नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को टीम चयन और खिलाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने निशाने पर लिया है। श्रीकांत ने कहा कि यदि टीम मैनेजमेंट ने केएल राहुल को लगातार स्पष्ट भूमिका नहीं दी, तो उनका करियर भी संजू सैमसन की तरह प्रभावित हो सकता है। उन्होंने खिलाड़ियों के चयन और टीम संयोजन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 'राहुल जैसे खिलाड़ी को बार-बार बदलना ठीक नहीं' श्रीकांत का कहना है कि केएल राहुल एक अनुभवी और भरोसेमंद बल्लेबाज हैं, लेकिन उन्हें लगातार अलग-अलग भूमिकाओं में खिलाया जा रहा है। इससे खिलाड़ी का आत्मविश्वास प्रभावित होता है और वह अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाता। उन्होंने टीम प्रबंधन से राहुल की भूमिका स्पष्ट करने की अपील की। संजू सैमसन का भी दिया उदाहरण पूर्व चयनकर्ता ने कहा कि संजू सैमसन के साथ भी लंबे समय तक यही स्थिति रही। उन्हें नियमित अवसर नहीं मिले और टीम में उनकी जगह लगातार बदलती रही। श्रीकांत ने चेतावनी दी कि यदि यही रणनीति केएल राहुल के साथ अपनाई गई, तो भारतीय टीम एक अनुभवी बल्लेबाज को खो सकती है। टीम चयन पर तेज हुई बहस हाल के समय में भारतीय टीम के प्रदर्शन और खिलाड़ियों के चयन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में श्रीकांत का यह बयान क्रिकेट जगत में नई बहस का विषय बन गया है। हालांकि, बीसीसीआई, मुख्य कोच गौतम गंभीर या टीम मैनेजमेंट की ओर से इस टिप्पणी पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के प्रदर्शन को लेकर मुख्य कोच गौतम गंभीर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। टी20 सीरीज में निराशाजनक नतीजों के बाद कई पूर्व क्रिकेटरों ने टीम चयन, रणनीति और खिलाड़ियों के उपयोग पर सवाल उठाए हैं। हालांकि वनडे सीरीज में भारत ने पहला वनडे जीत लिया है, लेकिन टीम प्रबंधन को लेकर बहस अभी भी जारी है। मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट पर साधा निशाना पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने टीम प्रबंधन की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने "इतना भ्रमित टीम मैनेजमेंट पहले कभी नहीं देखा।" कैफ ने खास तौर पर युवा खिलाड़ियों के उपयोग और टीम चयन पर सवाल उठाए। एमएसके प्रसाद ने संजू सैमसन के चयन पर उठाए सवाल पूर्व मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने संजू सैमसन को बार-बार बाहर किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन को चयन में स्पष्टता रखनी चाहिए और खिलाड़ियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गौतम गंभीर को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। संजय मांजरेकर ने बताई असली समस्या पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने कहा कि केवल कोच या कप्तान को बदलना समाधान नहीं है। उनके अनुसार भारतीय टीम की समस्याएं इससे कहीं गहरी हैं और पूरे सिस्टम की समीक्षा की जरूरत है। पहले वनडे की जीत के बाद भी जारी बहस भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला वनडे जीतकर सीरीज में 1 - 0 की बढ़त बना ली है, लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि टीम के प्रदर्शन का सही आकलन पूरी सीरीज समाप्त होने के बाद ही किया जा सकेगा। ऐसे में आगामी मुकाबलों पर सभी की नजर रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट के इंग्लैंड दौरे के बाद अपने पद से अलग होने की खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका दो साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और वह इसे आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं। पारिवारिक कारणों से छोड़ सकते हैं जिम्मेदारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, रयान टेन डोशेट लगातार अंतरराष्ट्रीय दौरों और व्यस्त कार्यक्रम के कारण अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। उनकी पत्नी और तीन बच्चे लंदन में रहते हैं, इसलिए वह ऐसा पद चाहते हैं जिसमें यात्रा कम करनी पड़े। इसी वजह से उन्होंने टीम इंडिया के साथ अपना कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। गौतम गंभीर की टीम को लग सकता है झटका रयान टेन डोशेट को मुख्य कोच गौतम गंभीर की पसंद पर जुलाई 2024 में भारतीय टीम के सहायक कोच के रूप में नियुक्त किया गया था। यदि वह पद छोड़ते हैं, तो यह गंभीर के कोचिंग स्टाफ के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि गेंदबाजी कोच मॉर्ने मोर्कल के भविष्य को लेकर भी चर्चा चल रही है। BCCI जल्द ले सकता है अंतिम फैसला बीसीसीआई फिलहाल सपोर्ट स्टाफ में संभावित बदलावों पर विचार कर रहा है। इंग्लैंड वनडे सीरीज समाप्त होने के बाद बोर्ड नए कोचिंग संयोजन पर फैसला ले सकता है। हालांकि, अभी तक बीसीसीआई या रयान टेन डोशेट की ओर से आधिकारिक इस्तीफे की घोषणा नहीं की गई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के कोचिंग स्टाफ में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI इंग्लैंड दौरा खत्म होने के बाद सपोर्ट स्टाफ की व्यापक समीक्षा करेगी और कुछ अहम पदों पर नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। सपोर्ट स्टाफ के कई सदस्यों का भविष्य अधर में रिपोर्ट्स के अनुसार, असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशेट और फील्डिंग कोच टी. दिलीप के भविष्य पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। टी. दिलीप का कार्यकाल इंग्लैंड दौरे के साथ समाप्त हो रहा है और उन्हें विस्तार मिलने की संभावना कम बताई जा रही है। वहीं गेंदबाजी कोच मॉर्ने मॉर्केल को बनाए रखने के पक्ष में बोर्ड दिखाई दे रहा है। गौतम गंभीर पर फिलहाल पूरा भरोसा हालांकि टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन मुख्य कोच गौतम गंभीर की भूमिका को लेकर फिलहाल कोई बदलाव नहीं माना जा रहा। BCCI का फोकस सपोर्ट स्टाफ में सुधार कर टीम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर है। बोर्ड का मानना है कि मुख्य कोच को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए। नई जिम्मेदारियों पर भी हो रहा विचार सूत्रों के मुताबिक, BCCI टीम के सपोर्ट स्टाफ को और मजबूत बनाने के लिए कुछ नई नियुक्तियों पर भी विचार कर रही है। हाल ही में सैराज बहुतुले को भारतीय टीम का स्पिन बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया था और अब अन्य विभागों में भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। बोर्ड इंग्लैंड दौरे के बाद प्रदर्शन रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला लेगा।
इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टी20 टीम का निराशाजनक प्रदर्शन अब टीम प्रबंधन और मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर बहस का विषय बन गया है। लगातार खराब नतीजों के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों ने टीम की रणनीति, खिलाड़ियों की भूमिका और मैच परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। भारत को इस दौरे पर छह मुकाबलों में पांच हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला में टीम पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई और निर्णायक मुकाबलों में एकतरफा हार झेलनी पड़ी। इंग्लैंड में नहीं चला भारत का खेल दौरे की शुरुआत आयरलैंड के खिलाफ हार से हुई। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ टीम की मुश्किलें और बढ़ गईं। ट्रेंट ब्रिज में भारत मात्र 76 रन पर सिमट गया, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसका दूसरा सबसे कम स्कोर है। इसके बाद ब्रिस्टल में इंग्लैंड ने 159 रनों का लक्ष्य केवल 13.5 ओवर में हासिल कर भारत को एक और करारी शिकस्त दी। रणनीति और तैयारी पर उठे सवाल पूरे दौरे में भारतीय बल्लेबाज लगभग एक जैसी रणनीति अपनाते रहे। स्विंग और सीम गेंदबाजी के सामने बल्लेबाजी क्रम लगातार दबाव में दिखा, लेकिन टीम अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव नहीं कर सकी। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी परिस्थितियों के अनुसार टीम की तैयारी और योजनाओं में कमी साफ दिखाई दी। टीम चयन भी चर्चा का विषय भारत की प्लेइंग इलेवन और बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी कई सवाल उठे। शानदार रिकॉर्ड रखने वाले तिलक वर्मा को उनके पसंदीदा नंबर-3 की बजाय निचले क्रम में बल्लेबाजी कराई गई। शिवम दुबे की भूमिका पूरे दौरे में स्पष्ट नजर नहीं आई। बाएं हाथ के बल्लेबाजों को लगातार प्राथमिकता दिए जाने पर भी सवाल खड़े हुए। गेंदबाजी संयोजन लगभग हर मैच में बदलता रहा, जिससे टीम को स्थिरता नहीं मिल सकी। वॉशिंगटन सुंदर को लगातार मौके दिए जाने के फैसले पर भी चर्चा हुई। पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि किसी नई टीम के लिए स्पष्ट रणनीति और स्थिर संयोजन बेहद जरूरी होता है। श्रेयस अय्यर ने कहा- टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है श्रृंखला के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम अभी संक्रमण (Transition) के दौर में है और खिलाड़ियों को नई भूमिका में ढलने के लिए समय चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी और गलतियों से सीख लेकर मजबूत वापसी करेगी। गौतम गंभीर पर बढ़ा दबाव मुख्य कोच गौतम गंभीर की नियुक्ति के बाद यह पहला बड़ा विदेशी दौरा रहा, जिसमें टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। लगातार हार के बाद अब टीम प्रबंधन की रणनीति और कोचिंग फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए कोच और कप्तान को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। वहीं यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में विदेशी परिस्थितियों के अनुसार बेहतर तैयारी और स्पष्ट रणनीति अपनाना टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। आने वाले महीनों में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी कि क्या यह युवा टीम अपनी कमजोरियों को दूर कर मजबूत वापसी कर पाती है या नहीं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आगामी जिम्बाब्वे दौरे और 2026 एशियन गेम्स के लिए अनुभवी बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण को भारतीय टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है। टीम इंडिया के नियमित मुख्य कोच गौतम गंभीर इंग्लैंड दौरे के व्यस्त कार्यक्रम के बाद आराम करेंगे, इसलिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख लक्ष्मण यह जिम्मेदारी संभालेंगे। जिम्बाब्वे दौरे से लेकर एशियन गेम्स तक जिम्मेदारी भारत की जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज 23, 25 और 27 जुलाई को हरारे में खेली जाएगी। इसके बाद लक्ष्मण एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम के साथ रहेंगे। उनके साथ बल्लेबाजी कोच की भूमिका ऋषिकेश कानिटकर और गेंदबाजी कोच की भूमिका सुनील जोशी निभाएंगे। बीसीसीआई ने अपनाया स्प्लिट-कोचिंग मॉडल बीसीसीआई ने व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को देखते हुए एक बार फिर स्प्लिट-कोचिंग मॉडल अपनाया है। एशियन गेम्स और भारत की वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज एक ही समय पर होने के कारण गौतम गंभीर सीनियर टीम के साथ रहेंगे, जबकि वीवीएस लक्ष्मण दूसरी भारतीय टीम की जिम्मेदारी संभालेंगे। पहले भी निभा चुके हैं सफल भूमिका यह पहली बार नहीं है जब वीवीएस लक्ष्मण भारतीय टीम के अंतरिम मुख्य कोच बने हैं। इससे पहले भी उन्होंने 2023 एशियन गेम्स और 2024 जिम्बाब्वे दौरे पर युवा भारतीय टीम का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया था। बीसीसीआई को उम्मीद है कि उनके अनुभव का फायदा युवा खिलाड़ियों को मिलेगा।
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच Gautam Gambhir और पूर्णिया से सांसद Rajesh Ranjan की हालिया मुलाकात चर्चा का विषय बन गई है। दोनों की तस्वीरें और मुलाकात की खबर सामने आने के बाद क्रिकेट और राजनीति के गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे सांसद के बेटे और युवा क्रिकेटर सार्थक रंजन से जोड़कर देखा जा रहा है। बेटे सार्थक रंजन को लेकर हो सकती है चर्चा पप्पू यादव के बेटे सार्थक रंजन घरेलू क्रिकेट में उभरते हुए खिलाड़ी माने जाते हैं। आईपीएल 2026 की नीलामी में Kolkata Knight Riders ने उन्हें 30 लाख रुपये के बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल किया था। हालांकि पूरे सीजन में सार्थक को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। ऐसे में माना जा रहा है कि गौतम गंभीर और पप्पू यादव के बीच हुई बातचीत में सार्थक के क्रिकेट करियर, उनकी प्रगति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई हो सकती है। केकेआर से जुड़ा है गौतम गंभीर का खास रिश्ता गौतम गंभीर का कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ लंबा और सफल जुड़ाव रहा है। उनकी कप्तानी में टीम ने आईपीएल खिताब जीते और बाद में मेंटर के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि केकेआर से जुड़े किसी भी युवा खिलाड़ी के विकास को लेकर गंभीर की राय काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आईपीएल 2026 में नहीं मिला डेब्यू का मौका सार्थक रंजन को भले ही केकेआर ने अपनी टीम में शामिल किया, लेकिन उन्हें पूरे सीजन बेंच पर ही बैठना पड़ा। टीम का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वह 14 मैचों में सिर्फ 6 जीत के साथ अंक तालिका में सातवें स्थान पर रही। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्थक घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हैं तो अगले सीजन में उन्हें अवसर मिल सकता है। अफगानिस्तान टेस्ट से पहले चर्चा में आए गंभीर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारतीय टीम 6 जून से अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच की तैयारियों में जुटी हुई है। हेड कोच के रूप में गौतम गंभीर की रणनीतियों पर सभी की नजरें हैं और इसी बीच उनकी यह मुलाकात सुर्खियां बटोर रही है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों के बीच वास्तव में क्या बातचीत हुई, लेकिन क्रिकेट प्रेमियों के बीच इसे सार्थक रंजन के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर नेतृत्व शैली और व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर को लेकर बेबाक राय रखते हुए साफ संदेश दिया है कि आक्रामकता जरूरी है, लेकिन उसमें रूखापन नहीं होना चाहिए। एक इंटरव्यू के दौरान सौरव गांगुली ने कहा कि गौतम गंभीर एक स्वाभाविक प्रतिस्पर्धी हैं और जीत के लिए उनका जुनून काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए रूखा या कठोर व्यवहार जरूरी नहीं है। गांगुली ने कहा कि उन्होंने गंभीर के साथ खेला है और वह जानते हैं कि वह एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उनका आक्रामक रवैया कई बार विवादों का कारण बन जाता है। टीम कल्चर को लेकर की तारीफ जहां एक ओर गांगुली ने गंभीर के व्यवहार पर सुझाव दिया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने उनकी कोचिंग स्टाइल की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि गंभीर टीम में “टीम फर्स्ट” का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, जहां व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज्यादा सामूहिक सफलता पर जोर दिया जाता है। ICC जीत के बाद बढ़ी जिम्मेदारी गौतम गंभीर हाल ही में भारत को ICC Champions Trophy 2025 और ICC T20 World Cup 2026 जिताने वाले पहले हेड कोच बने हैं। इन सफलताओं ने उन्हें एक मजबूत कोच के रूप में स्थापित किया है, लेकिन गांगुली के मुताबिक असली परीक्षा अभी बाकी है। 2027 वर्ल्ड कप और टेस्ट क्रिकेट होगी असली चुनौती गांगुली का मानना है कि 2027 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाला वनडे वर्ल्ड कप गंभीर के लिए असली कसौटी होगा, जहां परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण होंगी। साथ ही उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पिच पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने के बजाय संतुलित विकेट पर खेलना बेहतर होगा। उनका मानना है कि अच्छी पिच बेहतर परिणाम लाती है और टीम के प्रदर्शन को भी निखारती है। आने वाले दौरे पर नजरें IPL 2026 के बाद भारतीय टीम अफगानिस्तान और आयरलैंड के खिलाफ सीरीज खेलेगी, इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर लंबी व्हाइट-बॉल सीरीज होगी। यह दौर गंभीर के लिए अपनी रणनीति और नेतृत्व को और मजबूत करने का मौका होगा।
नई दिल्ली: ICC Men's T20 World Cup 2026 का खिताब जीतकर भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया। फाइनल में New Zealand national cricket team को 96 रन से हराकर भारत ने तीसरी बार यह ट्रॉफी अपने नाम की और लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने का रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद Board of Control for Cricket in India (BCCI) ने टीम इंडिया और सपोर्ट स्टाफ के लिए कुल 131 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की है। खिलाड़ियों को मिलेंगे 6-6 करोड़ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम के 15 खिलाड़ियों में से हर खिलाड़ी को लगभग 6 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। बाकी करीब 41 करोड़ रुपये कोचिंग स्टाफ और अन्य सपोर्ट स्टाफ के बीच बांटे जाएंगे। इस जीत में कप्तान Suryakumar Yadav और हेड कोच Gautam Gambhir की रणनीति को अहम माना जा रहा है। भारत ने बनाए कई रिकॉर्ड टी20 वर्ल्ड कप जीत के साथ ही भारत इस टूर्नामेंट को तीन बार जीतने वाली पहली टीम बन गया है। साथ ही टीम ने लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर नया कीर्तिमान भी स्थापित किया। इसके अलावा भारत अपने ही घर में टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला देश भी बन गया है। BCCI ने की टीम की तारीफ BCCI के सचिव Devajit Saikia ने बयान जारी कर कहा कि यह जीत भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक है और टीम ने इस फॉर्मेट में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। वहीं BCCI अध्यक्ष Mithun Manhas ने भी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि टी20 वर्ल्ड कप जीतना पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि खिताब बचाना और घरेलू मैदान पर यह उपलब्धि हासिल करना इसे और भी खास बनाता है। गौरतलब है कि इससे पहले 2024 में भारत की जीत के बाद BCCI ने 125 करोड़ रुपये के इनाम का ऐलान किया था, जिसमें हर खिलाड़ी को 5 करोड़ रुपये मिले थे।
ICC Men's T20 World Cup 2026 के फाइनल में भारत की जीत के बीच घटी एक घटना पर अब भारतीय टीम के हेड कोच Gautam Gambhir का बड़ा बयान सामने आया है। तेज गेंदबाज Arshdeep Singh द्वारा न्यूजीलैंड के बल्लेबाज Daryl Mitchell की ओर गेंद फेंकने की घटना को लेकर उन्होंने कहा कि देश के लिए खेलते समय खिलाड़ियों में आक्रामकता दिखना स्वाभाविक है। फाइनल में हुआ था विवाद फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही थी, तभी न्यूजीलैंड की पारी के दौरान एक विवाद खड़ा हो गया। 11वें ओवर में अर्शदीप की गेंद पर डेरिल मिचेल ने सामने की ओर शॉट खेला, जो एक टप्पा खाकर सीधे गेंदबाज के हाथ में आ गया। इसके बाद अर्शदीप ने गेंद मिचेल की दिशा में जोर से फेंक दी, जो सीधे उनके हाथ में लगी। इस घटना के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ देर कहासुनी भी हुई। मामला बढ़ता देख भारतीय कप्तान Suryakumar Yadav और अंपायरों को बीच-बचाव करना पड़ा। बाद में अर्शदीप और कप्तान ने मिचेल से माफी भी मांगी। गंभीर का बयान इस पूरे विवाद पर बोलते हुए Gautam Gambhir ने कहा कि खिलाड़ियों का आक्रामक होना गलत नहीं है। उन्होंने कहा, “जब आप अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं तो आक्रामकता दिखाना स्वाभाविक है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कोई भी गेंदबाज लगातार छक्के खाना पसंद नहीं करता और मैं अपने खिलाड़ियों से इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद करता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि अर्शदीप माफी नहीं भी मांगते तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं होती, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि माफी मांगना अच्छी बात है। ICC ने लगाया जुर्माना इस घटना के बाद International Cricket Council (ICC) ने अर्शदीप सिंह पर आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना लगाया। साथ ही उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट प्वाइंट भी जोड़ा गया है। अर्शदीप को ICC के आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का दोषी पाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की ओर खतरनाक या अनुचित तरीके से गेंद या अन्य क्रिकेट उपकरण फेंकने से संबंधित है। अर्शदीप सिंह ने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी, जिसके कारण मामले की औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। मैदान पर मौजूद अंपायर Richard Illingworth और Alex Wharf सहित मैच अधिकारियों ने इस घटना को लेकर रिपोर्ट दर्ज की थी। ICC के नियमों के अनुसार लेवल-1 के उल्लंघन पर खिलाड़ी को आधिकारिक चेतावनी से लेकर मैच फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना और एक या दो डिमेरिट प्वाइंट दिए जा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।