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Lionel Messi watches as Inter Miami and Philadelphia Union players clash during a heated MLS match
WWE जैसा बना फुटबॉल का मैदान, खिलाड़ियों में जमकर हुई हाथापाई; मेसी भी नहीं करा पाए मामला शांत

अमेरिका की मेजर लीग सॉकर में इंटर मियामी और फिलाडेल्फिया यूनियन के बीच मुकाबला सिर्फ 2-2 के ड्रॉ के लिए नहीं, बल्कि मैदान पर हुए विवाद के कारण भी चर्चा में रहा। मैच के इंजरी टाइम में खिलाड़ियों के बीच ऐसी झड़प हुई कि कुछ देर के लिए फुटबॉल का मैदान WWE रिंग जैसा नजर आने लगा। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लियोनेल मेसी भी मौजूद थे, लेकिन वह विवाद को शांत कराने में सफल नहीं हो सके। 101वें मिनट में शुरू हुआ विवाद मुकाबले के 101वें मिनट में इंटर मियामी के डिफेंडर ने फिलाडेल्फिया यूनियन के 16 वर्षीय खिलाड़ी कैवन सुलिवन को बॉक्स के अंदर टैकल किया। टैकल के बाद सुलिवन जमीन पर गिर गए। इसके बाद इंटर मियामी के इयान फ्रे ने कथित तौर पर सुलिवन के सिर की ओर धक्का देने की कोशिश की। इसके जवाब में सुलिवन ने फ्रे को उनके पैर की मदद से उठाकर जमीन पर पटक दिया। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच हाथापाई और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ ही देर में दोनों टीमों के खिलाड़ी मौके पर पहुंच गए और विवाद को रोकने की कोशिश करने लगे। एक और खिलाड़ी से भिड़े सुलिवन विवाद थमने के बजाय तब और बढ़ गया, जब कैवन सुलिवन की इयान फ्रे से झड़प के बाद इंटर मियामी के यानिक ब्राइट भी उनसे भिड़ गए। दोनों के बीच भी धक्का-मुक्की हुई। स्थिति बिगड़ती देख दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने बीच-बचाव किया। मामला शांत होने के बाद रेफरी ने कैवन सुलिवन और यानिक ब्राइट को रेड कार्ड दिखा दिया। मेसी ने की बात, लेकिन रेफरी ने नहीं बदला फैसला अपने साथी खिलाड़ी के समर्थन में लियोनेल मेसी रेफरी के पास पहुंचे और उनसे बातचीत करने की कोशिश की। हालांकि रेफरी ने अपना फैसला नहीं बदला। इस पूरे घटनाक्रम ने मैच के रोमांच को अचानक विवाद में बदल दिया। मेसी के गोल के बावजूद जीत नहीं सका इंटर मियामी मैच में इंटर मियामी ने शुरुआत में पिछड़ने के बाद वापसी की थी। 11वें मिनट में फिलाडेल्फिया के इंडियाना वैसिलेव ने गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद 21वें मिनट में डैनियल पिंटर ने इंटर मियामी के लिए बराबरी का गोल किया। 26वें मिनट में मेसी ने गोल कर इंटर मियामी को 2-1 की बढ़त दिला दी। हालांकि दूसरे हाफ के 58वें मिनट में नील पीयरे ने फिलाडेल्फिया के लिए बराबरी का गोल कर दिया। आखिरकार मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा। इंटर मियामी को लगातार चार मैचों से जीत का इंतजार है। 20 मैचों में 39 अंक के साथ टीम ईस्टर्न कॉन्फ्रेंस में दूसरे स्थान पर है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Zinedine Zidane appointed France football team head coach after historic Real Madrid Champions League success
Zinedine Zidane बने फ्रांस फुटबॉल टीम के नए हेड कोच, Real Madrid को लगातार 3 Champions League जिताने का है रिकॉर्ड

France Football Team: फ्रांस फुटबॉल टीम को नया हेड कोच मिल गया है। फ्रेंच फुटबॉल फेडरेशन ने टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी जिनेदिन जिदान को अगले चार साल के लिए राष्ट्रीय टीम की कमान सौंपी है। जिदान का कार्यकाल FIFA World Cup 2030 तक रहेगा। फ्रांस फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष फिलिप डायलो ने मंगलवार को कार्यकारी समिति की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिदान को नए हेड कोच के रूप में पेश किया। वह फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के इतिहास में 18वें मैनेजर होंगे। डिडिएर डेसचैम्प्स की जगह लेंगे जिदान जिदान ने डिडिएर डेसचैम्प्स की जगह ली है। 2026 फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में स्पेन के खिलाफ फ्रांस की हार के बाद डेसचैम्प्स ने हेड कोच का पद छोड़ दिया था। डेसचैम्प्स के नेतृत्व में फ्रांस ने 2018 में फीफा विश्व कप का खिताब जीता और 2022 में फाइनल तक पहुंचा। अब टीम की जिम्मेदारी जिदान के हाथों में होगी। दिलचस्प बात यह है कि जिदान और डेसचैम्प्स दोनों 1998 की विश्व कप विजेता फ्रांस टीम के सदस्य रह चुके हैं। उस टीम ने घरेलू मैदान पर विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था। जिदान के पास कोचिंग का शानदार अनुभव राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी संभालने से पहले जिदान क्लब स्तर पर भी अपनी कोचिंग का लोहा मनवा चुके हैं। वह स्पेनिश दिग्गज Real Madrid के मैनेजर रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में रियल मैड्रिड ने: 2 बार La Liga का खिताब जीता 3 बार UEFA Champions League जीती 2 FIFA Club World Cup खिताब जीते 2 UEFA Super Cup जीते 2 Spanish Super Cup खिताब जीते जिदान के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में लगातार तीन Champions League खिताब शामिल हैं। वह अब तक के एकमात्र मैनेजर हैं, जिन्होंने चैंपियंस लीग के आधुनिक दौर में लगातार तीन बार यह ट्रॉफी जीती है। 1 अगस्त से संभालेंगे पद जिदान आधिकारिक तौर पर 1 अगस्त को फ्रांस टीम के हेड कोच का पद संभालेंगे। वह 2026-27 UEFA Nations League अभियान से टीम का नेतृत्व करेंगे। 54 वर्षीय जिदान सितंबर की शुरुआत में अपने कोचिंग स्टाफ का ऐलान करेंगे। फ्रांस को उनसे उम्मीद होगी कि वह टीम की मजबूत विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ एक नई पीढ़ी को भी तैयार करें। जिदान ने कहा- फ्रांस की राष्ट्रीय टीम से बड़ा कुछ नहीं नए हेड कोच के रूप में नियुक्ति के बाद जिदान ने इसे गर्व और बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने फ्रांस फुटबॉल फेडरेशन के भरोसे के लिए आभार जताते हुए डेसचैम्प्स और उनके स्टाफ के लंबे कार्यकाल को भी सम्मान दिया। जिदान ने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस की राष्ट्रीय टीम को लेकर उनके बड़े सपने हैं। उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती क्लब फुटबॉल की सफलता को राष्ट्रीय टीम के स्तर पर दोहराने की होगी। फ्रांस को जिदान से बड़ी उम्मीदें जिदान का नाम फ्रांस फुटबॉल के सबसे सफल अध्यायों से जुड़ा रहा है। खिलाड़ी के रूप में वह 1998 विश्व कप जीत चुके हैं और कोच के तौर पर रियल मैड्रिड को लगातार तीन चैंपियंस लीग जिताने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना चुके हैं। अब फ्रांस की राष्ट्रीय टीम की कमान संभालने के बाद उनकी असली परीक्षा शुरू होगी। नजरें इस बात पर होंगी कि क्या जिदान अपनी क्लब सफलता को राष्ट्रीय टीम में भी ट्रॉफी में बदल पाते हैं।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Tiger Shroff trains with Mumbai FC ahead of the Durand Cup 2026, preparing for his potential football debut.
फिल्मों से फुटबॉल मैदान तक टाइगर श्रॉफ का नया सफर, डूरंड कप 2026 के लिए मुंबई एफसी से जुड़े

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ अब बड़े पर्दे के बाद फुटबॉल मैदान पर भी अपनी नई पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाइगर श्रॉफ को 135वें डूरंड कप 2026 के लिए मुंबई एफसी की टीम में शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से टीम के साथ नियमित अभ्यास कर रहे हैं और टूर्नामेंट के दौरान मैदान पर भी उतर सकते हैं। मुंबई एफसी के साथ करेंगे फुटबॉल डेब्यू रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ ने मुंबई एफसी के साथ अपना आधिकारिक पंजीकरण पूरा कर लिया है और टीम के फिटनेस व ट्रेनिंग सत्र में लगातार हिस्सा ले रहे हैं। मुंबई एफसी 30 जुलाई को अपने ग्रुप मुकाबलों के लिए शिलांग रवाना होगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो टाइगर श्रॉफ ग्रुप स्टेज के अंतिम मुकाबले में टीम की ओर से अपना फुटबॉल डेब्यू कर सकते हैं। क्लब से पहले से रहा है खास जुड़ाव टाइगर श्रॉफ का मुंबई एफसी से रिश्ता नया नहीं है। उन्होंने 2024 में इस क्लब के लॉन्च के दौरान अहम भूमिका निभाई थी और वह क्लब के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। उनके जुड़ने के बाद क्लब ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और— महाराष्ट्र स्टेट क्लब लीग चैंपियनशिप का खिताब जीता। आई-लीग 3 में तीसरा स्थान हासिल किया। पहली बार प्रतिष्ठित डूरंड कप के लिए क्वालिफाई किया। ग्रुप-ई में मुंबई एफसी की चुनौती डूरंड कप 2026 में मुंबई एफसी को ग्रुप-ई में रखा गया है। टीम का मुकाबला इन क्लबों से होगा— शिलांग लाजोंग एफसी नोंगकसेह स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब लांगस्निंग एफसी ग्रुप चरण के सभी मुकाबले शिलांग में खेले जाएंगे। जॉन अब्राहम की राह पर टाइगर? अगर टाइगर श्रॉफ टूर्नामेंट में मैदान पर उतरते हैं, तो वह भारतीय फुटबॉल से सक्रिय रूप से जुड़ने वाले बॉलीवुड सितारों की सूची में शामिल हो जाएंगे। इससे पहले अभिनेता जॉन अब्राहम अपनी इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लब नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के जरिए भारतीय फुटबॉल से जुड़े रहे हैं। क्या है डूरंड कप? डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट माना जाता है। इसकी शुरुआत 1888 में सर मॉर्टिमर डूरंड ने शिमला में की थी। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में इंडियन सुपर लीग (ISL), आई-लीग और भारतीय सशस्त्र बलों की शीर्ष टीमें हिस्सा लेती हैं। पहले ग्रुप स्टेज मुकाबले खेले जाते हैं, जिसके बाद सर्वश्रेष्ठ टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करती हैं।  

surbhi जुलाई 28, 2026 0
Celebrities including Kylie Jenner, Timothée Chalamet, Beyoncé, Jay-Z, and David Beckham attend the FIFA World Cup 2026 Final.
FIFA World Cup 2026 Final: स्पेन-अर्जेंटीना मुकाबले में सितारों की चमक, काइली जेनर, टिमोथी चालामेट, बेयोंसे और डेविड बेकहम समेत कई सेलिब्रिटीज पहुंचे

नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल मुकाबला केवल स्पेन और अर्जेंटीना के बीच रोमांचक जंग तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले में दुनिया भर के फिल्म, संगीत, खेल और मनोरंजन जगत की कई बड़ी हस्तियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 80 हजार से अधिक दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में मैच का रोमांच अपने चरम पर था, वहीं वीआईपी गैलरी में मौजूद ग्लोबल स्टार्स भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। शानदार ओपनिंग सेरेमनी ने बांधा समां फाइनल मुकाबले से पहले आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह में कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। इस दौरान मंच पर नजर आए— रॉबी विलियम्स टॉम क्रूज़ निकोल शेर्ज़िंगर लॉरा पॉज़िनी पोस्ट मेलोन स्वे ली जेनिफर हडसन इन कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मैच शुरू होने से पहले ही दर्शकों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया। टिमोथी चालामेट और काइली जेनर ने खींचा ध्यान हॉलीवुड अभिनेता टिमोथी चालामेट अपनी गर्लफ्रेंड काइली जेनर के साथ मैच देखने पहुंचे। दोनों स्टेडियम में एक साथ नजर आए और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। बेयोंसे और जे-ज़ी ने VIP बॉक्स से देखा मुकाबला संगीत जगत की सुपरस्टार बेयोंसे और उनके पति जे-ज़ी भी वीआईपी बॉक्स में मौजूद रहे। दोनों हाल ही में न्यूयॉर्क के यांकी स्टेडियम में अपने शो के बाद सीधे फीफा फाइनल का हिस्सा बने। रिहाना और ए$एपी रॉकी भी पहुंचे पॉप स्टार रिहाना और रैपर ए$एपी रॉकी भी मैच का आनंद लेते दिखाई दिए। दोनों पूरे मुकाबले के दौरान वीआईपी सेक्शन में मौजूद रहे। दुआ लीपा और कैलम टर्नर की भी रही चर्चा हाल ही में शादी के बंधन में बंधे दुआ लीपा और कैलम टर्नर भी मैच देखने पहुंचे। दोनों का स्टाइलिश अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा। डेविड और विक्टोरिया बेकहम भी रहे मौजूद इंग्लैंड के फुटबॉल दिग्गज डेविड बेकहम अपनी पत्नी विक्टोरिया बेकहम के साथ स्टेडियम में नजर आए। फुटबॉल के सबसे बड़े मुकाबले में उनकी मौजूदगी ने फैंस का उत्साह और बढ़ा दिया। कई अन्य बड़े सितारों ने भी बढ़ाई रौनक फाइनल मुकाबले में कई अन्य अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी मौजूद रहीं, जिनमें शामिल हैं— मैट डेमन और लुसियाना बारोसो जूलिया गार्नर आन्या टेलर-जॉय गैब्रिएल यूनियन मिक जैगर क्रिस्टीना एगुइलेरा जेवियर बार्डेम विल फेरेल केविन हार्ट सेरेना विलियम्स फैरेल विलियम्स ट्रेवर नोआ रिचर्ड गेयर एड्रियन ब्रॉडी जॉन हैम ड्वेन वेड रॉब ग्रोनकोव्स्की विक्टर वेम्बनयामा जालेन ब्रनसन कार्ल-एंथनी टाउन्स खेल और ग्लैमर का शानदार संगम फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल केवल फुटबॉल प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि ग्लोबल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए भी यादगार बन गया। एक ओर मैदान पर स्पेन और अर्जेंटीना के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर स्टेडियम में मौजूद दुनिया के सबसे बड़े सितारों ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।  

surbhi जुलाई 21, 2026 0
England football legend Kevin Keegan, two-time Ballon d'Or winner, passes away at the age of 75.
फुटबॉल जगत को बड़ा झटका! इंग्लैंड के दिग्गज केविन कीगन का 75 वर्ष की उम्र में निधन, दो बार जीता था बैलन डी'ओर

लंदन: फीफा विश्व कप 2026 के समापन के तुरंत बाद फुटबॉल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। इंग्लैंड के महान फुटबॉलर, राष्ट्रीय टीम के पूर्व कप्तान और पूर्व मुख्य कोच केविन कीगन का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और पिछले महीने ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बीमारी की जानकारी दी थी। उनके निधन की पुष्टि उनके पूर्व क्लब न्यूकैसल यूनाइटेड ने आधिकारिक रूप से की। क्लब ने श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें अपने इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और सबसे प्रिय हस्तियों में से एक बताया। यूरोपीय फुटबॉल के महान सितारों में थी गिनती 1970 के दशक में केविन कीगन दुनिया के सबसे चमकदार फुटबॉल सितारों में शामिल थे। उनकी तेज रफ्तार, गोल करने की शानदार क्षमता और मैदान पर अथक मेहनत ने उन्हें विश्व फुटबॉल में एक अलग पहचान दिलाई। वह इंग्लैंड के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्हें दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत फुटबॉल सम्मान बैलन डी'ओर जीतने का गौरव हासिल हुआ। लगातार दो बार जीता बैलन डी'ओर कीगन ने अपने करियर की शुरुआत इंग्लैंड में की, लेकिन बाद में यूरोप की बड़ी लीग में खेलने का साहसिक फैसला लिया। 1977 में लिवरपूल के साथ यूरोपीय कप जीतने के बाद वह जर्मनी के क्लब हैम्बर्ग एसवी से जुड़ गए। हैम्बर्ग के साथ उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए: 1978 में बैलन डी'ओर जीता 1979 में लगातार दूसरी बार बैलन डी'ओर अपने नाम किया 1979 में हैम्बर्ग को बुंडेसलीगा चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई हैम्बर्ग क्लब ने भी उन्हें अपने इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में शामिल बताया। इंग्लैंड के लिए शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर केविन कीगन ने इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए 63 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले और 21 गोल किए। उन्होंने 1982 फीफा विश्व कप में भी इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया और टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने गए। कोच के रूप में भी छोड़ी अमिट छाप खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद कीगन ने कोचिंग में भी शानदार योगदान दिया। 1992 से 2008 तक विभिन्न क्लबों और टीमों को कोचिंग दी। न्यूकैसल यूनाइटेड को 1995-96 प्रीमियर लीग खिताब के बेहद करीब पहुंचाया। 1999 से 2000 तक इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच रहे। हालांकि यूरो 2000 में इंग्लैंड पहले दौर में ही बाहर हो गया और 2002 विश्व कप क्वालीफायर में जर्मनी से हार के बाद उन्होंने मुख्य कोच पद से इस्तीफा दे दिया। फुटबॉल जगत में शोक की लहर केविन कीगन का निधन फुटबॉल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। खिलाड़ी, पूर्व साथी, क्लब और दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। मैदान पर उनका योगदान और खेल के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा।  

surbhi जुलाई 21, 2026 0
Spain and Argentina players clash after the 2026 FIFA World Cup Final as FIFA launches a disciplinary investigation.
फाइनल के बाद मैदान पर बवाल! स्पेन-अर्जेंटीना खिलाड़ियों की हाथापाई की FIFA करेगा जांच, मेसी की टीम पर हो सकती है कार्रवाई

नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में हराकर खिताब अपने नाम किया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद जश्न की जगह मैदान पर तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। अंतिम सीटी बजते ही दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ी आपस में भिड़ गए और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। अब इस पूरे घटनाक्रम पर FIFA ने आधिकारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है। यदि अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो खिलाड़ियों और संबंधित टीम अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। मैच खत्म होते ही बढ़ा विवाद फाइनल समाप्त होने के बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस और स्पेन के खिलाड़ी एरिक गार्सिया तथा रॉडरी के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और दोनों टीमों के कई खिलाड़ी एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। स्थिति को बिगड़ता देख अर्जेंटीना के कोच और टीम स्टाफ ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद खिलाड़ियों को अलग किया गया और मामला शांत कराया गया। FIFA ने शुरू की अनुशासनात्मक जांच घटना के बाद FIFA ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि फाइनल मुकाबले की मैच रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है। संगठन ने FIFA Disciplinary Code (FDC) के अनुच्छेद 36 के तहत पूरे मामले की जांच के लिए एक डिसिप्लिनरी और एथिक्स प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है। FIFA के बयान के अनुसार: "स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेले गए विश्व कप फाइनल से जुड़ी मैच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद मैच के बाद हुई घटनाओं में संभावित अनुशासनात्मक उल्लंघन की जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डिसिप्लिनरी कमिटी आगे की कार्रवाई और निर्णय की जानकारी देगी।" यदि जांच में खिलाड़ियों या अधिकारियों की गलती साबित होती है, तो जुर्माना, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। एक्स्ट्रा टाइम में स्पेन ने जीता विश्व कप मैच की बात करें तो दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट में फैसला नहीं हो सका, जिसके बाद मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंचा। स्पेन के लिए फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में निर्णायक गोल दागा। उन्होंने निको विलियम्स के हेडर से मिले शानदार पास को नियंत्रित करते हुए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया, जिसे अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज नहीं रोक सके। इस गोल की बदौलत स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। हार के बाद भावुक हुए लियोनेल मेसी फाइनल में हार के बाद अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि यह हार बेहद दर्दनाक है और इस जख्म को भरने में समय लगेगा। मेसी ने अपने संदेश में कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार संघर्ष किया और देशवासियों के समर्थन की बदौलत एक बार फिर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में जगह बनाई। उन्होंने लिखा कि इस हार का दर्द जरूर रहेगा, लेकिन टीम द्वारा बनाई गई यादें और पूरे टूर्नामेंट में दिखाई गई मेहनत हमेशा उनके साथ रहेगी।  

surbhi जुलाई 21, 2026 0
FIFA World Cup 2026 halftime show featuring BTS and global artists during the final, sparking debate over the extended break.
फीफा विश्व कप 2026 फाइनल का हाफटाइम शो बना बहस का मुद्दा, 27 मिनट के ब्रेक पर उठे सवाल

फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल मुकाबला सिर्फ मैदान पर हुए रोमांच के लिए ही नहीं, बल्कि अपने भव्य हाफटाइम शो को लेकर भी चर्चा में है। पहली बार विश्व कप फाइनल के दौरान आधिकारिक हाफटाइम एंटरटेनमेंट शो आयोजित किया गया, जिसमें दुनिया के कई मशहूर कलाकारों ने प्रस्तुति दी। हालांकि शानदार प्रदर्शन के बावजूद 27 मिनट से अधिक लंबे हाफटाइम ब्रेक ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है। पूर्व खिलाड़ियों और प्रशंसकों का एक वर्ग इसे फुटबॉल की परंपरा के खिलाफ मान रहा है, जबकि कई लोग इसे खेल और मनोरंजन के आधुनिक मेल के रूप में देख रहे हैं। BTS की वापसी ने लूटी महफिल हाफटाइम शो का सबसे बड़ा आकर्षण दक्षिण कोरिया के लोकप्रिय के-पॉप ग्रुप BTS की वापसी रही। सैन्य सेवा पूरी करने के बाद समूह पहली बार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक साथ नजर आया। सातों सदस्यों ने अपने लोकप्रिय गीत 'Dynamite' पर ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुति दी। वर्ल्ड कप थीम वाली लाल पोशाकों में सजे कलाकारों ने स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों और दुनियाभर के करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कई अंतरराष्ट्रीय सितारों ने बढ़ाई शो की चमक हाफटाइम शो में मैडोना, जस्टिन बीबर, शकीरा, बर्ना बॉय समेत कई वैश्विक कलाकारों ने भी प्रस्तुति दी। फाइनल मुकाबले की शुरुआत अमेरिकी गायिका जेनिफर हडसन द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत करने से हुई। इसके बाद हॉलीवुड अभिनेता टॉम क्रूज ने दर्शकों को संबोधित करते हुए फुटबॉल को दुनिया को जोड़ने वाला खेल बताया। इटली की मशहूर गायिका लौरा पॉसिनी ने भी इस आयोजन को अपने करियर के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बताया। उन्होंने रॉबी विलियम्स के साथ मंच साझा करने को बेहद खास पल बताया। 27 मिनट का ब्रेक बना विवाद की वजह जहां हाफटाइम शो की भव्यता की सराहना हुई, वहीं इसका लंबा समय विवाद का कारण बन गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फाइनल मैच के दौरान हाफटाइम ब्रेक 27 मिनट 22 सेकंड तक चला, जबकि इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (IFAB) के नियमों के अनुसार सामान्य तौर पर हाफटाइम इंटरवल 15 मिनट का होता है। लंबे ब्रेक को लेकर कई फुटबॉल विशेषज्ञों ने सवाल उठाए कि इससे खिलाड़ियों की लय और मैच की गति प्रभावित हो सकती है। वेन रूनी ने जताई नाराजगी इंग्लैंड के पूर्व कप्तान वेन रूनी ने हाफटाइम शो के प्रारूप पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें प्रस्तुति देने वाले कई कलाकार पसंद हैं, लेकिन विश्व कप फाइनल का मुख्य आकर्षण फुटबॉल होना चाहिए। रूनी की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ प्रशंसकों का मानना है कि विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में खेल को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जबकि अन्य लोगों ने इस तरह के शो को वैश्विक दर्शकों को जोड़ने और आयोजन को अधिक आकर्षक बनाने वाला कदम बताया। खेल और मनोरंजन के बीच संतुलन पर चर्चा फीफा विश्व कप 2026 का यह हाफटाइम शो खेल आयोजनों में मनोरंजन की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, लंबे इंटरवल को लेकर उठे सवाल यह भी दिखाते हैं कि भविष्य में फीफा को दर्शकों के मनोरंजन और खेल की मूल भावना के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
Spain players celebrate FIFA World Cup 2026 victory after Ferran Torres scores the winning goal against Argentina in the final.
फीफा विश्व कप 2026: फेरन टॉरस के गोल से स्पेन बना विश्व चैंपियन, अर्जेंटीना का लगातार दूसरा खिताब जीतने का सपना टूटा

स्पेन ने फीफा विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। न्यू जर्सी में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में किए गए एकमात्र गोल की बदौलत अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर विश्व फुटबॉल का सबसे प्रतिष्ठित खिताब जीत लिया। इस जीत के साथ स्पेन ने 16 साल बाद दोबारा विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया। 90 मिनट तक नहीं हुआ कोई गोल फाइनल मुकाबला शुरुआत से ही बेहद कड़ा और संतुलित रहा। निर्धारित 90 मिनट और इंजरी टाइम तक दोनों टीमें गोल करने में नाकाम रहीं। स्पेन ने अपने पारंपरिक पजेशन आधारित खेल से गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा, जबकि अर्जेंटीना ने तेज काउंटर अटैक के जरिए मौके बनाने की कोशिश की। दोनों टीमों के डिफेंडरों और गोलकीपरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हर हमले को विफल कर दिया। पहले हाफ के दौरान अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांड्रो मार्टिनेज को मिकेल ओयारजाबल पर फाउल करने के कारण येलो कार्ड दिखाया गया। रेड कार्ड ने बदला मैच का रुख दूसरे हाफ में भी मुकाबला बराबरी पर बना रहा, लेकिन मैच का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांडेज को रेड कार्ड दिखाया गया। रेड कार्ड मिलने के बाद अर्जेंटीना को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। इसका फायदा स्पेन ने अतिरिक्त समय में उठाया और लगातार आक्रामक खेल दिखाते हुए अर्जेंटीना के डिफेंस पर दबाव बनाए रखा। फेरन टॉरस ने किया निर्णायक गोल एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में स्पेन के स्टार फॉरवर्ड फेरन टॉरस ने शानदार गोल दागकर मैच का इकलौता और निर्णायक गोल किया। यही गोल स्पेन को जीत दिलाने के लिए काफी साबित हुआ। गोल के बाद अर्जेंटीना ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन स्पेनिश डिफेंस ने कोई मौका नहीं दिया और अंतिम सीटी बजते ही स्पेन की टीम विश्व कप ट्रॉफी जीतने का जश्न मनाने लगी। 16 साल बाद फिर विश्व विजेता बना स्पेन इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप का खिताब जीता। दूसरी ओर अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने से चूक गया। फाइनल में स्पेन का अनुशासित खेल, मजबूत रक्षा पंक्ति और अतिरिक्त समय में फेरन टॉरस का गोल टीम की ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी वजह बना।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
Spain players celebrate after defeating France 2-0 to reach the FIFA World Cup 2026 final with a historic clean-sheet record.
FIFA World Cup 2026: स्पेन ने रचा 96 साल का इतिहास, फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में बनाई जगह, छह क्लीन शीट का अनोखा रिकॉर्ड

2026 फीफा विश्व कप के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बना ली। इस जीत के साथ स्पेन ने सिर्फ 16 साल बाद विश्व कप फाइनल में वापसी ही नहीं की, बल्कि 96 साल के विश्व कप इतिहास में ऐसा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया, जो आज तक कोई भी टीम नहीं बना सकी थी। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी मजबूत रक्षा पंक्ति और अनुशासित खेल का शानदार प्रदर्शन किया। यही कारण रहा कि फ्रांस जैसी मजबूत टीम भी स्पेन के डिफेंस को भेदने में पूरी तरह नाकाम रही। 96 साल में पहली बार बना यह रिकॉर्ड स्पेन एक ही फीफा विश्व कप में छह क्लीन शीट दर्ज करने वाली पहली टीम बन गई है। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में मिकेल ओयार्जाबेल और पेड्रो पोरो के गोलों ने जीत सुनिश्चित की, लेकिन मैच की सबसे बड़ी ताकत स्पेन की मजबूत डिफेंस और गोलकीपर उनाई सिमोन का बेहतरीन प्रदर्शन रहा। पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने सात मुकाबलों में केवल एक गोल खाया, जबकि छह मैचों में विरोधी टीम एक भी गोल नहीं कर सकी। एम्बाप्पे समेत फ्रांस के स्टार खिलाड़ी रहे बेअसर किलियन एम्बाप्पे, माइकल ओलिसे और फ्रांस की आक्रामक लाइन से बड़े प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन स्पेन की रणनीतिक डिफेंस ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया। पूरे मुकाबले में फ्रांस लय हासिल नहीं कर सका और सेमीफाइनल से बाहर हो गया। टूटा पुराना विश्व रिकॉर्ड इससे पहले एक विश्व कप संस्करण में सबसे अधिक पांच क्लीन शीट का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स (1974), इटली (1990), ब्राजील (1994), फ्रांस (1998) और स्पेन (2010) के नाम दर्ज था। अब स्पेन ने छह क्लीन शीट के साथ यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 44 साल बाद दोहराया गया खास कारनामा मौजूदा यूरो चैंपियन स्पेन अब विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है, जिसने यूरो चैंपियन रहते हुए लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाई है। इससे पहले यह उपलब्धि वेस्ट जर्मनी ने 1974 और 1982 में हासिल की थी। स्पेन ने 2008 यूरो जीतने के बाद 2010 विश्व कप जीता था और अब यूरो 2024 चैंपियन रहते हुए 2026 विश्व कप के फाइनल में पहुंच गया है। लगातार 37 मैचों से अजेय स्पेन स्पेन की यह जीत लगातार 37वां अजेय मुकाबला भी रही। टीम ने इस मामले में इटली के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। यदि स्पेन फाइनल मुकाबला जीतता है, तो वह लगातार 38 मैचों तक अजेय रहने वाली पहली राष्ट्रीय फुटबॉल टीम बन जाएगी। फ्रांस के लिए निराशाजनक रिकॉर्ड फ्रांस के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। 1986 विश्व कप में वेस्ट जर्मनी से 0-2 की हार के बाद यह नॉकआउट चरण में उसकी सबसे बड़ी हार मानी जा रही है। सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले में फ्रांस का आक्रमण पूरी तरह स्पेन के डिफेंस के सामने बेअसर साबित हुआ। हार के बाद फ्रांस में उठे सवाल सेमीफाइनल में हार के बाद फ्रांसीसी मीडिया और कई पूर्व खिलाड़ियों ने टीम की रणनीति और प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने भी स्वीकार किया कि टीम से सामरिक और तकनीकी स्तर पर कई गलतियां हुईं, जिनका फायदा स्पेन ने पूरी तरह उठाया। क्या खत्म होने वाला है डिडिएर डेशॉम्प्स का दौर? फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेशॉम्प्स के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके नेतृत्व में फ्रांस ने 2018 में विश्व कप जीता, 2022 में फाइनल खेला और 2026 में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि स्पेन के खिलाफ मिली हार के बाद अब उनके भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। अब स्पेन की नजर 19 जुलाई को होने वाले विश्व कप फाइनल पर है। यदि टीम खिताब जीतने में सफल रहती है तो वह न केवल विश्व चैंपियन बनेगी, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करेगी। फिलहाल स्पेन ने यह साबित कर दिया है कि फुटबॉल में मजबूत रक्षा पंक्ति भी उतनी ही अहम होती है जितना शानदार आक्रमण।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Spain players celebrate after defeating France 2-0 to qualify for the FIFA World Cup 2026 Final in Dallas.
फीफा वर्ल्ड कप 2026: एम्बाप्पे रहे बेअसर, 16 साल बाद फाइनल में पहुंचा स्पेन; फ्रांस को 2-0 से हराया

डलास: फीफा विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने दमदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से शिकस्त देकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। पूरे मुकाबले में स्पेन ने आक्रामक और अनुशासित खेल का बेहतरीन संतुलन दिखाया, जबकि किलियन एम्बाप्पे की अगुआई वाली फ्रांसीसी टीम लगातार संघर्ष करने के बावजूद गोल करने में नाकाम रही। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में प्रवेश किया और अब वह 16 साल बाद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने से सिर्फ एक कदम दूर है। शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और फ्रांस की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाया। स्पेन की तेज पासिंग और सामूहिक खेल के सामने फ्रांस की टीम लय में नजर नहीं आई। दूसरी ओर, एम्बाप्पे को स्पेनिश डिफेंडरों ने पूरे मैच में खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पेनल्टी से मिली शुरुआती बढ़त मैच का पहला बड़ा मौका 22वें मिनट में आया, जब स्पेन को पेनल्टी मिली। इस मौके को मिकेल ओयरजाबल ने बिना कोई गलती किए शानदार अंदाज में गोल में बदल दिया। उन्होंने गोलकीपर को गलत दिशा में भेजते हुए गेंद को नेट में पहुंचाया और स्पेन को 1-0 की अहम बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्पेन का आत्मविश्वास और बढ़ गया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और फ्रांस के हमलों को बीच मैदान में ही रोकने की रणनीति अपनाई। फ्रांस ने बराबरी करने की कोशिश जरूर की, लेकिन उसके हमलों में धार की कमी साफ दिखाई दी। पहले हाफ में स्पेन का रहा दबदबा हाफ टाइम तक स्पेन 1-0 से आगे था। फ्रांस ने कुछ मौके जरूर बनाए, लेकिन स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। एम्बाप्पे और फ्रांस के अन्य स्टार खिलाड़ी स्पेनिश डिफेंस को भेदने में असफल रहे। स्पेन ने पहले हाफ में न सिर्फ बढ़त हासिल की, बल्कि खेल की रफ्तार पर भी अपना नियंत्रण बनाए रखा। मिडफील्ड में उसकी पकड़ ने फ्रांस को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। पेड्रो पोरो ने जीत पर लगाई मुहर दूसरे हाफ की शुरुआत भी स्पेन ने आक्रामक अंदाज में की। 58वें मिनट में पेड्रो पोरो ने शानदार गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल ने फ्रांस की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया। इसके बाद फ्रांस ने आक्रमण तेज करने की कोशिश की, लेकिन स्पेन की रक्षापंक्ति ने कोई बड़ी गलती नहीं की। स्पेन ने संयमित खेल दिखाते हुए गेंद पर कब्जा बनाए रखा और मैच के अंतिम मिनटों तक फ्रांस को कोई स्पष्ट गोल करने का मौका नहीं दिया। एम्बाप्पे का जादू नहीं चला पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले किलियन एम्बाप्पे इस बड़े मुकाबले में अपना प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे। स्पेन के डिफेंडरों ने उन्हें लगातार मार्क किया और खतरनाक मूव बनाने का मौका नहीं दिया। फ्रांस के अन्य स्टार खिलाड़ी भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। 16 साल बाद फिर विश्व कप फाइनल में स्पेन इस शानदार जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई है। अब उसकी नजर 16 साल बाद दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने पर होगी। दूसरी ओर, फ्रांस का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना सेमीफाइनल में ही समाप्त हो गया। स्पेन के लिए यह जीत केवल फाइनल का टिकट नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की टीम के आत्मविश्वास और शानदार सामूहिक प्रदर्शन का भी बड़ा प्रमाण है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Lamine Yamal speaking at FIFA World Cup 2026 press conference with a message against racism and for football unity.
FIFA World Cup 2026: 19वें जन्मदिन पर Lamine Yamal का नस्लवाद के खिलाफ बड़ा संदेश, कहा- 'फुटबॉल लोगों को जोड़ने के लिए है'

स्पेन के युवा फुटबॉल स्टार लामिन यामाल ने अपने 19वें जन्मदिन पर सिर्फ हीरों से जड़ा नेकलेस पहनकर ही सुर्खियां नहीं बटोरीं, बल्कि नस्लवाद और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश देकर भी सबका ध्यान खींचा। फ्रांस के खिलाफ फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यामाल ने कहा कि फुटबॉल का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि उन्हें बांटना। जन्मदिन पर खुद को दिया खास तोहफा सेमीफाइनल मुकाबले से एक दिन पहले टेक्सास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यामाल व्हाइट गोल्ड और डायमंड से बने शानदार नेकलेस के साथ पहुंचे। जब उनसे पूछा गया कि यह जन्मदिन का उपहार किसने दिया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह किसी और का नहीं, बल्कि खुद का दिया हुआ गिफ्ट है। यामाल ने कहा, "यह मुझे किसी ने गिफ्ट नहीं किया। मैंने इसे खुद खरीदा है। यह मेरी तरफ से मेरे लिए तोहफा है।" उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। नस्लवाद पर दिया एकता का संदेश प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यामाल से हाल ही में फ्रांस की बहुसांस्कृतिक टीम को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर सवाल पूछा गया। हाल ही में स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री मारियानो राजोय की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें फ्रांस की टीम की विविधता पर सवाल उठाए गए थे। इस पर यामाल ने बिना किसी विवाद को बढ़ाए बेहद संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल का मकसद लोगों को एकजुट करना है। फ्रांस और स्पेन दोनों अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों के एकीकरण की मिसाल हैं। ऐसे में किसी की टिप्पणी पर चर्चा करने से ज्यादा जरूरी यह है कि खेल लोगों को जोड़ने का काम करे। विविधता की मिसाल हैं यामाल लामिन यामाल खुद भी विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता मोरक्को से हैं, जबकि उनकी मां इक्वेटोरियल गिनी मूल की हैं। ऐसे में उनका बयान आधुनिक और समावेशी समाज की सोच को दर्शाता है। छोटे भाई की वायरल लोकप्रियता पर भी बोले यामाल ने अपने छोटे भाई केयने का भी जिक्र किया, जो स्पेन के मैचों के दौरान स्टेडियम में अपनी मस्तीभरी हरकतों की वजह से सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि उनके भाई को खुद भी नहीं पता कि वह इंटरनेट पर वायरल हो चुके हैं। कैमरा देखते ही वह वही शरारतें करते हैं जो घर पर करते हैं और उन्हें टीवी पर देखकर उन्हें भी खुशी होती है। गोल नहीं, टीम की जीत ज्यादा अहम पूरे टूर्नामेंट में अब तक सिर्फ एक गोल करने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी यामाल बिल्कुल शांत नजर आए। उन्होंने कहा कि हर टूर्नामेंट अलग होता है और उनके लिए व्यक्तिगत आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण टीम की सफलता है। यामाल का कहना था कि जब तक स्पेन जीत रहा है, उन्हें अपने गोलों की संख्या की चिंता नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम आगे बढ़ेगी और उन्हें गोल करने के और अवसर मिलेंगे। फ्रांस के खिलाफ रोमांचक मुकाबले की उम्मीद स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाले सेमीफाइनल को लेकर यामाल ने कहा कि दोनों टीमें आक्रमण और बचाव में मजबूत हैं, इसलिए मुकाबला बेहद संतुलित और रोमांचक रहने वाला है। उनके अनुसार यह वही मैच है जिसका दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मैदान के बाहर भी दिखी परिपक्व सोच महज 19 साल की उम्र में यामाल ने जिस आत्मविश्वास और परिपक्वता के साथ नस्लवाद, राजनीति और खेल की भूमिका पर अपनी बात रखी, उसने यह साफ कर दिया कि वह केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी नई पीढ़ी के प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
SSB personnel detain an American citizen near the India-Nepal border in Maharajganj after he was allegedly found attempting to cross without a valid passport or travel documents.
7 महीने बिना पासपोर्ट भारत में रहा अमेरिकी नागरिक, नेपाल भागने की कोशिश में SSB ने पकड़ा

महराजगंज: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने एक अमेरिकी नागरिक को बिना वैध पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों के नेपाल में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह पिछले करीब सात महीने से बिना पासपोर्ट के भारत में रह रहा था। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके भारत आने के पूरे घटनाक्रम और गतिविधियों की जांच कर रही हैं। नेपाल सीमा पार करने की कोशिश में पकड़ा गया एसएसबी की 22वीं बटालियन रविवार को नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान सोनौली थाना क्षेत्र के मैनिहवा इलाके में सीमा स्तंभ संख्या 516 के पास एक विदेशी नागरिक नेपाल की ओर बढ़ता दिखाई दिया। जवानों ने उसे रोककर दस्तावेज मांगे, लेकिन उसके पास कोई वैध पासपोर्ट या यात्रा संबंधी दस्तावेज नहीं मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम जॉर्डन ब्राउन (36) बताया और खुद को अमेरिका के कैलिफोर्निया का निवासी बताया। जवानों को देखकर भागने लगा महराजगंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के अनुसार, जब एसएसबी जवानों ने उससे पूछताछ शुरू की तो वह मौके से भागने का प्रयास करने लगा। हालांकि, जवानों ने तुरंत उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। थाईलैंड में पासपोर्ट खोने का दावा पुलिस पूछताछ में जॉर्डन ब्राउन ने बताया कि वह टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड गया था, जहां उसका पासपोर्ट खो गया। उसने यह भी दावा किया कि वह पहले अमेरिकी नौसेना (US Navy) में अधिकारी के रूप में कार्य कर चुका है। हालांकि, पुलिस उसके सभी दावों का सत्यापन कर रही है। समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने का दावा पूछताछ में ब्राउन ने बताया कि वह थाईलैंड से समुद्री मार्ग के जरिए श्रीलंका पहुंचा और वहां से 2 नवंबर 2025 को समुद्र के रास्ते भारत आया। इसके बाद वह लंबे समय तक गोवा में रहा। बाद में वह गोवा से बेंगलुरु और फिर उत्तर प्रदेश के सोनौली बॉर्डर पहुंचा, जहां से वह नेपाल में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सात महीने तक बिना पासपोर्ट कैसे रहा? जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जॉर्डन ब्राउन करीब सात महीने तक बिना वैध पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों के भारत में कैसे रहा और विभिन्न राज्यों में आवाजाही कैसे करता रहा। पुलिस अब उसके संपर्कों, यात्रा मार्ग और भारत में रहने की पूरी अवधि की जांच कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं पूछताछ फिलहाल अमेरिकी नागरिक को हिरासत में रखकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके दावे कितने सही हैं और भारत में उसके रहने का वास्तविक उद्देश्य क्या था। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026: दक्षिण अफ्रीका के युवा फुटबॉलर जेडन एडम्स का 25 साल की उम्र में हुआ निधन

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका को पहली बार नॉकआउट चरण तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले युवा मिडफील्डर जेडन एडम्स का 25 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका शव 11 जुलाई को केपटाउन के शॉट्सचेक्लूफ इलाके स्थित एक घर में मिला। दक्षिण अफ्रीका के खेल मंत्री गेटन मैकेंजी ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए इसे देश के फुटबॉल के लिए अपूरणीय क्षति बताया। हालांकि, उनकी मौत की वजह का अब तक आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।   मौत की जांच जारी, अफवाहों से बचने की अपील खेल मंत्री ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लोगों और मीडिया से अपील की कि वे मौत के कारण को लेकर किसी तरह की अटकलें न लगाएं। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। सोशल मीडिया पर आत्महत्या और अवसाद से जुड़े कई दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इनकी किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।   वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन, देश को दिलाई नई पहचान जेडन एडम्स ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के तीनों ग्रुप मुकाबलों में हिस्सा लिया था। उनकी बदौलत टीम पहली बार टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण तक पहुंची। हालांकि, कनाडा के खिलाफ राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में वह नहीं खेल सके। इससे पहले वह 2024 अफ्रीका कप ऑफ नेशंस में तीसरे स्थान पर रहने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम का भी हिस्सा थे।   उनके निधन पर विश्व फुटबॉल जगत में शोक की लहर है। नॉर्वे और इंग्लैंड के बीच खेले गए वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल से पहले उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, फुटबॉल खिलाड़ियों के संगठन और कई खेल हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनकी गर्लफ्रेंड अकीला एडेंडॉर्फ ने भी भावुक संदेश साझा करते हुए उन्हें अपना सबसे बड़ा सहारा और सबसे अच्छा दोस्त बताया। जेडन का निधन उनकी दादी की मौत के एक महीने के भीतर हुआ है, जिससे उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

anjali kumari जुलाई 13, 2026 0
FIFA World Cup referee on the field before an England vs Argentina match highlighting neutrality and officiating rules.
FIFA World Cup 2026: इंग्लैंड-अर्जेंटीना सेमीफाइनल में क्यों नहीं होंगे दोनों देशों के रेफरी? जानिए फॉकलैंड विवाद से जुड़ी पूरी कहानी

FIFA World Cup 2026 के सेमीफाइनल में फुटबॉल की दो बड़ी प्रतिद्वंद्वी टीमें इंग्लैंड और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगी। हालांकि इस हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले एक और दिलचस्प बात चर्चा में है। मैच में न तो इंग्लैंड का कोई रेफरी होगा और न ही अर्जेंटीना का। इसके पीछे वजह दोनों देशों के बीच दशकों पुराना फॉकलैंड द्वीप (Falkland Islands) विवाद और FIFA की निष्पक्षता संबंधी नीति है। क्यों नहीं होंगे इंग्लैंड और अर्जेंटीना के रेफरी? FIFA लंबे समय से ऐसे मुकाबलों में विशेष सावधानी बरतता है, जहां दोनों देशों के बीच राजनीतिक या ऐतिहासिक विवाद रहे हों। इसी कारण पूरे टूर्नामेंट के दौरान किसी भी अंग्रेज रेफरी को अर्जेंटीना के मैचों में और किसी अर्जेंटीनी रेफरी को इंग्लैंड के मुकाबलों में नियुक्त नहीं किया गया। इसका उद्देश्य रेफरी की निष्पक्षता पर किसी भी तरह के सवाल या विवाद की संभावना को खत्म करना है। क्या है फॉकलैंड द्वीप विवाद? फॉकलैंड द्वीप दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक द्वीप समूह है। इस पर ब्रिटेन का प्रशासनिक नियंत्रण है, जबकि अर्जेंटीना इसे इस्लास माल्विनास (Islas Malvinas) नाम से अपना क्षेत्र मानता है। साल 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर सैन्य कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच 74 दिनों तक युद्ध चला। अंततः ब्रिटेन ने दोबारा इन द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। हालांकि युद्ध समाप्त हुए कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच यह विवाद आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। FIFA की रेफरी नियुक्ति नीति क्या कहती है? FIFA का मानना है कि किसी भी मैच में रेफरी की निष्पक्षता सर्वोपरि होती है। इसलिए ऐसे देशों के बीच मुकाबलों में उन देशों के अधिकारियों की नियुक्ति से बचा जाता है, जिनके बीच राजनीतिक, ऐतिहासिक या अन्य संवेदनशील विवाद रहे हों। इसी वजह से: इंग्लैंड के रेफरी अर्जेंटीना के किसी भी मैच में नियुक्त नहीं किए गए। अर्जेंटीना के रेफरी भी इंग्लैंड के मुकाबलों से दूर रखे गए। कौन-कौन से रेफरी हुए प्रभावित? इस नीति के चलते इंग्लैंड के अनुभवी रेफरी माइकल ओलिवर और एंथनी टेलर को अर्जेंटीना के मैचों में जिम्मेदारी नहीं दी गई। वहीं अर्जेंटीना के रेफरी फाकुंडो टेलो को भी केवल उन मुकाबलों में नियुक्त किया गया, जिनमें इंग्लैंड की टीम शामिल नहीं थी। कैसे चुने जाते हैं विश्व कप के रेफरी? विश्व कप में रेफरी नियुक्त करने की जिम्मेदारी FIFA के रेफरी विभाग की होती है। चयन प्रक्रिया में कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है, जिनमें शामिल हैं: पूरे टूर्नामेंट में रेफरी का प्रदर्शन फिटनेस स्तर फैसलों की गुणवत्ता अनुशासन संभावित हितों का टकराव (Conflict of Interest) भू-राजनीतिक परिस्थितियां इन सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि मैच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से संचालित हो। अन्य देशों पर भी लागू होती है यह नीति FIFA केवल इंग्लैंड और अर्जेंटीना के मामलों में ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक रूप से संवेदनशील देशों के बीच होने वाले मुकाबलों में भी इसी तरह की सावधानी बरतता है। इसके अलावा किसी भी रेफरी को अपने ही देश की टीम के मैच में नियुक्त नहीं किया जाता। सेमीफाइनल में भी जारी रहेगी यही व्यवस्था इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाले सेमीफाइनल में भी दोनों देशों का कोई रेफरी मैदान पर नहीं होगा। ऐसे में इन देशों के रेफरी केवल टूर्नामेंट के अन्य मुकाबलों में ही अपनी सेवाएं दे सकते हैं।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Morocco head coach reacts after FIFA World Cup 2026 quarter-final defeat to France, focusing on revenge in the 2030 World Cup.
फ्रांस से हार के बाद मोरक्को कोच का बड़ा ऐलान, बोले- 2030 वर्ल्ड कप में लेंगे बदला

फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस के हाथों 2-0 की हार के बाद मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओआहबी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह हार उनकी टीम के लिए सीख साबित होगी और अगली बार जब विश्व कप में फ्रांस का सामना होगा तो मोरक्को उसे बाहर करने की पूरी कोशिश करेगा। फ्रांस ने बोस्टन के गिलेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दूसरे हाफ में किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले के गोल की बदौलत जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही लगातार दूसरे विश्व कप में फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 के अंतर से टूर्नामेंट से बाहर किया। 2030 विश्व कप पर टिकी हैं नजरें हार के बावजूद ओआहबी ने भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि टीम अब अगले विश्व कप की तैयारी करेगी, जिसकी मेजबानी मोरक्को, स्पेन और पुर्तगाल संयुक्त रूप से करेंगे। उन्होंने कहा, "फ्रांस दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है। वे पिछले दो विश्व कप के फाइनल तक पहुंचे हैं और उनके पास शानदार खिलाड़ी हैं। आज वे हमसे बेहतर थे, लेकिन हमें यकीन है कि अगले चार वर्षों में हम और मजबूत होकर लौटेंगे और उन्हें हराने की कोशिश करेंगे।" हार से निराश, लेकिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भरोसा कोच ने स्वीकार किया कि टीम इस हार से निराश है, क्योंकि उनका लक्ष्य सिर्फ क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना नहीं बल्कि विश्व कप जीतना था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने मैदान पर जीत के लिए हरसंभव प्रयास किया और पूरी प्रतिबद्धता के साथ मुकाबला खेला। हालांकि, फ्रांस की गुणवत्ता ने आखिरकार अंतर पैदा कर दिया। अब अफ्रीका कप ऑफ नेशंस पर रहेगा फोकस मोहम्मद ओआहबी ने बताया कि फिलहाल टीम का अगला बड़ा लक्ष्य अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) होगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष केन्या, युगांडा और तंजानिया में होना है। उनका कहना है कि टीम पहले इस टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करने और खिताब जीतने पर ध्यान देगी, जिसके बाद 2030 विश्व कप की तैयारियां तेज की जाएंगी। युवा खिलाड़ियों से भविष्य की उम्मीद कोच ने कहा कि मोरक्को के पास प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की मजबूत फौज है और फुटबॉल संघ भी लगातार टीम के विकास पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व कप का यह अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा और इससे भविष्य में टीम और मजबूत बनकर उभरेगी। फ्रांस की ताकत को भी सराहा ओआहबी ने फ्रांस के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी टीम शुरुआत से ही दबाव बना रही थी और वह पहले भी गोल कर सकती थी। उन्होंने माना कि फ्रांस ने बेहतर फुटबॉल खेली, लेकिन मोरक्को के खिलाड़ी पूरे मैच में संघर्ष करते रहे और अंत तक मुकाबले में बने रहने की कोशिश की। कोच ने भरोसा जताया कि टीम सितंबर में फिर से एकजुट होकर नई ऊर्जा के साथ तैयारी शुरू करेगी और आने वाले वर्षों में बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेगी।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Egypt coach Hossam Hassan reacts after Argentina's dramatic FIFA World Cup victory over Egypt.
FIFA World Cup: अर्जेंटीना से हार के बाद मिस्र के कोच का बड़ा आरोप, बोले- 'FIFA चाहता था मेसी टूर्नामेंट में बने रहें'

FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अर्जेंटीना से 3-2 की नाटकीय हार के बाद मिस्र के मुख्य कोच होसम हसन ने FIFA और मैच अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था चाहती थी कि लियोनेल मेसी और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट में आगे बढ़ें। हालांकि, इन आरोपों का समर्थन करने वाला कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है और FIFA की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। 2-0 की बढ़त के बावजूद हार गया मिस्र मुकाबले में मिस्र ने शानदार शुरुआत करते हुए 2-0 की बढ़त बना ली थी और लंबे समय तक मैच पर नियंत्रण बनाए रखा। लेकिन अंतिम चरण में अर्जेंटीना ने शानदार वापसी करते हुए क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत 13 मिनट के भीतर तीन गोल दाग दिए और 3-2 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। VAR फैसलों पर जताई नाराजगी हार के बाद होसम हसन ने कहा कि उनकी टीम ने खेल के अधिकांश हिस्से में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ फैसलों ने मैच की दिशा बदल दी। उनके अनुसार, सबसे बड़ा विवाद 59वें मिनट में हुआ जब मोस्तफा ज़िको का गोल VAR समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद सलाह को पेनल्टी नहीं मिली और अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले फाउल होने के बावजूद VAR ने हस्तक्षेप नहीं किया। 'मेसी को टूर्नामेंट में बनाए रखना चाहते थे' पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में होसम हसन ने कहा कि उन्हें लगता है कि मैच का परिणाम केवल मैदान पर हुए प्रदर्शन से तय नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संभव है FIFA और अन्य बाहरी कारक चाहते थे कि मौजूदा विश्व चैंपियन और लियोनेल मेसी प्रतियोगिता में बने रहें। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। 'अब कभी वर्ल्ड कप नहीं देखूंगा' मैच के बाद एक टीवी इंटरव्यू में मिस्र के कोच ने अपनी नाराजगी दोहराते हुए कहा कि उन्हें यह जीत अर्जेंटीना की "अयोग्य जीत" लगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपने देश लौटने के बाद वह दोबारा विश्व कप नहीं देखना चाहेंगे क्योंकि उनके अनुसार प्रतियोगिता में उन्हें न्याय नहीं मिला। FIFA कर सकता है टिप्पणी की समीक्षा होसम हसन के बयानों के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FIFA उनके पोस्ट-मैच बयानों की समीक्षा कर सकता है और यदि आवश्यक हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Lionel Messi celebrates emotionally with Argentina teammates after dramatic FIFA World Cup victory over Egypt.
FIFA World Cup: मिस्र पर रोमांचक जीत के बाद भावुक हुए लियोनेल मेसी, साथियों ने कंधों पर उठाकर किया सम्मान

FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना ने मिस्र के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज की। मुकाबले के बाद सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब कप्तान लियोनेल मेसी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अंतिम सीटी बजते ही साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगाया और बाद में कंधों पर उठाकर उनकी शानदार कप्तानी और प्रदर्शन का सम्मान किया। 2-0 से पिछड़ने के बाद बदली मैच की तस्वीर करीब 80 मिनट तक ऐसा लग रहा था कि मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। टीम 2-0 से पीछे थी और मेसी पहले हाफ में पेनल्टी भी चूक चुके थे। लेकिन अंतिम 13 मिनट में अर्जेंटीना ने शानदार खेल दिखाया। क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत टीम ने 3-2 से यादगार जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। पेनल्टी मिस करने के बाद भी नहीं हारी उम्मीद पहले हाफ में मेसी की पेनल्टी मिस होने के बाद टीम मुश्किल में आ गई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार गेंद मांगते रहे। उन्होंने पहले अर्जेंटीना के लिए वापसी की शुरुआत कराई, फिर बराबरी का गोल दागा। आखिरकार एंजो फर्नांडीज ने स्टॉपेज टाइम में विजयी गोल कर टीम को अगले दौर में पहुंचा दिया। कोच स्कालोनी भी हुए भावुक मैच के बाद अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने कहा कि यह टीम कभी हार नहीं मानती और खिलाड़ियों का जज्बा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। स्कालोनी ने मेसी की तारीफ करते हुए कहा कि पेनल्टी चूकने के बाद भी उन्होंने गेंद मांगना नहीं छोड़ा और वही उनकी महानता की पहचान है। मेसी ने टीम को दिया जीत का श्रेय मैच के बाद मेसी ने व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जीत पूरे समूह की मेहनत का परिणाम है और टीम ने एक बार फिर साबित किया कि वह आखिरी मिनट तक लड़ना जानती है। उन्होंने प्रशंसकों का भी धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि टीम आगे भी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखेगी। साथियों ने कंधों पर उठाकर किया सम्मान जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर एकजुट होकर जश्न मनाया। सभी खिलाड़ियों ने मेसी को घेर लिया और फिर उन्हें कंधों पर उठाकर सम्मान दिया। यह दृश्य टीम के भीतर मजबूत एकता, विश्वास और अपने कप्तान के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया। अर्जेंटीना अब इस शानदार जीत के साथ विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी है और खिताब बचाने की उसकी उम्मीदें बरकरार हैं।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
USA striker Folarin Balogun during a FIFA World Cup 2026 match after his red card was overturned ahead of the Round of 16 clash against Belgium.
ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द, फीफा ने हटाया निलंबन

वॉशिंगटन/सिएटल: फीफा विश्व कप 2026 के बीच अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फैसले पर सवाल उठाने के बाद फीफा ने रेड कार्ड की समीक्षा की और उसे वापस ले लिया। अब बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेल सकेंगे। ट्रंप ने फैसले को बताया अन्यायपूर्ण डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि फोलारिन बालोगुन अमेरिकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्हें अगले मैच से बाहर करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में उन्हें रेड कार्ड के नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब पता चला कि इसके कारण खिलाड़ी अगले मैच में नहीं खेल सकता, तो उन्हें यह फैसला अनुचित लगा। उन्होंने कहा कि मैदान पर यह जानबूझकर किया गया फाउल नहीं था, बल्कि दोनों खिलाड़ी तेज रफ्तार में एक-दूसरे से टकरा गए थे। फीफा से की फैसले की समीक्षा की मांग ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर फीफा अधिकारियों से संपर्क किया और रेड कार्ड की समीक्षा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी को उस मैच के लिए दंडित करना उचित नहीं है, जो अभी खेला ही नहीं गया। उनके अनुसार, ऐसा निर्णय खेल भावना के अनुरूप नहीं है। फीफा ने हटाया निलंबन फीफा द्वारा मामले की समीक्षा के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही उन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध भी समाप्त हो गया है। अब 25 वर्षीय स्ट्राइकर सोमवार को सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अमेरिकी टीम का हिस्सा होंगे। अमेरिका के लिए अहम खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन इस विश्व कप में अमेरिका के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अब तक तीन गोल किए हैं और टीम के आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी माने जा रहे हैं। उनकी वापसी अमेरिकी मुख्य कोच मौरिसियो पोचेटिनो के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताई आपत्ति फीफा के फैसले पर बेल्जियम फुटबॉल संघ (RBFA) ने नाराजगी व्यक्त की है। संघ ने कहा कि अमेरिका-बेल्जियम मुकाबले से ठीक पहले रेड कार्ड हटाए जाने का फैसला हैरान करने वाला है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा। टेड क्रूज ने किया ट्रंप का समर्थन अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने भी ट्रंप के रुख का समर्थन किया। उन्होंने रेड कार्ड को "बेतुका फैसला" बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी टीम और उसके खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए सही कदम उठाया। खेल के साथ राजनीति पर भी छिड़ी बहस फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड को रद्द किए जाने के बाद विश्व कप के बीच खेल और राजनीति के संबंधों पर नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का मानना है कि इस फैसले ने रेफरी के निर्णयों की स्वतंत्रता और खेल प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया के जरिए एक गलत निर्णय को सुधारा गया है।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Cristiano Ronaldo reacts after Portugal's FIFA World Cup 2026 exit against Spain.
Cristiano Ronaldo ने खेला अपना आखिरी FIFA World Cup, अंतरराष्ट्रीय संन्यास पर अभी नहीं लिया फैसला

स्पेन से हार के बाद भावुक हुए रोनाल्डो, बोले- जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा Cristiano Ronaldo ने पुष्टि कर दी है कि FIFA World Cup 2026 उनके करियर का आखिरी विश्व कप था। हालांकि, उन्होंने फिलहाल पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का ऐलान नहीं किया है। 41 वर्षीय दिग्गज फुटबॉलर ने कहा कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय भविष्य पर फैसला लेने से पहले परिवार के साथ समय बिताएंगे और शांत मन से सोच-विचार करेंगे। स्पेन के खिलाफ हार के साथ खत्म हुआ विश्व कप सफर Portugal का विश्व कप अभियान प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में Spain के खिलाफ 1-0 की हार के साथ समाप्त हो गया। मुकाबले में दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम में Mikel Merino ने निर्णायक गोल कर स्पेन को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। मैच के बाद रोनाल्डो ने कहा कि टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन किस्मत उनके साथ नहीं थी। उन्होंने कहा, "मैं दुखी हूं कि मेरा विश्व कप सफर इस तरह खत्म हुआ। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और पूरी ईमानदारी से खेला। यह मेरा आखिरी विश्व कप था, लेकिन अभी मैं अपने भविष्य पर कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं लूंगा।" विश्व कप खत्म, लेकिन अंतरराष्ट्रीय करियर अभी नहीं रोनाल्डो ने साफ किया कि विश्व कप में उनका सफर जरूर समाप्त हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने पुर्तगाल के लिए अपना आखिरी मैच खेल लिया है। उन्होंने कहा कि भावनाओं में बहकर फैसला लेना सही नहीं होगा और वह कुछ समय बाद तय करेंगे कि राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जारी रखना है या नहीं। 'स्पेन को किस्मत का साथ मिला' हार के बाद रोनाल्डो ने माना कि मुकाबला बेहद करीबी था और दोनों टीमों के जीतने की बराबर संभावना थी। उनके अनुसार, "स्पेन को थोड़ा भाग्य का साथ मिला। यह ऐसा मैच था जो किसी भी तरफ जा सकता था।" छठा विश्व कप, लेकिन अधूरा रहा सबसे बड़ा सपना रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठा FIFA World Cup खेला। इस टूर्नामेंट में उन्होंने तीन गोल भी किए, लेकिन वह विश्व कप जीतने का अपना सबसे बड़ा सपना पूरा नहीं कर सके। विश्व फुटबॉल के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाने वाले रोनाल्डो के नाम कई व्यक्तिगत और टीम उपलब्धियां हैं, लेकिन विश्व कप ट्रॉफी उनके करियर की सबसे बड़ी अधूरी उपलब्धि बनकर रह गई। याद दिलाई पुर्तगाल की ऐतिहासिक सफलताएं रोनाल्डो ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते। उन्होंने कहा कि टीम ने UEFA Euro 2016 का खिताब जीता और इसके बाद UEFA Nations League में 2019 और 2025 में भी चैंपियन बनी। रोनाल्डो ने कहा, "मैंने पुर्तगाल के लिए तीन बड़े खिताब जीते। मेरे आने से पहले टीम ने कोई बड़ा खिताब नहीं जीता था। मेरे लिए 2016 की यूरोपीय चैम्पियनशिप विश्व कप जितनी ही महत्वपूर्ण है।" अभी बाकी है अंतिम फैसला फिलहाल इतना तय हो गया है कि रोनाल्डो का विश्व कप अध्याय समाप्त हो चुका है। हालांकि, उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत अभी तय नहीं है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में संन्यास का फैसला नहीं करेंगे और परिवार के साथ समय बिताने के बाद ही अपने अगले कदम की घोषणा करेंगे।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Folarin Balogun and Belgium players compete during FIFA World Cup 2026 match
FIFA World Cup 2026: ट्रंप के समर्थन के बावजूद नहीं चला फोलारिन बालोगुन का जादू, बेल्जियम ने अमेरिका को 4-1 से हराया

FIFA World Cup 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में सह-मेजबान United States को Belgium के खिलाफ 4-1 से करारी हार का सामना करना पड़ा। मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्राइकर Folarin Balogun की विवादित वापसी को लेकर थी, लेकिन मैदान पर वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। इस जीत के साथ बेल्जियम ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जहां उसका सामना Spain से होगा। विवाद के बीच मैदान पर उतरे बालोगुन बालोगुन को पिछले दौर में Bosnia and Herzegovina के खिलाफ मुकाबले में रेड कार्ड मिला था, जिसके कारण उन्हें एक मैच का स्वत: निलंबन झेलना था। हालांकि, मैच से पहले FIFA ने उनके निलंबन को एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ खेलने के पात्र हो गए। इस फैसले ने टूर्नामेंट के दौरान बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। मैदान पर नहीं दिखा असर टूर्नामेंट में पहले ही तीन गोल कर चुके बालोगुन से अमेरिका को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बेल्जियम की मजबूत रक्षापंक्ति ने उन्हें पूरे मैच में लगभग बेअसर बनाए रखा। पहले हाफ में उन्होंने एक फ्री-किक दिलाई, जिस पर Malik Tillman ने शानदार गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर किया। इसके अलावा बालोगुन कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ सके। उनका सबसे अच्छा मौका 82वें मिनट में आया, लेकिन बेल्जियम के गोलकीपर Thibaut Courtois ने शानदार बचाव कर दिया। अतिरिक्त समय में उन्हें बदलकर Haji Wright को मैदान पर उतारा गया। बेल्जियम ने पूरी तरह बनाया दबदबा बेल्जियम की ओर से Charles De Ketelaere ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद अमेरिकी गोलकीपर Matt Freese की एक बड़ी गलती का फायदा उठाकर बेल्जियम ने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। अंत में Romelu Lukaku ने गोल कर 4-1 की जीत पर मुहर लगा दी। डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से बढ़ा था विवाद बालोगुन की वापसी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने Gianni Infantino से इस मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। ट्रंप का कहना था कि रेड कार्ड का फैसला गलत था और यह फाउल भी नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने FIFA पर फैसला बदलने का दबाव नहीं बनाया। FIFA ने किया बचाव, UEFA ने जताई नाराजगी FIFA अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने कहा कि बालोगुन के मामले में पूरी न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से अपनाई गई और नियमों के अनुसार फैसला लिया गया। दूसरी ओर, UEFA ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि स्वत: निलंबन हटाना प्रतियोगिता की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। वहीं Royal Belgian Football Association ने भी मैच से पहले बालोगुन की पात्रता को चुनौती दी थी, लेकिन FIFA ने उसकी अपील खारिज कर दी। सोशल मीडिया पर भी हुआ तंज मैच जीतने के बाद बेल्जियम टीम ने सोशल मीडिया पर Romelu Lukaku की जश्न मनाते हुए तस्वीर साझा की और उसके साथ लिखा— "Overturn this." इसे बालोगुन के निलंबन हटाने वाले फैसले पर तंज के रूप में देखा गया। तीन गोल के साथ खत्म हुआ टूर्नामेंट हालांकि अमेरिका टूर्नामेंट से बाहर हो गया, लेकिन बालोगुन ने विश्व कप में तीन गोल किए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने Landon Donovan के 2010 विश्व कप के रिकॉर्ड की बराबरी की। अमेरिका के लिए एक विश्व कप में सबसे ज्यादा चार गोल करने का रिकॉर्ड अब भी Bert Patenaude के नाम दर्ज है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026: 43°C की तपिश में कैसे खेल रहे फुटबॉलर? क्या 'कूलिंग वेस्ट' हैं इसका राज ?

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जहां मैदान पर रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं, वहीं भीषण गर्मी भी खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई मैचों के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह 43 डिग्री सेल्सियस के पार भी दर्ज किया गया। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को हीट स्ट्रेस और थकान से बचाने के लिए टीमों ने अत्याधुनिक 'क्लाइमाकूल सिस्टम' अपनाया है, जिसमें कूलिंग वेस्ट, इंसुलेटेड जैकेट और कूलिंग ओवरबूट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।   मैदान पर गर्मी से बचाने में मददगार 'कूलिंग वेस्ट' रविवार को फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में फ्रांस और पराग्वे के बीच खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान तापमान 43.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ऐसे हालात को देखते हुए फीफा ने खिलाड़ियों के लिए हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की है। वहीं कई टीमों ने मैच से पहले और हाफ टाइम के दौरान खिलाड़ियों को ठंडा रखने के लिए कूलिंग वेस्ट का इस्तेमाल किया।   इस वेस्ट के अंदर विशेष प्रकार का जेल भरा होता है, जिसे उपयोग से पहले फ्रीज किया जाता है। खिलाड़ी जब इसे पहनते हैं तो यह धीरे-धीरे शरीर की अतिरिक्त गर्मी को सोखता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक शरीर के आंतरिक तापमान को लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस और त्वचा के तापमान को करीब 13 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है।   जर्सी और जूतों में भी हाई-टेक बदलाव सिर्फ कूलिंग वेस्ट ही नहीं, खिलाड़ियों की जर्सियों में भी माइक्रो-वेंटिलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक पसीने को तेजी से बाहर निकालती है और शरीर में हवा का बेहतर प्रवाह बनाए रखती है, जिससे खिलाड़ी लंबे समय तक सहज महसूस करते हैं।   इसके अलावा खिलाड़ियों के जूतों पर विशेष कूलिंग ओवरबूट लगाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य पैरों की गर्मी और सूजन को कम करना है। दावा किया जा रहा है कि इन ओवरबूट्स की मदद से केवल सात मिनट में पैरों का तापमान करीब दो डिग्री सेल्सियस तक घटाया जा सकता है, जिससे रिकवरी भी तेज होती है।   फॉर्मूला-1 से फुटबॉल तक पहुंची तकनीक दिलचस्प बात यह है कि कूलिंग वेस्ट और अन्य उपकरणों को शुरुआत में फॉर्मूला-1 ड्राइवरों के लिए विकसित किया गया था। अब इन्हें फुटबॉल में भी सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। टीमें इनका उपयोग मैच से पहले, हाफ टाइम और ट्रेनिंग सत्रों के दौरान खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए कर रही हैं।   जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में खेल आयोजनों के दौरान अत्यधिक गर्मी अब बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में फीफा वर्ल्ड कप 2026 में खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल, हाइड्रेशन ब्रेक और आधुनिक कूलिंग तकनीकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन उपायों की बदौलत खिलाड़ी भीषण गर्मी के बावजूद अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0