Historical Events August 17

Important Events
Important Events: 17 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1563 – फ्रांस के राजा चार्ल्स नवम को 13 साल की उम्र में वयस्क घोषित किया गया। 1717 - फ्रांस, रूस और प्रशिया के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। 1743 - स्वीडन और रूस के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। 1787 - यहूदियों को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में समूह बनाकर प्रार्थना करने की इजाजत मिली। 1835 – सोलोमन मेरिक ने रिंच का पेटेंट कराया। 1836 - ब्रिटेन की संसद में जन्म, विवाह और मृत्यु से संबंधित पंजीकरण स्वीकार किये गये। 1858 – अमरीकी प्रांत हवाई द्वीप में पहला बैंक खोला गया। 1859 – एक गर्म हवा के गुब्बारे के जरिए पहली बार चिट्ठियां भेजी गयीं। 1869 – पहली बार अंतरराष्ट्रीय नौका दौड़ लंदन के टेम्स नदी में हुई, जिसमें ऑक्सफोर्ड ने हार्वर्ड को हराया। 1903 – जोसेफ पुलित्जर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय को दस लाख डॉलर का दान दिया। उनके नाम पर पुलित्जर पुरस्कार शुरु किया गया। 1909 – महान क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा को वायली और लालकाका की हत्या मामले में लंदन की पेंटोनविली कैदखाने में फांसी दी गयी। 1914 - लिथुवानिया ने जर्मनी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। 1915 - चक्रवाती तूफान से गेलवेस्टोन और टेक्सास में 275 लोगों की मौत। 1917 - इटली ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1924 - फ्रांस और जर्मनी के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। 1945 - सुकर्णों और मोहम्मद हट्टा ने इंडोनेशिया में नीदरलैंड से अपनी आजादी की घोषणा की। 1945 – कोरिया प्रायद्यीप का विभाजन उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में हुआ। 1945 – इंडोनेशिया में हॉलैंड के साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष आरंभ हुआ। 1947 - भारत की आज़ादी के बाद पहली ब्रिटिश सैन्य टुकडी स्वदेश रवाना। 1959 - सोवियत संघ और इराक ने इराक में परमाणु संयंत्र के निर्माण के लिये संधि पर हस्ताक्षर किये। 1960 – पश्चिमी अफ्रीक़ा महाद्वीप के देश गैबन को स्वतंत्रता मिली। 1961 – कम्युनिस्ट पूर्वी जर्मन सरकार ने बर्लिन की दीवार का निर्माण पूरा करवाया। 1970 – अमेरिका की राजधानी न्यूयॉर्क सिटी से फिलाडेल्फिया ले जाई गई। 1978 – पहली बार तीन अमेरिकियों ने सफलतापूर्वक बैलून के जरिये अटलांटिक महासागर को पार किया। 1982 - जर्मनी में पहली सीडी (कंपेक्ट डिस्क) लोगों के लिये उपलब्ध की गई। 1982 – अमेरिकी सीनेट ने 1977 से पहले अवैध रूप से अमेरिका पहुंचे प्रवासियों को स्थायी निवासी का दर्जा देने के लिए आव्रजन विधेयक को मंजूरी दे दी। 1987 – हिटलर के सहयोगी रुडोल्फ हेस ने ब्रिटेन की जेल में आत्महत्या कर ली। 1988 - पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया-उल-हक और अमेरिका के राजदूत अर्नाेल्ड राफेल की एक हवाई दुर्घटना में मौत। 1994 - सं.रा. अमेरिका और जापान ने वाशिंगटन में पेटेंट समझौते पर हस्ताक्षर किये। 1998 – नेशन्स बैंक और बैंक ऑफ अमेरिका के विलय से अमेरिका के सबसे बड़े बैंक की स्थापना हुई। 1998 – अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने मोनिका लेविंस्की के साथ अनुचित रिश्ते की बात कबूली। अपने ऊपर लगे आरोपों पर ग्रैंड जूरी के सामने पेश होने वाले क्लिंटन पहले राष्ट्रपति थे। 2000 - फिजी में भारतीय मूल के लोगों की बर्बादी रोकने के लिए अपदस्थ प्रधानमंत्री महेन्द्र चौधरी ने भारत से मदद मांगी, 2000 - ब्रिटेन द्वारा मानव भ्रूण कोशिकाओं की क्लोनिंग की अनुमति। 2002 - रूस ने दलाई लामा को अपने देश में दौरे के लिए वीजा देने से इन्कार किया। 2004 - उदारवादी राजनीतिक लिओनल फ़र्नाडीस ने डोमिनिक गणराज्य के नये राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। 2005 - पूरा बांग्लादेश बम धमाकों से दहला। 63 ज़िलों में लगभग 400 विस्फोट हुए। 2007 - अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की बेटी की सगाई रिपब्लिकन सांसद जॉन हेगर के बेटे के साथ हुई। 2008 - झामुमो ने 23 माह पुरानी मधुकोड़ा सरकार से समर्थन वापस लिया। 2008 - अमेरिका के महान् तैराक एक ओलंपिक खेल के दौरान आठ स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने। 2009 - आंतरिक सुरक्षा के मसले पर देश के सभी मुख्यमंत्रियों का एकदिवसीय सम्मेलन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। 2019 - भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 430.57 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। 2019 - भारत ने साप्ताहिक जोधपुर - मुनाबाओ थार लिंक एक्सप्रेस के संचालन को रद्द कर दिया। 2020 -  ब्रिटिश सरकार ने भारत में 30 लाख पाउंड के नवोन्मेष चुनौती कोष की शुरुआत की। 2020 - गूगल ने ऑस्ट्रेलिया में मुफ्त सर्च सेवा बंद करने की चेतावनी दी। 2021 - भारत के बीस राज्यों से जनजातीय उत्पादों की पहचान जीआई टैगिंग के लिए की गई। 2022 - महाराष्ट्र की जनता ने राज्य सरकार की अपील पर सुबह 11 बजे सरकारी और निजी संस्थानों में सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया। 2022 - भारत और थाईलैंड संयुक्‍त आयोग की नौवीं बैठक बैंकॉक में सम्‍पन्‍न हुई। 2022 - महाराष्ट्र के गोंदिया में पैसेंजर ट्रेन व मालगाड़ी की टक्कर होने से 50 से ज्यादा यात्री घायल हुए 13 गम्भीर। 2022 - अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक मस्जिद में बड़े बम धमाके से इमाम सहित 20 की मौत हुई व 40 से अधिक घायल हुए। 2023 - बीएमडब्ल्यू चैम्पियनशिप (पीजीए) ओलंपिया फील्ड्स नॉर्थ कोर्स , यूएसए में शुरू हुई। 2023 - चन्द्रायण-3 : विक्रम लैंडर प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग हुआ।  2023 - झारखंड के सिल्ली प्रखंड के मुरी ओपी क्षेत्र में बैल को बचाने कुएं में उतरे 7 लोग , तभी धंस गई मिट्टी; 5 की मौत हुई। 2023 - GRSE में बनाए जा रहे प्रोजेक्ट 17ए के छठे स्टील्थ फ्रिगेट विंध्यगिरि को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। 2023 - भारत , त्रिनिदाद तथा टोबैगो ने इंडिया स्टैक को साझा करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। 2024 - भारत ने *‘तीसरे वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्‍मेलन’* की मेजबानी की। 2024 - कश्मीर के शोपियां जिले के केलर में बादल फटने से एक पुल टूटा , भारी बारिश से कई सड़कें नदी में तब्दील हुई। 2025 - भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट (अंतरिक्ष यात्री) शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में इतिहास रचने के बाद भारत लौटे।   17 अगस्त को जन्मे व्यक्ति   1916 - अमृतलाल नागर, साहित्य जगत् में उपन्यासकार के रूप में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त । 1932 - वी.एस. नायपॉल या विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल (नोबेल पुरस्कार) आधुनिक युग के प्रसिद्ध अंग्रेजी साहित्यकार थे। 1941 - वॉय. वी. रेड्डी - भारतीय रिज़र्व बैंक के इक्कीसवें गवर्नर। 1941 - बिमल जालान - भारतीय रिज़र्व बैंक के बीसवें गवर्नर । 1961 - अनामिका - हिंदी भाषा की जानीमानी कवयित्री हैं।   17 अगस्त को हुए निधन   1909 - मदनलाल ढींगरा , भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अप्रतिम क्रान्तिकारी थे। 1949 - पुलिन बिहारी दास - महान् स्वतंत्रता प्रेमी व क्रांतिकारी थे। 1958 - सर जॉन हुबर्ट मार्शल 1902 से 1928 तक भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक थे। 1982 - फ़ादर कामिल बुल्के - प्रसिद्ध साहित्यकार, जिनका जन्म बेल्जियम की फ्लैंडर्स स्टेट के 'रम्सकपैले' गांव में हुआ था। 2007 - दशरथ माँझी यानी "माउंटेन मैन" , बिहार के एक गरीब मजदूर थे। 2019 - करीब 20 साल तक दूरदर्शन न्यूज की एंकर रहने वाली पत्रकार नीलम शर्मा का निधन। 2020 - सुर-सम्राट पंडित जसराज का अमरीका के न्‍यू जर्सी शहर स्थित अपने घर में 90 वर्ष की आयु में देहांत हुआ। 2020 -  मदारी और दृश्यम जैसी फिल्मों के निर्देशक निशिकांत कामत का निधन हुआ। 2022 - जम्मू कश्मीर के भाजपा नेता कुलदीप राज गुप्ता (87) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी संगीतकार बॉबी एली (77) का निधन हुआ। 2023 - ऑस्ट्रियाई पर्वत धाविका गुड्रुन प्लुगर (50) का निधन हुआ। 2023 - ऑस्ट्रेलियाई तैराक जॉन डेविट (86) का निधन हुआ। 2024 - डच फुटबॉल मिडफील्डर और मैनेजर हैंस आइजकेनब्रोक (84) का निधन हुआ। 2025 - पिलानी गोवा कैंपस के हॉस्टल में उत्तर प्रदेश के छात्र कुशाग्र जैन (20) का आकस्मिक निधन हुआ।   17 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   भगवान श्री नर- नारायण जी जयन्ती (श्री बदरीनाथ धाम , श्रावण शुक्ल पंचमी)। मेला श्री नागपंचमी (कास्तीगढ़ , डोडा , जम्मू-कश्मीर)। चौरसिया दिवस / "उत्पत्ति दिवस" (चौरसिया समाज , नाग पंचमी)। आचार्य श्री चरक जयन्ती (श्रावण शुक्ल पंचमी , नाग पंचमी)। श्री मदनलाल ढींगरा स्मृति / शहीदी दिवस। माउंटेन मैन’ श्री दशरथ मांझी पुण्यतिथि। इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता दिवस (घोषणा)। कृपया ध्यान दें  यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari अगस्त 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Jharkhand students protesting over JPSC-JSSC exam issues and demanding Rahul Gandhi’s intervention
झारखंड

Jharkhand Student Protest: छात्रों का ऐलान- राहुल गांधी के झारखंड आने तक जारी रहेगा आंदोलन

kalpana अगस्त 11, 2026 0