.
असम-केरल-पुडुचेरी में जबरदस्त वोटिंग, कई रिकॉर्ड टूटे

असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार (9 अप्रैल) को हुए मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम 6 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक तीनों जगहों पर अच्छी वोटिंग दर्ज की गई। कहां कितना हुआ मतदान? पुडुचेरी: 89.08% (सबसे ज्यादा) असम: 85.04% केरल: 77.38% असम में टूटा पिछला रिकॉर्ड असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर करीब 85.04% मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 के 82.04% से ज्यादा है। इस बार राज्य में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है: बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में कांग्रेस करीब 10 साल बाद वापसी की उम्मीद में सीटों के हिसाब से अलग-अलग ट्रेंड असम में अलग-अलग क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में काफी अंतर देखने को मिला: सबसे ज्यादा: दलगांव – 94.57% सबसे कम: अमरी – 70.40% इस चरण में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और 35 जिलों के 31,490 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए। केरल और पुडुचेरी में भी लंबी कतारें केरल: सभी 140 सीटों पर शाम 6 बजे तक वोटिंग खत्म हुई, लेकिन कई जगहों पर लोग लाइन में लगे रहे। समय से पहले पहुंचे मतदाताओं को टोकन देकर बाद में भी वोट डालने दिया गया। पुडुचेरी: 30 सीटों पर वोटिंग शाम 6 बजे खत्म हुई, लेकिन यहां भी देर तक लोग लाइन में खड़े रहे और उन्हें मतदान का मौका दिया गया।

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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