Ethanol Blending

A fuel station in Nepal displays E10 ethanol-blended petrol as the government prepares to introduce ethanol-mixed fuel under new quality and production standards.
भारत में E20 के बाद अब नेपाल में E10 पेट्रोल की तैयारी, सरकार ने जारी किया नया ड्राफ्ट

काठमांडू: भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब नेपाल भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E10) लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए नेपाल ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड मेट्रोलॉजी (NBSM) ने नया ड्राफ्ट स्टैंडर्ड जारी किया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, बिक्री और मूल्य निर्धारण से जुड़े विस्तृत नियम तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि कैबिनेट आवश्यकता के अनुसार भविष्य में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने या घटाने का फैसला भी कर सकेगी। E10 पेट्रोल के लिए तैयार किए गए नए नियम नेपाली अखबार द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ड्राफ्ट स्टैंडर्ड में इथेनॉल उत्पादन के स्रोत और तकनीकों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसके साथ ही स्टोरेज, लेबलिंग और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार: इथेनॉल को केवल सुरक्षित, सूखे और लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखा जाएगा। हर कंटेनर पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इथेनॉल पूरी तरह साफ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें कोई ठोस कण नहीं होना चाहिए। पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी चाहिए। इन रसायनों के इस्तेमाल पर रोक नेपाल सरकार ने मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे रसायनों को डीनेचुरेंट के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का मानना है कि ऐसे रसायन वाहनों के इंजन, रबर पाइप और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थानीय उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा यह पहल नेपाल सरकार के 5 जनवरी 2026 के कैबिनेट फैसले के बाद शुरू की गई है। इसके तहत "इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपयोग आदेश-2026"को मंजूरी दी गई थी, जो 12 मार्च 2026 को नेपाल गजट में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी हो गया। सरकार का उद्देश्य है कि देश में उपलब्ध संसाधनों से इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया जाए, रोजगार के अवसर पैदा हों और आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम की जा सके। खाद्यान्न की कमी न हो, इसलिए लगाया प्रतिबंध नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न संकट पैदा नहीं होना चाहिए। इसलिए खाने योग्य अनाज का उपयोग इथेनॉल बनाने में नहीं किया जाएगा। ड्राफ्ट के अनुसार इथेनॉल उत्पादन के लिए इन कच्चे माल का उपयोग किया जाएगा: चीनी मिलों से निकलने वाला शीरा (मोलासेस) नेपियर घास कृषि एवं वन अपशिष्ट धान का पुआल मक्के के डंठल गेहूं की भूसी खाने योग्य नहीं रहने वाला खराब अनाज कसावा यीस्ट और अन्य आवश्यक रसायन पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पर जोर सरकार ने निर्देश दिया है कि इथेनॉल का उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों से किया जाएगा। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) को ही बेचा जा सकेगा। इथेनॉल की कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। नई दर लागू होने तक पुरानी कीमतें प्रभावी रहेंगी। संशोधित कीमतें हर वर्ष जुलाई के मध्य से लागू की जाएंगी। भारत की तरह स्वच्छ ईंधन की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का E10 कार्यक्रम भारत की इथेनॉल मिश्रण नीति की तर्ज पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने, स्थानीय कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Petrol pump dispensing E20 fuel as debate continues over mileage, engine performance, and India's ethanol blending policy.
E20 पेट्रोल पर क्यों मचा है विवाद? माइलेज, इंजन और सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सरकार ने दी पूरी सफाई

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर माइलेज घटने, इंजन खराब होने और पुराने वाहनों पर असर पड़ने जैसी बातें कही जा रही हैं। वहीं, कुछ लोगों ने इसे आम लोगों पर किया जा रहा "प्रयोग" भी बताया। अब इन सभी सवालों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। E20 पर अचानक विवाद क्यों शुरू हुआ? हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, E20 कोई नया ईंधन नहीं है। यह करीब दो वर्षों से देश में उपलब्ध है, जबकि इससे पहले E15 पेट्रोल का भी लंबे समय तक उपयोग किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि E20 से इतनी बड़ी समस्या होती, तो यह विवाद पहले ही सामने आ जाता। मंत्री का मानना है कि E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की लॉन्चिंग के बाद ही E20 को लेकर भ्रम फैलना शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सरकार ने क्या कहा? हाल ही में यह दावा किया गया था कि E20 के जरिए करोड़ों भारतीयों पर प्रयोग किया जा रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि अदालत में मामला भारत पेट्रोलियम (BPCL) और एक एथेनॉल आवंटन से जुड़े विवाद का था, न कि E20 कार्यक्रम की वैधता का। केंद्र सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है। बाद में अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि अदालत में E20 कार्यक्रम को किसी प्रकार का "प्रयोग" नहीं बताया गया था। क्या E20 से माइलेज कम हो जाता है? मंत्री ने माना कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है। ऐसे में कुछ वाहनों में माइलेज में हल्की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि माइलेज कई अन्य बातों पर भी निर्भर करता है, जैसे— वाहन का मॉडल ड्राइविंग का तरीका सड़क और ट्रैफिक की स्थिति वाहन की गति इसलिए हर वाहन में माइलेज पर एक जैसा असर नहीं पड़ता। क्या पुराने वाहनों के इंजन पर पड़ता है असर? पुराने वाहनों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मंत्री ने जवाब दिया। उनके अनुसार कुछ मामलों में रबर गैस्केट जैसे कुछ पुर्जों को तय समय से पहले बदलना पड़ सकता है, लेकिन इसे इंजन की गंभीर तकनीकी समस्या नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वाहन निर्माता कंपनियों ने E20 की वजह से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की कोई पुष्टि नहीं की है। साथ ही, Hero MotoCorp द्वारा E20 इस्तेमाल करने वाले बड़ी संख्या में वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई। क्या पेट्रोल पंपों पर E15 और E20 दोनों मिलेंगे? कई वाहन मालिक चाहते हैं कि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने का विकल्प मिले। हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल E15 और E20 दोनों को एक साथ उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है। मंत्री के अनुसार इसके लिए अलग-अलग स्टोरेज, सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, जिससे संचालन जटिल हो जाएगा। सरकार E20 को क्यों दे रही है बढ़ावा? सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन परिवर्तन की योजना नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है। सरकार के मुताबिक इस कार्यक्रम से अब तक करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। भारत अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में एथेनॉल आधारित ईंधन पर जोर देने से आयात पर निर्भरता कम होगी और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित किया जा सकेगा। क्या कहते हैं मौजूदा हालात? सरकार का कहना है कि E20 को लेकर फैली कई आशंकाओं का अब तक कोई ठोस तकनीकी प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, माइलेज और कुछ पुराने वाहनों के रखरखाव को लेकर मामूली बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विस्तार के साथ यह स्पष्ट होगा कि देश की नई ईंधन नीति आम उपभोक्ताओं और ऑटोमोबाइल उद्योग पर कितना प्रभाव डालती है।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
E25 Fuel Trial
केंद्र सरकार E25 (25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल ) लागू करने से पहले देशभर में व्यापक परीक्षण कराएगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E25) को देशभर में लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की जाएगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि सरकार फिलहाल E25 पर परीक्षण करा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।   वाहन कंपनियों से भी होगी चर्चा   केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से परामर्श किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि E25 ईंधन सभी मानकों पर सुरक्षित और व्यवहारिक साबित हो, तभी इसे लागू किया जाएगा।   E20 पर भी सरकार ने दी सफाई   सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही इंजन खराब होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सही तरीके से मेंटेन किए गए वाहनों में ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई है। सरकार का कहना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण की दिशा में हर कदम वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही उठाया जाएगा।   सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। हालांकि E25 को लागू करने का निर्णय केवल परीक्षण और तकनीकी मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
Fuel station dispensing ethanol-blended petrol as India plans higher ethanol blend fuels like E21 and E25.
E20 के बाद अब E21 और E25 पेट्रोल की तैयारी, 2029 तक चरणबद्ध लागू करने पर विचार कर रही सरकार

E20 पेट्रोल पर जारी बहस के बीच सरकार बना रही अगला रोडमैप देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद केंद्र सरकार अब ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 2027 तक E21 पेट्रोल और 2029 तक E25 पेट्रोल लागू करने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है। हालांकि, यह बदलाव एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ताओं को पर्याप्त समय मिल सके। चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा एथेनॉल मिश्रण सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सरकार सीधे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर जाने के बजाय धीरे-धीरे बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, 2027 में E21 पेट्रोल और उसके दो साल बाद 2029 में E25 पेट्रोल पेश किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार E25 को मौजूदा नीति के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की अधिकतम सीमा बनाने पर भी विचार कर रही है। ऑटो उद्योग को मिलेगा तैयारी का समय सरकार का मानना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो पार्ट्स उद्योग, ईंधन आपूर्ति नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार होने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। एक अधिकारी के अनुसार, यह बदलाव इस तरह किया जाएगा कि इंजन तकनीक, सप्लाई चेन और फ्यूल वितरण व्यवस्था बिना किसी बड़े व्यवधान के नए मानकों के अनुरूप ढल सके। E20 को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताओं पर भी नजर देशभर में E20 पेट्रोल उपलब्ध होने के बावजूद कई वाहन मालिकों ने माइलेज, इंजन प्रदर्शन और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर सवाल उठाए हैं। सरकार इन चिंताओं से भी अवगत है और इसी वजह से अगले चरण की योजना को धीरे-धीरे लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेष रूप से पुराने वाहनों के मालिकों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण उनके वाहन के प्रदर्शन और रखरखाव लागत को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की बड़ी रणनीति भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की मांग बढ़ाना है। सरकार ने E20 पेट्रोल की देशव्यापी उपलब्धता अपने मूल 2030 के लक्ष्य से लगभग पांच वर्ष पहले हासिल कर ली है, जिसे इस कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत का दावा सरकारी अनुमान के अनुसार, 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से भारत हर वर्ष लगभग 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत कर रहा है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का बोझ भी कम हुआ है। हालांकि, भविष्य में E21 और E25 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले सरकार उद्योग की तैयारी, तकनीकी क्षमता और उपभोक्ताओं की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Agricultural waste being processed into 2G ethanol for clean fuel and industrial applications.
2G Ethanol Technology: क्या है 2G इथेनॉल टेक्नोलॉजी? जानिए कैसे बनता है और किन-किन क्षेत्रों में होता है इस्तेमाल

2G Ethanol Technology: भारत में इथेनॉल आधारित ईंधन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग से लेकर E85 फ्यूल तक, सरकार तेल आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में अब 2G इथेनॉल (Second Generation Ethanol) चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे इथेनॉल की अगली पीढ़ी की तकनीक माना जाता है, क्योंकि यह अनाज की बजाय कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से तैयार किया जाता है। क्या है 2G इथेनॉल? 2G इथेनॉल यानी सेकेंड जेनरेशन इथेनॉल एक ऐसा जैव ईंधन है, जिसे गन्ने के रस या खाद्यान्न से नहीं बल्कि कृषि से निकलने वाले अवशेषों से तैयार किया जाता है। इसके लिए मुख्य रूप से इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है— पराली (Rice Straw) गन्ने की खोई (Bagasse) मक्के के डंठल बांस अन्य कृषि और जैविक कचरा यह तकनीक खाद्यान्न संकट की चिंता को दूर करती है और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकती है। 1G और 2G इथेनॉल में क्या अंतर है? 1G इथेनॉल 2G इथेनॉल गन्ने के रस और अनाज से बनता है कृषि कचरे और जैविक अवशेषों से बनता है खाद्यान्न उपयोग को लेकर चिंता रहती है खाद्यान्न पर कोई असर नहीं पड़ता पारंपरिक तकनीक उन्नत और आधुनिक तकनीक सीमित कच्चा माल बड़े पैमाने पर उपलब्ध कृषि अवशेष कैसे बनता है 2G इथेनॉल? 2G इथेनॉल तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है— 1. कच्चे माल का संग्रह खेतों से पराली, गन्ने की खोई और अन्य कृषि अवशेषों को इकट्ठा कर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। 2. प्री-ट्रीटमेंट कचरे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर स्टीम और केमिकल्स की मदद से उसके रेशों को ढीला किया जाता है। 3. एंजाइम प्रक्रिया विशेष एंजाइम्स की मदद से जटिल कार्बोहाइड्रेट को फर्मेंटेबल शुगर में बदला जाता है। 4. फर्मेंटेशन यीस्ट की सहायता से शुगर को अल्कोहल में परिवर्तित किया जाता है। 5. डिस्टिलेशन अंतिम चरण में पानी अलग करके शुद्ध 2G इथेनॉल तैयार किया जाता है। 2G इथेनॉल के फायदे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है। किसानों को कृषि अवशेषों से अतिरिक्त आय मिल सकती है। कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। गाड़ियों के अलावा कहां-कहां होता है इस्तेमाल? 2G इथेनॉल का उपयोग सिर्फ पेट्रोल में मिश्रण तक सीमित नहीं है। सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल इससे विमानन क्षेत्र के लिए पर्यावरण अनुकूल ईंधन तैयार किया जा सकता है। दवा और कॉस्मेटिक उद्योग कॉस्मेटिक्स, दवाइयों, पेंट और रसायन उद्योग में इसका उपयोग किया जाता है। बायोप्लास्टिक निर्माण 2G इथेनॉल से ऐसे बायोप्लास्टिक तैयार किए जा सकते हैं, जो आसानी से नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं। बिजली उत्पादन इथेनॉल प्लांट से निकलने वाले अवशेषों का उपयोग बिजली उत्पादन में भी किया जा सकता है। भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? 2G इथेनॉल तकनीक भारत के लिए दोहरी समस्या का समाधान पेश करती है। एक ओर यह तेल आयात पर निर्भरता कम करती है, वहीं दूसरी ओर पराली जलाने जैसी पर्यावरणीय समस्या से निपटने में भी मददगार साबित हो सकती है।  

surbhi जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0