Indian Food

सावन में मिट्टी के मटके में बना मटका पनीर
सावन में बनाएं मटका पनीर, मिट्टी के मटके में पकने से मिलेगा देसी स्वाद; जानें आसान रेसिपी

अगर रोज-रोज एक जैसी पनीर की सब्जी खाकर बोर हो गए हैं, तो सावन में लंच या डिनर के लिए मटका पनीर ट्राई कर सकते हैं। मिट्टी के मटके में धीमी आंच पर पकने से इसमें खास देसी खुशबू और स्वाद आता है। इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।   मटका पनीर बनाने के लिए सामग्री     250 ग्राम पनीर   2 प्याज 2 टमाटर 1 शिमला मिर्च 1 चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट 2 हरी मिर्च ½ चम्मच हल्दी 1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 चम्मच धनिया पाउडर ½ चम्मच गरम मसाला स्वादानुसार नमक 2-3 चम्मच तेल या घी 2-3 चम्मच फ्रेश क्रीम या मलाई हरा धनिया जरूरत के अनुसार पानी खाना पकाने के लिए सुरक्षित मिट्टी का मटका   ऐसे बनाएं मटका पनीर     पनीर तैयार करें     सबसे पहले पनीर को छोटे टुकड़ों में काट लें। पनीर को नरम रखने के लिए कुछ मिनट गुनगुने पानी में रखा जा सकता है।     सब्जियां काटें     प्याज, टमाटर और शिमला मिर्च को काटकर रख लें। स्वाद के अनुसार इसमें मटर या कॉर्न भी शामिल कर सकते हैं।     तैयार करें मसाला     कड़ाही में तेल या घी गर्म करें। इसमें प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरी मिर्च डालकर कुछ देर पकाएं।     टमाटर और मसाले डालें     अब टमाटर डालकर नरम होने तक पकाएं। इसमें हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह भूनें। मसाला चिपकने लगे तो थोड़ा पानी डाल सकते हैं।     पनीर मिलाएं     मसाले से खुशबू आने लगे तो शिमला मिर्च और पनीर डालें। पनीर को टूटने से बचाने के लिए हल्के हाथ से मिलाएं। थोड़ा पानी डालकर करीब 4-5 मिनट पकाएं।     मटके में पकाएं     अब तैयार पनीर और ग्रेवी को खाना पकाने के लिए सुरक्षित मिट्टी के मटके में डालें। ऊपर से गरम मसाला और फ्रेश क्रीम डाल सकते हैं। मटके को ढककर बहुत धीमी आंच पर कुछ मिनट पकाएं।     दें अंतिम टच     जब ग्रेवी अच्छी तरह पक जाए और पनीर में मसालों का स्वाद उतर जाए, तो गैस बंद कर दें। ऊपर से हरा धनिया डालकर सजाएं।     नान से लेकर जीरा राइस तक के साथ करें सर्व     मटका पनीर को गरमा-गरम नान, तंदूरी रोटी, रुमाली रोटी, पराठे या जीरा राइस के साथ परोसा जा सकता है। साथ में प्याज के छल्ले और नींबू रखें तो इसका स्वाद और बढ़ जाएगा।   टिप: मिट्टी का बर्तन इस्तेमाल करने से पहले सुनिश्चित करें कि वह खाना पकाने के लिए उपयुक्त हो और अचानक तेज आंच या तापमान में बदलाव से बचें।

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
Crispy Andhra Dibba Rotti served with coconut chutney and sambar on a traditional plate.
10 मिनट में तैयार करें आंध्र प्रदेश की पारंपरिक डिब्बा रोटी, इडली-डोसा बैटर से बनती है बाहर से कुरकुरी और अंदर से रुई जैसी मुलायम

गिलास वाले अनोखे पारंपरिक तरीके से बनने वाली यह साउथ इंडियन डिश नाश्ते, ब्रंच, शाम के स्नैक या हल्के डिनर के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। अगर आप रोज-रोज इडली, डोसा या उत्तपम खाकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो आंध्र प्रदेश की पारंपरिक डिब्बा रोटी आपकी किचन के लिए एक शानदार रेसिपी हो सकती है। यह मोटी साउथ इंडियन रोटी बाहर से सुनहरी और कुरकुरी होती है, जबकि अंदर से रुई जैसी मुलायम और स्पंजी रहती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए आटा गूंथने की जरूरत नहीं होती, बल्कि इडली-डोसा के बैटर से ही आसानी से तैयार किया जाता है। डिब्बा रोटी को खास बनाने वाला इसका पारंपरिक 'गिलास वाला तरीका' है। कड़ाही में मोटी परत में बैटर डालने के बाद उसके बीच में पानी से भरा स्टील या पीतल का गिलास रखा जाता है। इससे रोटी अंदर तक समान रूप से पकती है और बीच में आकर्षक रिंग शेप बन जाती है। धीमी आंच पर पकाने से इसकी बाहरी परत बेहद क्रिस्पी और अंदर का हिस्सा नरम व फ्लफी बनता है। बनाने में कितना समय लगता है? तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 12–15 मिनट कुल समय: लगभग 25 मिनट आवश्यक सामग्री 2 कप इडली/डोसा बैटर 3–4 बड़े चम्मच तेल 1 छोटा चम्मच जीरा पानी से भरा छोटा स्टील/पीतल का गिलास बनाने की आसान विधि भारी तले की कड़ाही में तेल गर्म करें और धीमी आंच पर मोटी परत में बैटर डालें। बीच में पानी से भरा गिलास रखें और ऊपर से जीरा छिड़क दें। ढक्कन लगाकर 8–10 मिनट पकाएं। जब रोटी ऊपर से सेट हो जाए, तो गिलास निकालकर दूसरी तरफ 2–3 मिनट सेक लें। तैयार डिब्बा रोटी को गरमागरम परोसें। किसके साथ परोसें? नारियल की चटनी टमाटर की चटनी मूंगफली की चटनी सांभर आलू मसाला वेज कुरमा मसालेदार दही ज्यादातर कब खाई जाती है? सुबह का नाश्ता (Breakfast) ब्रंच शाम का स्नैक हल्का लंच हल्का डिनर क्यों करें ट्राई? बिना आटा गूंथे बनने वाली आसान रेसिपी बाहर से सुपर क्रिस्पी, अंदर से मुलायम टेक्सचर इडली-डोसा बैटर का नया और स्वादिष्ट इस्तेमाल परिवार के लिए झटपट बनने वाला साउथ इंडियन विकल्प

anmol जुलाई 17, 2026 0
Freshly cooked moringa paratha served with yogurt and pickle for a healthy, vitamin-rich breakfast.
नाश्ते में खाएं मोरिंगा परांठा, भरपूर मिलेंगे विटामिन A, C और आयरन, जानें आसान रेसिपी, सामग्री और कैलोरी

Moringa Paratha Recipe: गेहूं के आटे और मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों से तैयार यह हेल्दी परांठा विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर है। जानें सामग्री, बनाने की आसान विधि, प्रति सर्विंग कैलोरी और सेहत के फायदे। नाश्ते में क्यों खाएं मोरिंगा परांठा? अगर आप दिन की शुरुआत हेल्दी और पौष्टिक नाश्ते से करना चाहते हैं, तो मोरिंगा (सहजन) के पत्तों का परांठा बेहतरीन विकल्प हो सकता है। मोरिंगा की पत्तियां विटामिन A, C, B6, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में इसका सेवन इम्यूनिटी, पाचन, हड्डियों और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। आवश्यक सामग्री  2 कप गेहूं का आटा  1 कप बारीक कटी मोरिंगा (सहजन) की पत्तियां 1–2 हरी मिर्च (बारीक कटी)  ½ छोटा चम्मच अजवाइन  ¼ छोटा चम्मच हल्दी  नमक स्वादानुसार 1 छोटा चम्मच तेल (आटे के लिए)  सेंकने के लिए थोड़ा घी या तेल अनुमानित कैलोरी प्रति परांठा (मध्यम आकार): लगभग 180–220 kcal (घी या तेल की मात्रा के अनुसार) ऐसे बनाएं मोरिंगा परांठा एक बाउल में गेहूं का आटा, बारीक कटी मोरिंगा की पत्तियां, हरी मिर्च, अजवाइन, हल्दी और नमक मिलाएं। इसमें थोड़ा तेल और जरूरत के अनुसार पानी डालकर नरम आटा गूंध लें। आटे को 10 मिनट ढककर रखें। फिर लोई बनाकर परांठा बेलें और गर्म तवे पर दोनों तरफ हल्का घी या तेल लगाकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। सेहत के फायदे   विटामिन A, C और B6 का अच्छा स्रोत आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर  इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में सहायक  पाचन और आंतों की सेहत के लिए लाभदायक  हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देने में मददगार लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक किसके साथ करें सर्व? दही हरी चटनी अचार रायता मसाला चाय निष्कर्ष :- अगर आप रोजाना के नाश्ते में पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प तलाश रहे हैं, तो मोरिंगा परांठा जरूर ट्राई करें। यह कम समय में बनने वाली हेल्दी रेसिपी है, जो स्वाद के साथ शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भी प्रदान करती है।  

anmol जुलाई 14, 2026 0
Homemade healthy bottle gourd paneer recipe made with chickpeas, fresh herbs and green vegetables.
एक हरी सब्जी और 10 मिनट... घर पर बनाएं ऐसा हेल्दी 'पनीर', बच्चे भी बार-बार करेंगे डिमांड

Healthy Homemade Paneer Recipe: अगर बच्चे हरी सब्जियां खाने से कतराते हैं, तो यह आसान और हेल्दी रेसिपी जरूर ट्राई करें। चना दाल और एक हरी सब्जी से तैयार यह देसी 'पनीर' स्वाद के साथ पोषण भी देता है। हरी सब्जी से बनाएं हेल्दी देसी 'पनीर', स्वाद ऐसा कि कोई पहचान नहीं पाएगा अगर आपके घर में भी बच्चे हरी सब्जियों का नाम सुनते ही मुंह बनाने लगते हैं, तो यह आसान रेसिपी उनकी पसंद बदल सकती है। इस अनोखी डिश में एक हरी सब्जी और चना दाल की मदद से पनीर जैसी टेक्सचर वाली हेल्दी रेसिपी तैयार की जाती है। यह स्वादिष्ट होने के साथ प्रोटीन और फाइबर से भी भरपूर होती है। इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए ज्यादा सामग्री या लंबा समय नहीं चाहिए। अगर आप बच्चों को बिना नखरे के पौष्टिक खाना खिलाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर ट्राई करें। आवश्यक सामग्री 1 कप चना दाल (4 घंटे भीगी हुई) 1 मध्यम आकार की लौकी 1 इंच अदरक 2 हरी मिर्च 2–3 बड़े चम्मच हरा धनिया स्वादानुसार नमक ½ छोटा चम्मच हल्दी (वैकल्पिक) ½ छोटा चम्मच काली मिर्च या लाल मिर्च (वैकल्पिक) बनाने की विधि सबसे पहले चना दाल को लगभग 4 घंटे तक भिगो दें। अब लौकी को धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें। भीगी हुई दाल, लौकी, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया को बिना ज्यादा पानी मिलाए मिक्सर में पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। अब इसमें नमक और मसाले मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें। तैयार मिश्रण को मनचाहे आकार में स्टीम करें या धीमी आंच पर पकाएं। पकने के बाद इसे चौकोर टुकड़ों में काट लें। चाहें तो हल्का तवे पर सेंककर या एयर फ्राई करके चटनी या सॉस के साथ सर्व करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 150–180 kcal प्रोटीन: 8–10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 20–24 ग्राम फैट: 2–4 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम खाने के संभावित फायदे प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। पाचन को सपोर्ट करने में सहायक। बच्चों को हरी सब्जियां खिलाने का आसान तरीका। वजन प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है। कम तेल में बनने वाली हेल्दी स्नैक रेसिपी। ध्यान दें: यह रेसिपी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है। यदि आपको किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी है, तो डाइट में बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।   

anmol जुलाई 13, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi presents a traditional Uttarakhandi cap to New Zealand Prime Minister Christopher Luxon during an official meeting in Auckland.
पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को भेंट की उत्तराखंडी टोपी, जानिए इसकी सांस्कृतिक और पारंपरिक खासियत

ऑकलैंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक उत्तराखंडी टोपी भेंट की। यह पारंपरिक पहाड़ी टोपी उत्तराखंड की पहचान, सम्मान और हिमालयी संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। उत्तराखंडी टोपी क्यों है खास? उत्तराखंडी टोपी उच्च गुणवत्ता वाली ऊन से हाथ से तैयार की जाती है। यह केवल ठंड से बचाने का साधन नहीं, बल्कि अपनी रंगीन बुनी हुई पट्टियों और पारंपरिक डिजाइन के कारण उत्तराखंड की लोक कला और शिल्पकला को भी दर्शाती है। इस टोपी का उपयोग विशेष रूप से त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों और सामाजिक कार्यक्रमों में किया जाता है। सम्मान और मेहमाननवाजी का प्रतीक उत्तराखंड की संस्कृति में इस टोपी को सम्मान, आदर और मेहमाननवाजी का प्रतीक माना जाता है। किसी विशिष्ट अतिथि का स्वागत पारंपरिक पहाड़ी टोपी पहनाकर करना आज भी राज्य की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। स्थानीय कारीगरों की आजीविका से जुड़ी उत्तराखंडी टोपी का निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक बुनाई तकनीकों से किया जाता है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और बुनकरों को भी रोजगार और आर्थिक सहयोग प्रदान करती है। हिमालयी संस्कृति की पहचान यह पारंपरिक टोपी उत्तराखंड के प्राकृतिक परिवेश, लोक जीवन और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। वर्षों से चली आ रही इसकी निर्माण कला आज भी राज्य की पहचान बनी हुई है और नई पीढ़ी तक पारंपरिक शिल्प को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को उत्तराखंडी टोपी भेंट करना केवल एक औपचारिक उपहार नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर सम्मान देने का भी संदेश माना जा रहा है। यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और स्थानीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
Soft carrot idli served with chutney and sambar, colorful and healthy breakfast for kids
बच्चों के लिए खास: नरम–मुलायम नारंगी (गाजर) इडली रेसिपी

अगर आप बच्चों को हेल्दी और टेस्टी नाश्ता खिलाना चाहते हैं, तो ये गाजर की इडली परफेक्ट ऑप्शन है। इसका रंग, स्वाद और सॉफ्ट टेक्सचर बच्चों को तुरंत पसंद आ जाएगा  बनाने के लिए सामग्री सफेद चावल – 1 कप उड़द दाल – ½ कप गाजर – 1 कप (कद्दूकस की हुई) नमक – स्वादानुसार ईनो – 1 छोटा चम्मच (या ¼ छोटा चम्मच बेकिंग सोडा) पानी – जरूरत अनुसार तेल – ग्रीस करने के लिए बनाने की आसान विधि दाल-चावल भिगोएं चावल और उड़द दाल को अलग-अलग 4–5 घंटे पानी में भिगो दें। घोल तैयार करें भीगे हुए चावल और दाल को मिक्सी में पीसकर स्मूद बैटर (घोल) बना लें (न ज्यादा पतला, न ज्यादा गाढ़ा) गाजर मिलाएं अब इसमें कद्दूकस की हुई गाजर  नमक डालकर अच्छे से मिक्स करें चाहें तो हल्की तीखापन के लिए काली मिर्च या हरी मिर्च भी डाल सकते हैं ईनो डालें इडली बनाने से ठीक पहले बैटर में ईनो डालें और हल्के हाथ से मिलाएं बैटर तुरंत फूल जाएगा स्टीम करें इडली सांचे को तेल से ग्रीस करें बैटर डालें 10–12 मिनट तक स्टीम करें टूथपिक डालकर चेक करें - साफ निकले तो इडली तैयार कैसे परोसें? गरमा-गरम इडली को परोसें: नारियल चटनी टमाटर चटनी सांभर क्यों है हेल्दी? गाजर से मिलता है विटामिन A और फाइबर हल्की और आसानी से पचने वाली बच्चों और बड़ों दोनों के लिए परफेक्ट टिप अगर समय कम हो तो आप इंस्टेंट रवा इडली बैटर + गाजर मिलाकर भी बना सकते हैं  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Healthy Indian Breakfast Poha vs Paratha comparison
पोहा या परांठा, जानें कौन-सा नाश्ता ज्यादा हेल्दी?

नई दिल्ली,एजेंसियां। सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा और सेहत की बुनियाद माना जाता है। भारतीय घरों में पोहा और परांठा दो ऐसे नाश्ते हैं जो सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। दोनों ही स्वादिष्ट, जल्दी बनने वाले और अलग-अलग स्वाद के अनुसार तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन जब बात हेल्थ की आती है, तो सवाल उठता है पोहा ज्यादा हेल्दी है या परांठा? जवाब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जरूरत क्या है और आप उसे किस तरीके से बना रहे हैं।   परांठा: पेट भरने वाला और एनर्जी देने वाला नाश्ता परांठा आमतौर पर गेहूं के आटे से बनता है, जो कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। इसका मतलब है कि यह शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। अगर परांठा साबुत आटे से बनाया गया हो, तो इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है।   अगर इसमें पनीर, दाल, आलू, गोभी, पालक या मेथी जैसी स्टफिंग डाली जाए, तो यह और ज्यादा पौष्टिक बन सकता है। खासकर पनीर या दाल वाला परांठा प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि, परांठा तभी हेल्दी माना जाएगा जब इसे कम तेल या कम घी में बनाया जाए। मक्खन, अचार या ज्यादा तेल के साथ खाने पर इसकी कैलोरी काफी बढ़ सकती है।   पोहा: हल्का, कम फैट और पचने में आसान दूसरी ओर, पोहा हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता है। यह चपटे चावल से बनता है और कम समय में तैयार हो जाता है। पोहा खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो सुबह हल्का खाना पसंद करते हैं या वजन कंट्रोल करना चाहते हैं। इसमें कैलोरी और फैट अपेक्षाकृत कम होते हैं, इसलिए यह पेट पर भारी नहीं पड़ता। अगर पोहा में मटर, गाजर, प्याज, टमाटर, मूंगफली, करी पत्ता और नींबू डाला जाए, तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। इसे लोहे की कढ़ाही में बनाने पर इसमें आयरन की मात्रा भी बढ़ सकती है। पोहा शरीर को जरूरी कार्बोहाइड्रेट देता है, लेकिन परांठे की तुलना में यह हल्का महसूस होता है।   आखिर कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आप हल्का, लो-फैट और जल्दी पचने वाला नाश्ता चाहते हैं, तो पोहा बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आपको ज्यादा देर तक पेट भरा रखना है, ज्यादा ऊर्जा चाहिए या शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है, तो परांठा बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, दोनों ही हेल्दी हो सकते हैं—बस फर्क इस बात का है कि आप उन्हें किस सामग्री और किस मात्रा में खा रहे हैं।

Unknown अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
राष्ट्रीय

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surbhi अगस्त 11, 2026 0