रांची। झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम केंद्र, रांची ने 23 से 25 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है। 23 जुलाई को लातेहार और आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां और कोडरमा समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, 24 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून का असर बना रहेगा। उत्तर-पूर्वी जिलों देवघर, दुमका, गिरिडीह, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं 25 जुलाई को लातेहार, चतरा और मध्य झारखंड से सटे उत्तर-पश्चिमी इलाकों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। बारिश के आंकड़ों की बात करें तो 1 जून से 22 जुलाई 2026 के बीच झारखंड में 299.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षापात 414.9 मिलीमीटर होना चाहिए था। यानी राज्य में अब तक 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे कम वर्षा गढ़वा, चतरा, पाकुड़, देवघर, कोडरमा और गोड्डा जैसे जिलों में दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की आगामी सक्रियता से वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद है, हालांकि किसानों और आम लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
Jharkhand Weather Update: झारखंड में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 23 से 26 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की चेतावनी जारी करते हुए येलो अलर्ट घोषित किया है। लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। चार दिनों तक इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी 23 जुलाई: रांची, खूंटी, गुमला, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, लातेहार और लोहरदगा में भारी बारिश और वज्रपात की संभावना है। 24 जुलाई: रांची, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और बोकारो में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। 25 जुलाई: रांची, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, चतरा, लातेहार, लोहरदगा और गुमला में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 26 जुलाई: रांची, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गढ़वा और चतरा जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। बुधवार को कहां कितनी हुई बारिश? बुधवार को राज्य में सबसे अधिक बहरागोड़ा में 41 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा: रांची – 4 मिमी जमशेदपुर – 12 मिमी मेदिनीनगर – 1 मिमी बोकारो – 3 मिमी खूंटी – 13 मिमी हजारीबाग – 10 मिमी सरायकेला – 20 मिमी जगन्नाथपुर – 4 मिमी अब भी सामान्य से कम हुई है बारिश राज्य में मानसून सक्रिय होने के बावजूद अब तक सामान्य से 28 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। 1 जून से 22 जुलाई के बीच जहां सामान्य वर्षा 414.9 मिमी होनी चाहिए थी, वहीं अब तक केवल 299.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। सबसे अधिक वर्षा साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में दर्ज हुई है। वहीं राजधानी रांची में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। लोगों के लिए सलाह खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें। वज्रपात के समय खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें। आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर लगातार नजर रखें।
पटना: बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और राज्य के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। लगातार हो रही बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए राज्य के 22 जिलों में भारी बारिश, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर न जाने की सलाह दी है। इन 22 जिलों में जारी हुआ मौसम अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, बांका, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में मौसम बिगड़ सकता है। इन जिलों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। मंगलवार को कैसा रहा मौसम? राजधानी पटना में मंगलवार को दिनभर बादलों का डेरा रहा। बीच-बीच में हल्की धूप निकलने के बाद शाम होते-होते फिर आसमान में घने बादल छा गए और कई इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई। पटना के आसपास के जिलों में भी मौसम का यही हाल रहा। वहीं खगड़िया, सीतामढ़ी और कटिहार में अच्छी बारिश हुई, जबकि नालंदा और वैशाली में पूरे दिन बादलों की आवाजाही बनी रही। बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली। अगले 3 से 4 दिनों तक ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन से चार दिनों तक बिहार में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहेगा। कुछ इलाकों में उमस महसूस हो सकती है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। पूर्वानुमान के मुताबिक जुलाई के आखिरी सप्ताह में मानसून और मजबूत हो सकता है, जिससे पूरे बिहार में व्यापक और झमाझम बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम में लगातार बदलाव की वजह क्या है? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम में बार-बार बदलाव की मुख्य वजह मानसूनी सिस्टम का लगातार मजबूत और कमजोर होना है। जब नमी वाली हवाएं सक्रिय होती हैं तो बादल बनते हैं और बारिश होती है। बारिश रुकने के बाद धूप निकलते ही हवा में मौजूद नमी के कारण उमस बढ़ जाती है। यही वजह है कि राज्य में कभी बारिश तो कभी गर्मी और उमस का दौर देखने को मिल रहा है। लोगों के लिए जरूरी सलाह खराब मौसम के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। बिजली चमकने पर सुरक्षित स्थान पर रहें। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट और प्रशासन की सलाह का पालन करें। यात्रा के दौरान मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान, कोंकण एवं गोवा में तेज बारिश, जलभराव और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कई राज्यों में ऑरेंज और रेड अलर्ट IMD के अनुसार, गुजरात के कई जिलों, दक्षिणी राजस्थान और कोंकण क्षेत्र में अत्यधिक बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों के लिए रेड अलर्ट जबकि अन्य क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर में वृद्धि और यातायात प्रभावित होने की संभावना है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़क मार्ग बाधित होने की आशंका जताई है। स्थानीय प्रशासन को राहत एवं बचाव दलों को सतर्क रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को सतर्क रहने की सलाह IMD ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और नदी-नालों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है। प्रशासन को भी संभावित आपदा से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने को कहा गया है। अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है।
शिमला, एजेंसियां। भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश के मंडी, कांगड़ा, सिरमौर और शिमला जिलों में आज सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह फैसला लिया है। भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके चलते नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं होने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील जिला प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में आपदा प्रबंधन और राहत दलों को भी अलर्ट पर रखा गया है। पर्यटकों के लिए भी जारी हुई सलाह प्रशासन ने राज्य में मौजूद पर्यटकों से भी मौसम सामान्य होने तक पहाड़ी और नदी किनारे के इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है। कई मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग की निगरानी जारी IMD ने कहा है कि प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
रांची: झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। राज्य के कई हिस्सों में सोमवार को अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि मौसम विभाग ने 21 जुलाई के लिए कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी करते हुए येलो अलर्ट घोषित किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दो सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से आने वाले घंटों में कई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इन जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी भारत मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के अनुसार रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिलों में मंगलवार, 21 जुलाई को गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। सोमवार को कहां कितनी हुई बारिश साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से सोमवार को राज्य के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। रांची – 3 मिमी जगन्नाथपुर – 13 मिमी जमशेदपुर – 4 मिमी खूंटी – 5 मिमी देवघर – 2 मिमी कोडरमा – 7 मिमी हजारीबाग – 2 मिमी देर रात भी राज्य के कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होती रही। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश यहां पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ जिलों में भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हजारीबाग – 139.2 मिमी लोहरदगा – 112 मिमी कांके – 80.2 मिमी जामताड़ा – 56 मिमी लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली। क्यों बदल रहा है मौसम? मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। पहला सिस्टम रोहतक, हरदोई, वाराणसी, मेदिनीनगर, पुरुलिया और दीघा होते हुए बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है। दूसरा साइक्लोनिक सर्कुलेशन उत्तर झारखंड, बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की दिशा में सक्रिय है। इन्हीं दोनों मौसम प्रणालियों के कारण झारखंड के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। सामान्य से अब भी 33 प्रतिशत कम बारिश हालांकि हाल के दिनों में बारिश बढ़ी है, लेकिन पूरे मानसून सीजन के आंकड़े अभी भी सामान्य से पीछे हैं। 1 जून से 20 जुलाई तक सामान्य वर्षा: 319.8 मिमी अब तक हुई वर्षा: 261.4 मिमी कमी: 33 प्रतिशत रांची में भी इस अवधि के दौरान सामान्य 406.4 मिमी के मुकाबले केवल 331.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 19 प्रतिशत कम है। तापमान में आई गिरावट बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में कमी दर्ज की गई। रांची – 29.8°C जमशेदपुर – 33.4°C मेदिनीनगर – 30.2°C मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटों तक बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना बनी रहेगी। लोगों के लिए जरूरी सलाह खराब मौसम के दौरान खुले मैदान में न रहें। वज्रपात के समय पेड़ या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें। अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखें। किसानों को खेतों में काम करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
जम्मू, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। प्रशासन ने आशंका जताई है कि मलबे में दबे लोगों के मिलने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। पुंछ और राजौरी सबसे ज्यादा प्रभावित सबसे अधिक नुकसान पुंछ और राजौरी के पहाड़ी इलाकों में हुआ है, जहां तेज बारिश के कारण कई मकान, सड़कें और पुल बह गए। अचानक आई बाढ़ और पहाड़ों से गिरे मलबे ने कई गांवों का संपर्क भी तोड़ दिया है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए हैं। बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी NDRF, SDRF, सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। मलबे में फंसे लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश के लिए भारी मशीनों और ड्रोन की मदद ली जा रही है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सरकार ने लिया स्थिति का जायजा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल प्रशासन लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित जिलों में राहत सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। भारी बारिश का अलर्ट जारी मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से नदियों-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।
रांची। झारखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में अगले तीन दिनों तक मौसम के तेवर बदले रहेंगे। रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश, मेघगर्जन और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है। रांची सहित कई जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार से राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो गया है। रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और खूंटी में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा बोकारो, धनबाद, कोडरमा, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। 18 और 19 जुलाई को भी जारी रहेगा बारिश का दौर शनिवार और रविवार को भी मानसून सक्रिय रहेगा। 18 जुलाई को रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और खूंटी में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं 19 जुलाई को दक्षिण-पश्चिमी और मध्य झारखंड के इलाकों, विशेषकर रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा और लातेहार में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। अन्य जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात की आशंका बनी रहेगी। अब तक सामान्य से 40 प्रतिशत कम हुई बारिश मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जुलाई तक झारखंड में औसतन 216.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षा 359.8 मिमी होनी चाहिए थी। यानी राज्य में अब तक करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पिछले 24 घंटे में बोकारो सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लातेहार में न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
रांची। झारखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 17 जुलाई से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। अगले तीन दिनों तक कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। आज इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट शुक्रवार को पूरे राज्य में बादल छाए रहने और अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। वहीं रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और खूंटी में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा रांची, बोकारो, धनबाद, कोडरमा, पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज सहित कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात की भी आशंका है। 18 और 19 जुलाई को भी बना रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार, 18 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। हजारीबाग, रामगढ़, रांची, लोहरदगा, गुमला, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और खूंटी में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है। वहीं 19 जुलाई को दक्षिण-पश्चिमी और मध्य झारखंड के इलाकों, विशेषकर रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा और लातेहार में भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। अब भी सामान्य से 40 प्रतिशत कम बारिश बीते 24 घंटे में बोकारो राज्य का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं लातेहार में न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मौसम केंद्र के अनुसार, 1 जून से 17 जुलाई तक झारखंड में औसतन 216.8 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जबकि सामान्य वर्षा 359.8 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी राज्य में अब तक करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि अगले तीन दिनों में होने वाली बारिश से वर्षा की कमी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
रांची। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर अब झारखंड में साफ दिखाई देने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई जिलों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से 18 जुलाई के लिए रांची सहित 10 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार 17 जुलाई को खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भारी बारिश और वज्रपात की आशंका है। वहीं 18 जुलाई को रांची, लातेहार, चतरा, गुमला, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो और लोहरदगा में तेज बारिश के साथ वज्रपात हो सकता है। विभाग ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की है। वज्रपात से दो लोगों की मौत गुरुवार को राज्य के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 42 मिमी वर्षा सिमडेगा में रिकॉर्ड की गई, जबकि मेदिनीनगर, जमशेदपुर, रामगढ़ और लोहरदगा में भी बारिश हुई। इसी दौरान लातेहार जिले में वज्रपात की चपेट में आने से दो युवकों की मौत हो गई, जिससे मौसम विभाग की चेतावनी की गंभीरता और बढ़ गई है। 20 जुलाई तक मौसम रहेगा सक्रिय मौसम विज्ञान केंद्र का अनुमान है कि 20 जुलाई तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादल छाए रहेंगे तथा गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश होती रहेगी। गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि मानसून सक्रिय होने के बावजूद झारखंड में अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 16 जुलाई तक राज्य में सामान्य 348.9 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 207.1 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। ऐसे में आगामी दिनों की बारिश कृषि और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए पुरी और जगतसिंहपुर जिलों के लिए रेड वार्निंग जारी की गई है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद पुरी जिला प्रशासन ने एहतियातन बुधवार को सरकारी और निजी सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट आईएमडी ने बुधवार के लिए मयूरभंज, क्योंझर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, खुरधा, कटक, नयागढ़, अंगुल, ढेंकनाल, बौध, गंजम और कंधमाल जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।वहीं बालेश्वर, देवगढ़, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर, बारगढ़, सोनपुर, बलांगीर, नुआपाड़ा, कालाहांडी, रायगढ़ा और गजपति जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष एडवाइजरी रथ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। आईएमडी ने कहा है कि तेज बारिश या आकाशीय बिजली की स्थिति में लोग किसी पक्के भवन में शरण लें। पेड़ों, बिजली के खंभों या अस्थायी ढांचों के नीचे खड़े होने से बचें। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह समुद्र में मौसम खराब रहने की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को 17 जुलाई तक ओडिशा तट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में नहीं जाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार इस दौरान समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं चल सकती हैं। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ निम्न दबाव आईएमडी के मुताबिक, बुधवार सुबह उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के पास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना है। अगले दो दिनों में इसके उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। पुरी में जलभराव की स्थिति मंगलवार शाम से पुरी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश हो रही है। भारी वर्षा के कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया है। भगवान जगन्नाथ मंदिर के सामने स्थित ग्रैंड रोड, जहां रथ यात्रा के दौरान रथ खींचे जाते हैं, वहां भी पानी जमा हो गया। प्रशासन ने जलनिकासी के लिए अग्निशमन विभाग की टीमों को लगाया है। आईएमडी के अनुसार, बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटों में पुरी शहर में 143.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो राज्य में सबसे अधिक रही। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
रांची। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 17 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का फैसला किया है। यह एक दिवसीय सम्मेलन द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) के सभागार में आयोजित होगा। इसमें झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकार हिस्सा लेंगे। सम्मेलन को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संबोधित करेंगे और मीडिया से सीधे संवाद भी करेंगे। चुनावी रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर होगा मंथन सुबह 9 बजे से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देंगे। कार्यक्रम की शुरुआत डीजी (मीडिया) आशीष गोयल के संबोधन से होगी, जिसमें चुनाव में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद IIIDEM के महानिदेशक राकेश कुमार वर्मा प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन में डीजी (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना चुनाव आयोग के ECINET प्लेटफॉर्म और चुनावी प्रक्रिया में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देंगी। वहीं, डीडीजी (लॉ) विजय कुमार पांडे चुनाव संबंधी संवैधानिक प्रावधानों और हाल के महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों पर प्रकाश डालेंगे। इसके अलावा अपूर्वा कुमार सिंह इलेक्ट्रोरल रोल, मतदान प्रक्रिया और मतगणना प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुति देंगे। पत्रकारों को मिलेगा सवाल पूछने का अवसर सम्मेलन का सबसे अहम आकर्षण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष संबोधन होगा, जिसमें वे चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के महत्व पर अपने विचार रखेंगे। उनके संबोधन के बाद शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें पत्रकार सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल पूछ सकेंगे। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य से 10 से 12 पत्रकार इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकारों को निर्वाचन प्रक्रिया, कानून, तकनीक और आयोग की कार्यप्रणाली की बेहतर समझ मिलेगी, जिससे भविष्य में चुनाव संबंधी खबरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता मजबूत होगी।
पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है। मौसम विभाग ने गुरुवार को दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। खासकर कोलकाता सहित आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं तटीय क्षेत्रों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका व्यक्त की गई है। बंगाल की खाड़ी में बना नया निम्न दबाव मौसम विभाग के अनुसार, एक निम्न दबाव क्षेत्र के समाप्त होने के बाद बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हो गया है। यह प्रणाली बंगाल-ओडिशा तट के पास केंद्रित है और ओडिशा के रास्ते आगे बढ़ रही है। इसके प्रभाव से पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक बारिश होने की संभावना है। बारिश से खेती को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। बुधवार सुबह से ही कई क्षेत्रों में लगातार बारिश दर्ज की गई है। तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट रथ यात्रा के दिन दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इनमें तीन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। मछुआरों को समुद्र में जाने पर रोक निम्न दबाव के प्रभाव को देखते हुए मछुआरों को 19 जुलाई तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। तटीय इलाकों में तेज हवाओं और ऊंची लहरों की आशंका के कारण यह एहतियाती कदम उठाया गया है। कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिण बंगाल में अगले शनिवार से बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। हालांकि उत्तर बंगाल में रविवार से फिर बारिश बढ़ने की संभावना है। उत्तर बंगाल के पांच जिलों के लिए रविवार और सोमवार को भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग एक बार फिर प्रभावित हो गया है। सोनप्रयाग के पास हुए भूस्खलन के चलते हाईवे पर मलबा आ गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी है तथा सड़क साफ होने तक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जा रहा है। बारिश बनी बड़ी वजह लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ों से भारी मात्रा में पत्थर और मलबा सड़क पर आ गया। इससे केदारनाथ यात्रा का प्रमुख मार्ग बाधित हो गया। सीमा सड़क संगठन (BRO), लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने के काम में जुटी हैं। श्रद्धालुओं से यात्रा टालने की अपील प्रशासन ने यात्रियों से मौसम सामान्य होने तक यात्रा शुरू न करने और केवल आधिकारिक सूचना मिलने के बाद ही आगे बढ़ने की अपील की है। सोनप्रयाग, गुप्तकाशी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, जबकि प्रभावित मार्ग पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। IMD का अलर्ट, सावधानी बरतने की सलाह भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में अगले 24–48 घंटों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से मौसम अपडेट पर नजर रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
कोलकाता, एजेंसियां। झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी भारत में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी से जुड़े कम दबाव के क्षेत्र और उससे बनी चक्रवाती परिसंचरण के असर से दोनों राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली का खतरा बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कई जिलों के लिए बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। झारखंड से बंगाल तक मौसम का बदला मिजाज मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और जलभराव की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में ज्यादा असर की आशंका पश्चिम बंगाल के उत्तरी और दक्षिणी जिलों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है। वहीं झारखंड के कई जिलों में भी तेज बारिश, बिजली गिरने और तेज हवा चलने की चेतावनी दी गई है। IMD ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। प्रशासन अलर्ट मोड पर संभावित भारी बारिश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर, शहरी जलभराव और बिजली आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून की सक्रिय स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, इसलिए लोगों को आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
पटना, एजेंसियां। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार में भी दिखाई देने लगा है। सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर बहने वाली गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। हालांकि फिलहाल नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन जल प्रवाह में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, नेपाल में बारिश के कारण वाल्मीकीनगर बराज पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी के मद्देनजर शुक्रवार को चरणबद्ध तरीके से पानी का डिस्चार्ज बढ़ाया गया। सुबह लगभग 79,900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके बाद सुबह 10 बजे यह बढ़कर करीब 86,000 क्यूसेक और दोपहर 12 बजे तक 90,600 क्यूसेक पहुंच गया। बढ़ते डिस्चार्ज का सीधा असर गंडक नदी के जलस्तर पर देखा जा रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे बसे गांवों और तटीय क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। स्थानीय अधिकारियों और इंजीनियरों को चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में बाढ़ सुरक्षा तटबंधों और जल प्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी है और हालात नियंत्रण में हैं। हालांकि यदि नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहा और वाल्मीकीनगर बराज से पानी छोड़ने की मात्रा और बढ़ी, तो गंडक नदी का जलस्तर तेजी से खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से कर ली गई हैं।
कॉक्स बाजार: बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया। उखिया उपजिले के शरणार्थी कैंप में पहाड़ी ढलान खिसकने से हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) में आठ बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। भारी बारिश बनी हादसे की वजह लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई, जिसके चलते रोहिंग्या कैंप के पास पहाड़ी ढह गई। भूस्खलन की चपेट में कई अस्थायी झोपड़ियां आ गईं, जिससे कैंप में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने परिजनों की तलाश में घटनास्थल पर जुट गए। मलबे से लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान रिफ्यूजी रिलीफ एंड रिपैट्रिएशन कमिश्नर (RRRC) मिजाननुर रहमान ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और राहत टीमों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास जारी है। हादसे में घायल हुए पांच बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अभी भी कई लोगों के लापता होने की सूचना है। प्रशासन ने जारी की चेतावनी पुलिस और प्रशासन ने बताया कि लगातार बारिश के कारण रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। बड़ी संख्या में शरणार्थी पहाड़ी ढलानों पर बनी अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है और निगरानी बढ़ा दी गई है। राहत एजेंसियां सक्रिय हादसे के बाद सरकारी एजेंसियों, संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी संस्थाओं और अन्य राहत संगठनों ने प्रभावित इलाके में राहत कार्य तेज कर दिया है। प्रभावित परिवारों को भोजन, दवाइयां, तिरपाल और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मौसम सामान्य होने तक राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा और जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम तेज किया जाएगा.
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और योगिनी एकादशी व्रत कथा का श्रद्धा के साथ पाठ करने से पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। मान्यता है कि इस एकादशी की महिमा का वर्णन स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को किया था। योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व सनातन परंपरा में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास, भजन-कीर्तन और व्रत कथा का पाठ करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित का अवसर प्रदान करता है और व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। योगिनी एकादशी व्रत कथा हेम माली की भूल बनी संकट का कारण पौराणिक कथा के अनुसार, अलकापुरी के राजा कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी दैनिक पूजा के लिए हेम माली नामक सेवक मानसरोवर से ताजे फूल लाया करता था। हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन वह फूल लेकर लौट तो आया, लेकिन पूजा स्थल पहुंचने के बजाय अपनी पत्नी के साथ समय बिताने में इतना मग्न हो गया कि भगवान शिव की पूजा के लिए समय पर फूल नहीं पहुंचा सका। कुबेर के श्राप से बदल गई किस्मत जब पूजा का समय बीतने लगा और फूल नहीं पहुंचे, तो कुबेर ने कारण का पता लगाया। उन्हें जब हेम माली की लापरवाही का पता चला तो वे क्रोधित हो गए और उसे श्राप दे दिया कि वह स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर जाएगा, कुष्ठ रोग से पीड़ित होगा और पत्नी के वियोग का दुख सहेगा। श्राप के प्रभाव से हेम माली तत्काल स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर रोगग्रस्त हो गया और वह अपनी पत्नी से भी अलग हो गया। वह लंबे समय तक जंगलों में दुख और कष्ट भरा जीवन बिताने लगा। महर्षि मार्कण्डेय ने बताया मुक्ति का मार्ग भटकते-भटकते एक दिन हेम माली महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा और अपनी पूरी व्यथा सुनाई। महर्षि ने उसे सलाह दी कि वह आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करे और भगवान विष्णु की आराधना करे। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। व्रत के प्रभाव से मिला नया जीवन हेम माली ने महर्षि के निर्देशानुसार पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। उसने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और रात्रि जागरण भी किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया। उसे अपना दिव्य स्वरूप वापस प्राप्त हुआ और वह पुनः स्वर्ग लौटकर अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ सुखपूर्वक जीवन बिताने लगा। क्या संदेश देती है यह कथा? योगिनी एकादशी की कथा यह संदेश देती है कि जीवन में कर्तव्य, अनुशासन और ईश्वर भक्ति का विशेष महत्व है। यदि व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार कर सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करे, तो उसे अपने कर्मों का प्रायशित करने और जीवन में नई शुरुआत करने का अवसर मिल सकता है। धार्मिक सूचना: यह लेख पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं पर आधारित है। आस्था और विश्वास व्यक्तिगत विषय हैं।
काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल में मानसून की सक्रियता के चलते लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने कई जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड), भूस्खलन और नदियों के जलस्तर बढ़ने की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा मौसम विभाग के अनुसार, इलाम, झापा, पंचथर, धनकुटा, मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, डडेलधुरा और डोटी सहित कई जिलों में छोटी नदियों और पहाड़ी जलधाराओं का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का बढ़ा खतरा लगातार बारिश के कारण नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है, जबकि कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित होने की भी सूचना है। प्रशासन ने स्थानीय निकायों और राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील नेपाल सरकार ने नदी किनारे रहने वाले लोगों, पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों और यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने की अपील की है। लोगों को खराब मौसम के दौरान नदी-नालों को पार न करने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। मानसून अभी और रहेगा सक्रिय नेपाल के मौसम विभाग का कहना है कि देशभर में मानसून सक्रिय बना हुआ है और आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है। ऐसे में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की घटनाओं का खतरा बना रहेगा। भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ सकता है असर विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश का असर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने पर निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए संबंधित एजेंसियां भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
रांची। राजधानी रांची में लगातार हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में जलजमाव हो गया। कई घरों में बारिश का पानी घुस गया, जबकि पंडरा स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलभराव के कारण करीब तीन घंटे तक यातायात बाधित रहा। लोगों को पानी से भरी सड़कों के बीच आवागमन करना पड़ा और कई दोपहिया वाहन भी बंद हो गए। रिम्स और सदर अस्पताल भी प्रभावित बारिश ने राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स की जल निकासी व्यवस्था की भी पोल खोल दी। नालियां जाम होने से अस्पताल के बेसमेंट में गंदा पानी भर गया, जिससे फिजियोथेरेपी विभाग और आसपास के हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल कर्मियों के अनुसार जलभराव और सीलन से बदबू फैलने के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया। वहीं सदर अस्पताल में भी कई जगह पानी रिसने से इमरजेंसी के पास फर्श पर पानी जमा हो गया और ओपीडी में मरीजों की संख्या कम रही। कई कॉलोनियों में घरों में घुसा पानी अरगोड़ा कटहल मोड़ के पास स्थानीय लोगों ने एक बिल्डर पर नाली भरकर जल निकासी बाधित करने का आरोप लगाया, जिसके कारण कई घरों में पानी घुस गया। वहीं सेल सिटी रोड स्थित बालाजी कॉलोनी में नाली नहीं होने से पूरी कॉलोनी जलमग्न हो गई और लोग घंटों घरों में फंसे रहे। स्थानीय निवासियों ने स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग दोहराई। नगर निगम की टीमें राहत कार्य में जुटीं जलजमाव की सूचना मिलते ही रांची नगर निगम की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) जेसीबी, मोटर पंप और अन्य उपकरणों के साथ विभिन्न प्रभावित इलाकों में पहुंची। टीमों ने जाम नालियों की सफाई कर पानी निकाला। नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि जलजमाव की स्थिति में हेल्पलाइन 18005701235 पर सूचना दें, ताकि राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई कर सके।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति गुजरात के सूरत में है, जहां पिछले 36 घंटों में 18 इंच बारिश दर्ज की गई। इस बारिश ने जुलाई 1941 में बने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। शहर के अधिकांश हिस्से जलमग्न हो गए हैं। सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया, जबकि कई स्थानों पर वाहन पानी के तेज बहाव में बहते दिखाई दिए। सूरत में नौ लोगों की मौत, हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया भारी बारिश के दौरान करंट लगने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर करीब 3,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सूरत और नवसारी में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं तथा लोगों से केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में भी बारिश का असर मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार शाम एक पांच मंजिला इमारत ढह गई, जबकि राजस्थान के जालोर में एक जीप नदी में पलट गई। चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हरियाणा के गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंस गया, जिससे करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। कई इलाकों में जलभराव के बीच एक स्कूल बस भी नाले में फंस गई। पुलिस ने कंपनियों से कर्मचारियों को कुछ दिनों तक वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है। अरुणाचल और कर्नाटक में भी अलर्ट अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 26 जिलों के 94 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक चार लोगों की मौत, 21 लोगों के घायल होने और दो महिलाओं के लापता होने की सूचना है। वहीं कर्नाटक के बेलगावी और शिवमोगा जिलों में एहतियात के तौर पर स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चला रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।