बारिश का मौसम आते ही चाय और गरमा-गरम पकौड़ों की याद हर घर में ताजा हो जाती है। ऐसे में अरबी के पत्तों से बनने वाला पत्रा (Patra) कई राज्यों की पारंपरिक रसोई का अहम हिस्सा माना जाता है। गुजरात में इसे पत्रा, महाराष्ट्र में अलू वड़ी, हिमाचल प्रदेश में पतरोड़े, उत्तराखंड में पत्यूड़ और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में अरबी पत्ता पकोड़ा या पतोड़ के नाम से जाना जाता है। हालांकि पारंपरिक तरीके से इसे डीप फ्राई करने में काफी तेल लगता है। लेकिन अगर आप स्वाद के साथ हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो सोशल मीडिया पर लोकप्रिय 'अम्मा की थाली' की चावल वाली ट्रिक आपके काम आ सकती है। इस तरीके में पहले रोल को स्टीम किया जाता है और फिर हल्का शैलो फ्राई या एयर फ्राई किया जाता है, जिससे कम तेल में भी शानदार क्रंच मिलता है। क्यों खास है चावल वाली ट्रिक? इस रेसिपी की सबसे खास बात है भीगे हुए कच्चे चावल का पेस्ट। बेसन के साथ मिलाने पर यह पकोड़ों को अतिरिक्त कुरकुरापन देता है। साथ ही अमचूर पाउडर का इस्तेमाल अरबी के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक कैल्शियम ऑक्सलेट के कारण होने वाली गले की खुजली की संभावना को कम करने में मदद करता है। कहां सबसे ज्यादा खाया जाता है पत्रा? गुजरात – पत्रा (Patra) महाराष्ट्र – अलू वड़ी (Alu Vadi) हिमाचल प्रदेश – पतरोड़े (Patrode) उत्तराखंड – पत्यूड़ (Patyud) मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश – अरबी पत्ता पकोड़ा / पतोड़ मानसून और त्योहारों के दौरान यह डिश कई परिवारों की पारंपरिक थाली का हिस्सा होती है। आवश्यक सामग्री 8–10 अरबी के पत्ते ½ कप कच्चे चावल 1 कप बेसन 6–7 लहसुन की कलियां 1 छोटा चम्मच जीरा हरी या लाल मिर्च ½ छोटा चम्मच हल्दी ½ छोटा चम्मच गरम मसाला 1–1½ छोटा चम्मच अमचूर पाउडर नमक स्वादानुसार हल्का तेल ब्रश करने के लिए ऐसे बनाएं सबसे पहले चावल को 30–40 मिनट तक भिगो दें। अब भीगे हुए चावल, लहसुन, जीरा और मिर्च को थोड़ा पानी डालकर बारीक पीस लें। इस पेस्ट में बेसन, हल्दी, गरम मसाला, नमक और अमचूर मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें। अरबी के पत्तों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। प्रत्येक पत्ते पर तैयार घोल लगाकर 3–4 पत्तों की परत बनाते हुए रोल तैयार करें। रोल को 20–25 मिनट तक स्टीम करें। ठंडा होने पर गोल स्लाइस काट लें। अब इन स्लाइस पर हल्का तेल ब्रश करें और तवे पर सेकें, या एयर फ्रायर में 180°C पर 10–12 मिनट पकाएं। चाहें तो कम तेल में शैलो फ्राई भी कर सकते हैं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 170–210 kcal प्रोटीन: 6–8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 24–28 ग्राम फैट: 4–6 ग्राम फाइबर: 5–7 ग्राम खाने के संभावित फायदे कम तेल में बनने से कैलोरी अपेक्षाकृत कम रहती है। अरबी के पत्ते फाइबर और कई सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्रोत हैं। बेसन प्रोटीन प्रदान करता है। स्टीम और शैलो फ्राई करने से अतिरिक्त तेल की जरूरत कम पड़ती है। मानसून में शाम की चाय के साथ स्वादिष्ट और संतुलित स्नैक बन सकता है। ध्यान दें: अरबी के पत्तों में प्राकृतिक कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल हो सकते हैं, जिससे कुछ लोगों को गले में खुजली महसूस हो सकती है। अमचूर, इमली या नींबू जैसे खट्टे तत्वों का उपयोग और अच्छी तरह पकाने से यह समस्या कम हो सकती है।
Healthy Lauki Dosa Recipe: अगर बच्चे हरी सब्जियां खाने से बचते हैं, तो यह आसान और स्वादिष्ट डोसा रेसिपी जरूर ट्राई करें। सूजी, दही और ताजी लौकी से तैयार यह हेल्दी डिश स्वाद के साथ भरपूर पोषण भी देती है। बच्चों को पसंद आएगा ये हेल्दी लौकी डोसा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट कॉम्बिनेशन अगर आपके घर में रखी लौकी देखकर बच्चे मुंह बनाने लगते हैं, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस आसान और झटपट बनने वाली लौकी डोसा रेसिपी की मदद से आप बच्चों को स्वाद के साथ पौष्टिक खाना भी खिला सकते हैं। सूजी, दही और ताजी लौकी से तैयार यह डोसा बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से सॉफ्ट बनता है। इसे नाश्ते, टिफिन या शाम के स्नैक के तौर पर भी परोसा जा सकता है। आवश्यक सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी 1 कप सूजी ½ कप दही 1 चुटकी जीरा 1 बारीक कटी हरी मिर्च 1 छोटा टुकड़ा अदरक 2 बड़े चम्मच बारीक कटा हरा धनिया स्वादानुसार नमक जरूरत अनुसार पानी सेंकने के लिए थोड़ा सा तेल या घी बनाने की विधि एक बड़े बाउल में सूजी और दही मिलाएं। इसमें कद्दूकस की हुई लौकी डालें। अब हरी मिर्च, अदरक, जीरा, हरा धनिया और नमक मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें। जरूरत पड़ने पर थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर बैटर तैयार करें। बैटर को 15–20 मिनट तक ढककर रखें ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए। अब गर्म तवे पर हल्का तेल लगाकर बैटर फैलाएं और मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और हल्का कुरकुरा होने तक सेंक लें। तैयार डोसे को नारियल चटनी, हरी चटनी या टमाटर चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें। प्रति डोसा अनुमानित पोषण कैलोरी: 170–210 kcal प्रोटीन: 5–7 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 28–32 ग्राम फैट: 4–6 ग्राम फाइबर: 3–4 ग्राम कैल्शियम: 80–120 mg विटामिन C: अच्छी मात्रा (लौकी से) पोटैशियम: 180–220 mg खाने के संभावित फायदे11 फाइबर से भरपूर, पाचन में मददगार। लौकी शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक। सूजी और दही से अच्छी ऊर्जा मिलती है। बच्चों को हरी सब्जियां खिलाने का आसान तरीका। हल्का, पौष्टिक और पेट भरने वाला नाश्ता। वजन प्रबंधन वाली डाइट में सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। ध्यान दें: पोषण संबंधी आंकड़े सामग्री और मात्रा के अनुसार बदल सकते हैं। बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है।
नई दिल्ली: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे न्याय की जीत बताते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपियों को ठहराया दोषी कड़कड़डूमा कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या और 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को दोषी माना है। मामले में दोषियों की सजा पर अदालत जल्द फैसला सुनाएगी। बीजेपी का AAP पर हमला फैसले के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंकित शर्मा के परिवार के लिए पूरा देश न्याय की मांग कर रहा था, लेकिन उस समय अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन का साथ दिया। भंडारी ने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन ने स्वयं दावा किया था कि संजय सिंह ने उन्हें कई बार फोन कर भरोसा दिलाया था कि घबराने की जरूरत नहीं है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दी। 2020 दिल्ली दंगों से जुड़ा है मामला यह मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है। दंगों के बीच उनका शव एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया था। जांच के बाद ताहिर हुसैन सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा भड़काने और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। बीजेपी ने मांगी सार्वजनिक माफी बीजेपी ने अदालत के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जिन लोगों का समर्थन किया गया, उन्हें अब अदालत ने दोषी करार दिया है। अब सजा पर रहेगी नजर फिलहाल अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया है। अब सभी की नजर सजा के ऐलान पर टिकी है। इस फैसले के बाद दिल्ली की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है।
Bread Pizza Pockets Recipe: अगर बच्चों ने अचानक पिज्जा खाने की जिद कर दी है, तो अब बाहर से ऑर्डर करने की जरूरत नहीं। घर में मौजूद ब्रेड, सब्जियों और चीज़ की मदद से आप कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट Bread Pizza Pockets तैयार कर सकते हैं। बाहर से कुरकुरे और अंदर से चीजी ये स्नैक बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी खूब पसंद आएगा। थोड़े से बदलाव के साथ इसे पहले से ज्यादा हेल्दी भी बनाया जा सकता है। आवश्यक सामग्री 8–10 ब्रेड स्लाइस ¼ कप बारीक कटी शिमला मिर्च ¼ कप उबला हुआ स्वीट कॉर्न ¼ कप बारीक कटा प्याज ½ कप मोजरेला या प्रोसेस्ड चीज़ 3–4 बड़े चम्मच पिज्जा सॉस 2 बड़े चम्मच मेयोनेज 1 छोटा चम्मच चिली फ्लेक्स 1 छोटा चम्मच ऑरिगेनो या पिज्जा सीजनिंग 2 बड़े चम्मच मैदा थोड़ा पानी बटर या तेल ऐसे बनाएं Bread Pizza Pockets सबसे पहले एक बाउल में शिमला मिर्च, कॉर्न, प्याज, पिज्जा सॉस, मेयोनेज, चिली फ्लेक्स, ऑरिगेनो और कद्दूकस किया हुआ चीज़ डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब मैदा और पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। ब्रेड के किनारे काटकर बेलन की मदद से हल्का पतला बेल लें। ब्रेड के बीच में तैयार स्टफिंग रखें और किनारों पर मैदे का पेस्ट लगाकर अच्छी तरह सील कर दें। अब इन्हें मनचाहा आकार देकर हल्का गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें। अगर हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो इन्हें एयर फ्रायर में 180°C पर 8–10 मिनट या 200°C पर पहले से गर्म ओवन में 10–12 मिनट बेक करें। हल्का बटर ब्रश करने से भी अच्छा क्रिस्पी टेक्सचर मिलता है। इसे और हेल्दी कैसे बनाएं? व्होल व्हीट या मल्टीग्रेन ब्रेड का इस्तेमाल करें। मेयोनेज की जगह हंग कर्ड (Greek Yogurt) लें। चीज़ की मात्रा कम रखें या लो-फैट चीज़ इस्तेमाल करें। मशरूम, पालक, गाजर, शिमला मिर्च जैसी ज्यादा सब्जियां मिलाएं। डीप फ्राई की बजाय एयर फ्राई या बेक करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण (1 Pizza Pocket) कैलोरी: 180–230 kcal प्रोटीन: 7–9 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 22–26 ग्राम फैट: 8–11 ग्राम फाइबर: 2–3 ग्राम कैल्शियम: 140–180 mg खाने के संभावित फायदे घर पर ताजा और बिना प्रिजर्वेटिव के तैयार होता है। सब्जियों के कारण विटामिन और फाइबर मिलता है। बच्चों के टिफिन और शाम के स्नैक के लिए बढ़िया विकल्प। एयर फ्राई या बेक करने पर तेल की मात्रा कम हो जाती है। झटपट बनने वाला स्वादिष्ट फैमिली स्नैक। Diet Caution वजन घटाने वाले लोग इसे डीप फ्राई की बजाय बेक या एयर फ्राई करके खाएं। एक बार में 1–2 Pizza Pockets पर्याप्त हैं। साथ में सलाद या सूप लेने से मील ज्यादा संतुलित बन सकती है। डायबिटीज या वजन प्रबंधन कर रहे लोग व्होल व्हीट ब्रेड और कम चीज़ का उपयोग करें। ध्यान दें: पोषण संबंधी आंकड़े उपयोग की गई सामग्री और मात्रा के अनुसार बदल सकते हैं। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
Healthy Homemade Paneer Recipe: अगर बच्चे हरी सब्जियां खाने से कतराते हैं, तो यह आसान और हेल्दी रेसिपी जरूर ट्राई करें। चना दाल और एक हरी सब्जी से तैयार यह देसी 'पनीर' स्वाद के साथ पोषण भी देता है। हरी सब्जी से बनाएं हेल्दी देसी 'पनीर', स्वाद ऐसा कि कोई पहचान नहीं पाएगा अगर आपके घर में भी बच्चे हरी सब्जियों का नाम सुनते ही मुंह बनाने लगते हैं, तो यह आसान रेसिपी उनकी पसंद बदल सकती है। इस अनोखी डिश में एक हरी सब्जी और चना दाल की मदद से पनीर जैसी टेक्सचर वाली हेल्दी रेसिपी तैयार की जाती है। यह स्वादिष्ट होने के साथ प्रोटीन और फाइबर से भी भरपूर होती है। इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए ज्यादा सामग्री या लंबा समय नहीं चाहिए। अगर आप बच्चों को बिना नखरे के पौष्टिक खाना खिलाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर ट्राई करें। आवश्यक सामग्री 1 कप चना दाल (4 घंटे भीगी हुई) 1 मध्यम आकार की लौकी 1 इंच अदरक 2 हरी मिर्च 2–3 बड़े चम्मच हरा धनिया स्वादानुसार नमक ½ छोटा चम्मच हल्दी (वैकल्पिक) ½ छोटा चम्मच काली मिर्च या लाल मिर्च (वैकल्पिक) बनाने की विधि सबसे पहले चना दाल को लगभग 4 घंटे तक भिगो दें। अब लौकी को धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें। भीगी हुई दाल, लौकी, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया को बिना ज्यादा पानी मिलाए मिक्सर में पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। अब इसमें नमक और मसाले मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें। तैयार मिश्रण को मनचाहे आकार में स्टीम करें या धीमी आंच पर पकाएं। पकने के बाद इसे चौकोर टुकड़ों में काट लें। चाहें तो हल्का तवे पर सेंककर या एयर फ्राई करके चटनी या सॉस के साथ सर्व करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 150–180 kcal प्रोटीन: 8–10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 20–24 ग्राम फैट: 2–4 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम खाने के संभावित फायदे प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। पाचन को सपोर्ट करने में सहायक। बच्चों को हरी सब्जियां खिलाने का आसान तरीका। वजन प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है। कम तेल में बनने वाली हेल्दी स्नैक रेसिपी। ध्यान दें: यह रेसिपी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है। यदि आपको किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी है, तो डाइट में बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
ऑकलैंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक उत्तराखंडी टोपी भेंट की। यह पारंपरिक पहाड़ी टोपी उत्तराखंड की पहचान, सम्मान और हिमालयी संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। उत्तराखंडी टोपी क्यों है खास? उत्तराखंडी टोपी उच्च गुणवत्ता वाली ऊन से हाथ से तैयार की जाती है। यह केवल ठंड से बचाने का साधन नहीं, बल्कि अपनी रंगीन बुनी हुई पट्टियों और पारंपरिक डिजाइन के कारण उत्तराखंड की लोक कला और शिल्पकला को भी दर्शाती है। इस टोपी का उपयोग विशेष रूप से त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों और सामाजिक कार्यक्रमों में किया जाता है। सम्मान और मेहमाननवाजी का प्रतीक उत्तराखंड की संस्कृति में इस टोपी को सम्मान, आदर और मेहमाननवाजी का प्रतीक माना जाता है। किसी विशिष्ट अतिथि का स्वागत पारंपरिक पहाड़ी टोपी पहनाकर करना आज भी राज्य की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। स्थानीय कारीगरों की आजीविका से जुड़ी उत्तराखंडी टोपी का निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक बुनाई तकनीकों से किया जाता है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और बुनकरों को भी रोजगार और आर्थिक सहयोग प्रदान करती है। हिमालयी संस्कृति की पहचान यह पारंपरिक टोपी उत्तराखंड के प्राकृतिक परिवेश, लोक जीवन और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। वर्षों से चली आ रही इसकी निर्माण कला आज भी राज्य की पहचान बनी हुई है और नई पीढ़ी तक पारंपरिक शिल्प को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को उत्तराखंडी टोपी भेंट करना केवल एक औपचारिक उपहार नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर सम्मान देने का भी संदेश माना जा रहा है। यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और स्थानीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
Healthy Snack Recipe: कच्चे कटहल, बेसन और मसालों से तैयार करें बाहर से कुरकुरे और अंदर से मुलायम पकौड़े। जानें आसान रेसिपी, कुकिंग टिप्स, प्रति सर्विंग कैलोरी और सेहत से जुड़े फायदे। बारिश की फुहारों के साथ गरमा-गरम पकौड़ों का स्वाद हर किसी को पसंद आता है। अगर आप इस बार आलू, प्याज या पालक के पकौड़ों से हटकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो कटहल के पकौड़े एक बेहतरीन विकल्प हैं। कच्चे कटहल से तैयार यह स्नैक बाहर से क्रिस्पी और अंदर से मुलायम होता है। कटहल में फाइबर, विटामिन C, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जबकि बेसन इसमें प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है। सही बैटर और कुकिंग ट्रिक अपनाकर आप घर पर ही बाजार जैसे स्वादिष्ट पकौड़े आसानी से बना सकते हैं। आवश्यक सामग्री 300 ग्राम कच्चा कटहल (उबला हुआ) 1 कप बेसन 2 बड़े चम्मच चावल का आटा 2 हरी मिर्च (बारीक कटी) 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट ½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर ½ छोटा चम्मच अजवाइन ½ छोटा चम्मच गरम मसाला नमक स्वादानुसार 2 बड़े चम्मच बारीक कटा हरा धनिया आवश्यकता अनुसार पानी तलने के लिए सरसों या रिफाइंड तेल अनुमानित कैलोरी प्रति 4–5 पकौड़े (लगभग 100 ग्राम): कैलोरी: 180–220 kcal प्रोटीन: 6–8 ग्राम फाइबर: 4–5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 20–24 ग्राम एयर फ्रायर में बनाने पर तेल और कैलोरी दोनों कम हो सकती हैं। ऐसे बनाएं क्रिस्पी कटहल के पकौड़े सबसे पहले कच्चे कटहल को छोटे टुकड़ों में काटकर हल्दी और नमक मिले पानी में 10–12 मिनट तक उबाल लें। पानी पूरी तरह निकालकर कटहल को हल्का मैश कर लें। अब एक बाउल में बेसन, चावल का आटा, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, अजवाइन, गरम मसाला और नमक मिलाएं। इसमें मैश किया हुआ कटहल, अदरक-लहसुन पेस्ट, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें। थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा बैटर तैयार करें। कढ़ाई में तेल गर्म करें और मिश्रण को छोटे-छोटे हिस्सों में डालकर मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। अतिरिक्त तेल हटाने के लिए पकौड़ों को टिश्यू पेपर पर निकाल लें। परफेक्ट पकौड़े बनाने के टिप्स बैटर में चावल का आटा जरूर मिलाएं, इससे पकौड़े ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं। कटहल उबालने के बाद उसका अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दें। बैटर ज्यादा पतला न रखें। मध्यम आंच पर तलने से पकौड़े अंदर तक अच्छी तरह पकते हैं। हेल्दी विकल्प के लिए एयर फ्रायर का इस्तेमाल करें। किन चीजों के साथ करें सर्व? हरी धनिया-पुदीना चटनी इमली की मीठी चटनी लहसुन की चटनी टोमैटो केचप दही-पुदीना डिप मसाला चाय या अदरक वाली चाय प्याज और नींबू का सलाद सेहत के फायदे कटहल फाइबर का अच्छा स्रोत है, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट इम्यूनिटी को सपोर्ट करते हैं, जबकि पोटैशियम हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। बेसन प्रोटीन और ऊर्जा प्रदान करता है। यदि इन्हें कम तेल या एयर फ्रायर में बनाया जाए, तो यह स्वाद और पोषण का अच्छा संतुलन देने वाला स्नैक बन सकता है। अगर आप बारिश के मौसम में कुछ नया, स्वादिष्ट और पौष्टिक स्नैक बनाना चाहते हैं, तो कटहल के पकौड़े जरूर ट्राई करें। सही कुकिंग ट्रिक्स के साथ आप घर पर ही बाजार जैसे कुरकुरे और स्वादिष्ट पकौड़े आसानी से तैयार कर सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शाम की चाय हो या बच्चों की हल्की भूख, बिस्किट लगभग हर घर की पसंद होते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर बिस्किट मैदे और प्रिजर्वेटिव्स से बने होते हैं, जो सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं माने जाते। ऐसे में अगर घर पर ही गेहूं के आटे से स्वादिष्ट और खस्ता बिस्किट तैयार किए जाएं, तो यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि इन बिस्किट्स को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री या मेहनत की जरूरत नहीं होती। घर की रसोई में मौजूद चीजों से ही इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। बिस्किट बनाने के लिए जरूरी सामग्री गेहूं के आटे के बिस्किट बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा, आधा कप पिसी चीनी, 4 से 5 बड़े चम्मच देसी घी या तेल, आधा चम्मच इलायची पाउडर, थोड़ा सफेद तिल या सौंफ और एक चुटकी नमक की जरूरत होती है। आटा गूंथने के लिए हल्का गुनगुना दूध या पानी इस्तेमाल किया जा सकता है। सही मोयन से आएगा खस्ता स्वाद बिस्किट को बाजार जैसा खस्ता बनाने के लिए मोयन सबसे अहम भूमिका निभाता है। सबसे पहले आटे में चीनी, इलायची और नमक मिलाएं। इसके बाद घी डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह रगड़ें। जब आटा मुट्ठी में दबाने पर बंधने लगे, तो समझिए मोयन सही है। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा दूध या पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें। आटा ज्यादा मुलायम नहीं होना चाहिए, वरना बिस्किट कुरकुरे नहीं बनेंगे। आटे को 10 से 15 मिनट ढककर रख दें। धीमी आंच पर तलें या बेक करें आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें हल्का दबाएं और मनचाहा आकार दें। डिजाइन बनाने के लिए कांटे या चाकू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही में हल्का गर्म तेल या घी लें और धीमी आंच पर बिस्किट्स को सुनहरा होने तक तलें। अगर हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो इन्हें 180 डिग्री सेल्सियस पर ओवन या एयर फ्रायर में 15 से 20 मिनट तक बेक भी किया जा सकता है। हफ्तों तक रहेगा स्वाद बरकरार तलने या बेक करने के बाद बिस्किट्स को पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडे होने के बाद ये और ज्यादा कुरकुरे हो जाते हैं। इन्हें एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करने पर कई दिनों तक ताजा रखा जा सकता है। घर पर बने ये आटा बिस्किट स्वादिष्ट होने के साथ सेहतमंद भी होते हैं। यही वजह है कि एक बार इन्हें खाने के बाद बाजार के बिस्किट फीके लगने लगते हैं।
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। सोमवार (25 मई) से पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया है। मई 2026 में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार बढ़ती कीमतों से आम लोगों की जेब पर असर साफ दिखाई देने लगा है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण इम्पोर्ट लागत बढ़ी है, जिसके चलते दाम बढ़ाने पड़े। चार महानगरों में पेट्रोल के नए दाम एमएस (पेट्रोल) खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹102.12 प्रति लीटर (+₹2.61) Kolkata - ₹113.51 प्रति लीटर (+₹2.87) Mumbai - ₹111.21 प्रति लीटर (+₹2.72) Chennai - ₹107.77 प्रति लीटर (+₹2.46) चार महानगरों में डीजल के नए दाम हाई स्पीड डीजल खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹95.20 प्रति लीटर (+₹2.71) Kolkata - ₹99.82 प्रति लीटर (+₹2.80) Mumbai - ₹97.83 प्रति लीटर (+₹2.81) Chennai - ₹99.55 प्रति लीटर (+₹2.57) मई 2026 में कब-कब बढ़े दाम? मई महीने में अब तक चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ चुके हैं: 15 मई 2026: पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी 19 मई 2026: पेट्रोल लगभग 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा 23 मई 2026: फिर पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे बढ़े 25 मई 2026: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा आम लोगों में नाराजगी ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। दिल्ली के जनपथ स्थित एक पेट्रोल पंप पर ग्राहक ने कहा कि रोजाना की कमाई का बड़ा हिस्सा अब पेट्रोल पर खर्च हो रहा है। ग्राहक ने कहा कि महंगाई पहले ही लोगों की परेशानी बढ़ा चुकी है, ऐसे में बार-बार ईंधन महंगा होने से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उसने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।