Uganda Hunger Crisis: पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में लंबे समय से पड़ रहे सूखे ने गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। पूर्वी युगांडा के करामोजा (Karamoja) क्षेत्र में बारिश नहीं होने और फसलें बर्बाद होने के कारण अब तक कम से कम 19 लोगों की भूख से मौत हो चुकी है। हालात बिगड़ने के बाद सरकार ने आपातकालीन खाद्य राहत अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, करामोजा क्षेत्र में करीब 15 लाख लोग गंभीर खाद्य संकट और कुपोषण का सामना कर रहे हैं। सरकार ने अगले दो महीनों में 9,400 टन खाद्य सामग्री वितरित करने की योजना बनाई है। इसके लिए संसद द्वारा स्वीकृत 45 अरब युगांडाई शिलिंग के आपातकालीन फंड का इस्तेमाल किया जा रहा है। बारिश नहीं हुई, पूरी फसल बर्बाद करामोजा क्षेत्र में इस बार कई वर्षों का सबसे लंबा सूखा दर्ज किया गया है। अप्रैल में बुवाई के दौरान कुछ बारिश हुई थी, लेकिन उसके बाद पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की लगभग पूरी फसल नष्ट हो गई। खेती पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बच्चों का पेट भरने के लिए खदानों में काम करने को मजबूर महिलाएं मोरोटो शहर के पास रूपा गांव की रहने वाली 21 वर्षीय एंजेलिना नाकिरु बताती हैं कि फसल बर्बाद होने के बाद परिवार का पेट भरना बेहद मुश्किल हो गया है। वह रोज सुबह अन्य महिलाओं के साथ एक छोटी पिसाई मिल में काम करने जाती हैं, जहां पत्थरों को पीसकर सोना निकालने की प्रक्रिया के लिए अयस्क तैयार किया जाता है। इस कठिन और धूलभरे काम से उन्हें बहुत कम आमदनी होती है। नाकिरु कहती हैं, "अगर मैं यह काम नहीं करूं, तो मेरे बच्चे भूखे सो जाएंगे। कई दिन ऐसे भी आते हैं जब कोई कमाई नहीं होती और पूरा परिवार खाली पेट सोने को मजबूर होता है। लोग भूख से मर रहे हैं। सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए।" लाखों परिवारों पर संकट यह कहानी सिर्फ एंजेलिना की नहीं, बल्कि करामोजा क्षेत्र के लाखों परिवारों की है। हजारों माताएं अपने बच्चों को दिन में एक वक्त का भोजन भी नहीं दे पा रही हैं। कुपोषण तेजी से बढ़ रहा है और बच्चों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। पहले भी झेल चुका है भुखमरी का संकट युगांडा में यह पहली बार नहीं है जब भुखमरी ने इतनी बड़ी तबाही मचाई हो। युगांडा मानवाधिकार आयोग के अनुसार, वर्ष 2022 में भुखमरी के कारण 2,200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में गरीबी, जलवायु परिवर्तन और खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई और राहत कार्यों में तेजी नहीं लाई गई, तो आने वाले महीनों में करामोजा क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा सकता है। सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां प्रभावित लोगों तक खाद्य सामग्री और जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हैं।
कॉक्स बाजार: बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया। उखिया उपजिले के शरणार्थी कैंप में पहाड़ी ढलान खिसकने से हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) में आठ बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। भारी बारिश बनी हादसे की वजह लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई, जिसके चलते रोहिंग्या कैंप के पास पहाड़ी ढह गई। भूस्खलन की चपेट में कई अस्थायी झोपड़ियां आ गईं, जिससे कैंप में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने परिजनों की तलाश में घटनास्थल पर जुट गए। मलबे से लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान रिफ्यूजी रिलीफ एंड रिपैट्रिएशन कमिश्नर (RRRC) मिजाननुर रहमान ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और राहत टीमों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास जारी है। हादसे में घायल हुए पांच बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अभी भी कई लोगों के लापता होने की सूचना है। प्रशासन ने जारी की चेतावनी पुलिस और प्रशासन ने बताया कि लगातार बारिश के कारण रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। बड़ी संख्या में शरणार्थी पहाड़ी ढलानों पर बनी अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है और निगरानी बढ़ा दी गई है। राहत एजेंसियां सक्रिय हादसे के बाद सरकारी एजेंसियों, संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी संस्थाओं और अन्य राहत संगठनों ने प्रभावित इलाके में राहत कार्य तेज कर दिया है। प्रभावित परिवारों को भोजन, दवाइयां, तिरपाल और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मौसम सामान्य होने तक राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा और जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम तेज किया जाएगा.
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और योगिनी एकादशी व्रत कथा का श्रद्धा के साथ पाठ करने से पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। मान्यता है कि इस एकादशी की महिमा का वर्णन स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को किया था। योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व सनातन परंपरा में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास, भजन-कीर्तन और व्रत कथा का पाठ करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित का अवसर प्रदान करता है और व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। योगिनी एकादशी व्रत कथा हेम माली की भूल बनी संकट का कारण पौराणिक कथा के अनुसार, अलकापुरी के राजा कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी दैनिक पूजा के लिए हेम माली नामक सेवक मानसरोवर से ताजे फूल लाया करता था। हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन वह फूल लेकर लौट तो आया, लेकिन पूजा स्थल पहुंचने के बजाय अपनी पत्नी के साथ समय बिताने में इतना मग्न हो गया कि भगवान शिव की पूजा के लिए समय पर फूल नहीं पहुंचा सका। कुबेर के श्राप से बदल गई किस्मत जब पूजा का समय बीतने लगा और फूल नहीं पहुंचे, तो कुबेर ने कारण का पता लगाया। उन्हें जब हेम माली की लापरवाही का पता चला तो वे क्रोधित हो गए और उसे श्राप दे दिया कि वह स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर जाएगा, कुष्ठ रोग से पीड़ित होगा और पत्नी के वियोग का दुख सहेगा। श्राप के प्रभाव से हेम माली तत्काल स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर रोगग्रस्त हो गया और वह अपनी पत्नी से भी अलग हो गया। वह लंबे समय तक जंगलों में दुख और कष्ट भरा जीवन बिताने लगा। महर्षि मार्कण्डेय ने बताया मुक्ति का मार्ग भटकते-भटकते एक दिन हेम माली महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा और अपनी पूरी व्यथा सुनाई। महर्षि ने उसे सलाह दी कि वह आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करे और भगवान विष्णु की आराधना करे। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। व्रत के प्रभाव से मिला नया जीवन हेम माली ने महर्षि के निर्देशानुसार पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। उसने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और रात्रि जागरण भी किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया। उसे अपना दिव्य स्वरूप वापस प्राप्त हुआ और वह पुनः स्वर्ग लौटकर अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ सुखपूर्वक जीवन बिताने लगा। क्या संदेश देती है यह कथा? योगिनी एकादशी की कथा यह संदेश देती है कि जीवन में कर्तव्य, अनुशासन और ईश्वर भक्ति का विशेष महत्व है। यदि व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार कर सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करे, तो उसे अपने कर्मों का प्रायशित करने और जीवन में नई शुरुआत करने का अवसर मिल सकता है। धार्मिक सूचना: यह लेख पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं पर आधारित है। आस्था और विश्वास व्यक्तिगत विषय हैं।
काराकास: वेनेजुएला के ला गुआरा प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य अभूतपूर्व परिस्थितियों में चल रहा है। अस्पतालों के क्षतिग्रस्त होने और मरीजों की भारी संख्या के कारण अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक स्थान अस्थायी अस्पतालों में बदल दिए गए हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मैकडॉनल्ड्स बना फील्ड हॉस्पिटल ला गुआरा के काराबालेदा इलाके में स्थित एक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट अब फील्ड हॉस्पिटल के रूप में काम कर रहा है। जहां कभी बर्गर और फ्रेंच फ्राइज परोसे जाते थे, वहां अब मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रेस्टोरेंट की छत से आईवी फ्लूइड की बोतलें लटकाई गई हैं और फूड काउंटर पर दवाइयां तथा मेडिकल सामग्री रखी गई है। वहीं, भोजन के रूप में लोगों को दान में मिली अरेपास (वेनेजुएला की पारंपरिक रोटी) और सैंडविच वितरित किए जा रहे हैं। 33 वर्षीय वालंटियर सर्जन कार्लीज फिगुएरा ने बताया कि यहां 30 से अधिक डॉक्टर लगातार घायलों का इलाज कर रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकांश मरीज हाई ब्लड प्रेशर, घबराहट, डायरिया और अन्य आपात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बस टर्मिनल में चल रहा इलाज कैटिया ला मार बस टर्मिनल को भी अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में बदल दिया गया है, जहां अब तक करीब 4,000 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यहां निजी सहयोग से जुटाए गए मेडिकल उपकरणों के सहारे डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे हैं। 16 घंटे मलबे में फंसा रहा 13 वर्षीय बच्चा 13 वर्षीय इवरसन मदीना भूकंप के बाद अपने घर के मलबे में करीब 16 घंटे तक फंसा रहा। उसे गंभीर चोटों के साथ बाहर निकाला गया। इवरसन ने बताया, "मुझे लगा था कि मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा। जब दमकलकर्मी पहुंचे, तब उम्मीद जगी।" इस हादसे में उसने अपनी दादी और एक रिश्तेदार को अपनी आंखों के सामने खो दिया। डॉक्टरों ने सुनाई भयावह तस्वीर डॉक्टर मारिया जोस पिनो, जिन्होंने स्वयं इस भूकंप का सामना किया, बताती हैं कि सड़कों पर हर तरफ तबाही का मंजर था। उनके अनुसार, "सड़कों पर शव पड़े थे, मुर्दाघरों में जगह नहीं बची थी और कई शवों का अंतिम संस्कार तक समय पर नहीं हो पा रहा था।" पैर में चोट होने के बावजूद वह लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। महामारी का खतरा बढ़ा भूकंप में 150 से अधिक बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं। हजारों लोग राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले शिविरों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. एंटोनियो ओलाइज़ोला के अनुसार, राहत शिविरों में डायरिया, पेचिश, पेट संक्रमण और उल्टी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना है कि अब भूकंप के बाद महामारी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। राहत अभियान जारी स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। हालांकि भारी तबाही और सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पर भारी दबाव बना हुआ है।
इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन के बीच हालात लगातार बिगड़ने के दावे सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों, ट्रक चालकों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन ने खाद्य सामग्री, ईंधन और दवाओं की आपूर्ति सीमित कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की है। पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कई इलाकों में आवश्यक वस्तुओं की कमी की शिकायतें बढ़ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन और बंद के कारण आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। राजधानी मुजफ्फराबाद सहित कई शहरों में बाजार बंद हैं और इंटरनेट सेवाओं में भी रुकावट की खबरें सामने आई हैं। खाद्य सामग्री और दवाओं की कमी का दावा स्थानीय निवासियों का कहना है कि आटा, चावल, दाल, चीनी, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि राशन डिपो पर कई दिनों तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें आवश्यक वस्तुएं नहीं मिल रही हैं, जबकि खुले बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। ईंधन संकट से बढ़ी मुश्किलें ईंधन की कमी भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। कई जिलों में पेट्रोल पंप बंद होने की खबरें हैं। वाहन चालकों का दावा है कि उन्हें ब्लैक मार्केट से ऊंचे दामों पर पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है, जिससे आम लोगों और व्यापारियों दोनों की परेशानियां बढ़ गई हैं। जरूरी सामान लाने वालों को रोके जाने के आरोप रिपोर्टों के अनुसार, कई लोग आवश्यक सामान खरीदने के लिए पाकिस्तान के अन्य शहरों जैसे रावलपिंडी और इस्लामाबाद जा रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि लौटते समय उन्हें खाद्य सामग्री, दवाइयां और ईंधन लेकर PoK में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने चेकपोस्ट पर उनके वाहनों को रोककर सामान वापस ले जाने या फेंकने के लिए दबाव बनाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने का दावा स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आवश्यक वस्तुओं से भरे कई ट्रकों को रास्ते में रोके जाने के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। ट्रक चालकों का कहना है कि कई वाहन घंटों और कुछ मामलों में कई दिनों तक रास्ते में खड़े रहे, जिससे खराब होने वाला सामान भी नुकसान का शिकार हुआ। पाकिस्तान प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार पाकिस्तान प्रशासन ने खाद्य सामग्री और ईंधन की आपूर्ति रोकने के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है और किसी भी वाहन को जानबूझकर नहीं रोका गया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कुछ रणनीतिक कदम उठाए गए हैं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या है पूरे विवाद की वजह? PoK में मौजूदा आंदोलन की शुरुआत विधानसभा की उन 12 आरक्षित सीटों को लेकर हुई, जो भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करता है। इसी मुद्दे को लेकर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। बाद में पाकिस्तान सरकार ने JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर उसके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। आंदोलन के और तेज होने के संकेत रिपोर्टों के अनुसार, PoK के कई शहरों और कस्बों में प्रदर्शन लगातार फैल रहे हैं। आंदोलनकारी संगठन दावा कर रहे हैं कि रावलाकोट में चल रहे धरने में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं। JAAC ने आने वाले दिनों में रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक बड़े मार्च का भी आह्वान किया है। इस बीच क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
मनीला, एजेंसियां। फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में स्थित मिंडानाओ द्वीप के पास आए शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक तबाही मचा दी। 8.1 तीव्रता के इस भूकंप के झटकों से कई इमारतें पलभर में धराशायी हो गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इमारतें ढहीं, लोग जान बचाकर भागे भूकंप के तेज झटकों के बाद लोग घरों, स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर भागने लगे। कई शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक भवनों को नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में इमारतों के गिरने और लोगों के बीच फैली दहशत साफ देखी जा सकती है। कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। सुनामी अलर्ट ने बढ़ाई चिंता भूकंप के बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने फिलीपींस के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों ने कुछ इलाकों में तीन मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई है। प्रशासन ने समुद्र तटों के पास रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। कई तटीय इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और राहत शिविर स्थापित किए गए। राहत और बचाव कार्य जारी सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। कई स्थानों पर मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका है। सड़कों में दरारें आने और भवनों को नुकसान पहुंचने से राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा अभी सामने आना बाकी है। आफ्टरशॉक से लोगों में डर कायम मुख्य भूकंप के कुछ घंटों बाद 6.1 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी दर्ज किया गया, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई। कई परिवार रातभर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। फिलीपींस 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं। इस बार का भूकंप हाल के वर्षों की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में माना जा रहा है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत हिस्से पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले रही है और अब सैन्य दबाव को और बढ़ाया जाएगा। नेतन्याहू बोले- “एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे” कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। पहले हम गाजा के 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सैन्य नियंत्रण को और बढ़ाने का आदेश दिया है। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं।” सीजफायर समझौते के खिलाफ माना जा रहा कदम विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इजराइल का यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय “येलो लाइन” के पीछे हटना था। उस समय गाजा का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इजराइली नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे इस सीमा को आगे बढ़ा रहा है और अब गाजा के लगभग 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण हो चुका है। शांति वार्ता ठप, दोनों पक्ष आमने-सामने इजराइल और हमास के बीच जारी शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इजराइल का कहना है कि वह हमास को पूरी तरह कमजोर किए बिना पीछे नहीं हटेगा, जबकि हमास इजराइली सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है। गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजराइल गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो वहां मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में गाजा की करीब 22 लाख आबादी को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर होना पड़ सकता है। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन के कारण गाजा के ज्यादातर इलाके पहले ही तबाह हो चुके हैं। “हर खाली जगह पर टेंट लगे हैं” यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले से ही बेहद खराब हैं। उन्होंने कहा, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर इलाका और छोटा हो गया, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह नहीं बचेगी।” सीजफायर के बाद भी जारी हैं हमले इजराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने “येलो लाइन” के आसपास के बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है, जहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में इजराइली टैंकों की बढ़ती आवाजाही और ड्रोन हमलों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध हलचल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना गाजा में बढ़ती सैन्य कार्रवाई और संभावित क्षेत्रीय कब्जे की रणनीति को लेकर इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने पहले भी गाजा में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार 29 मई को रात 11 बजे सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। वे दिल्ली से सिंगापुर के लिए फ्लाईट पकड़ेंगे। जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। उनकी एक बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर में ही रहती है। लालू प्रसाद 10 जून तक भारत लौट आयेंगे। 11 जून को लालू प्रसाद का जन्मदिन है, लिहाजा उनकी वापसी की तारीख 10 जून मानी जा रही है। रोहिणी की वापसी का प्रयास करेंगे चर्चा है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान लालू प्रसाद अपनी पुत्री रोहिणी आचार्य को वापस पार्टी में लाने का भी प्रयास करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान रोहिणी आचार्य पार्टी से और अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराज हो गयीं थी। लालू प्रसाद रोहिणी को राजद में संगठन के किसी पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, एक चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद के बडे बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी में वापस लाया जायेगा। उन्हें बिहार विधान परिषद में एमएसली बनाया जा सकता है। सन आफ लालू प्रसाद ने की पुष्टि इधर, लालू प्रसाद के बेहद करीबी और सन आफ लालू प्रसाद के नाम से चर्चित राजद नेता इरफान अहमद अंसारी ने लालू प्रसाद के सिंगापुर जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्या को पार्टी में वापस लाया जा रहा है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Gaza Strip एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। ताजा हमलों में कम से कम सात फिलिस्तीनियों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह घटनाएं ऐसे समय पर हुई हैं जब क्षेत्र में पहले से ही संघर्ष और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य गाज़ा के Bureij refugee camp में सुबह-सुबह एक ड्रोन हमले ने नागरिकों के एक समूह को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों और राहत एजेंसियों के मुताबिक, मिसाइलें एक पुलिस पोस्ट के पास गिरीं, जिससे कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि Al-Aqsa Hospital में छह शव और कई घायल पहुंचाए गए, जबकि Al-Awda Hospital में एक और मृतक तथा दो घायल लाए गए। राहत कार्य में जुटी टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि हमले के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए थे। इसी के साथ दक्षिणी गाज़ा के Khan Younis इलाके में भी एक ड्रोन हमले में विस्थापित लोगों के तंबू को निशाना बनाया गया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं। इलाके में लगातार गोलाबारी और टैंक फायरिंग की भी खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने हालिया हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही हत्याएं और हमले यह दर्शाते हैं कि क्षेत्र में जवाबदेही की कमी बनी हुई है और नागरिकों की सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में है। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 72,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हाल के दिनों में भी हिंसा थमने के बजाय बढ़ती नजर आ रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और गहरी हो गई है। पश्चिमी तट यानी West Bank में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां छापेमारी और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। कई गांवों में आगजनी और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।