international diplomacy

PM Narendra Modi and Italy PM Giorgia Meloni pose for a selfie during Modi’s Rome visit
‘Welcome to Rome, My Friend!’: इटली पहुंचते ही PM मोदी का खास अंदाज में स्वागत, जॉर्जिया मेलोनी ने शेयर की सेल्फी

Narendra Modi अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंच गए हैं। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के साथ एक सेल्फी साझा कर उनका खास अंदाज में स्वागत किया। मेलोनी ने पोस्ट में लिखा, “Welcome to Rome, my friend!” यानी “रोम में स्वागत है, मेरे दोस्त!” दोनों नेताओं की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और भारत-इटली संबंधों की गर्मजोशी की चर्चा हो रही है। रोम एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत इटली के उप प्रधानमंत्री Antonio Tajani ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय भी एयरपोर्ट और होटल के बाहर मौजूद रहे। पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उनसे बातचीत भी की। IMEC और रणनीतिक साझेदारी पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि इस यात्रा के दौरान वह इटली के राष्ट्रपति Sergio Mattarella और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि चर्चा का मुख्य फोकस भारत-इटली सहयोग को और मजबूत करना होगा, खासकर ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ यानी India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) पर विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा ‘संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029’ की समीक्षा भी की जाएगी। FAO मुख्यालय का भी करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वह Food and Agriculture Organization (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे। इस दौरान वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर चर्चा होगी। होटल में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक रोम स्थित होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य, भारतीय वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय परंपरा की झलक दिखाई गई। पीएम मोदी Anantara Palazzo Naiadi Rome Hotel में ठहरे हैं। होटल और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। क्या रहेगा पीएम मोदी का कार्यक्रम? इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी सबसे पहले Quirinal Palace जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला से होगी। इसके बाद Villa Doria Pamphili में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय शिखर बैठक आयोजित होगी। दोनों नेता भारतीय और इटालियन उद्योग समूहों के प्रमुखों के साथ वर्किंग लंच में भी शामिल होंगे। G7 के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा यह जून 2024 में आयोजित G7 Summit 2024 के बाद पीएम मोदी की पहली द्विपक्षीय इटली यात्रा है। वह जॉर्जिया मेलोनी के विशेष निमंत्रण पर इटली पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत और इटली के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों और संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। भारत-इटली रिश्ते लगातार मजबूत भारत और इटली के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देश व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक, निवेश और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली ने भारत में 3.66 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Trump China Visit
नौ साल बाद चीन पहुंचे ट्रंप, जिनपिंग मुलाकात को बताया ऐतिहासिक

बीजिंग, एजेंसियां। नौ साल बाद चीन दौरे पर गए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी मुलाकात को “G-2” करार दिया है। ट्रंप ने इसे दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के बीच ऐतिहासिक बैठक बताया और दावा किया कि इस यात्रा से अमेरिका को बड़े आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिले हैं।   200 बोइंग विमानों का बड़ा सौदा ट्रंप के अनुसार इस दौरे में अमेरिका और चीन के बीच 200 बोइंग विमानों की बिक्री का बड़ा समझौता हुआ है। इसके अलावा भविष्य में 750 अतिरिक्त विमानों के ऑर्डर की भी संभावना जताई गई है। अमेरिकी कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी चीन से मजबूत व्यापारिक प्रतिबद्धता हासिल होने का दावा किया गया है।   ताइवान और सुरक्षा मुद्दों पर तनाव बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा ताइवान रहा। शी जिनपिंग ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो दोनों देशों के रिश्तों पर गंभीर असर पड़ेगा। ट्रंप ने इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कहा कि चीन ताइवान पर तत्काल हमला नहीं चाहता, बल्कि वह उसकी स्वतंत्रता घोषणा के खिलाफ है। ताइवान पर सवालों के जवाब में ट्रंप ने स्पष्ट रुख नहीं अपनाया और कहा कि संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की जाती।   ईरान और वैश्विक कूटनीति पर सहमति दोनों नेताओं के बीच ईरान संकट और वैश्विक ऊर्जा मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ट्रंप ने दावा किया कि चीन अमेरिकी तेल खरीदने पर सहमत हुआ है और ईरान से जुड़ी वार्ताओं में सहयोग करेगा। हालांकि चीन की ओर से इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।   कूटनीतिक असर और आगे की योजना इस मुलाकात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-चीन संबंधों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। ट्रंप ने शी जिनपिंग को 24 सितंबर को वाशिंगटन आने का निमंत्रण भी दिया है। विश्लेषकों के अनुसार यह बैठक वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है, खासकर भारत जैसे देशों के रणनीतिक हितों पर इसका असर देखा जा सकता है।

Anjali Kumari मई 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi with UAE President in Abu Dhabi discussing Hormuz Strait and regional security
UAE पहुंचे पीएम मोदी, बोले- ‘होर्मुज स्ट्रेट का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी’

प्रधानमंत्री Narendra Modi अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में शुक्रवार को United Arab Emirates पहुंचे। अबू धाबी पहुंचने पर UAE के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी को सम्मान स्वरूप गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पश्चिम एशिया संकट पर हुई अहम चर्चा अबू धाबी में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने का समर्थक रहा है। ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना जरूरी’ पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देना चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में गिना जाता है। UAE पर हमलों की निंदा प्रधानमंत्री मोदी ने UAE पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि UAE को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात में UAE ने जिस संयम और समझदारी के साथ स्थिति को संभाला है, वह सराहनीय है। ‘भारत हर हाल में UAE के साथ’ प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर भी चर्चा हुई है।  

surbhi मई 15, 2026 0
PM Modi tour
प्रधानमंत्री मोदी का पांच देशों का दौरा शुरू, कई वैश्विक नेताओं से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पांच देशों का महत्वपूर्ण विदेश दौरा शुक्रवार, 15 मई 2026 से शुरू हो गया है। यह दौरा 15 से 20 मई तक चलेगा, जिसमें वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, नवाचार और हरित विकास के क्षेत्रों में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना है।   UAE से हुई दौरे की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के पहले चरण में UAE पहुंचे, जहां वे राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। UAE को भारत का एक प्रमुख व्यापार और निवेश साझेदार माना जाता है।   यूरोप में रणनीतिक बैठकों का कार्यक्रम इसके बाद प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड का दौरा करेंगे, जहां वे डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन से बातचीत करेंगे। यहां सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, इनोवेशन और डिफेंस जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहेगा। इसके बाद वे 17-18 मई को स्वीडन जाएंगे, जहां AI, नई तकनीक और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा होगी।   नॉर्डिक समिट और इटली यात्रा 19 मई को प्रधानमंत्री नॉर्वे में तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में शामिल होंगे और वहां क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत करेंगे। इसके बाद वे इटली जाएंगे, जहां प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात करेंगे। यहां क्लीन एनर्जी, डिफेंस और टेक्नोलॉजी सहयोग पर चर्चा होगी।   भारत की वैश्विक साझेदारी को मिलेगी मजबूती फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (FIEO) ने इस दौरे को भारत के लिए “महत्वपूर्ण मोड़” बताया है। संगठन के अनुसार, इस यात्रा से भारत-यूरोप और खाड़ी देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा और निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा।

Anjali Kumari मई 15, 2026 0
Donald Trump announces Iran ceasefire extension amid tensions and ongoing diplomatic uncertainty
ईरान युद्ध: ट्रंप ने क्यों बढ़ाया सीजफायर? ‘टूटी लीडरशिप’ या रणनीतिक चाल

  आखिरी समय में बदला फैसला, सीजफायर बढ़ाया अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच दो हफ्ते के सीजफायर को खत्म होने से ठीक पहले बढ़ाने का ऐलान कर दिया। यह फैसला ऐसे समय आया जब ट्रंप पहले साफ कह चुके थे कि वे सीजफायर बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार हैं। लेकिन अचानक लिए गए इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान को एक “एकजुट प्रस्ताव” तैयार करने के लिए और समय चाहिए, इसलिए फिलहाल हमले को टाल दिया गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक दबाव इस फैसले के पीछे Shehbaz Sharif और Asim Munir की भूमिका भी अहम बताई जा रही है। ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि पाकिस्तान के अनुरोध पर अमेरिका ने कूटनीति को मौका देने के लिए यह कदम उठाया। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि प्रस्तावित शांति वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का पाकिस्तान दौरा भी आखिरी समय में टाल दिया गया, जिससे बातचीत की प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान का आरोप–“यह सिर्फ समय खरीदने की रणनीति” वहीं Iran इस फैसले को पूरी तरह अलग नजरिए से देख रहा है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका का सीजफायर बढ़ाना असल में एक रणनीतिक कदम है, ताकि वह आगे किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर सके। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर जारी नाकेबंदी को भी तेहरान “युद्ध जैसी कार्रवाई” मान रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच अविश्वास और गहरा गया है। अंदरूनी मतभेद और अधूरी वार्ता बना बड़ा कारण अमेरिकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की नेतृत्व व्यवस्था इस समय अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है। बताया जा रहा है कि Mojtaba Khamenei से जुड़े निर्णयों पर सहमति नहीं बन पा रही है, जिसके चलते वार्ता प्रक्रिया धीमी हो गई है। सबसे बड़ा विवाद यूरेनियम संवर्धन और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर है–अमेरिका प्रतिबंधों में ढील से पहले परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण चाहता है, जबकि ईरान पहले नाकेबंदी हटाने की शर्त रख रहा है। ऐसे में यह सीजफायर भले ही अस्थायी राहत दे, लेकिन स्थायी समाधान अभी दूर नजर आ रहा है और हालात कभी भी फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Donald Trump announcement influences Israel Lebanon ceasefire decision amid ongoing regional tensions
लेबनान युद्धविराम के बीच ट्रंप ने फिर मोड़ा नेतन्याहू का रुख, इज़राइल पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

  अमेरिकी राष्ट्रपति के ऐलान के बाद इज़राइल को युद्ध रोकने पर मजबूर होना पड़ा लेबनान में जारी संघर्ष के बीच अब एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक युद्धविराम की घोषणा कर दी, जिसके बाद इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपनी सैन्य रणनीति बदलनी पड़ी। रिपोर्टों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस संघर्ष में सीधे हस्तक्षेप करते हुए इज़राइल के फैसलों को प्रभावित किया है। ट्रंप की घोषणा से पहले ही तय हो गया युद्धविराम जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने पहले ही यह संकेत दे दिया था कि इज़राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम जल्द लागू होगा। इसके कुछ ही घंटों बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा कर दी कि संघर्ष रोक दिया गया है और दोनों पक्षों को सैन्य कार्रवाई बंद करनी होगी। इसके बाद इज़राइल सरकार के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे और उसे युद्धविराम को स्वीकार करना पड़ा। नेतन्याहू की सैन्य योजना पर फिर पड़ा असर इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हाल ही में हिज़बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कर रहे थे। इज़राइली सेना भी नए हमलों की योजना तैयार कर रही थी। लेकिन अमेरिकी दबाव के बाद स्थिति बदल गई और सरकार को युद्ध रोकने का निर्णय लेना पड़ा। देश को जानकारी ट्रंप के पोस्ट से मिली सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इज़राइल के नागरिकों और कई नेताओं को युद्धविराम की जानकारी अपने प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट से मिली। इससे इज़राइली राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप बनते जा रहे हैं निर्णायक शक्ति विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में ट्रंप ने कई अंतरराष्ट्रीय मामलों में सीधे हस्तक्षेप किया है, जिनमें गाजा, ईरान और अब लेबनान शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई मौकों पर उन्होंने: युद्धविराम लागू कराया सैन्य कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया और क्षेत्रीय नेताओं से सीधे बातचीत को प्रभावित किया गाजा और ईरान संघर्ष पर भी असर इससे पहले गाजा और ईरान से जुड़े संघर्षों में भी अमेरिका ने इज़राइल की रणनीति पर प्रभाव डाला था। कई मामलों में इज़राइल को अपने सैन्य अभियान सीमित करने पड़े, जिससे उसे निर्णायक जीत हासिल नहीं हो सकी। हिज़बुल्लाह अभी भी बड़ा खतरा युद्धविराम के बावजूद लेबनान में हिज़बुल्लाह की स्थिति मजबूत बनी हुई है। संगठन ड्रोन और रॉकेट हमलों की क्षमता रखता है, जिससे इज़राइल की सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। नेतन्याहू का बयान: शांति और युद्ध दोनों तैयार युद्धविराम के बाद नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल ने अमेरिका के अनुरोध पर समझौता किया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सेना फिर से कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने कहा: “हमारे एक हाथ में हथियार है, और दूसरा हाथ शांति के लिए बढ़ा हुआ है।” स्थिति अभी भी नाजुक हालांकि युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी है और क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में हालात फिर बदल सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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