नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान मैदान पर रोमांचक मुकाबलों के बीच खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई चुनौतियां आईं। एक रिपोर्ट में पुलिस डोजियर के हवाले से दावा किया गया है कि अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को कथित तौर पर बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों, अधिकारियों और उनके परिवारों को निशाना बनाने वाली कई धमकियां सामने आई थीं। इनमें मेसी के खिलाफ मिली धमकियों को गंभीर बताया गया है। मेसी को निशाना बनाने की कथित धमकी पुलिस डोजियर के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अधिकारियों को फोन कर दावा किया था कि वह दो अन्य लोगों के साथ डलास के एक स्टेडियम की ओर जा रहा है। उसके पास कथित तौर पर घरेलू विस्फोटक और AR-15 राइफल होने की बात कही गई थी। उस व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों और दोनों टीमों के खिलाड़ियों को निशाना बनाने की बात कही और कथित तौर पर विशेष रूप से मेसी का नाम लिया। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ी सुरक्षा मेसी को लेकर एक अन्य कथित धमकी अर्जेंटीना और मिस्र के बीच 7 जुलाई को खेले गए मुकाबले से जुड़ी बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में स्टेडियम में घुसकर मेसी को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। स्टेडियम में विस्फोटक विशेषज्ञों, डॉग हैंडलर्स और K-9 यूनिट की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया। एक अन्य कॉल में स्टेडियम के कूड़ेदानों में विस्फोटक रखे होने का दावा भी किया गया था। रोनाल्डो की सुरक्षा को लेकर भी घटनाएं विश्व कप के दौरान सिर्फ मेसी ही नहीं, पुर्तगाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो को लेकर भी सुरक्षा संबंधी घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 जून को फीफा के एक कर्मचारी ने अधिकारियों को सूचना दी थी कि एक व्यक्ति रोनाल्डो के ठिकाने की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद ह्यूस्टन पुलिस ने उस होटल से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जहां रोनाल्डो और पुर्तगाल की टीम ठहरी थी। टोरंटो में भी एक व्यक्ति को रोनाल्डो के साथ लिफ्ट में जाने की कोशिश के बाद हिरासत में लिया गया। उसने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह सिर्फ रोनाल्डो के साथ सेल्फी लेना चाहता था। रेफरी को मिले हजारों धमकी भरे संदेश विश्व कप के दौरान फ्रांस के रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर को भी कथित तौर पर 6,000 से अधिक धमकी भरे WhatsApp संदेश मिले। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एफबीआई और इंटरनेशनल पुलिस को-ऑपरेशन से जुड़े संयुक्त नेटवर्क ने काम किया। सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद संबंधी अलर्ट, खिलाड़ियों की स्टॉकिंग और हिंसा की धमकियों पर नजर रख रही थीं। इन घटनाओं ने एक बार फिर दिखाया कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा मैदान के बाहर भी बड़ी चुनौती बनी रहती है।
लंदन: फीफा विश्व कप 2026 के समापन के तुरंत बाद फुटबॉल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। इंग्लैंड के महान फुटबॉलर, राष्ट्रीय टीम के पूर्व कप्तान और पूर्व मुख्य कोच केविन कीगन का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और पिछले महीने ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बीमारी की जानकारी दी थी। उनके निधन की पुष्टि उनके पूर्व क्लब न्यूकैसल यूनाइटेड ने आधिकारिक रूप से की। क्लब ने श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें अपने इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और सबसे प्रिय हस्तियों में से एक बताया। यूरोपीय फुटबॉल के महान सितारों में थी गिनती 1970 के दशक में केविन कीगन दुनिया के सबसे चमकदार फुटबॉल सितारों में शामिल थे। उनकी तेज रफ्तार, गोल करने की शानदार क्षमता और मैदान पर अथक मेहनत ने उन्हें विश्व फुटबॉल में एक अलग पहचान दिलाई। वह इंग्लैंड के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्हें दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत फुटबॉल सम्मान बैलन डी'ओर जीतने का गौरव हासिल हुआ। लगातार दो बार जीता बैलन डी'ओर कीगन ने अपने करियर की शुरुआत इंग्लैंड में की, लेकिन बाद में यूरोप की बड़ी लीग में खेलने का साहसिक फैसला लिया। 1977 में लिवरपूल के साथ यूरोपीय कप जीतने के बाद वह जर्मनी के क्लब हैम्बर्ग एसवी से जुड़ गए। हैम्बर्ग के साथ उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए: 1978 में बैलन डी'ओर जीता 1979 में लगातार दूसरी बार बैलन डी'ओर अपने नाम किया 1979 में हैम्बर्ग को बुंडेसलीगा चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई हैम्बर्ग क्लब ने भी उन्हें अपने इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में शामिल बताया। इंग्लैंड के लिए शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर केविन कीगन ने इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए 63 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले और 21 गोल किए। उन्होंने 1982 फीफा विश्व कप में भी इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया और टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने गए। कोच के रूप में भी छोड़ी अमिट छाप खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद कीगन ने कोचिंग में भी शानदार योगदान दिया। 1992 से 2008 तक विभिन्न क्लबों और टीमों को कोचिंग दी। न्यूकैसल यूनाइटेड को 1995-96 प्रीमियर लीग खिताब के बेहद करीब पहुंचाया। 1999 से 2000 तक इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच रहे। हालांकि यूरो 2000 में इंग्लैंड पहले दौर में ही बाहर हो गया और 2002 विश्व कप क्वालीफायर में जर्मनी से हार के बाद उन्होंने मुख्य कोच पद से इस्तीफा दे दिया। फुटबॉल जगत में शोक की लहर केविन कीगन का निधन फुटबॉल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। खिलाड़ी, पूर्व साथी, क्लब और दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। मैदान पर उनका योगदान और खेल के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा।
FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अर्जेंटीना से 3-2 की नाटकीय हार के बाद मिस्र के मुख्य कोच होसम हसन ने FIFA और मैच अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था चाहती थी कि लियोनेल मेसी और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट में आगे बढ़ें। हालांकि, इन आरोपों का समर्थन करने वाला कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है और FIFA की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। 2-0 की बढ़त के बावजूद हार गया मिस्र मुकाबले में मिस्र ने शानदार शुरुआत करते हुए 2-0 की बढ़त बना ली थी और लंबे समय तक मैच पर नियंत्रण बनाए रखा। लेकिन अंतिम चरण में अर्जेंटीना ने शानदार वापसी करते हुए क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत 13 मिनट के भीतर तीन गोल दाग दिए और 3-2 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। VAR फैसलों पर जताई नाराजगी हार के बाद होसम हसन ने कहा कि उनकी टीम ने खेल के अधिकांश हिस्से में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ फैसलों ने मैच की दिशा बदल दी। उनके अनुसार, सबसे बड़ा विवाद 59वें मिनट में हुआ जब मोस्तफा ज़िको का गोल VAR समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद सलाह को पेनल्टी नहीं मिली और अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले फाउल होने के बावजूद VAR ने हस्तक्षेप नहीं किया। 'मेसी को टूर्नामेंट में बनाए रखना चाहते थे' पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में होसम हसन ने कहा कि उन्हें लगता है कि मैच का परिणाम केवल मैदान पर हुए प्रदर्शन से तय नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संभव है FIFA और अन्य बाहरी कारक चाहते थे कि मौजूदा विश्व चैंपियन और लियोनेल मेसी प्रतियोगिता में बने रहें। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। 'अब कभी वर्ल्ड कप नहीं देखूंगा' मैच के बाद एक टीवी इंटरव्यू में मिस्र के कोच ने अपनी नाराजगी दोहराते हुए कहा कि उन्हें यह जीत अर्जेंटीना की "अयोग्य जीत" लगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपने देश लौटने के बाद वह दोबारा विश्व कप नहीं देखना चाहेंगे क्योंकि उनके अनुसार प्रतियोगिता में उन्हें न्याय नहीं मिला। FIFA कर सकता है टिप्पणी की समीक्षा होसम हसन के बयानों के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FIFA उनके पोस्ट-मैच बयानों की समीक्षा कर सकता है और यदि आवश्यक हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना ने मिस्र के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज की। मुकाबले के बाद सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब कप्तान लियोनेल मेसी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अंतिम सीटी बजते ही साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगाया और बाद में कंधों पर उठाकर उनकी शानदार कप्तानी और प्रदर्शन का सम्मान किया। 2-0 से पिछड़ने के बाद बदली मैच की तस्वीर करीब 80 मिनट तक ऐसा लग रहा था कि मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। टीम 2-0 से पीछे थी और मेसी पहले हाफ में पेनल्टी भी चूक चुके थे। लेकिन अंतिम 13 मिनट में अर्जेंटीना ने शानदार खेल दिखाया। क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत टीम ने 3-2 से यादगार जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। पेनल्टी मिस करने के बाद भी नहीं हारी उम्मीद पहले हाफ में मेसी की पेनल्टी मिस होने के बाद टीम मुश्किल में आ गई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार गेंद मांगते रहे। उन्होंने पहले अर्जेंटीना के लिए वापसी की शुरुआत कराई, फिर बराबरी का गोल दागा। आखिरकार एंजो फर्नांडीज ने स्टॉपेज टाइम में विजयी गोल कर टीम को अगले दौर में पहुंचा दिया। कोच स्कालोनी भी हुए भावुक मैच के बाद अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने कहा कि यह टीम कभी हार नहीं मानती और खिलाड़ियों का जज्बा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। स्कालोनी ने मेसी की तारीफ करते हुए कहा कि पेनल्टी चूकने के बाद भी उन्होंने गेंद मांगना नहीं छोड़ा और वही उनकी महानता की पहचान है। मेसी ने टीम को दिया जीत का श्रेय मैच के बाद मेसी ने व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जीत पूरे समूह की मेहनत का परिणाम है और टीम ने एक बार फिर साबित किया कि वह आखिरी मिनट तक लड़ना जानती है। उन्होंने प्रशंसकों का भी धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि टीम आगे भी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखेगी। साथियों ने कंधों पर उठाकर किया सम्मान जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर एकजुट होकर जश्न मनाया। सभी खिलाड़ियों ने मेसी को घेर लिया और फिर उन्हें कंधों पर उठाकर सम्मान दिया। यह दृश्य टीम के भीतर मजबूत एकता, विश्वास और अपने कप्तान के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया। अर्जेंटीना अब इस शानदार जीत के साथ विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी है और खिताब बचाने की उसकी उम्मीदें बरकरार हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में सह-मेजबान कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराकर इतिहास रच दिया। विश्व रैंकिंग में 30वें स्थान पर काबिज कनाडा पहली बार टूर्नामेंट के राउंड ऑफ-16 में पहुंचा है। लॉस एंजिल्स में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले का फैसला स्टॉपेज टाइम में हुआ, जब कप्तान स्टीफन यूस्टाकियो ने शानदार गोल कर टीम को यादगार जीत दिलाई। अब अगले दौर में कनाडा का सामना नीदरलैंड्स और मोरक्को के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से होगा। दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। पहले हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन कनाडा की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने हर प्रयास नाकाम कर दिया। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने भी शानदार बचाव करते हुए कनाडा को बढ़त लेने से रोके रखा। दूसरे हाफ में कनाडा ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाया और लगातार दबाव बनाए रखा। 75वें मिनट में स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस के मैदान पर उतरने से टीम के हमलों में और धार आई। आखिरकार स्टॉपेज टाइम में यूस्टाकियो ने बॉक्स के बाहर उछलती गेंद को शानदार तरीके से नियंत्रित कर निचले कोने में गोल दागते हुए मैच का फैसला कर दिया। दक्षिण अफ्रीका सम्मानजनक विदाई के साथ बाहर हालांकि दक्षिण अफ्रीका की टीम हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गई, लेकिन उसने पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचकर इतिहास रचा। टीम के 74 वर्षीय मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूस भी नॉकआउट चरण में टीम का नेतृत्व करने वाले सबसे उम्रदराज कोच बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड उरुग्वे के पूर्व कोच ऑस्कर टबारेज के नाम था। कनाडा ने इस विश्व कप में अपना पहला अंक, पहली जीत और अब पहली बार अंतिम-16 में जगह बनाकर नई उपलब्धियां हासिल की हैं। टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 32 का अगला मुकाबला जापान और ब्राजील के बीच खेला जाएगा, जिस पर फुटबॉल प्रेमियों की नजरें टिकी रहेंगी।
टोरंटो, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे दिन सह-मेजबान कनाडा ने इतिहास रचते हुए टूर्नामेंट में अपना पहला अंक हासिल किया। टोरंटो में खेले गए ग्रुप मुकाबले में कनाडा और बोस्निया के बीच मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। इससे पहले कनाडा 1986 और 2022 विश्व कप में खेले गए अपने सभी छह मुकाबले हार चुका था। घरेलू दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में यह ड्रॉ कनाडाई फुटबॉल के लिए यादगार उपलब्धि बन गया। काइल लारिन बने मैच के हीरो पहले हाफ में बोस्निया ने 21वें मिनट में जोवो लुकिच के गोल की बदौलत बढ़त बना ली थी। इसके बाद कनाडा लगातार सातवीं विश्व कप हार की ओर बढ़ता नजर आ रहा था। हालांकि, 76वें मिनट में मैदान पर उतरे सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी काइल लारिन ने महज दो मिनट बाद शानदार गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। यह न केवल कनाडा का मैच बचाने वाला गोल था, बल्कि घरेलू सरजमीं पर देश का पहला फीफा विश्व कप गोल भी बन गया। इस गोल के साथ स्टेडियम में मौजूद हजारों समर्थकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। अमेरिका ने पराग्वे को 4-1 से हराया दूसरे मुकाबले में मेजबान अमेरिका ने पराग्वे को 4-1 से हराकर अपने अभियान की शानदार शुरुआत की। अमेरिकी टीम के लिए फोलारिन बालोगुन ने दो गोल दागकर जीत में अहम भूमिका निभाई, जबकि पराग्वे की ओर से मौरिसियो एकमात्र गोल करने में सफल रहे। यह मुकाबला भी खास रहा क्योंकि दोनों टीमें 1930 के पहले फीफा विश्व कप के बाद पहली बार विश्व कप मंच पर आमने-सामने उतरीं। 22 संस्करणों के लंबे अंतराल के बाद हुई इस भिड़ंत में अमेरिका ने अपना दबदबा साबित किया। अब कनाडा का अगला मुकाबला 18 जून को कतर से, जबकि बोस्निया की भिड़ंत स्विट्जरलैंड से होगी।
मेक्सिको सिटी, एजेंसियां। फुटबॉल के सबसे बड़े महाकुंभ FIFA World Cup 2026 का आगाज 11 जून से होने जा रहा है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी संयुक्त रूप से United States, Mexico और Canada कर रहे हैं। उद्घाटन समारोह को लेकर दुनियाभर के फुटबॉल प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह है। इस खास मौके पर मशहूर पॉप स्टार Shakira अपनी प्रस्तुति से समारोह में चार चांद लगाने के लिए तैयार हैं। शकीरा ने साझा की रिहर्सल की झलकियां ओपनिंग सेरेमनी से पहले शकीरा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर रिहर्सल की कुछ बिहाइंड-द-सीन (BTS) तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं। इन तस्वीरों में वह डांसर्स और क्रू मेंबर्स के साथ मंच पर अंतिम तैयारियां करती नजर आ रही हैं। उन्होंने पोस्ट के साथ लिखा, “पूरा सप्ताह लगातार रिहर्सल में बीता है। हम तैयार हैं और फीफा वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी में आप सभी से मिलने का इंतजार कर रहे हैं।” मैक्सिको सिटी में होगा शानदार प्रदर्शन रिपोर्ट्स के अनुसार, शकीरा मैक्सिको सिटी में आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में प्रस्तुति देंगी। उनकी टीम पिछले कई दिनों से इस मेगा इवेंट की तैयारियों में जुटी हुई है। समारोह को यादगार बनाने के लिए विशेष मंच सज्जा, डांस परफॉर्मेंस और तकनीकी तैयारियां की गई हैं। बर्ना बॉय के साथ पेश करेंगी आधिकारिक गीत खास बात यह है कि शकीरा नाइजीरियाई संगीत स्टार Burna Boy के साथ फीफा विश्व कप 2026 का आधिकारिक गीत “दाई दाई” भी प्रस्तुत करेंगी। यह पहली बार होगा जब इस गीत का लाइव प्रदर्शन वैश्विक दर्शकों के सामने किया जाएगा। दुनियाभर की निगाहें उद्घाटन समारोह पर उद्घाटन समारोह में कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के शामिल होने की उम्मीद है। फुटबॉल और संगीत का यह संगम विश्वभर के करोड़ों दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बनने जा रहा है। शकीरा की प्रस्तुति को लेकर प्रशंसकों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
FIFA World Cup को फुटबॉल का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता है, जहां दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। 1930 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट में अब तक कई दिग्गजों ने अपने गोलों से इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि कुछ खिलाड़ियों ने लगातार कई संस्करणों में शानदार प्रदर्शन कर खुद को अमर बना लिया। फुटबॉल फैंस अब FIFA World Cup 2026 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत आने वाले महीनों में होने वाली है। इसी बीच आइए जानते हैं अब तक के टॉप-5 गोल स्कोरर खिलाड़ियों के बारे में। FIFA World Cup के टॉप-5 गोल स्कोरर खिलाड़ी 1. मिरोस्लाव क्लोज़ – जर्मनी (16 गोल) Miroslav Klose FIFA World Cup इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2002, 2006, 2010 और 2014 के चार विश्व कप में हिस्सा लिया और कुल 16 गोल किए। 2014 वर्ल्ड कप में ब्राजील के खिलाफ जर्मनी की 7–1 जीत के दौरान उन्होंने यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था। उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में प्रदर्शन उन्हें इस सूची में शीर्ष पर रखता है। 2. रोनाल्डो नाज़ारियो – ब्राजील (15 गोल) Ronaldo Nazário, जिन्हें ‘फेनोमेनों’ कहा जाता है, इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 1998, 2002 और 2006 के वर्ल्ड कप में कुल 15 गोल किए। 2002 में उन्होंने ब्राजील को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई और गोल्डन बूट भी अपने नाम किया। 3. गर्ड मुलर – पश्चिम जर्मनी (14 गोल) Gerd Müller, जिन्हें ‘डेर बॉम्बर’ के नाम से जाना जाता है, ने 1970 और 1974 के विश्व कप में 14 गोल किए। उनका गोल स्कोरिंग औसत बेहद प्रभावशाली रहा, और 1974 में उन्होंने जर्मनी को वर्ल्ड कप जीताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 4. जस्ट फॉन्टेन – फ्रांस (13 गोल) Just Fontaine ने केवल 1958 वर्ल्ड कप में खेलते हुए 13 गोल दागे। यह आज भी एक ही टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ना बेहद कठिन माना जाता है। 5. लियोनेल मेसी – अर्जेंटीना (13 गोल) Lionel Messi ने 2006 से 2022 तक पांच वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया और 13 गोल किए। 2022 में उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप खिताब जीता। मेसी ने अपने करियर में गोल्डन बॉल भी कई बार जीती और फुटबॉल इतिहास में सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हैं। वर्ल्ड कप रिकॉर्ड्स और महत्व FIFA World Cup न केवल गोल और जीत का मंच है, बल्कि यह खिलाड़ियों की विरासत तय करने वाला टूर्नामेंट भी है। इन दिग्गजों ने साबित किया है कि बड़े मैचों में प्रदर्शन ही असली पहचान बनाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।