Guyana Oil Revenue Boom: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने जहां दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है, वहीं दक्षिण अमेरिका का छोटा सा देश गुयाना इस संकट के बीच तेजी से अमीर होता जा रहा है. तेल की कीमतों में भारी उछाल ने गुयाना की कमाई को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है और यह देश अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है. तेल की कीमतों में उछाल से खुली किस्मत ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. युद्ध से पहले जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 62 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह 100 डॉलर के पार पहुंच चुकी है. गुयाना के लिए यह स्थिति बेहद फायदेमंद साबित हो रही है, क्योंकि हाल के वर्षों में उसने बड़े पैमाने पर तेल उत्पादन शुरू किया है. देश का तेल उत्पादन अब 9 लाख बैरल प्रतिदिन के पार पहुंच चुका है और जल्द ही यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने की उम्मीद है. छह साल में बदल गयी देश की तस्वीर गुयाना ने केवल छह साल पहले बड़े स्तर पर तेल उत्पादन शुरू किया था, लेकिन अब वही तेल उसकी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बन गया है. विश्व बैंक और द इकोनॉमिस्ट के आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले गुयाना का तेल राजस्व करीब 370 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह था, जो अब बढ़कर 623 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह तक पहुंच गया है. आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, 2020 से गुयाना की अर्थव्यवस्था औसतन 40 प्रतिशत से ज्यादा की वार्षिक दर से बढ़ रही है, जो दुनिया में सबसे तेज विकास दरों में गिनी जा रही है. आखिर क्या है कमाई का फॉर्मूला? गुयाना की तेल नीति उसकी बढ़ती कमाई का सबसे बड़ा कारण मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियां अपनी शुरुआती लागत निकालने में इस्तेमाल कर रही हैं. इसके बाद बचने वाले मुनाफे में गुयाना सरकार को रॉयल्टी सहित हिस्सा मिलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे विदेशी कंपनियां अपनी लागत पूरी कर लेंगी, गुयाना का मुनाफा तेजी से बढ़ेगा और भविष्य में देश को तेल राजस्व का कहीं बड़ा हिस्सा मिलने लगेगा. यानी मौजूदा युद्ध और ऊंची तेल कीमतें गुयाना के लिए आने वाले वर्षों में और ज्यादा कमाई का रास्ता तैयार कर रही हैं. सरकार कैसे खर्च कर रही पैसा? गुयाना सरकार इस बढ़ती कमाई का इस्तेमाल देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में कर रही है. नई सड़कें, स्कूल, अस्पताल और आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र तेजी से बनाये जा रहे हैं. सरकार ने हाल ही में 18 साल से ऊपर के हर नागरिक को लगभग 500 अमेरिकी डॉलर का नकद बोनस देने की भी घोषणा की है. इसके अलावा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए सरकार ने “नेचुरल रिसोर्स फंड” बनाया है, जिसमें अरबों डॉलर जमा किये जा चुके हैं. दुनिया संकट में, गुयाना फायदे में जहां अमेरिका-ईरान तनाव की वजह से दुनिया के कई देश महंगाई, ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं गुयाना तेल निर्यात के दम पर आर्थिक रूप से मजबूत होता जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और उत्पादन लगातार बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में गुयाना वैश्विक ऊर्जा बाजार में और बड़ी ताकत बन सकता है.
वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। OPEC+ ने कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जो ऐसे समय आया है जब सप्लाई चेन पहले से दबाव में है। खास बात यह है कि यह निर्णय संयुक्त अरब अमीरात के संगठन से अलग होने के तुरंत बाद लिया गया है, जिससे बाजार में नई रणनीतिक हलचल शुरू हो गई है। उत्पादन बढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया? हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक में सऊदी अरब और रूस समेत सात प्रमुख देशों–इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान–ने मिलकर यह तय किया कि जून 2026 से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त कच्चे तेल का उत्पादन किया जाएगा। यह फैसला पहले से लागू स्वैच्छिक कटौती (Voluntary Cuts) में ढील देने का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2023 में हुई थी। अब इन देशों का लक्ष्य है कि वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी को कम किया जाए और कीमतों को स्थिर रखा जा सके। ईरान संघर्ष और सप्लाई संकट का असर 28 फरवरी से जारी ईरान से जुड़े संघर्ष ने तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज–जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है–के प्रभावित होने से सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है। ऐसे में OPEC+ देशों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाकर बाजार में संतुलन बनाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि परिस्थितियों के अनुसार इस फैसले की समीक्षा की जाती रहेगी। क्या यह कदम कीमतों को काबू में रख पाएगा? विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन बढ़ाने का यह कदम वैश्विक बाजार में राहत ला सकता है, लेकिन इसका असर पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि भू-राजनीतिक हालात कितनी तेजी से बदलते हैं। इसके अलावा, जनवरी 2024 के बाद जिन देशों ने तय सीमा से अधिक उत्पादन किया है, उनके लिए यह मौका है कि वे अपनी अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई कर सकें और Declaration of Cooperation के नियमों का पालन सुनिश्चित कर सकें। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी Joint Ministerial Monitoring Committee द्वारा की जाएगी। आगे क्या है रणनीति? OPEC+ देशों की अगली महत्वपूर्ण बैठक 7 जून 2026 को प्रस्तावित है। अब से संगठन हर महीने बैठक करेगा, ताकि बाजार की स्थिति–खासतौर पर कीमतों और सप्लाई–पर नजर रखी जा सके। फिलहाल संगठन “वेट एंड वॉच” की रणनीति पर काम कर रहा है, क्योंकि युद्ध और वैश्विक तनाव के चलते हालात तेजी से बदल सकते हैं।
देश की तेल विपणन कंपनियों ने 20 अप्रैल 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी हैं। आज के रेट्स पर नजर डालें तो देश के कई बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि कुछ राज्यों और शहरों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का असर सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है। पेट्रोल की कीमतों में क्या बदलाव हुआ? पेट्रोल के दाम आज अधिकतर महानगरों में स्थिर हैं। मुंबई में पेट्रोल ₹103.50 प्रति लीटर पर बना हुआ है, जबकि नई दिल्ली में यह ₹94.77 प्रति लीटर पर स्थिर है। बेंगलुरु में भी कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि, पूर्वी भारत के कुछ शहरों में हल्की तेजी देखी गई है। पटना में पेट्रोल ₹105.60 प्रति लीटर पर पहुंच गया है, जिसमें 17 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। गया और मुजफ्फरपुर में भी कीमतों में क्रमशः 17 पैसे और 21 पैसे की बढ़त दर्ज की गई है। दूसरी ओर भागलपुर में 19 पैसे की मामूली गिरावट दर्ज की गई है। कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो दर्शाता है कि क्षेत्रीय टैक्स और डिमांड का असर कीमतों पर बना हुआ है। डीजल के दाम में कैसी रही स्थिति? डीजल की कीमतों में आज अधिकांश बड़े शहरों में स्थिरता बनी रही। मुंबई में डीजल ₹90.03 प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि नई दिल्ली में यह ₹87.67 प्रति लीटर पर टिका हुआ है। बिहार और झारखंड के कई शहरों में डीजल की कीमतों में 5 पैसे से लेकर 24 पैसे तक की बढ़ोतरी हुई है। रांची में डीजल ₹93.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है, वहीं पटना में यह ₹91.84 प्रति लीटर हो गया है। इस हल्की बढ़ोतरी का असर खासतौर पर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और खेती-किसानी के खर्चों पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में महंगाई पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता है। क्यों बदलती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? ईंधन की कीमतें कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत। भारत अपनी अधिकांश जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT) भी कीमतों को प्रभावित करता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं। घर बैठे ऐसे करें अपने शहर का रेट चेक अगर आप अपने शहर की ताजा कीमतें जानना चाहते हैं, तो मोबाइल के जरिए SMS भेजकर आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं: Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें कुल मिलाकर, आज के रुझान बताते हैं कि बाजार फिलहाल स्थिरता की ओर है, लेकिन छोटे-छोटे बदलाव जारी हैं। ऐसे में गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले ताजा रेट जरूर चेक कर लें।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि अगर इस वित्त वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती है, तब भी भारत की आर्थिक रफ्तार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में भी भारत करीब 6.3 प्रतिशत की दर से विकास करता रहेगा, जो वैश्विक स्तर पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत वृद्धि दर मानी जाएगी। भारत की साख पर नहीं पड़ेगा असर S&P Global Ratings ने साफ किया है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत की ‘सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग’ पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी मुख्य वजह भारत का मजबूत वित्तीय प्रबंधन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता बताई गई है। सामान्य हालात में 7.1% ग्रोथ का अनुमान एजेंसी के डायरेक्टर (सॉवरेन रेटिंग्स) YeeFarn Phua के अनुसार, यदि कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, तेल की कीमत 130 डॉलर तक पहुंचने की स्थिति में भी भारत की ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर है। क्या हैं संभावित जोखिम? S&P ने यह भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा एक बड़ा जोखिम बन सकती है। यदि ईंधन और उर्वरक जैसे उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ईरान संकट से बढ़ी तेल की कीमतें पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। एक समय पर कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसकी एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत और गैस का करीब एक-तिहाई हिस्सा संभालता है। हालांकि, फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है, जिसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक संकट में भी मजबूत भारत रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। मजबूत नीतिगत ढांचा और वित्तीय अनुशासन इसे अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में बनाए हुए हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने Iran के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा समुद्री कदम उठाया है। United States Central Command (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 13 अप्रैल (सोमवार) सुबह 10 बजे से ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी लागू कर दी जाएगी। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश के बाद लिया गया है और इसे ईरान पर आर्थिक व रणनीतिक दबाव बढ़ाने की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। समुद्र से घेराबंदी: क्या है पूरा प्लान? अमेरिका की यह रणनीति सीधे ईरान के समुद्री व्यापार को निशाना बनाती है। CENTCOM के अनुसार: ईरान के सभी पोर्ट्स पर आने-जाने वाले जहाजों पर रोक लगेगी यह नियम हर देश के जहाजों पर समान रूप से लागू होगा जहाजों की पहचान, निगरानी और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोका जाएगा ईरानी तटीय क्षेत्रों में भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी इस कदम का मकसद ईरान की आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना है। हॉर्मुज स्ट्रेट: टकराव का सबसे बड़ा केंद्र इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम बिंदु Strait of Hormuz है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है यह खाड़ी देशों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है यहां किसी भी सैन्य या रणनीतिक कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए जाने वाले जहाजों को फिलहाल छूट दी जाएगी, लेकिन ईरान से जुड़े हर जहाज पर सख्त नजर रखी जाएगी। जहाजों के लिए चेतावनी और सुरक्षा निर्देश अमेरिकी नौसेना ने इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए सभी व्यापारिक जहाजों और शिपिंग कंपनियों के लिए एडवाइजरी जारी की है: ‘Notice to Mariners’ (आधिकारिक अलर्ट) को नियमित रूप से चेक करें Gulf of Oman और हॉर्मुज क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतें किसी भी आपात स्थिति में चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क करें जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरते समय वैकल्पिक मार्गों की योजना रखें पेट्रोडॉलर सिस्टम पर सीधा असर इस पूरी कार्रवाई के पीछे सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति भी छिपी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि: कुछ जहाज डॉलर के बजाय दूसरी करेंसी (जैसे चीनी युआन) में लेन-देन कर रहे हैं यह लंबे समय से चले आ रहे पेट्रोडॉलर सिस्टम के लिए चुनौती है अमेरिका इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठा रहा है पेट्रोडॉलर सिस्टम वह व्यवस्था है जिसमें दुनिया भर में कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, जिससे अमेरिका को वैश्विक आर्थिक बढ़त मिलती है। चीन-ईरान समीकरण और अमेरिका की चिंता इस कदम का एक बड़ा लक्ष्य China और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियां भी हैं। चीन ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहा है दोनों देश डॉलर के विकल्प तलाश रहे हैं रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी मजबूत हो रही है अमेरिका इसे अपने वैश्विक प्रभाव के लिए खतरा मानता है और इसी कारण अब दबाव की रणनीति अपना रहा है। बढ़ते तनाव के संभावित असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं: कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव का खतरा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता इसके अलावा, अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। क्या हो सकता है आगे? ईरान की ओर से सैन्य या आर्थिक प्रतिक्रिया संभव कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं, लेकिन सफलता अनिश्चित अमेरिका अपनी नौसैनिक मौजूदगी और बढ़ा सकता है क्षेत्र में अन्य देशों की भूमिका भी अहम हो सकती है
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखने लगा है। सोमवार, 23 मार्च 2026 को देश के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव देखने को मिला। जहां कुछ राज्यों में तेल महंगा हुआ है, वहीं कुछ जगहों पर मामूली राहत भी मिली है। ग्लोबल मार्केट में Brent Crude Oil $112 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि WTI Crude Oil भी $100 के करीब है। मिडिल ईस्ट तनाव और डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी के बाद तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ा है। मेट्रो शहरों में क्या है आज का रेट? देश की तेल कंपनियों ने सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए। प्रमुख महानगरों में कीमतें इस प्रकार हैं: दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67 प्रति लीटर मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03 प्रति लीटर कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02 प्रति लीटर चेन्नई: पेट्रोल ₹100.84 | डीजल ₹92.39 प्रति लीटर इन शहरों में आज कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इन राज्यों में बढ़े दाम कई राज्यों में आज ईंधन महंगा हो गया है: बिहार: पेट्रोल ₹106.95, डीजल ₹93.14 उत्तर प्रदेश: पेट्रोल ₹95.00, डीजल ₹88.72 झारखंड: पेट्रोल ₹99.16, डीजल ₹93.89 गोवा: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹88.71 केरल: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹96.02 तमिलनाडु: पेट्रोल ₹102.34, डीजल ₹93.89 इसके अलावा हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन राज्यों में मिली राहत कुछ राज्यों में तेल की कीमतों में गिरावट भी देखी गई: गुजरात: पेट्रोल ₹95.07, डीजल ₹90.77 कर्नाटक: पेट्रोल ₹102.41, डीजल ₹90.48 मध्य प्रदेश: पेट्रोल ₹106.18, डीजल ₹91.56 महाराष्ट्र: पेट्रोल ₹105.43, डीजल ₹91.94 ओडिशा: पेट्रोल ₹102.23, डीजल ₹93.79 उत्तराखंड: पेट्रोल ₹94.51, डीजल ₹89.44 पश्चिम बंगाल: पेट्रोल ₹105.80, डीजल ₹92.37 क्यों बदलते हैं रोज दाम? पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए VAT शामिल हैं। यही वजह है कि हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं। घर बैठे ऐसे चेक करें रेट आप अपने शहर का ताजा रेट SMS के जरिए भी जान सकते हैं: Indian Oil: RSP <City Code> भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर
वैश्विक तेल बाजार में इन दिनों बड़ी हलचल देखी जा रही है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में रूसी कच्चे तेल से भरे कई टैंकर मौजूद हैं, जो जल्द ही भारत की ओर पहुंच सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार समुद्र में करीब 1.5 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों पर लदा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 1 करोड़ बैरल से अधिक तेल की खरीद पहले ही की जा चुकी है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौजूद टैंकरों के अलावा करीब 70 लाख बैरल तेल लेकर कुछ जहाज सिंगापुर के पास खड़े हैं, जो एक सप्ताह के भीतर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। जानकारी के अनुसार भूमध्य सागर और स्वेज नहर से भी कई तेल टैंकर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ रहे हैं। जहाज ट्रैकिंग कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक यूराल्स ग्रेड का तेल लेकर कम से कम 18 जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की सरकारी रिफाइनरी कंपनियां जैसे Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited फिर से रूसी तेल खरीदने के लिए सक्रिय हो गई हैं। वहीं निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी Reliance Industries Limited भी अपने घरेलू ईंधन उत्पादन संयंत्र के लिए रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रही है। हालांकि निर्यात केंद्रित प्लांट के लिए कंपनी पहले की तरह गैर-रूसी कच्चे तेल का उपयोग कर सकती है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट का असर इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है। Strait of Hormuz दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, लेकिन सुरक्षा खतरे के कारण यह लगभग बंद स्थिति में पहुंच गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने इस मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए समुद्री मार्गों और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।