Emmanuel Macron

Syria Blast
दमिश्क धमाकों से दहला सीरिया, मैक्रों के होटल के बाहर ब्लास्ट, फ्रांस बोला- राष्ट्रपति सुरक्षित

दमिश्क, एजेंसियां। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ऐतिहासिक सीरिया दौरे के दौरान राजधानी दमिश्क में हुए दो बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धमाके उस समय हुए जब मैक्रों सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ राष्ट्रपति भवन में अहम बैठक कर रहे थे। सीरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, विस्फोटों में कम से कम चार लोग घायल हुए हैं, जबकि किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मैक्रों पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।   होटल के पास हुए धमाके, जांच जारी रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों दमिश्क के फोर सीजन्स होटल में ठहरे हुए हैं। दोनों धमाके होटल के नजदीक हुए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि एक विस्फोटक कूड़ेदान में और दूसरा सड़क किनारे खड़ी कार में लगाया गया था। धमाकों के बाद घटनास्थल से धुएं का गुबार उठता देखा गया और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक वाहन आग की लपटों में घिरा नजर आया। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं।   मैक्रों का दौरा क्यों है अहम? यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के सत्ता संभालने के बाद किसी बड़े यूरोपीय देश के प्रमुख की यह पहली सीरिया यात्रा है। मैक्रों ने सीरिया पर लगे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत दिलाने की पहल में भी अहम भूमिका निभाई है। दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच पुनर्निर्माण, आर्थिक सहयोग और विदेशी निवेश से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।   विश्लेषकों का मानना है कि धमाकों की घटना नई सीरियाई सरकार के लिए बड़ा सुरक्षा झटका है। वर्षों के गृहयुद्ध से तबाह सीरिया अभी भी अलग-अलग उग्रवादी गुटों की हिंसा से जूझ रहा है। सरकार देश में स्थिरता बहाल करने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय विश्वास हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ताजा धमाकों ने सुरक्षा चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Important Events
Important Events: 8 जुलाई की महत्त्वपूर्ण  घटनाएं

1497 – 170 सदस्यीय दल के साथ समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने के लिए वास्को डी गामा यूरोप से रवाना हुए थे। 1693 – न्यूयॉर्क पुलिस की वर्दी को मंजूरी दी गई। 1716 - ग्रेट नॉर्दर्न वॉर: डायनेक्लिन का युद्ध पीटर टेर्डेंकॉल्ड के नीचे एक डेनिश-नॉर्वेजियाई बल फंस गया और इस तरह से उसने स्वीडिश बल को हराया। 1758 - फ्रांसीसी सेनाओं पर फोर्ट टीकेंडरोगा, न्यूयॉर्क में ब्रिटिश और औपनिवेशिक हमले किये गये। 1777 - वर्मोंट ने नए संविधान का परिचय दिया, जिससे वह गुलामी को खत्म करने वाला पहला अमेरिकी राज्य बना। 1791 - संगीतकार जोसेफ हेडन को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में संगीत की मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया। 1792 - फ्रांस ने प्रशिया पर युद्ध की घोषणा की।  1809 - फिनिश युद्ध में स्वीडिश द्वीपसमूह फ्लीट ने रूसियों को पोर्कला के नौसैनिक युद्ध में पराजित किया। 1833 – रूस और तुर्की ने सुरक्षा संधि पर हस्ताक्षर किये। 1858 - ग्वालियर के क़िले के पतन के बाद लॉर्ड केनिंग ने सांति की घोषणा की थी। 1889 – अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल का प्रकाशन शुरू हुआ। 1914 - पश्चिम बंगाल में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री और वामपंथी राजनीति के आधार रहे ज्योति बसु का जन्म हुआ। 1918 - भारतीय संविधान में सुधार के लिए मांटेग्यु चेम्सफोर्ड रपट प्रकाशित की गई। 1930 - किंग जॉर्ज वी ने लंदन में इंडिया हाउस की स्थापना की। 1932 – अमेरिकी शेयर सूचकांक डाऊ जोंस ग्रेट डिप्रेशन के निचले स्तर 41 अंक पर पहुंच गया था। 1948 – अमेरिकी वायुसेना में महिलाओं की भर्ती शुरू हुई। 1954 - सतलुज नदी पर निर्मित भाखड़ा नांगल पनबिजली परियोजना पर बनी सबसे बड़ी नहर का प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उद्घाटन किया था। 1955 - बुरखा विश्वविद्यालय थाईलैंड के चोनबरी प्रांत में स्थापित किया गया। 1975 - में म्यांमार के बगाँ में आए भूकंप में हज़ारों मंदिर ध्वस्त हो गए तथा भारी जानमाल की छति हुई। 1992 – थॉमस क्लेस्टिल आस्ट्रिया के राष्ट्रपति बने। 1994 - शिमाकी मुकाई जापान की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री बनी। 1997 – उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य को संगठन में शामिल होने का आमंत्रण दिया। 1999 - पापुआ न्यु गिनी (प्रशान्त महासागरीय देश) प्रधानमंत्री बिल स्कोट का इस्तीफ़ा। 2001 – बांग्लादेश के बल्लेबाज मोहम्मद अशरफुल ने 17 साल की उम्र में श्रीलंका के खिलाफ शतक जड़ा। वह बांग्लादेश के सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं। 2002 - दक्षिण अफ़्रीका में अश्वेत क्रिकेटरों के लिए कोटा प्रणाली समाप्त। 2003 - सूडान में हुए विमान हादसे में 115 ( या 116 )लोग मारे गये। 2003 – ईरान में सिर से जुड़ी दो बहनें लालेह और लादन बिजानी को अलग करने के लिए किया गया ऑपरेशन असफल हो जाने की वजह से मौत हुई। 2005 - जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर समूह-8 के देशों में सहमति बनी। 2008 - पेरिस की सरकार ने बांग्लादेश की विवादाग्रस्त लेखिका तस्लीमा नसरीन को मानद नागरिकता देने का प्रस्ताव किया। 2012- असम में भयावह बाढ़ ने विश्व प्रसिद्ध काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के 13 गैंडों समेत 500 से अधिक वन्य प्राणियों को लील लिया। 2012 – अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में कार बम धमाके से 14 नागरिकों की मौत हुई। 2013 – मिस्त्र की राजधानी काहिरा में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों पर सेना की गोलीबारी में 42 लोगों मरे। 2014 – जर्मनी फुटबाल टीम के मिरोस्लाव क्लोस ने विश्वकप में सर्वाधिक 16 गोलों का विश्व रिकार्ड बनाया। 2019 - डीआरडीओ की ओर से विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड की तरफ से निर्मित नाग मिसाइल का परीक्षण सेना के अधिकारियों ने राजस्थान के पोखरण में किया । 2019 - किरियाकोस मित्सोताकिस ग्रीस के नए प्रधान मंत्री बने । 2019 - भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजमार्ग परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एनआईआईएफ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 2019 - राहुल द्रविड़ को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। 2020 - कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय नागरिकों को विदेश से वापस लाने के प्रयासों के तहत 5 मई, 2020 को शुरू किया गया ऑपरेशन समुद्र सेतु का समापन हुआ। 2021 - भारत और गाम्बिया ने कार्मिक प्रशासन और शासन सुधार में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 2021 - हैती के राष्‍ट्रपति की हत्‍या में शामिल संदिग्‍ध हमलावर सुरक्षाबलों के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए। 2021 - ढाका के नजदीक जूस फैक्‍टरी में आग लगने से 52 की मौत हुई। 2022 - उत्तराखंड के रामनगर में पंजाब के पर्यटकों की कार नदी के तेज बहाव में बहने से कार में सवार दस लोगों में नौ की मौत हुई एक घायल। 2022 - पवित्र अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से आई बाढ़ की चपेट में आने से 15 श्रद्धालुओं की मौत हुई , 40 से अधिक लापता और 48 लोग घायल हुए। 2022 - सऊदी अरब ने भारत से 79 हजार से अधिक व्‍यक्तियों को हज करने की अनुमति दी। 2022 - तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में हुई सड़क दुर्घटना में 6 लोगों की मौत हुई। 2023 - भारतीय कृषि के समग्र विकास के लिए दो दिवसीय चिंतन शिविर का सार्थक आयोजन हुआ। 2023 - DPIIT ने “एक्सप्लोरिंग द इंडिया टॉय स्टोरी” पर गोलमेज संवाद का सफलतापूर्वक आयोजन किया। 2023 - सूडानी सेना द्वारा सूडान के ओमदुरमान जिले पर हवाई हमले में कम से कम 22 की मौत हुई। 2023 - प्रधानमंत्री मार्क रूटे के नेतृत्व वाली डच सरकार गिरी। 2023 - हरियाणा के जींद में रोडवेज बस और क्रूजर की टक्कर से 8 लोगों की मौत ल 9 घायल हुए। 2024 - प्रधानमंत्री मोदी 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने मास्को पहुंचे। 2024 - वैज्ञानिकों ने खगोलीय पिंडों से खगोल भौतिकी जेट की गतिशीलता पर प्लाज्मा संरचना के प्रभाव का पता लगाया। 2025 - बिहार में सरकारी नौकरी में डोमिसाइल पॉलिसी लागू हुई , सिर्फ राज्य की महिलाओं को 35% आरक्षण मिलेगा।   8 जुलाई को जन्मे व्यक्ति   1898 - पी०एस० कुमारस्वामी राजा -  तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री। 1912 - बाबू बनारसी दास - भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री थे। 1914 – पश्चिम बंगाल में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री और वामपंथी राजनीति के आधार रहे ज्योति बसु का जन्म हुआ। 1932 - गुलाम हसन सोफी कश्मीर, भारत के पारंपरिक संगीत के गायक और हारमोनियम वादक थे।  1937 - गिरिराज किशोर - हिन्दी के प्रसिद्ध उपन्यासकार, सशक्त कथाकार, नाटककार और आलोचक। 1939 - गंगा प्रसाद - सिक्किम के राज्यपाल व पहले मेघालय के राज्यपाल रह चुके। 1946 - बिपलब चटर्जी बंगाली एवं हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता। 1949 - गेगांग अपांग - लगभग 22 वर्षों तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे । 1949 - डॉक्टर येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी वाईएसआर नाम से लोकप्रिय, वर्ष 2004 से 2009 तक आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। 1958 - नीतु सिंह, हिन्दी चलचित्र अभिनेत्री, (काला पत्थर) (दीवार)। 1972 - सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान। 1980 - चेतन आनंद - भारत के प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाडी।  1991 - अनीता कुंडू - भारत की प्रसिद्ध पर्वतारोही।   8 जुलाई को हुए निधन   1880 – फ़्रांसीसी दार्शनिक व फ़्रिनॉलजी अर्थात खोपड़ी के ज्ञान की आधार रखने वाले वैज्ञानिक पियर पॉल ब्रोका का निधन हुआ। वे वर्ष 1824 में फ़्रांस में जन्मे थे। 1994 – उत्तरी कोरिया के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और कम्युनिष्ट पार्टी के महासचिव किम ईल सुंग का निधन हुआ। 2007 - चन्द्रशेखर सिंह - भारत के पूर्व प्रधानमंत्री।  2018 - मुंडक्कल मैथ्यू जेकब - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। 2019 - भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व गोलकीपर ए यू सेलेस्टिन का लंबी बीमारी के बाद निधन। 2020 - शोले में सूरमा भोपाली का किरदार निभाने वाले कॉमेडियन जगदीप का मुंबई में निधन। 2021 - वीरभद्र सिंह - हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री। 2022 - जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (67) का चुनावी कार्यक्रम के दौरान गोली मारे जाने के बाद निधन हुआ। 2022 -  अंगोला के पूर्व राष्ट्रपति जोस एडुआर्डो डॉस सैंटोस (79) का निधन हुआ। 2022 - अमेरिकी अभिनेता टोनी सिरिको (79) का निधन हुआ। 2025 - केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता, दाऊलाल वैष्णव (81) का निधन हुआ।   8 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   श्री विमलनाथ जी मोक्ष कल्याक (जैन , आषाढ़ कृष्ण अष्टमी)। बाबू श्री बनारसी दास जयन्ती। श्री पी०एस० कुमारस्वामी राजा जयन्ती। श्री सौरव चंडीदास गांगुली (क्रिकेटर) जन्म दिवस। श्री गेगांग अपांग जन्म दिवस। श्री ज्योतिंद्र नाथ बसु जयन्ती। श्री चन्द्रशेखर सिंह स्मृति दिवस। डॉक्टर श्री येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी जयन्ती / रयुतु दिनोत्सवम (आंध्र प्रदेश में किसान दिवस)। कृपया ध्यान दें  यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
PM MODI Mahabharat Painting
PM मोदी ने फ्रांस दौरे में मैक्रों को भेंट की कलमकारी महाभारत पेंटिंग, ब्रिजिट को दिया पोचमपल्ली स्टोल

पेरिस, एजेंसियां। फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति  इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से भारतीय कला, परंपरा और हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया।   कलमकारी महाभारत पेंटिंग बनी मुख्य आकर्षण पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों को आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी शैली में बनी महाभारत पेंटिंग भेंट की। यह कलाकृति लगभग छह महीने की मेहनत से तैयार की गई है, जिसमें महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को विस्तार से दर्शाया गया है। पेंटिंग में धर्म, न्याय, साहस और नैतिक निर्णय जैसे मूल्यों को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया भगवद्गीता का संदेश भी प्रमुख रूप से शामिल है, जो कर्तव्य और आत्मसंयम का मार्ग दिखाता है।   ब्रिजिट मैक्रों को मिला पोचमपल्ली सिल्क स्टोल राष्ट्रपति मैक्रों की पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को तेलंगाना का प्रसिद्ध पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार में दिया गया। यह हाथ से बुना हुआ स्टोल पारंपरिक इकत रेजिस्ट-डाइंग तकनीक से तैयार किया जाता है और अपनी ज्यामितीय व पुष्पीय डिजाइनों के लिए जाना जाता है। यह स्टोल भारतीय वस्त्र परंपरा और आधुनिक कलात्मकता का सुंदर संगम माना जाता है।   सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा भारतीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक वस्तुओं के जरिए यह उपहार न केवल कला का प्रदर्शन हैं, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपने विदेशी दौरों में अक्सर इस तरह के पारंपरिक उपहार भेंट करते हैं, जिससे भारतीय कारीगरों और उनकी कला को वैश्विक पहचान मिल सके।

abhishek singh जून 19, 2026 0
US-Iran Peace
अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प बोले- डील साइन, ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए

पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर दस्तखत किए। भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5 बजे इसके ऐलान के तुरंत बाद यह समझौता लागू हो गया। होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा समझौते के तहत ईरान में युद्ध समाप्त होगा और लेबनान में भी संघर्ष खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने की बात कही गई है। तय कार्यक्रम से पहले ही हुआ समझौता शांति समझौते पर 19 जून को जेनेवा के पास लूसर्न शहर में साइन होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में इस पर दस्तखत कर दिए गए।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Donald Trump Narendra Modi Meeting
G7 Summit 2026: एवियन में 16 महीने बाद होगी मोदी-ट्रंप की महाबैठक, 'नाविकों की मौत' और टैरिफ विवाद के बीच रिश्तों का 'कड़ा इम्तिहान'

नई दिल्ली, एजेंसियां। फ्रांस के जी-7 मंच पर बुधवार शाम 6:15 बजे भारत और अमेरिका के दिग्गज नेता आमने-सामने होंगे। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच होने वाली इस वार्ता में रक्षा, व्यापार और हालिया कूटनीतिक असहमतियों पर बेबाक चर्चा होने की उम्मीद है।   फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) इस वक्त पूरी दुनिया की कूटनीतिक हलचलों का केंद्र बना हुआ है। इसी वैश्विक मंच के इतर, बुधवार (17 जून 2026) की शाम 6:15 बजे (भारतीय समयानुसार) एक ऐसी द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।   भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद आधिकारिक तौर पर आमने-सामने बैठकर वार्ता करेंगे। यह मुलाकात महज एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह उन तमाम असहजताओं और तनावों को दूर करने का एक बड़ा 'टेस्ट' है, जो हाल के महीनों में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच पनपे हैं।   तनाव के साये में कूटनीतिक संवाद   भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी भले ही मजबूत हो, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस रिश्ते पर गहरा दबाव डाला है। पिछले सप्ताह ओमान के करीब एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी नौसेना की सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई थी।   माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस संवेदनशील मुद्दे को ट्रंप के समक्ष प्रमुखता से उठाएंगे। इसके अतिरिक्त, एच-1बी (H-1B) वीजा नियमों में सख्ती, बाजार पहुंच में अड़चनें, रक्षा सौदों में देरी और 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के अतिशयोक्तिपूर्ण दावों ने भी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक असहजता पैदा की है।   व्यापारिक समझौते और तकनीक की बिसात   तनाव के बावजूद, दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीदें भी जिंदा हैं। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसने एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने न सिर्फ कुछ भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम किया, बल्कि रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए दंडात्मक शुल्कों को भी हटा लिया था।   आज की बैठक में दोनों नेता इसी नींव पर एक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी खड़ी करने की कोशिश करेंगे। एजेंडे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुरक्षा और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन जैसे आधुनिक विषय भी मजबूती से शामिल रहेंगे।   जी-7 का कड़ा रुख: यूक्रेन से लेकर इंडो-पैसिफिक तक मोदी-ट्रंप की यह बैठक उस जी-7 सम्मेलन के बीच हो रही है, जिसने कई वैश्विक मोर्चों पर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। सम्मेलन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सदस्य देशों ने कीव पर हुए उस हालिया विनाशकारी रूसी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई और एक ऐतिहासिक कैथेड्रल को भारी नुकसान पहुंचा। जी-7 ने यूक्रेन की दृढ़ता की सराहना करते हुए अपना अटूट समर्थन दोहराया है।   इसके साथ ही, पूर्वी और दक्षिण चीन सागर तथा ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए नेताओं ने एक 'मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक' की वकालत की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 'चाइना शॉक' का जिक्र करते हुए जोर दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के लिए यूरोप और दुनिया को चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता घटानी होगी, जो आर्थिक संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी है।   पश्चिम एशिया और ईरान पर ऐतिहासिक सहमति   वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी एक अहम विषय होगा। जी-7 के मंच से एक बड़ी राहत की खबर यह भी आई कि सदस्य देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व और मध्यस्थों के सहयोग से हुए 'अमेरिका-ईरान समझौते' का जोरदार स्वागत किया है। इस समझौते को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।   अब देखना यह है कि जब प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप वार्ता की मेज पर बैठेंगे, तो क्या वे इन जटिल वैश्विक समीकरणों और द्विपक्षीय मतभेदों को सुलझाकर भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई रफ्तार दे पाएंगे।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi arrives in France to attend the 52nd G7 Summit in Evian alongside global leaders.
G7 समिट के लिए फ्रांस पहुंचे ट्रम्प और मेलोनी, आज एवियन पहुंचेंगे पीएम मोदी; मैक्रों बोले- अमेरिका-ईरान समझौता विश्व शांति के लिए अहम

  एवियन/पेरिस: फ्रांस के एवियन शहर में मंगलवार से 52वें G7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो रही है, जो 17 जून तक चलेगा। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन फ्रांस पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज स्लोवाकिया से फ्रांस पहुंचेंगे और सम्मेलन में विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के नेता के रूप में हिस्सा लेंगे। ट्रम्प-मैक्रों की मुलाकात, ईरान-अमेरिका समझौते का स्वागत फ्रांस पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे विश्व शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मैक्रों ने कहा कि इस समझौते से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। G7 नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन के दौरान G7 सदस्य देशों के नेताओं और अन्य सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की भी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर भारत का पक्ष रख सकते हैं। ईरान, यूक्रेन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर रहेगा फोकस इस बार G7 समिट के एजेंडे में यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजरायल तनाव, गाजा और लेबनान की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक सहयोग, सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रमुख मुद्दे हैं। G7 देशों के नेता इन विषयों पर सामूहिक रणनीति और संभावित घोषणाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। पीएम मोदी का 100वां विदेशी दौरा फ्रांस और स्लोवाकिया की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल का 100वां विदेशी दौरा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, मोदी अब तक प्रधानमंत्री के रूप में 78 देशों की यात्रा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर उनका पहला विदेश दौरा जून 2014 में भूटान का था। पहले कार्यकाल में उन्होंने 49, दूसरे कार्यकाल में 27 और तीसरे कार्यकाल में अब तक 24 विदेश यात्राएं की हैं। क्या है G7? G7 यानी 'ग्रुप ऑफ सेवन' दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के शामिल होने के बाद यह G7 बना। 1998 में रूस को शामिल कर इसे G8 बनाया गया, लेकिन 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद रूस को बाहर कर दिया गया और समूह फिर G7 बन गया। भारत क्यों है खास? भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका के कारण उसे नियमित रूप से विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 से लगातार G7 शिखर सम्मेलनों में हिस्सा ले रहे हैं। इस बार वह सातवीं बार G7 मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। G20 और G7 में क्या अंतर? G7 मुख्य रूप से विकसित देशों का समूह है, जहां आर्थिक मुद्दों के साथ राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विषयों पर भी चर्चा होती है। वहीं G20 में विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं दोनों शामिल हैं और उसका मुख्य फोकस वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और वित्तीय स्थिरता पर रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में G20 का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन भू-राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर G7 अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and French President Emmanuel Macron meet in Nice after signing agreements on AI, trade, defence and space cooperation.
मोदी-मैक्रों मुलाकात: AI, UPI, रक्षा और अंतरिक्ष समेत 13 बड़े क्षेत्रों में भारत-फ्रांस की ऐतिहासिक डील, रणनीतिक साझेदारी को मिली नई उड़ान

  नीस (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फ्रांस के नीस शहर में हुई उच्चस्तरीय वार्ता कई महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं के साथ संपन्न हुई। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार, शिक्षा, डिजिटल भुगतान, रेलवे और परमाणु ऊर्जा सहित 13 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की गई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विशेष ब्रीफिंग में बताया कि दोनों देशों ने उभरती तकनीकों, आर्थिक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। भारत-फ्रांस के बीच हुईं 13 बड़ी डील्स 1. इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 को मंजूरी दोनों देशों ने अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में दीर्घकालिक सहयोग के लिए ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030’ अपनाया। 2. AI पर संयुक्त वर्किंग ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके वैश्विक नियमन पर सहयोग बढ़ाने के लिए भारत-फ्रांस संयुक्त AI वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा। 3. पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र स्थापित करने का फैसला किया। 4. आर्थिक सुरक्षा संवाद की शुरुआत महत्वपूर्ण खनिजों, सप्लाई चेन सुरक्षा और रणनीतिक संसाधनों पर सहयोग बढ़ाने के लिए ‘इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग’ शुरू किया जाएगा। 5. फ्रांस में UPI का विस्तार भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI के उपयोग को फ्रांस में और व्यापक बनाने पर सहमति बनी। 6. 19 संस्थागत समझौतों पर हस्ताक्षर दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार से जुड़े संस्थानों के बीच 19 अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। 7. कानपुर में एयरोनॉटिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI), कानपुर में एयरोनॉटिक्स और संबद्ध क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। 8. पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 नए भारतीय स्टार्टअप दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप परिसरों में शामिल पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 अतिरिक्त भारतीय स्टार्टअप्स को जगह दी जाएगी। 9. डिजिटल साइंस सेंटर की स्थापना भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और फ्रांस की INRIA संस्था मिलकर डिजिटल साइंस सेंटर स्थापित करेंगे। 10. पेरिस-सैकले विश्वविद्यालय में इंडिया चेयर ‘AI, Innovation and Culture’ विषय पर आईसीसीआर इंडिया चेयर की स्थापना की जाएगी। 11. स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और फ्रांस के हेल्थ डेटा हब के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए। 12. रेलवे और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में साझेदारी भारत में रेलवे आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल विकास के लिए सहयोग बढ़ाने संबंधी घोषणा-पत्र जारी किया गया। 13. अंतरिक्ष और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES ने माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष मिशनों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। साथ ही गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षा से जुड़ा जनरल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी हुआ। रक्षा और परमाणु ऊर्जा पर विशेष जोर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने रक्षा उपकरणों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि भारत में लागू ‘शांति अधिनियम’ (SHANTI Act) के बाद छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं खुली हैं। छात्रों और पेशेवरों के लिए खुलेंगे नए अवसर प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया। वहीं राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रांस में अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। दोनों नेताओं ने छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने तथा शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत-फ्रांस संबंधों को मिलेगी नई गति नीस स्थित विला केरीलोस में हुई यह बैठक उस समय हुई है जब भारत और फ्रांस ने इस वर्ष की शुरुआत में अपने संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक पहुंचाया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-फ्रांस साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फ्रांस दौरे के पहले चरण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इसके बाद वह दोबारा फ्रांस लौटकर जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and French President Emmanuel Macron inaugurate the Bharat Innovates event in Nice, highlighting innovation and India-France cooperation.
‘इनोवेशन भारत के DNA में बसा है’: पीएम मोदी ने ‘भारत इनोवेट्स’ में AI for All का किया समर्थन, फ्रांस के साथ साझेदारी को बताया भविष्य की ताकत

  नीस (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ (Bharat Innovates) समारोह का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इनोवेशन भारत के डीएनए में गहराई से समाया हुआ है और भारत सदियों से अपने ज्ञान, विज्ञान और नई सोच के माध्यम से दुनिया का मार्गदर्शन करता आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा और योग जैसे क्षेत्रों में भारत का योगदान पूरी मानवता के लिए आधारभूत रहा है और आज का भारत उसी विरासत को नई दिशा और नई गति दे रहा है। ‘AI for All’ के विजन को आगे बढ़ा रहा भारत पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और देश में स्टार्टअप क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा नई सोच और नवाचार के जरिए मानवता की समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य AI for All यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सबके लिए उपयोगी और सुलभ बनाना है। भारत की नई पीढ़ी विश्वस्तरीय समाधान तैयार कर रही है और ‘भारत इनोवेट्स’ जैसे मंच उन्हें वैश्विक पहचान देने का माध्यम बन रहे हैं।” भारत-फ्रांस संबंध सिर्फ रणनीतिक नहीं, साझा विजन पर आधारित: पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया में कई देश व्यापार और रणनीतिक साझेदारी करते हैं, लेकिन भारत और फ्रांस का रिश्ता साझा मूल्यों और साझा दृष्टिकोण (Shared Vision) पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने मिलकर कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए काम किया है, जिनमें: इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहयोग सुरक्षा और रक्षा साझेदारी सस्टेनेबिलिटी और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रयास शामिल हैं। पीएम मोदी ने कहा कि फरवरी में शुरू हुए भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर ने दोनों देशों के बीच तकनीक और नवाचार सहयोग को नई ऊंचाई दी है। भारत ग्लोबल इनोवेशन का अग्रणी देश: इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक नवाचार (Global Innovation) में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की क्षमताओं का सबसे बड़ा उदाहरण उसका अंतरिक्ष कार्यक्रम है। मैक्रों ने कहा, “चंद्रयान-3 मिशन के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग ने भारत की तकनीकी क्षमता, वैज्ञानिक प्रतिभा और इनोवेशन की ताकत को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।” पीएम मोदी की उपलब्धियों की भी की सराहना फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि कुछ ही दिन पहले वह आजादी के बाद भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बने हैं, जो उनके दृढ़ संकल्प और भारत की स्थिर लोकतांत्रिक शक्ति को दर्शाता है। मैक्रों ने कहा, “सवाल यह नहीं है कि भारत इनोवेशन कर रहा है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि भारत के साथ मिलकर इनोवेशन कौन करेगा।” भारत-फ्रांस साझेदारी को मिलेगी नई गति विशेषज्ञों का मानना है कि ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम भारत और फ्रांस के बीच तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, अंतरिक्ष अनुसंधान और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगा। यह पहल दोनों देशों के साझा विजन को वैश्विक नवाचार और मानवता के हित में नई दिशा देने का महत्वपूर्ण मंच बन सकती है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
Simdega Mango News
सिमडेगा के आमों की मिठास पहुंची लंदन

रांची। झारखंड के सिमडेगा जिले ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren के विजन और बिरसा हरित ग्राम योजना के सफल क्रियान्वयन का परिणाम है कि जिले के उच्च गुणवत्ता वाले आम्रपाली आम पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच गए हैं। सिमडेगा से 1322 किलोग्राम (1.32 टन) आम्रपाली आम की पहली व्यावसायिक खेप यूनाइटेड किंगडम के लंदन के लिए रवाना की गई है।   कोरोना काल में शुरू हुई योजना बनी सफलता की मिसाल कोरोना महामारी के दौरान ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिरसा हरित ग्राम योजना की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच सिमडेगा जिले के 12 हजार से अधिक किसानों ने लगभग 10,500 एकड़ भूमि पर आम्रपाली, मल्लिका और लंगड़ा आम की बागवानी की। आज उन्हीं किसानों की मेहनत का फल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा है।   पिछले वर्ष आम का उत्पादन अच्छा होने के बावजूद किसानों को उचित बाजार नहीं मिल पाया था। इस बार जिला प्रशासन ने खरीदार-विक्रेता बैठकें आयोजित कर बाजार से सीधा संपर्क स्थापित किया। साथ ही APEDA के सहयोग से आमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया।   महिला किसान बनीं निर्यात अभियान की ताकत सिमडेगा में 7,500 सखी मंडलों से जुड़ी 93 हजार से अधिक महिलाओं ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिले के छह किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के लगभग 300 किसान इस निर्यात प्रक्रिया से जुड़े हैं। महिला जागृति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने पहली खेप के निर्यात में प्रमुख भूमिका निभाई।   81 टन आम बेचने का लक्ष्य जिला प्रशासन ने इस सीजन में 81 टन आम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचने का लक्ष्य रखा है। जल्द ही यूके और यूरोप के लिए नई खेप भेजी जाएगी। साथ ही घरेलू बाजार में रिलायंस मार्ट के साथ भी बाजार संपर्क स्थापित किया गया है।   2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को मिला रोजगार बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत पूरे झारखंड में 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में बागवानी विकसित की गई है, जिससे 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार मिला है। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस वर्ष लगभग 50 हजार मीट्रिक टन फल उत्पादन होगा, जिससे झारखंड भविष्य में फलों के निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

abhishek singh जून 10, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi with French and Slovak leaders during Europe visit and G7 Summit engagements.
यूरोप दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, पहली बार स्लोवाकिया की करेंगे यात्रा; G-7 शिखर सम्मेलन में भी लेंगे हिस्सा

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह फ्रांस में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। स्लोवाकिया की यह यात्रा विशेष रूप से ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि 1993 में देश के गठन के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी। फ्रांस से होगी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी 13 जून को फ्रांस के नीस शहर पहुंचेंगे। 14 जून को उनकी मुलाकात फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron से होगी। दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बैठक के दौरान दोनों नेता संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप, निवेशक और वेंचर कैपिटल फंड भाग लेंगे। यह आयोजन भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत आयोजित किया जा रहा है। पहली बार स्लोवाकिया जाएंगे पीएम मोदी यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक Slovakia की राजकीय यात्रा करेंगे। यह दौरा स्लोवाक प्रधानमंत्री Robert Fico के निमंत्रण पर हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान प्रधानमंत्री फिको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और व्यापार, निवेश, ऑटोमोबाइल विनिर्माण, रेलवे, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के राष्ट्रपति Peter Pellegrini से भी मुलाकात करेंगे। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्कों को देखते हुए इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। G-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी यात्रा के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 Summit 2026 में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के साथ संभावित मुलाकात पर भी रहेगी। पेरिस में करेंगे VivaTech सम्मेलन में शिरकत यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को पेरिस जाएंगे। यहां वह VivaTech 2026 में भाग लेंगे, जिसे यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप आयोजनों में गिना जाता है। प्रधानमंत्री के पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी संभावना है। इसके अलावा वह विभिन्न प्रौद्योगिकी कंपनियों और निवेशकों के साथ संवाद कर सकते हैं। क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा? प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा फ्रांस, स्लोवाकिया और यूरोपीय देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दे सकती है। G-7 मंच पर भारत की भागीदारी वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करेगी, जबकि नवाचार और प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेना भारत को वैश्विक स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर देगा।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Egyptian President Abdel Fattah el-Sisi discusses diplomatic efforts to mediate US-Iran peace talks
अमेरिका-ईरान समझौते के लिए आगे आया मिस्र, शांति वार्ता में निभाने को तैयार मध्यस्थ की भूमिका

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब मिस्र भी दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की कोशिशों में सक्रिय हो गया है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक शांति समझौता कराने के लिए विभिन्न पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है। मैक्रों से बातचीत में सामने आया मिस्र का रुख मिस्र के राष्ट्रपति ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ फोन पर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। इस दौरान अल-सीसी ने कहा कि काहिरा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और एक व्यापक समझौते का रास्ता निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मिस्र का रुख अंतरराष्ट्रीय कानून, देशों की संप्रभुता और उनके संसाधनों के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित है। उनका मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। मध्य पूर्व में स्थिरता पर फ्रांस का जोर बातचीत के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व को नए संघर्ष और अराजकता से बचाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए। मैक्रों ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की निर्बाध आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रंप बोले- समझौते के करीब हैं दोनों देश इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान परमाणु समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी है। व्हाइट हाउस में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने कहा कि यदि समझौता हो जाता है तो यह सभी पक्षों के लिए बेहतर होगा। परमाणु हथियार नहीं बनाने की बात पर सहमति ट्रंप के अनुसार, ईरान इस बात पर सहमत हुआ है कि वह न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही किसी अन्य देश से हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई और शर्तों को और स्पष्ट किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण गारंटी यही है कि ईरान के पास किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार न हों। उन्होंने दावा किया कि इस दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है। सैन्य विकल्प अब भी खुला ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंचती है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अब भी खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि वह कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन अमेरिका की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने बातचीत को जटिल और कठिन बताया, लेकिन साथ ही विश्वास जताया कि धीरे-धीरे दोनों पक्ष किसी समाधान की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता और मध्य पूर्व की राजनीति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।  

surbhi जून 1, 2026 0
Naval ships from multiple countries patrolling Strait of Hormuz to secure global trade routes
होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए UK-फ्रांस की बड़ी पहल, समुद्री मिशन की घोषणा

  वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए 51 देशों की बैठक के बाद फैसला होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार पर खतरे को देखते हुए अब यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने घोषणा की है कि दोनों देश मिलकर एक बहुराष्ट्रीय (Multinational) रक्षा मिशन का नेतृत्व करेंगे, जिसका उद्देश्य समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना होगा। यह फैसला 51 देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें कई देशों ने इस मिशन में सहयोग देने की इच्छा जताई है। मिशन होगा पूरी तरह शांतिपूर्ण और रक्षात्मक ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि यह मिशन किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल: वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा समुद्री मार्गों की निगरानी और बारूदी सुरंगों (माइन) को हटाना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मिशन तब पूरी तरह लागू होगा जब क्षेत्र में चल रहा संघर्ष समाप्त हो जाएगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों है अहम? होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से बड़े पैमाने पर तेल और गैस का परिवहन होता है। हाल ही में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से बढ़ी स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, हाल के संघर्ष के दौरान ईरान पर इस जलमार्ग को बाधित करने के आरोप लगे थे। हालांकि बाद में ईरान के विदेश मंत्री ने दावा किया कि यह मार्ग अब पूरी तरह खुला है। उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया कि समुद्री रास्ते फिर से चालू हो गए हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने नाटो की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसे “जरूरत के समय कमजोर” बताया। ब्रिटेन और फ्रांस की संयुक्त अगुवाई कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इस मिशन में दर्जनों देश शामिल हो सकते हैं। कई देशों ने अपने सैन्य और तकनीकी संसाधन देने की पेशकश भी की है। मैक्रों ने कहा कि हालात में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन अभी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जर्मनी समेत कई देशों का समर्थन जर्मनी ने भी इस मिशन का समर्थन करते हुए कहा है कि वह नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका की भागीदारी इस मिशन को और मजबूत बना सकती है। अगले हफ्ते आएगा पूरा रोडमैप ब्रिटेन सरकार ने बताया है कि इस मिशन की विस्तृत योजना अगले हफ्ते लंदन में होने वाली सैन्य बैठक के बाद सार्वजनिक की जाएगी।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Dassault Rafale fighter jet with India France flags highlighting stalled defense deal over technology and Russia concerns
राफेल डील पर ब्रेक क्यों? DAC की मंजूरी के बाद भी फाइल अटकी, रूस बना सबसे बड़ा फैक्टर

भारत की महत्वाकांक्षी राफेल फाइटर जेट डील एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह प्रगति नहीं, बल्कि ठहराव है। 12 फरवरी 2026 को रक्षा मंत्रालय की Defence Acquisition Council (DAC) से मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद थी कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी, खासकर तब जब 17 फरवरी को Emmanuel Macron भारत दौरे पर आए। माना जा रहा था कि इस दौरान बड़ा ऐलान हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ-और अब करीब दो महीने बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी है। इस देरी की सबसे बड़ी वजह तकनीकी और रणनीतिक मतभेद बताए जा रहे हैं, जिसमें रूस की भूमिका अहम बनकर उभरी है। भारत के सामने चुनौती स्पष्ट है-वायुसेना के पास मौजूदा समय में केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि न्यूनतम आवश्यकता 42 की है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत 114 नए Dassault Rafale लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। इससे पहले ही भारतीय वायुसेना के पास राफेल के दो स्क्वाड्रन मौजूद हैं और नौसेना के लिए 26 मरीन राफेल की डील भी हो चुकी है। क्या है डील का पूरा ढांचा? प्रस्तावित डील के तहत 114 विमानों में से 18 सीधे फ्रांस से तैयार हालत (फ्लाइ-अवे) में मिलेंगे, जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में होगा। इसमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग और “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने के लिए 50–60 प्रतिशत तक स्वदेशी कंपोनेंट शामिल करने की योजना है। इस डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो भारत के सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी डील में से एक हो सकती है। कहां फंसा है पेंच? असल विवाद “सोर्स कोड” और हथियार एकीकरण (integration) को लेकर है। भारत चाहता है कि वह राफेल में अपनी स्वदेशी मिसाइलें और हथियार बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के इस्तेमाल कर सके। इसमें सबसे अहम है BrahMos missile, जो भारत और Russia की संयुक्त परियोजना है। यहीं से फ्रांस की चिंता शुरू होती है। राफेल के सॉफ्टवेयर और सिस्टम में बदलाव के लिए संवेदनशील सोर्स कोड साझा करना पड़ सकता है। फ्रांस को आशंका है कि इस प्रक्रिया में यह तकनीक अप्रत्यक्ष रूप से रूस तक पहुंच सकती है, जो उसके लिए रणनीतिक जोखिम है। खासकर तब, जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच Russia-Ukraine War के कारण संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं और NATO के सदस्य देश फ्रांस रूस को प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। भारत की स्थिति क्या है? भारत का तर्क साफ है-वह अपने हथियारों और मिसाइल सिस्टम को किसी भी प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता चाहता है, ताकि लागत कम रहे और रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे। भारत का यह भी रिकॉर्ड रहा है कि उसने किसी भी रक्षा सौदे में तकनीक लीक नहीं की है। क्या है आगे का रास्ता? यह डील भारत और फ्रांस दोनों के लिए बेहद अहम है। जहां भारत को तत्काल फाइटर जेट्स की जरूरत है, वहीं फ्रांस के लिए यह एक बड़ा रक्षा निर्यात सौदा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान “विश्वास और संतुलन” के बीच ही निकलेगा-संभवतः फ्रांस सीमित एक्सेस या नियंत्रित तकनीकी साझा करने का विकल्प दे सकता है, जबकि भारत तकनीक की सुरक्षा को लेकर आश्वासन देगा। फिलहाल, राफेल डील सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक साझेदारियों के बीच संतुलन की परीक्षा बन चुकी है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0