आज का सोना-चांदी भाव, 8 जून 2026: पिछले सप्ताह आई तेज गिरावट के बाद सोमवार को सर्राफा बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। हालांकि सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी नहीं आई है, लेकिन गिरावट का सिलसिला फिलहाल थमता नजर आ रहा है। बीते तीन दिनों में सोना करीब 35,000 रुपये प्रति 100 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी में भी भारी कमजोरी दर्ज की गई थी। ऐसे में निवेशकों और खरीदारी की योजना बना रहे लोगों की नजर आज के ताजा भाव पर बनी हुई है। आज कितना है सोने का भाव? देश के अधिकांश प्रमुख शहरों में आज 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,52,720 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी मामूली नरमी देखने को मिली। 24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹1,55,800 ₹1,55,810 ₹10 कम लखनऊ ₹1,55,900 ₹1,55,910 ₹10 कम रांची ₹1,52,720 ₹1,52,730 ₹10 कम दिल्ली ₹1,55,900 ₹1,55,910 ₹10 कम मुंबई ₹1,52,720 ₹1,52,730 ₹10 कम कोलकाता ₹1,52,720 ₹1,52,730 ₹10 कम अन्य कैरेट के सोने के भाव 22 कैरेट सोना: ₹1,39,990 प्रति 10 ग्राम 18 कैरेट सोना: ₹1,14,540 प्रति 10 ग्राम चांदी के दाम में कैसी रही चाल? चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों के दौरान बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव के चलते चांदी करीब 15,000 रुपये प्रति किलो तक टूट गई थी। आज बाजार में चांदी के भाव लगभग स्थिर बने हुए हैं। चांदी का भाव (प्रति किलोग्राम) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹2,65,000 ₹2,65,000 कोई बदलाव नहीं लखनऊ ₹2,65,000 ₹2,65,000 कोई बदलाव नहीं रांची ₹2,65,000 ₹2,65,000 कोई बदलाव नहीं Delhi ₹2,64,900 ₹2,65,000 ₹100 कम मुंबई ₹2,64,900 ₹2,65,000 ₹100 कम चेन्नई ₹2,69,900 ₹2,70,000 ₹100 कम निवेशकों के लिए क्या है संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कीमती धातुओं में अभी भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल बाजार में स्थिरता के संकेत जरूर हैं, लेकिन आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम कीमतों की दिशा तय करेंगे।
शादी-ब्याह के सीजन और निवेश के बढ़ते रुझान के बीच सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए 3 जून 2026 की शुरुआत राहत भरी खबर लेकर आई है। आज घरेलू बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन लगातार ऊंचे स्तर पर बने हुए कीमती धातुओं के दामों के बीच यह खरीदारों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सोने की कीमत में आई हल्की नरमी आज 24 कैरेट सोने की कीमत में 10 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद 24 कैरेट सोना 1,56,210 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं 22 कैरेट सोना भी 10 रुपये सस्ता होकर 1,43,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव और निवेशकों की सतर्कता के चलते घरेलू बाजार में कीमतों में यह मामूली नरमी देखने को मिली है। प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का भाव पटना ₹1,56,260 लखनऊ ₹1,56,360 रांची ₹1,56,210 दिल्ली ₹1,56,360 मुंबई ₹1,56,210 कोलकाता ₹1,56,210 बेंगलुरु ₹1,56,210 चेन्नई ₹1,58,170 चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। आज चांदी 100 रुपये प्रति किलो सस्ती होकर 2,79,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। पिछले कुछ दिनों से स्थिर रहने के बाद चांदी में आई यह नरमी बाजार में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रमुख शहरों में चांदी का भाव (प्रति किलो) शहर आज का भाव पटना ₹2,79,900 लखनऊ ₹2,79,900 रांची ₹2,79,900 दिल्ली ₹2,79,900 मुंबई ₹2,79,900 कोलकाता ₹2,79,900 बेंगलुरु ₹2,79,900 चेन्नई ₹2,89,900 खरीदारी का सही समय? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतें अभी भी रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बनी हुई हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। वहीं शादी-ब्याह के लिए खरीदारी करने वालों को कीमतों में मामूली राहत जरूर मिली है। हालांकि निवेश से पहले बाजार की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है।
सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अहम अपडेट है। 30 मई 2026 को सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। जहां चांदी में एक ही दिन में ₹5,000 प्रति किलोग्राम की बड़ी तेजी दर्ज की गई, वहीं सोना भी ₹1,600 प्रति 10 ग्राम तक मजबूत हुआ। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतों, अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते, महंगाई के आंकड़ों और घरेलू शादी-ब्याह के सीजन की मांग ने सोने और चांदी को समर्थन दिया है। दिल्ली सर्राफा बाजार में क्या रहे भाव? राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को: सोना: ₹1,62,000 प्रति 10 ग्राम चांदी: ₹2,74,700 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। आज के ताजा गोल्ड रेट गुड रिटर्न्स के अनुसार शनिवार सुबह: 24 कैरेट सोना: ₹1,57,650 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना: ₹1,44,510 प्रति 10 ग्राम 18 कैरेट सोना: ₹1,18,240 प्रति 10 ग्राम चांदी की कीमत: ₹2,80,100 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। प्रमुख शहरों में सोने का भाव (30 मई 2026) शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट Delhi ₹1,57,190 ₹1,44,100 ₹1,17,930 Mumbai ₹1,57,040 ₹1,43,950 ₹1,17,780 Kolkata ₹1,57,640 ₹1,44,500 ₹1,18,230 Chennai ₹1,59,280 ₹1,46,000 ₹1,22,550 Lucknow ₹1,57,790 ₹1,44,650 ₹1,18,380 Kanpur ₹1,57,790 ₹1,44,650 ₹1,18,380 Patna ₹1,57,690 ₹1,44,550 ₹1,18,280 Jaipur ₹1,57,790 ₹1,44,650 ₹1,18,380 Indore ₹1,57,690 ₹1,44,550 ₹1,18,280 Bhopal ₹1,57,690 ₹1,44,550 ₹1,18,280 MCX पर कैसा रहा कारोबार? मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। सोना अगस्त डिलीवरी: ₹1,61,059 प्रति 10 ग्राम (₹146 की बढ़त) जून डिलीवरी: ₹1,56,000 (₹925 की गिरावट) अक्टूबर डिलीवरी: ₹1,64,732 (₹624 की बढ़त) चांदी जुलाई डिलीवरी: ₹2,67,000 प्रति किलोग्राम ₹2,537 की गिरावट दर्ज कीमतों में तेजी की वजह क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार, कई कारण सोने और चांदी को समर्थन दे रहे हैं: 1. वैश्विक अनिश्चितता अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। 2. ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें अमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद निवेशक Federal Reserve की भविष्य की ब्याज दर नीति का आकलन कर रहे हैं, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। 3. शादी-ब्याह की मांग भारत में शादी और मांगलिक कार्यक्रमों के सीजन के चलते ज्वेलरी की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों को समर्थन मिल रहा है। 4. चांदी को औद्योगिक सपोर्ट चांदी को केवल सुरक्षित निवेश ही नहीं, बल्कि औद्योगिक मांग का भी लाभ मिल रहा है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इसकी खपत लगातार बढ़ रही है। आगे क्या रह सकता है रुख? कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी पर किसी बड़े बिकवाली दबाव की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और घरेलू मांग दोनों कीमतों को सहारा दे रहे हैं। हालांकि निवेशकों को खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर्स से ताजा रेट जरूर जांच लेना चाहिए क्योंकि शहर, टैक्स और मेकिंग चार्ज के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।