International Politics

Iran Israel conflict escalation with reported airstrike targeting Ali Larijani amid rising Middle East tensions
ईरान-इजरायल टकराव तेज: अली लारिजानी पर एयरस्ट्राइक का दावा, क्षेत्र में बढ़ा तनाव

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष नेता अली लारिजानी को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि इस हमले में लारिजानी की स्थिति- मृत्यु या घायल होने- को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और ईरान की ओर से भी चुप्पी बनी हुई है।   IDF का बड़ा ऑपरेशन, शीर्ष नेतृत्व निशाने पर रिपोर्ट्स के अनुसार, Israel Defense Forces ने इस एयरस्ट्राइक में न सिर्फ लारिजानी, बल्कि बासिज बल के एक वरिष्ठ कमांडर को भी निशाना बनाया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है।   हमले से पहले लारिजानी का तीखा बयान एयरस्ट्राइक से ठीक एक दिन पहले अली लारिजानी ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने वैश्विक मुस्लिम समुदाय और इस्लामी देशों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि: ईरान को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला   अधिकांश मुस्लिम देशों ने केवल बयानबाजी की, ठोस समर्थन नहीं दिया   अमेरिका-इजरायल पर गंभीर आरोप अपने पत्र में लारिजानी ने: अमेरिका को “बड़ा शैतान” और   इजरायल को “छोटा शैतान” बताया   उन्होंने आरोप लगाया कि: ईरान पर हमलों में नागरिकों और सैन्य अधिकारियों की मौत हुई   इसके बावजूद ईरान ने “दृढ़ इच्छाशक्ति” के साथ जवाब दिया   इस्लामी देशों पर उठाए सवाल लारिजानी ने मुस्लिम देशों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा: क्या वे निष्पक्ष रहेंगे या किसी पक्ष का समर्थन करेंगे?   जिन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, वहां से ईरान पर हमले हो रहे हैं उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ईरान चुप बैठा रहे, जबकि उसके खिलाफ हमले जारी हैं।   एकता की अपील और क्षेत्रीय संदेश अपने पत्र के अंत में लारिजानी ने इस्लामी देशों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि: अमेरिका भरोसेमंद नहीं है   इजरायल क्षेत्र का दुश्मन है   यदि मुस्लिम देश एकजुट हों, तो सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है क्या बढ़ेगा टकराव? इस घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीर्ष नेताओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ती हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Rising Iran Israel conflict raises fears over Hormuz Strait oil supply
Iran-US-Israel War: ‘हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं जाएगा’, ईरान की चेतावनी; रूस ने भी जताई चिंता

  मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। Iran और Israel के बीच चल रहे संघर्ष का 11वां दिन है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है, जबकि इस युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस बीच Iran ने एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी है कि अगर तनाव इसी तरह जारी रहा तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति पूरी तरह रोक दी जाएगी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि “हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं जाने दिया जाएगा।”   तेहरान में धमाके, ईरान का जवाबी हमला रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल की ओर मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह हमला उस समय हुआ जब हाल ही में देश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की खबर सामने आई। वह पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे हैं। दूसरी ओर इजराइली सेना ने कहा कि उसने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए हैं। इनमें मिसाइल लॉन्च साइट्स और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कमांड सेंटर शामिल बताए गए हैं।   लेबनान और कतर तक पहुंचा तनाव संघर्ष का असर अब पड़ोसी देशों तक भी फैलता दिख रहा है। Lebanon की राजधानी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है, जहां इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर हवाई हमले किए। इन इलाकों को Hezbollah से जुड़े ठिकानों के रूप में देखा जाता है। वहीं Qatar की राजधानी दोहा में भी धमाकों की खबरें सामने आईं। कतर के अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी और तस्वीरें फैलाने के आरोप में 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch ने आरोप लगाया है कि दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में इजराइल द्वारा व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जाता है।   वैश्विक बाजारों पर असर इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। वहीं यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते एशिया और यूरोप के कई प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है।   खाड़ी देशों में भी बढ़ी सतर्कता इस संघर्ष के बीच Saudi Arabia ने बताया कि उसने शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को मार गिराया। वहीं Bahrain ने भी ईरानी हमलों के बाद अपने ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है।   ट्रंप-पुतिन की बातचीत इस बीच युद्ध को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। Donald Trump और Vladimir Putin के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। रूस की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए कुछ संभावित प्रस्तावों पर चर्चा की गई और साथ ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते ऊर्जा संकट को लेकर भी चेतावनी दी गई। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में इस संघर्ष का कोई राजनीतिक या कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
India criticizes Pakistan at United Nations Security Council over Afghanistan airstrikes and terrorism
UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, अफगानिस्तान पर हमलों और आतंकवाद को लेकर घेरा

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई अहम बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। भारत ने कहा कि रमजान जैसे पवित्र महीने में ऐसे हमले करना और साथ ही इस्लामी एकजुटता की बातें करना गंभीर पाखंड है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि P. Harish ने बैठक में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की बात करने वाले देश अगर रमजान के दौरान नागरिकों पर हवाई हमले करते हैं, तो यह दोहरे मानदंड को दर्शाता है। उन्होंने बिना सीधे नाम लिए स्पष्ट संकेत दिया कि भारत की टिप्पणी Pakistan की कार्रवाई की ओर है।   नागरिकों की मौत पर जताई कड़ी चिंता भारत ने कहा कि अफगानिस्तान में हालिया हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 6 मार्च 2026 तक करीब 185 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। भारत ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, United Nations चार्टर और किसी भी देश की संप्रभुता के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन बताया।   आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप अपने संबोधन में P. Harish ने कहा कि आतंकवाद आज भी वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देश आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक हथियार के रूप में करते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंकवादी संगठनों जैसे ISIS, Al-Qaeda, Lashkar-e-Taiba और Jaish-e-Mohammed के साथ-साथ इनके सहयोगी और प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की जरूरत है। भारत ने हाल ही में हुए एक आतंकी हमले का भी जिक्र किया, जिसमें The Resistance Front ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में धार्मिक आधार पर हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।   अफगानिस्तान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता इस बैठक में अफगानिस्तान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों ने भी चिंता जताई। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप विशेष प्रतिनिधि Georgette Gagnon ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव का असर अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सीमा बंद होने के कारण अफगानिस्तान के व्यापार पर भारी असर पड़ा है। फिलहाल ईरान के रास्ते व्यापार जारी है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते युद्ध और अस्थिरता के कारण वह भी प्रभावित हो रहा है। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगी हैं और पहले से कमजोर अफगान अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के अनुसार, अफगानिस्तान की दो प्रमुख सीमाओं पर बढ़ती अस्थिरता पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Iran President Masoud Pezeshkian addressing the nation amid Middle East tension and announcing halt on attacks against neighbors.
ईरान का बड़ा ऐलान: पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का फैसला, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने मांगी माफी

  मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरान की नई रणनीति मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव का संकेत दिया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने घोषणा की है कि अब ईरान किसी भी पड़ोसी देश पर हमला नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी देश की जमीन से ईरान पर हमला किया गया, तो तेहरान जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।   “ईरान किसी के सामने सरेंडर नहीं करेगा” अपने संबोधन में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने साफ कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि देश न तो Israel और न ही United States के सामने आत्मसमर्पण करेगा। उनके मुताबिक, ईरानी जनता और सरकार अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।   पड़ोसी देशों से जताया खेद राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपने बयान में पड़ोसी देशों को लेकर नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान जिन पड़ोसी देशों को हमलों का सामना करना पड़ा, उसके लिए उन्हें खेद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान की तरफ से अब ऐसे हमले नहीं किए जाएंगे और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।   माफी के साथ रखी अहम शर्त हालांकि इस माफी के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि किसी पड़ोसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा और जवाबी कार्रवाई करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ईरान की नई सुरक्षा नीति का संकेत हो सकता है, जिसमें वह सीधे टकराव से बचते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।   खामेनेई की मौत से बढ़ा तनाव हाल के सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे मध्य पूर्व में राजनीतिक और सैन्य तनाव और बढ़ गया है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर सत्ता संतुलन और आगे की रणनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।   होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता इस संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां तनाव और बढ़ता है या मार्ग बंद होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।   क्षेत्रीय शांति की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा बयान विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान का यह बयान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
America praises India for continuing Russian oil imports amid global sanctions
रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारत की सराहना की, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा– जिम्मेदार भागीदार

  रूस पर लगे प्रतिबंधों और ईरान युद्ध के बीच भी भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले को लेकर अमेरिका की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने भारत को एक जिम्मेदार और भरोसेमंद भागीदार बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित और जिम्मेदार रवैया अपनाया है। अमेरिका का मानना है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को समझते हुए अपने फैसले लिए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई पश्चिमी देशों ने Russia के तेल पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना जारी रखा, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना बेहद जरूरी है। इसलिए भारत के फैसलों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। वैश्विक स्तर पर चल रहे Iran–Israel Conflict और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे में भारत द्वारा विभिन्न देशों से तेल आयात कर आपूर्ति संतुलित रखना अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने रूस से तेल खरीदते समय वैश्विक नियमों और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखा है, जिसकी वजह से अमेरिका ने भी भारत की नीति की सराहना की है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0