Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सूचना युद्ध भी तेज हो गया है। ईरानी सरकारी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से हाल के सैन्य घटनाक्रम को लेकर कई बड़े दावे किए गए, जिन्हें अमेरिकी सेना ने खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीन प्रमुख दावों का फैक्ट चेक जारी करते हुए कहा कि ईरान की ओर से फैलाए जा रहे दावों में सच्चाई नहीं है। दावा 1: होर्मुज स्ट्रेट अब सुरक्षित नहीं ईरानी सरकारी मीडिया और IRGC ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों के लिए समुद्री मार्ग अब सुरक्षित नहीं रहा और वहां गंभीर खतरा बना हुआ है। अमेरिका का जवाब: CENTCOM ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि समुद्री मार्ग के लिए सबसे बड़ा खतरा खुद IRGC की गतिविधियां और उसकी धमकियां हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग सुरक्षित बनाए रखने के लिए उसकी सैन्य मौजूदगी जारी है और ईरान का दावा भ्रामक है। दावा 2: तीन F-35 लड़ाकू विमान मार गिराए IRGC ने दावा किया कि हालिया हमलों में उसने अमेरिका के तीन F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट और तीन अन्य सैन्य विमानों को नष्ट कर दिया। अमेरिका का जवाब: CENTCOM ने कहा कि किसी भी अमेरिकी लड़ाकू विमान को नुकसान नहीं पहुंचा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को या तो रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया या वे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहे। इसलिए F-35 विमानों को मार गिराने का दावा पूरी तरह गलत है। दावा 3: अमेरिकी नाकेबंदी तोड़कर निकला तेल टैंकर ईरानी मीडिया ने दावा किया कि M/T Nora नाम का तेल टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ते हुए सुरक्षित निकल गया। अमेरिका का जवाब: अमेरिकी सेना ने इस दावे को भी गलत बताया। CENTCOM के अनुसार, संबंधित टैंकर नाकेबंदी पार नहीं कर सका। अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में उसके 20 से अधिक युद्धपोत, सैकड़ों सैन्य विमान और हजारों सैनिक तैनात हैं तथा समुद्री निगरानी और सुरक्षा अभियान पूरी तरह जारी है। लगातार बढ़ रहा है अमेरिका-ईरान तनाव गुरुवार (30 जुलाई) को अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर मिसाइल हमलों का दौर शुरू हो गया, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव के क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने की आशंका भी बढ़ रही है। इसी बीच जॉर्डन ने दावा किया कि उसने लगातार दूसरे दिन ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। वहीं कुवैत में एक हमले में एक व्यक्ति की मौत की भी खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अग्निवीर की वर्दी पहने कुछ लोग छात्रों के समर्थन में बयान देते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अग्निवीर आंदोलन के समर्थन में दिल्ली पहुंचने वाले हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि किसी भी आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है। क्या है वायरल दावा? इंस्टाग्राम पर 'Breakingsatya' नाम के अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में कुछ लोग अग्निवीर जैसी वर्दी पहने दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति दावा करता है कि भारतीय सेना छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है। वहीं दूसरा व्यक्ति कहता है कि अग्निवीरों की नई बैच आने के बाद स्थिति बदल जाएगी और दिल्ली पुलिस को जवाब मिलेगा। वीडियो में मौजूद लोगों ने अपने चेहरे मास्क से ढके हुए हैं, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? वायरल वीडियो की जांच में इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली। भारतीय सेना की ओर से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने भी इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की है। किसी प्रमुख समाचार एजेंसी या विश्वसनीय मीडिया संस्थान ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा अप्रमाणित है और वीडियो भ्रामक या फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। छात्र आंदोलन के बीच वायरल हुआ वीडियो यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। हाल के दिनों में संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस की घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर के बाद यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी हवाई हमलों के दौरान चाबहार बंदरगाह का वॉच टावर ढह गया। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अब तक किसी भी पक्ष की ओर से नहीं की गई है। वायरल तस्वीर में क्या दिख रहा है? पीट हेगसेथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक वॉच टावर गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। यह तस्वीर उनके पोस्ट करने से पहले ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुकी थी। तस्वीर सामने आने के बाद कई यूजर्स ने दावा किया कि यह चाबहार बंदरगाह का टावर है, जो हालिया अमेरिकी हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह ईरान का एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार केंद्र है। यह बंदरगाह विशेष रूप से अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल ईरान सरकार, अमेरिकी सेना या किसी स्वतंत्र एजेंसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि वायरल तस्वीर वास्तव में चाबहार बंदरगाह की है या नहीं, अथवा टावर अमेरिकी हमले में ही क्षतिग्रस्त हुआ है। ऐसे में केवल सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर के आधार पर इस दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश मंत्रालय (MEA) के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। कुछ फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर व्यापार, प्रवासन (Migration) और अन्य नीतिगत मामलों में विशेषज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय ने आम जनता के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने फर्जी दावों से किया किनारा विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट-चेक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर जारी बयान में कहा गया कि मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट साझा कर रहे हैं, जिनसे यह आभास होता है कि वे व्यापार, माइग्रेशन और अन्य नीतिगत विषयों पर विदेश मंत्रालय को सलाह दे रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी व्यक्ति या संस्था का विदेश मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है और उनके दावे पूरी तरह भ्रामक हैं। पैसे लेकर ट्रेनिंग और सलाह देने का झांसा विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ये फर्जी अकाउंट केवल झूठे दावे ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका सिखाने और नीतिगत मामलों में मार्गदर्शन देने के नाम पर लोगों से पैसे भी वसूल रहे हैं। बताया गया कि कुछ लोग सशुल्क (Paid) ट्रेनिंग सेशन, वेबिनार और सलाहकारी कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। MEA ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसे किसी भी भ्रामक पोस्ट, विज्ञापन या दावे पर भरोसा न करें। मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर पैसे मांगता है या किसी ट्रेनिंग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शुल्क लेता है, तो उससे सावधान रहें। ऐसे करें खुद का बचाव विदेश मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि— केवल विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। किसी भी व्यक्ति के मंत्रालय से जुड़े होने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले सशुल्क सलाहकार या ट्रेनिंग कार्यक्रमों से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जी अकाउंट की जानकारी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर अपराध पोर्टल पर दें। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह की निजी सलाहकार सेवाएं या सशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित नहीं करता है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी फर्जी दावे के झांसे में आकर आर्थिक नुकसान न उठाएं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा भ्रामक दावा Hantavirus Pulmonary Syndrome को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट्स में कहा जा रहा है कि Pfizer-BioNTech COVID-19 Vaccine के साइड इफेक्ट्स की सूची में Hantavirus संक्रमण शामिल है। कुछ यूजर्स ने Pfizer के एक पुराने रेगुलेटरी दस्तावेज़ का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया कि COVID वैक्सीन में Hantavirus मौजूद था या वैक्सीन इसकी वजह बन सकती है। हालांकि फैक्ट-चेक में यह दावा भ्रामक पाया गया है। क्या था वायरल दस्तावेज़? वायरल स्क्रीनशॉट उस दस्तावेज़ का हिस्सा था, जिसे Pfizer ने 2021 में अमेरिकी एजेंसी U.S. Food and Drug Administration (FDA) को वैक्सीन लाइसेंस के लिए जमा किया था। इस दस्तावेज़ में “List of Adverse Events of Special Interest” नाम की सूची थी, जिसमें अध्ययन अवधि के दौरान सामने आए विभिन्न मेडिकल इवेंट्स का जिक्र किया गया था। इसी सूची में Hantavirus Pulmonary Infection का भी नाम था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वैक्सीन ने यह बीमारी पैदा की। Pfizer ने क्या कहा? Pfizer के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सूची में शामिल सभी मेडिकल इवेंट्स जरूरी नहीं कि वैक्सीन से जुड़े हों। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाई, उनके साथ हुई किसी भी स्वास्थ्य समस्या को रिकॉर्ड किया गया था, चाहे उसका संबंध वैक्सीन से हो या नहीं। यह डेटा अलग-अलग रिपोर्टिंग सिस्टम जैसे Vaccine Adverse Event Reporting System (VAERS) से लिया गया था, जहां कोई भी व्यक्ति रिपोर्ट दर्ज करा सकता है। वैक्सीन में Hantavirus नहीं है रिपोर्ट के अनुसार Comirnaty यानी Pfizer की COVID वैक्सीन के आधिकारिक इंग्रीडिएंट्स में कहीं भी Hantavirus शामिल नहीं है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक इस वैक्सीन में कोई जीवित वायरस नहीं होता। इसके अलावा ब्रिटेन समेत कई देशों ने वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता की समीक्षा के बाद इसे पूरी मंजूरी दी थी। वैक्सीन के आधिकारिक प्रोडक्ट लीफलेट में भी Hantavirus का कोई उल्लेख नहीं है। क्या है Hantavirus? Hantavirus Pulmonary Syndrome एक दुर्लभ लेकिन गंभीर संक्रमण है, जो कुछ विशेष प्रकार के Hantavirus से होता है। World Health Organization (WHO) के अनुसार Andes strain ऐसा इकलौता Hantavirus है, जिसमें इंसान से इंसान संक्रमण के कुछ मामले देखे गए हैं। हालांकि यह बेहद दुर्लभ माना जाता है और आमतौर पर लंबे एवं करीबी संपर्क से फैलता है। क्रूज शिप में सामने आया था संक्रमण हाल ही में एक डच-फ्लैग्ड क्रूज शिप पर Hantavirus संक्रमण का प्रकोप सामने आया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। South Africa के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि दो पीड़ितों में Andes strain पाया गया था, जिन्हें जहाज से निकालकर इलाज के लिए लाया गया था। क्या है निष्कर्ष? फैक्ट-चेक के मुताबिक यह दावा गलत और भ्रामक है कि Pfizer-BioNTech COVID-19 Vaccine से Hantavirus संक्रमण होता है। वायरल दस्तावेज़ में सिर्फ उन मेडिकल घटनाओं का रिकॉर्ड था, जो अध्ययन अवधि के दौरान रिपोर्ट की गई थीं। बाद में जिन साइड इफेक्ट्स को वैक्सीन से सीधे जुड़ा पाया गया, उनकी आधिकारिक सूची में Hantavirus शामिल नहीं है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि Air India ने जुलाई 2026 तक अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। इस खबर के सामने आने के बाद यात्रियों के बीच भ्रम और चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। पूरी तरह बंद नहीं हुईं इंटरनेशनल फ्लाइट्स असल में एयर इंडिया ने अपनी सभी विदेशी उड़ानें बंद नहीं की हैं। एयरलाइन अभी भी यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई बड़े शहरों के लिए नियमित उड़ानें संचालित कर रही है। हाँ, बढ़ती परिचालन लागत और वैश्विक तनाव के चलते कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों की संख्या में अस्थायी कटौती की गई है। कुछ फ्लाइट्स के शेड्यूल में भी बदलाव किए गए हैं, लेकिन पूरे इंटरनेशनल नेटवर्क को बंद नहीं किया गया। आखिर कन्फ्यूजन कैसे फैला? यह भ्रम तब फैला जब कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि जून और जुलाई 2026 के दौरान एयर इंडिया अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कुछ हिस्सों में अस्थायी कमी कर सकती है। बताया जा रहा है कि इसके पीछे कई वजहें हैं, जिनमें शामिल हैं: एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें वेस्ट एशिया में जारी तनाव एयरस्पेस प्रतिबंध लंबी दूरी की उड़ानों का बढ़ता परिचालन खर्च इन परिस्थितियों का असर खासतौर पर लॉन्ग-हॉल फ्लाइट्स पर पड़ा है। हालांकि, यह बदलाव केवल कुछ सीमित रूट्स तक ही है। रोजाना 1000 से ज्यादा उड़ानें संचालित कर रही एयर इंडिया एयर इंडिया अभी भी हर दिन 1000 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेट कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 100 उड़ानों पर अस्थायी कटौती, कैंसिलेशन या शेड्यूल में बदलाव देखने को मिल सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके। पीएम मोदी की अपील के बाद चर्चा तेज इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील के बाद भी इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ गई है। पीएम मोदी ने लोगों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए कुछ समय तक विदेश यात्राओं और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोग जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाएं, खाने के तेल की खपत कम करें और एक साल तक सोना खरीदने से बचें, ताकि आर्थिक दबाव कम किया जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।