नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली कैपिटल्स ने रविवार को दूसरे मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स को 5 विकेट से हरा दिया। नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में राजस्थान ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 193 रन बनाए। दिल्ली ने 194 रन का टारगेट 19.2 ओवर में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया। यह राजस्थान की लगातार तीसरी हार रही। इस हार के बाद राजस्थान के प्लेऑफ में पहुंचने का इंतजार लंबा हो गया। वहीं, दिल्ली की उम्मीद अभी कायम है। राहुल-पोरेल के बीच 105 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप अभिषेक पोरेल और केएल राहुल ने दिल्ली को तेज शुरुआत दिलाई। राहुल ने 42 गेंदों पर 56 और पोरेल ने 31 गेंदों में 51 रन बनाए। दोनों ने पहले विकेट के लिए 105 रन जोड़कर मैच दिल्ली की पकड़ में ला दिया। मिडिल ओवर्स में जोफ्रा आर्चर और ब्रिजेश शर्मा ने विकेट निकालकर राजस्थान की वापसी कराने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली के कप्तान अक्षर पटेल ने 18 गेंदों में नाबाद 34 रन बनाकर टीम को संभाले रखा। आखिर में आशुतोष शर्मा ने सिर्फ 5 गेंदों में 18 रन ठोकते हुए चौका और छक्का लगाकर दिल्ली को जीत दिला दी। राजस्थान के लिए जोफ्रा आर्चर और बृजेश शर्मा ने 2-2 विकेट लिए। दासुन शनाका को 1 विकेट मिला। जुरेल-पराग के अर्धशतक इससे पहले राजस्थान के लिए ध्रुव जुरेल ने सबसे ज्यादा 53 रन बनाए, जबकि कप्तान रियान पराग ने 26 गेंदों में 51 रन की विस्फोटक पारी खेली। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने भी 21 गेंदों पर 46 रन बनाए। राजस्थान ने 14 ओवर तक मजबूत स्थिति बना ली थी, लेकिन डेथ ओवरों में लगातार विकेट गिरने से टीम 200 रन का आंकड़ा नहीं छू सकी। दिल्ली के लिए मिचेल स्टार्क ने 4 विकेट झटके। लुंगी एनगिडी और माधव तिवारी ने 2-2 विकेट लिए।
आईपीएल 2026 के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में Kolkata Knight Riders (KKR) ने Lucknow Super Giants (LSG) को सुपर ओवर में हराकर यादगार जीत दर्ज की। मैच का नतीजा आखिरी गेंद तक टलता रहा, लेकिन अंततः पावर हिटर Rinku Singh ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाई। मैच का पूरा रोमांच 156 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी लखनऊ की शुरुआत कमजोर रही। कप्तान Rishabh Pant ने 42 रनों की अहम पारी खेली, जबकि Aiden Markram ने 31 रन जोड़े। बावजूद इसके टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। आखिरी गेंद पर 7 रन की जरूरत थी, तब Mohammed Shami ने शानदार छक्का जड़कर मैच को टाई करा दिया, जिससे मुकाबला सुपर ओवर में पहुंच गया। सुपर ओवर में पलटा मैच सुपर ओवर में KKR की ओर से Sunil Narine ने शानदार गेंदबाजी की। पहली ही गेंद पर उन्होंने Nicholas Pooran को बोल्ड कर दिया। इसके बाद मार्कराम भी बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में कैच आउट हो गए। लखनऊ सिर्फ एक रन ही बना सकी, जिससे KKR को जीत के लिए 2 रन का आसान लक्ष्य मिला। जवाब में रिंकू सिंह ने पहली ही गेंद पर चौका लगाकर मैच खत्म कर दिया। रिंकू सिंह की तूफानी पारी KKR की पारी में रिंकू सिंह ने 51 गेंदों पर नाबाद 83 रन बनाए। एक समय टीम 93/7 के स्कोर पर संघर्ष कर रही थी, लेकिन रिंकू की जुझारू पारी ने टीम को 155/7 तक पहुंचाया। मोहसिन खान का शानदार स्पेल LSG के तेज गेंदबाज Mohsin Khan ने 5/23 का शानदार प्रदर्शन किया और KKR की बल्लेबाजी को झकझोर दिया। उन्होंने Ajinkya Rahane और Cameron Green जैसे बड़े विकेट चटकाए। गेंदबाजी में KKR का योगदान KKR की ओर से Varun Chakravarthy और Vaibhav Arora ने 2-2 विकेट लिए, जबकि Kartik Tyagi ने दबाव भरे ओवर में वापसी कर मैच को टाई कराया।
आईपीएल मुकाबले में Mumbai Indians ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए Gujarat Titans को 99 रनों से करारी शिकस्त दी। मैच के बाद गुजरात के कप्तान Shubman Gill ने हार की बड़ी वजह टीम की कमजोर गेंदबाजी, खासकर मिडिल ओवर्स में लुटे रन को बताया। तिलक वर्मा का तूफानी शतक, मुंबई ने खड़ा किया बड़ा स्कोर मुंबई इंडियंस की ओर से Tilak Varma ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 45 गेंदों में नाबाद 101 रन ठोक दिए। उनकी पारी में आठ चौके और सात छक्के शामिल रहे। उन्होंने Hardik Pandya (15 रन) के साथ पांचवें विकेट के लिए 81 रन और Naman Dhir (45 रन) के साथ चौथे विकेट के लिए 52 रन की अहम साझेदारी निभाई। इस दमदार प्रदर्शन के दम पर मुंबई ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 199 रन बनाए। 100 रन पर ढही गुजरात की बल्लेबाजी लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी और नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। पूरी टीम 15.5 ओवर में सिर्फ 100 रन पर सिमट गई। मुंबई के गेंदबाजों में Ashwani Kumar ने 4 विकेट, Allah Ghazanfar ने 2 विकेट और Mitchell Santner ने भी 2 विकेट लेकर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। हार के बाद क्या बोले शुभमन गिल मैच के बाद Shubman Gill ने साफ कहा कि उनकी टीम ने मिडिल ओवर्स में जरूरत से ज्यादा रन दे दिए, जो मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने माना कि इस पिच पर 160-170 रन का स्कोर पर्याप्त हो सकता था, लेकिन खराब लेंथ और अस्थिर गेंदबाजी के कारण विपक्ष बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल रहा। गिल ने आगे कहा कि टीम को अपनी गेंदबाजी रणनीति में सुधार करना होगा, खासकर सही लेंथ पर लगातार गेंद डालने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बल्लेबाजी में भी सुधार की गुंजाइश थी, खासकर ओस के बावजूद टीम लक्ष्य का पीछा करने में नाकाम रही। कप्तान ने इसे “झटका” बताया, लेकिन भरोसा जताया कि आने वाले मुकाबलों में टीम वापसी करेगी, भले ही मैच विरोधी टीमों के घरेलू मैदान पर क्यों न हों।
आईपीएल 2026 के 14वें मुकाबले में Delhi Capitals और Gujarat Titans आमने-सामने होंगे, लेकिन इस हाई-वोल्टेज मैच से पहले सबसे बड़ा सवाल मौसम को लेकर है। हाल ही में बारिश के कारण कई मुकाबले प्रभावित हुए हैं, ऐसे में फैंस की नजरें अब दिल्ली के आसमान पर टिकी हैं। यह मुकाबला Arun Jaitley Stadium में खेला जाएगा, जहां बीती रात तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार दोपहर 1 बजे के आसपास बारिश की संभावना करीब 47% तक पहुंच सकती है, खासकर 1 से 3 बजे के बीच हल्की से मध्यम बारिश की आशंका जताई गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि शाम के समय मौसम के साफ रहने की उम्मीद है। मैच के दौरान बारिश की संभावना काफी कम बताई जा रही है, लेकिन आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। तापमान 17 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जिससे खिलाड़ियों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। दिल्ली की नजरें जीत की हैट्रिक पर Delhi Capitals इस मैच में जीत की हैट्रिक लगाने के इरादे से उतरेगी। टीम के लिए समीर रिजवी शानदार फॉर्म में हैं, जबकि KL Rahul और नीतीश राणा की फॉर्म चिंता का विषय बनी हुई है। गेंदबाजी में मुकेश कुमार और कुलदीप यादव ने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। गुजरात को पहली जीत की तलाश दूसरी ओर Gujarat Titans इस सीजन में अब तक जीत का खाता नहीं खोल पाई है। टीम को अपने कप्तान Shubman Gill की वापसी से मजबूती मिलने की उम्मीद है। साई सुदर्शन ने बल्ले से प्रभावित किया है, लेकिन बाकी बल्लेबाजों का साथ नहीं मिल पाया। गेंदबाजी में राशिद खान और मोहम्मद सिराज जैसे बड़े नाम अब तक उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं, जिससे टीम दबाव में है। क्या पूरा मैच होगा? मौसम के मौजूदा पूर्वानुमान को देखें तो फैंस को पूरा 20 ओवर का मैच देखने को मिल सकता है। हालांकि, मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए हल्की देरी या बाधा से इनकार नहीं किया जा सकता।
नई दिल्ली,एजेंसियां। IPL के पांचवें मुकाबले में आज Lucknow Super Giants (LSG) और Delhi Capitals (DC) आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में शाम 7:30 बजे खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह मैच बेहद अहम है, क्योंकि पिछले सीजन दोनों ही प्लेऑफ में जगह बनाने से चूक गई थीं। LSG की कप्तानी ऋषभ पंत कर रहे हैं, जबकि DC की कमान अक्षर पटेल के हाथों में है। मैच आज लखनऊ में 7:30 PM IST पर खेला जाएगा। LSG की ताकत: विस्फोटक बैटिंग और तेज गेंदबाजी लखनऊ की टीम इस बार काफी मजबूत नजर आ रही है। टॉप ऑर्डर में एडेन मार्करम, निकोलस पूरन और मिचेल मार्श जैसे मैच विनर मौजूद हैं। वहीं गेंदबाजी में मोहम्मद शमी, मयंक यादव, एनरिक नॉर्टजे और आवेश खान जैसे तेज गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों के लिए चुनौती बन सकते हैं। खासकर होम ग्राउंड का फायदा LSG के पक्ष में जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लखनऊ की पेस बैटरी मैच का रुख बदल सकती है। DC की ताकत: संतुलित बैटिंग और मजबूत स्पिन अटैक दिल्ली कैपिटल्स की टीम कागज पर ज्यादा संतुलित दिखाई देती है। केएल राहुल, पृथ्वी शॉ और पथुम निसांका टॉप ऑर्डर को मजबूती देते हैं, जबकि डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स और नीतीश राणा मिडिल ऑर्डर में गहराई लाते हैं। हालांकि मिचेल स्टार्क की गैरमौजूदगी तेज गेंदबाजी को थोड़ा कमजोर करती है, लेकिन कुलदीप यादव और अक्षर पटेल की स्पिन जोड़ी लखनऊ की पिच पर असरदार साबित हो सकती है। Reddit और प्रीव्यू चर्चाओं में भी DC को “more balanced side” कहा जा रहा है। हेड-टू-हेड और पिच रिपोर्ट क्या कहती है? अब तक दोनों टीमें 7 बार भिड़ चुकी हैं, जिसमें दिल्ली ने 4 और लखनऊ ने 3 मैच जीते हैं। यानी रिकॉर्ड थोड़ा DC के पक्ष में है। वहीं इकाना की पिच को लेकर रिपोर्ट्स कहती हैं कि यहां शुरुआत में गेंदबाजों को मदद मिल सकती है, लेकिन बाद में बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ड्यू फैक्टर की वजह से टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है। हालिया प्रीव्यू के अनुसार 175+ स्कोर प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। किसका पलड़ा भारी? अगर होम एडवांटेज और पेस अटैक को देखें तो LSG थोड़ी आगे दिखती है। लेकिन अगर संतुलन और हेड-टू-हेड रिकॉर्ड देखें तो DC भी कम नहीं। कुल मिलाकर मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है। मेरा मैच कॉल: LSG को हल्का edge, लेकिन यह मैच आखिरी ओवर तक जा सकता है।
IPL 2026 का रोमांच अपने चरम पर है और आज का मुकाबला बेहद खास होने वाला है। Sanju Samson पहली बार Chennai Super Kings के लिए मैदान पर उतरेंगे-वो भी अपनी पुरानी टीम Rajasthan Royals के खिलाफ। भावनात्मक होगा मुकाबला संजू सैमसन के लिए यह मैच सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पल भी है। उन्होंने 11 साल तक राजस्थान रॉयल्स का प्रतिनिधित्व किया और टीम के प्रमुख बल्लेबाज रहे। अब वही खिलाड़ी चेन्नई की जर्सी में अपने पुराने साथियों के खिलाफ खेलते नजर आएंगे। वहीं, Ravindra Jadeja भी इस बार राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बनकर अपनी पूर्व टीम के खिलाफ उतरेंगे, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। नई कप्तानी की शुरुआत इस मैच में Riyan Parag राजस्थान रॉयल्स के फुल-टाइम कप्तान के रूप में अपना पहला IPL मैच खेलेंगे। दूसरी ओर, चेन्नई की कप्तानी Ruturaj Gaikwad के हाथों में है, जिनसे टीम को मजबूत शुरुआत की उम्मीद होगी। धोनी नहीं खेलेंगे MS Dhoni चोट के कारण शुरुआती मैचों में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे चेन्नई की टीम संयोजन में बदलाव देखने को मिल सकता है। मैच से जुड़ी जरूरी जानकारी मैच: राजस्थान रॉयल्स vs चेन्नई सुपर किंग्स तारीख: 30 मार्च 2026 स्थान: गुवाहाटी, बारसापारा क्रिकेट स्टेडियम समय: शाम 7:30 बजे (टॉस 7:00 बजे) लाइव कहां देखें? टीवी पर: स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क ऑनलाइन स्ट्रीमिंग: JioHotstar ऐप और वेबसाइट
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।