Indian Rupee

Weekly stock market wrap showing Sensex and Nifty decline with investors tracking market data and charts.
Stock Market Weekly Wrap: लगातार दूसरे हफ्ते गिरा बाजार, रुपया मजबूत हुआ, मीडिया शेयरों में दिखी चमक

भारतीय शेयर बाजार में बीता सप्ताह उतार-चढ़ाव भरा रहा। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और आरबीआई की नई आर्थिक अनुमान रिपोर्ट ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसके चलते प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट में बंद हुआ बाजार सप्ताह के अंत में बीएसई सेंसेक्स 532.40 अंक यानी 0.71 फीसदी गिरकर 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 181.05 अंकों यानी 0.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ। मिडकैप शेयरों में दबाव, स्मॉलकैप स्थिर निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स ने पिछले दो सप्ताह की तेजी का सिलसिला तोड़ते हुए 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की। इस दौरान सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे— PB Fintech ICICI Prudential AMC Patanjali Foods IREDA BHEL NALCO वहीं, मिडकैप श्रेणी में Vodafone Idea, Laurus Labs, NMDC और Federal Bank जैसे शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ। IFCI, Himadri Speciality Chemical, JBM Auto, Tata Technologies और Ola Electric Mobility जैसे शेयरों में 8% से 16% तक की तेजी देखने को मिली। मीडिया सेक्टर बना सबसे बड़ा विजेता सेक्टोरल इंडेक्स में मिश्रित रुख देखने को मिला। गिरावट वाले सेक्टर निफ्टी कैपिटल मार्केट्स: -3.6% FMCG: -2% इंफ्रा: लगभग -2% रियल्टी: लगभग -2% मेटल: लगभग -2% बढ़त वाले सेक्टर निफ्टी मीडिया: +7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: +1.7% PSU बैंक: +1.2% मीडिया इंडेक्स पूरे सप्ताह का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। बाजार पूंजीकरण में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट सप्ताह के दौरान बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। सबसे अधिक बाजार मूल्य गंवाने वाली कंपनियों में शामिल रहीं— रिलायंस इंडस्ट्रीज NTPC टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भारती एयरटेल वहीं, टाइटन, इंफोसिस और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मार्केट वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज की गई। लगातार तीसरे सप्ताह मजबूत हुआ रुपया भारतीय रुपया लगातार तीसरे सप्ताह मजबूती के साथ बंद हुआ। सप्ताह के अंत में डॉलर के मुकाबले रुपया 94.94 पर पहुंच गया, जबकि पिछले सप्ताह यह 95 के स्तर पर था। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सप्ताह भर में 31,114.47 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार खरीदारी जारी रखकर बाजार को सहारा दिया। निवेशकों की नजर अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी? कच्चे तेल की कीमतों की दिशा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू आर्थिक संकेतक और कॉर्पोरेट नतीजे

surbhi जून 6, 2026 0
RBI headquarters building as the central bank reports record gains from foreign exchange operations
RBI के लिए वरदान बनी रुपये की गिरावट! विदेशी मुद्रा कारोबार से हुई ₹1.69 लाख करोड़ की कमाई

भारतीय रुपये में आई कमजोरी और विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने आम लोगों और आयातकों की चिंता बढ़ाई, लेकिन यही स्थिति Reserve Bank of India (RBI) के लिए बड़ी कमाई का जरिया बन गई। वित्त वर्ष 2025-26 में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से रिकॉर्ड 1.69 लाख करोड़ रुपये का विनिमय लाभ अर्जित किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 52 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में यह लाभ 1.11 लाख करोड़ रुपये था, जबकि एक साल बाद यह बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रुपये को बचाने के लिए RBI ने बेचे रिकॉर्ड डॉलर पिछले वित्त वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में करीब 9.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रुपये पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI ने बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने स्पॉट मार्केट में रिकॉर्ड 53.13 अरब डॉलर की बिक्री की। यह डॉलर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से निकाले गए थे। डॉलर की इस बिक्री से RBI को विनिमय दरों के अंतर के कारण बड़ा लाभ हुआ, जिसने उसकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। कैसे हुई RBI की कमाई? जब केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचता है और डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले अधिक होती है, तो उसे विनिमय लाभ (Exchange Gain) प्राप्त होता है। सरल शब्दों में समझें तो: डॉलर महंगा हुआ। RBI ने अपने रिजर्व से डॉलर बेचे। बिक्री से अधिक रुपये प्राप्त हुए। इस अंतर ने RBI की आय बढ़ा दी। इसी वजह से विदेशी मुद्रा लेनदेन से RBI की आय बढ़कर ₹1.69 लाख करोड़ तक पहुंच गई। विदेशी स्रोतों से कुल आय 3.28 लाख करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों, निवेश और अन्य विदेशी स्रोतों से RBI की कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में 27 प्रतिशत बढ़कर 3.28 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच RBI की विदेशी संपत्तियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड सरप्लस RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर करने का फैसला किया है। यह राशि सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे राजकोषीय प्रबंधन, विकास योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। RBI की बैलेंस शीट भी हुई मजबूत 31 मार्च 2026 तक RBI की कुल बैलेंस शीट का आकार बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.72 लाख करोड़ रुपये अधिक है। परिसंपत्तियों में वृद्धि के प्रमुख कारण: घरेलू निवेश में 44.9% की बढ़ोतरी स्वर्ण भंडार में 63.8% की वृद्धि विदेशी निवेश में 7.9% की बढ़ोतरी RBI की कुल परिसंपत्तियों में: 29.1% घरेलू परिसंपत्तियां 70.9% विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना और विदेशी वित्तीय संस्थानों को दिए गए ऋण शामिल हैं कुल आय में भी बड़ी छलांग वित्त वर्ष 2025-26 में RBI की कुल आय बढ़कर 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 26 प्रतिशत अधिक है। वहीं केंद्रीय बैंक का कुल अधिशेष (Surplus) बढ़कर 2,86,588 करोड़ रुपये हो गया, जो एक वर्ष पहले 2,68,590 करोड़ रुपये था। क्या है इसका अर्थ? रुपये की कमजोरी आम तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती मानी जाती है क्योंकि इससे आयात महंगे हो जाते हैं। लेकिन जब केंद्रीय बैंक के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार होता है, तो वह बाजार में हस्तक्षेप कर मुद्रा को स्थिर रखने के साथ-साथ विनिमय लाभ भी अर्जित कर सकता है। इस बार RBI ने रुपये को संभालने के लिए जो डॉलर बेचे, वही उसके लिए रिकॉर्ड कमाई का कारण बन गए।  

surbhi मई 30, 2026 0
Economist Montek Singh Ahluwalia discussing RBI policy and Indian rupee exchange rate trends
रुपये को कमजोर होने देना सही फैसला था? पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने RBI का किया समर्थन

भारतीय रुपये में हाल के महीनों में आई कमजोरी को लेकर चल रही बहस के बीच वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष Montek Singh Ahluwalia ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि रुपये की विनिमय दर को बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार चलने देना चाहिए और हर हाल में उसे एक निश्चित स्तर पर बनाए रखने की कोशिश उचित नहीं होती। रुपये पर क्यों बढ़ा दबाव? पिछले कुछ महीनों में भारतीय रुपये पर कई वैश्विक और घरेलू कारणों से दबाव बढ़ा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने भी रुपये को कमजोर किया। ‘रुपये का कमजोर होना लगभग तय था’ मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपये पर दबाव आना स्वाभाविक था। उनके अनुसार, जब बाजार की परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाएं तो विनिमय दर में कुछ गिरावट आने देना आर्थिक रूप से गलत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को विदेशी पूंजी निवेश के जरिए आसानी से संभालता रहा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पूंजी प्रवाह की गति धीमी पड़ने से स्थिति बदल गई है। ऐसे में केवल विदेशी मुद्रा भंडार खर्च कर रुपये को बचाने की रणनीति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। कमजोर रुपया निर्यात के लिए फायदेमंद अहलूवालिया ने यह भी कहा कि रुपये में नियंत्रित गिरावट का एक सकारात्मक पहलू भी है। इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है। जब घरेलू मुद्रा कमजोर होती है तो विदेशों में भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना रहती है। उनका मानना है कि मध्यम अवधि में यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। RBI की रणनीति पर जारी है बहस हाल के समय में कई अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हुई है कि क्या RBI को रुपये की रक्षा के लिए आक्रामक हस्तक्षेप करना चाहिए या फिर बाजार को अपनी दिशा तय करने देनी चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वैश्विक झटकों के दौरान किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखने की कोशिश आर्थिक रूप से महंगी और अस्थिर साबित हो सकती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौतियां रुपये के मुद्दे पर बात करते हुए मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कुछ संरचनात्मक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि निजी निवेश और निर्यात की धीमी रफ्तार कई वर्षों से चिंता का विषय रही है। उनके मुताबिक भारत को निवेश आकर्षित करने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए और अधिक सुधारों की जरूरत है। साथ ही वैश्विक निवेशकों को स्पष्ट और भरोसेमंद नीति संकेत देने होंगे। व्यापार समझौतों पर जोर अहलूवालिया ने सुझाव दिया कि भारत को एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना चाहिए। उनका मानना है कि वैश्विक व्यापार वृद्धि में एशिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भारत को इसका लाभ उठाने के लिए नए व्यापार समझौतों और आर्थिक साझेदारियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए निवेश संरक्षण से जुड़े ढांचों को मजबूत करना आवश्यक है। आगे क्या रहेगा रुपये की दिशा? हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच रुपये में हल्की रिकवरी देखने को मिली है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रुपये की चाल मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करेगी -  कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें विदेशी निवेश प्रवाह अमेरिकी ब्याज दरें पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति भारत की आर्थिक वृद्धि और निर्यात प्रदर्शन फिलहाल, मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप रुपये को समायोजित होने देना एक व्यावहारिक और संतुलित आर्थिक नीति का हिस्सा है।  

surbhi मई 26, 2026 0
Indian rupee falling against US dollar with currency notes and forex market trading screen display
डॉलर के सामने कमजोर पड़ा रुपया, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची भारतीय करेंसी

United States Dollar के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। मंगलवार को कारोबार शुरू होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.85 तक पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान यह और गिरकर 96.93 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। लगातार 13वें कारोबारी दिन रुपये में कमजोरी देखने के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई है। पिछले सप्ताह रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के पार गया था और अब गिरावट का सिलसिला जारी है। जानकारों का मानना है कि मजबूत डॉलर, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है। डॉलर इतना मजबूत क्यों हो रहा है? अमेरिका में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ रही है, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.18% तक पहुंच गई है, जो 2007 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। वहीं 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी करीब 4.66% तक पहुंच गई। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो वैश्विक निवेशक वहां निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इसका असर यह होता है कि उभरते बाजारों से पैसा निकलने लगता है और डॉलर मजबूत हो जाता है। इसी वजह से भारतीय रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें भी बनी बड़ी वजह भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर डालती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तेल महंगा होने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ता है। महंगे तेल का असर सिर्फ करेंसी तक सीमित नहीं रहता। इससे: ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है RBI क्या कर रहा है? Reserve Bank of India रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट देने की कोशिश कर रहा है, ताकि गिरावट बहुत ज्यादा तेज न हो। हालांकि मौजूदा वैश्विक हालात भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बने हुए हैं। अगर: डॉलर मजबूत बना रहता है तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं वैश्विक तनाव बढ़ता है तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर? रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। इससे: विदेश यात्रा महंगी हो सकती है आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स के दाम बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है विदेशी शिक्षा और ऑनलाइन सेवाएं महंगी पड़ सकती हैं हालांकि निर्यात करने वाली कंपनियों को कमजोर रुपये से कुछ फायदा भी हो सकता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में ज्यादा कमाई होती है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Stock Market
Stock Market: डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96.18 पर पहुंचा,कच्चा तेल भी 2% बढ़कर 110 डॉलर के पार

मुंबई, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच आज सोमवार 18 मई को भारतीय रुपए में रिकॉर्ड गिरावट है। डॉलर के मुकाबले रुपया 20 पैसे कमजोर होकर 96.18 पर पहुंच गया। कच्चा तेल भी 2% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। मिडिल ईस्ट के तनाव का असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। सेंसेक्स 550 अंक (0.78%) गिरकर 74,700 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी 200 अंक (0.78%) नीचे है, ये 23,450 के करीब आ गया है। सरकारी बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली है।

Unknown मई 18, 2026 0
Indian rupee falls to record low against US dollar amid rising crude oil prices and global tensions.
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले ₹96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया

Indian Rupee सोमवार, 18 मई को भारी दबाव में नजर आया और शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर ₹96.25 प्रति डॉलर तक फिसल गया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सिर्फ करेंसी मार्केट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखने को मिली। कैसे टूटा रुपया? विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक: रुपया सुबह ₹96.19 प्रति डॉलर पर खुला बाजार खुलते ही बिकवाली बढ़ी कुछ ही समय में यह 44 पैसे टूटकर ₹96.25 पर पहुंच गया इससे पहले शुक्रवार को रुपया ₹95.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को वह रिकॉर्ड भी टूट गया। रुपये पर दबाव बढ़ाने वाली 3 बड़ी वजहें 1. कच्चा तेल 111 डॉलर के पार Brent Crude की कीमतें बढ़कर 111.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ जाता है। 2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती United States Dollar लगातार मजबूत बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 99.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। डॉलर मजबूत होने का मतलब है कि उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ना। 3. वैश्विक तनाव और बाजार में डर Middle East में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं, जिससे डॉलर की मांग और बढ़ जाती है। शेयर बाजार में भी भारी गिरावट रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकेतों का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखा। BSE SENSEX शुरुआती कारोबार में 833 अंक से ज्यादा टूटा 74,404.79 के स्तर तक फिसला NIFTY 50 234 अंक गिरकर 23,401.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। क्या कोई राहत भी है? एक राहत की बात यह रही कि हाल के दिनों में लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को कुछ खरीदारी की थी। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने 1,329 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह राहत फिलहाल काफी नहीं दिख रही। आगे क्या? विशेषज्ञों के मुताबिक अगर: कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं अमेरिका-ईरान तनाव गहराता है डॉलर मजबूत बना रहता है तो भारतीय रुपया और दबाव में आ सकता है। इसका असर महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Stock market traders monitoring falling Sensex and weak Indian rupee amid global economic tensions
Share Market Crash: दो दिन में करीब 2,000 अंक टूटा Sensex, रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर

घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील ने भी बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट को कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताते हुए लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी है। 24 घंटे में यह उनकी दूसरी ऐसी अपील मानी जा रही है। दो दिन में 2,000 अंक टूटा Sensex मंगलवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 850 अंक तक लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 में 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 860.48 अंक यानी 1.13% गिरकर 75,154.80 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 226.75 अंक यानी 0.95% टूटकर 23,589.10 पर पहुंच गया। सोमवार को भी सेंसेक्स 1312.91 अंक गिरा था। इस तरह दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 2,000 अंक टूट चुका है। रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर भारतीय रुपया भी दबाव में दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.2 फीसदी टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? Infosys में सबसे ज्यादा 2.57% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा: Tech Mahindra Tata Consultancy Services HCL Technologies Asian Paints HDFC Bank Bajaj Finserv Titan Company जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई। वहीं दूसरी ओर Reliance Industries, State Bank of India, Tata Steel और UltraTech Cement के शेयरों में तेजी रही। निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान लगातार गिरावट के कारण Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 462 लाख करोड़ रुपये रह गया। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 1.03% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.34% टूट गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में Saudi Aramco की चेतावनी के बाद तेल बाजार में चिंता और बढ़ गई है। कंपनी का कहना है कि वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कुवैत और अन्य देशों का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।  

surbhi मई 12, 2026 0
Indian rupee notes placed beside US dollar bills as rupee falls to record low against the dollar
Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें

भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.57 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान टूटकर 95.63 के ऑल टाइम लो तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार को भी रुपया 79 पैसे टूटकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार गिरते रुपये ने निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल में उछाल से बढ़ा दबाव रुपये में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। Saudi Aramco ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर तेल का भंडार काफी कम हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में OPEC देशों का उत्पादन साल 2000 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण कुवैत और इराक जैसे देश तेल निर्यात में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय बाजार में करीब 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। ईरान संकट शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हुआ। शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट कमजोर रुपये और वैश्विक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 525 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि NIFTY 50 में भी 164 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। क्यों गिर रहा है रुपया? डॉलर के मुकाबले रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली शेयर बाजार में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता आम लोगों पर क्या होगा असर? रुपये में गिरावट का सीधा असर आयात पर पड़ता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान, विदेश यात्रा और आयातित वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।  

surbhi मई 12, 2026 0
Indian rupee and US dollar notes with rising oil prices symbolizing currency depreciation concerns.
₹93.50 तक फिसल सकता है रुपया: महंगे कच्चे तेल और मजबूत डॉलर ने बढ़ाई चिंता

भारत की मुद्रा बाजार में इस सप्ताह दबाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने भारतीय रुपये की स्थिति को कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपया ₹93.50 प्रति डॉलर तक गिर सकता है। वैश्विक तनाव का सीधा असर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की विफलता और Strait of Hormuz में नौसैनिक नाकेबंदी की स्थिति ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि Brent Crude Oil की कीमतें $102 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इस उछाल से सीधे प्रभावित होता है। अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत में हर $10 की वृद्धि से देश के चालू खाता घाटे (CAD) में सालाना लगभग $15 बिलियन की बढ़ोतरी हो सकती है। रुपये में भारी उतार-चढ़ाव पिछले सप्ताह रुपये में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यह पहले ₹95.23 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा, फिर सुधार के साथ ₹92.40 तक आया। हालांकि, मौजूदा तनाव के चलते यह फिर से कमजोर होकर ₹93.30 के आसपास कारोबार कर रहा है। साथ ही, सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की बढ़ती मांग और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा दिया है। विदेशी निवेशकों की निकासी से बढ़ा दबाव स्थिति को और जटिल बना रही है विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी। फरवरी 2026 से अब तक $20 बिलियन से अधिक की पूंजी भारतीय बाजार से बाहर जा चुकी है। यह ट्रेंड रुपये की कमजोरी को और गहरा कर रहा है। RBI बना ‘डिफेंसिव कवच’ हालांकि, इस बीच राहत की बात यह है कि Reserve Bank of India के पास $697.1 बिलियन का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है। यह भंडार रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोकने में सहायक साबित हो सकता है और बाजार को स्थिरता देने का काम करेगा। महंगाई और CAD का बढ़ता खतरा महंगे कच्चे तेल का असर सिर्फ रुपये तक सीमित नहीं है। इससे ‘आयातित महंगाई’ बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है, जो आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर डाल सकती है। साथ ही, व्यापार संतुलन और चालू खाता घाटा भी दबाव में आ सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 4, 2026 0