government health scheme

Indian dengue vaccine approval with healthcare worker holding vaccine vial for dengue prevention campaign.
डेंगू वैक्सीन को मिली मंजूरी! भारत में कब शुरू होगा टीकाकरण, जानें सरकार की पूरी तैयारी

Dengue Vaccine India: भारत में डेंगू की रोकथाम को लेकर एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। देश में डेंगू से बचाव के लिए पहली वैक्सीन को नियामकीय मंजूरी मिल गई है। हर साल मानसून और उसके बाद डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होती है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन भविष्य में डेंगू के गंभीर मामलों और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद भी आम लोगों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण व्यवस्था और सरकारी दिशा-निर्देश जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं। इसलिए सार्वजनिक स्तर पर टीकाकरण शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है। क्यों जरूरी है डेंगू वैक्सीन? डेंगू मच्छरों से फैलने वाली एक वायरल बीमारी है, जो तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, प्लेटलेट्स की कमी और गंभीर मामलों में जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकती है। हर साल देश के कई राज्यों में डेंगू के मामलों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में प्रभावी वैक्सीन संक्रमण की गंभीरता कम करने और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को घटाने में मददगार साबित हो सकती है। कब शुरू हो सकता है टीकाकरण? विशेषज्ञों के अनुसार, मंजूरी मिलने के बाद वैक्सीन के बड़े स्तर पर उत्पादन, सप्लाई चेन तैयार करने और सरकारी वितरण प्रणाली को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो 2027 की पहली छमाही के दौरान निजी अस्पतालों और अधिकृत स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी उपलब्धता शुरू होने की संभावना है। वहीं, इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में कब शामिल किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा लिया जाएगा। वैक्सीन कितनी प्रभावी मानी गई है? उपलब्ध क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों के अनुसार, यह वैक्सीन पुष्ट डेंगू मामलों के खिलाफ लगभग 80 प्रतिशत तक प्रभावी पाई गई है, जबकि डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को करीब 90 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता दिखाई है। हालांकि, यह 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, इसलिए मच्छरों से बचाव के उपाय आगे भी जरूरी रहेंगे। किन लोगों को मिल सकती है प्राथमिकता? यदि सरकार चरणबद्ध तरीके से टीकाकरण अभियान शुरू करती है, तो शुरुआती चरण में इन लोगों को प्राथमिकता मिल सकती है— डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग बार-बार डेंगू प्रकोप वाले राज्यों के निवासी 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के पात्र व्यक्ति उच्च जोखिम वाले समूह स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर्स (यदि सरकारी नीति में शामिल किए जाएं) अंतिम पात्रता और दिशा-निर्देश सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार तय किए जाएंगे। सरकार की क्या होगी भूमिका? डेंगू वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएंगी। वैक्सीन की गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी चरणबद्ध टीकाकरण रणनीति तैयार करना जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल करने पर निर्णय लेना राज्यों के साथ मिलकर वितरण और आपूर्ति सुनिश्चित करना लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाना लोगों को क्या होंगे फायदे? गंभीर डेंगू का खतरा कम हो सकता है। अस्पताल में भर्ती होने की संभावना घट सकती है। डेंगू से होने वाली जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर मौसमी दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर हो सकती है। वैक्सीन के बाद भी बचाव क्यों जरूरी रहेगा? विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन डेंगू से सुरक्षा का एक मजबूत माध्यम है, लेकिन यह मच्छरों के प्रजनन को नहीं रोकती। इसलिए बचाव के लिए ये उपाय अपनाना जरूरी रहेगा— घर और आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें। मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। तेज बुखार, शरीर दर्द या सिरदर्द होने पर तुरंत जांच कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचें। ध्यान रखें :- डेंगू वैक्सीन को मंजूरी मिलना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन आम लोगों के लिए इसकी उपलब्धता, कीमत, टीकाकरण की शुरुआत और राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किए जाने का अंतिम फैसला सरकार और संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। तब तक डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा और साफ-सफाई के उपाय सबसे प्रभावी बचाव बने रहेंगे।

anmol जुलाई 25, 2026 0
ayushman bharat scheme
बंगाल में लागू हुई आयुष्मान भारत योजना, लाखों परिवारों को मिलेगा मुफ्त इलाज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य की नई भाजपा सरकार ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को लागू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस फैसले के बाद राज्य के लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “डबल इंजन सरकार” का लाभ बताया। माना जा रहा है कि यह योजना बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।   क्या है आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। योजना का लाभ सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा। गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान मरीजों को अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा।   किन लोगों को मिलेगा फायदा योजना का लाभ सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) में शामिल गरीब परिवारों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को मिलेगा। पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।   कैसे बनेगा आयुष्मान कार्ड सरकार ने कार्ड बनाने की प्रक्रिया को आसान रखने की बात कही है। पात्र सूची में नाम होने पर आधार आधारित सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद सरकारी सहायता केंद्र या योजना से जुड़े अस्पतालों के माध्यम से आयुष्मान कार्ड जारी किया जाएगा। इसी कार्ड के जरिए मरीज कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकेंगे।   राज्य के बाहर भी मिलेगा इलाज इस योजना के लागू होने के बाद बंगाल के लोग देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। यानी दूसरे राज्यों में भी आयुष्मान भारत का लाभ मिलेगा। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है।

Unknown मई 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0