Global Trade

India addresses the UN Security Council, condemning attacks on commercial ships carrying Indian sailors and urging maritime security
UNSC में भारत का सख्त संदेश: भारतीय जहाजों पर हमले बर्दाश्त नहीं, समुद्री सुरक्षा बहाल करने की मांग

India at UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय नाविकों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। साथ ही, भारत ने क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही बहाल करने की मांग की। भारतीय नागरिकों पर हमलों पर जताई चिंता डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की पहल पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि हालिया हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत, एक अन्य लापता है, जबकि कई भारतीय घायल हुए हैं। उन्होंने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। इन जहाजों पर हुए हमलों की निंदा भारत ने विशेष रूप से GFS Galaxy, MT Al Bahia और MT Mombasa जैसे जहाजों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह की हिंसा वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। पी. हरीश ने कहा कि भारत समुद्री यात्रियों को निशाना बनाने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित आवाजाही में बाधा पहुंचाने वाली हर प्रकार की हिंसा की कड़ी निंदा करता है। भारत ने UNSC से क्या मांग की? भारत ने सुरक्षा परिषद से अपील की कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद किया जाए। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होर्मुज जलडमरूमध्य समेत सभी वैश्विक समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही जल्द से जल्द बहाल की जानी चाहिए। भारत ने दोहराया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। भारत के लिए क्यों अहम है मिडिल ईस्ट? भारत ने सुरक्षा परिषद में स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र उसके लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत का ऊर्जा आयात, व्यापार और निवेश भी बड़े पैमाने पर इसी क्षेत्र से जुड़ा है। भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि खाड़ी देशों के साथ भारत का करीब 180 अरब डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और 52 अरब डॉलर की वार्षिक प्रेषण (Remittances) इस क्षेत्र के महत्व को दर्शाते हैं। क्षेत्रीय तनाव पर भारत की नजर भारत ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतते हुए कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और आम नागरिकों की जान खतरे में न पड़े।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
US imposes 10% forced labour tariff on Indian imports after Section 301 investigation
AI से बनाए गए फर्जी वीडियो पर भड़के पीयूष गोयल, चाणक्यपुरी थाने में FIR दर्ज

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने कथित बयान वाले वीडियो को पूरी तरह फर्जी और AI से तैयार किया गया डीपफेक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद परिसर के बाहर मीडिया से की गई उनकी वास्तविक टिप्पणियों के साथ छेड़छाड़ कर यह वीडियो बनाया गया और लोगों को गुमराह करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर फैलाया गया। पीयूष गोयल ने कहा कि इस तरह की भ्रामक सामग्री न केवल गलत सूचना फैलाती है, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद और सार्वजनिक विश्वास को भी नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI का इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। चाणक्यपुरी थाने में FIR दर्ज केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मामले में पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, 25 जुलाई 2026 को सुबह 4:35 बजे नई दिल्ली के चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 123/26 दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि फर्जी वीडियो बनाने, उसे प्रसारित करने या बढ़ावा देने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लोगों से की सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने की अपील पीयूष गोयल ने लोगों से अपील की कि किसी भी वायरल वीडियो या सूचना पर भरोसा करने से पहले केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से उसकी पुष्टि करें। उन्होंने विश्वास जताया कि देश के जागरूक नागरिक, विशेषकर युवा, इस तरह की भ्रामक सामग्री के झांसे में नहीं आएंगे। क्या है पूरा मामला? सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पीयूष गोयल को एक विवादित बयान देते हुए दिखाया और सुनाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि यह वीडियो पूरी तरह डीपफेक है और इसमें AI तकनीक के जरिए उनकी आवाज और बयान के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने इसे झूठी जानकारी फैलाने की साजिश बताते हुए मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।  

kalpana जुलाई 25, 2026 0
US imposes 10% forced labour tariff on Indian imports after Section 301 investigation
US ने भारत पर लगाया 10% 'फोर्स्ड लेबर' टैरिफ, सेक्शन 301 जांच के बाद बड़ा फैसला

US Forced Labour Tariff on India: अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 'फोर्स्ड लेबर' (जबरन मजदूरी) से जुड़े मामलों को लेकर नया टैरिफ लगाने का फैसला किया है। सेक्शन 301 जांच पूरी होने के बाद अमेरिका ने भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। पहले भारत पर 12.5% शुल्क लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम निर्णय में इसे घटाकर 10% कर दिया गया। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत भी जारी है। सेक्शन 301 जांच के बाद लिया गया फैसला अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत की गई जांच के आधार पर हुई है। अमेरिका का आरोप है कि कई देशों ने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात और व्यापार को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। इसी वजह से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत 60 देशों पर नया टैरिफ लागू किया गया है। यह नया शुल्क फरवरी में लगाए गए अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ की जगह लेगा। क्या है सेक्शन 301? सेक्शन 301 अमेरिकी ट्रेड एक्ट का ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिका उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है, जिनकी नीतियों को वह अनुचित, भेदभावपूर्ण या अमेरिकी व्यापार हितों के खिलाफ मानता है। ट्रंप प्रशासन ने मार्च में भारत के खिलाफ दो अलग-अलग जांच शुरू की थीं। पहली जांच फोर्स्ड लेबर से जुड़ी थी, जबकि दूसरी अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता (Excess Manufacturing Capacity) को लेकर है। फिलहाल फोर्स्ड लेबर वाली जांच पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरी जांच अभी जारी है। भारत ने रखा अपना पक्ष जांच के दौरान भारत सरकार और उद्योग संगठनों ने अमेरिका के आरोपों को खारिज किया। भारत ने कहा कि देश में जबरन मजदूरी रोकने के लिए संविधान, श्रम कानूनों और कई कानूनी प्रावधान पहले से लागू हैं। सरकार का कहना है कि भारतीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन करते हैं और फोर्स्ड लेबर को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। व्यापार समझौते पर भी जारी है बातचीत भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। फरवरी में दोनों देशों ने एक प्रारंभिक ढांचे पर सहमति बनाई थी, जिसके तहत भारतीय निर्यात पर कुल टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने और अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक अवसर देने का प्रस्ताव दिया था। दूसरी जांच बनी बड़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उस पर सेक्शन 301 के तहत दो अलग-अलग जांच चल रही हैं, जबकि पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे कई प्रतिस्पर्धी देशों पर केवल फोर्स्ड लेबर से जुड़ी जांच हुई है। यदि भविष्य में इन देशों पर भारत की तुलना में कम टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों की राय व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर काफी प्रगति हुई है, लेकिन भारत चाहता है कि उसे अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ रियायत मिले। वहीं, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के कुछ वैश्विक रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद व्यापारिक नीति को लेकर नई अनिश्चितता भी पैदा हो गई है। क्या होगा असर? 10% टैरिफ लागू होने से भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कब तक अंतिम रूप लेता है और सेक्शन 301 की दूसरी जांच का क्या निष्कर्ष निकलता है। फिलहाल दोनों देश व्यापार वार्ता जारी रखे हुए हैं और उद्योग जगत की नजर आने वाले फैसलों पर टिकी हुई है।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Donald Trump announces 50% tariffs on Canadian imports, raising fears of a new US-Canada trade war
कनाडा पर ट्रंप का टैरिफ अटैक, 50% आयात शुल्क का ऐलान; भड़क सकता है नया ट्रेड वॉर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का ऐलान किया है। यह नया नियम अगले 30 दिनों में लागू होगा। इस फैसले के बाद कनाडा से अमेरिका आने वाली शराब, सीमेंट, हॉकी स्टिक समेत कई उपभोक्ता और औद्योगिक उत्पाद महंगे हो सकते हैं। हालांकि, ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, महत्वपूर्ण खनिज और मछली जैसे कुछ प्रमुख उत्पादों को इस नए शुल्क से बाहर रखा गया है। ट्रंप ने बताए टैरिफ लगाने के तीन कारण राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि कनाडा लंबे समय से अमेरिकी कंपनियों के साथ निष्पक्ष व्यापार नहीं कर रहा है। उन्होंने टैरिफ लगाने के पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए— कनाडा की डेयरी नीति विदेशी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाती है। अमेरिकी शराब ब्रांडों की बिक्री पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब ऐसे व्यापारिक नियमों को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके उद्योगों के लिए नुकसानदायक हों। कनाडा ने जताया विरोध कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी फैसले की आलोचना करते हुए इसे अमेरिका-कनाडा-मेक्सिको व्यापार समझौते (USMCA) का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि कनाडा बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। वहीं, ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कहा कि यदि अमेरिका पीछे नहीं हटता, तो कनाडा भी "टैरिफ के बदले टैरिफ" की नीति अपनाएगा। पहले से जारी है टैरिफ विवाद अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव नया नहीं है। जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर विवाद लगातार बढ़ा है। कनाडा पहले ही कई अमेरिकी उत्पादों पर 25% जवाबी शुल्क लगा चुका है। अमेरिका भी स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर पहले से 15% से 50% तक टैरिफ वसूल रहा है। विशेषज्ञों ने जताई चिंता व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि USMCA के तहत आने वाले उत्पादों पर भी टैरिफ लगाने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में गंभीर तनाव पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अगले 30 दिनों में अमेरिका और कनाडा के बीच कोई समझौता नहीं हुआ, तो जवाबी कार्रवाई और तेज हो सकती है। इसका असर उत्तर अमेरिकी अर्थव्यवस्था, उद्योग, सप्लाई चेन और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Commercial ship catches fire after missile attack in Strait of Hormuz
होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल हमला, जहाज में लगी भीषण आग; चालक दल सुरक्षित रेस्क्यू

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सोमवार को एक वाणिज्यिक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ, जिसके बाद उसमें भीषण आग लग गई। हादसे के बाद जहाज पर सवार सभी चालक दल (क्रू) के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना ने पहले से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। UKMTO ने की हमले की पुष्टि ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल हमले के तुरंत बाद चालक दल ने जहाज खाली कर दिया था। बाद में एक टग बोट की मदद से सभी क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ओमान के कुमजार के पास हुआ हमला UKMTO के अनुसार, हमला ओमान के कुमजार से करीब 15 किलोमीटर (8 समुद्री मील) उत्तर-पश्चिम में हुआ। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और अब वह बिना चालक दल के समुद्र में बह रहा है। आग पर अभी तक पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। एजेंसी ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ा खतरा यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने अपने एक और सैनिक की मौत की पुष्टि के बाद सोमवार को ईरान के उत्तर-पश्चिमी शहर तबरेज पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, जिससे इस जवाबी कार्रवाई को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री व्यापार पर बढ़ा संकट होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Panama warns that Strait of Hormuz tensions could trigger a global economic crisis
होर्मुज पर बढ़ते तनाव से दुनिया को चेतावनी! पनामा बोला- समुद्री कानून तोड़ा तो वैश्विक संकट गहराएगा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पनामा ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है। पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-अचा वास्केज ने कहा कि यदि इस अहम समुद्री मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर एएनआई के अनुसार, विदेश मंत्री वास्केज ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यदि यहां तनाव बढ़ता है या नौवहन बाधित होता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। उन्होंने बताया कि पनामा भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए यह संकट उनके देश के लिए भी चिंता का विषय है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता वास्केज ने बताया कि भारत के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में होर्मुज क्षेत्र में तैनात भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर कार्यरत हैं और मौजूदा हालात उनकी सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। पनामा ने इसे मानवीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। समुद्री कानून का पालन करने की अपील पनामा के विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश दुनिया के सबसे बड़े शिपिंग रजिस्ट्रियों में शामिल है, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करने और किसी भी परिस्थिति में समुद्री रास्तों को बाधित नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अखंडता, देशों की संप्रभुता और पनामा नहर की तटस्थता जैसे सिद्धांतों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। भारत से सहयोग की उम्मीद वास्केज ने बताया कि उनकी भारत यात्रा का एक अहम उद्देश्य पनामा नहर की तटस्थता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते में भारत की भागीदारी पर चर्चा करना भी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और पनामा चाहता है कि भारत इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा बने। IMO के साथ बढ़ाई जा रही समुद्री सुरक्षा उन्होंने कहा कि पनामा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ मिलकर दुनिया भर के नाविकों की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि समुद्री विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन से होना चाहिए। भारत के रुख का किया समर्थन मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर पनामा ने भारत के संयमित रुख का समर्थन करते हुए कहा कि शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान ही मौजूदा संकट का स्थायी समाधान है। विदेश मंत्री वास्केज ने दोहराया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों और जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए, क्योंकि यही वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता की सबसे बड़ी गारंटी है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks about the Strait of Hormuz after withdrawing his proposed security toll plan and announcing a focus on investment partnerships with Gulf nations.
होर्मुज पर ट्रंप का यू-टर्न, टोल योजना वापस; खाड़ी देशों के साथ निवेश समझौतों पर जोर

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने हालिया फैसले में बड़ा बदलाव किया है। एक दिन पहले जहाजों पर सुरक्षा शुल्क (टोल) लगाने की घोषणा करने वाले ट्रंप ने अब इस प्रस्ताव को वापस लेते हुए कहा है कि इसकी जगह खाड़ी देशों के साथ बड़े व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे। निवेश से रोजगार बढ़ाने का दावा ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के साथ होने वाले नए निवेश समझौतों से अमेरिका में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित होंगे और लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी। उनके अनुसार, यह मॉडल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अधिक प्रभावी साबित होगा। ईरान पर प्रतिबंध जारी अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अन्य देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान से जुड़े जहाजों और ईरानी सामान के परिवहन पर पहले की तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा नीति में कोई ढील नहीं देगा। अमेरिकी सेना की सराहना ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना और सैन्य अधिकारियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक की सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकता है और इसके लिए सैन्य बल लगातार सक्रिय है। पहले क्या था प्रस्ताव? सोमवार को ट्रंप ने घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाया जाएगा। उनका तर्क था कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर होने वाले खर्च में अन्य देशों को भी योगदान देना चाहिए। हालांकि, अगले ही दिन उन्होंने इस योजना को वापस लेते हुए निवेश आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया। वैश्विक बाजारों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में अमेरिका की बदली हुई रणनीति पर ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार जगत की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि टोल योजना वापस लेने से तत्काल व्यापारिक अनिश्चितता कम हो सकती है, लेकिन ईरान को लेकर अमेरिका की सख्त नीति क्षेत्रीय तनाव को बनाए रख सकती है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Mouni Roy reacts to paparazzi while sitting in a car after a restaurant outing with Anusha Dandekar in Mumbai.
Mouni Roy Viral Video: पपाराजी पर भड़कीं मौनी रॉय, कार के अंदर तक रिकॉर्डिंग से बढ़ा विवाद; अनुषा दांडेकर ने संभाला मामला

Mouni Roy Viral Video: अभिनेत्री मौनी रॉय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पपाराजी पर नाराज़ होती दिखाई दे रही हैं। घटना उस समय हुई जब मौनी रॉय अभिनेत्री अनुषा दांडेकर के साथ मुंबई के एक रेस्टोरेंट से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठ रही थीं। इसी दौरान पपाराजी लगातार उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते रहे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कार के अंदर तक पहुंची रिकॉर्डिंग, नाराज़ हुईं मौनी वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले अनुषा दांडेकर कार में बैठती हैं और उसके बाद मौनी रॉय वहां पहुंचती हैं। चारों ओर मौजूद फोटोग्राफर लगातार कैमरे उनकी ओर किए हुए थे। वीडियो के अनुसार, रिकॉर्डिंग कार के काफी करीब तक जारी रही, जिससे मौनी स्पष्ट रूप से असहज नजर आईं। शुरुआत में उन्होंने खुद को शांत रखने की कोशिश की, लेकिन जब रिकॉर्डिंग नहीं रुकी तो उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा, "बंद करो... बंद करो इसे।" उनके चेहरे पर गुस्सा और असहजता साफ दिखाई दे रही थी। अनुषा दांडेकर ने शांत कराया माहौल स्थिति बिगड़ती देख अनुषा दांडेकर ने बीच-बचाव किया। उन्होंने पपाराजी से रिकॉर्डिंग रोकने का इशारा किया और साथ ही मौनी रॉय को भी शांत करने की कोशिश की। इसके बाद मामला धीरे-धीरे सामान्य हुआ और दोनों वहां से रवाना हो गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि निजी स्पेस का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि कुछ लोगों ने मौनी के गुस्से पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। हालांकि, वीडियो के आधार पर उनकी नाराज़गी के पीछे किसी व्यक्तिगत कारण की पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। हाल ही में निजी जिंदगी भी रही चर्चा में हाल के दिनों में मौनी रॉय अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। उनके और पति सूरज नांबियार के अलग होने की खबरों ने काफी चर्चा बटोरी थी। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में अपने बारे में फैली कुछ अफवाहों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि उनके बारे में कई गलत बातें कही गईं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। प्राइवेसी बनाम पपाराजी कल्चर पर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद एक बार फिर सेलिब्रिटीज़ की निजता और पपाराजी कल्चर को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर कवरेज की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या कलाकारों की निजी जगह का सम्मान किया जाना चाहिए। यह चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार जारी है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks on trade policy as the U.S. Supreme Court's ruling leads to the refund of billions of dollars in tariff collections to companies.
ट्रंप की टैरिफ नीति पर कोर्ट की रोक, अमेरिका को लौटाने पड़े 81 अरब डॉलर

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कंपनियों से वसूले गए करीब 81 अरब डॉलर (लगभग 6.7 लाख करोड़ रुपये) वापस करने पड़े हैं। अदालत ने ट्रंप प्रशासन की विवादित टैरिफ व्यवस्था को कानून के अनुरूप नहीं माना था। मई-जून में लौटाए गए 71 अरब डॉलर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिकी सरकार ने मई और जून के दौरान लगभग 71 अरब डॉलर कंपनियों को वापस कर दिए हैं। शेष राशि का भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। क्यों लगा था टैरिफ? राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन, यूरोप सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी सामान महंगे होंगे, अमेरिकी उत्पादों की मांग बढ़ेगी और घरेलू उद्योग को लाभ मिलेगा। हालांकि, कई बड़ी कंपनियों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष फरवरी में सुनाए गए फैसले में कहा कि संबंधित टैरिफ नियम कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद सरकार को कंपनियों से वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया गया। नए टैरिफ की तैयारी में ट्रंप अदालती फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन नए आयात शुल्क लागू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा टैरिफ व्यवस्था समाप्त होने के बाद कई देशों के आयात पर 10% से 12.5% तक नया शुल्क लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसका असर भारत, चीन, जापान, ब्रिटेन और ताइवान जैसे देशों के निर्यात पर पड़ सकता है। ब्राजील और यूरोप को भी चेतावनी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ब्राजील पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि यूरोपीय देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर नए कर लागू करते हैं, तो अमेरिका उनके उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नई टैरिफ नीति लागू करता है, तो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Cargo ships transit through the Strait of Hormuz as U.S. President Donald Trump announces a new security policy and proposed security fee amid rising regional tensions.
ट्रंप का बड़ा ऐलान: होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा, ईरान पर फिर नाकेबंदी; बाकी जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का "गार्डियन" होगा। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकेबंदी (Blockade) लागू करने की घोषणा की है और कहा है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी गैर-ईरानी व्यापारिक जहाजों से 20% सुरक्षा शुल्क (Security Fee) लिया जाएगा। ट्रंप ने Truth Social पर किया ऐलान डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा और अमेरिका इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के जहाजों और उसके व्यापारिक साझेदारों पर नाकेबंदी लागू रहेगी, जबकि अन्य देशों के जहाज इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था की लागत के बदले सभी कार्गो जहाजों पर 20% शुल्क लगाया जाएगा। सिर्फ ईरान और उसके साझेदार होंगे निशाने पर ट्रंप के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य वैश्विक व्यापार को रोकना नहीं बल्कि ईरान पर दबाव बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध केवल ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले जहाजों पर लागू होगा, जबकि अन्य देशों के लिए मार्ग खुला रहेगा। 20% सुरक्षा शुल्क की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अमेरिका का भारी खर्च होता है। इसी खर्च की भरपाई के लिए इस मार्ग से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल ट्रंप की घोषणा के बाद संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था (IMO) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एकतरफा शुल्क लगाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप नहीं माना जाता। कई शिपिंग विशेषज्ञों ने भी इस प्रस्ताव की वैधता और व्यवहारिकता पर सवाल उठाए हैं।  ईरान की चेतावनी ईरान की सैन्य कमान ने अमेरिका के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। ईरान ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा तथा इसके लिए अमेरिका और उसके सहयोगी जिम्मेदार होंगे।  क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नई पाबंदी वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकती है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Oil, LNG and LPG cargo ships crossing the Strait of Hormuz amid easing regional tensions
होर्मुज से भारत के लिए राहत की खबर: LPG, LNG और कच्चे तेल से लदे 30 जहाज निकले, 26 अब भी इंतजार में

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण प्रभावित हुई जहाजों की आवाजाही अब धीरे-धीरे सामान्य होती दिख रही है। भारत के लिए एलपीजी, एलएनजी और कच्चा तेल लेकर आने वाले कई जहाज इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। शिपिंग मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक भारत से जुड़े कुल 30 व्यावसायिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं। हालांकि अभी भी 26 जहाज इस मार्ग से गुजरने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 30 जहाजों ने पार किया रणनीतिक समुद्री मार्ग मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने वाले 30 जहाजों में ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की बड़ी खेप शामिल है। इनमें: 15 जहाज एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) लेकर भारत आ रहे हैं। 8 जहाज बल्क कार्गो यानी सामान्य औद्योगिक और व्यापारिक सामान लेकर चल रहे हैं। 7 जहाज कच्चे तेल (Crude Oil) के टैंकर हैं। इन जहाजों के सुरक्षित रूप से निकलने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शांति समझौते के बाद बढ़ी आवाजाही सूत्रों के मुताबिक 1 मार्च से 17 जून के बीच कुल 19 जहाजों ने यह मार्ग पार किया था। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा शांति समझौते के बाद 11 अतिरिक्त जहाज भी सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने में सफल रहे हैं। यह संकेत है कि क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रही हैं। विदेशी झंडे वाले जहाजों की भी बड़ी भूमिका भारत आने वाले 30 जहाजों में से 17 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक जहाज Marshall Islands के ध्वज के तहत संचालित बताए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में विदेशी ध्वज वाले जहाजों की भागीदारी सामान्य मानी जाती है, क्योंकि कई वैश्विक कंपनियां इन्हीं रजिस्ट्रियों का उपयोग करती हैं। अभी भी 26 जहाजों को है इंतजार हालांकि स्थिति में सुधार के बावजूद फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारत से जुड़े 26 जहाज अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इन जहाजों में शामिल हैं: 3 जहाज ऊर्जा और ईंधन (LPG, LNG और तेल) लेकर आ रहे हैं। 10 जहाज उर्वरक (Fertilizers) की खेप लेकर चल रहे हैं। 13 जहाज अन्य आवश्यक वस्तुएं और औद्योगिक सामान लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों के निकलने के बाद भारत की आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूती मिलने की संभावना है। क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह Iran और Oman के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को अरब सागर तथा ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इस मार्ग से होकर: सऊदी अरब इराक कुवैत संयुक्त अरब अमीरात ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात होता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए क्या हैं मायने? विशेषज्ञों का मानना है कि जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से: एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बेहतर होगी। कच्चे तेल की उपलब्धता बनी रहेगी। ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। उर्वरकों की आपूर्ति सुचारू रहने से कृषि क्षेत्र को राहत मिलेगी। वैश्विक व्यापार और शिपिंग लागत में स्थिरता आ सकती है। होर्मुज मार्ग के खुलने और जहाजों के निकलने से भारत सहित कई आयातक देशों ने राहत की सांस ली है।  

surbhi जून 25, 2026 0
Cargo ships carrying fertilizers safely pass through the Strait of Hormuz before renewed regional disruptions.
होर्मुज बंद होने से पहले भारत के लिए राहत, खाद से लदे 12 जहाज सुरक्षित निकले; टला बड़ा संकट

नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उर्वरक और कच्चा माल लेकर भारत आ रहे करीब 10 से 12 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा बंद होने से ठीक पहले इस रणनीतिक मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं। इससे देश में संभावित खाद संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है। व्यापार जगत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इन जहाजों में यूरिया, डीएपी और अमोनिया जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक और कच्चा माल लदा हुआ है। इनकी समय पर आवाजाही से खरीफ सीजन के दौरान किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। युद्ध की शुरुआत में फंस गए थे 16 जहाज ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत के लिए रवाना हुए कुल 16 जहाज प्रभावित हुए थे। इनमें शामिल थे— 8 जहाज यूरिया से लदे हुए 4 जहाज डीएपी (DAP) लेकर जा रहे थे 1 जहाज अमोनिया से भरा था 3 जहाज सल्फर लेकर आ रहे थे इन जहाजों के फंसने से भारत में उर्वरकों की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई थी। खरीफ सीजन के लिए अहम है यह आपूर्ति पश्चिम एशिया भारत के लिए उर्वरकों और उनके कच्चे माल का प्रमुख स्रोत है। जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। यदि यह आपूर्ति बाधित होती, तो किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती थी और बाजार में खाद की कीमतों में भी तेजी आ सकती थी। घरेलू उत्पादन पर भी पड़ा था असर होर्मुज मार्ग में व्यवधान के कारण एलएनजी (LNG) की आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे देश में यूरिया उत्पादन भी धीमा पड़ गया था। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने अतिरिक्त एलएनजी की व्यवस्था की और वैश्विक बाजार से यूरिया खरीदने के लिए नए टेंडर जारी किए। कीमतों में मिल सकती है राहत विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी रहती है, तो अमोनिया और सल्फर जैसे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे उर्वरकों की कीमतों में धीरे-धीरे नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, पूरी सप्लाई चेन के सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold bilateral talks during the G7 Summit in France on maritime security and strategic cooperation.
होर्मुज से लेकर ट्रेड तक, पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meets European leaders during the G7 Summit amid discussions on the India-European Union Free Trade Agreement.
भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साल के अंत तक लग सकती है मुहर, जी7 में बनी सहमति

  एवियन/नई दिल्ली: फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम करने पर जोर दिया है। भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर वार्ता पूरी होने की घोषणा की थी। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक बन सकता है। निर्यात शुल्क में होगी बड़ी कमी प्रस्तावित समझौते के तहत यूरोपीय संघ को होने वाले भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क में कमी आएगी। वहीं, भारत में आने वाले 97 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय निर्यात पर भी टैरिफ घटाए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पहुंचने का अवसर मिलेगा और भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है। भारत-जर्मनी संबंधों को मिलेगी नई गति जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और हरित अर्थव्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र लागू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। कई वैश्विक नेताओं से हुई द्विपक्षीय बैठकें जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, मिस्र, जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं से भी मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा लाभ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता लागू होने से भारतीय निर्यात को नई गति मिलेगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, वैश्विक व्यापार और निवेश परिदृश्य में भारत की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Rudraksha beads from Nepal as rising global demand sparks concerns over chemical use.
नेपाली रुद्राक्ष कारोबार में बढ़ी रसायनों की भूमिका, विशेषज्ञों ने गुणवत्ता को लेकर जताई चिंता

  नेपाल के पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाला रुद्राक्ष लंबे समय से धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता रहा है। भारत सहित कई देशों में इसकी बड़ी मांग है। हालांकि हाल के वर्षों में चीन से बढ़ती मांग ने रुद्राक्ष को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक उत्पाद में बदल दिया है। इसके साथ ही रुद्राक्ष उत्पादन में रसायनों के बढ़ते उपयोग को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। पारंपरिक खेती से वैश्विक कारोबार तक नेपाल के मकालू क्षेत्र सहित कई इलाकों में रुद्राक्ष की खेती दशकों से की जा रही है। स्थानीय किसान बताते हैं कि रुद्राक्ष उनके परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत रहा है। एलिएओकार्पस गैनिट्रस प्रजाति के पेड़ों से प्राप्त होने वाले ये बीज धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं। पहले रुद्राक्ष का प्रमुख बाजार भारत था, जहां इसे भगवान शिव से जुड़ी आस्था के कारण खरीदा जाता था। लेकिन पिछले एक दशक में चीन से मांग बढ़ने के बाद इसका व्यापार तेजी से विस्तारित हुआ है। चीन की मांग ने बदली बाजार की प्राथमिकताएं भारतीय खरीदार जहां रुद्राक्ष को मुख्य रूप से धार्मिक दृष्टिकोण से देखते हैं, वहीं चीन में इसकी मांग सजावटी वस्तु और आभूषण के रूप में बढ़ी है। इसके चलते बड़े आकार, आकर्षक बनावट और चमकदार स्वरूप वाले रुद्राक्षों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, बाजार की इसी मांग ने किसानों पर अधिक आकर्षक दिखने वाले रुद्राक्ष उत्पादन का दबाव बढ़ाया है। ग्रोथ रेगुलेटर के इस्तेमाल पर बढ़ी बहस कई किसानों का कहना है कि बेहतर आकार और आकर्षक स्वरूप पाने के लिए कुछ स्थानों पर प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (PGR) जैसे रसायनों का उपयोग किया जा रहा है। इनका प्रयोग पेड़ों के विकास और फल के आकार को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया जाता है। किसानों का एक वर्ग मानता है कि यह बाजार की मजबूरी बन गई है, जबकि अन्य लोग इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। पेड़ों और गुणवत्ता पर असर की आशंका कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक रासायनिक उपयोग से पेड़ों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। कुछ किसानों ने दावा किया है कि लगातार रसायनों के इस्तेमाल से पेड़ों की सेहत कमजोर होने और बीजों की प्राकृतिक संरचना में बदलाव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इन दावों पर व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई जा रही है। सरकारी मंजूरी और निगरानी पर सवाल रिपोर्टों के अनुसार, रुद्राक्ष उत्पादन में उपयोग किए जा रहे कुछ विशेष ग्रोथ रेगुलेटरों को लेकर नियामक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से इनके उपयोग, मात्रा और संभावित प्रभावों पर बहस जारी है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कृषि क्षेत्र में ग्रोथ रेगुलेटर का उपयोग असामान्य नहीं है, लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब इनका अत्यधिक या अनुचित मात्रा में प्रयोग किया जाता है। क्या उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य संबंधी चिंता करनी चाहिए? वर्तमान में ऐसी कोई व्यापक वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है कि रुद्राक्ष पर उपयोग किए गए ग्रोथ रेगुलेटर सीधे तौर पर त्वचा रोग या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं। फिर भी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उपभोक्ता विश्वसनीय स्रोतों से रुद्राक्ष खरीदें और उपयोग से पहले उसे अच्छी तरह साफ करें। यदि किसी व्यक्ति को त्वचा संबंधी संवेदनशीलता या एलर्जी की समस्या है, तो रुद्राक्ष धारण करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित हो सकता है। आस्था, व्यापार और संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती नेपाल में रुद्राक्ष आज केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के निर्यात उद्योग का हिस्सा बन चुका है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग किसानों के लिए आय के नए अवसर लेकर आई है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक गुणवत्ता, पारंपरिक खेती और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने की चुनौती भी सामने खड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता नियंत्रण, वैज्ञानिक निगरानी और टिकाऊ खेती के उपायों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अल्पकालिक लाभ की दौड़ इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकती है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Indian sailors affected amid rising maritime tensions in Hormuz Strait and Gulf of Oman.
होर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद भारत की चिंता बढ़ी, तीन भारतीयों की मौत पर अमेरिका से उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

  नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में बढ़ते समुद्री एवं सैन्य तनाव के बीच जहाजों पर हुई हालिया घटनाओं में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। इसके बाद भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ विदेशी ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुई सैन्य कार्रवाइयों के दौरान भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। भारत ने इस मुद्दे को अमेरिका के सामने उठाते हुए क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटना के बाद अमेरिकी अधिकारियों को भारत की चिंताओं से अवगत कराया गया और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवागमन वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रभावित जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अधिकारियों के अनुसार, हालिया घटनाओं में शामिल जहाज विदेशी ध्वज वाले थे, लेकिन उनमें भारतीय चालक दल के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे। कुछ जहाजों से चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि कुछ मामलों में भारतीय नागरिकों की मौत की सूचना मिली है। सरकार ने कहा है कि वह प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। मृतकों के परिवारों को सहायता बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मृत भारतीय नाविकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। हालिया घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत ने दोहराया है कि वह पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों के पक्ष में है तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता रहेगा।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi amid ongoing India-US trade deal negotiations.
मोदी को बताया दोस्त, फिर टैरिफ का दबाव; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच ट्रंप का दोहरा संदेश

  भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की जमकर तारीफ की है। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत कई देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भी पेश कर दिया है, जिससे वार्ता के बीच नई चुनौती खड़ी हो गई है। ट्रंप बोले- मोदी मेरे अच्छे मित्र हैं व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके अच्छे मित्र हैं और दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और हमारे रिश्ते बेहद अच्छे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पहले भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में अधिक लाभ मिलता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं और अमेरिका को भी बेहतर आर्थिक फायदा मिलने लगा है। नई दिल्ली में चार दिन चली अहम व्यापार वार्ता 1 जून से 4 जून तक नई दिल्ली में भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच विस्तृत व्यापार वार्ता हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। वार्ता में मुख्य रूप से निम्न मुद्दे शामिल रहे: वस्तुओं का व्यापार सीमा शुल्क प्रक्रियाएं व्यापार सुगमता गैर-टैरिफ बाधाएं आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम जारी है। समझौता अंतिम चरण में पहुंचा भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने हाल ही में संकेत दिया कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और वार्ता अब अंतिम चरण में है। वहीं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal भी कह चुके हैं कि अधिकांश मतभेद दूर हो चुके हैं और केवल कुछ तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा जारी है। नई टैरिफ नीति ने बढ़ाई अनिश्चितता ट्रेड डील में प्रगति के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि कुछ देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इन देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पाद कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) से तैयार किए गए हो सकते हैं। भारत समेत 54 अर्थव्यवस्थाओं पर उठाए सवाल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 54 देशों और अर्थव्यवस्थाओं की सूची जारी की है, जिन पर पर्याप्त आयात निगरानी न होने का आरोप लगाया गया है। इस सूची में भारत के अलावा कई प्रमुख देश शामिल हैं: China Japan Australia United Kingdom Saudi Arabia United Arab Emirates Singapore South Korea Türkiye यूएसटीआर के अनुसार जिन देशों के पास जबरन श्रम से बने उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, उन्हें अधिक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। कपड़ा और परिधान क्षेत्र पर विशेष फोकस प्रस्तावित नीति में वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल हैं। कुछ देशों को सीमित मात्रा में कम शुल्क पर अमेरिकी बाजार तक पहुंच दी जा सकती है, जबकि अन्य उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू रहेगा। भारत-अमेरिका रिश्तों में अवसर और चुनौती दोनों विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा दौर में भारत और अमेरिका दोनों व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। लेकिन टैरिफ और श्रम मानकों से जुड़े नए अमेरिकी प्रस्ताव वार्ता को जटिल बना सकते हैं। एक तरफ ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं और समझौते को लेकर आशावाद जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अतिरिक्त शुल्क की चेतावनी देकर दबाव की रणनीति भी अपना रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि दोनों देश व्यापारिक साझेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाते हैं या कुछ मुद्दे अब भी अड़चन बने रहते हैं।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Indian and US trade negotiators meet to finalize interim trade agreement and boost economic cooperation
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर आज से अहम बैठक, 4 दिन तक होगी बातचीत; व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने पर फोकस, बाजार पहुंच और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को अंतिम रूप देने की दिशा में सोमवार से चार दिवसीय उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो रही है। दोनों देशों के मुख्य व्यापार वार्ताकार समझौते के कानूनी मसौदे और विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के हाथों में होगा। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। फरवरी में बनी थी प्रारंभिक सहमति भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान में पारस्परिक रूप से लाभकारी अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इसके तहत दोनों देशों ने व्यापार बाधाओं को कम करने, निवेश बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। अब दोनों पक्षों के सामने इस समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने की चुनौती है, ताकि इसे औपचारिक रूप से लागू किया जा सके। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक के दौरान बाजार पहुंच (Market Access), गैर-शुल्कीय बाधाएं (Non-Tariff Measures), सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा व्यापक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अगले चरणों पर भी चर्चा होने की संभावना है। शुल्क कटौती पर रहेगा फोकस प्रस्तावित रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए कुछ शुल्कों में राहत देने की सहमति जताई थी। समझौते के अनुसार, भारत पर लागू कुछ आयात शुल्कों को कम करने और व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील देने पर बातचीत आगे बढ़नी थी। बाद में अमेरिका में न्यायिक और नीतिगत बदलावों के कारण वार्ता की समय-सीमा प्रभावित हुई। फरवरी में प्रस्तावित बैठक स्थगित कर दी गई थी, जिसके बाद अब दोनों पक्ष एक बार फिर बातचीत की मेज पर आमने-सामने होंगे। व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में अहम कदम विशेषज्ञों का मानना है कि यह चार दिवसीय वार्ता केवल अंतरिम समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के व्यापक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की नींव भी मजबूत कर सकती है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ता व्यापारिक सहयोग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। भारत-ओमान एफटीए का भी होगा औपचारिक एलान उधर, भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) सोमवार से प्रभावी होने जा रहा है। दोनों देश इस संबंध में औपचारिक घोषणा करेंगे। माना जा रहा है कि इससे खाड़ी क्षेत्र में भारत के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।  

surbhi जून 1, 2026 0
RBI annual report highlights global risks to India’s economy amid rising oil and trade tensions
RBI की बड़ी चेतावनी: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा अब विदेशों से

Reserve Bank of India की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अहम संकेत दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार देश की आर्थिक स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक परिस्थितियों से पैदा हो सकता है। रिजर्व बैंक ने साफ कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बाधाएं भारत की विकास रफ्तार पर असर डाल सकती हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था के बावजूद बढ़ी चिंता आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत उपभोक्ता मांग, सरकारी निवेश और स्वस्थ बैंकिंग सिस्टम के सहारे आगे बढ़ रही है। कॉरपोरेट और बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और उनका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया का तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। आरबीआई के मुताबिक इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने वैश्विक विकास दर के अनुमान घटा दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है या लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता और अधिक गंभीर है क्योंकि देश कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है। महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई आरबीआई ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत में महंगाई को फिर से बढ़ा सकती है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ता है। यानी पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकता है। शिपिंग संकट से उद्योगों पर दबाव केंद्रीय बैंक ने वैश्विक शिपिंग रूट्स में आ रही बाधाओं को भी बड़ी चिंता बताया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि समुद्री व्यापार प्रभावित होता है तो भारत में कच्चे माल और जरूरी उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल और कई औद्योगिक उत्पाद विदेशों से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर करते हैं। ऐसे में शिपिंग लागत बढ़ने का असर उत्पादन और कीमतों दोनों पर पड़ सकता है। वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का असर आरबीआई ने यह भी कहा कि दुनिया में बढ़ता संरक्षणवाद और बदलती व्यापार नीतियां भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकती हैं। भारत इस समय खुद को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यदि वैश्विक व्यापार धीमा पड़ता है तो इंजीनियरिंग, फार्मा और आईटी सेवाओं जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। शेयर बाजार में बढ़ सकती है हलचल रिपोर्ट में शेयर बाजार को लेकर भी सावधानी जताई गई है। आरबीआई का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। खासतौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर के ऊंचे वैल्यूएशन में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि आरबीआई ने किसी बड़े बाजार संकट की भविष्यवाणी नहीं की है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह जरूर दी है। फिर भी भारत की ग्रोथ पर भरोसा कायम इन सभी चुनौतियों के बावजूद आरबीआई ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताया है। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी निवेश और नए व्यापार समझौते आने वाले वर्षों में विकास को समर्थन देंगे। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारत पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत अर्थव्यवस्था बन चुका है, लेकिन अब देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक घटनाओं से पहले से अधिक जुड़ चुकी है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Royal Enfield launches new motorcycle models in Panama amid India’s growing business presence in Latin America
चीन से बढ़ती दूरी के बीच पनामा में मजबूत हो रही भारत की कारोबारी मौजूदगी, रॉयल एनफील्ड ने लॉन्च किए तीन नए मॉडल

लैटिन अमेरिका में भारत की कारोबारी और रणनीतिक मौजूदगी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में भारत की प्रतिष्ठित मोटरसाइकिल कंपनी रॉयल एनफील्ड ने पनामा में अपने तीन नए मॉडल लॉन्च किए हैं।इस लॉन्च को भारत की बढ़ती वैश्विक कारोबारी पहुंच और लैटिन अमेरिकी बाजार में भारतीय ब्रांड्स की मजबूत होती पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब पनामा और चीन के बीच संबंधों में लगातार तनाव बढ़ रहा है। भारतीय दूतावास की मौजूदगी में लॉन्च हुए नए मॉडल पनामा, निकारागुआ और कोस्टा रिका में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत के राजदूत सुमित सेठ की मौजूदगी में रॉयल एनफील्ड की तीन नई मोटरसाइकिलों को लॉन्च किया गया। पनामा में लॉन्च किए गए नए मॉडलों में गोअन क्लासिक 350, हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन और क्लासिक 650 शामिल हैं। भारतीय दूतावास ने इसे भारत की “एक्सपोर्ट स्टोरी” की बड़ी सफलता बताया और कहा कि चेन्नई से पनामा सिटी तक भारतीय ब्रांड्स की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। पनामा बना रॉयल एनफील्ड के लिए किफायती बाजार भारतीय दूतावास के मुताबिक, पनामा की खुली अर्थव्यवस्था और डॉलर आधारित मूल्य व्यवस्था के कारण यह क्षेत्र रॉयल एनफील्ड के लिए सबसे किफायती और संभावनाओं से भरे बाजारों में शामिल हो गया है। दूतावास ने कहा कि लैटिन अमेरिका में भारतीय कंपनियों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं और स्थानीय ग्राहकों के बीच भारतीय उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। 1901 से लगातार उत्पादन में बना हुआ है रॉयल एनफील्ड भारतीय दूतावास ने रॉयल एनफील्ड की ऐतिहासिक विरासत का भी उल्लेख किया। पोस्ट में कहा गया कि रॉयल एनफील्ड दुनिया के सबसे पुराने मोटरसाइकिल ब्रांड्स में से एक है, जो वर्ष 1901 से लगातार उत्पादन में बना हुआ है। पनामा में कंपनी की बढ़ती मौजूदगी को भारतीय ब्रांड्स पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत माना जा रहा है।   व्यापार के साथ सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत कर रहा भारत भारत केवल व्यापारिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी पनामा में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। हाल ही में भारतीय दूतावास ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 के आयोजन की तस्वीरें भी साझा की थीं। यह कार्यक्रम ओल्ड पनामा सिटी के ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल पर आयोजित किया गया था। इसके अलावा दूतावास ने भारत और पनामा के रिश्तों को “5Ts ऑफ टुगेदरनेस” से जोड़ते हुए बताया था कि दोनों देशों को ट्रैडिशन, ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट आपस में जोड़ते हैं। गणतंत्र दिवस समारोह में भी दिखी दोनों देशों की नजदीकी भारत और पनामा के बढ़ते संबंधों की झलक 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह में भी देखने को मिली थी। पनामा के राष्ट्रपति की ओर से मंत्री जुआन कार्लोस ओरिलाक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में करीब 500 मेहमानों ने भाग लिया और दोनों देशों की दोस्ती का जश्न मनाया गया। क्यों महत्वपूर्ण है पनामा? पनामा मध्य अमेरिका में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद रणनीतिक देश है, जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका को जोड़ता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान पनामा नहर (Panama Canal) है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है, जिससे जहाजों का सफर हजारों किलोमीटर कम हो जाता है। दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा इसी नहर से गुजरता है और हर साल करीब 14 हजार जहाज इसका इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना पनामा पनामा नहर के कारण यह देश अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम केंद्र बन गया है। चीन ने पिछले एक दशक में पनामा में अपने निवेश और प्रभाव को तेजी से बढ़ाया था। वर्ष 2017 में पनामा ने ताइवान से संबंध खत्म कर चीन को आधिकारिक मान्यता दी थी और बाद में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना में शामिल होने वाला पहला लैटिन अमेरिकी देश बना। इसके बाद चीनी कंपनियों ने पनामा नहर के आसपास बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश किए। अमेरिका की चिंता के बाद बिगड़ने लगे चीन-पनामा संबंध 2024 के बाद अमेरिका ने पनामा में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता जतानी शुरू की। वाशिंगटन को आशंका थी कि चीन व्यापारिक निवेश के जरिए रणनीतिक और सैन्य प्रभाव बढ़ा सकता है। इसके बाद अमेरिका ने पनामा पर चीन से दूरी बनाने का दबाव बढ़ाया। फरवरी 2025 में पनामा ने आधिकारिक तौर पर चीन की BRI परियोजना से खुद को अलग कर लिया। बाद में पनामा के सर्वोच्च न्यायालय ने चीनी कंपनी सीके हचिसन की सहायक कंपनी को दिए गए बंदरगाह संचालन समझौतों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया। भारत के लिए बढ़ रहा रणनीतिक और कारोबारी अवसर विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पनामा के बीच बढ़ती दूरी भारत के लिए नए कारोबारी और रणनीतिक अवसर पैदा कर सकती है। रॉयल एनफील्ड जैसे भारतीय ब्रांड्स की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत अब लैटिन अमेरिका में केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Indian and US officials sign rare earth minerals agreement to strengthen critical supply chains
चीन की पकड़ कमजोर करने साथ आए भारत-अमेरिका, Rare Earth सप्लाई चेन पर बड़ी डील

भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर बड़ा रणनीतिक समझौता किया है। दोनों देशों ने इन अहम संसाधनों की सप्लाई, माइनिंग और प्रोसेसिंग को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए नया द्विपक्षीय ढांचा तैयार किया है। इस समझौते को चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। क्वॉड बैठक के बाद हुआ बड़ा ऐलान विदेश मंत्री S. Jaishankar ने मंगलवार को जानकारी दी कि भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए अहम फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला द्विपक्षीय बातचीत और QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद लिया गया। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स बेहद अहम हो चुके हैं। ऐसे में भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना दोनों देशों की प्राथमिकता है। माइनिंग से प्रोसेसिंग तक साथ काम करेंगे दोनों देश इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। दोनों देश मिलकर ऐसी सप्लाई चेन तैयार करेंगे, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हो सके। इसके अलावा फाइनेंसिंग और तकनीकी सहयोग पर भी काम किया जाएगा, ताकि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता बनी रहे। अमेरिका ने भारत को बताया अहम रणनीतिक साझेदार अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी इस समझौते को रणनीतिक रिश्तों का बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स तक भरोसेमंद पहुंच बेहद जरूरी है। रुबियो ने कहा कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्था के लिए रेयर अर्थ संसाधनों की भूमिका और बढ़ने वाली है। क्यों अहम हैं Rare Earth और Critical Minerals? रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, मोबाइल, सेमीकंडक्टर, मिसाइल सिस्टम, सोलर पैनल और हाई-टेक डिफेंस उपकरणों में होता है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इन संसाधनों को लेकर तेजी से रणनीति बना रही हैं। फिलहाल रेयर अर्थ प्रोसेसिंग बाजार पर चीन का बड़ा दबदबा माना जाता है। यही वजह है कि भारत, अमेरिका और कई अन्य देश वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करने में जुटे हैं। चीन पर निर्भरता घटाने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी है। चीन कई बार रेयर अर्थ सप्लाई को लेकर सख्त रवैया अपनाता रहा है। ऐसे में भारत और अमेरिका की यह नई साझेदारी भविष्य में टेक्नोलॉजी, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम साबित हो सकती है।  

surbhi मई 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0