14 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। रांची समेत राज्य के कई जिलों में सुबह से बादल छाए हुए हैं। दोपहर बाद गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। साथ ही मौसम विभाग ने 11 जून को राज्य के 14 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, रामगढ़ और लोहरदगा सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान 36 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। 14 जिलों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने 11 जून के लिए रांची, खूंटी, रामगढ़, धनबाद, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज और बोकारो में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा, आंधी और वज्रपात के साथ बारिश होने की संभावना है। 12 जून को भी कई जिलों में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। यह स्थिति 15 जून तक बने रहने की संभावना जताई गई है। संथाल परगना से मानसुन प्रवेश की उम्मीद मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और 15 से 17 जून के बीच इसके संथाल परगना के रास्ते झारखंड में प्रवेश करने की संभावना है। वर्तमान में मानसून बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है। अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु के साथ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक इसके पहुंचने की उम्मीद है।
रांची: झारखंड में मानसून के आगमन से पहले ही मौसम ने करवट ले ली है। राज्यभर में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसके चलते कई जिलों में बारिश, मेघगर्जन और तेज हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। हालांकि बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं आकाशीय बिजली की घटनाओं ने चिंता भी बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों के दौरान वज्रपात की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। वज्रपात ने ली तीन लोगों की जान गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड स्थित परासपानी कला गांव में शनिवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से 12 वर्षीय क्रमु कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं रामगढ़ के गंडके पाहन टोला निवासी 30 वर्षीय राजू मुंडा और कुजू के मुरपा कठरा टोला निवासी 16 वर्षीय साहिल कुमार भी वज्रपात की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है। कई जिलों में हुई बारिश मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। वहीं कुछ इलाकों में भारी वर्षा भी हुई। सबसे अधिक 70.3 मिमी बारिश सिमडेगा के थर्थाइटांगर में रिकॉर्ड की गई। बारिश के कारण कई क्षेत्रों में तापमान में भी गिरावट दर्ज हुई है। पिछले 24 घंटे का मौसम सर्वाधिक अधिकतम तापमान: 37.6°C (डाल्टनगंज) न्यूनतम तापमान: 21.9°C (लातेहार-AWS) सर्वाधिक वर्षा: 70.3 मिमी (थर्थाइटांगर, सिमडेगा) कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी India Meteorological Department (आईएमडी) रांची केंद्र ने राज्य के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण और पूर्वी उत्तर प्रदेश से तेलंगाना तक फैला ट्रफ सक्रिय है। इसी वजह से झारखंड में मौसम तेजी से बदल रहा है और आगामी दिनों में भी बारिश तथा वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। 9 जून को इन जिलों में बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार 9 जून को: रांची बोकारो रामगढ़ गुमला खूंटी सहित दक्षिणी और मध्य झारखंड के कई इलाकों में मेघगर्जन, तेज हवा और बारिश की संभावना है। इसके अलावा रांची में 10 और 11 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश होने के संकेत दिए गए हैं। लोगों को बरतनी होगी सावधानी मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है, क्योंकि अगले कुछ दिनों तक वज्रपात की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
Jharkhand Weather: दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ झारखंड के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार 6 जून को राज्य के कई हिस्सों में मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ मौसम बिगड़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश होने की भी संभावना जताई गई है। 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं मौसम विभाग के मुताबिक, 6 जून को झारखंड के कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही बादल गरजने और बिजली गिरने की आशंका भी बनी हुई है। रांची में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 7 से 9 जून तक कैसा रहेगा मौसम? 7 जून राज्य के दक्षिणी और मध्य भागों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। 8 जून उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। 9 जून दक्षिणी और मध्य झारखंड के कुछ इलाकों में वज्रपात और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। इस दौरान भी हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। 10 जून से प्री-मानसून बारिश के संकेत मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 10 जून से राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले 24 घंटे में कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश? बीते 24 घंटों के दौरान झारखंड के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक बारिश पाकुड़ जिले में हुई, जहां करीब 80 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। तेजी से आगे बढ़ रहा है मानसून केरल पहुंचने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले दो से तीन दिनों में इसके गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
Jharkhand में आने वाले दिनों में मौसम राहत लेकर आ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार राज्य के कई जिलों में 1 जून से 6 जून तक हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है। एक सप्ताह तक बदल सकता है मौसम India Meteorological Department के रांची मौसम केंद्र के अनुसार अगले कुछ दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। कई जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस दौरान राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है। हालांकि बारिश और बादलों की वजह से तापमान में हल्की गिरावट भी दर्ज की जा सकती है। गरज-चमक और वज्रपात का भी खतरा मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के साथ कई स्थानों पर गरज-चमक और वज्रपात की घटनाएं भी हो सकती हैं। खासकर ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। राजधानी Ranchi और आसपास के इलाकों में 2 जून से आंशिक रूप से बादल छाए रहने तथा गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। लोगों के लिए जरूरी सलाह मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान: खुले मैदानों में जाने से बचें पेड़ों के नीचे खड़े न हों बिजली के खंभों और तारों से दूरी बनाए रखें वज्रपात के समय सुरक्षित भवन या घर के अंदर रहें मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर बनाए रखें डालटनगंज रहा सबसे गर्म रविवार को राज्य में सबसे अधिक तापमान Daltonganj में दर्ज किया गया, जहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। प्रमुख शहरों का अधिकतम तापमान: रांची: 33.0°C जमशेदपुर: 34.4°C बोकारो: 35.5°C देवघर: 33.4°C डालटनगंज: 39.2°C वहीं रांची का न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक राज्य में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है, जिससे गर्मी से राहत तो मिलेगी लेकिन वज्रपात और तेज हवाओं के कारण सावधानी बरतना भी जरूरी होगा।
अमेरिका के Atlanta में बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। शहर की कई सड़कें और हाईवे पानी में डूब गए, जबकि दर्जनों गाड़ियां बीच सड़क पर फंस गईं। भारी जलभराव के कारण ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। National Weather Service ने अटलांटा, ड्रुइड हिल्स और एमोरी इलाके के लिए फ्लैश फ्लड चेतावनी जारी की। मौसम विभाग के अनुसार यह चेतावनी बुधवार रात 11:15 बजे तक प्रभावी रही। डाउनटाउन कनेक्टर पर सबसे खराब हालात बुधवार दोपहर हुई तेज बारिश के बाद अटलांटा के डाउनटाउन कनेक्टर पर हालात बेहद खराब हो गए। बेकर स्ट्रीट ओवरपास के पास हाईवे पूरी तरह पानी में डूब गया, जिससे रश ऑवर के दौरान ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई वाहन पानी में फंसे दिखाई दिए। कुछ जगहों पर पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि गाड़ियां आधी तक डूब गईं। जाम ड्रेन्स ने बढ़ाई परेशानी स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारी बारिश के साथ-साथ कचरे से जाम हुए स्टॉर्म ड्रेन्स ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। पानी निकासी नहीं होने के कारण सड़कों पर तेजी से जलभराव हो गया। राहत और बचाव दलों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद बेकर स्ट्रीट इलाके में फंसे वाहनों को हटाया। बाद में डाउनटाउन कनेक्टर की नॉर्थबाउंड लेन को दोबारा खोला गया। प्रशासन पर उठे सवाल इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की तैयारियों और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि कई दिनों से मौसम साफ था, इसके बावजूद ड्रेनेज सिस्टम की सफाई नहीं की गई। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि अगर समय रहते नालों की सफाई कर दी जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी अटलांटा प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि शहर की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और अलग-अलग विभाग मिलकर राहत कार्य में जुटे हैं। Georgia Department of Transportation के साथ मिलकर यातायात और जलभराव की स्थिति की निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि: जलभराव वाले इलाकों में वाहन न चलाएं यात्रा से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें गैर-आपात स्थिति में ATL311 के जरिए शिकायत दर्ज करें आपात स्थिति में तुरंत 911 पर कॉल करें इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से निगरानी शहर के नए इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से पूरे घटनाक्रम की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय संभव हो पा रहा है और राहत कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और शहरी क्षेत्रों में कमजोर ड्रेनेज सिस्टम की वजह से अमेरिका के बड़े शहरों में फ्लैश फ्लड की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
तेज आंधी और बारिश ने मचाई तबाही Uttar Pradesh में बुधवार को आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचा दी। अलग-अलग जिलों में पेड़ गिरने, दीवार ढहने और बिजली गिरने की घटनाओं में 96 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा असर पूर्वांचल और प्रयागराज मंडल के जिलों में देखने को मिला, जहां तेज हवाओं और बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। भदोही और प्रयागराज में सबसे ज्यादा मौतें मृतकों में सबसे अधिक 18 लोगों की जान Bhadohi में गई, जबकि Prayagraj में 17 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा मिर्जापुर में 15, फतेहपुर में 10, उन्नाव और बदायूं में 6-6, प्रतापगढ़ और बरेली में 4-4 लोगों की जान गई। कई अन्य जिलों में भी मौतों की खबर सामने आई है। गांवों में ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों में तेज तूफान के कारण कच्चे मकान और टीन शेड उड़ गए। कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही। सड़कों पर पेड़ गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ और कई मार्गों पर लंबा जाम लग गया। किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने दिए राहत के निर्देश Yogi Adityanath ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और राहत एजेंसियों को मौके पर पहुंचकर प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है। गर्मी और तूफान दोनों से परेशान लोग एक तरफ जहां बारिश और आंधी से कुछ इलाकों में गर्मी से राहत मिली, वहीं बुंदेलखंड और दक्षिणी यूपी के कई जिले भीषण गर्मी से बेहाल रहे। Banda प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा झांसी, हमीरपुर और प्रयागराज में भी तापमान 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। रेलवे सेवाएं भी प्रभावित आंधी का असर रेलवे सेवाओं पर भी पड़ा। फतेहपुर में पेड़ गिरने से ओएचई लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे दिल्ली-हावड़ा रूट करीब डेढ़ घंटे तक बाधित रहा। कानपुर होकर गुजरने वाली करीब 22 ट्रेनें प्रभावित हुईं। वहीं प्रयागराज-जौनपुर रेलखंड पर भी पेड़ गिरने से ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा। मौसम विभाग ने दी चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान फिर धीरे-धीरे बढ़ सकता है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना अभी बनी हुई है।
बेंगलुरु : शहर में अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। करीब एक घंटे की तेज बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अस्पताल की दीवार गिरने से 7 की मौत सबसे दर्दनाक हादसा बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल में हुआ, जहां तेज बारिश के दौरान एक दीवार ढह गई। इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 6 साल की बच्ची भी शामिल है। करंट और अन्य हादसों में गई जान बारिश के दौरान अलग-अलग घटनाओं में भी लोगों की मौत हुई। बैनरघट्टा रोड पर वेगा सिटी मॉल के पास 35 वर्षीय रघु की करंट लगने से मौत हो गई। एक अन्य मामले में छात्र सैयद सुफियान की बिजली के तार की चपेट में आने से जान चली गई। चामराजपेट में मंजुनाथ नामक व्यक्ति की मौत उस वक्त हो गई, जब तेज तूफान के दौरान घर की छत का हिस्सा गिर गया। सड़कें बनीं नदी, ट्रैफिक ठप तेज बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप पड़ गया। ऑफिस टाइम में बारिश होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेड़ और बिजली के खंभे गिरे नगर निकाय के मुताबिक, शहर में कम से कम 87 पेड़ उखड़ गए और 131 पेड़ों की शाखाएं टूट गईं। इनमें से कई पेड़ सड़क किनारे खड़े वाहनों पर गिर गए, जिससे कारों और दोपहिया वाहनों को नुकसान पहुंचा। अब तक 60 पेड़ और 98 शाखाओं को हटाया जा चुका है, जबकि बाकी जगहों पर काम जारी है। अगले तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।
झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। India Meteorological Department (IMD) ने राज्य में अगले तीन दिनों तक तेज आंधी, भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सर्कुलेशन के कारण पूरे प्रदेश में मौसम अस्थिर बना हुआ है। किन जिलों में ज्यादा खतरा? राजधानी Ranchi समेत कई जिलों में मौसम का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। जिन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं: बोकारो रामगढ़ हजारीबाग खूंटी गुमला पूर्वी सिंहभूम सरायकेला-खरसावां पश्चिमी सिंहभूम इन इलाकों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। कितनी तेज चलेंगी हवाएं? मौसम विभाग के अनुसार: हवा की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है कई जगहों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना वज्रपात (ठनका) का खतरा काफी ज्यादा 9 अप्रैल तक रहेगा असर IMD के मुताबिक 7 अप्रैल से लेकर 9 अप्रैल तक पूरे झारखंड में मौसम खराब रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है, जिससे साफ है कि राज्यभर में बारिश का असर देखने को मिलेगा। लोगों के लिए जरूरी सावधानियां मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है: खराब मौसम में घर के अंदर ही रहें वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें ओलावृष्टि के समय सुरक्षित छायादार स्थान पर शरण लें पशुओं को भी सुरक्षित स्थान पर रखें किसानों की बढ़ी चिंता बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज हवाओं और बारिश के कारण: खड़ी फसलें खराब हो सकती हैं बागवानी और वृक्षारोपण को नुकसान खेतों में जलभराव की स्थिति इस मौसम का सीधा असर कृषि पर पड़ सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।