Global Energy Market

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ईरान के पेट्रोलियम मंत्री भारत दौरे पर, ऊर्जा सहयोग बढ़ाने और तेल-गैस व्यापार पर हुई अहम चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। ईरान के पेट्रोलियम मंत्री Mohsen Paknejad भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, कच्चे तेल की आपूर्ति और हाइड्रोकार्बन सेक्टर में साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई।   ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जोर   बैठक में भारत और ईरान ने तेल एवं गैस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आपसी हितों के अनुरूप साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।   ब्रिक्स मंच पर अहम बैठक   ईरानी मंत्री भारत में आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस दौरान स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की चुनौतियों पर भी चर्चा की जा रही है।   भारत-ईरान व्यापारिक संबंधों को मिल सकता है बल   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भारत और ईरान के बीच ऊर्जा व्यापार में नई गति आ सकती है। भारत पहले ईरान से कच्चे तेल का प्रमुख आयातक रहा है और दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं।   तेल शोधन, पेट्रोकेमिकल्स में निवेश पर भी चर्चा   बैठक में तेल शोधन (रिफाइनिंग), पेट्रोकेमिकल्स और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं में संभावित निवेश पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की।   वैश्विक ऊर्जा बाजार पर रहेगी नजर   मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में भारत और ईरान के बीच यह उच्चस्तरीय बैठक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

anjali kumari जून 26, 2026 0
Firefighters and emergency teams respond after a deadly explosion at Qatar's Ras Laffan gas export terminal.
कतर के गैस टर्मिनल में भीषण विस्फोट, भारतीयों समेत 13 लोगों की मौत; वैश्विक गैस आपूर्ति पर मंडराया संकट

  दोहा: कतर के प्रमुख गैस निर्यात केंद्र रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में सोमवार (22 जून) को हुए भीषण विस्फोट में भारतीय नागरिकों समेत कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 66 लोग घायल हो गए। हादसे की पुष्टि कतर के ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने की है। इस घटना ने न केवल कतर के ऊर्जा क्षेत्र को झटका दिया है, बल्कि वैश्विक गैस आपूर्ति को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। दोहा में मीडिया को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र स्थित गैस निर्यात टर्मिनल में हुए विस्फोट की प्रारंभिक जांच से यह एक औद्योगिक दुर्घटना प्रतीत होती है।हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। भारतीय दूतावास ने जताया शोक, सहायता का आश्वासन दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह कतर सरकार और स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में है। दूतावास ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घायलों में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, तंजानिया, गिनी, केन्या, नाइजीरिया और कतर सहित कई देशों के नागरिक शामिल हैं। कतर के ऊर्जा क्षेत्र का सबसे अहम केंद्र है रास लाफान रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी कतर के प्राकृतिक गैस उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (LNG) निर्यात टर्मिनलों में से एक संचालित होता है। इस क्षेत्र में हुई किसी भी बड़ी दुर्घटना का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ना स्वाभाविक माना जाता है। धमाके के बाद पूरे संयंत्र में आग लग गई, जिसके कारण राहत और बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं। गैस निर्यात दोबारा शुरू करने की तैयारी के दौरान हुआ हादसा रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े क्षेत्रीय तनाव के कारण कतर पिछले कुछ समय से अपने कई ग्राहकों को गैस की आपूर्ति नहीं कर पा रहा था। इसके चलते देश ने अस्थायी रूप से गैस उत्पादन भी सीमित कर दिया था। हाल ही में क्षेत्रीय तनाव में कमी आने के बाद सरकारी कंपनी कतरएनर्जी ने अपने निर्यात टर्मिनलों को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी दौरान बरजान गैस आपूर्ति संयंत्र में अचानक विस्फोट हुआ और भीषण आग लग गई। क्या बढ़ सकती है गैस की किल्लत? ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रास लाफान टर्मिनल लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो वैश्विक एलएनजी बाजार में आपूर्ति संबंधी दबाव बढ़ सकता है। एशियाई देशों, विशेषकर भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातकों पर इसका असर पड़ने की आशंका है। कतर सरकार ने फिलहाल गैस आपूर्ति पर बड़े असर से इनकार किया है और कहा है कि स्थिति को सामान्य बनाने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Oil tankers navigating near the Strait of Hormuz amid rising geopolitical tensions and supply disruptions.
LNG Crude Supply to India: होर्मुज संकट के बीच 'डार्क मोड' में चल रहे तेल टैंकर, भारत तक गुप्त रास्तों से पहुंच रही सप्लाई

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारत समेत कई एशियाई देशों तक कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि अब यह अधिक गोपनीय तरीके से की जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध से पहले की तुलना में होर्मुज मार्ग से टैंकर ट्रैफिक 90 से 95 प्रतिशत तक घट चुका है। इसके चलते वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को ट्रैक करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। क्या है 'डार्क मोड' रणनीति? शिपिंग डेटा के अनुसार, बड़ी संख्या में तेल टैंकर अब 'डार्क मोड' में संचालन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी में प्रवेश करते समय अपने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। पहले इस रणनीति का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान से जुड़े जहाज करते थे, लेकिन अब सामान्य वाणिज्यिक जहाज भी सुरक्षा कारणों और परिचालन जोखिमों के चलते ऐसा कर रहे हैं। वोर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र से गुजरने वाले 57 प्रतिशत जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे, जबकि मई में यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 65.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। भारत, चीन और पाकिस्तान तक जारी है सप्लाई मौजूदा संकट के बावजूद भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को तेल और LNG की आपूर्ति जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए वैकल्पिक समुद्री कॉरिडोर और विशेष मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ने के कारण कई जहाज सुरक्षित मार्गों के जरिए अपनी खेप गंतव्य देशों तक पहुंचा रहे हैं। सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीदें कमजोर शुरुआती अनुमान यह था कि युद्ध कुछ महीनों में समाप्त हो जाएगा और जून से होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने लगेंगी। लेकिन संघर्ष अब चौथे महीने में पहुंच चुका है और स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में किसी समझौते के बाद भी इस मार्ग को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकेगा, क्योंकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आ चुका है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बना रहेगा असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
Oil tanker at sea symbolizing US sanctions on Russian and Iranian crude affecting global energy markets
अमेरिका का बड़ा फैसला: रूस-ईरान तेल पर फिर सख्ती, भारत के लिए बढ़ी चुनौती

  वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने पर दी गई अस्थायी छूट को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के तेल पर पाबंदियां फिर से कड़ी हो जाएंगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल और भारत जैसे बड़े आयातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जनरल लाइसेंस खत्म, सख्त हुए नियम अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि 11 मार्च से पहले समुद्र में मौजूद तेल को निकालने के लिए दिया गया जनरल लाइसेंस अब समाप्त हो चुका है। इसका मतलब है कि अब: रूस और ईरान के तेल पर सख्त प्रतिबंध लागू होंगे इन देशों से तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस लग सकते हैं बैंकों और कंपनियों पर भी कार्रवाई का खतरा बढ़ेगा ट्रंप प्रशासन की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ “मैक्सिमम प्रेशर” रणनीति अपनाई है। ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध अमेरिका का उद्देश्य ईरान की आय के प्रमुख स्रोतों को सीमित करना है। भारत पर संभावित असर भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। इस फैसले का असर: सस्ते तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है वैकल्पिक सप्लायर की तलाश करनी पड़ सकती है हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई के कई विकल्प मौजूद हैं। ईरान पर बढ़ी आर्थिक मार रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसी OFAC ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें कई कंपनियां, जहाज और व्यक्तियों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का मकसद है कि ईरान के अवैध तेल कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जाए। ओमान में वार्ता पर टिकी नजर इस बीच ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने वाली है। समझौते की उम्मीद में तेल कीमतों में हल्की नरमी असफल वार्ता की स्थिति में कीमतों में तेजी संभव व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वह विवाद का समाधान चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया जाएगा। आगे क्या? अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ना तय माना जा रहा है। अगर प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो: तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है भारत जैसे देशों की आयात लागत बढ़ सकती है भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता और उसके नतीजों पर टिकी है, जो आगे के हालात तय करेंगे।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
America praises India for continuing Russian oil imports amid global sanctions
रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारत की सराहना की, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा– जिम्मेदार भागीदार

  रूस पर लगे प्रतिबंधों और ईरान युद्ध के बीच भी भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले को लेकर अमेरिका की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने भारत को एक जिम्मेदार और भरोसेमंद भागीदार बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित और जिम्मेदार रवैया अपनाया है। अमेरिका का मानना है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को समझते हुए अपने फैसले लिए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई पश्चिमी देशों ने Russia के तेल पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना जारी रखा, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना बेहद जरूरी है। इसलिए भारत के फैसलों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। वैश्विक स्तर पर चल रहे Iran–Israel Conflict और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे में भारत द्वारा विभिन्न देशों से तेल आयात कर आपूर्ति संतुलित रखना अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने रूस से तेल खरीदते समय वैश्विक नियमों और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखा है, जिसकी वजह से अमेरिका ने भी भारत की नीति की सराहना की है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0