गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने तीन कृषक पाठशालाओं की शुरुआत की है। इन पाठशालाओं से जिले के 21 गांवों को कृषि विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण, नई तकनीकों की जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। कृषि विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भवनाथपुर प्रखंड स्थित समेकित बिरसा ग्राम विकास योजना सह कृषि पाठशाला की गतिविधियों की जानकारी ली और यहां हो रहे कार्यों की सराहना की। 84 टन तरबूज उत्पादन ने बनाई नई पहचान कृषि पाठशाला के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. प्रदीप कुमार सैनी ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस वर्ष यहां आधुनिक तकनीक से 84 टन तरबूज का उत्पादन किया गया, जिसे कोलकाता समेत अन्य बाजारों में भेजा गया। इस सफलता ने आसपास के किसानों को आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है। वर्तमान में 25 एकड़ क्षेत्र में शिमला मिर्च, गोभी, बैंगन, लौकी और भिंडी की नर्सरी तैयार की जा रही है, जबकि कई एकड़ भूमि पर फलदार पौधों का भी विकास किया जा रहा है। खेती के साथ मिलेगा प्रशिक्षण कृषक पाठशालाओं में किसानों को खेती के आधुनिक तरीके, मशरूम उत्पादन, बागवानी और सब्जी उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि वे यहां काम करने के साथ-साथ नई तकनीकों को सीख रहे हैं, जिससे भविष्य में उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है। किसानों की आय बढ़ाने पर जोर जिला प्रशासन के अनुसार, गढ़वा में संचालित तीनों कृषक पाठशालाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री ने भी उत्पादन क्षमता, प्रशिक्षण व्यवस्था और कृषि गतिविधियों की जानकारी लेकर अधिकारियों को बेहतर कार्य जारी रखने के निर्देश दिए। उम्मीद है कि यह पहल आने वाले समय में जिले के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के रंका प्रखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म भरने के नाम पर ग्रामीणों से अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। खपरो पंचायत की बीएलओ जमीला बीबी पर प्रति फॉर्म 20 से 50 रुपये तक लेने और पैसे नहीं देने पर आवेदन स्वीकार नहीं करने का आरोप लगा था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और प्रशासनिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने उन्हें आंगनबाड़ी सेविका के पद से चयन मुक्त करने का निर्देश दिया है। ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप ग्रामीणों का कहना है कि फॉर्म जमा करने के लिए उनसे जबरन पैसे मांगे जा रहे थे। तसौउर अंसारी ने आरोप लगाया कि 50 रुपये नहीं देने पर उनका फॉर्म लेने से इनकार कर दिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि यदि फॉर्म जमा नहीं हुआ तो उनकी नागरिकता संबंधी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं, ग्यासुद्दीन अंसारी ने बताया कि चार फॉर्म जमा करने के लिए उनसे 80 रुपये लिए गए। अन्य ग्रामीणों ने भी 50-50 रुपये की मांग किए जाने की शिकायत प्रशासन से की। पहले एआई से फर्जी वीडियो होने का किया था दावा मामला सामने आने के बाद बीएलओ जमीला बीबी ने सभी आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किया गया है और उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने किसी भी प्रकार की अवैध वसूली से इंकार किया था। जांच में आरोप सही, प्रशासन ने की कार्रवाई मामले के तूल पकड़ने पर रंका के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला टोपनो ने जांच कराई। जांच के दौरान वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जमीला बीबी को आंगनबाड़ी सेविका के पद से चयन मुक्त कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी ऐसी शिकायत सामने आती है तो उसकी तत्काल सूचना प्रशासन को दें, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
गढ़वा: झारखंड के बरवाडीह को छत्तीसगढ़ के चिरमिरी और अंबिकापुर से जोड़ने वाली प्रस्तावित रेल लाइन के रूट में बदलाव को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति ने मांग की है कि परियोजना का निर्माण पुराने प्रस्तावित मार्ग से ही किया जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि रूट बदला गया तो क्षेत्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़गड़ में हुई संघर्ष समिति की बैठक संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को गढ़वा जिले के बड़गड़ स्थित राजकीय मध्य विद्यालय परिसर में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें बड़गड़, भंडरिया और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में प्रस्तावित रेल परियोजना का मार्ग बदलने के निर्णय का सर्वसम्मति से विरोध किया गया। 'रूट बदला तो पिछड़ जाएगा पूरा इलाका' बैठक को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पुराने सर्वेक्षण वाले मार्ग को छोड़कर नई रेल लाइन किसी अन्य रूट से बनाई गई तो बड़गड़ और भंडरिया जैसे क्षेत्र रेल संपर्क से वंचित रह जाएंगे, जिससे विकास पर गंभीर असर पड़ेगा। समिति के पदाधिकारी जयप्रकाश मिंज ने कहा कि बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल परियोजना इस आदिवासी और पिछड़े इलाके के विकास की आधारशिला है। रूट बदलने से स्थानीय लोगों के रोजगार, शिक्षा और व्यापार के अवसर प्रभावित होंगे। 'वर्षों की तैयारी को नजरअंदाज किया जा रहा' समिति के सदस्य आनंद सोनी ने कहा कि पुराने रेल मार्ग के लिए वर्षों पहले सर्वेक्षण सहित कई तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं। ऐसे में अचानक नया रूट तय करना क्षेत्र की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार से पुराने प्रस्तावित मार्ग को बहाल करने की मांग की। 65 एकड़ रेलवे जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप बैठक में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से पहुंचे प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि परियोजना के तहत प्रस्तावित रेलवे जंक्शन पहले सरनाडीह गांव में बनाया जाना था। उनका दावा है कि रेलवे की करीब 65 एकड़ भूमि आज भी सरकारी रिकॉर्ड में रेलवे के नाम दर्ज है, लेकिन उस पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित रूप से अवैध कब्जा कर रखा है। इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की जा चुकी है और मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी लंबित बताया गया। जनजागरण अभियान और आंदोलन की चेतावनी बैठक में निर्णय लिया गया कि पुराने प्रस्तावित रेल मार्ग को बहाल कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही रेल मंत्रालय, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद बैठक में जिला परिषद प्रतिनिधि राधेश्याम जायसवाल, मुखिया प्रतिनिधि दिनेश लकड़ा, सत्यानंद बाखला, विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश, भाजपा मंडल अध्यक्ष बजरंग प्रसाद, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन मिंज सहित विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेल परियोजना क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके मूल रूट में किसी भी बदलाव का वे पुरजोर विरोध करेंगे।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले में जंगली हाथियों के झुंड ने एक बुजुर्ग पर हमला कर उन्हें कुचलकर मार डाला। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के आतंक से सुरक्षा की मांग की है। सुबह टहलने के दौरान हुआ हमला जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग सुबह घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान जंगल की ओर से आए जंगली हाथियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों ने शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन विभाग ने शुरू किया अभियान घटना के बाद वन विभाग की टीम ने हाथियों के झुंड को आबादी वाले क्षेत्र से दूर जंगल की ओर खदेड़ने के लिए अभियान शुरू किया है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के पास न जाएं और उनकी गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। ग्रामीणों में नाराजगी लगातार जंगली हाथियों के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि फसलों और संपत्ति के नुकसान के साथ अब मानव जीवन भी खतरे में पड़ रहा है। लोगों ने प्रभावित परिवार को मुआवजा देने और हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए स्थायी उपाय करने की मांग की है। प्रशासन ने सतर्क रहने की अपील वन विभाग ने आसपास के गांवों में अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सुबह और देर शाम जंगल या खेतों की ओर अकेले न जाने की सलाह दी है। साथ ही हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर तत्काल वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करने को कहा गया है।
रांची। झारखंड में मानसून की गतिविधियां लगातार जारी हैं, लेकिन राज्य के सभी जिलों में बारिश समान रूप से नहीं हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से अब तक सबसे कम वर्षा गढ़वा जिले में दर्ज की गई है। वहीं बुधवार को रांची, गुमला, जमशेदपुर, जामताड़ा और चाईबासा समेत कई इलाकों में तेज हवा के साथ झमाझम बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। जामताड़ा में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत बुधवार देर रात जामताड़ा जिले के बिंदापाथर थाना क्षेत्र स्थित चरकादाहा गांव में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। मृतकों की पहचान विनय सोरेन (50) और विश्वकर्मा टुडू (17) के रूप में हुई है। सभी एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। अचानक तेज बारिश शुरू होने पर वे एक मिट्टी के घर की ओट में खड़े हो गए, तभी घर पर बिजली गिर गई और यह हादसा हो गया। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। कई जिलों में यलो अलर्ट, तीन जिलों में हीट वेव की चेतावनी मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए राज्य के कई जिलों में गरज, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों में हीट वेव की स्थिति बने रहने की चेतावनी दी गई है। गढ़वा में सामान्य से 98 मिमी कम बारिश बारिश के आंकड़ों के अनुसार, गढ़वा में अब तक केवल 1.7 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से 98 मिमी कम है। साहिबगंज में 3.2 मिमी और चतरा में 6.8 मिमी बारिश हुई है। वहीं दुमका में 124.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य के करीब है। पिछले 24 घंटों में सर्वाधिक 71.4 मिमी बारिश गुमला के रायडीह में रिकॉर्ड की गई। राज्य का सबसे अधिक तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस डाल्टेनगंज और सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस लातेहार में दर्ज किया गया।
गढ़वा। गढ़वा थाना क्षेत्र के सुखबाना गांव में 13 वर्षीय छात्रा का शव तालाब से मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। छात्रा स्कूल से घर लौटने के बाद रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। दो दिन बाद शनिवार सुबह उसका शव तालाब में मिलने से हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। स्कूल से लौटने के बाद हो गई थी लापता मृतका की पहचान मेराल थाना क्षेत्र के दलेली गांव निवासी खुशबू कुमारी (13) के रूप में हुई है। उसके पिता बजरंगी साह गढ़वा शहर में मजदूरी करते हैं और सुखबाना गांव में किराये के मकान में परिवार के साथ रहते हैं। खुशबू शहर के शालीग्राम अग्रवाल मध्य विद्यालय में पढ़ती थी। परिजनों के अनुसार, गुरुवार को सुबह करीब साढ़े 11 बजे खुशबू स्कूल से घर लौटी थी। उसने अपना स्कूल बैग घर में रखा, लेकिन इसके बाद वह कहीं चली गई। उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था। शाम तक उसके घर नहीं लौटने पर परिवार ने आसपास तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। तालाब में मिला शव, गले में था दुपट्टा शनिवार सुबह ग्रामीणों ने सुखबाना गांव के एक तालाब में शव तैरता देखा और इसकी सूचना पुलिस व परिजनों को दी। मौके पर पहुंचे परिवार ने शव की पहचान खुशबू के रूप में की। शव को बाहर निकालने पर उसके गले में दुपट्टा कसकर लिपटा मिला, जिससे गला घोंटकर हत्या किए जाने की आशंका और गहरा गई। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हत्या की आशंका, जांच में जुटी पुलिस सूचना मिलते ही गढ़वा थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि स्कूल से लौटने के बाद खुशबू कहां गई, किसके संपर्क में थी और किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई। जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के बाद ही घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
गढ़वा। NEET Re-Exam 2026 को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए गढ़वा जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा के निर्देश पर प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अनुमंडल पदाधिकारी कुमार मयंक भूषण ने सभी तैयारियों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। तीन परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से होगी परीक्षा NEET री-एग्जाम रविवार, 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इसके लिए जिला मुख्यालय में तीन परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें राजकीय कृत गोविंद +2 उच्च विद्यालय, श्री सदगुरु जगजीत सिंह नामधारी कॉलेज और केंद्रीय विद्यालय, गढ़वा शामिल हैं। 200 मीटर दायरे में धारा-163 लागू परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए तीनों परीक्षा केंद्रों के चारों ओर 200 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 लागू कर दी गई है। यह आदेश रविवार सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ लगाने, प्रदर्शन, नारेबाजी या अनावश्यक रूप से एकत्र होने पर पूरी तरह रोक रहेगी। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध प्रशासन ने परीक्षार्थियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन, कैलकुलेटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सभी अभ्यर्थियों की गहन जांच के बाद ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। वहीं, सुरक्षा की दृष्टि से आग्नेयास्त्र, लाठी-डंडा या किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ लेकर आने पर भी प्रतिबंध रहेगा। निर्देशों का पालन करने की अपील गढ़वा प्रशासन ने परीक्षार्थियों, अभिभावकों और आम नागरिकों से प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा में व्यवधान उत्पन्न करने या नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न कराना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।