India health news

Pharmacist dispensing cough syrup as India mandates doctor's prescription for cough and syrup-based medicines.
अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, सरकार ने OTC बिक्री पर लगाई रोक

  अब देश में कफ सिरप समेत अन्य सिरप आधारित दवाओं को खरीदने के लिए डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर शेड्यूल-K की सूची से 'सिरप' शब्द को हटा दिया है। इसके साथ ही कफ सिरप की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर रोक लग गई है। नए नियम के तहत अब फार्मेसियां केवल पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर (Registered Medical Practitioner) द्वारा जारी और हस्ताक्षरित वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही कफ सिरप बेच सकेंगी। बच्चों की मौत के बाद सरकार ने उठाया कदम स्वास्थ्य मंत्रालय का यह फैसला वर्ष 2025 में सामने आए उन मामलों के बाद लिया गया है, जिनमें कथित तौर पर दूषित कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत हुई थी। उस समय 'कोल्ड्रिफ' नामक कफ सिरप विवादों में आया था। जांच में पाया गया कि कुछ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला औद्योगिक सॉल्वेंट मिला हुआ था, जो मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। इसके बाद सरकार ने दवा सुरक्षा मानकों को सख्त करने का फैसला किया। शेड्यूल-K क्या है? Drugs and Cosmetics Act, 1945 के तहत शेड्यूल-K में उन दवाओं को शामिल किया जाता है, जिन्हें बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बेचा जा सकता है। अब 'सिरप' को इस सूची से हटाए जाने के बाद कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाएं इस श्रेणी में नहीं रहेंगी। क्या होती है ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री? ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री का मतलब ऐसी दवाओं की बिक्री से है, जिन्हें मरीज बिना डॉक्टर की पर्ची के सीधे मेडिकल स्टोर से खरीद सकता है। अब तक पारासिटामोल, कुछ सर्दी-खांसी की दवाएं, एंटासिड और विटामिन जैसी दवाएं आसानी से उपलब्ध थीं। वहीं एंटीबायोटिक्स, मधुमेह और कुछ अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं के लिए पहले से ही डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होता है। दवा सुरक्षा पर बढ़ेगा फोकस पिछले कुछ वर्षों में भारत में बने कुछ कफ सिरपों की गुणवत्ता को लेकर देश और विदेश में सवाल उठे हैं। कई मामलों में खराब गुणवत्ता वाले सिरप को बच्चों की मौत से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद दवा नियमन को लेकर चिंता बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से: कफ सिरप के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। दवा कंपनियों और फार्मेसियों की जवाबदेही बढ़ेगी। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं के सेवन पर नियंत्रण लगेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम देश में दवा सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Ugandan woman isolated in Jaipur hospital after suspected Ebola symptoms detected at airport screening
इबोला के संदिग्ध मामले से हड़कंप, जयपुर में युगांडा की महिला आइसोलेशन में भर्ती

  जयपुर: अफ्रीकी देशों में फैल रहे घातक इबोला वायरस को लेकर भारत में सतर्कता बढ़ गई है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है। अभी तक संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। युगांडा से आई महिला में दिखे लक्षण जानकारी के अनुसार युगांडा की एक महिला शुक्रवार (5 जून) को शारजाह से जयपुर पहुंची थी। एयरपोर्ट पर नियमित स्वास्थ्य जांच और थर्मल स्क्रीनिंग के दौरान उसमें इबोला जैसे लक्षण पाए गए, जिसके बाद उसे तुरंत निगरानी में ले लिया गया। महिला को जयपुर स्थित राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। उसके नमूने जांच के लिए पुणे स्थित विशेष प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। RUHS के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हैदराबाद एयरपोर्ट पर भी दूसरा संदिग्ध मामला इसी बीच, गुरुवार (4 जून) को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी एक सूडानी नागरिक में बुखार के लक्षण पाए जाने के बाद उसे अलग किया गया। मरीज को सिकंदराबाद स्थित गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसके सैंपल CCMB लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। केंद्र सरकार ने जारी की एडवाइजरी अफ्रीका के कई देशों में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर स्वास्थ्य जांच और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। WHO और अफ्रीका CDC की चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने इबोला को लेकर कई देशों में बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है। वहीं अफ्रीका CDC ने भी कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन को महाद्वीपीय स्तर का स्वास्थ्य आपातकाल बताया है। क्या है बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इबोला? इबोला वायरस रोग एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो शरीर में तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक एवं बाहरी रक्तस्राव का कारण बन सकता है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इबोला को इसके तेजी से फैलने और उच्च मृत्यु दर के कारण अधिक खतरनाक माना जाता है। फिलहाल इस स्ट्रेन के लिए कोई विशेष टीका या निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है। भारत में अभी कोई पुष्ट मामला नहीं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार भारत में अब तक इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। जयपुर और हैदराबाद दोनों मामलों की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। युगांडा को भारत की सहायता इबोला संकट से जूझ रहे युगांडा की मदद के लिए भारत ने चिकित्सा सहायता भी भेजी है। भारतीय वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए जरूरी मेडिकल सामग्री अफ्रीका भेजी गई है, जिसमें PPE किट, दवाएं और स्वास्थ्य उपकरण शामिल हैं। भारत ने इससे पहले भी अफ्रीकी देशों को इबोला नियंत्रण में सहयोग देने के लिए आपात चिकित्सा सहायता प्रदान की है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Health officials monitor suspected Ebola case in India after traveler returns from Uganda
युगांडा से लौटी भारतीय महिला की इबोला रिपोर्ट नेगेटिव, स्वास्थ्य विभाग ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं

युगांडा से भारत लौटी एक भारतीय महिला में इबोला वायरस संक्रमण जैसे लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया था। एहतियात के तौर पर महिला को बेंगलुरु के सरकारी अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया था। अब राहत की खबर सामने आई है। महिला की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है और उसमें इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। पुणे लैब भेजा गया था ब्लड सैंपल स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, महिला के ब्लड सैंपल को जांच के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में इबोला संक्रमण नहीं पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि महिला को हल्का बदन दर्द था, लेकिन इसके अलावा कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। उसकी हालत सामान्य और स्थिर बताई जा रही है। सरकार बोली- भारत में इबोला का कोई मामला नहीं केंद्र और राज्य सरकारों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला वायरस का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि अफ्रीकी देशों में संक्रमण के मामलों को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है और सभी जरूरी स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लागू हैं। एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर एयरपोर्ट और अन्य एंट्री पॉइंट्स पर स्क्रीनिंग और निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित देशों से लौटने वाले लोगों को 21 दिनों तक स्वास्थ्य निगरानी और सेल्फ मॉनिटरिंग की सलाह दी है। लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क की सलाह स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति में बुखार, बदन दर्द, कमजोरी या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए। राज्य में त्वरित प्रतिक्रिया दल (Rapid Response Teams) भी निगरानी गतिविधियों में जुटे हुए हैं। बेंगलुरु और मंगलुरु में विशेष केंद्र चिन्हित कर्नाटक सरकार ने इबोला जैसी संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए विशेष आइसोलेशन और क्वारंटाइन केंद्र भी चिन्हित किए हैं। बेंगलुरु में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिजीज को आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, जबकि महामारी रोग अस्पताल को क्वारंटाइन और उपचार केंद्र के रूप में तैयार रखा गया है। वहीं मंगलुरु में श्रीनिवास पोर्ट अस्पताल को क्वारंटाइन सेंटर और वेनलॉक जिला अस्पताल को आइसोलेशन व उपचार केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है। WHO ने इबोला को लेकर जारी किया अलर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को “अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” घोषित किया था। अफ्रीकी देशों में संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कांगो में अब तक 100 से ज्यादा पॉजिटिव केस और सैकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इसी को देखते हुए भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्कता बरत रही हैं।  

surbhi मई 27, 2026 0
Maharashtra rural health campaign launch event with officials promoting healthcare awareness in villages
‘माझे गाव, आरोग्य संपन्न गाव’ अभियान की शुरुआत, ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

महाराष्ट्र में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। प्रकाश आबिटकर, जो राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हैं, ने पुणे के Smt. Kashibai Navale Medical College and General Hospital में ‘माझे गाव, आरोग्य संपन्न गाव’ अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पूरे महाराष्ट्र में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों की भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव का लक्ष्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विश्वास जताया कि यह अभियान ग्रामीण महाराष्ट्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदल देगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को उसके गांव में ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। मुफ्त सेवाओं और योजनाओं पर जोर मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त संसाधन और कई प्रभावी योजनाएं मौजूद हैं, जिन्हें लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से Mahatma Jyotirao Phule Jan Arogya Yojana का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पर बड़ी राशि खर्च की गई है और अब इसे सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत: ECG और डायलिसिस जैसी सेवाएं मुफ्त दी जा रही हैं जरूरतमंद मरीजों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर विशेष फोकस है HPV वैक्सीनेशन पर फैलाई जा रही गलत जानकारी पर चिंता मंत्री ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए चल रहे HPV वैक्सीनेशन अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी को रोकना बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और वैक्सीनेशन को बढ़ावा दें। सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अभियान के प्रभावी संचालन के लिए कार्यक्रम स्थल पर डिवीजन स्तर की ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया। इसमें विभिन्न जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को अभियान के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस कार्यशाला में पुणे, मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, सतारा और सांगली जिलों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए। जमीनी स्तर पर समितियों की भूमिका अहम पुणे जिला परिषद के अध्यक्ष वीरधवल बाबा जगदाले ने कहा कि मॉडल PHCs के जरिए जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने ‘Patient Welfare Committees’ की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनाव के बाद इन समितियों को फिर से सक्रिय करना जरूरी है। वहीं, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन पाटिल ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Essential medicines and tablets with rising prices highlighting healthcare cost increase in India
760 से ज्यादा दवाएं हुईं महंगी, आगे और बढ़ोतरी की आशंका से बढ़ी चिंता

देशभर में आम लोगों के लिए स्वास्थ्य खर्च एक बार फिर बढ़ने वाला है। National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) ने थोक महंगाई के आधार पर 760 से अधिक जरूरी दवाओं की कीमतों में 0.6% की बढ़ोतरी की है। यह नई कीमतें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गई हैं। हालांकि यह बढ़ोतरी मामूली लग सकती है, लेकिन विशेषज्ञों और दवा विक्रेताओं को आगे और बड़ी कीमत वृद्धि की आशंका सता रही है। किन दवाओं पर पड़ा असर? इस फैसले का असर उन दवाओं पर पड़ा है जो आम लोगों के लिए बेहद जरूरी हैं। इनमें शामिल हैं: डायबिटीज की दवाएं जैसे मेटफॉर्मिन और इंसुलिन ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की दवाएं एंटीबायोटिक्स जैसे एजिथ्रोमाइसिन और एमोक्सिसिलिन दर्द निवारक दवाएं जैसे पैरासिटामोल और इबुप्रोफेन मानसिक स्वास्थ्य, दौरे (seizures) और विटामिन्स से जुड़ी दवाएं इसके अलावा, मेडिकल डिवाइस जैसे कोरोनरी स्टेंट की कीमतों में भी संशोधन किया गया है। आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें Bengal Chemists and Druggists Association के सचिव पृथ्वी बोस के मुताबिक, केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों को कच्चे माल की कीमत बढ़ने पर आगे भी कीमतें बढ़ाने की छूट दी है। उनका कहना है कि अगर कीमतों पर सख्त नियंत्रण नहीं रखा गया, तो इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा। कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल पिछले एक महीने में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण फार्मा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (API) की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार: पैरासिटामोल का कच्चा माल ₹250/kg से बढ़कर ₹450/kg तक पहुंच गया है इस स्थिति को देखते हुए दवा कंपनियां कीमतें बढ़ाने और सप्लाई में कमी की चेतावनी दे रही हैं। खुदरा विक्रेताओं की बढ़ी चिंता कोलकाता के दवा विक्रेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण भविष्य में और कीमत बढ़ सकती है। इससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और जरूरी दवाएं महंगी हो सकती हैं। पहले के मुकाबले कम बढ़ोतरी हालांकि इस बार 0.6% की वृद्धि अपेक्षाकृत कम है। इससे पहले 2022 और 2023 में दवाओं की कीमतों में 10% से ज्यादा तक की बढ़ोतरी देखी गई थी। All India Organisation of Chemists and Druggists के महासचिव राजीव सिंघल के अनुसार, इस साल की बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
CGHS empanelled hospital with patients receiving cashless treatment under government health scheme
CGHS अस्पतालों के लिए आखिरी चेतावनी: 30 अप्रैल तक नियम पूरे करें, वरना पैनल से बाहर

केंद्र सरकार ने Central Government Health Scheme (CGHS) से जुड़े निजी अस्पतालों को अंतिम मौका देते हुए साफ कर दिया है कि 30 अप्रैल 2026 तक सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, अन्यथा उन्हें पैनल से हटा दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस डेडलाइन के बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा। क्यों बढ़ाई गई डेडलाइन? CGHS के निदेशक Dr Satheesh Y H द्वारा 28 मार्च को जारी ऑफिस मेमोरेंडम में अस्पतालों को Memorandum of Agreement (MoA) साइन करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया। पहले यह अंतिम तिथि 31 मार्च थी, लेकिन कई अस्पतालों ने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म HEM 2.0 पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की थी, जिसके चलते सरकार ने एक महीने का विस्तार दिया। 1 मई से होगा सख्त एक्शन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 अप्रैल तक प्रक्रिया पूरी न करने वाले अस्पतालों को 1 मई से CGHS पैनल से बाहर कर दिया जाएगा। इसका मतलब: ऐसे अस्पताल CGHS मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे किसी भी तरह का क्लेम नहीं कर सकेंगे दोबारा जुड़ने के लिए नई प्रक्रिया से आवेदन करना होगा मरीजों और अस्पतालों पर असर CGHS पैनल में शामिल अस्पताल ही सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स का कैशलेस इलाज कर सकते हैं। ऐसे में बड़े स्तर पर अस्पतालों के बाहर होने से लाखों मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है। वहीं अस्पतालों के लिए भी यह आर्थिक झटका हो सकता है, क्योंकि भुगतान (claims) सीधे पैनल से जुड़ा होता है। भुगतान में देरी बनी चिंता सरकारी दावे के मुताबिक, CGHS क्लेम 90 दिनों के भीतर निपटाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अस्पतालों का कहना है कि भुगतान में 3 से 6 महीने तक की देरी हो जाती है। Dr Aashish Chaudhry के अनुसार, “भुगतान में देरी से खासकर छोटे अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है, जबकि बढ़ती लागत के मुकाबले मौजूदा रेट भी पर्याप्त नहीं हैं।” मरीजों की भी शिकायतें मरीज संगठनों का कहना है कि CGHS सिस्टम में अभी भी देरी, असमान सुविधा और जवाबदेही की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। TK Damodaran ने कहा कि “मरीजों की शिकायतें अक्सर लंबित रहती हैं और सेवाओं में असमानता साफ नजर आती है।” सरकार का लक्ष्य सरकार का कहना है कि HEM 2.0 पोर्टल के जरिए प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब सभी अस्पतालों को तय समयसीमा के भीतर नियमों का पालन करना ही होगा।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
RIMS Ranchi pharmacy scheme
अब रिम्स में ही मिलेंगी सस्ती दवाएं, मरीजों को मिलेगा 50% तक राहत

रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में मरीजों को बड़ी राहत देने की तैयारी है। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज की लागत कम करने के उद्देश्य से इकोनॉमिकल ड्रग एंड कंज्यूमेबल्स स्टोर खोलने की योजना बनाई है। इस पहल के तहत मरीजों को अस्पताल परिसर में ही जेनरिक और ब्रांडेड दोनों तरह की दवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी।   अस्पताल परिसर में ही मिलेंगी सस्ती दवाएं रिम्स प्रबंधन विभिन्न विभागों में 3 से 4 स्टोर खोलने की तैयारी कर रहा है। इन स्टोर्स में दवाओं के साथ-साथ कंज्यूमेबल्स और इंप्लांट भी उपलब्ध होंगे। इससे मरीजों को बाहर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें एक ही जगह सभी जरूरी मेडिकल सुविधाएं मिल सकेंगी।   40-50% तक कम कीमत पर दवाएं रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के अनुसार, इस योजना के तहत दवाएं बाजार कीमत से 40 से 50 प्रतिशत तक सस्ती मिलेंगी। आमतौर पर दवाएं 30-40 प्रतिशत तक कम कीमत पर खरीदी जाएंगी और उस पर करीब 10 प्रतिशत का मामूली सरचार्ज जोड़कर मरीजों को उपलब्ध कराया जाएगा।   रिवॉल्विंग फंड से होगा संचालन इस योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये का हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (HRF) बनाया जाएगा। स्टोर से मिलने वाले सरचार्ज से ही कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च पूरे किए जाएंगे, जिससे यह व्यवस्था आत्मनिर्भर बन सके।   चरणबद्ध तरीके से लागू होगी योजना शुरुआत में स्टोर में केवल दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद धीरे-धीरे कंज्यूमेबल्स और इंप्लांट भी जोड़े जाएंगे। इस प्रक्रिया से मरीजों को इलाज से जुड़ी हर जरूरी चीज एक ही जगह पर मिल सकेगी।   गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर दवाओं की खरीद विशेषज्ञों की सलाह से की जाएगी और टेंडर प्रक्रिया के जरिए कंपनियों का चयन होगा। इससे दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, जिससे मरीजों को भरोसेमंद और सस्ती इलाज सुविधा मिल सकेगी।

Unknown मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0