Equity Research

Nazara Technologies stock chart showing buy rating and growth potential after BT Games and BP Systems acquisition
Nazara Technologies पर ‘BUY’ कॉल: ₹336 का टारगेट, नए अधिग्रहण से बढ़ेगी ग्रोथ

BT Games और BP Systems डील से मजबूत होगा गेमिंग बिजनेस, ब्रोकरेज ने रेटिंग अपग्रेड की घरेलू गेमिंग कंपनी Nazara Technologies को लेकर ब्रोकरेज हाउस Prabhudas Lilladher ने सकारात्मक रुख अपनाया है। फर्म ने स्टॉक को ‘HOLD’ से अपग्रेड कर ‘BUY’ कर दिया है और इसका टारगेट प्राइस ₹336 तय किया है, जो पहले ₹276 था। अधिग्रहण से मिलेगा बड़ा फायदा ब्रोकरेज के मुताबिक, BT Games (गेम डेवलपमेंट) और BP Systems (यूजर एक्विजिशन प्लेटफॉर्म) का संयोजन कंपनी के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। BT Games के पास 17 कैजुअल गेम्स का पोर्टफोलियो है BP Systems यूजर्स को जोड़ने और बढ़ाने में मदद करता है इन दोनों के साथ आने से कंपनी को बेहतर यूजर एंगेजमेंट और कमाई (मॉनिटाइजेशन) के नए अवसर मिलेंगे। चरणबद्ध निवेश से कम होगा जोखिम रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी पूरी हिस्सेदारी एक साथ नहीं ले रही है। 50% हिस्सेदारी 2028 तक चरणबद्ध तरीके से खरीदी जाएगी लगभग 98 मिलियन डॉलर का ‘अर्न-आउट’ इंसेंटिव रखा गया है इससे कंपनी पर एक बार में ज्यादा वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा और जोखिम भी नियंत्रित रहेगा। अगले 2 साल में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद ब्रोकरेज का अनुमान है कि BT Games और BP Systems मिलकर अगले दो वर्षों में- रेवेन्यू में 15% CAGR EBITDA में 20% CAGR की ग्रोथ दर्ज कर सकते हैं। वैल्यूएशन और टारगेट ब्रोकरेज ने कंपनी के कैजुअल गेमिंग बिजनेस का वैल्यूएशन FY28 के अनुमान के आधार पर किया है। EV(Sales): 1.5 गुना EV(EBITDA): 7.6 गुना इन्हीं आधारों पर ₹336 का नया टारगेट प्राइस तय किया गया है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Apar Industries brokerage rating update highlighting target price ₹9629
Apar Industries पर Prabhudas Lilladher की नई राय: ₹9629 टारगेट, ‘BUY’ से घटाकर ‘Accumulate’ रेटिंग

ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Apar Industries को लेकर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है। कंपनी के मैनेजमेंट से बातचीत के बाद ब्रोकरेज ने शेयर पर ₹9,629 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए रेटिंग को ‘BUY’ से घटाकर ‘Accumulate’ कर दिया है।   US-Iran तनाव का सीमित असर, लेकिन जोखिम बरकरार रिपोर्ट के मुताबिक, US-Iran तनाव का कंपनी पर सीधा असर फिलहाल सीमित है, क्योंकि मिडिल ईस्ट से कंपनी की कमाई का हिस्सा केवल 6–7% के आसपास है। हालांकि, स्थिति बिगड़ने पर शिपिंग लागत, बीमा खर्च और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।   मजबूत डिमांड और 10% वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान कंपनी का अनुमान है कि करीब 10% तक बिक्री (वॉल्यूम) बढ़ सकती है, खासकर कंडक्टर सेगमेंट में। यह बढ़त बेहतर और महंगे प्रोडक्ट, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अमेरिका में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने व रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग की वजह से होगी।   केबल बिजनेस बना ग्रोथ का बड़ा इंजन Apar Industries का केबल बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है। करीब 20% से ज्यादा सालाना ग्रोथ (YoY) का अनुमान मीडियम टर्म में ~11% EBITDA मार्जिन लगभग ₹8000 करोड़ के कैपेक्स से विस्तार बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लीवरेज से इस सेगमेंट में और तेजी की उम्मीद है।   डेटा सेंटर सेक्टर से नई संभावनाएं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डेटा सेंटर सेक्टर कंपनी के लिए नया ग्रोथ ड्राइवर बन सकता है। किसी भी डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में केबल्स का हिस्सा 4–5% तक होता है, जिससे आने वाले समय में मांग और बढ़ सकती है।   P/E वैल्यूएशन और टारगेट स्टॉक फिलहाल FY27 और FY28 के अनुमानित मुनाफे पर क्रमशः 31 गुना  और 26 गुना  के P/E पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज ने अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट के लिए वैल्यूएशन इस तरह रखा है: कंडक्टर: 34 गुना  केबल्स: 34 गुना  स्पेशलिटी ऑयल्स: 12 गुना  इन सबके आधार पर SoTP (Sum of the Parts) मॉडल से ₹9,629 का टारगेट प्राइस तय किया गया है।   निवेशकों के लिए क्या संकेत? ब्रोकरेज के अनुसार, लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ कहानी मजबूत बनी हुई है, लेकिन मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ‘Accumulate’ रेटिंग का मतलब है कि निवेशक गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
ABB India company logo with stock market chart representing brokerage rating and target price update.
Stock Recommendation: ABB India पर ‘Reduce’ रेटिंग बरकरार, टारगेट बढ़ाकर ₹5,875 - Emkay Global

  ब्रोकरेज फर्म Emkay Global Financial Services ने इंजीनियरिंग कंपनी ABB India के शेयर पर “Reduce” रेटिंग बनाए रखी है, हालांकि टारगेट प्राइस को थोड़ा बढ़ाकर ₹5,875 कर दिया गया है। इससे पहले ब्रोकरेज ने इसका लक्ष्य ₹5,600 तय किया था।   कंपनी का नया निवेश (Capex Plan) ABB India ने CY26 के लिए करीब 75 मिलियन डॉलर का कैपेक्स प्लान घोषित किया है। यह निवेश इन क्षेत्रों में किया जाएगा: मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए मौजूदा प्लांट्स का आधुनिकीकरण नई एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) को मजबूत करना यह निवेश CY25 में किए गए 35 मिलियन डॉलर के निवेश के अतिरिक्त होगा।   किन सेक्टरों से बढ़ रही मांग कंपनी के अनुसार, भारत में कई बड़े सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे उनके उत्पादों की मांग बढ़ रही है: ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) ग्रिड मॉडर्नाइजेशन डेटा सेंटर का तेजी से विस्तार मेट्रो और हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन   ब्रोकरेज का आकलन Emkay Global ने अपनी रिपोर्ट में CY28 के लिए नए अनुमान जोड़े हैं और टारगेट प्राइस को Mar-28E EPS के 55x वैल्यूएशन पर तय किया है। हालांकि ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के शेयर अभी प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, इसलिए निवेशकों को इसमें मुनाफावसूली (Reduce) की सलाह दी गई है।   सरल शब्दों में: कंपनी का बिजनेस मजबूत है और निवेश भी बढ़ रहा है। लेकिन शेयर पहले से ही महंगे स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इसलिए ब्रोकरेज ने खरीदारी की बजाय होल्ड या आंशिक मुनाफावसूली की सलाह दी है।

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0