नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप और UV किरणों का असर त्वचा पर तेजी से दिखाई देने लगता है। लंबे समय तक धूप में रहने से टैनिंग, सनबर्न, ड्रायनेस, जलन और समय से पहले झुर्रियों जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बाजार में मिलने वाले कई प्रोडक्ट्स में केमिकल्स और आर्टिफिशियल फ्रेगरेंस मौजूद होते हैं, जो संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में एलर्जी या जलन पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से अब लोग नेचुरल और होममेड सनस्क्रीन की ओर रुख कर रहे हैं। होममेड सनस्क्रीन क्यों हो रहा है लोकप्रिय? घर पर तैयार किया गया सनस्क्रीन प्राकृतिक चीजों से बनता है, जिससे त्वचा को मॉइस्चराइज रखने और धूप के असर को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि यह मेडिकल ग्रेड सनस्क्रीन का पूरा विकल्प नहीं माना जाता, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में यह स्किन केयर रूटीन का अच्छा हिस्सा बन सकता है। खासकर हल्की धूप में यह त्वचा को राहत देने में सहायक माना जाता है। होममेड सनस्क्रीन बनाने के लिए जरूरी सामग्री नेचुरल सनस्क्रीन तैयार करने के लिए कुछ आसान चीजों की जरूरत होती है, जो घर में आसानी से मिल सकती हैं— • 2 चम्मच नारियल तेल • 2 चम्मच एलोवेरा जेल • 1 चम्मच शीया बटर • 1 चम्मच जिंक ऑक्साइड एलोवेरा त्वचा को ठंडक पहुंचाने में मदद करता है, जबकि नारियल तेल स्किन को मुलायम और मॉइस्चराइज रखने में सहायक माना जाता है। जिंक ऑक्साइड धूप के असर को कम करने में मदद कर सकता है। ऐसे तैयार करें नेचुरल सनस्क्रीन सबसे पहले शीया बटर और नारियल तेल को हल्का गर्म करके पिघला लें। इसके बाद इसमें एलोवेरा जेल मिलाएं और अच्छी तरह मिक्स करें। आखिर में जिंक ऑक्साइड डालकर मिश्रण को अच्छी तरह फेंट लें। तैयार मिश्रण को ठंडा होने के बाद साफ कंटेनर में भर लें। इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां धूप में निकलने से 15-20 मिनट पहले इसे चेहरे, गर्दन और हाथों पर लगाएं। ज्यादा पसीना आने या चेहरा धोने के बाद दोबारा लगाना बेहतर माना जाता है। किसी भी नई चीज को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। अगर त्वचा पर खुजली, जलन या लालपन महसूस हो तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर दें। तेज धूप में अतिरिक्त सुरक्षा भी जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार घर पर बने सनस्क्रीन की SPF क्षमता सीमित हो सकती है। इसलिए बहुत तेज धूप में टोपी, सनग्लासेस और फुल स्लीव कपड़ों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। सही स्किन केयर और सावधानी अपनाकर गर्मियों में त्वचा को स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गुलाब जल का इस्तेमाल सालों से त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। गर्मियों में यह स्किन को ठंडक देने के साथ चेहरे को फ्रेश और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है और इसे अपनी डेली ब्यूटी रूटीन में शामिल करना भी बेहद आसान है। चेहरे को देता है इंस्टेंट फ्रेशनेस दिनभर धूल, पसीने और प्रदूषण की वजह से चेहरा थका हुआ नजर आने लगता है। ऐसे में गुलाब जल चेहरे को तुरंत ताजगी देने का काम करता है। इसे कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाया जा सकता है या फिर स्प्रे बोतल में भरकर फेस मिस्ट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे त्वचा साफ और तरोताजा महसूस होती है। आंखों की थकान करता है दूर लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों में जलन और थकान हो सकती है। गुलाब जल में भीगी कॉटन को कुछ मिनट आंखों पर रखने से आंखों को ठंडक मिलती है और थकान कम होती है। बालों को बनाता है मुलायम और खुशबूदार गुलाब जल बालों के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। शैंपू के बाद इसे बालों पर स्प्रे करने से बाल मुलायम महसूस होते हैं और उनमें अच्छी खुशबू आती है। कई लोग इसे हेयर मास्क में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे बालों को अतिरिक्त नमी मिलती है। मेकअप को लंबे समय तक रखता है फ्रेश गुलाब जल एक नेचुरल फेस मिस्ट की तरह काम करता है। मेकअप से पहले और बाद में इसका इस्तेमाल करने से चेहरा फ्रेश दिखता है और मेकअप लंबे समय तक टिका रहता है। स्किन की जलन और गर्मी से दिलाता है राहत तेज धूप और गर्मी से त्वचा में जलन या लालपन हो जाए तो ठंडा गुलाब जल लगाने से आराम मिलता है। यह त्वचा को ठंडक देकर उसे रिलैक्स और फ्रेश महसूस कराता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आने लगती है। कई बार सनटैन, जलन और रेडनेस जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में लोग महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन हर बार ये सुरक्षित या असरदार हों, यह जरूरी नहीं। ऐसे में घर पर बना दही और खीरे का फेस पैक एक आसान, सस्ता और नैचुरल उपाय बन सकता है, जो त्वचा को ठंडक और निखार देता है। क्यों फायदेमंद है दही और खीरा? दही और खीरा दोनों ही स्किन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को मुलायम बनाने और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। वहीं खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो त्वचा को हाइड्रेट रखता है और ठंडक प्रदान करता है। इन दोनों का संयोजन स्किन को फ्रेश, साफ और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। साथ ही यह सनबर्न और टैनिंग से राहत देने में भी कारगर है। फेस पैक बनाने का आसान तरीका इस फेस पैक को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। 2 चम्मच ताजा दही लें आधा खीरा कद्दूकस करके मिलाएं चाहें तो 1 चम्मच शहद भी जोड़ सकते हैं इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार कर लें। लगाने का सही तरीका फेस पैक लगाने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें, ताकि धूल और गंदगी हट जाए। इसके बाद तैयार पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं। इसे करीब 20 मिनट तक सूखने दें। सूखने के बाद ठंडे पानी से हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लें। इससे त्वचा तुरंत साफ और ठंडी महसूस होगी। बेहतर परिणाम के लिए इस फेस पैक का इस्तेमाल हफ्ते में 2–3 बार किया जा सकता है। क्या मिलेंगे फायदे? इस फेस पैक के नियमित उपयोग से त्वचा को ठंडक मिलती है और सनटैन कम होता है। यह स्किन को मॉइस्चराइज करता है, जिससे चेहरा सॉफ्ट और हेल्दी दिखता है। इसके अलावा यह पिंपल्स और ऑयली स्किन की समस्या को कम करने में भी मदद करता है। अगर आप गर्मियों में बिना ज्यादा खर्च के अपनी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाना चाहते हैं, तो दही और खीरे का यह फेस पैक एक बेहतरीन विकल्प है। यह प्राकृतिक उपाय न सिर्फ आसान है, बल्कि नियमित उपयोग से आपकी स्किन को ताजगी और निखार भी देता है।
करीब दो दशक पहले रिलीज हुई The Devil Wears Prada ने फैशन की दुनिया को देखने का नजरिया बदल दिया था। फिल्म में Miranda Priestly का किरदार आज भी फैशन इंडस्ट्री के सबसे प्रभावशाली और सख्त व्यक्तित्वों में गिना जाता है। लेकिन 2026 में हालात बदल चुके हैं–अब ‘मिरांडा प्रीस्टली’ सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर मौजूद हजारों ‘मिनी मिरांडा’ का रूप ले चुकी है। फैशन स्नॉब से ‘डिजिटल एक्सपर्ट’ तक का सफर पहले फैशन का एक तय ढांचा था–रनवे से मैगजीन, फिर रिटेल और अंत में आम लोगों तक। इस प्रक्रिया को कंट्रोल करने वाले कुछ गिने-चुने एडिटर्स और एक्सपर्ट्स होते थे। आज यह पूरा सिस्टम बदल चुका है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और लाइव स्ट्रीमिंग के दौर में हर कोई फैशन का विश्लेषक बन चुका है। अब सिर्फ यह कहना काफी नहीं कि कोई आउटफिट अच्छा है। आपको यह भी बताना पड़ता है कि वह किस डिजाइनर से प्रेरित है, किस दशक का संदर्भ है और उसका ‘हाउस कोड’ क्या है। ‘Cerulean Sweater’ मोनोलॉग का असर आज भी कायम फिल्म का मशहूर ‘Cerulean Sweater’ सीन आज भी इंटरनेट कल्चर में जिंदा है। इस सीन ने यह सिखाया कि फैशन में कुछ भी रैंडम नहीं होता–हर चीज का इतिहास और संदर्भ होता है। आज यही सोच सोशल मीडिया पर और ज्यादा गहराई से दिखती है, जहां हर लुक को ‘डिकोड’ किया जाता है। सोशल मीडिया ने बदली फैशन की परिभाषा आज फैशन शो लाइव देखे जाते हैं, तुरंत क्लिप होते हैं और उसी समय जज भी किए जाते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लोग तुरंत यह तय कर देते हैं कि कोई लुक ‘ऑन थीम’ है या नहीं। इस नई दुनिया में: फैशन अब ज्यादा ‘डेमोक्रेटिक’ हो गया है लेकिन साथ ही ‘सही’ और ‘गलत’ की नई बहस भी शुरू हो गई है अब महंगे कपड़े पहनना ही नहीं, सही संदर्भ जानना भी जरूरी हो गया है नया ट्रेंड: ‘Effortless’ दिखना, लेकिन जानकार होना आज का फैशन स्नॉब खुलकर दिखता नहीं, बल्कि ‘कैजुअल’ अंदाज में अपनी समझ दिखाता है। आपका लुक चाहे सिंपल हो, लेकिन उसमें छिपे फैशन रेफरेंस आपकी पहचान बनाते हैं। क्या बदला है इन 20 सालों में? पहले फैशन ‘एक्सक्लूसिव’ था, अब ‘एक्सेसिबल’ है पहले कुछ लोग ट्रेंड तय करते थे, अब हर कोई राय देता है लेकिन स्नॉबरी खत्म नहीं हुई–उसने सिर्फ रूप बदल लिया है आज की ‘मिरांडा प्रीस्टली’ कौन है? आज की मिरांडा कोई ऑफिस में बैठी बॉस नहीं, बल्कि एक कंटेंट क्रिएटर है– जो अपने घर से, कैमरा और इंटरनेट के जरिए फैशन को जज करती है और ट्रेंड सेट करती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप, प्रदूषण और बाहर ज्यादा समय बिताने की वजह से त्वचा पर टैनिंग की समस्या आम हो जाती है। चेहरे, हाथ और पैरों की त्वचा का रंग काला पड़ने लगता है, जिससे न सिर्फ खूबसूरती प्रभावित होती है बल्कि आत्मविश्वास भी कम हो सकता है। ऐसे में लोग टैनिंग हटाने के लिए बाजार में मिलने वाले कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनमें मौजूद केमिकल्स कभी-कभी त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। प्राकृतिक नुस्खे हैं सुरक्षित और असरदार विकल्प विशेषज्ञों के अनुसार, टैनिंग हटाने के लिए घरेलू और प्राकृतिक उपाय ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी होते हैं। ये नुस्खे आसानी से उपलब्ध सामग्री से तैयार होते हैं और त्वचा पर हल्का असर डालते हुए धीरे-धीरे नैचुरल ग्लो वापस लाने में मदद करते हैं। नींबू और शहद का उपयोग नींबू में मौजूद प्राकृतिक ब्लीचिंग गुण टैनिंग को हल्का करने में मदद करते हैं, जबकि शहद त्वचा को मॉइस्चराइज करता है। इन दोनों का मिश्रण 10-15 मिनट तक लगाने से त्वचा साफ और मुलायम बनती है। दही-बेसन फेस पैक दही त्वचा को ठंडक देता है और बेसन डेड स्किन हटाने में मदद करता है। इस पैक को हफ्ते में 2-3 बार लगाने से धीरे-धीरे टैनिंग कम होने लगती है। एलोवेरा और खीरे का असर एलोवेरा जेल त्वचा को शांत करता है और उसे हेल्दी बनाता है। वहीं खीरा और गुलाब जल का मिश्रण त्वचा को ताजगी देता है और स्किन टोन सुधारता है। हल्दी और दूध का पैक हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जबकि दूध त्वचा को पोषण देता है। यह मिश्रण टैनिंग हटाने के साथ त्वचा में निखार भी लाता है। नियमित इस्तेमाल से मिलेगा बेहतर परिणाम इन घरेलू उपायों का नियमित उपयोग करने से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगता है। साथ ही धूप में निकलते समय त्वचा की सुरक्षा करना भी जरूरी है, ताकि टैनिंग दोबारा न हो।
आज के दौर में जहां लोग इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, वहीं स्किन एक्सपर्ट्स लगातार नेचुरल उपायों की ओर लौटने की सलाह दे रहे हैं। लंबे समय तक केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में सत्तू फेस मास्क एक सस्ता, सुरक्षित और असरदार घरेलू विकल्प बनकर सामने आ रहा है, जो त्वचा को अंदर से पोषण देकर नेचुरल ग्लो देता है। क्यों खास है सत्तू फेस मास्क? सत्तू, जो आमतौर पर खाने में इस्तेमाल होता है, अब स्किन केयर रूटीन में भी अपनी जगह बना रहा है। इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को साफ करने, डेड स्किन हटाने और रंगत सुधारने में मदद करते हैं। सत्तू फेस मास्क के फायदे 1. स्किन टोन में सुधार सत्तू का नियमित इस्तेमाल त्वचा की रंगत को निखारता है और उसे साफ व चमकदार बनाता है। 2. डेड स्किन सेल्स हटाने में मददगार यह फेस मास्क त्वचा की गहराई से सफाई करता है और डेड सेल्स को हटाकर स्किन को फ्रेश बनाता है। 3. दाग-धब्बे और मुंहासों से राहत सत्तू, हल्दी और शहद का मिश्रण एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जिससे मुंहासे और दाग-धब्बे कम हो सकते हैं। घर पर कैसे बनाएं सत्तू फेस मास्क? 2 चम्मच सत्तू लें एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाएं 1 चम्मच शहद डालें जरूरत के अनुसार गुलाब जल मिलाकर स्मूद पेस्ट तैयार करें लगाने का सही तरीका इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं 15-20 मिनट तक सूखने दें इसके बाद साफ पानी से चेहरा धो लें हफ्ते में 2-3 बार इस्तेमाल करें ध्यान रखें: अगर लगाने के बाद जलन या खुजली महसूस हो, तो तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी पहचान बना चुकीं प्रियंका चोपड़ा सिर्फ अपने अभिनय ही नहीं, बल्कि अपनी दमकती त्वचा के लिए भी जानी जाती हैं। उनकी “ग्लास स्किन” जैसी चमक के पीछे महंगे प्रोडक्ट्स ही नहीं, बल्कि घरेलू नुस्खे और अनुशासित लाइफस्टाइल का बड़ा योगदान है। घरेलू नुस्खों पर भरोसा प्रियंका चोपड़ा अक्सर बताती हैं कि उनकी स्किनकेयर का बड़ा हिस्सा उनकी मां और दादी के बताए पारंपरिक नुस्खों से आता है। राइस वॉटर + नारियल तेल मास्क: यह मिश्रण स्किन को टाइट करने और पोर्स को छोटा करने में मदद करता है इसे सोने से पहले कुछ मिनट के लिए लगाने की सलाह दी जाती है 6-स्टेप नाइट रूटीन प्रियंका अपनी त्वचा की देखभाल के लिए एक सख्त नाइट स्किनकेयर रूटीन फॉलो करती हैं। मेकअप हटाना डीप क्लीनिंग मॉइश्चराइजिंग स्किन को हाइड्रेट रखना साथ ही, वह नियमित रूप से प्रोफेशनल फेशियल भी करवाती हैं। हेल्दी ड्रिंक्स से आती है नेचुरल ग्लो प्रियंका की स्किनकेयर सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से भी होती है। सौंफ, जीरा और धनिया का पानी: यह ड्रिंक पाचन सुधारता है और एसिडिटी कम करता है अदरक और शहद का शॉट: इम्यूनिटी बढ़ाने और गले की खराश दूर करने में मददगार अनोखा टिप भी किया शेयर एक बार प्रियंका ने मजाकिया अंदाज में बताया कि पैरों पर कच्चा लहसुन रगड़ने से सूजन कम हो सकती है। हालांकि, ऐसे उपाय अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। क्यों खास है उनका तरीका? प्रियंका चोपड़ा का मानना है कि असली खूबसूरती अंदर से आती है। संतुलित आहार हेल्दी लाइफस्टाइल नियमित स्किनकेयर इन तीनों का मेल ही उनकी ग्लोइंग स्किन का असली राज है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।