Hardeep Singh Puri

Petrol pump dispensing E20 fuel as debate continues over mileage, engine performance, and India's ethanol blending policy.
E20 पेट्रोल पर क्यों मचा है विवाद? माइलेज, इंजन और सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सरकार ने दी पूरी सफाई

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर माइलेज घटने, इंजन खराब होने और पुराने वाहनों पर असर पड़ने जैसी बातें कही जा रही हैं। वहीं, कुछ लोगों ने इसे आम लोगों पर किया जा रहा "प्रयोग" भी बताया। अब इन सभी सवालों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। E20 पर अचानक विवाद क्यों शुरू हुआ? हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, E20 कोई नया ईंधन नहीं है। यह करीब दो वर्षों से देश में उपलब्ध है, जबकि इससे पहले E15 पेट्रोल का भी लंबे समय तक उपयोग किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि E20 से इतनी बड़ी समस्या होती, तो यह विवाद पहले ही सामने आ जाता। मंत्री का मानना है कि E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की लॉन्चिंग के बाद ही E20 को लेकर भ्रम फैलना शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सरकार ने क्या कहा? हाल ही में यह दावा किया गया था कि E20 के जरिए करोड़ों भारतीयों पर प्रयोग किया जा रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि अदालत में मामला भारत पेट्रोलियम (BPCL) और एक एथेनॉल आवंटन से जुड़े विवाद का था, न कि E20 कार्यक्रम की वैधता का। केंद्र सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है। बाद में अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि अदालत में E20 कार्यक्रम को किसी प्रकार का "प्रयोग" नहीं बताया गया था। क्या E20 से माइलेज कम हो जाता है? मंत्री ने माना कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है। ऐसे में कुछ वाहनों में माइलेज में हल्की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि माइलेज कई अन्य बातों पर भी निर्भर करता है, जैसे— वाहन का मॉडल ड्राइविंग का तरीका सड़क और ट्रैफिक की स्थिति वाहन की गति इसलिए हर वाहन में माइलेज पर एक जैसा असर नहीं पड़ता। क्या पुराने वाहनों के इंजन पर पड़ता है असर? पुराने वाहनों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मंत्री ने जवाब दिया। उनके अनुसार कुछ मामलों में रबर गैस्केट जैसे कुछ पुर्जों को तय समय से पहले बदलना पड़ सकता है, लेकिन इसे इंजन की गंभीर तकनीकी समस्या नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वाहन निर्माता कंपनियों ने E20 की वजह से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की कोई पुष्टि नहीं की है। साथ ही, Hero MotoCorp द्वारा E20 इस्तेमाल करने वाले बड़ी संख्या में वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई। क्या पेट्रोल पंपों पर E15 और E20 दोनों मिलेंगे? कई वाहन मालिक चाहते हैं कि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने का विकल्प मिले। हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल E15 और E20 दोनों को एक साथ उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है। मंत्री के अनुसार इसके लिए अलग-अलग स्टोरेज, सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, जिससे संचालन जटिल हो जाएगा। सरकार E20 को क्यों दे रही है बढ़ावा? सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन परिवर्तन की योजना नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है। सरकार के मुताबिक इस कार्यक्रम से अब तक करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। भारत अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में एथेनॉल आधारित ईंधन पर जोर देने से आयात पर निर्भरता कम होगी और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित किया जा सकेगा। क्या कहते हैं मौजूदा हालात? सरकार का कहना है कि E20 को लेकर फैली कई आशंकाओं का अब तक कोई ठोस तकनीकी प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, माइलेज और कुछ पुराने वाहनों के रखरखाव को लेकर मामूली बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विस्तार के साथ यह स्पष्ट होगा कि देश की नई ईंधन नीति आम उपभोक्ताओं और ऑटोमोबाइल उद्योग पर कितना प्रभाव डालती है।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Fuel dispenser at a petrol station promoting E85 ethanol fuel as a cheaper alternative to E20 petrol in India.
E85 Fuel Update: सरकार की नई तैयारी, जल्द मिल सकता है E20 से 20 रुपये सस्ता ईंधन

देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार अब E85 फ्यूल को बाजार में लाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, इस ईंधन की कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम रखने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन खर्च कम होगा, एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता भी घटेगी। हालांकि, यह सस्ता ईंधन फिलहाल सभी वाहन चालकों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। क्या है E85 फ्यूल? E85 एक विशेष प्रकार का ईंधन है, जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। यह सामान्य पेट्रोल से अलग होता है और इसे केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (Flex-Fuel Vehicle - FFV) में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आपकी कार या बाइक सामान्य पेट्रोल या E20 पर चलती है, तो उसमें E85 का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। किन लोगों को मिलेगा फायदा? सरकार का प्रस्ताव लागू होने पर E85 का सबसे बड़ा फायदा उन वाहन मालिकों को मिलेगा जिनके पास फ्लेक्स-फ्यूल वाहन होंगे। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात में एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। आने वाले समय में यदि देश में FFV वाहनों की संख्या बढ़ती है, तो अधिक लोगों को कम कीमत वाले इस ईंधन का लाभ मिल सकेगा। क्या E20 से इंजन खराब होता है? एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर लंबे समय से कई तरह की आशंकाएं सामने आती रही हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि E20 पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचाता है। इस पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। उनके अनुसार, वाहन निर्माता कंपनियों ने E20 के कारण इंजन में किसी बड़े नुकसान की शिकायत नहीं की है। लाखों वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी बताया कि E20 से जुड़े वारंटी और इंश्योरेंस संबंधी मुद्दों का भी समाधान किया जा चुका है। E85 में माइलेज कम हो सकता है सरकार ने माना है कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है। ऐसे में E85 फ्यूल पर चलने वाले वाहनों का माइलेज कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि कम कीमत और अन्य आर्थिक लाभ इस कमी की भरपाई कर सकते हैं। सरकार को क्या होंगे फायदे? सरकार के अनुसार E85 और एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने से कई फायदे होंगे। ईंधन की लागत कम रखने में मदद मिलेगी। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी। विदेशी मुद्रा की बचत होगी। एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों की आय को बढ़ावा मिलेगा। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। E25 फ्यूल पर भी चल रहा काम पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि E25 पेट्रोल अभी परीक्षण के चरण में है और इसे फिलहाल बाजार में लॉन्च नहीं किया गया है। सरकार केवल एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है। आने वाले वर्षों में भारत की ईंधन नीति में बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी दोनों को समान प्राथमिकता दिए जाने की योजना है। क्या बदल सकती है आपकी जेब का गणित? यदि E85 फ्यूल तय कीमत पर बाजार में आता है और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो वाहन चालकों के ईंधन खर्च में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। साथ ही, इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाने और स्वदेशी ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
E85 fuel dispenser launched at an Indian Oil outlet in Delhi for flex-fuel vehicles.
दिल्ली में लॉन्च हुआ E85 फ्यूल, E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये सस्ता; जानिए किन गाड़ियों में कर सकेंगे इस्तेमाल

भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल आउटलेट पर राजधानी के पहले E85 फ्यूल पंप का उद्घाटन किया। इसके साथ ही दिल्ली में हाई-इथेनॉल ईंधन की व्यावसायिक शुरुआत हो गई है। E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये सस्ता दिल्ली में E85 फ्यूल की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। यह मौजूदा E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता है। उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रम की स्थिति से बचाने के लिए पेट्रोल पंप पर E85 के लिए अलग डिस्पेंसर और स्पष्ट लेबलिंग की व्यवस्था की गई है। यह पहल सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है। क्या है E85 फ्यूल? जहां E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, वहीं E85 में लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल और केवल 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। E85 के फायदे पेट्रोल पर निर्भरता कम होती है। क्रूड ऑयल की खपत घटती है। घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा मिलता है। ईंधन की लागत कम हो सकती है। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। क्या हर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है? नहीं। E85 फ्यूल को सामान्य पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियों में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस इंजन की आवश्यकता होती है, जो हाई-इथेनॉल मिश्रण को संभालने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए जाते हैं। कौन-सी गाड़ियां E85 सपोर्ट करती हैं? भारत में फिलहाल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या सीमित है। इनमें शामिल हैं— Hero Splendor+ Flex Fuel Hero HF Deluxe Flex Fuel Maruti Suzuki WagonR Flex Fuel (लॉन्च की तैयारी में) आने वाले समय में कई अन्य कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतार सकती हैं। देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि E85 जैसे वैकल्पिक ईंधन भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही इससे किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से कृषि आधारित फसलों से किया जाता है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Petroleum Minister Hardeep Singh Puri addressing fuel price concerns amid rising global crude oil tensions.
क्या बढ़ने वाली हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? LPG को लेकर सरकार ने क्या कहा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की चर्चा तेज है. इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल देश में ईंधन को लेकर कोई संकट नहीं है, लेकिन यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आगे कभी नहीं बढ़ेंगी. चार साल से नहीं बढ़ीं कीमतें, लेकिन भविष्य हालात पर निर्भर CII Annual Business Summit 2026 में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के फैसले पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक हालात पर आधारित होते हैं. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों को सरकार ने अवसर में बदलने का काम किया है और फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है. देश के पास कितना ईंधन स्टॉक? सरकार के मुताबिक भारत के पास अभी: कच्चे तेल और LNG का करीब 69 दिनों का भंडार LPG का लगभग 45 दिनों का स्टॉक मौजूद है केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है और देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. LPG उत्पादन में बड़ा इजाफा पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एलपीजी उत्पादन भी बढ़ा दिया है. मंत्री के अनुसार: पहले प्रतिदिन 35-36 हजार टन LPG उत्पादन हो रहा था अब इसे बढ़ाकर 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है सरकार का कहना है कि यह कदम भविष्य की जरूरतों और संभावित दबाव को ध्यान में रखकर उठाया गया है. पीएम मोदी ने लोगों से क्या अपील की? प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में हैदराबाद की रैली में लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट का असर कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोगों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. पीएम मोदी ने लोगों को सलाह दी कि: पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करें कारपूलिंग अपनाएं इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ें पार्सल के लिए रेलवे का इस्तेमाल करें जरूरत होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाएं विदेश यात्राएं और सोने की खरीद फिलहाल टालें प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी.  

surbhi मई 12, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0