नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत सरकार की ओर से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा शामिल होंगे। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा था। प्रधानमंत्री के पूर्व निर्धारित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के कारण भारत ने उनके स्थान पर वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। 4 जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम सूत्रों के मुताबिक, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से ईरान में शुरू होंगे। इन समारोहों के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचकर भारत की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करेगा। भारत-ईरान संबंधों का महत्वपूर्ण संदेश विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजना भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक एवं रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है। भारत ईरान को अपने विस्तारित पड़ोस (Extended Neighbourhood) की नीति के तहत एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है। कौन हैं भारतीय प्रतिनिधि? लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं और सैन्य एवं सामरिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वहीं, पबित्र मार्गेरिटा विदेश राज्य मंत्री के रूप में भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक पहल का प्रतिनिधित्व करते हैं। कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना ईरान में आयोजित होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारत के अलावा रूस, चीन, इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
नई दिल्ली: कराची में सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत ने सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिना किसी सबूत के भारत पर आरोप लगाने के बजाय पाकिस्तान को अपनी धरती पर सक्रिय आतंकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और भारत उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपने भीतर झांकना चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय कदम उठाने चाहिए। क्या है पूरा मामला? शनिवार रात पाकिस्तान के कराची स्थित सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने दावा किया कि उन्होंने छह आतंकवादियों को मार गिराया, जबकि एक हमलावर को घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। इस हमले में अर्द्धसैनिक बल के चार जवानों की भी मौत हुई। हमले के बाद पाकिस्तान सरकार के कुछ मंत्रियों ने बिना कोई सबूत सार्वजनिक किए भारत पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी हमले की निंदा करते हुए भारत की भूमिका का दावा किया। भारत ने दिया सख्त जवाब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर मौजूद आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करनी चाहिए, न कि हर आतंकी घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करनी चाहिए। आतंकवाद पर पाकिस्तान को दी नसीहत भारत ने अपने बयान में यह भी कहा कि पाकिस्तान को "सरकार प्रायोजित आतंकवाद" पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति छोड़नी चाहिए। विदेश मंत्रालय का कहना है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान को अपने यहां मौजूद आतंकवादी ढांचे को खत्म करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे। भारत ने दोहराया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर कायम है और किसी भी तरह के निराधार आरोपों को स्वीकार नहीं करता।
नई दिल्ली/विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए भारत और सेशेल्स के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के हितों, जलवायु न्याय, समुद्री सुरक्षा और सतत विकास के साझा विजन पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव उन देशों पर पड़ रहा है, जिनका वैश्विक उत्सर्जन में सबसे कम योगदान रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु कार्रवाई न्याय, जिम्मेदारी और समानता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। छोटे द्वीपीय देशों की आवाज बनेगा भारत पीएम मोदी ने कहा कि भारत विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों (SIDS) की चिंताओं को वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स समावेशी विकास तथा ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की साझा चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। 'हिंद महासागर हमें जोड़ता है' प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंद महासागर भारत और सेशेल्स के बीच दूरी नहीं, बल्कि मजबूत संबंधों का माध्यम है। उन्होंने सेशेल्स को केवल एक छोटा द्वीपीय राष्ट्र नहीं, बल्कि विशाल समुद्री क्षेत्र वाला महत्वपूर्ण समुद्री देश बताया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सहयोग पर जोर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ब्लू इकोनॉमी को भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, क्षमता निर्माण, समुद्री निगरानी और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का 'महासागर विजन' हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डिजिटल परिवर्तन में भारत करेगा सहयोग प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के डिजिटल मॉडल ने सुशासन, वित्तीय समावेशन और सरकारी सेवाओं की पहुंच को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि यदि सेशेल्स अपने डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाना चाहता है तो भारत अपने अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और डिजिटल समाधान साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 50 वर्षों की दोस्ती का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि वहां मौजूद था और आज स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस तरकश और आईएनएस इक्षक भी सेशेल्स पहुंचे हैं। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया। 'भारत हमेशा रहेगा भरोसेमंद साझेदार' अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में सेशेल्स का विश्वसनीय मित्र और विकास साझेदार बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, सतत विकास और ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा के लिए भविष्य में भी साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
ढाका/नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद सामने आया है। बांग्लादेश सरकार ने अपने प्रधानमंत्री के रणनीति सलाहकार जाहिद उर रहमान को नई दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके जाने और उनसे घंटों पूछताछ किए जाने के बाद ढाका में भारतीय उच्चायोग के एक वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया है। इस घटनाक्रम ने दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार के रणनीति सलाहकार जाहिद उर रहमान एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही भारतीय अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और कई घंटों तक पूछताछ की। बाद में उन्हें आगे यात्रा करने की अनुमति दे दी गई। इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ढाका ने भारतीय राजनयिक को किया तलब जाहिद उर रहमान को एयरपोर्ट पर रोके जाने की घटना पर बांग्लादेश ने कड़ी नाराजगी जताई है। ढाका ने भारतीय उच्चायोग के एक वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि किसी वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की भावना के अनुरूप नहीं है। पहले से संवेदनशील दौर में हैं दोनों देशों के रिश्ते यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और बांग्लादेश के संबंध पहले से ही कई मुद्दों को लेकर संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। हाल के महीनों में राजनीतिक बदलावों के बाद दोनों देशों के बीच कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन कई विवाद अब भी बने हुए हैं। पहला बड़ा विवाद: शेख हसीना का भारत में रहना साल 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था। तब से वह भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश की नई सरकार लगातार भारत से शेख हसीना को सौंपने की मांग कर रही है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं। दूसरा बड़ा विवाद: सीमा और अवैध प्रवासियों का मुद्दा बांग्लादेश ने आरोप लगाया है कि भारतीय अधिकारी बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए और उचित दस्तावेजी कार्रवाई के बिना कथित अवैध प्रवासियों को सीमा पार बांग्लादेश की ओर भेजने (पुश-इन) की कोशिश कर रहे हैं। बांग्लादेशी सुरक्षा बलों का दावा है कि उन्होंने हाल के दिनों में ऐसी कई कोशिशों को विफल किया है। क्या पड़ सकता है असर? विशेषज्ञों का मानना है कि जाहिद उर रहमान प्रकरण दोनों देशों के बीच चल रही संवेदनशील वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय में जब सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर बातचीत जारी है, यह नया कूटनीतिक विवाद द्विपक्षीय संबंधों में असहजता बढ़ा सकता है। अब सभी की नजर भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया और इस मामले पर दोनों देशों के अगले कूटनीतिक कदमों पर टिकी हुई है।
लंदन, एजेंसियां। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूरोप को आईना दिखाया है। उन्होंने रूस या ईरान की जगह अमेरिका या वेनेजुएला से तेल खरीदने और नैतिकता के प्रश्न पर यूरोपिय देशों को दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि हम कीमत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदते हैं। चूंकि उस समय बाजार में ज्यादातर तेल रूस का ही उपलब्ध था, क्योंकि यूरोपिय देश मुख्य रूप से मिडिल-ईस्ट से तेल खरीद रहे थे, जोकि कभी हमारी पारंपरिक सप्लाई थी। हालात ने हमें एक खास दिशा में धकेल दिया था। किसी यूरोपिय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ उन्होंने कहा कि चूंकि आप नैतिक दुविधा की बात करते हैं, तो मैं कहूंगा कि किसी भी यूरोपिय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि काश मैं भारत के मामले में यूरोपिय हथियारों के बारे में ऐसा कह पाता। विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोपिय देश ऐसे हथियार बेचते हैं, जिनका इस्तेमाल भारत पर हमले के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह आज की बात नहीं है, बल्कि वर्षों से ऐसा होता आ रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हम भारतीयों ने कभी यूरोप को खतरे में डालने वाला कोई काम नहीं किया है। इसलिए मुझे लगता है कि यह वाजिब बात है। 2022 के बाद रूस से ज्यादा तेल खरीदा अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर विदेश मंत्री एस जयशसंकर ने कहा कि 2022 तक हमने रूस से बहुत ज्यादा तेल नहीं खरीदा था। हालात ने हमें उस बाजार में जाने को मजबूर किया और मुझे यह कहना होगा कि रूस लगातार सप्लाई करने वाला देश रहा है, क्योंकि वे कार्गो भी उपलब्ध कराते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि आप जाकर तेल खरीदते हैं, जो भी तेल सबसे सही कीमत पर आसानी से मिल रहा हो। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि लोग यह बात याद रखें। उन्होंने कहा कि उस समय अमेरिका ने खासतौर पर भारत से रूस का तेल खरीदने को कहा था, ताकि दुनिया के बाजारों में स्थिरता बनी रही। हमने अमेरिकी टैरिफ झेला यदि आप देखें तो पिछले साल रूस से तेल खरीदने पर हम पर टैरिफ लगाने के बाद, अमेरिका ने फिर से अपने प्रतिबंध हटा लिए। इसलिए ऐसा दिखावा नहीं करना चाहिए कि इसमें कोई बड़ा सिद्धांत शामिल है। कभी हां और कभी हां ठीक नहीं है विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि कभी हां और कभी हां ठीक नहीं है। जब चीजें आपके अनुकूल है तो करो और जब प्रतिकूल हो तो मत करो। हम सब समझदार लोग हैं और समझते हैं कि खेल क्या है। उन्होंने कहा कि उसे नैतिकता का मुद्दा बनाना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज हमारा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रूस है जो कुल सप्लाई का लगभग 40 फीसदी है। सबसे ज्यादा गैस की सप्लाई अमेरिका से होती है, जबकि इसी साल 28 फरवरी तक ऐसा नहीं था। तब गैस का मुख्य सप्लायर कतर था।
ढाका: भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शुक्रवार सुबह वह बेनापोल भूमि बंदरगाह के रास्ते बांग्लादेश पहुंचे, जहां भारतीय उप उच्चायुक्त पवन बधे ने उनका स्वागत किया। त्रिवेदी मौजूदा उच्चायुक्त प्रणय वर्मा का स्थान लेंगे और ऐसे समय में कार्यभार संभाल रहे हैं जब भारत और बांग्लादेश के संबंध कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक मुद्दों के दौर से गुजर रहे हैं। भारत सरकार ने 27 अप्रैल को दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में अगला उच्चायुक्त नियुक्त करने की घोषणा की थी। इसके बाद 5 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें औपचारिक रूप से प्रत्यय पत्र (Letters of Credence) सौंपे, जिससे उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हुई। द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर रहेगा जोर भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई मुद्दे लंबे समय से द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रम प्रमुख रहे हैं। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, नई नियुक्ति का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना तथा लंबित मुद्दों पर संवाद को आगे बढ़ाना होगा। राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का मिलेगा लाभ दिनेश त्रिवेदी भारतीय राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और पूर्व सांसद रह चुके हैं। राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ बांग्ला भाषा और क्षेत्रीय सामाजिक-सांस्कृतिक समझ को भी उनकी नियुक्ति में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव दोनों देशों के बीच जन-स्तर और संस्थागत स्तर पर संबंधों को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है। ढाका रवाना होने से पहले पहुंचे नेताजी भवन बांग्लादेश रवाना होने से पहले दिनेश त्रिवेदी ने कोलकाता स्थित नेताजी भवन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध भविष्य में सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों को अपने सार्वजनिक जीवन की प्रेरणा बताया। सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर भी रहेगा ध्यान नई जिम्मेदारी संभालने से पहले दिनेश त्रिवेदी ने भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी से भी मुलाकात की थी। इस दौरान भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग, सीमा सुरक्षा और सैन्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है और इसे भविष्य में और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। रणनीतिक महत्व की नियुक्ति विश्लेषकों के अनुसार, ढाका में दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति केवल एक नियमित राजनयिक बदलाव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत और बांग्लादेश दक्षिण एशिया में आर्थिक, सामरिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। ऐसे में आने वाले समय में व्यापार, ऊर्जा, संपर्क परियोजनाओं, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग को नई गति देने में दिनेश त्रिवेदी की भूमिका अहम मानी जा रही है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। संसद में अपने संबोधन के दौरान शाह ने कहा कि केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ स्थानों पर भारतीय भूमि का उपयोग या कब्जा किया है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा, जिसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को आधिकारिक सफाई जारी करनी पड़ी। पहली संसदीय स्पीच में उठाया सीमा विवाद का मुद्दा प्रधानमंत्री बनने के बाद संसद में अपने पहले संबोधन में बालेन शाह ने कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे विवादित क्षेत्रों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों को विशेषज्ञों और इतिहासकारों की मदद से बातचीत के जरिए निकालना चाहिए। विपक्ष ने मांगे सबूत प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नेपाल द्वारा भारतीय भूमि पर कब्जे का दावा किया जा रहा है, तो सरकार इसके प्रमाण पेश करे। कई नेताओं ने बयान वापस लेने की भी मांग की। सीमा विशेषज्ञों ने दावे पर जताई असहमति नेपाल-भारत सीमा मामलों के जानकारों ने कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर आधिकारिक अतिक्रमण का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। हालांकि सीमावर्ती इलाकों में दोनों देशों के नागरिकों द्वारा जमीन के उपयोग के कुछ मामले सामने आते रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने दी सफाई विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का आशय किसी सरकारी कब्जे से नहीं था। मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में दोनों देशों के नागरिकों द्वारा भूमि उपयोग की स्थिति का जिक्र किया था। लिपुलेख-कालापानी विवाद फिर चर्चा में यह बयान ऐसे समय आया है जब नेपाल हाल ही में लिपुलेख मार्ग से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भी आपत्ति जता चुका है। कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सीमा विवाद जारी है।
भारत सरकार ने देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के संकेत दिए हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि कानून के अनुसार सभी अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और राष्ट्रीयता की पुष्टि होने के बाद बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजा जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बताया कि भारत ने 2,680 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े मामलों की सूची ढाका को सौंपी है। इन मामलों में संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता की पुष्टि की जानी है। नागरिकता की पुष्टि के बाद होगी कार्रवाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, कई मामलों में सत्यापन प्रक्रिया पिछले पांच वर्षों से लंबित है। भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार जल्द इन मामलों पर जवाब देगी ताकि निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूद द्विपक्षीय समझौतों के तहत अवैध रूप से रह रहे लोगों को वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी। नस्लवाद पर भारत का सख्त रुख अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ कथित नस्लीय भेदभाव से जुड़े वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी प्रकार का नस्लवाद स्वीकार्य नहीं है। जायसवाल ने कहा कि भारत नस्लवाद के हर रूप की निंदा करता है और विदेशों में भारतीय नागरिकों के साथ होने वाले भेदभाव को गंभीरता से लेता है। उन्होंने कहा कि भारतीयों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा भारत की प्राथमिकता है। आसियान देशों के साथ व्यापार वार्ता जारी विदेश मंत्रालय ने बताया कि आसियान देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत जारी है। फिलहाल इस संबंध में कोई नई जानकारी साझा नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि क्षेत्रीय व्यापार सहयोग को मजबूत करने के लिए वार्ता लगातार जारी है। म्यांमार राष्ट्रपति की होगी पहली आधिकारिक भारत यात्रा विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि म्यांमार के राष्ट्रपति जल्द भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा होगी। भारत ने म्यांमार को अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीति का महत्वपूर्ण साझेदार बताया है। माना जा रहा है कि इस यात्रा से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे। फारस की खाड़ी में अब भी मौजूद हैं 11 भारतीय जहाज विदेश मंत्रालय के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में अभी भी 11 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। वहीं 14 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से वापस लौट चुके हैं। अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अनिश्चितता के कारण हाल के महीनों में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ था। भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। इजराइल के साथ संबंधों पर भी दिया बयान इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और इजराइल के संबंध मजबूत, मित्रवत और सौहार्दपूर्ण हैं। हाल ही में नेतन्याहू ने भारत को एक बड़ी वैश्विक शक्ति बताते हुए कहा था कि भारतीय जनता के बीच इजराइल के प्रति सकारात्मक भावना देखने को मिलती है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में लगातार मजबूत हो रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।