सिएटल, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में स्पेन के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले से पहले पुर्तगाल के कप्तान Cristiano Ronaldo ने आलोचकों और पत्रकारों पर तीखा हमला बोला। 41 वर्षीय स्टार फुटबॉलर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले 23 वर्षों से लोग उन्हें "खत्म" करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे आज भी मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं। रोनाल्डो ने कहा रोनाल्डो ने कहा, "आप लोग 23 साल से मुझे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक समझ जाना चाहिए कि यह बेकार है, लेकिन फिर भी कोशिश जारी है।" उन्होंने माना कि उम्र के साथ उनके खेल में बदलाव आया है, लेकिन वह अब भी टीम के लिए अहम योगदान दे रहे हैं। इस विश्व कप में उनके नाम तीन गोल दर्ज हैं, जिनमें उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो और क्रोएशिया के खिलाफ एक पेनल्टी गोल शामिल है। "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं" प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे लगातार संन्यास और भविष्य को लेकर सवाल पूछे गए तो रोनाल्डो नाराज दिखे। उन्होंने दो टूक कहा, "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं।" उन्होंने मुस्कुराते हुए एक पत्रकार की ओर इशारा कर कहा कि उन्हें लोगों के चेहरे अच्छी तरह याद रहते हैं और वह जानते हैं कि कौन उन्हें पसंद नहीं करता। रोनाल्डो ने कहा भावुक अंदाज में रोनाल्डो ने कहा कि उन्होंने फुटबॉल और जिंदगी दोनों में अपना सब कुछ झोंक दिया है। उनके मुताबिक, स्पेन के खिलाफ मैच का नतीजा चाहे जो भी हो, उन्हें अपने करियर पर कोई पछतावा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 40 वर्ष की उम्र के बाद मिली आलोचनाओं ने उन्हें और मजबूत बनाया है। स्पेन के खिलाफ मुकाबले को लेकर रोनाल्डो ने इसे कठिन चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि जीत के लिए पुर्तगाल को आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और बहादुरी के साथ खेलना होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व कप जीतने या हारने से उनकी पहचान नहीं बदलने वाली, क्योंकि उन्होंने हमेशा अपना शत-प्रतिशत दिया है।
नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 में अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। इसी कड़ी में बोस्निया-हर्जेगोविना के कप्तान एडिन जेको ने विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक और यादगार उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 39 वर्षीय स्टार स्ट्राइकर ने अमेरिका के खिलाफ राउंड ऑफ-32 मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा बनते ही पुरुष फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण में खेलने वाले सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उनकी बेहतरीन फिटनेस, अनुशासन, अनुभव और खेल के प्रति समर्पण का भी प्रतीक मानी जा रही है। दो दशक से अधिक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर चुके जेको ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर अनुभव की अहमियत आज भी बरकरार है। अंतरराष्ट्रीय करियर में जुड़ा एक और स्वर्णिम अध्याय एडिन जेको लंबे समय से बोस्निया-हर्जेगोविना फुटबॉल टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। कप्तान के रूप में उन्होंने वर्षों तक टीम का नेतृत्व किया और कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अपनी छाप छोड़ी। विश्व कप 2026 में भी उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे फुटबॉल इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। 39 वर्ष की उम्र में विश्व कप जैसे सबसे बड़े मंच पर नॉकआउट मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा बनना इस बात का प्रमाण है कि फिटनेस, मानसिक मजबूती और पेशेवर प्रतिबद्धता किसी भी खिलाड़ी के करियर को लंबा बना सकती है। अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में अनुभव बना सबसे बड़ी ताकत बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए अमेरिका के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं था। हालांकि मैच का परिणाम अपनी जगह महत्वपूर्ण रहा, लेकिन जेको का मैदान पर उतरना ही अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण बन गया। उन्होंने यह दिखाया कि उम्र बढ़ने के बावजूद शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना संभव है, यदि खिलाड़ी अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को लगातार बनाए रखे। उनकी मौजूदगी ने युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश दिया कि मेहनत और अनुशासन के दम पर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जा सकता है। रिकॉर्ड पर जल्द मंडरा सकता है खतरा हालांकि जेको ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है, लेकिन यह रिकॉर्ड ज्यादा समय तक उनके पास रहे, इसकी संभावना कम मानी जा रही है। विश्व कप 2026 में अभी कई अनुभवी खिलाड़ी नॉकआउट चरण में अपनी टीमों के लिए खेल रहे हैं। यदि वे अपने अगले मुकाबले में शुरुआती एकादश में शामिल होते हैं, तो जेको का यह रिकॉर्ड टूट भी सकता है। इसके बावजूद उनका नाम विश्व कप इतिहास में हमेशा एक खास स्थान रखेगा, क्योंकि उन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी उपयोगिता साबित की है। रोनाल्डो के बाद अब जेको के नाम नई उपलब्धि विश्व कप 2026 अनुभवी खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। इससे पहले क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने विश्व कप में मैच की शुरुआत करने वाले सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया था। अब एडिन जेको ने नॉकआउट चरण में सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी के रूप में नया इतिहास रच दिया है। इन दोनों दिग्गजों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि आधुनिक फुटबॉल में उम्र सफलता की बाधा नहीं है। सही फिटनेस, अनुभव और निरंतर मेहनत के दम पर खिलाड़ी लंबे समय तक विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं।
नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 सिर्फ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीमों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि यह प्रवास, पहचान, नागरिकता और पारिवारिक विरासत की भी एक अनोखी कहानी बनकर सामने आया है। इस बार के टूर्नामेंट में बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनका जन्म उस देश में नहीं हुआ है जिसकी राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनकर वे मैदान में उतर रहे हैं। टूर्नामेंट में शामिल कुल 1,248 खिलाड़ियों में से लगभग 290 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो अपनी जन्मभूमि की बजाय अपने माता-पिता, दादा-दादी या पूर्वजों के देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यानी विश्व कप का लगभग हर चौथा खिलाड़ी प्रवासी पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। यह आंकड़ा वैश्विक प्रवास और दोहरी पहचान के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। फ्रांस और नीदरलैंड बने दुनिया के सबसे बड़े 'फुटबॉल एक्सपोर्टर' फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सबसे अधिक खिलाड़ियों को दूसरे देशों की राष्ट्रीय टीमों तक पहुंचाने वाले देशों में फ्रांस और नीदरलैंड सबसे आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार: फ्रांस में जन्मे 75 खिलाड़ी इस विश्व कप में अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। नीदरलैंड में जन्मे 42 खिलाड़ी अलग-अलग राष्ट्रीय टीमों की ओर से खेल रहे हैं। इसके बाद जर्मनी के 23, इंग्लैंड के 21, बेल्जियम के 11, स्पेन के 11 और स्वीडन के 10 खिलाड़ी अन्य देशों की जर्सी पहनकर मैदान में उतर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों की मजबूत फुटबॉल अकादमियां, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और युवा खिलाड़ियों के विकास पर विशेष ध्यान देने की वजह से यहां बड़ी संख्या में प्रतिभाएं तैयार होती हैं। हालांकि राष्ट्रीय टीम में सीमित स्थान होने के कारण कई खिलाड़ी अपने पारिवारिक मूल वाले देशों के लिए खेलने का विकल्प चुनते हैं। क्यूरासाओ और डीआर कांगो की टीमों में प्रवासी खिलाड़ियों का दबदबा इस विश्व कप में क्यूरासाओ और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) प्रवासी खिलाड़ियों के सबसे बड़े उदाहरण बनकर सामने आए हैं। क्यूरासाओ की पूरी टीम ऐसे खिलाड़ियों से बनी है जिनका जन्म नीदरलैंड में हुआ। डीआर कांगो के 20 खिलाड़ी फ्रांस, बेल्जियम, इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में जन्मे हैं। इसके अलावा: मोरक्को के 19 खिलाड़ी हैती के 16 खिलाड़ी अल्जीरिया के 15 खिलाड़ी केप वर्दे के 13 खिलाड़ी भी प्रवासी परिवारों से जुड़े हुए हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने पूर्वजों के देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए इन टीमों को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में नई पहचान दिलाई है। भारतीय मूल के चार खिलाड़ी भी विश्व कप में हालांकि भारतीय फुटबॉल टीम इस बार फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी, लेकिन भारतीय मूल के चार खिलाड़ी अलग-अलग देशों की ओर से टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें शामिल हैं: न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्लै डीआर कांगो के सैमुअल मूटूसामी कतर के तहसीन मोहम्मद जमशीद इन खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की वैश्विक फुटबॉल में बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है। आखिर क्यों बढ़ रही है यह प्रवृत्ति? फीफा के नियम खिलाड़ियों को यह अधिकार देते हैं कि यदि उनके माता-पिता, दादा-दादी या पारिवारिक जड़ें किसी अन्य देश से जुड़ी हैं, तो वे निर्धारित पात्रता पूरी करने पर उस देश की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इतिहास भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फ्रांस और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों का कभी अफ्रीका, कैरेबियन और एशिया के कई क्षेत्रों पर औपनिवेशिक शासन रहा था। बेहतर शिक्षा, रोजगार और जीवन की तलाश में इन देशों के लाखों लोग 20वीं सदी के दौरान यूरोप जाकर बस गए। उनकी अगली पीढ़ी वहीं पैदा हुई, वहीं फुटबॉल सीखी और पेशेवर खिलाड़ी बनी। बाद में उनमें से कई खिलाड़ियों ने अपने जन्म के देश की बजाय अपने पूर्वजों के देश के लिए खेलने का फैसला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फुटबॉल में यह रुझान आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। वैश्वीकरण, दोहरी नागरिकता और अंतरराष्ट्रीय प्रवास ने राष्ट्रीय टीमों की तस्वीर को पहले से कहीं अधिक विविध और बहुसांस्कृतिक बना दिया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में सह-मेजबान कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराकर इतिहास रच दिया। विश्व रैंकिंग में 30वें स्थान पर काबिज कनाडा पहली बार टूर्नामेंट के राउंड ऑफ-16 में पहुंचा है। लॉस एंजिल्स में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले का फैसला स्टॉपेज टाइम में हुआ, जब कप्तान स्टीफन यूस्टाकियो ने शानदार गोल कर टीम को यादगार जीत दिलाई। अब अगले दौर में कनाडा का सामना नीदरलैंड्स और मोरक्को के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से होगा। दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। पहले हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन कनाडा की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने हर प्रयास नाकाम कर दिया। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने भी शानदार बचाव करते हुए कनाडा को बढ़त लेने से रोके रखा। दूसरे हाफ में कनाडा ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाया और लगातार दबाव बनाए रखा। 75वें मिनट में स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस के मैदान पर उतरने से टीम के हमलों में और धार आई। आखिरकार स्टॉपेज टाइम में यूस्टाकियो ने बॉक्स के बाहर उछलती गेंद को शानदार तरीके से नियंत्रित कर निचले कोने में गोल दागते हुए मैच का फैसला कर दिया। दक्षिण अफ्रीका सम्मानजनक विदाई के साथ बाहर हालांकि दक्षिण अफ्रीका की टीम हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गई, लेकिन उसने पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचकर इतिहास रचा। टीम के 74 वर्षीय मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूस भी नॉकआउट चरण में टीम का नेतृत्व करने वाले सबसे उम्रदराज कोच बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड उरुग्वे के पूर्व कोच ऑस्कर टबारेज के नाम था। कनाडा ने इस विश्व कप में अपना पहला अंक, पहली जीत और अब पहली बार अंतिम-16 में जगह बनाकर नई उपलब्धियां हासिल की हैं। टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 32 का अगला मुकाबला जापान और ब्राजील के बीच खेला जाएगा, जिस पर फुटबॉल प्रेमियों की नजरें टिकी रहेंगी।
अर्लिंगटन: फुटबॉल की दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेसी आज 24 जून को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी मेसी का प्रदर्शन दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को हैरान कर रहा है। फीफा विश्व कप 2026 में उनका शानदार फॉर्म जारी है और शुरुआती दो मुकाबलों में ही वह पांच गोल दाग चुके हैं। हाल ही में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने दो गोल करके एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। इसके साथ ही वह फीफा विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनके नाम अब कुल 18 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाकर जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। 39 की उम्र में भी कायम है मेसी का जादू ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र उनके खेल पर कोई असर नहीं डाल पाई है। टूर्नामेंट के शुरुआती दो मैचों में ही पांच गोल कर चुके मेसी की तारीफ करते हुए ऑस्ट्रिया के कोच राल्फ रंगनिक ने कहा कि 39 साल की उम्र में इस तरह का प्रदर्शन असाधारण है और यही उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। जन्मदिन पर भावुक भी हैं मेसी इस खास दिन पर मेसी भावनात्मक दौर से भी गुजर रहे हैं। उनके पिता अर्जेंटीना में अस्वस्थ हैं और वह अपने परिवार से लगभग 10 हजार किलोमीटर दूर विश्व कप में टीम की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बावजूद इसके उन्होंने निजी चिंताओं को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया और अर्जेंटीना के अब तक हुए सभी पांच गोल खुद किए हैं। मेसी ने कहा, "विश्व कप का हर मैच कठिन है। कोई टीम आसानी से मौके नहीं देती, लेकिन मैं हर पल का आनंद ले रहा हूं।" पेनल्टी मिस करने के बाद शानदार वापसी ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैच के शुरुआती मिनटों में मेसी पेनल्टी पर गोल करने से चूक गए थे। उनके शॉट के पोस्ट के बाहर जाने से स्टेडियम में सन्नाटा छा गया था। हालांकि, आठ बार के बैलन डी'ओर विजेता मेसी ने बाद में शानदार वापसी करते हुए दो गोल दागे और अपनी गलती की भरपाई कर दी। मेसी ने मैच के बाद कहा, "पेनल्टी मिस करने से मैं काफी नाराज था, लेकिन बाद में इसकी भरपाई करने में सफल रहा।" यही मेसी की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वह हर असफलता के बाद और अधिक मजबूती के साथ वापसी करते हैं। स्टॉपेज टाइम में भी दिखी वही पुरानी फुर्ती मैच के स्टॉपेज टाइम में मेसी ने अपना 18वां विश्व कप गोल दागा। पहले प्रयास को गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन मेसी ने शानदार नियंत्रण और ड्रिब्लिंग का प्रदर्शन करते हुए कई डिफेंडरों को छकाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। 70 हजार दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद अधिकांश अर्जेंटीनी समर्थकों ने इस पल का जोरदार जश्न मनाया। लियोनेल मेसी के बड़े रिकॉर्ड 6 विश्व कप (2006-2026) खेलने वाले पहले खिलाड़ी। लगातार 6 विश्व कप मैचों में गोल करने वाले इकलौते फुटबॉलर। 18 विश्व कप गोल के साथ ऑलटाइम टॉप स्कोरर। 26 गोल योगदान (18 गोल + 8 असिस्ट), जिससे उन्होंने पेले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 28 विश्व कप मैच खेलकर सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बने। विश्व कप में कुल 2489 मिनट मैदान पर बिताने का रिकॉर्ड। 12 मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी। दो बार गोल्डन बॉल (2014 और 2022) जीतने वाले दुनिया के अकेले फुटबॉलर। 128 सफल ड्रिब्लिंग के साथ डिएगो माराडोना के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 39 साल की उम्र में भी लियोनेल मेसी जिस स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं, वह उन्हें सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं बल्कि फुटबॉल इतिहास का 'अल्टीमेट किंग' साबित करता है।
Lionel Messi World Cup Record: फुटबॉल के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। अर्जेंटीना के कप्तान ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे और इसी के साथ विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के नाम था, जिन्होंने अपने करियर में वर्ल्ड कप में 16 गोल किए थे। अब मेसी 18 गोल के साथ उनसे आगे निकल चुके हैं। रिकॉर्ड टूटने पर मिरोस्लाव क्लोज ने दी बधाई अपना रिकॉर्ड टूटने के बाद मिरोस्लाव क्लोज ने मेसी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से कहता आया हूं कि मेसी का कोई मुकाबला नहीं है। वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर हैं। मुझे उनका मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने और हर चुनौती से ऊपर उठने का तरीका बेहद पसंद है।" क्लोज ने यह भी कहा था कि अगर कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है, तो वह लियोनेल मेसी ही हैं। छठा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं मेसी लियोनेल मेसी साल 2006 से लगातार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे हैं और 2026 का टूर्नामेंट उनके करियर का छठा विश्व कप है। वर्ल्ड कप में मेसी का सफर 2006 – 1 गोल 2014 – 4 गोल 2022 – 7 गोल और अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया 2026 – अब तक 5 गोल (अल्जीरिया के खिलाफ 3 और ऑस्ट्रिया के खिलाफ 2) मेसी का मौजूदा फॉर्म शानदार है और वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने के मिशन पर नजर आ रहे हैं। ऑस्ट्रिया के खिलाफ ऐसा रहा मुकाबला मैच के शुरुआती दौर में ऑस्ट्रिया के मजबूत डिफेंस ने अर्जेंटीना को काफी परेशान किया। हालांकि, 38वें मिनट में मेसी ने अपनी शानदार ड्रिब्लिंग और फिनिशिंग का नमूना पेश करते हुए पहला गोल दागा और टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद ऑस्ट्रिया ने बराबरी की भरपूर कोशिश की, लेकिन इंजरी टाइम के 95वें मिनट में मेसी ने दूसरा गोल करके मुकाबले पर अर्जेंटीना की पकड़ मजबूत कर दी और टीम को जीत दिलाई। मेसी के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और महान खिलाड़ी बड़े मंच पर इतिहास रचने का हुनर रखते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील के प्रशंसकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। टीम के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पुष्टि की है कि स्टार फुटबॉलर नेमार स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले ग्रुप-सी के अंतिम मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे। चोट के कारण अब तक टूर्नामेंट का एक भी मैच नहीं खेलने वाले नेमार की वापसी ब्राजील के लिए बड़ी मजबूती मानी जा रही है। पिंडली की चोट के कारण थे बाहर 34 वर्षीय नेमार 17 मई को अपने क्लब सैंटोस के लिए खेलते समय दाहिने पैर की पिंडली में चोटिल हो गए थे। इसी वजह से वह विश्व कप में मोरक्को के खिलाफ ड्रॉ रहे पहले मैच और हैती पर 3-0 की जीत वाले मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं बन सके। हालांकि वह लगातार टीम के साथ बने रहे और पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरते रहे। कोच ने दिया फिटनेस अपडेट हैती के खिलाफ जीत के बाद एंसेलोटी ने बताया कि नेमार पहले व्यक्तिगत ट्रेनिंग करेंगे और फिर पूरी टीम के साथ अभ्यास में शामिल होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए स्टार खिलाड़ी पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे। राफिन्हा की चोट बनी चिंता ब्राजील को हैती के खिलाफ मैच में एक और झटका लगा, जब राफिन्हा हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण पहले हाफ में ही मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। कोच ने कहा कि उनकी चोट की गंभीरता का आकलन किया जा रहा है। ऐसे में आक्रमण की जिम्मेदारी नेमार पर अधिक रह सकती है। ब्राजील की बढ़ी उम्मीदें हैती के खिलाफ ब्राजील ने 3-0 की शानदार जीत दर्ज की, जिसमें मैथियस कुन्हा ने दो और विनीसियस जूनियर ने एक गोल किया। 129 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 79 गोल कर चुके नेमार अब अपने चौथे विश्व कप में टीम की अगुआई करते हुए ब्राजील को नॉकआउट चरण की ओर ले जाने की कोशिश करेंगे।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज मुकाबले अब और रोमांचक होते जा रहे हैं। टूर्नामेंट के आठवें दिन कई शानदार मुकाबले देखने को मिले, जहां मेक्सिको ने दक्षिण कोरिया को हराकर नॉकआउट राउंड में पहुंचने वाली पहली टीम बनने का गौरव हासिल किया। वहीं सह-मेजबान कनाडा ने वर्ल्ड कप इतिहास की अपनी पहली जीत दर्ज करते हुए कतर को 6-0 से करारी शिकस्त दी। मेक्सिको ने बनाई नॉकआउट में जगह घरेलू मैदान पर खेल रही मेक्सिको की टीम ने दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत हासिल की। मैच का एकमात्र गोल 50वें मिनट में लुइस रोमो ने किया। मैच के अंतिम क्षणों में गोलकीपर राउल रंगेल ने शानदार डबल सेव कर दक्षिण कोरिया की बराबरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस जीत के साथ मेक्सिको ग्रुप-ए में 6 अंकों के साथ शीर्ष पर पहुंच गया और राउंड ऑफ 32 में प्रवेश करने वाली पहली टीम बन गया। कनाडा ने कतर को 6-0 से रौंदा सह-मेजबान कनाडा ने अपने घरेलू दर्शकों के सामने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। वैंकूवर में खेले गए मुकाबले में कनाडा ने कतर को 6-0 से हराया। इस मैच के स्टार रहे जोनाथन डेविड, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाई। इसके अलावा साइल लारिन और नाथन सलीबा ने भी गोल दागे, जबकि एक गोल कतर के खिलाड़ी के आत्मघाती गोल की वजह से मिला। यह फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में कनाडा की पहली जीत रही। स्विट्जरलैंड की शानदार जीत ग्रुप-बी के मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से हराया। जोहान मंजाम्बी ने दो गोल दागकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। कप्तान ग्रेनिट झाका ने भी एक गोल किया। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने अगले दौर में पहुंचने की अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। साउथ अफ्रीका और चेक रिपब्लिक का मुकाबला ड्रॉ ग्रुप-ए के एक अन्य मुकाबले में साउथ अफ्रीका और चेक रिपब्लिक के बीच मैच 1-1 से बराबरी पर समाप्त हुआ। चेक रिपब्लिक के लिए मिखाल कैडिलैक ने छठे मिनट में गोल किया। साउथ अफ्रीका की ओर से टेबोहो मोकोएना ने 83वें मिनट में पेनल्टी के जरिए बराबरी दिलाई। दोनों टीमों के अब दो मैचों में एक-एक अंक हो गए हैं। 19 जून 2026 के मैच परिणाम मुकाबला परिणाम मेक्सिको vs दक्षिण कोरिया मेक्सिको 1-0 से विजयी कनाडा vs कतर कनाडा 6-0 से विजयी स्विट्जरलैंड vs बोस्निया-हर्जेगोविना स्विट्जरलैंड 4-1 से विजयी साउथ अफ्रीका vs चेक रिपब्लिक मैच 1-1 से ड्रॉ ग्रुप-ए की स्थिति मेक्सिको – 6 अंक दक्षिण कोरिया – 3 अंक चेक रिपब्लिक – 1 अंक साउथ अफ्रीका – 1 अंक मेक्सिको अब आधिकारिक रूप से राउंड ऑफ 32 में पहुंच चुका है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत की है। पहले मुकाबले में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से हराकर टूर्नामेंट में अपनी ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया। इस जीत के सबसे बड़े नायक कप्तान लियोनेल मेसी रहे, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाकर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। मेसी के शानदार प्रदर्शन ने न सिर्फ अर्जेंटीना को जीत दिलाई, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स भी उनके नाम दर्ज हो गए। 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच में रचा इतिहास यह मुकाबला लियोनेल मेसी के करियर का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। खास बात यह रही कि उन्होंने इस ऐतिहासिक मैच को अपने पहले विश्व कप हैट्रिक के साथ और भी यादगार बना दिया। 38 साल की उम्र के बाद भी मेसी की फिटनेस, ड्रिब्लिंग और गोल करने की क्षमता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं। इसके साथ ही मेसी उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए जिन्होंने छह अलग-अलग फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। वर्ल्ड कप में गोलों का नया कीर्तिमान इस मुकाबले से पहले फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे के नाम विश्व कप में 14 गोल दर्ज थे। वहीं मेसी के खाते में 13 गोल थे। अल्जीरिया के खिलाफ तीन गोल दागने के बाद मेसी के कुल विश्व कप गोलों की संख्या 16 पहुंच गई। इसके साथ ही उन्होंने जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोस के 16 गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली और विश्व कप इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। 17वें मिनट में खोला खाता अर्जेंटीना ने शुरुआत से ही मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा। खेल के 17वें मिनट में रोड्रिगो डी पॉल के शानदार पास पर मेसी ने बेहतरीन फिनिशिंग करते हुए पहला गोल दागा और टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। 60वें मिनट में किया दूसरा गोल दूसरे हाफ में भी मेसी का जादू जारी रहा। 60वें मिनट में निकोलस गोंजालेज के क्रॉस पर मैक एलिस्टर का शॉट गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन रिबाउंड पर मौजूद मेसी ने कोई गलती नहीं की और गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर अपना दूसरा गोल कर दिया। 76वें मिनट में पूरी की हैट्रिक खेल के 76वें मिनट में मेसी ने एक और शानदार मूव बनाया। उन्होंने बीच मैदान से गेंद को आगे बढ़ाया और निकोलस गोंजालेज के साथ बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाया, जो सीधे नेट के निचले कोने में जाकर लगा। इस गोल के साथ मेसी ने अपनी हैट्रिक पूरी की और अर्जेंटीना की 3-0 की शानदार जीत पर मुहर लगा दी। टूर्नामेंट में अर्जेंटीना ने दिए मजबूत इरादों के संकेत डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना की इस शानदार जीत ने बाकी टीमों को साफ संदेश दे दिया है कि टीम इस बार भी खिताब बचाने के इरादे से मैदान में उतरी है। वहीं लियोनेल मेसी का शानदार फॉर्म अर्जेंटीना के प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी है।
नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 के शुरू होने में अब 24 घंटे से भी कम समय बचा है। इस बार 48 टीमें टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं। खास बात यह है कि विश्व कप में कुल सात भाइयों की जोड़ियां मैदान पर नजर आएंगी। इनमें से तीन जोड़ियां एक ही देश के लिए खेलेंगी, जबकि चार ऐसी जोड़ियां हैं जिनके सदस्य अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे। एक ही देश के लिए खेलने वाले भाई फ्रांस के लिए थियो हर्नांडेज और लुकास हर्नांडेज कुराकाओ के लिए जुनिन्हो बाकुना और लिएंड्रो बाकुना काबो वर्डे के लिए डेरॉय डुआर्टे और लारोस डुआर्टे वहीं नीदरलैंड्स के जुड़वां भाई ज्यूरिएन टिम्बर और क्विंटन टिम्बर भी साथ खेल सकते थे, लेकिन चोट के कारण ज्यूरिएन टिम्बर टूर्नामेंट से बाहर हो गए। अलग-अलग देशों के लिए खेलने वाली 4 भाइयों की जोड़ियां ब्रायन ब्रॉबी और डेरिक लुकासेन 24 वर्षीय स्ट्राइकर ब्रायन ब्रॉबी नीदरलैंड्स का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि उनके बड़े भाई और 30 वर्षीय डिफेंडर डेरिक लुकासेन घाना की टीम का हिस्सा हैं। दोनों के माता-पिता मूल रूप से घाना से हैं। जॉन साउटार और हैरी साउटार दोनों भाइयों का जन्म स्कॉटलैंड में हुआ, लेकिन उनकी मां ऑस्ट्रेलिया से थीं। जॉन साउटार स्कॉटलैंड के लिए खेलेंगे, जबकि हैरी साउटार ऑस्ट्रेलिया की टीम का हिस्सा हैं। निको विलियम्स और इनाकी विलियम्स स्पेन के स्टार विंगर निको विलियम्स विश्व कप में स्पेन का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके बड़े भाई इनाकी विलियम्स पहले स्पेन के लिए खेल चुके हैं, लेकिन 2022 से वह घाना की राष्ट्रीय टीम के लिए खेल रहे हैं। दोनों भाई क्लब स्तर पर एथलेटिक बिलबाओ के लिए खेलते हैं। डेसिरे डौए और गुएला डौए फ्रांस के युवा स्टार डेसिरे डौए को विश्व कप टीम में जगह मिली है। उनके बड़े भाई गुएला डौए आइवरी कोस्ट का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके पिता आइवरी कोस्ट से और मां फ्रांस से हैं, जिसके कारण दोनों भाइयों के पास दोनों देशों की नागरिकता है। फीफा विश्व कप 2026 में इन भाइयों की मौजूदगी टूर्नामेंट को और भी खास बनाने वाली है। फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि पारिवारिक रिश्तों के बावजूद ये खिलाड़ी अलग-अलग देशों के लिए किस तरह प्रदर्शन करते हैं।
अमेरिका में फीफा विश्व कप 2026 के आगाज से ठीक पहले एक बड़ी सुरक्षा चिंता सामने आई है। मिसूरी राज्य के कंसास सिटी में हुई अंधाधुंध गोलीबारी की घटना ने खेल जगत और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना में कम से कम 9 लोग घायल हुए हैं। खास बात यह है कि गोलीबारी उस स्थान से महज चार मील की दूरी पर हुई, जहां इंग्लैंड की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम विश्व कप के दौरान अपना प्रशिक्षण शिविर लगाने वाली है। 9 लोग घायल, हमलावर अब भी फरार स्थानीय पुलिस के अनुसार, शनिवार को हुई इस गोलीबारी में घायल हुए सभी लोगों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हालांकि कुछ घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गया और अब तक किसी भी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां आरोपी की तलाश में जुटी हुई हैं। इंग्लैंड टीम के बेस कैंप के बेहद करीब हुई वारदात यह घटना कंसास सिटी के उस इलाके में हुई, जो इंग्लैंड टीम के प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्र से केवल चार मील दूर है। इंग्लैंड टीम विश्व कप के दौरान यहीं अभ्यास करने वाली है। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय टीम वहां मौजूद नहीं थी। इंग्लैंड की टीम फिलहाल फ्लोरिडा के ओरलैंडो में है, जहां वह कोस्टा रिका के खिलाफ अभ्यास मैच की तैयारी कर रही है। इस घटना के बाद खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशंसकों की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिका में गन वायलेंस बना बड़ी चुनौती अमेरिका में बंदूक हिंसा लंबे समय से गंभीर समस्या बनी हुई है। हाल के वर्षों में सार्वजनिक स्थानों पर गोलीबारी की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व कप जैसे वैश्विक आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत होगी, क्योंकि दुनिया भर से लाखों दर्शक और हजारों खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने अमेरिका पहुंचेंगे। फीफा वर्ल्ड कप से पहले बढ़ी चिंता विश्व कप शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में आयोजन स्थलों और टीम बेस कैंपों के आसपास हुई इस तरह की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। हालांकि आयोजकों की ओर से अभी तक किसी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फुटबॉल प्रशंसकों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
FIFA World Cup 2026 का रोमांच 11 जून से शुरू होने जा रहा है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट कई मायनों में ऐतिहासिक होगा। पहली बार 48 टीमें विश्व कप में हिस्सा लेंगी और कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच मेक्सिको सिटी के प्रतिष्ठित एस्टाडियो एज़्टेका स्टेडियम में खेला जाएगा, जबकि फाइनल 19 जुलाई को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में होगा। नेमार पर टिकी रहेंगी दुनिया की निगाहें ब्राजील के स्टार फुटबॉलर नेमार के लिए यह विश्व कप बेहद अहम माना जा रहा है। चोटों से उबरने के बाद वह एक बार फिर अपनी टीम को विश्व चैंपियन बनाने के मिशन पर उतरेंगे। माना जा रहा है कि 2026 का टूर्नामेंट उनके करियर का आखिरी विश्व कप हो सकता है। नेमार अब तक विश्व कप ट्रॉफी जीतने का सपना पूरा नहीं कर पाए हैं। ऐसे में ब्राजील के प्रशंसकों को उम्मीद होगी कि अनुभवी फॉरवर्ड इस बार टीम को छठी बार विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। 13 जून को ब्राजील बनाम मोरक्को ग्रुप-C का सबसे चर्चित मुकाबला 13 जून को ब्राजील और मोरक्को के बीच न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमों के पास विश्व स्तरीय खिलाड़ी मौजूद हैं, इसलिए यह मुकाबला ग्रुप स्टेज के सबसे रोमांचक मैचों में से एक माना जा रहा है। ब्राजील खिताब का प्रबल दावेदार नेमार, विनीसियस जूनियर, रफीन्हा, ब्रूनो गिमारेस और कासेमिरो जैसे सितारों से सजी ब्राजील की टीम इस ग्रुप की सबसे मजबूत टीम मानी जा रही है। वहीं, अशरफ हकीमी और ब्राहिम डियाज़ जैसे खिलाड़ियों के दम पर मोरक्को भी किसी बड़े उलटफेर की क्षमता रखता है। दूसरी ओर स्कॉटलैंड की टीम को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता, जबकि हैती की टीम पहली बार बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश करेगी। ग्रुप-C की टीमें ब्राजील (Brazil) मोरक्को (Morocco) हैती (Haiti) स्कॉटलैंड (Scotland) आकर्षण का केंद्र होंगे ये स्टार खिलाड़ी नेमार (ब्राजील) विनीसियस जूनियर (ब्राजील) रफीन्हा (ब्राजील) अशरफ हकीमी (मोरक्को) ब्राहिम डियाज़ (मोरक्को) एंडी रॉबर्टसन (स्कॉटलैंड) स्कॉट मैकटोमिने (स्कॉटलैंड) ग्रुप-C में ब्राजील को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है, लेकिन मोरक्को और स्कॉटलैंड जैसी टीमें इस समूह को बेहद प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं।
फुटबॉल जगत की नजरें एक बार फिर अर्जेंटीना के महान कप्तान Lionel Messi पर टिकी हैं। मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अपने खिताब की रक्षा करने उतरेगा और इस दौरान मेसी के पास कई ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा जो उन्हें फुटबॉल इतिहास में और भी ऊंचा स्थान दिला सकते हैं। 2022 में अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने वाले मेसी इस बार सिर्फ ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि कई बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं। 1. छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में होंगे शामिल मेसी 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 के बाद 2026 में अपना छठा विश्व कप खेलेंगे। इसके साथ ही वह Cristiano Ronaldo और Guillermo Ochoa के साथ छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो सकते हैं। यह उपलब्धि विश्व फुटबॉल में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। 2. मिरोस्लाव क्लोजे का गोल रिकॉर्ड तोड़ने का मौका मेसी अब तक विश्व कप में 26 मैचों में 13 गोल कर चुके हैं। विश्व कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड Miroslav Klose के नाम है, जिन्होंने 16 गोल किए थे। अगर मेसी इस टूर्नामेंट में चार या उससे अधिक गोल करते हैं तो वह क्लोजे को पीछे छोड़कर विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर बन सकते हैं। 3. पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप में गोल करने का रिकॉर्ड मेसी अब तक चार अलग-अलग विश्व कप संस्करणों में गोल कर चुके हैं। यदि वह वर्ल्ड कप 2026 में एक भी गोल करने में सफल रहते हैं तो वह पांच अलग-अलग फीफा विश्व कप में गोल करने वाले दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह उपलब्धि केवल क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम दर्ज है। इसके साथ ही मेसी दक्षिण अमेरिका के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे जो यह कारनामा करेंगे। 4. असिस्ट के मामले में माराडोना को छोड़ सकते हैं पीछे मेसी ने विश्व कप में अब तक 8 असिस्ट किए हैं। इस मामले में वह अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी Diego Maradona की बराबरी पर हैं। एक और असिस्ट करते ही मेसी अर्जेंटीना के लिए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। दो असिस्ट करने पर वह Fritz Walter के 9 असिस्ट के विश्व रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकते हैं। 5. कप्तान के रूप में बना सकते हैं सबसे बड़ा रिकॉर्ड मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना 2014 और 2022 के विश्व कप फाइनल में पहुंच चुकी है। अगर अर्जेंटीना 2026 में भी फाइनल में पहुंचती है तो मेसी विश्व फुटबॉल इतिहास के पहले कप्तान बन जाएंगे जो अपनी टीम को तीन बार विश्व कप फाइनल तक ले गए हों। वहीं यदि अर्जेंटीना खिताब जीतती है तो मेसी बतौर कप्तान दो फीफा विश्व कप जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन सकते हैं। क्या फिर इतिहास रच पाएंगे मेसी? 39 वर्ष की उम्र के करीब पहुंच चुके मेसी के लिए यह संभवतः आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों की नजरें सिर्फ अर्जेंटीना के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि उन रिकॉर्ड्स पर भी रहेंगी जिन्हें मेसी इस टूर्नामेंट में अपने नाम कर सकते हैं। अगर अर्जेंटीना खिताब बचाने में सफल रहती है और मेसी अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी हासिल कर लेते हैं, तो उनका नाम फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में और मजबूती से दर्ज हो जाएगा।
दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 की शुरुआत 11 जून 2026 से होने जा रही है। इस बार टूर्नामेंट सिर्फ मुकाबलों के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए भी चर्चा में है। फुटबॉल के तीन दिग्गज खिलाड़ी — Cristiano Ronaldo, Lionel Messi और Guillermo Ochoa — इतिहास में पहली बार छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं। इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन United States, Canada और Mexico में संयुक्त रूप से किया जाएगा। साथ ही पहली बार 48 टीमें इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा फीफा वर्ल्ड कप बनने जा रहा है। अब तक कोई खिलाड़ी नहीं खेल पाया 6 वर्ल्ड कप फुटबॉल इतिहास में अब तक किसी भी खिलाड़ी ने छह फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लिया है। सबसे ज्यादा पांच वर्ल्ड कप खेलने का रिकॉर्ड फिलहाल छह खिलाड़ियों के नाम दर्ज है। इस सूची में: Lionel Messi Cristiano Ronaldo Lothar Matthäus Antonio Carbajal Andrés Guardado Rafael Márquez शामिल हैं। अब 2026 में मेसी, रोनाल्डो और ओचोआ के पास इस रिकॉर्ड को नई ऊंचाई तक ले जाने का मौका होगा। 2006 से शुरू हुआ मेसी और रोनाल्डो का सफर Cristiano Ronaldo ने अपना पहला वर्ल्ड कप 2006 में जर्मनी में खेला था। इसके बाद वह 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में भी पुर्तगाल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। रोनाल्डो अब तक वर्ल्ड कप में 22 मुकाबले खेल चुके हैं, जिनमें उन्होंने 8 गोल और 2 असिस्ट दर्ज किए हैं। हालांकि वह अभी तक पुर्तगाल को विश्व कप ट्रॉफी नहीं दिला सके हैं। वहीं Lionel Messi ने भी 2006 में वर्ल्ड कप डेब्यू किया था। उन्होंने 2010, 2014, 2018 और 2022 में अर्जेंटीना के लिए खेला। मेसी ने 2022 में अर्जेंटीना को विश्व कप जिताकर अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा किया। उन्होंने अब तक वर्ल्ड कप में 26 मैचों में 13 गोल और 8 असिस्ट दर्ज किए हैं। ओचोआ भी रच सकते हैं इतिहास Guillermo Ochoa भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब हैं। मैक्सिको के अनुभवी गोलकीपर ने 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। 2026 में वह छठा वर्ल्ड कप खेलकर फुटबॉल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। ओचोआ अब तक 152 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं और उन्हें मैक्सिको के सबसे भरोसेमंद गोलकीपर्स में गिना जाता है। क्यों खास होगा FIFA World Cup 2026? FIFA World Cup 2026 कई वजहों से ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार: 48 टीमें हिस्सा लेंगी तीन देशों में टूर्नामेंट आयोजित होगा और संभवतः पहली बार खिलाड़ी छह वर्ल्ड कप खेलते नजर आएंगे ऐसे में दुनियाभर के फुटबॉल फैंस की नजरें इन दिग्गज खिलाड़ियों पर टिकी रहेंगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। 2026 FIFA World Cup शुरू होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है, लेकिन इस बार फुटबॉल प्रशंसकों को कई बड़े खिलाड़ियों की गैर मौजूदगी खलेगी। कुछ स्टार खिलाड़ी अपनी टीमों के क्वालिफाई नहीं कर पाने के कारण बाहर हो गए हैं, जबकि कुछ को चोट, खराब फॉर्म या चयन न होने की वजह से जगह नहीं मिली। इटली लगातार तीसरी बार विश्व कप से बाहर चार बार की विश्व चैंपियन Italy लगातार तीसरी बार फीफा विश्व कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई है। इसके चलते स्टार गोलकीपर Gianluigi Donnarumma और मिडफील्डर Sandro Tonali इस टूर्नामेंट में नजर नहीं आएंगे। यह इटली और उसके प्रशंसकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कई दिग्गज खिलाड़ी भी नहीं होंगे शामिल पोलैंड के स्टार स्ट्राइकर Robert Lewandowski, ब्राजील के Rodrygo और Éder Militão, नाइजीरिया के Victor Osimhen और Ademola Lookman जैसे खिलाड़ी भी विश्व कप का हिस्सा नहीं होंगे। इसके अलावा जर्मनी के Serge Gnabry, नीदरलैंड के Xavi Simons और फ्रांस के Hugo Ekitike भी इस बार टूर्नामेंट से बाहर रहेंगे। तीन देशों में होगा टूर्नामेंट फीफा विश्व कप 2026 का आयोजन 11 जून से 19 जुलाई तक United States, Canada और Mexico की संयुक्त मेजबानी में होगा। यह पहला विश्व कप होगा जिसमें 48 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे। फ्रांस ने घोषित की टीम फ्रांस ने विश्व कप के लिए अपनी 26 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम की कप्तानी स्टार स्ट्राइकर Kylian Mbappé करेंगे। फ्रांस को इस बार खिताब का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
FC Bayern Munich को यूईएफए चैंपियंस लीग के बीच बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार खिलाड़ी Alphonso Davies हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण लंबे समय तक मैदान से दूर रहेंगे। क्लब ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर उनकी चोट की पुष्टि की। PSG के खिलाफ मैच में लगी चोट यह चोट Paris Saint-Germain F.C. के खिलाफ खेले गए यूईएफए चैंपियंस लीग सेमीफाइनल के दूसरे लेग के दौरान लगी। मुकाबला Allianz Arena में खेला गया था, जहां डेविस दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे थे। मैच के दौरान उन्हें बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में चोट महसूस हुई, जिसके बाद मेडिकल जांच कराई गई। बायर्न ने बयान में क्या कहा? FC Bayern Munich ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मेडिकल यूनिट की जांच में पुष्टि हुई है कि Alphonso Davies के बाएं हैमस्ट्रिंग मसल में चोट है। इसी कारण वह कई हफ्तों तक टीम से बाहर रहेंगे। हालांकि क्लब ने उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। कई अहम मुकाबलों से बाहर हो सकते हैं डेविस इस चोट के चलते डेविस अब बुंडेसलीगा के आगामी मुकाबलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। माना जा रहा है कि वह VfL Wolfsburg और 1. FC Köln के खिलाफ मैच मिस कर सकते हैं। इसके अलावा 23 मई को VfB Stuttgart के खिलाफ होने वाले डीएफबी फाइनल में भी उनका खेलना मुश्किल माना जा रहा है। बायर्न और कनाडा दोनों के लिए बढ़ी चिंता Alphonso Davies की चोट ने क्लब के साथ-साथ Canada men's national soccer team की चिंता भी बढ़ा दी है। डेविस अपनी रफ्तार, डिफेंस और अटैकिंग खेल के लिए जाने जाते हैं और टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले उनकी फिटनेस पर अब सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल क्लब की मेडिकल टीम उनकी रिकवरी पर लगातार नजर बनाए हुए है।
ईरान को हटाने की मांग, इटली को शामिल करने का सुझाव अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के एक दूत ने आगामी FIFA World Cup 2026 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के विशेष दूत पाओलो ज़ाम्पोली ने सुझाव दिया है कि क्वालिफाई कर चुकी Iran की जगह Italy को टूर्नामेंट में शामिल किया जाए। ज़ाम्पोली ने कहा कि इटली जैसी चार बार की चैंपियन टीम का वर्ल्ड कप में होना खेल के लिए बेहतर होगा और यह उनके लिए “सपने जैसा” होगा। इटली लगातार तीसरी बार क्वालिफाई करने में विफल Italy इस बार भी वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सका। प्लेऑफ फाइनल में उसे Bosnia and Herzegovina के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा। अगर यह बदलाव होता है, तो इटली को टूर्नामेंट में एंट्री मिल सकती है, हालांकि यह पूरी तरह FIFA के नियमों और निर्णय पर निर्भर करेगा। FIFA के नियम क्या कहते हैं? FIFA के नियमों के अनुसार, यदि कोई टीम टूर्नामेंट से हटती है तो उसकी जगह आमतौर पर उसी कॉन्फेडरेशन की रनर-अप या अगली योग्य टीम को मौका दिया जाता है। इस आधार पर United Arab Emirates को प्राथमिकता मिल सकती है, जिसने एशियाई प्लेऑफ तक पहुंच बनाई थी। हालांकि, अंतिम फैसला FIFA अपने विवेक से भी ले सकता है। ईरान का रुख – खेलने के लिए तैयार Iran ने साफ कर दिया है कि वह वर्ल्ड कप में खेलने के लिए पूरी तरह तैयार है। पहले ईरान ने मैचों को अमेरिका से हटाकर मेक्सिको में कराने की मांग की थी, लेकिन अब टीम टूर्नामेंट में भाग लेने की योजना बना रही है। राजनीतिक तनाव का असर खेल पर? रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब Donald Trump और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच रिश्तों में खटास की खबरें आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा फैसला लिया जाता है, तो इससे खेल और राजनीति के बीच की रेखा और धुंधली हो सकती है।
UEFA चैंपियंस लीग 2026 के क्वार्टरफाइनल में FC Barcelona को एक बार फिर यूरोप में निराशा हाथ लगी। शानदार शुरुआत के बावजूद टीम सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूक गई, जबकि Atletico Madrid ने कुल 3-2 के एग्रीगेट स्कोर से मुकाबला जीतकर अंतिम चार में प्रवेश कर लिया। शानदार शुरुआत, लेकिन अंत में निराशा मैड्रिड के वांडा मेट्रोपोलिटानो स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में बार्सिलोना ने आक्रामक अंदाज में शुरुआत की। लामिन यामल ने चौथे मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिलाई इस गोल के साथ वह चैंपियंस लीग में 11 गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए, उन्होंने किलियन एम्बाप्पे का रिकॉर्ड तोड़ा इसके बाद फेरान टोरेस ने 24वें मिनट में दूसरा गोल कर मुकाबले में बराबरी दिला दी उस समय लग रहा था कि बार्सिलोना मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बना चुकी है। एटलेटिको की वापसी हालांकि, Atletico Madrid ने धैर्य बनाए रखा और हाफ टाइम से पहले वापसी कर ली। एडेमोला लुकमैन ने गोल कर एग्रीगेट में बढ़त दिलाई दूसरे हाफ में बार्सिलोना ने बराबरी की कोशिश की, लेकिन उनका एक गोल ऑफसाइड करार दिया गया। रेड कार्ड ने बढ़ाई मुश्किलें मैच के अंतिम चरण में एरिक गार्सिया को रेड कार्ड मिला जिससे बार्सिलोना की वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। इंजरी टाइम में रोनाल्ड अराउजो के पास मौका था, लेकिन वह गोल नहीं कर सके। ग्रिज़मैन का बयान और टीम का आत्मविश्वास एटलेटिको की जीत में अनुभवी खिलाड़ी एंटोनी ग्रिज़मैन की भूमिका अहम रही। मैच के बाद उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य अब फाइनल तक पहुंचना है और फैंस को खुशी देना है। कोच डिएगो सिमियोने के नेतृत्व में एटलेटिको ने 2016-17 के बाद पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनाई है। बार्सिलोना के लिए चिंता की बात बार्सिलोना के लिए यह हार सिर्फ एक मैच की नहीं, बल्कि लगातार यूरोपीय असफलताओं की कड़ी है। पिछले सीजन से अब तक टीम चैंपियंस लीग में 44 गोल खा चुकी है, जो किसी भी क्लब से सबसे ज्यादा है यह आंकड़ा टीम की डिफेंस कमजोरियों को साफ तौर पर उजागर करता है। यह मुकाबला दिखाता है कि सिर्फ अच्छी शुरुआत काफी नहीं होती, बल्कि निर्णायक मौकों का फायदा उठाना जरूरी होता है। एटलेटिको ने मौके भुनाए और जीत हासिल की, जबकि बार्सिलोना एक बार फिर बड़े मंच पर चूक गई।
ब्राज़ील के स्टार फुटबॉलर नेमार के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। आगामी FIFA World Cup 2026 से पहले टीम के मुख्य कोच कार्लो एंचेलोटी ने साफ कर दिया है कि अनुभवी फॉरवर्ड के लिए टीम के दरवाजे अभी भी खुले हैं। चोट के कारण लंबे समय से मैदान से दूर चल रहे नेमार के लिए यह बयान किसी “करियर बूस्ट” से कम नहीं माना जा रहा। एंचेलोटी का भरोसा–“अभी भी समय है” एंचेलोटी ने कहा कि नेमार के पास पूरी फिटनेस हासिल करने के लिए अभी समय है और यदि वह खुद को शारीरिक रूप से साबित करते हैं, तो टीम में उनकी वापसी संभव है। कोच ने स्पष्ट किया कि वर्ल्ड कप टीम में वही खिलाड़ी चुने जाएंगे जो पूरी तरह फिट होंगे, लेकिन नेमार जैसे अनुभवी खिलाड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चोट से वापसी की राह पर नेमार 34 वर्षीय नेमार अक्टूबर 2023 से चोट के कारण टीम से बाहर चल रहे थे। उन्होंने दिसंबर में घुटने की सर्जरी करवाई थी और हाल ही में एक और प्रक्रिया से गुजरे हैं। हालांकि, अब उनकी फिटनेस में सुधार देखा जा रहा है। उन्होंने हाल ही में क्लब स्तर पर 90 मिनट का पूरा मैच खेला, जो उनकी वापसी की दिशा में बड़ा संकेत है। फैंस का अटूट समर्थन हालांकि नेमार हाल के स्क्वाड में शामिल नहीं किए गए थे, लेकिन फैंस का समर्थन उनके साथ बना हुआ है। फ्रांस के खिलाफ एक वार्म-अप मैच के दौरान भी दर्शकों ने उनका नाम लेकर समर्थन जताया। एंचेलोटी ने भी माना कि नेमार ब्राज़ीलियाई फुटबॉल के इतिहास में एक खास स्थान रखते हैं और उनकी प्रतिभा टीम के लिए अब भी अहम हो सकती है। चौथे वर्ल्ड कप की तैयारी नेमार अपने करियर का चौथा वर्ल्ड कप खेलने की तैयारी में हैं। 79 अंतरराष्ट्रीय गोल के साथ वह ब्राज़ील के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर हैं। अब उनकी नजर सिर्फ एक चीज पर है–फिटनेस हासिल करना और टीम में अपनी जगह पक्की करना। फिटनेस ही बनेगी चयन की कुंजी नेमार के लिए रास्ता खुला जरूर है, लेकिन चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। उन्हें अगले कुछ हफ्तों में अपनी फिटनेस और प्रदर्शन से खुद को साबित करना होगा। अगर वह ऐसा करने में सफल रहते हैं, तो 2026 वर्ल्ड कप में एक बार फिर नेमार का जादू देखने को मिल सकता है।
चार बार की विश्व चैंपियन Italy national football team एक बार फिर बड़े मंच से बाहर हो गई है। 2026 के विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने में असफल रहने के बाद टीम के मुख्य कोच Gennaro Gattuso ने पद छोड़ दिया है, जिससे इटली फुटबॉल में गहराते संकट की तस्वीर और साफ हो गई है। इटली फुटबॉल महासंघ Italian Football Federation ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि गट्टूसो ने “आपसी सहमति” से पद छोड़ा है। महज नौ महीने के कार्यकाल के बाद उनका जाना टीम की लगातार खराब होती स्थिति को दर्शाता है। लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप से बाहर इटली की उम्मीदों को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब क्वालिफाइंग प्लेऑफ में Bosnia and Herzegovina national football team के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार मिली। यह हार सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि एक ट्रेंड का हिस्सा है- 2018: Sweden national football team से हार 2022: North Macedonia national football team से हार 2026: बोस्निया से हार नतीजा: लगातार तीन वर्ल्ड कप से इटली बाहर। गट्टूसो का भावुक बयान Gennaro Gattuso ने कहा, “दिल में दर्द के साथ मैं यह स्वीकार करता हूं कि हम अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए। राष्ट्रीय टीम के साथ मेरा सफर यहीं समाप्त होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि “अज्ज़ुरी” (इटली टीम) की जर्सी फुटबॉल में सबसे कीमती है और अब नए कोच को मौका देना जरूरी है। फेडरेशन में भी बड़ा बदलाव गट्टूसो के इस्तीफे से पहले ही Gabriele Gravina (FIGC अध्यक्ष) और दिग्गज गोलकीपर Gianluigi Buffon ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि इटली फुटबॉल प्रशासन और प्रदर्शन-दोनों स्तर पर बड़े बदलाव की जरूरत है। उम्मीदों से निराशा तक गट्टूसो ने जून 2025 में Luciano Spalletti की जगह ली थी। शुरुआती दौर में टीम ने छह मैचों की जीत की लय भी पकड़ी, लेकिन बाद में फॉर्म गिरता गया और टीम फिर प्लेऑफ में फंस गई। यूरो 2024 में भी इटली का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, जहां टीम राउंड ऑफ 16 में बाहर हो गई थी। अब कौन होगा अगला कोच? गट्टूसो के बाद कई बड़े नाम रेस में हैं: Roberto Mancini Simone Inzaghi Antonio Conte Massimiliano Allegri हालांकि, नए FIGC अध्यक्ष का चुनाव 22 जून को होना है, ऐसे में कोच की नियुक्ति में देरी हो सकती है। निष्कर्ष इटली फुटबॉल के लिए यह दौर आत्ममंथन का है। लगातार तीन वर्ल्ड कप से बाहर होना सिर्फ एक खेल परिणाम नहीं, बल्कि सिस्टम, रणनीति और टैलेंट डेवलपमेंट पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि “अज्ज़ुरी” इस संकट से कैसे उबरती है।
क्लब Liverpool FC के स्टार फॉरवर्ड Mohamed Salah ने 2025-26 सीजन के अंत में क्लब छोड़ने का ऐलान कर फुटबॉल जगत को चौंका दिया है। लगभग नौ साल तक एनफील्ड में शानदार करियर बिताने के बाद सलाह के इस फैसले ने टीम के साथियों और फैंस को भावुक कर दिया है। सलाह का भावुक विदाई संदेश सलाह ने अपने बयान में क्लब, शहर और फैंस के प्रति गहरी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि लिवरपूल उनके लिए सिर्फ एक क्लब नहीं, बल्कि एक जुनून, एक इतिहास और एक आत्मा है। उन्होंने अपने साथियों, कोचिंग स्टाफ और फैंस का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने यहां जीत के पल भी जिए और मुश्किल समय में साथ मिलकर संघर्ष भी किया। टीममेट्स की प्रतिक्रियाएं लिवरपूल के कप्तान Virgil van Dijk ने सलाह को “Legend” बताते हुए उनके योगदान को सलाम किया। वहीं, स्टार राइट-बैक Trent Alexander-Arnold ने संक्षिप्त लेकिन भावुक अंदाज में “Thanks Abdul” लिखकर अपनी भावनाएं जाहिर कीं। अन्य खिलाड़ियों और फुटबॉल जगत के कई सितारों ने भी सोशल मीडिया पर सलाह के योगदान और उनके प्रभाव को याद किया। क्लब का आधिकारिक बयान लिवरपूल ने अपने आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि मोहम्मद सलाह 2025-26 सीजन के अंत में क्लब छोड़ देंगे। क्लब ने इसे “एनफील्ड में नौ साल के शानदार अध्याय का अंत” बताया। क्लब ने यह भी कहा कि सलाह ने पारदर्शिता और फैंस के सम्मान में पहले ही अपने भविष्य की जानकारी साझा करने का फैसला किया। अभी भी बाकी है एक मिशन हालांकि विदाई तय हो चुकी है, लेकिन सलाह फिलहाल पूरी तरह इस सीजन पर फोकस कर रहे हैं और टीम के लिए बेहतरीन प्रदर्शन के साथ अपने सफर का अंत करना चाहते हैं। उनकी विदाई के बाद लिवरपूल के लिए सबसे बड़ा सवाल होगा-इस दिग्गज खिलाड़ी की जगह कौन लेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।