Alia Bhatt सिर्फ फिल्मों ही नहीं, बल्कि अपने फैशन सेंस को लेकर भी लगातार सुर्खियों में रहती हैं। साल 2023 में Gucci की ग्लोबल एंबेसडर बनने के बाद आलिया ने अपने स्टाइल में इस लग्जरी ब्रांड के कई आइकॉनिक बैग्स को शामिल किया है। खास बात यह है कि उनका बैग कलेक्शन सिर्फ फैशन नहीं बल्कि क्लासिक और मॉडर्न स्टाइल का परफेक्ट मिश्रण भी दिखाता है। Gucci Jackie से लेकर Bamboo 1947 तक, आलिया के कई बैग्स सोशल मीडिया पर फैशन गोल्स बन चुके हैं। इनके अलावा Dior, Chanel और Bottega Veneta जैसे बड़े लग्जरी ब्रांड्स के बैग्स भी उनके कलेक्शन का हिस्सा हैं। Gucci Jackie 1961 बना आलिया का फेवरेट कान्स 2026 के दौरान आलिया ने Gucci Jackie 1961 बैग को स्लाउची जैकेट और कैपरी पैंट्स के साथ स्टाइल किया था। टेक्सचर्ड लेदर और क्लासिक पिस्टन क्लैस्प वाला यह बैग विंटेज फैशन का शानदार उदाहरण माना जाता है। यही नहीं, आलिया कई बार ब्लैक Gucci Jackie के साथ एयरपोर्ट और फैशन इवेंट्स में भी नजर आ चुकी हैं। Gucci Bamboo 1947 ने दिया रेट्रो ग्लैमर Gucci Bamboo 1947 बैग भी आलिया के सबसे चर्चित बैग्स में शामिल है। ब्लैक फर कोट और साटन आउटफिट के साथ इस बैग को कैरी कर उन्होंने ‘मोब-वाइफ’ एस्थेटिक को नया ट्विस्ट दिया। वहीं व्हाइट Bamboo बैग को मोनोक्रोम आउटफिट के साथ स्टाइल कर उन्होंने मिनिमल लग्जरी लुक पेश किया। Gucci Horsebit और Blondie बैग्स ने बढ़ाया स्टाइल गेम मिलान फैशन वीक में आलिया ने ऑल-ब्लैक लेदर ट्रेंच कोट के साथ Gucci Horsebit 1955 बैग कैरी किया था। वहीं रेड Gucci Blondie बैग को उन्होंने डेनिम और मोनोग्राम शर्ट के साथ पेयर किया, जिसने उनके कैजुअल लुक को भी लग्जरी टच दिया। Dior, Chanel और Bottega Veneta भी हैं कलेक्शन का हिस्सा Gucci के अलावा आलिया का Dior Book Tote एयरपोर्ट लुक्स में कई बार नजर आया है। वहीं पेस्टल पिंक Chanel Deauville Tote को उन्होंने इंडियन और वेस्टर्न दोनों आउटफिट्स के साथ स्टाइल किया। Bottega Veneta Acro Tote और Balenciaga Backpack उनके ट्रैवल फैशन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। क्यों खास है आलिया का बैग कलेक्शन? आलिया भट्ट का बैग कलेक्शन सिर्फ लग्जरी ब्रांड्स दिखाने तक सीमित नहीं है। उनके हर बैग में अलग स्टाइल स्टेटमेंट नजर आता है। कहीं क्लासिक विंटेज लुक है तो कहीं Gen-Z फैशन का मॉडर्न टच। यही वजह है कि फैशन लवर्स उनके एयरपोर्ट लुक से लेकर रेड कार्पेट स्टाइल तक को फॉलो करते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आने लगती है। कई बार सनटैन, जलन और रेडनेस जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में लोग महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन हर बार ये सुरक्षित या असरदार हों, यह जरूरी नहीं। ऐसे में घर पर बना दही और खीरे का फेस पैक एक आसान, सस्ता और नैचुरल उपाय बन सकता है, जो त्वचा को ठंडक और निखार देता है। क्यों फायदेमंद है दही और खीरा? दही और खीरा दोनों ही स्किन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को मुलायम बनाने और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। वहीं खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो त्वचा को हाइड्रेट रखता है और ठंडक प्रदान करता है। इन दोनों का संयोजन स्किन को फ्रेश, साफ और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। साथ ही यह सनबर्न और टैनिंग से राहत देने में भी कारगर है। फेस पैक बनाने का आसान तरीका इस फेस पैक को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। 2 चम्मच ताजा दही लें आधा खीरा कद्दूकस करके मिलाएं चाहें तो 1 चम्मच शहद भी जोड़ सकते हैं इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार कर लें। लगाने का सही तरीका फेस पैक लगाने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें, ताकि धूल और गंदगी हट जाए। इसके बाद तैयार पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं। इसे करीब 20 मिनट तक सूखने दें। सूखने के बाद ठंडे पानी से हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लें। इससे त्वचा तुरंत साफ और ठंडी महसूस होगी। बेहतर परिणाम के लिए इस फेस पैक का इस्तेमाल हफ्ते में 2–3 बार किया जा सकता है। क्या मिलेंगे फायदे? इस फेस पैक के नियमित उपयोग से त्वचा को ठंडक मिलती है और सनटैन कम होता है। यह स्किन को मॉइस्चराइज करता है, जिससे चेहरा सॉफ्ट और हेल्दी दिखता है। इसके अलावा यह पिंपल्स और ऑयली स्किन की समस्या को कम करने में भी मदद करता है। अगर आप गर्मियों में बिना ज्यादा खर्च के अपनी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाना चाहते हैं, तो दही और खीरे का यह फेस पैक एक बेहतरीन विकल्प है। यह प्राकृतिक उपाय न सिर्फ आसान है, बल्कि नियमित उपयोग से आपकी स्किन को ताजगी और निखार भी देता है।
करीब दो दशक पहले रिलीज हुई The Devil Wears Prada ने फैशन की दुनिया को देखने का नजरिया बदल दिया था। फिल्म में Miranda Priestly का किरदार आज भी फैशन इंडस्ट्री के सबसे प्रभावशाली और सख्त व्यक्तित्वों में गिना जाता है। लेकिन 2026 में हालात बदल चुके हैं–अब ‘मिरांडा प्रीस्टली’ सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर मौजूद हजारों ‘मिनी मिरांडा’ का रूप ले चुकी है। फैशन स्नॉब से ‘डिजिटल एक्सपर्ट’ तक का सफर पहले फैशन का एक तय ढांचा था–रनवे से मैगजीन, फिर रिटेल और अंत में आम लोगों तक। इस प्रक्रिया को कंट्रोल करने वाले कुछ गिने-चुने एडिटर्स और एक्सपर्ट्स होते थे। आज यह पूरा सिस्टम बदल चुका है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और लाइव स्ट्रीमिंग के दौर में हर कोई फैशन का विश्लेषक बन चुका है। अब सिर्फ यह कहना काफी नहीं कि कोई आउटफिट अच्छा है। आपको यह भी बताना पड़ता है कि वह किस डिजाइनर से प्रेरित है, किस दशक का संदर्भ है और उसका ‘हाउस कोड’ क्या है। ‘Cerulean Sweater’ मोनोलॉग का असर आज भी कायम फिल्म का मशहूर ‘Cerulean Sweater’ सीन आज भी इंटरनेट कल्चर में जिंदा है। इस सीन ने यह सिखाया कि फैशन में कुछ भी रैंडम नहीं होता–हर चीज का इतिहास और संदर्भ होता है। आज यही सोच सोशल मीडिया पर और ज्यादा गहराई से दिखती है, जहां हर लुक को ‘डिकोड’ किया जाता है। सोशल मीडिया ने बदली फैशन की परिभाषा आज फैशन शो लाइव देखे जाते हैं, तुरंत क्लिप होते हैं और उसी समय जज भी किए जाते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लोग तुरंत यह तय कर देते हैं कि कोई लुक ‘ऑन थीम’ है या नहीं। इस नई दुनिया में: फैशन अब ज्यादा ‘डेमोक्रेटिक’ हो गया है लेकिन साथ ही ‘सही’ और ‘गलत’ की नई बहस भी शुरू हो गई है अब महंगे कपड़े पहनना ही नहीं, सही संदर्भ जानना भी जरूरी हो गया है नया ट्रेंड: ‘Effortless’ दिखना, लेकिन जानकार होना आज का फैशन स्नॉब खुलकर दिखता नहीं, बल्कि ‘कैजुअल’ अंदाज में अपनी समझ दिखाता है। आपका लुक चाहे सिंपल हो, लेकिन उसमें छिपे फैशन रेफरेंस आपकी पहचान बनाते हैं। क्या बदला है इन 20 सालों में? पहले फैशन ‘एक्सक्लूसिव’ था, अब ‘एक्सेसिबल’ है पहले कुछ लोग ट्रेंड तय करते थे, अब हर कोई राय देता है लेकिन स्नॉबरी खत्म नहीं हुई–उसने सिर्फ रूप बदल लिया है आज की ‘मिरांडा प्रीस्टली’ कौन है? आज की मिरांडा कोई ऑफिस में बैठी बॉस नहीं, बल्कि एक कंटेंट क्रिएटर है– जो अपने घर से, कैमरा और इंटरनेट के जरिए फैशन को जज करती है और ट्रेंड सेट करती है।
दुनिया के सबसे बड़े फैशन इवेंट Met Gala के रेड कार्पेट पर अगर किसी स्टार ने लगातार अपने लुक्स से सरप्राइज किया है, तो वह हैं सुपरमॉडल Gigi Hadid। साल 2015 में डेब्यू करने के बाद से अब तक उन्होंने हर थीम के साथ खुद को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म किया है–कभी ग्लैमरस, कभी फ्यूचरिस्टिक तो कभी थिएट्रिकल। 2015: रेड गाउन से शानदार शुरुआत Gigi ने “China: Through the Looking Glass” थीम के साथ रेड कार्पेट पर एंट्री ली। उन्होंने Diane von Furstenberg का रेड गाउन पहना, जिसमें डीप नेकलाइन और हाई स्लिट ने उन्हें स्टनिंग लुक दिया। 2016: फ्यूचरिस्टिक अवतार “Manus x Machina” थीम में उन्होंने Tommy Hilfiger का स्पेस-एज ड्रेस पहना। इस दौरान वे अपने तब के बॉयफ्रेंड Zayn Malik के साथ नजर आईं, जिन्होंने Versace का आर्मर डिटेलिंग वाला सूट पहना था। 2017: ड्रामेटिक और आर्टिस्टिक स्टाइल “Comme des Garçons” थीम में Gigi ने शैम्पेन कलर का ट्यूल गाउन चुना, जो उनके अब तक के सबसे एक्सपेरिमेंटल लुक्स में से एक था। 2018: आर्ट से इंस्पायर्ड ग्लैमर “Heavenly Bodies” थीम के लिए उन्होंने Versace का स्टेन्ड-ग्लास इंस्पायर्ड गाउन पहना, जिसने उन्हें रेड कार्पेट की हाइलाइट बना दिया। 2019: कैंपी और बोल्ड अंदाज इस साल Gigi ने Michael Kors का सिल्वर जंपसूट पहना, जिसे केप, बूट्स और हेडपीस के साथ स्टाइल किया गया–पूरी तरह कैंप थीम को जस्टिफाई करता हुआ। 2021: क्लासिक और मॉडर्न का मेल Prada के स्ट्रैपलेस गाउन और लेदर ग्लव्स के साथ उनका लुक टाइमलेस और ट्रेंडी दोनों लगा। 2022: बोल्ड और ड्रामेटिक एंट्री “Gilded Glamour” थीम में Gigi ने रेड लेटेक्स कैटसूट के ऊपर एक ओवरसाइज़ पफर कोट पहना, जिसे Versace ने डिजाइन किया था–यह लुक बेहद यूनिक और यादगार रहा। 2023: एलिगेंस और गॉथिक टच Givenchy के शीयर ब्लैक गाउन में Gigi ने एक सॉफ्ट, लेकिन सेंसुअल और गॉथिक स्टाइल पेश किया। 2024: क्राफ्ट्समैनशिप का मास्टरपीस “Sleeping Beauties” थीम में Thom Browne का व्हाइट स्कल्प्चरल गाउन पहनकर Gigi ने फैशन आर्ट को नई ऊंचाई दी। इस आउटफिट को तैयार करने में 13,500 घंटे लगे–जो इसे खास बनाता है। 2025: क्लासिक ग्लैमर का नया रूप “Superfine: Tailoring Black Style” थीम में Gigi ने गोल्ड सीक्विन्ड गाउन में एंट्री की, जिसे Miu Miu के तहत डिजाइन किया गया था और इसमें Zelda Wynn Valdes की डिज़ाइन लैंग्वेज से प्रेरणा ली गई। हर साल नया सरप्राइज Gigi Hadid का Met Gala सफर सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी है। हर साल उनका लुक एक नई पहचान और क्रिएटिविटी को दर्शाता है। अब जब Met Gala 2026 करीब है, तो फैशन दुनिया को फिर से उनके नए और अनप्रेडिक्टेबल लुक का इंतजार है।
वीकेंड आते ही क्लबिंग का क्रेज युवाओं में तेजी से बढ़ जाता है। चाहे शुक्रवार की थकान मिटानी हो या शनिवार रात को दोस्तों के साथ धमाल करना-क्लब नाइट आज के लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुकी है। लेकिन जहां पार्टी प्लान करना आसान होता है, वहीं पुरुषों के लिए सही आउटफिट चुनना अक्सर चुनौती बन जाता है। फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्लबिंग के लिए कोई सख्त ड्रेस कोड नहीं है, लेकिन “शार्प और प्रेजेंटेबल” दिखना बेहद जरूरी है। सही आउटफिट न सिर्फ आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाता है बल्कि आपको भीड़ में अलग पहचान भी दिलाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पेश हैं क्लब नाइट के लिए 10 बेहतरीन और ट्रेंडी आउटफिट कॉम्बिनेशन: 1. क्लासिक कैजुअल लुक Plain T-shirt + Blue Denim Jeans + White Sneakers यह सबसे आसान और स्टाइलिश कॉम्बिनेशन है। Vicky Kaushal की तरह सिंपल लेकिन स्मार्ट लुक अपनाएं। 2. स्मार्ट-कैजुअल स्टाइल Plain Henley Shirt + Denim Jeans + Loafers यह लुक कम्फर्ट और क्लास का परफेक्ट बैलेंस देता है। 3. लेयरिंग वाला ट्रेंडी लुक Shirt over T-shirt + Jeans + Sneakers यह स्टाइल आपको कूल और मॉडर्न वाइब देता है-डांस फ्लोर पर अलग पहचान बनाने के लिए परफेक्ट। 4. स्ट्राइप्ड एलिगेंस Stripe Shirt + Trousers + Boots यह आउटफिट थोड़ा फॉर्मल लेकिन बेहद स्टाइलिश है। Govinda के फैशन से प्रेरणा ली जा सकती है। 5. डेनिम ऑन डेनिम Denim Jacket + Denim Jeans + Formal Shoes यह ट्रेंड आज भी हिट है-क्लासिक और बोल्ड दोनों। 6. पैटर्न्ड शर्ट स्टाइल Patterned Shirt + Denim Jeans + Sneakers/Boots यह लुक आपको भीड़ में अलग और आकर्षक बनाता है। 7. मिक्स एंड मैच फैशन Plain T-shirt + Printed Shirt + Pants + Formal Shoes यह फ्यूजन स्टाइल क्लब के लिए परफेक्ट है-कैजुअल और फॉर्मल का बेहतरीन मिश्रण। 8. बॉम्बर जैकेट लुक Plain T-shirt + Bomber Jacket + Denim Jeans + Boots यह लुक आपको स्टाइलिश और एटीट्यूड से भरपूर दिखाता है। 9. लेदर जैकेट स्टाइल Plain T-shirt + Leather Jacket + Denim Jeans + Boots यह क्लासिक क्लब लुक है। Prateek Babbar जैसा रफ-टफ अंदाज अपनाएं। 10. फॉर्मल-फ्यूजन लुक Plain Shirt + Casual Blazer + Trousers + Formal Shoes अगर आप एलिगेंट दिखना चाहते हैं तो यह आउटफिट बेस्ट है।
अगर आपने कभी ध्यान दिया हो, तो आपने भी जरूर देखा होगा-कई पुरुष एक ही तरह की शर्ट या टी-शर्ट अलग-अलग रंगों में खरीदते रहते हैं। पहली नजर में यह आदत थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे गहरी सोच और व्यवहारिकता छिपी होती है। 1. जब एक स्टाइल फिट बैठ जाए, वही बन जाती है पहचान स्टाइल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही फिट और सिल्हूट ढूंढना सबसे मुश्किल काम होता है। जब किसी पुरुष को एक ऐसा कट मिल जाता है जो उसके शरीर, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास के साथ पूरी तरह मेल खाता है, तो वह उसे बार-बार अपनाता है। David Beckham और Vicky Kaushal जैसे स्टाइल आइकन भी इसी सिद्धांत पर चलते हैं-एक बार सही लुक मिल जाए, तो वही उनकी पहचान बन जाता है। 2. रोज़ के फैसलों को आसान बनाना हर दिन क्या पहनना है, यह तय करना भी एक तरह का मानसिक दबाव होता है। यही कारण है कि कई सफल लोग “uniform dressing” अपनाते हैं। Virat Kohli या Ryan Gosling को देखें-उनका ऑफ-ड्यूटी स्टाइल अक्सर एक जैसा रहता है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक रणनीति है ताकि रोज़मर्रा के फैसलों को आसान बनाया जा सके। 3. रंगों के जरिए एक्सप्रेशन पुरुष पूरी तरह एक्सपेरिमेंट नहीं करते, लेकिन रंगों के जरिए खुद को व्यक्त जरूर करते हैं। ब्लैक की जगह वाइन, ग्रे की जगह नेवी या बेज की जगह ऑलिव-यही छोटे बदलाव उनके स्टाइल को नया बनाते हैं, बिना रिस्क लिए। 4. कपड़ों से जुड़ी भावनाएं कई बार कपड़े सिर्फ फैशन नहीं होते, बल्कि यादों से जुड़े होते हैं। एक शर्ट जो किसी खास मौके पर पहनी गई हो या जो हमेशा तारीफ दिलाए-वही एहसास दोबारा पाने के लिए पुरुष उसी कपड़े को दूसरे रंग में खरीद लेते हैं। Ranveer Singh जैसे फैशन-फॉरवर्ड स्टार भी कुछ खास कट्स को बार-बार अपनाते हैं, क्योंकि उनमें एक “comfort memory” जुड़ी होती है। 5. कब बन जाता है यह कमजोरी? हालांकि, एक ही चीज़ को बार-बार खरीदना तब समस्या बन सकता है जब यह आदत बन जाए और उसमें कोई सोच या बदलाव न हो। सही तरीका यह है कि पुरुष अपने स्टाइल को समय के साथ अपडेट करें-बेहतर फैब्रिक, बेहतर फिट और नए डिटेल्स के साथ।
हर नए साल के साथ “न्यू ईयर, न्यू मी” के ट्रेंड्स सोशल मीडिया पर छा जाते हैं। लेकिन सच यह है कि स्टाइल बदलने के लिए किसी खास तारीख का इंतजार जरूरी नहीं होता। अगर आप भी अपने लुक से बोर हो चुके हैं और ‘बस ठीक-ठाक’ दिखने से आगे बढ़ना चाहते हैं, तो 2026 आपके लिए सही मौका हो सकता है। यहां कुछ ऐसे फैशन रिज़ॉल्यूशन्स दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने स्टाइल को एक नया और बेहतर रूप दे सकते हैं: 1. ब्लैक, ग्रे और ब्लू से बाहर निकलें अक्सर पुरुष अपनी वॉर्डरोब को सिर्फ तीन रंगों-ब्लैक, ग्रे और ब्लू तक सीमित रखते हैं। लेकिन अब वक्त है इसमें बदलाव लाने का। बेज़, ऑलिव ग्रीन या बरगंडी जैसे रंग आपके लुक को तुरंत अपग्रेड कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप पूरी तरह एक्सपेरिमेंटल हो जाएं, लेकिन थोड़ा सा बदलाव आपकी पर्सनैलिटी को निखार सकता है। 2. वही खरीदें जो अभी फिट आता है सेल के चक्कर में गलत साइज के कपड़े खरीदना एक आम गलती है। ओवरसाइज़ ट्रेंड अलग चीज है, लेकिन गलत फिटिंग कभी स्टाइलिश नहीं लगती। अपनी वॉर्डरोब को क्लटर-फ्री रखें और सिर्फ वही कपड़े रखें जो आपको अभी सही फिट हों। इससे आपका लुक ज्यादा क्लीन और कॉन्फिडेंट नजर आएगा। 3. फुटवियर में करें समझदारी से निवेश अच्छे जूते सिर्फ कम्फर्ट ही नहीं, बल्कि आपके पूरे आउटफिट को परिभाषित करते हैं। हर रंग के जूते खरीदने की बजाय कुछ क्लासिक और मल्टी-यूज ऑप्शन चुनें। क्वालिटी फुटवियर आपके स्टाइल को लंबे समय तक बनाए रखते हैं और एक स्मार्ट इन्वेस्टमेंट साबित होते हैं। 4. सोशल मीडिया नहीं, खुद के लिए ड्रेस करें अक्सर लोग ऐसे कपड़े खरीदते हैं जो सिर्फ इंस्टाग्राम पोस्ट या खास मौके के लिए होते हैं। लेकिन असली स्टाइल वही है जो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में फिट बैठे। ऐसे कपड़े चुनें जिन्हें आप बार-बार पहन सकें और जो आपकी पर्सनैलिटी को दर्शाएं। क्योंकि अंत में, आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा स्टाइल स्टेटमेंट होता है। 5. कम खरीदें, लेकिन सोच-समझकर फैशन का मतलब सिर्फ ज्यादा कपड़े खरीदना नहीं, बल्कि सही कपड़े चुनना है। सेल के दौरान खरीदारी जरूर करें, लेकिन हर चीज को खरीदने से पहले यह सोचें कि क्या आप उसे वास्तव में पहनेंगे या नहीं।
रेड कार्पेट पर अपने दमदार फैशन से पहचान बना चुके सितारे जब निजी समारोहों खासकर शादी-ब्याह में शामिल होते हैं, तो उनका अंदाज चौंकाने वाला बदलाव दिखाता है। यहां दिखावा नहीं, बल्कि सादगी, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत पहचान अहम हो जाती है। यही कारण है कि इन मौकों पर सेलेब्रिटीज का स्टाइल अधिक यादगार और वास्तविक लगता है। ‘खुद को साबित’ नहीं, ‘खुद को सहेजना’ बनता है लक्ष्य जब Anushka Sharma अपनी शादी की तैयारी कर रही थीं, तब चुनौती खूबसूरती नहीं, बल्कि नयापन थी। फिल्मों में कई बार दुल्हन का किरदार निभाने और Ae Dil Hai Mushkil जैसी फिल्म में आइकॉनिक ब्राइडल लुक देने के बाद उनके लिए खुद को दोहराना आसान था। लेकिन डिजाइनर Sabyasachi Mukherjee और उनकी टीम ने एक अलग रास्ता चुना। ओवरड्रामैटिक लुक की बजाय हल्का गुलाबी, सॉफ्ट और संयमित लहंगा चुना गया। यही सादगी उनकी शादी के लुक को हमेशा के लिए यादगार बना गई। परफॉर्मेंस से दूरी Ranbir Kapoor का वेडिंग लुक इसका बेहतरीन उदाहरण है। फिल्मों में भारी-भरकम शेरवानी पहन चुके रणबीर ने अपनी शादी में बेहद सादगी भरा लुक चुना। हल्के रंग, सॉफ्ट एम्ब्रॉयडरी और परफेक्ट फिट-यानी स्टाइल बिना किसी दिखावे के। यह दिखाता है कि जब दर्शक करीबी हों, तो ‘कपड़ों का प्रदर्शन’ नहीं, ‘पर्सनैलिटी’ मायने रखती है। वही सिल्हूट, लेकिन बेहतर डिटेल Saif Ali Khan और Shahid Kapoor जैसे सितारे निजी समारोहों में पारंपरिक सिल्हूट-अचकन, बंधगला या शेरवानी-ही चुनते हैं। फर्क होता है डिटेलिंग में। हैंडवोवन फैब्रिक, खास बटन, सटीक फिटिंग-ये वो बारीकियां हैं जो दिखती कम हैं, लेकिन महसूस ज्यादा होती हैं। कम्फर्ट सबसे बड़ा फैक्टर फैमिली वेडिंग्स में सेलेब्रिटीज घंटों तक एक्टिव रहते हैं-मिलना-जुलना, बैठना, डांस करना। ऐसे में आराम सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाता है। Virat Kohli का स्टाइल इसका उदाहरण है, यह स्ट्रक्चर्ड लेकिन आरामदायक। क्योंकि आत्मविश्वास तभी टिकता है, जब कपड़े सहज हों। रिपीट करने से नहीं डरते रेड कार्पेट के उलट, निजी समारोहों में सेलेब्रिटी अपने पसंदीदा स्टाइल को दोहराने से नहीं हिचकते। Hrithik Roshan जैसे सितारे अक्सर सिंपल, एलिगेंट एथनिक वियर में नजर आते हैं। यही उनकी सिग्नेचर स्टाइल बन जाती है-हर बार थोड़ा अलग, लेकिन हमेशा पहचानी हुई। दिखने से ज्यादा ‘याद’ रहने पर फोकस सबसे बड़ा बदलाव मानसिकता में आता है। यहां न कैमरे होते हैं, न आलोचक-सिर्फ अपने लोग होते हैं। इसलिए कपड़े ‘इंप्रेस’ करने के लिए नहीं, बल्कि ‘मौके को जीने’ के लिए चुने जाते हैं। यही वजह है कि ये लुक्स ज्यादा ईमानदार और लंबे समय तक याद रहने वाले बनते हैं।
भारत में टैटू का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, खासकर युवाओं के बीच। इसी बीच एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-उर्दू शब्दों वाले टैटू। भले ही कई लोगों को उर्दू पढ़ना या लिखना न आता हो, लेकिन इसकी खूबसूरत लिखावट और स्टाइल उन्हें आकर्षित कर रही है। उर्दू की लिखावट क्यों है खास? उर्दू भाषा की घुमावदार और फ्लोइंग स्क्रिप्ट इसे बेहद कलात्मक बनाती है। अक्षरों का डिज़ाइन इसे अलग पहचान देता है देखने में सॉफ्ट और एलीगेंट लगता है टैटू के रूप में यह ज्यादा आर्टिस्टिक और यूनिक दिखता है सिर्फ डिजाइन नहीं, इमोशन भी टैटू एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई लोग उर्दू टैटू को सिर्फ डिजाइन नहीं बल्कि इमोशनल एक्सप्रेशन के तौर पर चुनते हैं। किसी खास शब्द या फीलिंग को दर्शाने के लिए अपने करीबी लोगों के नाम लिखवाने के लिए यादों को स्थायी बनाने के लिए प्राइवेसी भी एक कारण कई युवा अपने पार्टनर का नाम या खास मैसेज उर्दू में इसलिए लिखवाते हैं क्योंकि: हर कोई इसे पढ़ नहीं पाता टैटू का मतलब एक तरह से पर्सनल और प्राइवेट बना रहता है इंटरनेट से बढ़ा ट्रेंड आजकल लोग टैटू बनवाने से पहले: गूगल या ट्रांसलेशन टूल का सहारा लेते हैं अलग-अलग उर्दू शब्दों का मतलब खोजते हैं हालांकि, कई बार गलत अनुवाद की वजह से गलत शब्द भी टैटू हो जाते हैं। आलोचना भी झेलनी पड़ती है कुछ लोगों को उर्दू टैटू बनवाने पर सवालों का सामना करना पड़ता है- “उर्दू ही क्यों?” “दूसरी भाषा क्यों नहीं?” लेकिन ज्यादातर लोग इसे अपनी पर्सनल चॉइस मानते हैं। रोजमर्रा में बढ़ता उर्दू का इस्तेमाल आजकल गानों, शायरी और बातचीत में भी उर्दू शब्दों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। भले ही लोग पहचान न पाएं, लेकिन उर्दू की मिठास और खूबसूरती उन्हें आकर्षित करती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।