Hypothyroidism

Thyroid gland illustration showing common thyroid diseases and their effects on the human body
Thyroid Disease: एक नहीं, 5 तरह की होती हैं थायरॉइड की बीमारियां, सिर्फ वजन बढ़ना-घटना ही नहीं है संकेत

थायरॉइड को लेकर आमतौर पर लोगों के मन में सबसे पहले वजन बढ़ने या घटने की बात आती है। लेकिन थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं सिर्फ वजन तक सीमित नहीं हैं। गर्दन के सामने मौजूद तितली के आकार की यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, हृदय गति और शरीर के तापमान समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। इसके काम में गड़बड़ी होने पर अलग-अलग तरह की बीमारियां हो सकती हैं। थायरॉइड ग्रंथि मुख्य रूप से T3 और T4 हार्मोन बनाती है। इन हार्मोन्स का असंतुलन शरीर में कई तरह के बदलाव पैदा कर सकता है। थायरॉइड से जुड़ी प्रमुख समस्याओं में हाइपोथायरायडिज्म, हाइपरथायरायडिज्म, थायरॉइडाइटिस, घेंघा और थायरॉइड कैंसर शामिल हैं। 1. हाइपोथायरायडिज्म जब थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। इसमें शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी पड़ सकती हैं। इसके संभावित लक्षणों में लगातार थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, त्वचा का रूखा होना और बाल झड़ना शामिल हो सकते हैं। 2. हाइपरथायरायडिज्म हाइपोथायरायडिज्म के उलट हाइपरथायरायडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो सकता है। तेजी से वजन कम होना, दिल की धड़कन बढ़ना, घबराहट या बेचैनी, ज्यादा पसीना आना, हाथ कांपना और नींद में परेशानी इसके संभावित लक्षण हैं। Graves' disease हाइपरथायरायडिज्म का एक प्रमुख कारण है। 3. थायरॉइडाइटिस थायरॉइडाइटिस का अर्थ थायरॉइड ग्रंथि में सूजन से है। इसके पीछे संक्रमण, ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया या प्रसव के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव जैसे कारण हो सकते हैं। इस स्थिति में गर्दन में दर्द या संवेदनशीलता, थकान और हार्मोन स्तर में बदलाव के साथ वजन में उतार-चढ़ाव हो सकता है। थायरॉइडाइटिस के कुछ प्रकार अस्थायी होते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक बने रह सकते हैं। 4. घेंघा (Goiter) जब थायरॉइड ग्रंथि असामान्य रूप से बढ़ जाती है, तो इसे घेंघा कहा जाता है। इसके कारण गर्दन के सामने सूजन या उभार दिखाई दे सकता है। आयोडीन की कमी, हार्मोन असंतुलन और थायरॉइड की अन्य समस्याएं इसके संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में निगलने में परेशानी, सांस लेने में दिक्कत या गले में दबाव महसूस हो सकता है। 5. थायरॉइड कैंसर थायरॉइड कैंसर तब विकसित होता है जब थायरॉइड की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। गर्दन में गांठ या सूजन, आवाज में बदलाव, निगलने में परेशानी और लगातार खांसी जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। हालांकि थायरॉइड कैंसर के कई मामलों का उपचार प्रभावी तरीके से किया जा सकता है, लेकिन गर्दन में नई गांठ या लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। थायरॉइड की समस्या क्यों होती है? थायरॉइड की गड़बड़ी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ऑटोइम्यून बीमारी, आयोडीन की कमी या अधिकता, कुछ संक्रमण, आनुवंशिक कारण, रेडिएशन का संपर्क और कुछ दवाएं थायरॉइड को प्रभावित कर सकती हैं। यही वजह है कि सिर्फ वजन बढ़ने या घटने को थायरॉइड का संकेत मानना सही नहीं है। अलग-अलग थायरॉइड बीमारियों के लक्षण भी अलग हो सकते हैं। कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? अगर लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव, दिल की धड़कन में बदलाव, गर्दन में सूजन या गांठ, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव अथवा अन्य लगातार बने रहने वाले लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। थायरॉइड की बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर लक्षणों के आधार पर जांच और आवश्यक टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। समय पर पहचान होने पर कई थायरॉइड समस्याओं को प्रभावी तरीके से नियंत्रित या उपचारित किया जा सकता है।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
Woman consulting a doctor for Hashimoto’s thyroiditis symptoms, highlighting thyroid health, autoimmune disease and hormone imbalance.
महिलाओं में क्यों ज्यादा होता है Hashimoto’s Thyroiditis? जानिए थायरॉइड की इस ऑटोइम्यून बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज

थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं महिलाओं में आम हैं, लेकिन उनमें Hashimoto’s Thyroiditis (हाशिमोटो थायरॉइडिटिस) सबसे अधिक पाई जाने वाली ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी मानी जाती है। इस बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि पर ही हमला करने लगता है, जिससे धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता कम होने लगती है और हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) विकसित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 7 से 10 गुना अधिक देखी जाती है। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक कारण और इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्या है Hashimoto’s Thyroiditis? Hashimoto’s Thyroiditis एक क्रोनिक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉइड ग्रंथि के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती है। ये एंटीबॉडी धीरे-धीरे थायरॉइड कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन कम होने लगता है। शुरुआत में कई मरीजों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ यह बीमारी हाइपोथायरॉइडिज्म का कारण बन सकती है। महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा क्यों होती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन इम्यून सिस्टम को अधिक सक्रिय बनाते हैं। यही वजह है कि महिलाओं में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है। इन परिस्थितियों में जोखिम और बढ़ सकता है— गर्भावस्था के दौरान प्रसव के बाद मेनोपॉज के समय हार्मोनल बदलाव के दौरान Hashimoto’s Thyroiditis होने के प्रमुख कारण यह बीमारी किसी एक कारण से नहीं होती, बल्कि कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से विकसित होती है। मुख्य कारणों में शामिल हैं— परिवार में थायरॉइड या ऑटोइम्यून बीमारी का इतिहास हार्मोनल बदलाव वायरल संक्रमण अत्यधिक आयोडीन का सेवन (कुछ मामलों में) विटामिन D या सेलेनियम की कमी पर्यावरणीय कारण आनुवंशिक संवेदनशीलता इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें Hashimoto’s Thyroiditis के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इनमें शामिल हैं— हर समय थकान महसूस होना बिना कारण वजन बढ़ना ठंड अधिक लगना बालों का झड़ना त्वचा का रूखा होना कब्ज की समस्या चेहरे या गर्दन में सूजन ध्यान लगाने में कठिनाई याददाश्त कमजोर होना महिलाओं में अनियमित पीरियड्स मूड में बदलाव या अवसाद किन लोगों में ज्यादा रहता है खतरा? इन लोगों में Hashimoto’s Thyroiditis होने का जोखिम अधिक माना जाता है— 30 से 60 वर्ष की महिलाएं परिवार में थायरॉइड रोग का इतिहास टाइप-1 डायबिटीज के मरीज रूमेटाइड आर्थराइटिस से पीड़ित लोग सीलिएक डिजीज के मरीज विटिलिगो या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी वाले लोग हाल ही में मां बनी महिलाएं क्या यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है? विशेषज्ञों के अनुसार Hashimoto’s Thyroiditis को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही इलाज और नियमित निगरानी से इसे प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो डॉक्टर थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा देते हैं, जिससे हार्मोन की कमी पूरी होती है और अधिकांश लक्षणों में सुधार आता है। कुछ मरीजों में थायरॉइड ग्रंथि बड़ी होकर गोइटर (Goiter) का रूप ले सकती है। यदि इससे निगलने, बोलने या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह भी दे सकते हैं। कब डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि लंबे समय तक— लगातार थकान बनी रहे, बिना वजह वजन बढ़ने लगे, बाल तेजी से झड़ने लगें, ठंड अधिक महसूस हो, पीरियड्स अनियमित हो जाएं, तो बिना देरी किए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लें और थायरॉइड की जांच कराएं। समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Doctor checking a patient's blood pressure while explaining the connection between hypertension and thyroid disorders.
बार-बार बढ़ रहा है BP? सिर्फ नमक नहीं, थायरॉइड की गड़बड़ी भी हो सकती है वजह, जानिए डॉक्टर की सलाह

भारत में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आमतौर पर लोग हाई बीपी की वजह अधिक नमक, मोटापा, तनाव, धूम्रपान या खराब लाइफस्टाइल को मानते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बार-बार बढ़ता ब्लड प्रेशर किसी हार्मोनल समस्या, खासकर थायरॉइड डिसऑर्डर का भी संकेत हो सकता है। कार्डियक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्लड प्रेशर दवाइयों के बावजूद बार-बार बढ़ रहा है या नियंत्रित नहीं हो रहा, तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। कैसे जुड़ा है थायरॉइड और हाई ब्लड प्रेशर? थायरॉइड ग्रंथि शरीर में बनने वाले T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है, तब रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर, विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (निचला स्तर), बढ़ सकता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है? हाइपोथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है। साथ ही रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम होने लगता है। यही कारण है कि शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए दबाव बढ़ सकता है, जिससे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई बीपी और थायरॉइड के बीच संबंध को देखते हुए दोनों स्थितियों की जांच एक साथ करना बेहतर माना जाता है। कब करानी चाहिए थायरॉइड जांच? यदि आपको— बार-बार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, दवा लेने के बावजूद बीपी नियंत्रित न हो, लगातार थकान महसूस हो, वजन बढ़ रहा हो, ठंड ज्यादा लगती हो, दिल की धड़कन धीमी रहती हो, तो डॉक्टर की सलाह पर TSH, T3 और T4 टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। हाइपोथायरॉइडिज्म में किन दवाओं में बरतें सावधानी? विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों में पहले से ही दिल की धड़कन धीमी हो सकती है। ऐसे में कुछ बीपी की दवाएं, जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, धड़कन को और धीमा कर सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के आसान उपाय हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड दोनों स्थितियों में स्वस्थ जीवनशैली काफी मददगार साबित होती है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। योग और कार्डियो एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। नमक का सेवन सीमित रखें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर DASH डाइट अपनाएं। पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की जांच कराते रहें। डॉक्टर की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की समस्या कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए जिन लोगों को लगातार हाई बीपी की शिकायत रहती है, उन्हें थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। वहीं थायरॉइड के मरीजों को भी समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना चाहिए ताकि किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या से बचा जा सके।  

surbhi जून 29, 2026 0
Doctor explaining the link between thyroid disorders and high blood pressure with medical charts.
हाई बीपी और थायरॉइड का है गहरा संबंध? जानिए कैसे साथ-साथ बढ़ सकता है दोनों बीमारियों का खतरा

हमारे शरीर में मौजूद थायरॉइड ग्रंथि आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन इसका काम बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह ग्रंथि मेटाबॉलिज्म, हृदय की कार्यप्रणाली और रक्त संचार को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब यह पर्याप्त मात्रा में थायरॉइड हार्मोन नहीं बना पाती, तो हाइपोथायरॉइडिज्म की स्थिति पैदा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या केवल थकान या वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के खतरे को भी बढ़ा सकती है। क्या होता है हाइपोथायरॉइडिज्म? हाइपोथायरॉइडिज्म वह स्थिति है, जब थायरॉइड ग्रंथि शरीर के लिए जरूरी T3 और T4 हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाती। इसके कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं: लगातार थकान महसूस होना वजन बढ़ना अधिक ठंड लगना त्वचा का सूखापन कब्ज की समस्या बालों का झड़ना हाई ब्लड प्रेशर क्या है? जब रक्त धमनियों की दीवारों पर लगातार अधिक दबाव डालता है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है। इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हाइपोथायरॉइडिज्म और हाई बीपी के बीच क्या है संबंध? इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-4) के आंकड़ों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हर तीन में से एक व्यक्ति में थायरॉइड ग्रंथि की कार्यक्षमता कम पाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, थायरॉइड हार्मोन रक्त वाहिकाओं की लोच और हृदय की पंपिंग क्षमता को प्रभावित करते हैं। जब हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो धमनियां कठोर होने लगती हैं, जिससे रक्त प्रवाह पर दबाव बढ़ता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हाइपोथायरॉइडिज्म किस तरह बढ़ाता है ब्लड प्रेशर? 1. हृदय की कार्यक्षमता पर असर अध्ययनों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म हृदय की धड़कन को धीमा कर सकता है और शरीर में रक्त पंप करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। 2. खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ना इस बीमारी से LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बढ़ सकता है, जिससे धमनियों में प्लाक जमा होने लगता है और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ जाता है। 3. रक्त वाहिकाओं का कठोर होना थायरॉइड हार्मोन की कमी से रक्त वाहिकाओं की लचक कम हो सकती है, जिससे विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना रहती है। किन लोगों में अधिक होता है जोखिम? अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार, इन लोगों में थायरॉइड संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है: 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग महिलाएं मोटापे से ग्रसित व्यक्ति डायबिटीज के मरीज जिनके परिवार में पहले से थायरॉइड की हिस्ट्री हो क्या थायरॉइड का इलाज ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हाई ब्लड प्रेशर का मुख्य कारण हाइपोथायरॉइडिज्म है, तो थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से ब्लड प्रेशर में सुधार देखा जा सकता है। हालांकि, सभी मरीजों में इसका प्रभाव समान नहीं होता और कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर की अलग दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।  

surbhi जून 17, 2026 0
World Thyroid Day 2026
World Thyroid Day 2026: क्यों होती है थायरॉइड की बीमारी? जानिए लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

नई दिल्ली, एजेंसियां। हर साल 25 मई को मनाए जाने वाले World Thyroid Day 2026 का उद्देश्य लोगों को थायरॉइड बीमारी के प्रति जागरूक करना है। आज दुनियाभर में करोड़ों लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायरॉइड की समस्या लगभग आठ गुना अधिक देखी जाती है।   थायरॉइड गर्दन के सामने स्थित तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर के लिए जरूरी हार्मोन बनाती है। जब यह ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती, तो शरीर के कई कार्य प्रभावित होने लगते हैं। वजन बढ़ना या घटना, थकान, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना, बाल झड़ना और ज्यादा पसीना आना इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं।   थायरॉइड के दो प्रमुख प्रकार विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड मुख्य रूप से दो तरह का होता है। पहला हाइपोथायरायडिज्म, जिसमें हार्मोन कम बनते हैं और व्यक्ति को थकान, सुस्ती व वजन बढ़ने जैसी समस्याएं होती हैं। दूसरा हाइपरथायरॉइडिज्म, जिसमें हार्मोन ज्यादा बनने लगते हैं, जिससे घबराहट, तेजी से वजन कम होना और हाथ कांपने जैसी दिक्कतें होती हैं।   किन कारणों से बढ़ता है खतरा? डॉक्टरों के मुताबिक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर थायरॉइड का सबसे बड़ा कारण है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करने लगता है। इसके अलावा आयोडीन की कमी, खराब लाइफस्टाइल, तनाव, हार्मोनल बदलाव और आनुवंशिक कारण भी बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। गर्भावस्था, पीरियड्स और मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में इसका जोखिम अधिक रहता है।   बचाव और इलाज कैसे करें? विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित दवा, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली से थायरॉइड को नियंत्रित किया जा सकता है। डाइट में आयोडीन, जिंक, आयरन और सेलेनियम से भरपूर चीजें जैसे अंडे, मछली, दही, हरी सब्जियां और नट्स शामिल करने की सलाह दी जाती है। साथ ही नियमित व्यायाम और समय-समय पर थायरॉइड टेस्ट कराना भी जरूरी माना गया है।

Unknown मई 25, 2026 0
Thyroid in Women
महिलाओं में ज्यादा बढ़ रहा थायरॉइड का खतरा, जानिए कारण और बचाव के उपाय

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के समय में थायरॉइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। भारत में भी इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंडियन थायरॉइड सोसाइटी के अनुसार देश में करीब 4.2 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार के थायरॉइड विकार से प्रभावित हैं। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में लोगों को लंबे समय तक इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता। इसी को लेकर हर साल 25 मई को विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके।   क्या है थायरॉइड और क्यों है जरूरी? थायरॉइड गर्दन के सामने स्थित तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है। यह शरीर में मेटाबॉलिज्म, वजन, हार्ट रेट, शरीर के तापमान, ऊर्जा स्तर और मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है। जब यह ग्रंथि कम या ज्यादा मात्रा में हार्मोन बनाने लगती है, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।   थायरॉइड की समस्या होने पर थकान, वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, कमजोरी, मूड स्विंग, घबराहट और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।   महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है खतरा? विशेषज्ञों और कई मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड का खतरा 5 से 8 गुना अधिक होता है। इसका सबसे बड़ा कारण महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं।   पीरियड्स, गर्भावस्था, प्रसव और मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोन में बदलाव होता है, जो थायरॉइड ग्रंथि को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा तनाव, खराब लाइफस्टाइल, नींद की कमी और जंक फूड का अधिक सेवन भी बीमारी का जोखिम बढ़ा रहे हैं।   कैसे करें बचाव? डॉक्टरों के अनुसार थायरॉइड से बचने के लिए संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है। आहार में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। इसके लिए आयोडीन युक्त नमक, दूध, दही और अंडे का सेवन फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा अखरोट, दालें, बीज और हरी सब्जियां शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं। तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम भी जरूरी है। जिन लोगों के परिवार में पहले से थायरॉइड की समस्या रही हो, उन्हें समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए।

Unknown मई 25, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
राष्ट्रीय

संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

surbhi अगस्त 11, 2026 0